इमाम दरिमी : 61
أَخْبَرَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ أَخْبَرَنَا ثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَزْهَرَ اللَّوْنِ كَأَنَّ عَرَقَهُ اللُّؤْلُؤُ إِذَا مَشَى تَكَفَّأَ وَمَا مَسِسْتُ حَرِيرَةً وَلَا دِيبَاجَةً أَلْيَنَ مِنْ كَفِّهِ وَلَا شَمِمْتُ رَائِحَةً قَطُّ أَطْيَبُ مِنْ رَائِحَتِهِ مِسْكَةً وَلَا غَيْرَهَا
हज्जाज बिन मिन्हाल ने हमें बताया है, हम्माद बिन सलामा ने हमें बताया है, अनस ने कहा है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक ऐसे इंसान थे जिनकी चमड़ी इतनी गोरी थी कि उनका पसीना जवाहरात जैसा था, जब वह सीधे चलते थे, और मैंने कभी भी उनके हाथ की हथेली से ज़्यादा महीन रेशम या ऊन नहीं छुआ, और मैंने कभी भी मिस्क या किसी और चीज़ की खुशबू नहीं ली जो उनकी खुशबू से ज़्यादा खुशबूदार हो।
इमाम दरिमी : 62
أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ خَدَمْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَا قَالَ لِي أُفٍّ قَطُّ وَلَا قَالَ لِي لِشَيْءٍ صَنَعْتُهُ لِمَ صَنَعْتَ كَذَا وَكَذَا أَوْ هَلَّا صَنَعْتَ كَذَا وَكَذَا وَقَالَ لَا وَاللَّهِ مَا مَسِسْتُ بِيَدِي دِيبَاجًا وَلَا حَرِيرًا أَلْيَنَ مِنْ يَدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا وَجَدْتُ رِيحًا قَطُّ أَوْ عَرْفًا كَانَ أَطْيَبَ مِنْ عَرْفِ أَوْ رِيحِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें [अबू नूमान] ने बताया है कि [हम्मद बिन ज़ैद] ने [थबीत] से [अनस बिन मलिक] रदलिअल्लाहुअन्हु से कहा; पहले, मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मदद की और उन्होंने कभी मुझसे नहीं कहा: "आह (बास, हुस, और इसी तरह की चीखें)", या उन्होंने मेरे किसी भी काम के बारे में कहा: "तुम यह और यह क्यों करते हो?", या "तुम्हें यह और यह करना है?" और अनस ने कहा; नहीं, मैंने कभी ऊनी रेशमी कपड़े को नहीं छुआ जो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथों से ज़्यादा महीन है, और मैंने कभी भी इत्र और पसीने को नहीं सूंघा है। पसीने या पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खुशबू से ज़्यादा खुशबूदार।
इमाम दरिमी : 63
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ الرِّفَاعِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ عَنْ حَبِيبِ بْنِ خُدْرَةَ قَالَ حَدَّثَنِي رَجُلٌ مِنْ بَنِي حُرَيْشٍ قَالَ كُنْتُ مَعَ أَبِي حِينَ رَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَاعِزَ بْنَ مَالِكٍ فَلَمَّا أَخَذَتْهُ الْحِجَارَةُ أُرْعِبْتُ فَضَمَّنِي إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَالَ عَلَيَّ مِنْ عَرَقِ إِبْطِهِ مِثْلُ رِيحِ الْمِسْكِ
मुहम्मद बिन यज़ीद अ. रिफ़ाई ने हमें बताया है कि अबू बकर ने हबीब बिन ख़द्रह से मुझे बताया है कि बनी हुरैसी से किसी ने कहा है कि पहले मैं अपने पिता के साथ था जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने माइज़ बिन मलिक को पत्थर मारे, जब पत्थर उन्हें लगे तो मैं कांप गया फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे गले लगाया फिर उनकी बगल से पसीना टपक रहा था जिससे मिस्क (खुशबू) की तरह महक आ रही थी।
इमाम दरिमी : 64
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْبَرَاءِ قَالَ سَأَلَهُ رَجُلٌ قَالَ أَرَأَيْتَ كَانَ وَجْهُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ السَّيْفِ قَالَ لَا مِثْلَ الْقَمَرِ
उन्होंने कहा, "अबू नुआइम ने हमें बताया है, ज़ुहैर ने हमें बताया है, अबू इसहाक ने हमें बताया है।" किसी ने उनसे पूछा, "क्या आपने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का चेहरा तलवार जैसा देखा?" उन्होंने जवाब दिया, "नहीं, उनका चेहरा चाँद जैसा है।"
इमाम दरिमी : 65
أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعْرَفُ بِاللَّيْلِ بِرِيحِ الطِّيبِ
यज़ीद बिन हारून ने हमें [अल अमासी] से [इब्राहिम] तक [शरिया] का उपदेश दिया है, उन्होंने कहा; "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को रात में उनकी खुशबू से पहचाना जाता था।"
इमाम दरिमी : 66
أَخْبَرَنَا مَالِكُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ الْفَضْلِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْهَاشِمِيُّ أَخْبَرَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَسْلُكْ طَرِيقًا أَوْ لَا يَسْلُكُ طَرِيقًا فَيَتْبَعُهُ أَحَدٌ إِلَّا عَرَفَ أَنَّهُ قَدْ سَلَكَهُ مِنْ طِيبِ عَرْفِهِ أَوْ قَالَ مِنْ رِيحِ عَرَقِهِ
हमें बताया है [मलिक बिन इस्माइल] ने हमें बताया है [इसहाक बिन अल फदल बिन अब्दुर्रहमान अल हसीमी] ने हमें [अल मुगीरा बिन अथिया] [अबू जुबैर] से [जाबिर] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक भी सड़क से नहीं गुजरे या उन्होंने एक सड़क से गुज़रा लेकिन यह पता चला कि वह (बस) उस सड़क से गुज़रे हैं, उनके पसीने की गंध से या उन्होंने कहा; उनके सुगंधित पसीने से।
इमाम दरिमी : 67
أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو اللَّيْثِيُّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْكُلُ الْهَدِيَّةَ وَلَا يَقْبَلُ الصَّدَقَةَ فَأَهْدَتْ لَهُ امْرَأَةٌ مِنْ يَهُودِ خَيْبَرَ شَاةً مَصْلِيَّةً فَتَنَاوَلَ مِنْهَا وَتَنَاوَلَ مِنْهَا بِشْرُ بْنُ الْبَرَاءِ ثُمَّ رَفَعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ ثُمَّ قَالَ إِنَّ هَذِهِ تُخْبِرُنِي أَنَّهَا مَسْمُومَةٌ فَمَاتَ بِشْرُ بْنُ الْبَرَاءِ فَأَرْسَلَ إِلَيْهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا حَمَلَكِ عَلَى مَا صَنَعْتِ فَقَالَتْ إِنْ كُنْتَ نَبِيًّا لَمْ يَضُرَّكَ شَيْءٌ وَإِنْ كُنْتَ مَلِكًا أَرَحْتُ النَّاسَ مِنْكَ فَقَالَ فِي مَرَضِهِ مَا زِلْتُ مِنْ الْأَكْلَةِ الَّتِي أَكَلْتُ بِخَيْبَرَ فَهَذَا أَوَانُ انْقِطَاعِ أَبْهَرِي
हमें [जाफर बिन 'औन] ने हमें [मुहम्मद बिन 'अम्र अल लैतसी] [अबू सलामा] से सूचित किया है उन्होंने कहा; अतीत में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उपहार खाने (स्वीकार करने) के लिए तैयार थे और दान स्वीकार नहीं करना चाहते थे, इसलिए एक खैबर यहूदी महिला ने उन्हें (शल्लाहु अलैहि वसल्लम) भुना हुआ बकरा दिया और उन्होंने इसे खाया जैसा कि बिसीर बिन बर्रा ने किया, फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना हाथ उठाया और कहा: वास्तव में, इस बकरे ने मुझे बताया कि इसे जहर (से सना हुआ) किया गया था। इसलिए बिसीर बिन अल बर्रा की मृत्यु हो गई, इसलिए पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए किसी को भेजा, और उन्होंने पूछा: आपने यह जघन्य कार्य करने के लिए क्या प्रेरित किया? महिला ने उत्तर दिया; "अगर तुम सच में पैगंबर होते, तो कोई तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाता। दूसरी तरफ, अगर तुम राजा होते, तो मैं लोगों को तुमसे आज़ाद करा देता।" बीमार होने पर उसने कहा: मुझे आज भी उस खाने का असर महसूस होता है जो मैंने खैबर में खाया था, और यह तब की बात है जब मेरी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी।
इमाम दरिमी : 68
أَخْبَرَنَا الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ أَخْبَرَنَا شُعَيْبُ بْنُ أَبِي حَمْزَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ كَانَ جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ يُحَدِّثُ أَنَّ يَهُودِيَّةً مِنْ أَهْلِ خَيْبَرَ سَمَّتْ شَاةً مَصْلِيَّةً ثُمَّ أَهْدَتْهَا لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخَذَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهَا الذِّرَاعَ فَأَكَلَ مِنْهَا وَأَكَلَ الرَّهْطُ مِنْ أَصْحَابِهِ مَعَهُ ثُمَّ قَالَ لَهُمْ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْفَعُوا أَيْدِيَكُمْ وَأَرْسَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْيَهُودِيَّةِ فَدَعَاهَا فَقَالَ لَهَا أَسَمَمْتِ هَذِهِ الشَّاةَ فَقَالَتْ نَعَمْ وَمَنْ أَخْبَرَكَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخْبَرَتْنِي هَذِهِ فِي يَدِيَ الذِّرَاعُ قَالَتْ نَعَمْ قَالَ فَمَاذَا أَرَدْتِ إِلَى ذَلِكَ قَالَتْ قُلْتُ إِنْ كَانَ نَبِيًّا لَمْ يَضُرَّهُ وَإِنْ لَمْ يَكُنْ نَبِيًّا اسْتَرَحْنَا مِنْهُ فَعَفَا عَنْهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَمْ يُعَاقِبْهَا وَتُوُفِّيَ بَعْضُ أَصْحَابِهِ الَّذِينَ أَكَلُوا مِنْ الشَّاةِ وَاحْتَجَمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى كَاهِلِهِ مِنْ أَجْلِ الَّذِي أَكَلَ مِنْ الشَّاةِ حَجَمَهُ أَبُو هِنْدٍ مَوْلَى بَنِي بَيَاضَةَ بِالْقَرْنِ وَالشَّفْرَةِ وَهُوَ مِنْ بَنِي ثُمَامَةَ وَهُمْ حَيٌّ مِنْ الْأَنْصَارِ
हमें सूचित किया है [अल हकम बिन नफी] ने हमें सूचित किया है [स्यूएब बिन अबू हमजा] [अज़ ज़ुहरी] से उन्होंने कहा; [जाबिर बिन अब्दुल्ला] रदलिअल्लाहुअन्हु ने वर्णित किया; खैबर की एक यहूदी महिला ने भुने हुए बकरे के मांस पर जहर लगाया और इसे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दिया। पैगंबर ने मांस को अपने उल्ना से निकाला और खाया, और उनके कुछ साथियों ने भी उनके साथ खाया। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तुरंत उनसे कहा: "अपने हाथ ऊपर उठाओ।" फिर उन्होंने किसी को यहूदी महिला को पकड़ने और उससे पूछताछ करने के लिए भेजा: "क्या तुमने बकरे को जहर लगाया था?" उसने उत्तर दिया; "हाँ, यह सही है।" महिला ने पूछा; "आपको कौन बता सकता था?" पैगंबर ने उत्तर दिया: "जिसने मुझे बताया वह मेरे हाथ में है," - जिसका अर्थ था सैम्पिल की हड्डी - महिला ने कहा उसने जवाब दिया, "मैं बस यह साबित करना चाहती थी कि अगर कोई पैगंबर उसे नुकसान नहीं पहुंचाता है और अगर नहीं, तो हम इससे आज़ाद हैं।" तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उसे सज़ा न देकर माफ़ कर दिया, जबकि बकरे का मीट खाने वाले कुछ दूसरे साथी मर गए। पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बकरे के मीट से खाया हुआ ज़हर निकालने के लिए अपनी पीठ के ऊपरी हिस्से को पकड़ा। उन्हें बनी बयादह के मौला अबू हिंद ने सींग और चाकू से मारा था, वह बनी थुमामा से थे जो अंसार कबीले का हिस्सा है।
इमाम दरिमी : 69
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيُّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ لَمَّا فَتَحْنَا خَيْبَرَ أُهْدِيَتْ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَاةٌ فِيهَا سُمٌّ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اجْمَعُوا لِي مَنْ كَانَ هَا هُنَا مِنْ الْيَهُودِ فَجُمِعُوا لَهُ فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي سَائِلُكُمْ عَنْ شَيْءٍ فَهَلْ أَنْتُمْ صَادِقِيَّ عَنْهُ قَالُوا نَعَمْ يَا أَبَا الْقَاسِمِ فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَبُوكُمْ قَالُوا أَبُونَا فُلَانٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَذَبْتُمْ بَلْ أَبُوكُمْ فُلَانٌ قَالُوا صَدَقْتَ وَبَرَرْتَ فَقَالَ لَهُمْ هَلْ أَنْتُمْ صَادِقِيَّ عَنْ شَيْءٍ إِنْ سَأَلْتُكُمْ عَنْهُ فَقَالُوا نَعَمْ وَإِنْ كَذَبْنَاكَ عَرَفْتَ كَذِبَنَا كَمَا عَرَفْتَ فِي آبَائِنَا فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَنْ أَهْلُ النَّارِ فَقَالُوا نَكُونُ فِيهَا يَسِيرًا ثُمَّ تَخْلُفُونَا فِيهَا قَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اخْسَئُوا فِيهَا وَاللَّهِ لَا نَخْلُفُكُمْ فِيهَا أَبَدًا ثُمَّ قَالَ لَهُمْ هَلْ أَنْتُمْ صَادِقِيَّ عَنْ شَيْءٍ إِنْ سَأَلْتُكُمْ عَنْهُ قَالُوا نَعَمْ قَالَ هَلْ جَعَلْتُمْ فِي هَذِهِ الشَّاةِ سُمًّا قَالُوا نَعَمْ قَالَ مَا حَمَلَكُمْ عَلَى ذَلِكَ قَالُوا أَرَدْنَا إِنْ كُنْتَ كَاذِبًا أَنْ نَسْتَرِيحَ مِنْكَ وَإِنْ كُنْتَ نَبِيًّا لَمْ يَضُرَّكَ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने मुझे बताया है [अल लैट्स] ने मुझे बताया है [सईद बिन अबू सईद अल मकबूरी] [अबू हुरैरा] रदलिअल्लाहुअन्हु से उन्होंने कहा; "जब हमने खैबर को जीत लिया, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को तोहफे के तौर पर एक ज़हरीला बकरा दिया गया था। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तुरंत कहा: 'कृपया यहां मौजूद यहूदियों को इकट्ठा करें।' मुहम्मद शालल्लाहु अलैहि वसल्लम)। ' लालू रसूलुल्लाह शालल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'क्या तुम सच में झूठ बोल रहे हो? ' मेरा जवाब; 'अयाह हमी सी फुलन। ' केमुदियन रसूलुल्लाह शालल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कलियाँ बोहोंग!, तेतापी अयाह कलियाँ अडाला सी फुलन। ' मेरा जवाब; 'बगिंदा बेनार। ' लालू बेलिउ ने कहा: 'क्या तुम सच में झूठ बोल रहे हो? ' मेरा जवाब; 'या, लेकिन तुम सच में झूठ बोल रहे हो, साहब इसे जान लो, जैसा कि तुम हमारे पूर्वजों को जानते हो। ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे पूछा: 'नरक के निवासी कौन हैं? उन्होंने जवाब दिया; 'हम कुछ समय के लिए इसमें थे और फिर उसने हमें इसमें बदल दिया।' तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: तुम इसमें अपमानित होगे, अल्लाह सुब्हानहु व तआला की कसम हम तुम्हें इसमें हमेशा के लिए नहीं बदलेंगे। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे पूछा: क्या तुम उस सवाल के बारे में सच बताओगे जो मैं तुमसे पूछूंगा?, उन्होंने जवाब दिया; हाँ। उन्होंने कहा: क्या तुमने बकरे के (मांस) में जहर डाला था? उन्होंने जवाब दिया; हाँ, उन्होंने पूछा: तुमने ऐसा क्यों किया? उन्होंने जवाब दिया; हम आज़ाद होना चाहते हैं अगर तुम झूठे हो और अगर तुम सच में एक पैगंबर हो तो (जहर) तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।
इमाम दरिमी : 70
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ ابْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ مَا سُئِلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا قَطُّ فَقَالَ لَا قَالَ أَبُو مُحَمَّد قَالَ ابْنُ عُيَيْنَةَ إِذَا لَمْ يَكُنْ عِنْدَهُ وَعَدَ
हमें [मुहम्मद बिन यूसुफ] ने [सुफ़यान] से [इब्न अल मुनकादिर] से [जाबिर] तक बताया है कि उन्होंने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कभी कुछ मांगा नहीं गया और फिर उन्होंने ना में जवाब दिया। अबू मुहम्मद ने कहा; इब्न उयैना ने कहा; अगर उनके पास मांग नहीं है, तो निश्चित रूप से वह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वादा करेंगे।
इमाम दरिमी : 71
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عِمْرَانَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ عَنْ زَمْعَةَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَيِيًّا لَا يُسْأَلُ شَيْئًا إِلَّا أَعْطَاهُ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन इमरान] ने हमें बताया है [अबू दाउद अल थायालित्सी] [ज़मा] से [अबू हाज़िम] से [साहल बिन सअद] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक शर्मीले आदमी थे, और उनसे कुछ भी नहीं मांगा जाता था, लेकिन वे दे देते थे।
इमाम दरिमी : 72
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ أَبِي خَلَفٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ زَحَمْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ حُنَيْنٍ وَفِي رِجْلِي نَعْلٌ كَثِيفَةٌ فَوَطِئْتُ بِهَا عَلَى رِجْلِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَفَحَنِي نَفْحَةً بِسَوْطٍ فِي يَدِهِ وَقَالَ بِسْمِ اللَّهِ أَوْجَعْتَنِي قَالَ فَبِتُّ لِنَفْسِي لَائِمًا أَقُولُ أَوْجَعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَبِتُّ بِلَيْلَةٍ كَمَا يَعْلَمُ اللَّهُ فَلَمَّا أَصْبَحْنَا إِذَا رَجُلٌ يَقُولُ أَيْنَ فُلَانٌ قَالَ قُلْتُ هَذَا وَاللَّهِ الَّذِي كَانَ مِنِّي بِالْأَمْسِ قَالَ فَانْطَلَقْتُ وَأَنَا مُتَخَوِّفٌ فَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّكَ وَطِئْتَ بِنَعْلِكَ عَلَى رِجْلِي بِالْأَمْسِ فَأَوْجَعْتَنِي فَنَفَحْتُكَ نَفْحَةً بِالسَّوْطِ فَهَذِهِ ثَمَانُونَ نَعْجَةً فَخُذْهَا بِهَا
हमें बताया है [मुहम्मद बिन अहमद बिन अबू खलफ] ने हमें बताया है [अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद] ने [मुहम्मद बिन इसहाक] से मुझे [अब्दुल्ला बिन अबू बक्र] ने [अरब के किसी व्यक्ति] से बताया है उसने कहा; मैं हुनैन की लड़ाई में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से भिड़ रहा था और मैंने बड़े सैंडल पहने थे, फिर मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पैरों पर पैर रख दिया। तो उन्होंने मुझे अपने हाथ में कोड़े से मारा, और कहा: बिस्मिल्लाह, तुमने मुझे चोट पहुँचाई है। कथावाचक (अरबी व्यक्ति) ने कहा; शाम को मैंने खुद से बुदबुदाया; मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को चोट पहुँचाई है। फिर मैंने उस समय रात बिताई जिसके बारे में केवल अल्लाह सुभानहु वा तआला को पता है। सुबह, किसी ने अचानक पूछा; फलां कहाँ है? कथावाचक (अरबी व्यक्ति) ने कहा; मैंने फुसफुसाया; अल्लाह सुब्हानहु व तआला की कसम, यह वही आदमी है जिससे कल मुझे दिक्कत हुई थी। उसने कहा; मैं डर के मारे चला गया। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने मुझसे कहा: सच में, कल तुमने ही मेरे पैर पर पैर रखा था और मुझे बीमार कर दिया था, इसलिए मैंने तुम्हें कोड़े से मारा, तो ये रही अस्सी भेड़ें, बदले में इन्हें अपने लिए ले लो।
इमाम दरिमी : 73
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ ابْنِ أَخِي الزُّهْرِيِّ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ إِنَّ جِبْرِيلَ قَالَ مَا فِي الْأَرْضِ أَهْلُ عَشَرَةِ أَبْيَاتٍ إِلَّا قَلَّبْتُهُمْ فَمَا وَجَدْتُ أَحَدًا أَشَدَّ إِنْفَاقًا لِهَذَا الْمَالِ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें बताया है [याकूब बिन हुमैद] ने हमें बताया है [अब्दुल अज़ीज़ बिन मुहम्मद] [इब्न अखी अज़ ज़ुहरी] से [अज़ ज़ुहरी] से उन्होंने कहा; जिब्रील अलैहिस्सलाम ने कहा: इस धरती पर मेरे (अलैहिस्सलाम) के अलावा दस इमारतों का मालिक कोई नहीं है। मैंने उन्हें घुमा दिया है, इसलिए मुझे कोई ऐसा नहीं मिला जिसने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ज़्यादा दिया हो।
इमाम दरिमी : 74
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ عُقَيْلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُكْثِرُ الذِّكْرَ وَيُقِلُّ اللَّغْوَ وَيُطِيلُ الصَّلَاةَ وَيُقْصِرُ الْخُطْبَةَ وَلَا يَأْنَفُ وَلَا يَسْتَنْكِفُ أَنْ يَمْشِيَ مَعَ الْأَرْمَلَةِ وَالْمِسْكِينِ فَيَقْضِيَ لَهُمَا حَاجَتَهُمَا
मुहम्मद बिन हुमैद ने हमें बताया है, अल फदल बिन मूसा ने हमें बताया है, अल हुसैन बिन वाकिद ने [याह्या बिन उकैल] से [अब्दुल्ला बिन अबी औफा] से कहा है; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा अपने ज़िक्र को बढ़ाया, बेकार की चीज़ों को कम किया, अपनी नमाज़ों को लंबा किया, अपने खुतबे को छोटा किया, बदतमीज़ी नहीं की, विधवाओं और गरीबों से बात करके उनके मामले सुलझाने में शर्म महसूस नहीं की।
इमाम दरिमी : 75
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ عِكْرِمَةَ قَالَ قَالَ الْعَبَّاسُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ لَأَعْلَمَنَّ مَا بَقَاءُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِينَا فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي رَأَيْتُهُمْ قَدْ آذَوْكَ وَآذَاكَ غُبَارُهُمْ فَلَوْ اتَّخَذْتَ عَرِيشًا تُكَلِّمُهُمْ مِنْهُ فَقَالَ لَا أَزَالُ بَيْنَ أَظْهُرِهِمْ يَطَئُونَ عَقِبِي وَيُنَازِعُونِي رِدَائِي حَتَّى يَكُونَ اللَّهُ هُوَ الَّذِي يُرِيحُنِي مِنْهُمْ قَالَ فَعَلِمْتُ أَنَّ بَقَاءَهُ فِينَا قَلِيلٌ
हमें [सुलेमान बिन हर्ब] ने हमें [हम्मद बिन ज़ैद] [अय्यूब] से ['इकरीमा] से बताया है उन्होंने कहा; [अब्बास] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; वास्तव में, मैं वास्तव में जानता हूं कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमारे साथ कितने समय तक रहे, कथावाचक (इकरीमा) ने कहा; ऐ अल्लाह के रसूल, मैं देख रहा हूं कि उन्होंने आपको चोट पहुंचाई है और उनकी धूल ने भी आपको चोट पहुंचाई है, क्या होगा यदि मैं उनसे बात करने के लिए आपके लिए एक आश्रय बना दूं? उन्होंने उत्तर दिया: मैं तब भी उनके बीच रहूंगा, भले ही वे मेरे पैरों को रौंदें और मेरी शॉल खींचें जब तक कि अल्लाह सुभानहु वा तआला मुझे उनसे मुक्त नहीं कर देते। कथावाचक ने कहा; इसलिए हम जानते थे कि वह हमारे साथ थोड़े समय ही रहेंगे।
इमाम दरिमी : 76
أَخْبَرَنَا الْحَكَمُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَلِيٍّ قَالَ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَا نَحْجُبُكَ فَقَالَ لَا دَعُوهُمْ يَطَئُونَ عَقِبِي وَأَطَأُ أَعْقَابَهُمْ حَتَّى يُرِيحَنِي اللَّهُ مِنْهُمْ
हमें [अल हकम बिन मूसा] ने बताया है, हमें [याह्या बिन हमज़ा] ने [अल 'औज़ाई] से [दाऊद बिन अली] से बताया है; उन्होंने कहा; अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा गया; क्या होगा यदि हम आपको ढक दें? उन्होंने उत्तर दिया: कोई ज़रूरत नहीं, उन्हें मेरी एड़ी पर कदम रखने दो और मैं उनकी एड़ी पर कदम रखूँ जब तक कि अल्लाह सुब्हानहु व तआला मुझे उनसे मुक्त न कर दे।
इमाम दरिमी : 77
أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَعِيلَ عَنْ أُنَيْسِ بْنِ أَبِي يَحْيَى عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ خَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ وَنَحْنُ فِي الْمَسْجِدِ عَاصِبًا رَأْسَهُ بِخِرْقَةٍ حَتَّى أَهْوَى نَحْوَ الْمِنْبَرِ فَاسْتَوَى عَلَيْهِ وَاتَّبَعْنَاهُ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنِّي لَأَنْظُرُ إِلَى الْحَوْضِ مِنْ مَقَامِي هَذَا ثُمَّ قَالَ إِنَّ عَبْدًا عُرِضَتْ عَلَيْهِ الدُّنْيَا وَزِينَتُهَا فَاخْتَارَ الْآخِرَةَ قَالَ فَلَمْ يَفْطِنْ لَهَا أَحَدٌ غَيْرُ أَبِي بَكْرٍ فَذَرَفَتْ عَيْنَاهُ فَبَكَى ثُمَّ قَالَ بَلْ نَفْدِيكَ بِآبَائِنَا وَأُمَّهَاتِنَا وَأَنْفُسِنَا وَأَمْوَالِنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ثُمَّ هَبَطَ فَمَا قَامَ عَلَيْهِ حَتَّى السَّاعَةِ
हमें बताया है [ज़कारिया बिन अदी] ने हमें बताया है [हातिम बिन इस्माइल] [उनैस बिन अबू याह्या] से [उनके पिता] से [अबू सईद अल खुदरी] से उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे मिलने के लिए बाहर आए जब वह बीमार थे जिससे उनकी मृत्यु हो गई। हम मस्जिद (नबवी मस्जिद) में थे, जब वह अपने सिर पर कपड़े का एक टुकड़ा पट्टी बांध रहे थे, जब तक कि वह पल्पिट के पास नहीं पहुंचे और उस पर बैठ गए। हम उनका पीछा करना जारी रखते हैं। फिर उन्होंने कहा: "उसके हाथ में मेरी आत्मा है, मैं जहां खड़ा हूं वहां से एक झील देखता हूं।" ' कथावाचक (अबू सईद अलखुदज़री) ने कहा: उस समय अबू बकर के अलावा कोई भी नहीं समझ सका कि उन्होंने क्या कहा, इसलिए अबू बकर की आंखों में आंसू भर आए और उन्होंने रोते हुए कहा; हम आपको अपने पिता, अपनी माताओं, अपनी जानों और अपनी संपत्ति के साथ भी छुड़ा लेंगे, फिर वह मंच से नीचे उतर गए और अपनी मृत्यु तक उस पर कभी खड़े नहीं हुए।
इमाम दरिमी : 78
أَخْبَرَنَا خَلِيفَةُ بْنُ خَيَّاطٍ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا ابْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ عَلِيِّ بْنِ عَدِيٍّ عَنْ عُبَيْدٍ مَوْلَى الْحَكَمِ بْنِ أَبِي الْعَاصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي مُوَيْهِبَةَ مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي قَدْ أُمِرْتُ أَنْ أَسْتَغْفِرَ لِأَهْلِ الْبَقِيعِ فَانْطَلِقْ مَعِي فَانْطَلَقْتُ مَعَهُ فِي جَوْفِ اللَّيْلِ فَلَمَّا وَقَفَ عَلَيْهِمْ قَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ يَا أَهْلَ الْمَقَابِرِ لِيُهْنِكُمْ مَا أَصْبَحْتُمْ فِيهِ مِمَّا أَصْبَحَ فِيهِ النَّاسُ أَقْبَلَتْ الْفِتَنُ كَقِطْعِ اللَّيْلِ الْمُظْلِمِ يَتْبَعُ آخِرُهَا أَوَّلَهَا الْآخِرَةُ أَشَدُّ مِنْ الْأُولَى ثُمَّ أَقْبَلَ عَلَيَّ فَقَالَ يَا أَبَا مُوَيْهِبَةَ إِنِّي قَدْ أُوتِيتُ بِمَفَاتِيحِ خَزَائِنِ الدُّنْيَا وَالْخُلْدِ فِيهَا ثُمَّ الْجَنَّةُ فَخُيِّرْتُ بَيْنَ ذَلِكَ وَبَيْنَ لِقَاءِ رَبِّي قُلْتُ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي خُذْ مَفَاتِيحَ خَزَائِنِ الدُّنْيَا وَالْخُلْدَ فِيهَا ثُمَّ الْجَنَّةَ قَالَ لَا وَاللَّهِ يَا أَبَا مُوَيْهِبَةَ لَقَدْ اخْتَرْتُ لِقَاءَ رَبِّي ثُمَّ اسْتَغْفَرَ لِأَهْلِ الْبَقِيعِ ثُمَّ انْصَرَفَ فَبُدِئَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي وَجَعِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ
हमें बताया है [खलीफा बिन खय्यात] ने हमें बताया है [बकर बिन सुलैमान] ने हमें बताया है [इब्न इसहाक] ने मुझे बताया है [अब्दुल्ला बिन उमर बिन अली बिन 'अदी] ['उबैद] से - अल हकम बिन अबू अल 'अश के पूर्व गुलाम- [अब्दुल्ला बिन 'अम्र] से [अबू मुइवैहिबा] से - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पूर्व गुलाम- उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझसे कहा 'वास्तव में, मुझे बाक़ी कब्रिस्तान के निवासियों के लिए क्षमा मांगने का आदेश दिया गया है', फिर वह आधी रात को मेरे साथ चले गए। जब वह उनके (कब्रिस्तान) सामने खड़े थे तो उन्होंने कहा: अस्सलामु अलैकुम याअ अहलाल मकाबिर (इस कब्रिस्तान के निवासियों, आपके साथ समृद्धि हो)। अब बदनामी काली रात के टुकड़ों की तरह फैल गई है, अंत शुरुआत के बाद आता है। और सच में मरने के बाद की ज़िंदगी इस दुनिया की ज़िंदगी से ज़्यादा मुश्किल है। फिर वह मेरी तरफ मुड़ा और बोला: ऐ अबू मुवाइहिबा, मुझे दुनिया के भंडार और उसमें हमेशा रहने की चाबियां दी गई हैं। फिर मुझे इसके या अपने भगवान से मिलने के बीच चुनने की आज़ादी दी गई। मैंने (अबू मुवाइहिबा) जवाब दिया; मेरे पिता और माता के लिए फिरौती के तौर पर, ऐ राजा, बस दुनियावी ज़िंदगी के भंडार और उसमें हमेशा रहने की चाबियां ले लो, फिर जन्नत। उसने जवाब दिया: 'नहीं, अल्लाह की कसम, ऐ अबू मुवाइहिबा, सच में मैंने अपने भगवान से मिलने को चुना है। फिर उसने बाकी के लोगों के लिए माफ़ी मांगी और चला गया।
इमाम दरिमी : 79
أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ عَبَّادِ بْنِ الْعَوَّامِ عَنْ هِلَالِ بْنِ خَبَّابٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاطِمَةَ فَقَالَ قَدْ نُعِيَتْ إِلَيَّ نَفْسِي فَبَكَتْ فَقَالَ لَا تَبْكِي فَإِنَّكِ أَوَّلُ أَهْلِي لِحَاقًا بِي فَضَحِكَتْ فَرَآهَا بَعْضُ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْنَ يَا فَاطِمَةُ رَأَيْنَاكِ بَكَيْتِ ثُمَّ ضَحِكْتِ قَالَتْ إِنَّهُ أَخْبَرَنِي أَنَّهُ قَدْ نُعِيَتْ إِلَيْهِ نَفْسُهُ فَبَكَيْتُ فَقَالَ لِي لَا تَبْكِي فَإِنَّكِ أَوَّلُ أَهْلِي لَاحِقٌ بِي فَضَحِكْتُ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ وَجَاءَ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَرَقُّ أَفْئِدَةً وَالْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ
हमें [सईद बिन सुलेमान] ने [अब्बाद बिन अल अव्वम] से [हिलाल बिन खब्बाब] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] रदलिअल्लाहुअन्हु से सूचित किया है जब आयत इदज़ाजा नशरुल्लाहि वल फतह (जब अल्लाह सुभानहु वा तआला की मदद और विजय तुम्हारे पास आ गई हो) प्रकट हुई (क़ुस. अन नश्र/110: 1)। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फातिमा रदलिअल्लाहुअन्हा को बुलाया और उनके कान में फुसफुसाया: मुझे मेरी मृत्यु की सूचना दे दी गई है। तब फातिमा रदलिअल्लाहुअन्हा रोई, तो उन्होंने कहा: 'रोओ मत, वास्तव में आप मुझसे मिलने वाले पहले व्यक्ति हैं, तब फातिमा रदलिअल्लाहुअन्हा हंस पड़ीं। पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पत्नियों ने इसे देखा और उन्होंने पूछा; ऐ फ़ातिमा, पहले हमने तुम्हें रोते हुए देखा, फिर तुम क्यों हंसती रहीं? फ़ातिमा रदलिअल्लाहु अन्हा ने जवाब दिया; उन्होंने मुझे अपनी होने वाली मौत के बारे में बताया, तो मैं रो पड़ी। फिर उन्होंने मुझसे कहा: रोओ मत क्योंकि तुम मुझसे मिलने वाली पहली इंसान हो, तो मैं हंस पड़ी। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब अल्लाह सुब्हानहु व तआला की मदद और जीत आएगी, तो यमन के लोग आएंगे, उनके दिल आसानी से छू जाते हैं, (मज़बूत) ईमान यमनियों का है, और समझदारी भी यमनियों की है।
इमाम दरिमी : 80
أَخْبَرَنَا الْحَكَمُ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ ابْنِ إِسْحَقَ عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ رَجَعَ إِلَيَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ مِنْ جَنَازَةٍ مِنْ الْبَقِيعِ فَوَجَدَنِي وَأَنَا أَجِدُ صُدَاعًا وَأَنَا أَقُولُ وَا رَأْسَاهُ قَالَ بَلْ أَنَا يَا عَائِشَةُ وَا رَأْسَاهُ قَالَ وَمَا ضَرَّكِ لَوْ مُتِّ قَبْلِي فَغَسَّلْتُكِ وَكَفَّنْتُكِ وَصَلَّيْتُ عَلَيْكِ وَدَفَنْتُكِ فَقُلْتُ لَكَأَنِّي بِكَ وَاللَّهِ لَوْ فَعَلْتَ ذَلِكَ لَرَجَعْتَ إِلَى بَيْتِي فَعَرَّسْتَ فِيهِ بِبَعْضِ نِسَائِكَ قَالَتْ فَتَبَسَّمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ بُدِئَ فِي وَجَعِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ
हमें बताया है [अल हकम बिन मुबारक] ने हमें बताया है [मुहम्मद बिन सलामा] [इब्न इसहाक] से [याकूब बिन उतबा] से [इब्न शिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबा] से [ऐस्या] रदलिअल्लाहुअन्हा से उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, एक दिन बाक़ी में शरीर को दफ़नाने के बाद मेरे पास घर आए। फिर उन्होंने पाया कि मेरे सिर में दर्द है और शिकायत की; 'ओह मेरे सिर', उन्होंने कहा: 'ओह मेरे सिर, ओ ऐस्या'। उन्होंने फिर कहा: 'यदि आप मुझसे पहले मर गए तो आपको क्या परेशानी होगी? ' मैं निश्चित रूप से आपको धोऊँगा और कपड़े पहनाऊँगा और आपको दफ़नाऊँगा। तब मैंने (ऐस्या रदलिअल्लाहुअन्हा) कहा; ऐसा लगता है कि आप यही उम्मीद करते हैं, अल्लाह सुभानहु वा ताआला की कसम, फिर राजा ने वहाँ राजा की कुछ पत्नियों के साथ सेक्स किया। ऐश्या रदलिअल्लाहु अन्हा ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुस्कुराए फिर वह बीमार होने लगे जिससे उनकी मौत हो गई।