इमाम दरिमी : 141
أَخْبَرَنَا يُوسُفُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا أَزْهَرُ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ قَالَ مَا دَامَ عَلَى الْأَثَرِ فَهُوَ عَلَى الطَّرِيقِ
हमें बताया गया है कि [यूसुफ बिन मूसा] ने हमें [अजहर] [इब्न औन] से [इब्न सिरीन] से बताया है कि उन्होंने कहा; "जब तक कोई व्यक्ति अत्सर के रास्ते पर है, इसका मतलब है कि वह सही रास्ते पर है।"
इमाम दरिमी : 142
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ تَعَلَّمُوا الْعِلْمَ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ وَقَبْضُهُ أَنْ يَذْهَبَ أَهْلُهُ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَالتَّنَطُّعَ وَالتَّعَمُّقَ وَالْبِدَعَ وَعَلَيْكُمْ بِالْعَتِيقِ
हमें बताया है [अबू अल मुगीरा] ने हमें [अल औज़ाई] [याह्या बिन अबू कत्सिर] से [अबू क़िलाबा] से बताया है; [अब्दुल्ला बिन मसूद] रदअल्लाहु अन्हु ने कहा; "ज्ञान को रद्द किए जाने से पहले सीखो। और, ज्ञान विद्वानों की मृत्यु के माध्यम से रद्द किया जाता है। इसलिए, बिदअत, गपशप और अक्सर बातें बनाने और समस्याओं के जटिल होने तक सीमाओं से आगे बढ़ने के रवैये को छोड़ दो। और, किसी पुरानी चीज़, यानी सुन्नत और अत्सार (दोस्तों की बातें) को मज़बूती से पकड़ो।"
इमाम दरिमी : 143
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ وَأَبُو النُّعْمَانِ عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ قَالَ ابْنُ مَسْعُودٍ عَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ وَقَبْضُهُ أَنْ يُذْهَبَ بِأَصْحَابِهِ عَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي مَتَى يُفْتَقَرُ إِلَيْهِ أَوْ يُفْتَقَرُ إِلَى مَا عِنْدَهُ إِنَّكُمْ سَتَجِدُونَ أَقْوَامًا يَزْعُمُونَ أَنَّهُمْ يَدْعُونَكُمْ إِلَى كِتَابِ اللَّهِ وَقَدْ نَبَذُوهُ وَرَاءَ ظُهُورِهِمْ فَعَلَيْكُمْ بِالْعِلْمِ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّبَدُّعَ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّنَطُّعَ وَإِيَّاكُمْ وَالتَّعَمُّقَ وَعَلَيْكُمْ بِالْعَتِيقِ
[सुलेमान बिन हरब] और [अबू अन नुमान] ने हमें [हमद बिन ज़ैद] से [अयूब] से [अबू क़िलाबा] से बताया है, उन्होंने कहा; [इब्न मसूद] ने एक बार कहा था; "तुम्हें ज्ञान छीन लिए जाने से पहले सीखना चाहिए। और, ज्ञान विद्वानों की मृत्यु से छीन लिया जाता है। तुम्हें ज्ञान को एक रोज़ी के रूप में लेना चाहिए, क्योंकि तुम में से कोई नहीं जानता कि उसे कब इसकी ज़रूरत पड़ जाए। बेशक, तुम्हें एक समुदाय मिलेगा जो तुम्हें कुरान की ओर बुलाने का दावा करता है, लेकिन उन्होंने कुरान को अपनी पीठ पीछे रख दिया है (कुरान को छोड़ दिया है)। इसलिए, तुम सब ज्ञान से लैस हो जाओ। इनोवेशन, ज़बान से बहस करना और अक्सर हदें पार करने का रवैया छोड़ दो जब तक कि समस्या जटिल न हो जाए। और, सुन्नत और अत्सार को मज़बूती से थामे रहो।"
इमाम दरिमी : 144
أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ حَازِمٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ أَنَّ رَجُلًا يُقَالُ لَهُ صَبِيغٌ قَدِمَ الْمَدِينَةَ فَجَعَلَ يَسْأَلُ عَنْ مُتَشَابِهِ الْقُرْآنِ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِ عُمَرُ وَقَدْ أَعَدَّ لَهُ عَرَاجِينَ النَّخْلِ فَقَالَ مَنْ أَنْتَ قَالَ أَنَا عَبْدُ اللَّهِ صَبِيغٌ فَأَخَذَ عُمَرُ عُرْجُونًا مِنْ تِلْكَ الْعَرَاجِينِ فَضَرَبَهُ وَقَالَ أَنَا عَبْدُ اللَّهِ عُمَرُ فَجَعَلَ لَهُ ضَرْبًا حَتَّى دَمِيَ رَأْسُهُ فَقَالَ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ حَسْبُكَ قَدْ ذَهَبَ الَّذِي كُنْتُ أَجِدُ فِي رَأْسِي
हमें बताया है [अबू अन नुमान] ने हमें बताया है [हम्मद बिन ज़ैद] ने हमें [यज़ीद बिन हाज़िम] [सुलेमान बिन यासर] से बताया है: "शबीग नाम का एक व्यक्ति था जो मदीना शहर का दौरा करने आया था, उसने कुरान में मुतस्यबीह छंदों के बारे में पूछा, फिर उमर रदलिल्लाहु अन्हु ने (किसी को) उसे बुलाने के लिए भेजा, और उसने एक खजूर का तना तैयार किया था, फिर उसने पूछा: 'तुम कौन हो?' उसने उत्तर दिया: 'मैं अब्दुल्ला शबीग हूं' फिर [उमर] रदलिल्लाहु अन्हु ने खजूर का एक तना लिया और उस पर मारा और कहा: 'मैं अल्लाह का एक सेवक हूं जिसका नाम उमर है'।' उसके बाद, शबीग ने कहा: 'हे अमीरुल मोमिनीन, बस काफी है।
इमाम दरिमी : 145
أَخْبَرَنَا أَبُو الْوَلِيدِ الطَّيَالِسِيُّ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ وَيَزِيدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ الْقَاسِمِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ تَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ } فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا رَأَيْتُمْ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ فَاحْذَرُوهُمْ
हमें बताया है [अबू अल वालिद एट थयालिसी] ने हमें बताया है [हम्मद बिन सलामा] और [यज़ीद बिन इब्राहीम] [अब्दुल्ला बिन अबू अवलह] से [अल कासिम] से ['ऐस्या] रदलिल्लाहु अन्हा ने कहा; " रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आयत पढ़ी: "हुवल्लादज़ी `अंज़ला अलैकल किताबा मिन्हु `आयातुन मुहकमातुन हुन्ना उम्मुल किताबी वा उखरू मुतस्यबिहात" (वह वह है जिसने तुम्हारे लिए किताब (अल कुरान) भेजी है। इसकी (सामग्री) में मुहकमात आयतें हैं जो कुरान की मुख्य सामग्री हैं और जो अन्य (आयतें) मुतस्यबिहात हैं) -Qs. अली इमरान: 7-, फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि तुम उन लोगों को पाओ जो आयतों मुतस्यबिहात का पालन करते हैं, तो उनसे सावधान रहो"।
इमाम दरिमी : 146
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا حَفْصٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ قَالَ سُئِلَ عَبْدُ اللَّهِ عَنْ شَيْءٍ فَقَالَ إِنِّي لَأَكْرَهُ أَنْ أُحِلَّ لَكَ شَيْئًا حَرَّمَهُ اللَّهُ عَلَيْكَ أَوْ أُحَرِّمَ مَا أَحَلَّهُ اللَّهُ لَكَ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद] ने हमें [हफ़्श] को [अल अमासी] से [स्याक़िक] से बताया है उन्होंने कहा: "[अब्दुल्ला] से एक चीज़ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा: 'मुझे वास्तव में उस चीज़ को हलाल करने से नफ़रत है जिसे अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल कर दिया है, या उस चीज़ को हलाल कर दिया है जिसे अल्लाह सुभानल्लाहु वा तआला ने तुम्हारे लिए हलाल कर दिया है।"
इमाम दरिमी : 147
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ الْفَزَارِيِّ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ لَأَنْ أَرُدَّهُ بِعِيِّهِ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْ أَنْ أَتَكَلَّفَ لَهُ مَا لَا أَعْلَمُ
हमें [मुहम्मद बिन उयैनाह] ने [अबू इसहाक अल फज़ारी] से [इब्नु औन] से [इब्नु सिरिन] से [हुमैद बिन अब्दुर रहमान] तक बताया कि उन्होंने कहा: "मेरे लिए उस उत्तर के साथ उत्तर देना बेहतर है जो मुझे नहीं पता, बजाय इसके कि मैं खुद को उस चीज़ का उत्तर देने के लिए मजबूर करूं जो मुझे नहीं पता।"
इमाम दरिमी : 148
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ أَخْبَرَنِي ابْنُ عَجْلَانَ عَنْ نَافِعٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ صَبِيغًا الْعِرَاقِيَّ جَعَلَ يَسْأَلُ عَنْ أَشْيَاءَ مِنْ الْقُرْآنِ فِي أَجْنَادِ الْمُسْلِمِينَ حَتَّى قَدِمَ مِصْرَ فَبَعَثَ بِهِ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ فَلَمَّا أَتَاهُ الرَّسُولُ بِالْكِتَابِ فَقَرَأَهُ فَقَالَ أَيْنَ الرَّجُلُ قَالَ فِي الرَّحْلِ قَالَ عُمَرُ أَبْصِرْ أَيَكُونُ ذَهَبَ فَتُصِيبَكَ مِنْهُ الْعُقُوبَةُ الْمُوجِعَةُ فَأَتَاهُ بِهِ فَقَالَ عُمَرُ تَسْأَلُ مُحْدَثَةً وَأَرْسَلَ عُمَرُ إِلَى رَطَائِبَ مِنْ جَرِيدٍ فَضَرَبَهُ بِهَا حَتَّى تَرَكَ ظَهْرَهُ دَبِرَةً ثُمَّ تَرَكَهُ حَتَّى بَرَأَ ثُمَّ عَادَ لَهُ ثُمَّ تَرَكَهُ حَتَّى بَرَأَ فَدَعَا بِهِ لِيَعُودَ لَهُ قَالَ فَقَالَ صَبِيغٌ إِنْ كُنْتَ تُرِيدُ قَتْلِي فَاقْتُلْنِي قَتْلًا جَمِيلًا وَإِنْ كُنْتَ تُرِيدُ أَنْ تُدَاوِيَنِي فَقَدْ وَاللَّهِ بَرَأْتُ فَأَذِنَ لَهُ إِلَى أَرْضِهِ وَكَتَبَ إِلَى أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ أَنْ لَا يُجَالِسَهُ أَحَدٌ مِنْ الْمُسْلِمِينَ فَاشْتَدَّ ذَلِكَ عَلَى الرَّجُلِ فَكَتَبَ أَبُو مُوسَى إِلَى عُمَرَ أَنْ قَدْ حَسُنَتْ تَوْبَتُهُ فَكَتَبَ عُمَرُ أَنْ ائْذَنْ لِلنَّاسِ بِمُجَالَسَتِهِ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने मुझे बताया है [अल लैट्स] ने मुझे [इब्न अजलान] [नफी] -अब्दुल्ला के पुराने गुलाम- से बताया है, (उसने कहा): "शबीग अल इराकी ने मुस्लिम सैनिकों से कुरान के बारे में कई बातें (यानी मुतस्यबीह आयतें) पूछीं, जब तक कि वह मिस्र नहीं आ गया, फिर अम्र बिन अल अश रदलिल्लाहु अन्हु ने उन्हें उमर बिन खत्ताब रदलिल्लाहु अन्हु के पास भेजा। जब रसूल अम्र बिन अश ने उमर को चिट्ठी दी, और उमर ने उसे पढ़ा, तो उसने कहा: 'शबीग कहाँ है?' फिर उमर शबीग को खजूर के पत्ते के पास ले गया। उमर ने उस आदमी को खजूर के पत्तों से तब तक पीटा जब तक उसकी पीठ पर चोट नहीं लग गई। जब घाव ठीक हो गया, तो उमर ने उसे फिर मारा, और जब घाव ठीक होने लगा, तो उमर ने उसे फिर मारा। जब वह ठीक होने लगा, तो उमर ने उसे तुरंत अपने सामने बुलाया। फिर शबीग ने कहा: 'अगर तुम मुझे मारना चाहते हो, तो मुझे अच्छे तरीके से मारो, लेकिन अगर तुम मेरे साथ अच्छा बर्ताव करना चाहते हो तो अल्लाह की कसम मैं ठीक हो गया हूँ (कुरान में मुतशबीह आयतों पर सवाल मत उठाओ)। फिर उसने उसे अपने देश लौटने की इजाज़त दी और अबू मूसा अल 'अश'री को एक चिट्ठी भेजी जिसमें लिखा था: 'ताकि मुसलमानों में से कोई भी उसे दोस्त न बनाए'। इससे वह आदमी परेशान हो गया, फिर अबू मूसा अल 'अश'री रदियल्लाहु अन्हु ने उमर रदियल्लाहु अन्हु को एक चिट्ठी भेजी: 'उसकी तौबा सुधर गई है', फिर उमर रदियल्लाहु अन्हु ने जवाब में लिखा: 'उसे लोगों से मिलने-जुलने दो'।
इमाम दरिमी : 149
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ قَالَ سَمِعْتُ عَامِرًا يَقُولُ اسْتَفْتَى رَجُلٌ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ فَقَالَ يَا أَبَا الْمُنْذِرِ مَا تَقُولُ فِي كَذَا وَكَذَا قَالَ يَا بُنَيَّ أَكَانَ الَّذِي سَأَلْتَنِي عَنْهُ قَالَ لَا قَالَ أَمَّا لَا فَأَجِّلْنِي حَتَّى يَكُونَ فَنُعَالِجَ أَنْفُسَنَا حَتَّى نُخْبِرَكَ
हमें बताया है [अहमद बिन अब्दुल्लाह बिन यूनुस] ने हमें बताया है [ज़ुहैर] ने हमें बताया है [इस्माइल बिन अबू खालिद] उन्होंने कहा: "मैंने ['अमीर] को कहते सुना: 'किसी ने [उबै बिन का'ब] रदलिल्लाहु अन्हु से एक फतवा मांगा है, पूछ रहा है: 'ओ अबू अल मुंदज़िर, आप इस और इस बारे में क्या सोचते हैं?'। फिर उन्होंने उत्तर दिया: 'क्या आपने जो पूछा वह पहले ही हो चुका है?', उन्होंने उत्तर दिया: 'यह अभी तक नहीं हुआ है'। फिर उन्होंने फिर कहा: 'अगर यह नहीं हुआ है, तब तक प्रतीक्षा करें जब तक यह वास्तव में न हो, फिर हम कोशिश करेंगे और आपको बताएंगे'।
इमाम दरिमी : 150
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَمَّادٍ أَخْبَرَنَا أَبُو عَوَانَةَ فَأَخْبَرَنَا عَنْ فِرَاسٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ مَسْرُوقٍ قَالَ كُنْتُ أَمْشِي مَعَ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ فَقَالَ فَتًى مَا تَقُولُ يَا عَمَّاهُ فِي كَذَا وَكَذَا قَالَ يَا ابْنَ أَخِي أَكَانَ هَذَا قَالَ لَا قَالَ فَأَعْفِنَا حَتَّى يَكُونَ
हमें सूचित किया है [याह्या बिन हम्माद] ने हमें सूचित किया है [अबू अवाना] ने हमें [फ़िरस] से [अमीर] से [मसरुक] से सूचित किया है उन्होंने कहा: "मैं एक बार [उबै बिन काब] के साथ चल रहा था, फिर एक युवक ने पूछा: 'ओ चाचा, आप इस मामले के बारे में क्या सोचते हैं?' इसलिए तब तक प्रतीक्षा करें जब तक यह वास्तव में न हो जाए।"
इमाम दरिमी : 151
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ قَالَ كَانَ إِبْرَاهِيمُ إِذَا سُئِلَ عَنْ شَيْءٍ لَمْ يُجِبْ فِيهِ إِلَّا جَوَابَ الَّذِي سُئِلَ عَنْهُ
हमसे वर्णित है कि [अब्दुल्ला बिन सईद] ने हमें [अबू उसामा] से [अल `अमाश] से वर्णित किया कि उन्होंने कहा: "[इब्राहीम] से जब किसी चीज़ के बारे में पूछा जाता था, तो वह उसका उत्तर नहीं देते थे, सिवाय उस मामले के जो पूछा गया था।"
इमाम दरिमी : 152
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي أَيُّوبَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْرَؤُكُمْ عَلَى الْفُتْيَا أَجْرَؤُكُمْ عَلَى النَّارِ
हमें बताया गया है कि [इब्राहिम बिन मूसा] ने हमें [इब्न अल मुबारक] [सईद बिन अबू अय्यूब] से [उबैदुल्लाह बिन अबू जाफर] से बताया है कि उन्होंने कहा: "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: 'जो फतवा जारी करने में सबसे ज़्यादा जल्दबाज़ी करता है, वह सबसे जल्दी जहन्नम में जाएगा'"।
इमाम दरिमी : 153
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَنْ أَحْدَثَ رَأْيًا لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ وَلَمْ تَمْضِ بِهِ سُنَّةٌ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَدْرِ عَلَى مَا هُوَ مِنْهُ إِذَا لَقِيَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ
हमें बताया गया है कि [अबू अल मुगीरा] ने हमें [अल `औज़ाई] ['अब्दा बिन अबू लुबाबा] से [इब्न अब्बास] (अल्लाह उन पर प्रसन्न हो) से बताया है, उन्होंने कहा: "जो कोई भी अल्लाह की किताब और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत के अलावा अन्य राय बनाता है, वह नहीं जानता कि भविष्य में जब वह अल्लाह से मिलेगा तो उसकी स्थिति क्या होगी।"
इमाम दरिमी : 154
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ حَدَّثَنِي بَكْرُ بْنُ عَمْرٍو الْمَعَافِرِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أُفْتِيَ بِفُتْيَا مِنْ غَيْرِ ثَبْتٍ فَإِنَّمَا إِثْمُهُ عَلَى مَنْ أَفْتَاهُ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन यज़ीद] ने हमें बताया है [सईद बिन अबू अय्यूब] ने मुझे बताया है [बकर बिन 'अमरू अल मु'फिरी] [अबू उस्मान मुस्लिम बिन यासर] से, [अबू हुरैरा] रादिअल्लाहु अन्हु से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी बिना किसी आधार के फतवा देता है, पाप (फतवा को पूरा करने के परिणामस्वरूप) फतवा देने वाले द्वारा वहन किया जाता है।"
इमाम दरिमी : 155
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي سِنَانٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَنْ أَفْتَى بِفُتْيَا يُعَمَّى عَلَيْهَا فَإِثْمُهَا عَلَيْهِ
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन अहमद] ने हमें [सुफयान बिन उयैना] ने [अबू सिनान] से [सईद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] से बताया है (अल्लाह उन पर प्रसन्न हो), उन्होंने कहा: "जो कोई ऐसा फतवा देता है जिसका आधार अज्ञात है, उसका पाप उस पर स्थानांतरित कर दिया जाता है।"
इमाम दरिमी : 156
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ الْوَلِيدِ عَنْ وُهَيْبٍ عَنْ هِشَامٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ أَنَّهُ كَانَ لَا يُفْتِي فِي الْفَرْجِ بِشَيْءٍ فِيهِ اخْتِلَافٌ
"अल हुसैन बिन मंसूर ने हमें बताया है कि अल हुसैन बिन अल वालिद ने वुहैब से हिशाम से मुहम्मद बिन सिरिन से हमें बताया है कि उन्होंने प्राइवेट पार्ट्स के मुद्दे पर कभी कोई फतवा जारी नहीं किया, जिस पर अभी भी मतभेद है।"
इमाम दरिमी : 157
أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ رَاشِدٍ قَالَ سَأَلْتُ طَاوُسًا عَنْ مَسْأَلَةٍ فَقَالَ لِي كَانَ هَذَا قُلْتُ نَعَمْ قَالَ آللَّهِ قُلْتُ آللَّهِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ أَصْحَابَنَا أَخْبَرُونَا عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ أَنَّهُ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ لَا تَعْجَلُوا بِالْبَلَاءِ قَبْلَ نُزُولِهِ فَيُذْهَبُ بِكُمْ هَا هُنَا وَهَا هُنَا فَإِنَّكُمْ إِنْ لَمْ تَعْجَلُوا بِالْبَلَاءِ قَبْلَ نُزُولِهِ لَمْ يَنْفَكَّ الْمُسْلِمُونَ أَنْ يَكُونَ فِيهِمْ مَنْ إِذَا سُئِلَ سَدَّدَ وَإِذَا قَالَ وُفِّقَ
हमें बताया है [मुस्लिम बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [हम्मद बिन ज़ैद] ने हमें बताया है [अस शाल्ट बिन रसीद] उन्होंने कहा: "मैंने [थावस] से एक समस्या के बारे में पूछा, फिर उन्होंने पूछा: 'क्या समस्या हो गई है?' हमें [मुअज़ बिन जबल] रदिअल्लाहु अन्हु से बताया गया है, कि उन्होंने कहा: 'ऐ लोगों, इसके होने से पहले आपदा लाने में जल्दबाजी न करें, क्योंकि यह आपके अस्तित्व को यहाँ और वहाँ मिटा देगा। और यदि आप आपदा लाने में जल्दबाजी नहीं करते हैं, तो मुसलमान विभाजित नहीं होंगे, हमेशा ऐसे लोग होते हैं, जो यदि पूछा जाए, तो मार्गदर्शन देंगे, और यदि वे कहते हैं तो उन्हें मार्गदर्शन (अल्लाह से) मिलेगा'"।
इमाम दरिमी : 158
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْحَكَمِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْ رَجُلٍ أَدْرَكَهُ رَمَضَانَانِ فَقَالَ أَكَانَ أَوْ لَمْ يَكُنْ قَالَ لَمْ يَكُنْ بَعْدُ فَقَالَ اتْرُكْ بَلِيَّتَهُ حَتَّى تَنْزِلَ قَالَ فَدَلَسْنَا لَهُ رَجُلًا فَقَالَ قَدْ كَانَ فَقَالَ يُطْعِمُ عَنْ الْأَوَّلِ مِنْهُمَا ثَلَاثِينَ مِسْكِينًا لِكُلِّ يَوْمٍ مِسْكِينٌ
हमें बताया है [बिसिर बिन अल हकम] ने हमें [अब्दुल अज़ीज़ बिन मुहम्मद] ['अम्र बिन मैमुन] से [अपने पिता] से [इब्न अब्बास] रदीयल्लाहु अन्हु से बताया है: "मैंने एक बार उनसे (इब्न अब्बास रदीयल्लाहु अन्हु) किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पूछा जिसने रमज़ान के दो महीने पाए, तो उन्होंने कहा: 'क्या यह हुआ है या नहीं?', उन्होंने उत्तर दिया: 'यह नहीं हुआ है'। फिर उन्होंने कहा: 'इसे तब तक छोड़ दो जब तक यह न हो जाए', उन्होंने कहा: 'हमने किसी का नाटक करके इसे टाल दिया, फिर उसने कहा: 'यह पहले ही हो चुका है', तब (इब्न अब्बास) ने उत्तर दिया: 'उसे पहले (रमज़ान के महीने) तीस गरीब लोगों को खाना खिलाना चाहिए, हर दिन एक गरीब व्यक्ति'"।
इमाम दरिमी : 159
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عِمْرَانَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا الْعُمَرِيُّ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ جُرَيْجٍ قَالَ كُنْتُ أَجْلِسُ بِمَكَّةَ إِلَى ابْنِ عُمَرَ يَوْمًا وَإِلَى ابْنِ عَبَّاسٍ يَوْمًا فَمَا يَقُولُ ابْنُ عُمَرَ فِيمَا يُسْأَلُ لَا عِلْمَ لِي أَكْثَرُ مِمَّا يُفْتِي بِهِ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन इमरान] ने हमें बताया है [इसहाक बिन सुलेमान] ने हमें बताया है [अल 'उमरी] ['उबैद बिन जुराइज] से उन्होंने कहा: "अतीत में जब मैं मक्का में था तो मैं हमेशा एक दिन इब्न उमर (अल्लाह की शांति और आशीर्वाद उस पर हो) के पास बैठता था और दूसरे दिन इब्न अब्बास (अध्ययन) में। और [इब्नु उमर] ने जब और पूछा तो इस मामले पर फतवा देने के बजाय जवाब दिया: 'मुझे नहीं पता'।"
इमाम दरिमी : 160
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ تَعَلَّمُوا فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي مَتَى يُخْتَلُّ إِلَيْهِ
हमें [मुहम्मद बिन यूसुफ] ने [सुफयान] से [अल अमासी] से [अबू वईल] से सूचित किया है कि उन्होंने कहा: "[अब्दुल्ला] ने कहा: 'आपको सीखना चाहिए, क्योंकि आप में से एक को पता नहीं है कि वह कब विवाद में है'"।