हदीस
Turunnya QS. Al-An’aam: 52 setelah orang-orang musyrik berkata kepada Rasulullah, usirlah orang-orang yang tidak akan berani melawan kami!
Imam Ibnu Majah : 4117حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ الْعَنْقَزِيُّ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ نَصْرٍ عَنْ السُّدِّيِّ عَنْ أَبِي سَعْدٍ الْأَزْدِيِّ وَكَانَ قَارِئَ الْأَزْدِ عَنْ أَبِي الْكَنُودِ عَنْ خَبَّابٍفِي قَوْلِهِ تَعَالَى{ وَلَا تَطْرُدْ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ إِلَى قَوْلِهِ فَتَكُونَ مِنْ الظَّالِمِينَ }قَالَ جَاءَ الْأَقْرَعُ بْنُ حَابِسٍ التَّمِيمِيُّ وَعُيَيْنَةُ بْنُ حِصْنٍ الْفَزَارِيُّ فَوَجَدَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَعَ صُهَيْبٍ وَبِلَالٍ وَعَمَّارٍ وَخَبَّابٍ قَاعِدًا فِي نَاسٍ مِنْ الضُّعَفَاءِ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ فَلَمَّا رَأَوْهُمْ حَوْلَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَقَرُوهُمْ فَأَتَوْهُ فَخَلَوْا بِهِ وَقَالُوا إِنَّا نُرِيدُ أَنْ تَجْعَلَ لَنَا مِنْكَ مَجْلِسًا تَعْرِفُ لَنَا بِهِ الْعَرَبُ فَضْلَنَا فَإِنَّ وُفُودَ الْعَرَبِ تَأْتِيكَ فَنَسْتَحْيِي أَنْ تَرَانَا الْعَرَبُ مَعَ هَذِهِ الْأَعْبُدِ فَإِذَا نَحْنُ جِئْنَاكَ فَأَقِمْهُمْ عَنْكَ فَإِذَا نَحْنُ فَرَغْنَا فَاقْعُدْ مَعَهُمْ إِنْ شِئْتَ قَالَ نَعَمْ قَالُوا فَاكْتُبْ لَنَا عَلَيْكَ كِتَابًا قَالَ فَدَعَا بِصَحِيفَةٍ وَدَعَا عَلِيًّا لِيَكْتُبَ وَنَحْنُ قُعُودٌ فِي نَاحِيَةٍ فَنَزَلَ جِبْرَائِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام فَقَالَ{ وَلَا تَطْرُدْ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِمْ مِنْ شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِمْ مِنْ شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنْ الظَّالِمِينَ }ثُمَّ ذَكَرَ الْأَقْرَعَ بْنَ حَابِسٍ وَعُيَيْنَةَ بْنَ حِصْنٍ فَقَالَ{ وَكَذَلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لِيَقُولُوا أَهَؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِمْ مِنْ بَيْنِنَا أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ }ثُمَّ قَالَ{ وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَى نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ }قَالَ فَدَنَوْنَا مِنْهُ حَتَّى وَضَعْنَا رُكَبَنَا عَلَى رُكْبَتِهِ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَجْلِسُ مَعَنَا فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَقُومَ قَامَ وَتَرَكَنَا فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ وَاصْبِرْ نَفْسَكَ مَعَ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ وَلَا تَعْدُ عَيْنَاكَ عَنْهُمْ }وَلَا تُجَالِسْ الْأَشْرَافَ{ تُرِيدُ زِينَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَلَا تُطِعْ مَنْ أَغْفَلْنَا قَلْبَهُ عَنْ ذِكْرِنَا }يَعْنِي عُيَيْنَةَ وَالْأَقْرَعَ{ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ وَكَانَ أَمْرُهُ فُرُطًا }قَالَ هَلَاكًا قَالَ أَمْرُ عُيَيْنَةَ وَالْأَقْرَعِ ثُمَّ ضَرَبَ لَهُمْ مَثَلَ الرَّجُلَيْنِ وَمَثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَاقَالَ خَبَّابٌ فَكُنَّا نَقْعُدُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا بَلَغْنَا السَّاعَةَ الَّتِي يَقُومُ فِيهَا قُمْنَا وَتَرَكْنَاهُ حَتَّى يَقُومَ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन मुहम्मद बिन याह्या बिन सईद अल कत्थान] हमनी के बतवले बाड़े ['अमरू बिन मुहम्मद अल 'अनकाजी] हमनी के [असबथ बिन नशर] से [अस सुद्दी] से [अबू स'द अल अजदी] आजाद के लोग के किरा' विशेषज्ञ में से एक से, [अबू अल कानुद] से [खब्बाब] से अल्लाह त'ला के शब्द के बारे में बतवले बाड़े: '-अंद।' सबेरे आ साँझ के अपना रब के पुकार करे वाला लोग के ना भगाईं-' जब तक कि ऊ ना कहसु, '-ताकि तू अन्यायी लोग में से हो जाइब-' -Qs. अल अन'आम : 52- के बा। खब्बाब कहले कि अल अकरा बिन हबीस तमीमी में आ उयैनह बिन हिश्न अल फजारी अइले आ दुनु जने के कमजोर मुसलमानन में से शुहैब, बिलाल, अम्मार आ खब्बाब का साथे मिल के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बइठक में बइठल मिलल. जब दुनु जाना देखले कि उ लोग नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आसपास बाड़े त उ लोग उनुका लगे आके उनुकर आलोचना कईले अवुरी कहले कि, 'वास्तव में हमनी के चाहतानी कि आप हमनी खाती एगो खास मजलिस बनाई, ताकि अरब के पता चल जाए कि हमनी के जवन श्रेष्ठता बा, काहेंकी अरब के प्रतिनिधिमंडल आपके लगे आई, अवुरी उ लोग शर्मिंदा होईहे, जदी अरब के पता चल जाई कि उ लोग के नौकर के संगे मजलिस होखता। एह से जब हम रउरा लगे आईब त फेर ओह लोग के हमनी से भगा दीं, जब हमनी के खतम हो जाईं जा त रउरा मन मुताबिक ओह लोग से मुलाकात हो जाई'. ऊ जवाब दिहले- 'हँ'। उ लोग कहले कि, 'हमनी के खिलाफ आपन वाचा लिखऽ'। कथावाचक कहले, 'तब उ कागज के चादर मंगले अवुरी अली से कहले कि लिखे, एने हम मस्जिद के कोना में बईठ गईनी। त जिब्रिल अलैहि सलाम आके अल्लाह के वचन के संप्रेषित करत कहले: '-और ओह लोग के बाहर मत निकालीं जे सबेरे-शाम अपना रब के पुकार करेला, जबकि उ लोग उनकर प्रसन्नता के इच्छा राखेला, रउआ ओह लोग के कर्म के तनिको जिम्मेदारी ना उठावेनी आ उ लोग अपना कर्म के जरा भी जिम्मेदारी ना उठावेनी, जवना के चलते रउआ -हक बा- ओह लोग के बाहर निकाले के, -ताकि रउआ ओह लोग में शामिल होखब गलत करे वाला लोग-' -प्रश्न। अल अन'आम के नाम से जानल जाला; 52- के बा। तब जिब्रिल अल अकरा’ बिन हबीस आ उयैनह बिन हिश्न के जिक्र करत कहले कि: '-आ एह तरह से हमनी के ओहमें से कुछ लोग के - अमीर लोग के - ओहमें से कुछ लोग के - गरीबन के साथे परखले बानी जा, ताकि - अमीर लोग - कहे कि 'का ई हमनी में से अइसन लोग हवें जिनका पर अल्लाह कृपा कइले बाड़न?' -अल्लाह कहत बाड़े-: 'का अल्लाह ओह लोग के बारे में बेहतर नइखन जानत जे -उनकर- शुक्रगुजार बाड़े?' क्यूएस अल अन'आम के बा; 63. तब ऊ इहो कहले कि; 'जब हमनी के श्लोक पर विश्वास करे वाला लोग तोहरा लगे आवेला त कहऽ कि सलामुं अलैकुम।' तोहार प्रभु अपना पर करुणा के नियुक्ति कइले बाड़न, ...- ' -Qs. अल अन'आम के नाम से जानल जाला; 54- के बा। खबाब कहले कि, 'एकरा बाद हमनी के उनुका लगे अयीसन पहुंचनी कि हमनी के घुटना अवुरी उनुकर घुटना एक दूसरा के छू गईल, अवुरी ओ समय रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के संगे सभा में बईठल रहले, जब उ खड़ा होके हमनी के छोड़े वाला रहले, त अल्लाह से खुलासा कईले कि, '-आ उ लोग के संगे धैर्य राखी, जवन कि सबेरे अवुरी गोधूलि बेला अपना रब के खुशी के उम्मीद में पुकारतारे; आ तोहार आँख ओह लोग से मत मोड़ें...- ' -Qs. अल कहफ : 28- के बा। अर्थात, अमीर लोग के साथे पार्टी ना करीं - ओहमें से -। '-काहे कि- एह दुनिया के गहना के उम्मीद करीं; आ जेकरा दिल के हमनी के याद करे में कोताही कइले बानी जा, ओकर पालन मत करीं...- ' -Qs. अल कहफ: 28-, यानी 'उयैनह और अल अकरा' '-...साथे-साथे अपनी इच्छा के पालन करे के आ उहे स्थिति ह जवन सीमा के पार करेला- ' -Qs. अल कहफ : 28- के बा। खबाब कहले, 'उ त विनाश ह'। खबाब फेरु कहलसि कि ‘ई अल अकरा’ आ ‘उयैनह बात सचहूँ खराब बा. तब अल्लाह ओह लोग के दू गो आदमी आ दुनिया आ परलोक के जिनगी के उदाहरण बनवले'। खब्बाब कहले कि, 'त हमनी के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे एगो बैठक में बईठ गईनी, जब उनुका खड़ा होखे के समय आईल त हमनी के खड़ा होके उनुका के छोड़ देनी, ओकरा से पहिले कि उ खड़ा हो गईले'।