इमाम दरिमी : 121
أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ يَزِيدَ الْمِنْقَرِيُّ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ جَاءَ رَجُلٌ يَوْمًا إِلَى ابْنِ عُمَرَ فَسَأَلَهُ عَنْ شَيْءٍ لَا أَدْرِي مَا هُوَ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عُمَرَ لَا تَسْأَلْ عَمَّا لَمْ يَكُنْ فَإِنِّي سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ يَلْعَنُ مَنْ سَأَلَ عَمَّا لَمْ يَكُنْ
हमें बताया है [मुस्लिम बिन इब्राहिम] ने हमें बताया है [अहमद बिन यज़ीद अल मनकारी] ने मुझे बताया है [मेरे पिता] उन्होंने कहा: "एक दिन कोई इब्न उमर रदियल्लाहु अन्हु के पास आया, उसने कुछ पूछा लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह क्या था। तब [इब्न उमर] रदियल्लाहु अन्हु ने कहा: "ऐसी चीज़ के बारे में मत पूछो जो हुई नहीं है, क्योंकि मैंने सुना है [उमर बिन खत्थाब] रदियल्लाहु अन्हु उन लोगों को लानत भेजते हैं जो ऐसी चीज़ के बारे में पूछते हैं जो हुई नहीं है।"
इमाम दरिमी : 122
أَخْبَرَنَا الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ بَلَغَنَا أَنَّ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ الْأَنْصَارِيَّ كَانَ يَقُولُ إِذَا سُئِلَ عَنْ الْأَمْرِ أَكَانَ هَذَا فَإِنْ قَالُوا نَعَمْ قَدْ كَانَ حَدَّثَ فِيهِ بِالَّذِي يَعْلَمُ وَالَّذِي يَرَى وَإِنْ قَالُوا لَمْ يَكُنْ قَالَ فَذَرُوهُ حَتَّى يَكُونَ
हमें [अल हकम बिन नफी] ने [स्यूएब] से [अज़ ज़ुहरी] से बताया है कि उन्होंने कहा: "[हमें खबर मिली है] कि [ज़ैद बिन साबित अल `अंसारी] अल्लाह उन पर प्रसन्न हो, जब उनसे कुछ पूछा जाता है तो वह हमेशा कहते हैं: 'क्या यह अभी तक हुआ है?', यदि वे जवाब देते हैं: 'हाँ', निश्चित रूप से वह प्रश्न का उत्तर उसी के अनुसार देते हैं जो वह जानते हैं, लेकिन यदि वे जवाब देते हैं: 'अभी तक नहीं हुआ है', तो उन्हें कहना चाहिए: 'जब तक यह वास्तव में न हो जाए तब तक प्रतीक्षा करें'।"
इमाम दरिमी : 123
أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا أَبُو هِشَامٍ الْمَخْزُومِيُّ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا دَاوُدُ عَنْ عَامِرٍ قَالَ سُئِلَ عَمَّارُ بْنُ يَاسِرٍ عَنْ مَسْأَلَةٍ فَقَالَ هَلْ كَانَ هَذَا بَعْدُ قَالُوا لَا قَالَ دَعُونَا حَتَّى تَكُونَ فَإِذَا كَانَتْ تَجَشَّمْنَاهَا لَكُمْ
हमें बताया है [इस्हाक बिन इब्राहिम] ने हमें बताया है [अबू हिशाम अल मखज़ुमी] ने हमें बताया है [वुहैब] ने हमें बताया है [दाऊद] ['अमीर] से उन्होंने कहा: "['अम्मार बिन यासिर] रदलिल्लाहु अन्हु से अगर किसी समस्या के बारे में पूछा जाए, तो उन्होंने कहा: 'क्या ऐसा हुआ है?, उन्होंने उत्तर दिया: 'अभी तक नहीं', उन्होंने कहा: 'इसे तब तक छोड़ दो जब तक यह वास्तव में न हो जाए। अगर ऐसा होता है, तो हम आपको जवाब देंगे। "
इमाम दरिमी : 124
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنْ طَاوُسٍ قَالَ قَالَ عُمَرُ عَلَى الْمِنْبَرِ أُحَرِّجُ بِاللَّهِ عَلَى رَجُلٍ سَأَلَ عَمَّا لَمْ يَكُنْ فَإِنَّ اللَّهَ قَدْ بَيَّنَ مَا هُوَ كَائِنٌ
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन अहमद] ने हमें [सुफ़यान] से [अम्र] से [थावस] बताया है कि उन्होंने कहा: "[उमर] अल्लाह उन पर प्रसन्न हो सकता है ने मिम्बर से कहा: 'अल्लाह की कसम, मुझे वास्तव में ऐसे लोग पसंद नहीं हैं जो किसी ऐसी चीज़ के बारे में पूछते हैं जो हुई नहीं है, क्योंकि अल्लाह उन समस्याओं को स्पष्ट करता है जो हुई हैं'"।
इमाम दरिमी : 125
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ مَا رَأَيْتُ قَوْمًا كَانُوا خَيْرًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا سَأَلُوهُ إِلَّا عَنْ ثَلَاثَ عَشْرَةَ مَسْأَلَةً حَتَّى قُبِضَ كُلُّهُنَّ فِي الْقُرْآنِ مِنْهُنَّ { يَسْأَلُونَكَ عَنْ الشَّهْرِ الْحَرَامِ } { وَيَسْأَلُونَكَ عَنْ الْمَحِيضِ } قَالَ مَا كَانُوا يَسْأَلُونَ إِلَّا عَمَّا يَنْفَعُهُمْ
हमें [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन अबू सय्यबा] ने [इब्न फुदलैल] से [अथो] से [सईद] से [इब्न अब्बास] रदियल्लाहु अन्हु तक बताया है कि उन्होंने कहा: "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों से बेहतर लोगों को कभी नहीं देखा, उन्होंने (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से) तब तक नहीं पूछा जब तक कि उनकी मृत्यु नहीं हो गई, लगभग तेरह समस्याओं को छोड़कर, जो सभी कुरान में हैं। पूछे जाने वालों में से हैं: "यस`अलुनाका अनिस्य्याहरिल हराम" (वे आपसे हराम महीनों के बारे में पूछते हैं) -क़ुस अल बक़रा: 222-"।
इमाम दरिमी : 126
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ أَخْبَرَنَا ابْنُ عَوْنٍ عَنْ عُمَيْرِ بْنِ إِسْحَقَ قَالَ لَمَنْ أَدْرَكْتُ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكْثَرُ مِمَّنْ سَبَقَنِي مِنْهُمْ فَمَا رَأَيْتُ قَوْمًا أَيْسَرَ سِيرَةً وَلَا أَقَلَّ تَشْدِيدًا مِنْهُمْ
हमें बताया गया है कि [उथमान बिन उमर] ने हमें [इब्न औन] [उमैर बिन इसहाक] से बताया कि उन्होंने कहा: "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों में से ऐसे और भी लोग हैं जो मुझसे पहले गुज़र चुके हैं। मुझे कभी भी ऐसे लोग नहीं मिले जो अपनी ज़िंदगी की यात्रा में उनसे हल्के और मामलों में सरल हों।"
इमाम दरिमी : 127
أَخْبَرَنِي الْعَبَّاسُ بْنُ سُفْيَانَ عَنْ زَيْدِ بْنِ حُبَابٍ أَخْبَرَنِي رَجَاءُ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ سَمِعْتُ عُبَادَةَ بْنَ نُسَيٍّ الْكِنْدِيَّ وَسُئِلَ عَنْ امْرَأَةٍ مَاتَتْ مَعَ قَوْمٍ لَيْسَ لَهَا وَلِيٌّ فَقَالَ أَدْرَكْتُ أَقْوَامًا مَا كَانُوا يُشَدِّدُونَ تَشْدِيدَكُمْ وَلَا يَسْأَلُونَ مَسَائِلَكُمْ
मुझे [अल अब्बास बिन सुफ़यान] से [ज़ैद बिन हुबाब] ने [राजा बिन अबू सलामा] से बताया है कि उन्होंने कहा: "मैंने एक बार ['उबादा बिन नुसाई अल किंदी] को सुना, उनसे एक औरत के बारे में पूछा गया जो एक समुदाय में मर गई और उसका कोई वली नहीं था, तो उन्होंने कहा: 'मैंने पाया है कि उनके कुछ लोगों का रवैया आपकी तरह सख़्त नहीं है, वे भी वह नहीं पूछते जो आप पूछते हैं'"।
इमाम दरिमी : 128
أَخْبَرَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ سُفْيَانَ أَخْبَرَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ أَخْبَرَنِي رَجَاءُ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ حَدَّثَنِي خَالِدُ بْنُ حَازِمٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ مُسْلِمٍ الْقُرَشِيِّ قَالَ كُنْتُ مَعَ ابْنِ مُحَيْرِيزٍ بِمَرْجِ الدِّيبَاجِ فَرَأَيْتُ مِنْهُ خَلْوَةً فَسَأَلْتُهُ عَنْ مَسْأَلَةٍ فَقَالَ لِي مَا تَصْنَعُ بِالْمَسَائِلِ قُلْتُ لَوْلَا الْمَسَائِلُ لَذَهَبَ الْعِلْمُ قَالَ لَا تَقُلْ ذَهَبَ الْعِلْمُ إِنَّهُ لَا يَذْهَبُ الْعِلْمُ مَا قُرِئَ الْقُرْآنُ وَلَكِنْ لَوْ قُلْتَ يَذْهَبُ الْفِقْهُ
हमें बताया है [अल 'अब्बास बिन सुफ़यान] ने हमें बताया है [ज़ैद बिन हुबाब] ने मुझे बताया है [रजा` बिन अबू सलामा] ने मुझे बताया है [खालिद बिन हाज़िम] [हिस्यम बिन मुस्लिम अल कुरैसी] से उन्होंने कहा: "एक बार मैं रेशम के क्षेत्र में [इब्न मुहैरिज़] के साथ था, मैंने उन्हें अकेला देखा और फिर मैंने उनसे कुछ पूछा, तो उन्होंने मुझसे पूछा: 'आप समस्याओं के बारे में क्या करेंगे' मैंने उत्तर दिया: 'यदि समस्याओं की कोई (चर्चा) नहीं है तो ज्ञान खो जाएगा। उन्होंने कहा, 'आपको यह नहीं कहना चाहिए कि ज्ञान खो गया है, जब तक कुरान पढ़ा जाता है तब तक ज्ञान खो नहीं जाएगा, लेकिन सबसे सटीक यह है कि आपने इसकी समझ खो दी है।'
इमाम दरिमी : 129
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ دَاوُدَ عَنْ الشَّعْبِيِّ أَنَّ عُمَرَ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّا لَا نَدْرِي لَعَلَّنَا نَأْمُرُكُمْ بِأَشْيَاءَ لَا تَحِلُّ لَكُمْ وَلَعَلَّنَا نُحَرِّمُ عَلَيْكُمْ أَشْيَاءَ هِيَ لَكُمْ حَلَالٌ إِنَّ آخِرَ مَا نَزَلَ مِنْ الْقُرْآنِ آيَةُ الرِّبَا وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يُبَيِّنْهَا لَنَا حَتَّى مَاتَ فَدَعُوا مَا يَرِيبُكُمْ إِلَى مَا لَا يَرِيبُكُمْ
हमें बताया गया है कि [सुलेमान बिन हर्ब] ने हमें [हम्मद बिन सलमा] [दाऊद] से [अस शाबी] से बताया है कि [उमर] रदियल्लाहु अन्हु ने कहा; "ऐ लोगों, हमें नहीं पता था कि हम तुम्हें कुछ ऐसे काम करने का आदेश दे सकते हैं जो तुम्हारे लिए हलाल नहीं हैं, और यह भी हो सकता है कि हमने कुछ चीज़ों को तुम्हारे लिए हराम कर दिया हो, हालाँकि वे तुम्हारे लिए हलाल हैं, असल में कुरान से आखिरी चीज़ जो उतारी गई है वह सूद (के बारे में) आयत है। और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे हमें तब तक नहीं समझाया जब तक उनकी मृत्यु नहीं हो गई, इसलिए जो कुछ भी तुम्हें शक में डालता है उसे छोड़ दो और उस चीज़ को पकड़ो जिसके बारे में तुम्हें कोई शक नहीं है।"
इमाम दरिमी : 130
أَخْبَرَنَا سَلْمُ بْنُ جُنَادَةَ حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ عَنْ عَمِّهِ قَالَ خَرَجْتُ مِنْ عِنْدِ إِبْرَاهِيمَ فَاسْتَقْبَلَنِي حَمَّادٌ فَحَمَّلَنِي ثَمَانِيَةَ أَبْوَابٍ مَسَائِلَ فَسَأَلْتُهُ فَأَجَابَنِي عَنْ أَرْبَعٍ وَتَرَكَ أَرْبَعًا
[सलम बिन जुनादा] ने हमें सूचित किया है कि [इब्न इदरीस] ने हमें [अपने चाचा] से वर्णित किया है, जिन्होंने कहा: "मैं अभी [इब्राहिम की] सभा से लौटा हूं, फिर हम्माद मुझसे मिले और मुझे आठ कार्य दिए। अगले दिन मैंने उनसे इन आठ समस्याओं के बारे में पूछा, फिर उन्होंने चार समस्याओं का उत्तर दिया और चार (अन्य) समस्याओं को छोड़ दिया।"
इमाम दरिमी : 131
أَخْبَرَنَا قَبِيصَةُ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبْجَرَ عَنْ زُبَيْدٍ قَالَ مَا سَأَلْتُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ شَيْءٍ إِلَّا عَرَفْتُ الْكَرَاهِيَةَ فِي وَجْهِهِ
हमें [क़बीशाह] ने सूचित किया है कि हमें [सुफ़ियान] ने [अब्दुल मलिक बिन अबजार] से [ज़ुबैद] से सूचित किया कि उन्होंने कहा: "मैंने [इब्राहिम] से कभी किसी चीज़ के बारे में नहीं पूछा सिवाय इसके कि मैंने उसके चेहरे पर नापसंदगी का संकेत देखा"।
इमाम दरिमी : 132
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي زَائِدَةَ قَالَ مَا رَأَيْتُ أَحَدًا أَكْثَرَ أَنْ يَقُولَ إِذَا سُئِلَ عَنْ شَيْءٍ لَا عِلْمَ لِي بِهِ مِنْ الشَّعْبِيِّ
हमें बताया गया है कि [मुहम्मद बिन अहमद] ने हमें [इसहाक बिन मंसूर] [उमर बिन अबू ज़ैदा] से बताया है कि उन्होंने कहा: "मैंने कभी किसी को यह कहते नहीं देखा: 'मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है' - जब उनसे किसी समस्या के बारे में पूछा गया - [अस शाबी] की तुलना में"।
इमाम दरिमी : 133
أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ قَالَ سَمِعْتُهُ يَذْكُرُ قَالَ كَانَ الشَّعْبِيُّ إِذَا جَاءَهُ شَيْءٌ اتَّقَى وَكَانَ إِبْرَاهِيمُ يَقُولُ وَيَقُولُ وَيَقُولُ قَالَ أَبُو عَاصِمٍ كَانَ الشَّعْبِيُّ فِي هَذَا أَحْسَنَ حَالًا عِنْدَ ابْنِ عَوْنٍ مِنْ إِبْرَاهِيمَ
हमें [अबू आशिम] ने [इब्न औन] से बताया है कि उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें यह कहते हुए सुना: 'पहले, जब [अस शाबी] कोई समस्या लेकर उनके पास आए तो उन्होंने सावधानी से बात की, जबकि [इब्राहिम] टिप्पणी करते रहे, टिप्पणी करते रहे, और टिप्पणी करते रहे'। अबू आशिम ने कहा: "इब्न औन के अनुसार, इस समस्या के मामले में अस शाबी का रवैया इब्राहिम के रवैये से बेहतर है।"
इमाम दरिमी : 134
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ بَشِيرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ إِيَاسٍ قَالَ قُلْتُ لِسَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ مَا لَكَ لَا تَقُولُ فِي الطَّلَاقِ شَيْئًا قَالَ مَا مِنْهُ شَيْءٌ إِلَّا قَدْ سَأَلْتُ عَنْهُ وَلَكِنِّي أَكْرَهُ أَنْ أُحِلَّ حَرَامًا أَوْ أُحَرِّمَ حَلَالًا
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन सईद] ने हमें बताया है [अहमद बिन बसीर] ने हमें बताया है [स्यूबा] [जाफर बिन इयास] से उन्होंने कहा: "मैंने [सईद बिन जुबैर] रदलिअल्लाहु अन्हु से पूछा 'आप तल्हाक के बारे में क्या नहीं कहते (कानूनी राय जारी नहीं करते)? उन्होंने उत्तर दिया कि तल्हाक के बारे में कोई समस्या नहीं है जब तक कि मैंने उनसे न पूछा हो, लेकिन मैं चिंतित हूं, मैं हराम को वैध बनाता हूं और हलाल को मना करता हूं।
इमाम दरिमी : 135
أَخْبَرَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي لَيْلَى يَقُولُ لَقَدْ أَدْرَكْتُ فِي هَذَا الْمَسْجِدِ عِشْرِينَ وَمِائَةً مِنْ الْأَنْصَارِ وَمَا مِنْهُمْ مِنْ أَحَدٍ يُحَدِّثُ بِحَدِيثٍ إِلَّا وَدَّ أَنَّ أَخَاهُ كَفَاهُ الْحَدِيثَ وَلَا يُسْأَلُ عَنْ فُتْيَا إِلَّا وَدَّ أَنَّ أَخَاهُ كَفَاهُ الْفُتْيَا
[अबू नुआईम] ने हमें बताया है कि [सुफ़यान] ने हमें [अथो`बिन अस साइब] से वर्णित किया है कि उन्होंने कहा कि मैंने एक बार [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] को यह कहते हुए सुना: "वास्तव में मैंने इस मस्जिद (पैगंबर) में अंसार के एक सौ बीस पुरुषों को पाया, उनमें से किसी ने भी हदीस नहीं सुनाई, सिवाय इसके कि उसने अपने भाई से हदीस सुनाई, और उससे कानूनी फतवे के बारे में नहीं पूछा गया था, लेकिन उसने अपने भाई से फतवा सुनाने को प्राथमिकता दी।"
इमाम दरिमी : 136
حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ يَعْقُوبَ الصَّفَّارُ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ عَنْ دَاوُدَ قَالَ سَأَلْتُ الشَّعْبِيَّ كَيْفَ كُنْتُمْ تَصْنَعُونَ إِذَا سُئِلْتُمْ قَالَ عَلَى الْخَبِيرِ وَقَعْتَ كَانَ إِذَا سُئِلَ الرَّجُلُ قَالَ لِصَاحِبِهِ أَفْتِهِمْ فَلَا يَزَالُ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَى الْأَوَّلِ
हमें [यूसुफ बिन याकूब अस शफ़्फ़ार] ने हमें [अबू बक्र] [दाऊद] से बताया है कि उन्होंने कहा कि मैंने एक बार [अस शाबी] से पूछा: 'जब आपसे पूछा जाता है तो आप क्या करते हैं?'। उन्होंने उत्तर दिया, 'उत्तर किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा दिया जाएगा जो वास्तव में इसे नियंत्रित करता है। अगर उससे पूछा जाता है, तो वह दूसरे दोस्त से कहेगा: 'उन्हें एक फतवा दो, फिर उसका दोस्त भी दूसरे दोस्त से यही बात कहेगा जब तक कि अंत में यह पहले व्यक्ति पर वापस न आ जाए।
इमाम दरिमी : 137
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْحَجَّاجِ قَالَ سَمِعْتُ سُفْيَانَ عَنْ ابْنِ الْمُنْكَدِرِ قَالَ إِنَّ الْعَالِمَ يَدْخُلُ فِيمَا بَيْنَ اللَّهِ وَبَيْنَ عِبَادِهِ فَلْيَطْلُبْ لِنَفْسِهِ الْمَخْرَجَ
हमसे [अहमद बिन अल हज्जाज] ने कहा है कि मैंने [सुफ़यान] को [इब्न अल मुनकादिर] से सुना कि उन्होंने कहा, "अल्लाह और उसके बंदों के बीच एक विद्वान है, अतः उसे अपने लिए कोई रास्ता मांग लेना चाहिए।"
इमाम दरिमी : 138
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قُدَامَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ مِسْعَرٍ قَالَ أَخْرَجَ إِلَيَّ مَعْنُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ كِتَابًا فَحَلَفَ لِي بِاللَّهِ إِنَّهُ خَطُّ أَبِيهِ فَإِذَا فِيهِ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ وَالَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ مَا رَأَيْتُ أَحَدًا كَانَ أَشَدَّ عَلَى الْمُتَنَطِّعِينَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَا رَأَيْتُ أَحَدًا كَانَ أَشَدَّ عَلَيْهِمْ مِنْ أَبِي بَكْرٍ وَإِنِّي لَأَرَى عُمَرَ كَانَ أَشَدَّ خَوْفًا عَلَيْهِمْ أَوْ لَهُمْ
हमें [मुहम्मद बिन कुदामा] ने [अबू उसामा] से [मिसर] से बताया है कि उन्होंने कहा: [मान बिन अब्दुर रहमान] ने एक बार मुझे एक किताब दी और उन्होंने कसम खाई, "अल्लाह की कसम, यह किताब [उनके पिता] के लेखन का परिणाम है। जाहिर है कि किताब में एक शिलालेख है' [अब्दुल्ला] ने कहा; "उसके अलावा कोई भगवान नहीं है, मैंने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं देखा जिसका रवैया उन लोगों के प्रति रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अधिक कठोर हो, फिर मैंने किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं देखा जो उनके प्रति अबू बकर रदिअल्लाहु अन्हु से अधिक कठोर हो। और मैंने देखा कि उमर उन लोगों में से एक थे जो उनके बारे में या उन पर आने वाली आपदा के बारे में सबसे अधिक चिंतित थे।"
इमाम दरिमी : 139
أَخْبَرَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا زَمْعَةُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ حَاضِرٍ الْأَزْدِيِّ قَالَ دَخَلْتُ عَلَى ابْنِ عَبَّاسٍ فَقُلْتُ أَوْصِنِي فَقَالَ نَعَمْ عَلَيْكَ بِتَقْوَى اللَّهِ وَالِاسْتِقَامَةِ اتَّبِعْ وَلَا تَبْتَدِعْ
हमें [अबू नुआइम] ने बताया है [ज़मह बिन सालेह] ने [उथमान बिन हडलर अल अज़दी] से कहा; "मैं एक बार [इब्न अब्बास] रदिअल्लाहु अन्हु से मिलने आया था, फिर मैंने उनसे कहा: 'मुझे एक वसीयत दीजिए'। उन्होंने जवाब दिया; हाँ, मैं तुम्हें एक वसीयत दूंगा। अल्लाह से डरो और उसके रास्ते पर पक्के रहो। सुन्नत का पालन करो और पाखंड मत करो।"
इमाम दरिमी : 140
أَخْبَرَنَا مَخْلَدُ بْنُ مَالِكٍ أَخْبَرَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ قَالَ كَانُوا يَرَوْنَ أَنَّهُ عَلَى الطَّرِيقِ مَا كَانَ عَلَى الْأَثَرِ
हमें [मखलद बिन खालिद बिन मलिक] ने बताया है कि हमें [अन नदलीर बिन स्यूमैल] ने [इब्न औन] से [इब्न सिरिन] से बताया है कि उन्होंने कहा; "लोग (मेरे दोस्त) किसी को तब तक सच में मानते हैं जब तक वह अत्सर (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत को बनाए रखने) में है।"