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Shalat sunnah fajar dua rakaat, lebih baik daripada dunia dan seluruh isinya
Imam Bukhari : 1092حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنِي عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ فَإِنْ كُنْتُ مُسْتَيْقِظَةً حَدَّثَنِي وَإِلَّا اضْطَجَعَقُلْتُ لِسُفْيَانَ فَإِنَّ بَعْضَهُمْ يَرْوِيهِ رَكْعَتَيْ الْفَجْرِ قَالَ سُفْيَانُ هُوَ ذَاكَ
हमरा सब के कहल गेल अछि [अली बिन अब्दुल्लाह] हमरा सब के कहने छथि [सुफयान] कहलनि, [अबू अन-नदीर] हमरा [अबू सलामाह] के [ऐसिया रदलियाहु अनहा] स कहने छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दू रकाअत के नमाज केलनि। जँ हम जागल रहितहुँ तँ गप्प-सप्प करबाक लेल बजबैत छलाह आ जँ नहि तँ ओ लेट जाइत छलाह' । हम -अली बिन अब्दुल्लाह- सुफियान स पूछलनि: 'किछु लोक बतबैत छथि जे जाहि नमाज पर चर्चा भ रहल अछि ओ फजर के दू रकाअत अछि?' सुफियन कहलकै: 'हँ ठीके'।