इमाम दरिमी : 81
أَخْبَرَنَا فَرْوَةُ بْنُ أَبِي الْمَغْرَاءِ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُخْتَارٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَرَضِهِ صُبُّوا عَلَيَّ سَبْعَ قِرَبٍ مِنْ سَبْعِ آبَارٍ شَتَّى حَتَّى أَخْرُجَ إِلَى النَّاسِ فَأَعْهَدَ إِلَيْهِمْ قَالَتْ فَأَقْعَدْنَاهُ فِي مِخْضَبٍ لِحَفْصَةَ فَصَبَبْنَا عَلَيْهِ الْمَاءَ صَبًّا أَوْ شَنَنَّا عَلَيْهِ شَنًّا الشَّكُّ مِنْ قِبَلِ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ فَوَجَدَ رَاحَةً فَخَرَجَ فَصَعِدَ الْمِنْبَرَ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَاسْتَغْفَرَ لِلشُّهَدَاءِ مِنْ أَصْحَابِ أُحُدٍ وَدَعَا لَهُمْ ثُمَّ قَالَ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ الْأَنْصَارَ عَيْبَتِي الَّتِي أَوَيْتُ إِلَيْهَا فَأَكْرِمُوا كَرِيمَهُمْ وَتَجَاوَزُوا عَنْ مُسِيئِهِمْ إِلَّا فِي حَدٍّ أَلَا إِنَّ عَبْدًا مِنْ عِبَادِ اللَّهِ قَدْ خُيِّرَ بَيْنَ الدُّنْيَا وَبَيْنَ مَا عِنْدَ اللَّهِ فَاخْتَارَ مَا عِنْدَ اللَّهِ فَبَكَى أَبُو بَكْرٍ وَظَنَّ أَنَّهُ يَعْنِي نَفْسَهُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رِسْلِكَ يَا أَبَا بَكْرٍ سُدُّوا هَذِهِ الْأَبْوَابَ الشَّوَارِعَ إِلَى الْمَسْجِدِ إِلَّا بَابَ أَبِي بَكْرٍ فَإِنِّي لَا أَعْلَمُ امْرَأً أَفْضَلَ عِنْدِي يَدًا فِي الصُّحْبَةِ مِنْ أَبِي بَكْرٍ
हमें बताया है [फरवाह बिन अबू अल मगहरा`] ने हमें बताया है [इब्राहिम बिन मुख्तार] [मुहम्मद बिन इसहाक] से [मुहम्मद बिन का'ब] से ['उरवाह] से ['ऐस्या] रदलिअल्लाहुअन्हा से उन्होंने कहा: पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा जब वह बीमार थे: "मुझे सात अलग-अलग कुओं से सात बाल्टी पानी डालो, ताकि मैं लोगों के पास उनके वादों को पूरा करने के लिए आ सकूं" कथावाचक ने कहा: "तो हमने उसे हफ़सा रदलिअल्लाहुअन्हा से संबंधित एक बर्तन पर बैठाया, हमने उस पर पानी छिड़का या डाला - हमने संपादकीय संदेह छिड़के या हमने मुहम्मद बिन इसहाक से यह डाला -, फिर उसे शांति मिली, फिर वह बाहर आया और यह कहते हुए पल्पिट पर चढ़ गया: "अंसार मेरे भरोसेमंद लोग हैं और मेरे रहस्यों के रखवाले हैं, जहां मैं शरण लेता हूं, जब तक कि वे वास्तव में इसका उल्लंघन न करें; कानून। याद रखो, अल्लाह सुब्हानहु व तआला का एक बंदा है जिसे दुनिया और अल्लाह सुब्हानहु व तआला के पास जो है, उसके बीच चुनने की आज़ादी दी गई है, इसलिए वह वही चुनता है जो अल्लाह सुब्हानहु व तआला के पास है।" तब अबू बकर रदलिअल्लाहुअन्हु रोए, उन्हें लगा कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शब्द उन्हीं के लिए थे। तब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "एक मिनट रुको, ऐ अबू बकर, मस्जिद (नबवी) की ओर जाने वाली सड़क के दरवाज़े बंद कर दो, सिवाय अबू बकर के दरवाज़े के, क्योंकि मैं किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता जो दोस्ती और बचाव में मेरे लिए अबू बकर, रदलिअल्लाहुअन्हु से ज़्यादा ज़रूरी हो।"
इमाम दरिमी : 82
أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا فُلَيْحُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ أُوذِنَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالصَّلَاةِ فِي مَرَضِهِ فَقَالَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ يُصَلِّي بِالنَّاسِ ثُمَّ أُغْمِيَ عَلَيْهِ فَلَمَّا سُرِّيَ عَنْهُ قَالَ هَلْ أَمَرْتُنَّ أَبَا بَكْرٍ يُصَلِّي بِالنَّاسِ فَقُلْتُ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ رَجُلٌ رَقِيقٌ فَلَوْ أَمَرْتَ عُمَرَ فَقَالَ أَنْتُنَّ صَوَاحِبُ يُوسُفَ مُرُوا أَبَا بَكْرٍ يُصَلِّي بِالنَّاسِ فَرُبَّ قَائِلٍ مُتَمَنٍّ وَيَأْبَى اللَّهُ وَالْمُؤْمِنُونَ
हमें बताया है [सईद बिन मंशूर] ने हमें बताया है [फुलैह बिन सुलेमान] [सुलेमान बिन अब्दुर्रहमान] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से ['ऐस्या] रदलिअल्लाहुअन्हा से उन्होंने कहा: "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज़ के लिए अज़ान देने की अनुमति दी, फिर उन्होंने कहा: "अबू बकर को नमाज़ियों का नेतृत्व करने का आदेश दो", फिर वह बेहोश हो गए। जब उन्हें होश आया, तो उन्होंने पूछा: "क्या मैंने अबू बकर रदलिअल्लाहुअन्हु को लोगों का नेतृत्व करने का आदेश दिया है? तब मैंने (कथावाचक) कहा: "क्या अबू बकर एक सज्जन व्यक्ति नहीं हैं जो आसानी से रो पड़ते हैं, क्या आपको सिर्फ उमर को आदेश नहीं देना चाहिए?" तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अरे, तुम तो यूसुफ के भाइयों जैसे हो, अबू बकर को लोगों को लीड करने का ऑर्डर दो, कितने लोग सपने देखते हैं लेकिन अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला और मोमिन यह नहीं चाहते।"
इमाम दरिमी : 83
َخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ عِكْرِمَةَ قَالَ تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ الِاثْنَيْنِ فَحُبِسَ بَقِيَّةَ يَوْمِهِ وَلَيْلَتَهُ وَالْغَدَ حَتَّى دُفِنَ لَيْلَةَ الْأَرْبِعَاءِ وَقَالُوا إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَمُتْ وَلَكِنْ عُرِجَ بِرُوحِهِ كَمَا عُرِجَ بِرُوحِ مُوسَى فَقَامَ عُمَرُ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَمُتْ وَلَكِنْ عُرِجَ بِرُوحِهِ كَمَا عُرِجَ بِرُوحِ مُوسَى وَاللَّهِ لَا يَمُوتُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى يَقْطَعَ أَيْدِيَ أَقْوَامٍ وَأَلْسِنَتَهُمْ فَلَمْ يَزَلْ عُمَرُ يَتَكَلَّمُ حَتَّى أَزْبَدَ شِدْقَاهُ مِمَّا يُوعِدُ وَيَقُولُ فَقَامَ الْعَبَّاسُ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ مَاتَ وَإِنَّهُ لَبَشَرٌ وَإِنَّهُ يَأْسُنُ كَمَا يَأْسُنُ الْبَشَرُ أَيْ قَوْمِ فَادْفِنُوا صَاحِبَكُمْ فَإِنَّهُ أَكْرَمُ عَلَى اللَّهِ مِنْ أَنْ يُمِيتَهُ إِمَاتَتَيْنِ أَيُمِيتُ أَحَدَكُمْ إِمَاتَةً وَيُمِيتُهُ إِمَاتَتَيْنِ وَهُوَ أَكْرَمُ عَلَى اللَّهِ مِنْ ذَلِكَ أَيْ قَوْمِ فَادْفِنُوا صَاحِبَكُمْ فَإِنْ يَكُ كَمَا تَقُولُونَ فَلَيْسَ بِعَزِيزٍ عَلَى اللَّهِ أَنْ يَبْحَثَ عَنْهُ التُّرَابَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاللَّهِ مَا مَاتَ حَتَّى تَرَكَ السَّبِيلَ نَهْجًا وَاضِحًا فَأَحَلَّ الْحَلَالَ وَحَرَّمَ الْحَرَامَ وَنَكَحَ وَطَلَّقَ وَحَارَبَ وَسَالَمَ مَا كَانَ رَاعِي غَنَمٍ يَتَّبِعُ بِهَا صَاحِبُهَا رُءُوسَ الْجِبَالِ يَخْبِطُ عَلَيْهَا الْعِضَاهَ بِمِخْبَطِهِ وَيَمْدُرُ حَوْضَهَا بِيَدِهِ بِأَنْصَبَ وَلَا أَدْأَبَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ فِيكُمْ أَيْ قَوْمِ فَادْفِنُوا صَاحِبَكُمْ قَالَ وَجَعَلَتْ أُمُّ أَيْمَنَ تَبْكِي فَقِيلَ لَهَا يَا أُمَّ أَيْمَنَ تَبْكِي عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ إِنِّي وَاللَّهِ مَا أَبْكِي عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَّا أَكُونَ أَعْلَمُ أَنَّهُ قَدْ ذَهَبَ إِلَى مَا هُوَ خَيْرٌ لَهُ مِنْ الدُّنْيَا وَلَكِنِّي أَبْكِي عَلَى خَبَرِ السَّمَاءِ انْقَطَعَ قَالَ حَمَّادٌ خَنَقَتْ الْعَبْرَةُ أَيُّوبَ حِينَ بَلَغَ هَا هُنَا
हमें [सुलेमान बिन हरब] ने हमें [हम्मद बिन ज़ैद] [अय्यूब] से ['इकरीमा] से बताया है उन्होंने कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सोमवार को निधन हो गया, लेकिन उनके शरीर को उस दिन, उस शाम और अगले दिन अभी तक दफन नहीं किया गया था, इसलिए उन्हें बुधवार की रात को दफना दिया गया, उन्होंने कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मरे नहीं थे, केवल वह अपनी आत्मा के साथ (आसमान में) चढ़ गए थे जैसे मूसा अलैहि वसल्लम को उठाया गया था, फिर उमर रदलिअल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़े हुए और कहा: "वास्तव में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु नहीं हुई है, बल्कि वह अपनी आत्मा के साथ (आसमान में) उठाए गए थे जैसे मूसा अलैहि वसल्लम को उठाया गया था। अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला की कसम, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब तक नहीं मरे जब तक उन्होंने उनके हाथ और जीभ नहीं काट दीं। उमर रदलिअल्लाहुअन्हु तब तक कहते रहे जब तक कि उनकी धमकियों और बातों की वजह से उनके मुंह के कोनों से झाग नहीं निकलने लगा। फिर अब्बास रदलिअल्लाहुअन्हु खड़े हुए और कहा: “ज़रूर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मौत हो गई, क्योंकि वह एक आम इंसान थे, और जैसे इंसान बदलते हैं वैसे ही वह भी बदल गए, तो अपने दोस्त को दफ़ना दो, बेशक वह अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला के नज़दीक दो बार मरने से ज़्यादा नेक थे, क्या यह मुमकिन है कि तुम एक बार मारे गए और वह दो बार मरा, जबकि वह अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला के नज़दीक उनसे ज़्यादा नेक थे? ऐ लोगों, अपने दोस्त को दफ़ना दो, फिर अगर वह वैसा हुआ जैसा तुम कहते हो, तो अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला के लिए उसके लिए दफ़नाने की जगह ढूंढना मुश्किल नहीं होगा। अल्लाह की कसम, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, वह तब तक नहीं मरे जब तक कोई साफ़ मन्हाज न छोड़ दें, उन्होंने जो हलाल है उसे हलाल किया, जो हराम है उसे हराम किया, शादी की और तलाक़ दिया, जंग की और सुलह की। और कोई चरवाहा नहीं था जो अपनी बकरियों का पीछा करते-करते पहाड़ों की चोटियों तक थक गया हो, उसने अपनी लाठी से कांटेदार पेड़ों को गिरा दिया, उसने अपने हाथों से अपने पानी के तालाबों की मरम्मत की, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से ज़्यादा। अब वह तुम्हारे बीच में है, तो अपने दोस्त को दफ़ना दो।” उन्होंने कहा: “और उम्म ऐमान रदलिअल्लाहु अन्हा रोईं, फिर उनसे पूछा गया, 'ऐ उम्म ऐमान, क्या आप अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए रो रही हैं?' उन्होंने जवाब दिया: 'अल्लाह की कसम, मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए नहीं रोता। क्या तुम जानते हो कि मैं बेहतर जानता हूँ कि वह इस दुनिया से बेहतर जगह पर चला गया है, लेकिन मैं इसलिए रो रहा हूँ क्योंकि जन्नत की खबर (रहस्योद्घाटन) में रुकावट आ गई है।'' हम्माद रहीमहुल्लाह: "जब उम्म ऐमान की बातें यहाँ पहुँचीं तो अय्यूब फूट-फूट कर रोने लगे।
इमाम दरिमी : 84
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ سَعِيدٍ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا شُعَيْبٌ هُوَ ابْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ حَدَّثَنِي يَعِيشُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنِي مَكْحُولٌ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَصَابَ أَحَدَكُمْ مُصِيبَةٌ فَلْيَذْكُرْ مُصِيبَتَهُ بِي فَإِنَّهَا مِنْ أَعْظَمِ الْمَصَائِبِ
हमें बताया है [अब्दुल वहाब बिन सईद विज्ञापन दिमसीकी] ने हमें बताया है [स्यूएब इब्न इसहाक] ने हमें बताया है [अल 'औज़ा'ई] ने मुझे बताया है [याइसी बिन अल वालिद] ने मुझे बताया है [मखुल] कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि आप में से कोई व्यक्ति किसी आपदा से पीड़ित है, तो कल्पना करें कि जो आपदा उस पर आई है वह मुझ पर आ गई है, तो यह सबसे बड़ी आपदा होगी।"
इमाम दरिमी : 85
أَخْبَرَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا فِطْرٌ عَنْ عَطَاءٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَصَابَ أَحَدَكُمْ مُصِيبَةٌ فَلْيَذْكُرْ مُصَابَهُ بِي فَإِنَّهَا مِنْ أَعْظَمِ الْمَصَائِبِ
हमें बताया गया है कि [अबू नुआईम] ने हमें [फ़ित्र] से ['अथा'] से वर्णित किया है, उन्होंने कहा: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम: "यदि तुममें से किसी पर कोई मुसीबत आ पड़े तो सोचो कि वह मुझ पर आ जाए, तो यह सबसे बड़ी मुसीबतों में से एक है।"
इमाम दरिमी : 86
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ أَبِي خَلَفٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عُمَرَ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ مَا سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَذْكُرُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَطُّ إِلَّا بَكَى
हमें [मुहम्मद बिन अहमद बिन अबू खलफ] ने बताया है कि [सुफयान] ने ['अम्र बिन मुहम्मद] से [अपने पिता] से कहा है कि उन्होंने कहा: "मैंने [इब्नु उमर] को पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उनके रोने के अलावा याद करते हुए नहीं सुना"।
इमाम दरिमी : 87
أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ فَاطِمَةَ قَالَتْ يَا أَنَسُ كَيْفَ طَابَتْ أَنْفُسُكُمْ أَنْ تَحْثُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ التُّرَابَ وَقَالَتْ يَا أَبَتَاهْ مِنْ رَبِّهِ مَا أَدْنَاهْ وَا أَبَتَاهْ جَنَّةُ الْفِرْدَوْسِ مَأْوَاهْ وَا أَبَتَاهْ إِلَى جِبْرِيلَ نَنْعَاهْ وَا أَبَتَاهْ أَجَابَ رَبًّا دَعَاهْ قَالَ حَمَّادٌ حِينَ حَدَّثَ ثَابِتٌ بَكَى و قَالَ ثَابِتٌ حِينَ حَدَّثَ أَنَسٌ بَكَى
[अबू अन नुमान] ने हमें [हम्मद बिन ज़ैद] [त्साबित] से [अनस बिन मलिक] रदलिअल्लाहुअन्हु से वर्णित किया कि [फातिमा] रदलिअल्लाहुअन्हा ने पूछा: "ऐ अनस, आप अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कब्र पर मिट्टी छिड़कना कैसे पसंद करते हैं? और फातिमा अपनी शिकायतें पढ़ रही थीं: "ऐ मेरे पिता जो अपने भगवान के बहुत करीब हैं, ऐ मेरे पिता जिनके स्वर्ग उनकी वापसी का स्थान है, ऐ मेरे पिता जिन्हें हमने गेब्रियल अलैहिस्सलाम को उनकी मृत्यु की सूचना दी, ऐ मेरे पिता जिन्हें उन्होंने अपने भगवान को पुकारने पर उत्तर दिया"। हम्माद रहिमहुल्लाह ने कहा: "जब साबित ने इस हदीस को सुनाया, तो वह रो पड़े"। साबित ने कहा: "अनस रदलिअल्लाहुअन्हु जब उन्होंने इस हदीस को सुनाया तो वह रो पड़े"।
इमाम दरिमी : 88
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ وَذَكَرَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ شَهِدْتُهُ يَوْمَ دَخَلَ الْمَدِينَةَ فَمَا رَأَيْتُ يَوْمًا قَطُّ كَانَ أَحْسَنَ وَلَا أَضْوَأَ مِنْ يَوْمٍ دَخَلَ عَلَيْنَا فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَشَهِدْتُهُ يَوْمَ مَوْتِهِ فَمَا رَأَيْتُ يَوْمًا كَانَ أَقْبَحَ وَلَا أَظْلَمَ مِنْ يَوْمٍ مَاتَ فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें बताया है ['अफ़्फ़ान] ने हमें [हम्मद सलमा] [त्साबित] से [अनस] रदलिअल्लाहुअन्हु से बताया है उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को याद किया, "मैंने उन्हें देखा जब उन्होंने मदीना में प्रवेश किया, मैंने कभी भी उस दिन से बेहतर और उज्जवल दिन नहीं देखा जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना आए, और मैंने उनकी मृत्यु का दिन भी देखा, इसलिए मैंने ऐसा कोई दिन नहीं देखा जो बदतर और बदतर हो। जिस दिन पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हुई उस दिन से अंधेरा हो।"
इमाम दरिमी : 89
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُطِيعٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي عَبْدِ الْجَلِيلِ عَنْ أَبِي حَرِيزٍ الْأَزْدِيِّ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَلَامٍ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَجِدُكَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَائِمًا عِنْدَ رَبِّكَ وَأَنْتَ مُحْمَارَّةٌ وَجْنَتَاكَ مُسْتَحْيٍ مِنْ رَبِّكَ مِمَّا أَحْدَثَتْ أُمَّتُكَ مِنْ بَعْدِكَ
हमें [अब्दुल्ला बिन मुथी] ने हमें [हुसैयम] [अबू अब्दुल जलील] से [अबू हारिज़ अल अज़दी] से बताया है उन्होंने कहा: "अब्दुल्ला बिन सलाम ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा: 'अल्लाह के रसूल, हमने आपको अपने रब की तरफ खड़े देखा, और आपका चेहरा लाल हो गया (थोड़ा लाल हो गया) जबकि आपका माथा आपके रब से शर्मिंदा था, जो आपके लोगों द्वारा आपके (मृत्यु के) बाद किए गए कार्यों के कारण था।"
इमाम दरिमी : 90
أَخْبَرَنَا الْقَاسِمُ بْنُ كَثِيرٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ شُرَيْحٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي الْأَسْوَدِ الْقُرَشِيِّ عَنْ أَبِي قُرَّةَ مَوْلَى أَبِي جَهْلٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ هَذِهِ السُّورَةَ لَمَّا أُنْزِلَتْ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيَخْرُجُنَّ مِنْهَا أَفْوَاجًا كَمَا دَخَلُوهُ أَفْوَاجًا
हमें [अल क़ासिम बिन कत्सिर] सूचित करने के बाद उन्होंने कहा: "मैंने [अब्दुर्रहमान बिन स्यूरैह] को [अबू अल असवद अल कुरैसी] से [अबू फ़रवाह] से - अबू जहल के पूर्व गुलाम - [अबू हुरैरा] रदलिअल्लाहुअन्हु से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहते सुना: "वास्तव में, जब यह पत्र प्रकट हुआ "इदज़ा जा`आ नशरुल्लाहि वल फ़तुहु वा रयतन्नसा यदखुलुना फ़ि दीनिल्लाहि अफ़वाजा" (जब अल्लाह सुहानाल्लाहु वा तआला की सहायता और विजय आती है। और आप लोगों को झुंड में अल्लाह के धर्म में प्रवेश करते हुए देखते हैं) -क़स. अन नश्र: 1-2-. पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में वे झुंड में (अपने धर्म को) छोड़ देंगे जैसे वे झुंड में इसमें प्रवेश किए थे।"
इमाम दरिमी : 91
أَخْبَرَنِي أَبُو بَكْرٍ الْمِصْرِيُّ عَنْ سُلَيْمَانَ أَبِي أَيُّوبَ الْخُزَاعِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْأُمَوِيِّ عَنْ مَعْرُوفِ بْنِ خَرَّبُوذَ الْمَكِّيِّ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ قَالَ دَخَلَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْأَهْتَمِ عَلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ مَعَ الْعَامَّةِ فَلَمْ يُفْجَأْ عُمَرُ إِلَّا وَهُوَ بَيْنَ يَدَيْهِ يَتَكَلَّمُ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ اللَّهَ خَلَقَ الْخَلْقَ غَنِيًّا عَنْ طَاعَتِهِمْ آمِنًا لِمَعْصِيَتِهِمْ وَالنَّاسُ يَوْمَئِذٍ فِي الْمَنَازِلِ وَالرَّأْيِ مُخْتَلِفُونَ فَالْعَرَبُ بِشَرِّ تِلْكَ الْمَنَازِلِ أَهْلُ الْحَجَرِ وَأَهْلُ الْوَبَرِ وَأَهْلُ الدَّبَرِ يُحْتَازُ دُونَهُمْ طَيِّبَاتُ الدُّنْيَا وَرَخَاءُ عَيْشِهَا لَا يَسْأَلُونَ اللَّهَ جَمَاعَةً وَلَا يَتْلُونَ لَهُ كِتَابًا مَيِّتُهُمْ فِي النَّارِ وَحَيُّهُمْ أَعْمَى نَجِسٌ مَعَ مَا لَا يُحْصَى مِنْ الْمَرْغُوبِ عَنْهُ وَالْمَزْهُودِ فِيهِ فَلَمَّا أَرَادَ اللَّهُ أَنْ يَنْشُرَ عَلَيْهِمْ رَحْمَتَهُ بَعَثَ إِلَيْهِمْ رَسُولًا مِنْ أَنْفُسِهِمْ { عَزِيزٌ عَلَيْهِ مَا عَنِتُّمْ حَرِيصٌ عَلَيْكُمْ بِالْمُؤْمِنِينَ رَءُوفٌ رَحِيمٌ } صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَعَلَيْهِ السَّلَامُ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ فَلَمْ يَمْنَعْهُمْ ذَلِكَ أَنْ جَرَحُوهُ فِي جِسْمِهِ وَلَقَّبُوهُ فِي اسْمِهِ وَمَعَهُ كِتَابٌ مِنْ اللَّهِ نَاطِقٌ لَا يُقَدَّمُ إِلَّا بِأَمْرِهِ وَلَا يُرْحَلُ إِلَّا بِإِذْنِهِ فَلَمَّا أُمِرَ بِالْعَزْمَةِ وَحُمِلَ عَلَى الْجِهَادِ انْبَسَطَ لِأَمْرِ اللَّهِ لَوْثُهُ فَأَفْلَجَ اللَّهُ حُجَّتَهُ وَأَجَازَ كَلِمَتَهُ وَأَظْهَرَ دَعْوَتَهُ وَفَارَقَ الدُّنْيَا تَقِيًّا نَقِيًّا ثُمَّ قَامَ بَعْدَهُ أَبُو بَكْرٍ فَسَلَكَ سُنَّتَهُ وَأَخَذَ سَبِيلَهُ وَارْتَدَّتْ الْعَرَبُ أَوْ مَنْ فَعَلَ ذَلِكَ مِنْهُمْ فَأَبَى أَنْ يَقْبَلَ مِنْهُمْ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَّا الَّذِي كَانَ قَابِلًا انْتَزَعَ السُّيُوفَ مِنْ أَغْمَادِهَا وَأَوْقَدَ النِّيرَانَ فِي شُعُلِهَا ثُمَّ رَكِبَ بِأَهْلِ الْحَقِّ أَهْلَ الْبَاطِلِ فَلَمْ يَبْرَحْ يُقَطِّعُ أَوْصَالَهُمْ وَيَسْقِي الْأَرْضَ دِمَاءَهُمْ حَتَّى أَدْخَلَهُمْ فِي الَّذِي خَرَجُوا مِنْهُ وَقَرَّرَهُمْ بِالَّذِي نَفَرُوا عَنْهُ وَقَدْ كَانَ أَصَابَ مِنْ مَالِ اللَّهِ بَكْرًا يَرْتَوِي عَلَيْهِ وَحَبَشِيَّةً أَرْضَعَتْ وَلَدًا لَهُ فَرَأَى ذَلِكَ عِنْدَ مَوْتِهِ غُصَّةً فِي حَلْقِهِ فَأَدَّى ذَلِكَ إِلَى الْخَلِيفَةِ مِنْ بَعْدِهِ وَفَارَقَ الدُّنْيَا تَقِيًّا نَقِيًّا عَلَى مِنْهَاجِ صَاحِبِهِ ثُمَّ قَامَ بَعْدَهُ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَمَصَّرَ الْأَمْصَارَ وَخَلَطَ الشِّدَّةَ بِاللِّينِ وَحَسَرَ عَنْ ذِرَاعَيْهِ وَشَمَّرَ عَنْ سَاقَيْهِ وَأَعَدَّ لِلْأُمُورِ أَقْرَانَهَا وَلِلْحَرْبِ آلَتَهَا فَلَمَّا أَصَابَهُ قَيْنُ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ أَمَرَ ابْنَ عَبَّاسٍ يَسْأَلُ النَّاسَ هَلْ يُثْبِتُونَ قَاتِلَهُ فَلَمَّا قِيلَ قَيْنُ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ اسْتَهَلَّ يَحْمَدُ رَبَّهُ أَنْ لَا يَكُونَ أَصَابَهُ ذُو حَقٍّ فِي الْفَيْءِ فَيَحْتَجَّ عَلَيْهِ بِأَنَّهُ إِنَّمَا اسْتَحَلَّ دَمَهُ بِمَا اسْتَحَلَّ مِنْ حَقِّهِ وَقَدْ كَانَ أَصَابَ مِنْ مَالِ اللَّهِ بِضْعَةً وَثَمَانِينَ أَلْفًا فَكَسَرَ لَهَا رِبَاعَهُ وَكَرِهَ بِهَا كَفَالَةَ أَوْلَادِهِ فَأَدَّاهَا إِلَى الْخَلِيفَةِ مِنْ بَعْدِهِ وَفَارَقَ الدُّنْيَا تَقِيًّا نَقِيًّا عَلَى مِنْهَاجِ صَاحِبَيْهِ ثُمَّ إِنَّكَ يَا عُمَرُ بُنَيُّ الدُّنْيَا وَلَّدَتْكَ مُلُوكُهَا وَأَلْقَمَتْكَ ثَدْيَيْهَا وَنَبَتَّ فِيهَا تَلْتَمِسُهَا مَظَانَّهَا فَلَمَّا وُلِّيتَهَا أَلْقَيْتَهَا حَيْثُ أَلْقَاهَا اللَّهُ هَجَرْتَهَا وَجَفَوْتَهَا وَقَذِرْتَهَا إِلَّا مَا تَزَوَّدْتَ مِنْهَا فَالْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي جَلَا بِكَ حَوْبَتَنَا وَكَشَفَ بِكَ كُرْبَتَنَا فَامْضِ وَلَا تَلْتَفِتْ فَإِنَّهُ لَا يَعِزُّ عَلَى الْحَقِّ شَيْءٌ وَلَا يَذِلُّ عَلَى الْبَاطِلِ شَيْءٌ أَقُولُ قَوْلِي وَأَسْتَغْفِرُ اللَّهَ لِي وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ قَالَ أَبُو أَيُّوبَ فَكَانَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ يَقُولُ فِي الشَّيْءِ قَالَ لِيَ ابْنُ الْأَهْتَمِ امْضِ وَلَا تَلْتَفِتْ
[अबू बक्र अल मिश्री] ने मुझे [सुलेमान अबू अय्यूब अल खुज़ाई] से [याह्या बिन सईद अल उमावी] से [मारूफ बिन खर्राबुदज़ अल मक्की] से [खालिद बिन मा'दान] से बताया है कि उन्होंने कहा: "[अब्दुल्ला बिन अल अहतम] लोगों के साथ 'उमर बिन अब्दुल'अजीज से मिले। उमर ने कुछ भी नहीं किया था, अचानक अब्दुल्ला बिन अल अहतम रहिमहुल्लाह उनके सामने खड़े थे और तुरंत बोले, उन्होंने अल्लाह सुभानअल्लाहु वा ता'ला की प्रशंसा की और उनकी प्रशंसा की, फिर उन्होंने कहा: "अम्मा बा'द। वास्तव में, अल्लाह सुभानअल्लाहु वा ता'ला ने मनुष्यों को बनाया और उन्हें उनकी आज्ञाकारिता की आवश्यकता नहीं है, वह हमेशा उनके पापों से सुरक्षित हैं। शहर में रहने वाले, गाँव में रहने वाले और पहाड़ पर रहने वाले दुनिया की अच्छाई और उसकी खुशियों से रोके जाते हैं, आम तौर पर वे अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला से पूछना नहीं जानते और उसकी किताब नहीं पढ़ते, जो लोग मरते हैं वे जहन्नम में हैं और जो लोग मार्गदर्शन से अंधे और नापाक हालत में रहते हैं, उनके पास अनगिनत घिनौनी और परेशान करने वाली परेशानियाँ हैं। जब अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला ने उन पर अपनी रहमत फैलानी चाही, तो उन्होंने उनके बीच से एक रसूल भेजा, जिनकी खासियत थी "'अज़ीज़ुन 'अलैहिम मा अनित्तुम हरीइसुन 'अलैकुम बिल मो'मिनिना रऊफुर्रहीम" (तुम्हारे दुख से बहुत दुखी, सच में तुम्हारे लिए ईमान और मुक्ति चाहता है, ईमान वालों के प्रति बहुत रहमदिल और दयावान) -Qs. तौबा पर: 128. अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला उस पर अपनी रहमत, खुशहाली, रहमत और आशीर्वाद बरसाए। लेकिन, उसकी सारी अच्छी बातों के बावजूद, यह उन्हें उसके शरीर को चोट पहुँचाने, उसे बुरे नाम देने से नहीं रोक पाया, भले ही उसके पास अल्लाह की लिखी एक किताब थी, वह उसके हुक्म के अलावा कुछ नहीं कहता था, वह तब तक नहीं जाता था जब तक अल्लाह उसे इजाज़त न दे। इसलिए जब उसे अपने दिल को स्थिर करने, जिहाद का बोझ उठाने का हुक्म दिया गया, तो उसकी ताकत अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला के हुक्मों को पूरा करने के लिए बढ़ गई ताकि अल्लाह अपने सबूत ज़ाहिर करे और अपने शब्दों को सुरक्षित रखे, साथ ही उसका उपदेश भी दिखाए। और वह नेकी और पवित्रता की हालत में मरा। फिर अबू बकर रदलिअल्लाहुअन्हु उनके बाद आए और उनकी सुन्नत पर चले, उनके रास्ते पर चले, लेकिन (कुछ) अरबों ने या उनमें से किसी ने भी धर्म छोड़ दिया, फिर अबू बकर ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की (मौत के बाद) उन्हें मानने से इनकार कर दिया, सिवाय उन लोगों के जो उन्हें मानना चाहते थे, अपनी तलवार म्यान से निकाली और आग जलाई ताकि वह उनकी मशाल के साथ रहे (उनकी जंग की नीति को मान लिया), फिर सच्चाई के रक्षकों के साथ मिलकर उन्होंने पंथियों को खत्म कर दिया। बुराई। उन्होंने जंग करना और धरती को उनके खून से सींचना तब तक नहीं छोड़ा, जब तक कि उन्होंने उन्हें उस धर्म की गोद में वापस नहीं लौटा दिया जिसे उन्होंने छोड़ दिया था, और उन्हें उन शिक्षाओं में फिर से स्थापित नहीं किया जिन्हें उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। और उन्हें छोटे ऊँटों के रूप में अल्लाह का खज़ाना (गनीमा) मिला, जिससे वह संतुष्ट थे, और उन्हें एक हबस्याह औरत मिली जिसने उनके बच्चे को दूध पिलाया, जिसे उन्होंने तब अपनी मौत पर अपने गले में एक अड़चन समझा। आखिर में उन्होंने यह काम अपने बाद आने वाले खलीफा को सौंप दिया, और अपने दोस्त (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के मनहज को कायम रखते हुए, नेकी और साफ-सफाई की हालत में दुनिया से चले गए। फिर उनके बाद उमर बिन खत्ताब खलीफा बने; उन्होंने कई शहर बनाए और उन्हें तरक्की दिलाई, उन्होंने सख्ती और नरमी को मिलाया, उन्होंने अपनी आस्तीनें और पिंडलियां चढ़ा लीं (मतलब उन्होंने जितनी मेहनत कर सकते थे, की), उन्होंने समस्या के आस-पास की हर चीज़ का इंतज़ाम किया, और उन्होंने जंग के लिए सारा सामान तैयार किया, इसलिए जब मुगीरा बिन स्यूबा रदलिअल्लाहुअन्हु के गुलाम ने उन्हें चाकू मारा, तो उन्होंने इब्न अब्बास रदलिअल्लाहुअन्हु से कहा कि लोगों से पूछो, "क्या लोगों ने कातिल को कन्फर्म कर लिया है?" जब यह खबर आई कि कातिल "मुगीरा बिन स्यूबा का गुलाम" था, तो वह ज़ोर-ज़ोर से अपने रब की तारीफ़ करने लगा, क्योंकि जिसने उसे चाकू मारा था, वह ऐसा इंसान नहीं था जिसे फ़ाई का हक़ था, इसलिए वह यह कह सकता था कि उसने अपना हक़ पाने के लिए अपना खून जायज़ कर दिया। उमर ने अल्लाह सुभानअल्लाहु व तआला की दौलत से लगभग 80 हज़ार ज़्यादा कमाए, और उसने अपना घर भी बेच दिया क्योंकि उसे डर था कि यह उसके बच्चों के लिए डिपेंडेंट न बन जाए। फिर उसने यह खज़ाना अपने बाद आए खलीफ़ा को सौंप दिया, और वह (उमर रदलिअल्लाहु अन्हु) अपने दोस्त के मनहाज के मुताबिक नेकी और साफ़-सफ़ाई की हालत में दुनिया से चला गया। तो, ऐ उमर बिन अब्द अज़ीज़, दुनिया ने तुम्हारे लिए एक राज बनाया और तुम्हें उसके दो निप्पल दिए, और तुम वहाँ बड़े हुए और रहने के लिए जगह ढूंढते रहे, जब तुम्हें वह ताकत दी गई, तो तुमने उसे वहीं फेंक दिया जहाँ अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला ने फेंका था, तुमने उसे छोड़ दिया, तुमने उसे बुरा समझा, और तुमने उसे गंदा समझा सिवाय उसके जो तुमने खाने के लिए लिया। तारीफ़ अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला की है, तुम्हारी वजह से हमारे गुनाह साफ़ हो गए हैं, हमारी मुसीबतें ज़ाहिर हो गई हैं, इसलिए चलते रहो, पीछे मुड़कर मत देखो, क्योंकि कुछ भी सही को हरा नहीं सकता, और कुछ भी गलत को नहीं हरा सकता। मेरे लिए ये शब्द कहना काफ़ी है, मैं अल्लाह सुभानअल्लाहु वा तआला से अपने और ईमान वालों के लिए माफ़ी मांगता हूँ।” खालिद बिन मदन रहिमहुल्लाह ने कहा: “फिर उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने कुछ कहा।” इब्न हैतसम ने मुझसे कहा: “आगे बढ़ो और पीछे मुड़कर मत देखो।”
इमाम दरिमी : 92
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مَالِكٍ النُّكْرِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو الْجَوْزَاءِ أَوْسُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قُحِطَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ قَحْطًا شَدِيدًا فَشَكَوْا إِلَى عَائِشَةَ فَقَالَتْ انْظُرُوا قَبْرَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاجْعَلُوا مِنْهُ كِوًى إِلَى السَّمَاءِ حَتَّى لَا يَكُونَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ السَّمَاءِ سَقْفٌ قَالَ فَفَعَلُوا فَمُطِرْنَا مَطَرًا حَتَّى نَبَتَ الْعُشْبُ وَسَمِنَتْ الْإِبِلُ حَتَّى تَفَتَّقَتْ مِنْ الشَّحْمِ فَسُمِّيَ عَامَ الْفَتْقِ
हमें बताया गया है कि [अबू नूमान] ने हमें बताया है [सईद बिन ज़ैद] ने हमें बताया है [उमर बिन मलिक अन नुकरी] ने हमें बताया है [अबू अल जौज़ा` औस बिन अब्दुल्लाह], उन्होंने कहा: "एक दिन मदीना के लोगों को बहुत ज़्यादा सूखा पड़ा, और उस समय उन्होंने [आयशा] रदलिअल्लाहुअन्हा से शिकायत की, तो उन्होंने कहा: "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कब्र पर जाओ, आसमान की तरफ एक छेद बनाओ और उसके और आसमान के बीच कोई छत न बनने दो। फिर अबू अल जौज़ा` ने अपनी कहानी जारी रखी: "फिर मदीना के लोगों ने वही किया जो आयशा रदलिअल्लाहुअन्हा ने आदेश दिया था, उसके बाद बारिश हुई और घास उग आई और जानवर स्वस्थ हो गए। इसलिए उस साल को जीत का साल कहा जाता है।"
इमाम दरिमी : 93
أَخْبَرَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ قَالَ لَمَّا كَانَ أَيَّامُ الْحَرَّةِ لَمْ يُؤَذَّنْ فِي مَسْجِدِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثًا وَلَمْ يُقَمْ وَلَمْ يَبْرَحْ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ مِنْ الْمَسْجِدِ وَكَانَ لَا يَعْرِفُ وَقْتَ الصَّلَاةِ إِلَّا بِهَمْهَمَةٍ يَسْمَعُهَا مِنْ قَبْرِ النَّبِيِّ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ
हमें [मरवान बिन मुहम्मद] ने [सईद बिन अब्दुल अज़ीज़] से बताया कि उन्होंने कहा: "जब बहुत ज़्यादा सूखा मौसम होता था, तो नबवी मस्जिद में तीन बार अज़ान नहीं होती थी, न ही इक़ामत होती थी। और, [सईद बिन अल मुसय्यब] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद से बाहर नहीं निकलते थे। उन्हें नमाज़ का समय तब तक पता नहीं चलता था जब तक पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कब्र की तरफ़ से आवाज़ें न सुनाई दें। फिर उन्होंने इसका मतलब बताया।
इमाम दरिमी : 94
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي خَالِدٌ هُوَ ابْنُ يَزِيدَ عَنْ سَعِيدٍ هُوَ ابْنُ أَبِي هِلَالٍ عَنْ نُبَيْهِ بْنِ وَهْبٍ أَنَّ كَعْبًا دَخَلَ عَلَى عَائِشَةَ فَذَكَرُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ كَعْبٌ مَا مِنْ يَوْمٍ يَطْلُعُ إِلَّا نَزَلَ سَبْعُونَ أَلْفًا مِنْ الْمَلَائِكَةِ حَتَّى يَحُفُّوا بِقَبْرِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَضْرِبُونَ بِأَجْنِحَتِهِمْ وَيُصَلُّونَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى إِذَا أَمْسَوْا عَرَجُوا وَهَبَطَ مِثْلُهُمْ فَصَنَعُوا مِثْلَ ذَلِكَ حَتَّى إِذَا انْشَقَّتْ عَنْهُ الْأَرْضُ خَرَجَ فِي سَبْعِينَ أَلْفًا مِنْ الْمَلَائِكَةِ يَزِفُّونَهُ
हमें बताया गया है कि [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने मुझे बताया है, [अल लैत्स] ने मुझे बताया है, [खालिद इब्नु यज़ीद], [सईद इब्नु अबू हिलाल] से [नुबैह बिन वहब] से कि काअब ऐश्या रदलिअल्लाहुअन्हा से मिलने आया था। फिर साथियों ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का नाम लिया, [काअब] ने कहा: "एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब तक एक हज़ार फ़रिश्ते उतरकर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कब्र को घेर न लें, वे अपने पंख फड़फड़ाएँ और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दुआएँ दें। यहाँ तक कि शाम हो जाती है, वे (आसमान पर) चढ़ जाते हैं, और फ़रिश्ते उसी तरह उतरते हैं और पहले की तरह ही करते हैं, जब तक कि धरती फट नहीं गई, वह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सत्तर हज़ार फ़रिश्तों के साथ बाहर आए।"
इमाम दरिमी : 95
أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ أَخْبَرَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنِي خَالِدُ بْنُ مَعْدَانَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ عِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ قَالَ صَلَّى لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الْفَجْرِ ثُمَّ وَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً ذَرَفَتْ مِنْهَا الْعُيُونُ وَوَجِلَتْ مِنْهَا الْقُلُوبُ فَقَالَ قَائِلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَأَنَّهَا مَوْعِظَةُ مُوَدِّعٍ فَأَوْصِنَا فَقَالَ أُوصِيكُمْ بِتَقْوَى اللَّهِ وَالسَّمْعِ وَالطَّاعَةِ وَإِنْ كَانَ عَبْدًا حَبَشِيًّا فَإِنَّهُ مَنْ يَعِشْ مِنْكُمْ بَعْدِي فَسَيَرَى اخْتِلَافًا كَثِيرًا فَعَلَيْكُمْ بِسُنَّتِي وَسَنَّةِ الْخُلَفَاءِ الرَّاشِدِينَ الْمَهْدِيِّينَ عَضُّوا عَلَيْهَا بِالنَّوَاجِذِ وَإِيَّاكُمْ وَالْمُحْدَثَاتِ فَإِنَّ كُلَّ مُحْدَثَةٍ بِدْعَةٌ و قَالَ أَبُو عَاصِمٍ مَرَّةً وَإِيَّاكُمْ وَمُحْدَثَاتِ الْأُمُورِ فَإِنَّ كُلَّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ
हमें बताया है [अबू आशिम] ने हमें बताया है [सौर बिन यज़ीद] ने मुझे बताया है [खालिद बिन मदान] ने [अब्दुर रहमान बिन अम्र] से [इरबदल बिन सरिया] ने कहा; "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने हमारे साथ सुबह की नमाज़ पढ़ी, फिर उन्होंने हमें बहुत गहरी सलाह दी यहाँ तक कि (हमारे) आँसू बहने लगे और (हम) सावधानी से काँपने लगे, फिर किसी ने पूछा; "ऐ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम, जैसे कि यह सलाह आखिरी सलाह थी (जो आपने दी थी), तो हमें एक वसीयत दें। फिर उसने कहा: "मैं तुम्हें अल्लाह सुब्हानल्लाहु व तआला से डरने और हमेशा (नेताओं की) सुनने और मानने का हुक्म देता हूँ, भले ही वह हबस्या का गुलाम हो, असल में तुममें से जो भी मेरे बाद ज़िंदा होगा, उसे ज़रूर बहुत सारे फ़र्क नज़र आएंगे, तो तुम्हें मेरी सुन्नत और ख़ुलफ़ाउर्रसीदीन की सीधी सुन्नत पर चलना चाहिए, उसे अपनी दाढ़ों से काटना चाहिए (मज़बूती से पकड़ना चाहिए), हर नई चीज़ से सावधान रहना चाहिए (बिदअत), क्योंकि हर नई चीज़ बिदअत है।" अबू आशिम ने कहा: "तुम्हें (धर्म में) नई चीज़ों से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि हर नई चीज़ पाखंड है।"
इमाम दरिमी : 96
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يُونُسَ بْنِ يَزِيدَ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ كَانَ مَنْ مَضَى مِنْ عُلَمَائِنَا يَقُولُونَ الِاعْتِصَامُ بِالسُّنَّةِ نَجَاةٌ وَالْعِلْمُ يُقْبَضُ قَبْضًا سَرِيعًا فَنَعْشُ الْعِلْمِ ثَبَاتُ الدِّينِ وَالدُّنْيَا وَفِي ذَهَابِ الْعِلْمِ ذَهَابُ ذَلِكَ كُلِّهِ
[अबू अल मुगीरा] ने हमें बताया है कि [अल `औज़ाई] ने हमें [यूनुस बिन यज़ीद] से [अज़ ज़ुहरी] से वर्णित किया है, जिन्होंने कहा: "हमारे विद्वानों में से कोई भी नहीं गुज़रा है, सिवाय इसके कि वे कहते हैं: 'सुन्नत पर मज़बूती से पकड़ रखना सफलता है, और ज्ञान जल्दी से छीन लिया जाएगा, ज्ञान की स्थापना धर्म और दुनिया की स्थापना है, और ज्ञान के नुकसान के साथ वह सब कुछ खो जाता है।'
इमाम दरिमी : 97
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي عَمْرٍو السَّيْبَانِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ قَالَ بَلَغَنِي أَنَّ أَوَّلَ الدِّينِ تَرْكًا السُّنَّةُ يَذْهَبُ الدِّينُ سُنَّةً سُنَّةً كَمَا يَذْهَبُ الْحَبْلُ قُوَّةً قُوَّةً
हमें [अबू अल मुगीरा] ने [अल `औज़ाई] को [याह्या बिन अबू अम्र अस साइबानी] से [अब्दुल्ला बिन अद दैलामी] से बताया है कि उन्होंने कहा: "(खबर) मेरे पास आई है कि धर्म की समस्याओं में से सबसे पहले सुन्नत को छोड़ दिया जाना है, यह धर्म अपनी सुन्नत को एक-एक करके खो देगा जैसे एक धागा थोड़ा-थोड़ा करके कट जाता है।"
इमाम दरिमी : 98
أَخْبَرَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ حَسَّانَ قَالَ مَا ابْتَدَعَ قَوْمٌ بِدْعَةً فِي دِينِهِمْ إِلَّا نَزَعَ اللَّهُ مِنْ سُنَّتِهِمْ مِثْلَهَا ثُمَّ لَا يُعِيدُهَا إِلَيْهِمْ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ
हमें बताया गया है कि अबू अल मुगीरा ने हज़रत हसन से कहा है कि उन्होंने कहा: "ऐसे लोग नहीं हैं जो अपने धर्म में कोई बिदअत करें, लेकिन अल्लाह सुब्हानल्लाहु तआला उनकी सुन्नत से बिदअत का एक हिस्सा हटा देगा (जो उन्होंने किया है) फिर वह क़यामत के दिन तक उस सुन्नत को वापस नहीं करेगा।"
इमाम दरिमी : 99
أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ مَا ابْتَدَعَ رَجُلٌ بِدْعَةً إِلَّا اسْتَحَلَّ السَّيْفَ
हमें बताया है [मुस्लिम बिन इब्राहिम] ने हमें बताया है [वुहैब] ने हमें बताया है [अय्यूब] ने [अबू किलाबा] से कहा है उन्होंने कहा: "कोई भी विधर्म नहीं करता जब तक कि वह तलवार को काटने की अनुमति न दे।"
इमाम दरिमी : 100
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ قَالَ إِنَّ أَهْلَ الْأَهْوَاءِ أَهْلُ الضَّلَالَةِ وَلَا أَرَى مَصِيرَهُمْ إِلَّا النَّارَ فَجَرِّبْهُمْ فَلَيْسَ أَحَدٌ مِنْهُمْ يَنْتَحِلُ قَوْلًا أَوْ قَالَ حَدِيثًا فَيَتَنَاهَى بِهِ الْأَمْرُ دُونَ السَّيْفِ وَإِنَّ النِّفَاقَ كَانَ ضُرُوبًا ثُمَّ تَلَا { وَمِنْهُمْ مَنْ عَاهَدَ اللَّهَ } { وَمِنْهُمْ مَنْ يَلْمِزُكَ فِي الصَّدَقَاتِ } { وَمِنْهُمْ الَّذِينَ يُؤْذُونَ النَّبِيَّ } فَاخْتَلَفَ قَوْلُهُمْ وَاجْتَمَعُوا فِي الشَّكِّ وَالتَّكْذِيبِ وَإِنَّ هَؤُلَاءِ اخْتَلَفَ قَوْلُهُمْ وَاجْتَمَعُوا فِي السَّيْفِ وَلَا أَرَى مَصِيرَهُمْ إِلَّا النَّارَ قَالَ حَمَّادٌ ثُمَّ قَالَ أَيُّوبُ عِنْدَ ذَا الْحَدِيثِ أَوْ عِنْدَ الْأَوَّلِ وَكَانَ وَاللَّهِ مِنْ الْفُقَهَاءِ ذَوِي الْأَلْبَابِ يَعْنِي أَبَا قِلَابَةَ
हमें [सुलेमान बिन हर्ब] ने बताया है हमें [हम्माद बिन ज़ैद] [अय्यूब] से [अबू क़िलबा] से बताया है उन्होंने कहा: "वास्तव में वासना के उपासक वे लोग हैं जो भटक गए हैं, और मैं नरक के अलावा उनकी यात्रा का अंत नहीं देखता। उन्हें परीक्षण में रखो। उनमें से कोई भी ऐसा नहीं है जो शब्दों का हवाला देता है या कहता है, जब तक कि समस्या तलवार के अलावा कुछ नहीं होती। वास्तव में, पाखंड उनकी विशेषता बन गया है। फिर उन्होंने आयत पढ़ी "वा मिनहुम मन 'अहदल्लाह' (और उनमें ऐसे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह सुभानल्लाहु वा तआला से प्रतिज्ञा की है) -Qs. तौबा: 75-, और आयत "WA MINHUM MAN YALMIZUKA FIS SHADAQAAT' (और उनमें वे लोग भी हैं जो ज़कात बांटने के बारे में तुम्हारी बुराई करते हैं) -Qs. तौबा: 58-, और आयत "WAMINHUMULLADZINA YU`DZUUNANABIYYA' (और उनमें वे पाखंडी भी हैं जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दुख पहुंचाते हैं) -Qs. तौबा: 116-,. फिर उनकी राय अलग हो गई और वे झगड़ने लगे, और आखिर में वे शक और झूठ में इकट्ठा हो गए। बेशक, उनकी राय अलग हो गई और वे तलवारों की पकड़ में एक हो गए। और मैंने उनका रास्ता जहन्नम के अलावा नहीं देखा"। हम्माद ने कहा: "अय्यूब ने इस हदीस या पहली हदीस के बारे में कहा, अल्लाह सुभानल्लाहु वा तआला की कसम, वह सबसे बुद्धिमान फ़क़ीरों में से एक थे, मेरा मतलब अबू क़िलाबा से है"।