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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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इमाम दरिमी (الامام الدارمي) - 3469 हदीस

जब रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम चले गए तो खजूर का पेड़ रोया

इमाम दरिमी : 41

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ أَبِي خَلَفٍ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُومُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَيُسْنِدُ ظَهْرَهُ إِلَى جِذْعٍ مَنْصُوبٍ فِي الْمَسْجِدِ فَيَخْطُبُ النَّاسَ فَجَاءَهُ رُومِيٌّ فَقَالَ أَلَا أَصْنَعُ لَكَ شَيْئًا تَقْعُدُ عَلَيْهِ وَكَأَنَّكَ قَائِمٌ فَصَنَعَ لَهُ مِنْبَرًا لَهُ دَرَجَتَانِ وَيَقْعُدُ عَلَى الثَّالِثَةِ فَلَمَّا قَعَدَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى ذَلِكَ الْمِنْبَرِ خَارَ الْجِذْعُ كَخُوَارِ الثَّوْرِ حَتَّى ارْتَجَّ الْمَسْجِدُ حُزْنًا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَزَلَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ الْمِنْبَرِ فَالْتَزَمَهُ وَهُوَ يَخُورُ فَلَمَّا الْتَزَمَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَكَنَ ثُمَّ قَالَ أَمَا وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ لَوْ لَمْ أَلْتَزِمْهُ لَمَا زَالَ هَكَذَا إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ حُزْنًا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَرَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَدُفِنَ

हमें बताया है मुहम्मद बिन अहमद बिन अबू खलफ़ ने हमें बताया है उमर बिन यूनुस ने हमें बताया है इक्रीमा बिन अम्मार ने हमें बताया है इसहाक बिन अबू तलहा ने हमें बताया है अनस बिन मलिक ने कि पैगंबर صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ, पहले शुक्रवार को मस्जिद में लगे एक पेड़ से पीठ टिकाकर खड़े होते थे, और लोगों को उपदेश देते थे। फिर रोम से एक आदमी आया, उसने कहा; "क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एक जगह बना दूं जिस पर आप बैठ सकें और देख सकें कि आप खड़े हैं?" तो उस आदमी ने उसके लिए दो सीढ़ियों वाला एक प्लेटफ़ॉर्म बनाया, वह तीसरे लेवल पर बैठ गया। जब पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) मिंबर पर बैठे, तो पेड़ का तना बैल के कराहने की तरह कराह उठा, जिससे पूरी मस्जिद कांप उठी। पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) पीछे छूट जाने से दुखी थे। पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) तुरंत मिंबर से नीचे उतरे और उसके पास जाकर उसे गले लगा लिया जबकि पेड़ अभी भी कराह रहा था। जब उन्होंने उसे गले लगाना जारी रखा, तो वह शांत हो गया। फिर उन्होंने कहा; उस की कसम जिसके हाथों में मेरी आत्मा है, अगर मैंने उसे गले नहीं लगाया होता तो वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) द्वारा छोड़े जाने के दुख के कारण पुनरुत्थान के दिन तक ऐसा ही रहता। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने आदेश दिया कि उसे दफन कर दिया जाए, और ऐसा ही किया गया।

गुणन का खाद्य चमत्कार

इमाम दरिमी : 42

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ أَبَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمُحَارِبِيُّ عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ بْنِ أَيْمَنَ الْمَكِّيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قُلْتُ لِجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ حَدِّثْنِي بِحَدِيثٍ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَمِعْتَهُ مِنْهُ أَرْوِيهِ عَنْكَ فَقَالَ جَابِرٌ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ الْخَنْدَقِ نَحْفُرُهُ فَلَبِثْنَا ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ لَا نَطْعَمُ طَعَامًا وَلَا نَقْدِرُ عَلَيْهِ فَعَرَضَتْ فِي الْخَنْدَقِ كُدْيَةٌ فَجِئْتُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذِهِ كُدْيَةٌ قَدْ عَرَضَتْ فِي الْخَنْدَقِ فَرَشَشْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ فَقَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبَطْنُهُ مَعْصُوبٌ بِحَجَرٍ فَأَخَذَ الْمِعْوَلَ أَوْ الْمِسْحَاةَ ثُمَّ سَمَّى ثَلَاثًا ثُمَّ ضَرَبَ فَعَادَتْ كَثِيبًا أَهْيَلَ فَلَمَّا رَأَيْتُ ذَلِكَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ ايْذَنْ لِي قَالَ فَأَذِنَ لِي فَجِئْتُ امْرَأَتِي فَقُلْتُ ثَكِلَتْكِ أُمُّكِ فَقُلْتُ قَدْ رَأَيْتُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا لَا صَبْرَ لِي عَلَيْهِ فَهَلْ عِنْدَكِ مِنْ شَيْءٍ فَقَالَتْ عِنْدِي صَاعٌ مِنْ شَعِيرٍ وَعَنَاقٌ قَالَ فَطَحَنَّا الشَّعِيرَ وَذَبَحْنَا الْعَنَاقَ وَسَلَخْتُهَا وَجَعَلْتُهَا فِي الْبُرْمَةِ وَعَجَنْتُ الشَّعِيرَ ثُمَّ رَجَعْتُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَبِثْتُ سَاعَةً ثُمَّ اسْتَأْذَنْتُهُ الثَّانِيَةَ فَأَذِنَ لِي فَجِئْتُ فَإِذَا الْعَجِينُ قَدْ أَمْكَنَ فَأَمَرْتُهَا بِالْخَبْزِ وَجَعَلْتُ الْقِدْرَ عَلَى الْأَثَاثِي قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّمَا هِيَ الْأَثَافِيُّ وَلَكِنْ هَكَذَا قَالَ ثُمَّ جِئْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ إِنَّ عِنْدَنَا طُعَيِّمًا لَنَا فَإِنْ رَأَيْتَ أَنْ تَقُومَ مَعِي أَنْتَ وَرَجُلٌ أَوْ رَجُلَانِ مَعَكَ فَقَالَ وَكَمْ هُوَ قُلْتُ صَاعٌ مِنْ شَعِيرٍ وَعَنَاقٌ فَقَالَ ارْجِعْ إِلَى أَهْلِكَ وَقُلْ لَهَا لَا تَنْزِعْ الْقِدْرَ مِنْ الْأَثَافِيِّ وَلَا تُخْرِجْ الْخُبْزَ مِنْ التَّنُّورِ حَتَّى آتِيَ ثُمَّ قَالَ لِلنَّاسِ قُومُوا إِلَى بَيْتِ جَابِرٍ قَالَ فَاسْتَحْيَيْتُ حَيَاءً لَا يَعْلَمُهُ إِلَّا اللَّهُ فَقُلْتُ لِامْرَأَتِي ثَكِلَتْكِ أُمُّكِ قَدْ جَاءَكِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِأَصْحَابِهِ أَجْمَعِينَ فَقَالَتْ أَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلَكَ كَمْ الطَّعَامُ فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَتْ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَدْ أَخْبَرْتَهُ بِمَا كَانَ عِنْدَنَا قَالَ فَذَهَبَ عَنِّي بَعْضُ مَا كُنْتُ أَجِدُ وَقُلْتُ لَقَدْ صَدَقْتِ فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَدَخَلَ ثُمَّ قَالَ لِأَصْحَابِهِ لَا تَضَاغَطُوا ثُمَّ بَرَّكَ عَلَى التَّنُّورِ وَعَلَى الْبُرْمَةِ قَالَ فَجَعَلْنَا نَأْخُذُ مِنْ التَّنُّورِ الْخُبْزَ وَنَأْخُذُ اللَّحْمَ مِنْ الْبُرْمَةِ فَنُثَرِّدُ وَنَغْرِفُ لَهُمْ وَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَجْلِسْ عَلَى الصَّحْفَةِ سَبْعَةٌ أَوْ ثَمَانِيَةٌ فَإِذَا أَكَلُوا كَشَفْنَا عَنْ التَّنُّورِ وَكَشَفْنَا عَنْ الْبُرْمَةِ فَإِذَا هُمَا أَمْلَأُ مَا كَانَا فَلَمْ نَزَلْ نَفْعَلُ ذَلِكَ كُلَّمَا فَتَحْنَا التَّنُّورَ وَكَشَفْنَا عَنْ الْبُرْمَةِ وَجَدْنَاهُمَا أَمْلَأَ مَا كَانَا حَتَّى شَبِعَ الْمُسْلِمُونَ كُلُّهُمْ وَبَقِيَ طَائِفَةٌ مِنْ الطَّعَامِ فَقَالَ لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ النَّاسَ قَدْ أَصَابَتْهُمْ مَخْمَصَةٌ فَكُلُوا وَأَطْعِمُوا فَلَمْ نَزَلْ يَوْمَنَا ذَلِكَ نَأْكُلُ وَنُطْعِمُ قَالَ وَأَخْبَرَنِي أَنَّهُمْ كَانُوا ثَمَانَ مِائَةٍ أَوْ قَالَ ثَلَاثَ مِائَةٍ قَالَ أَيْمَنُ لَا أَدْرِي أَيُّهُمَا قَالَ

हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन उमर बिन अबान] ने हमें [अब्दुर रहमान बिन मुहम्मद अल मुहरिबी] [अब्दुल वाहिद बिन ऐमान अल मक्की] से [अपने पिता] से बताया है उन्होंने कहा; मैंने जाबिर बिन अब्दुल्ला रदलिअल्लाहुअन्हु से कहा: उन्होंने कहा; मुझे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक हदीस सुनाओ जो तुमने उनसे सुनी थी और जो मैं तुमसे सुना सकता हूं। जाबिर ने कहा; पहले, हम खंदक युद्ध के दौरान रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ थे और हम खाइयां खोद रहे थे। तीन दिनों तक हमने कुछ नहीं खाया और भोजन प्राप्त करने में असमर्थ थे। फिर खाई में मुझे कठोर मिट्टी का एक टुकड़ा मिला, इसलिए मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गया। मैंने कहा; "ए रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, इस कठोर जमीन ने इस खाई को खोदने से रोक दिया है, भले ही हमने इस पर पानी डाला है।" फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पेट पर पत्थर बांधकर खड़े हो गए, फिर उन्होंने एक कुदाल ली और तीन बार बिस्मिल्लाह पढ़ी। उन्होंने उस पर वार किया और वह मुलायम धूल में बदल गई। जब मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ऐसी हालत देखी, तो मैंने उनसे कहा; "अल्लाह के रसूल, मुझे थोड़ी देर के लिए घर जाने दो, तो उन्होंने मुझे (थोड़ी देर के लिए घर जाने की) इजाज़त दे दी।" फिर मैं अपनी पत्नी के पास गया, मैंने कहा; "हालात बहुत गंभीर हैं।" और मैंने अपनी पत्नी से कहा; "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ऐसी हालत देखी है कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ। क्या तुम्हारे पास खाने के लिए कुछ है?" उन्होंने जवाब दिया; "बस एक शा' मोटा आटा और एक बकरी है।" जाबिर ने कहा: "फिर हमने मोटा आटा पीसा ताकि वह चबाने लायक हो जाए और हमने बकरे को ज़बह किया, उसकी खाल उतारी और उसे एक बर्तन में डाल दिया। मैंने आटा गूंथना जारी रखा, फिर मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास वापस गया और कुछ पल चुप रहा। फिर मैंने दूसरी बार घर जाने की इजाज़त मांगी। उन्होंने मुझे इजाज़त दे दी, तो जब मैं अपनी पत्नी से मिला तो पता चला कि गेहूं का आटा तैयार था, तो मैंने अपनी पत्नी को रोटी बनाने का हुक्म दिया, और मैंने बर्तन को पकाने वाले पत्थर पर रख दिया। अब्दुर्रहमान ने कहा; मेरा मतलब है चूल्हे/रसोई पर। फिर जाबिर ने कहा; फिर मैं पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला।" उन्होंने पूछा: "कितना खाना है?" मैंने जवाब दिया; "बस एक सा` गेहूं और एक बकरी का बच्चा।" फिर रसूल ने कहा: "बस, अपने परिवार के पास वापस जाओ और उनसे कहो कि जब तक मैं न आऊं, बर्तन को रसोई से न उठाएं और रोटी को तंदूर से न उठाएं।" फिर उसने साथियों से कहा: "चलो जाबिर के घर चलते हैं।" जाबिर ने कहा: "मुझे शर्म आ रही है, बहुत बड़ी शर्म, जिसे अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानता।" - (क्योंकि पैगंबर ने अपने साथियों को बुलाया था, भले ही खाने की मात्रा उतनी ज़्यादा नहीं थी) --- मैंने अपनी पत्नी से कहा: "वाह,,, मामला गंभीर हो गया है,,, अल्लाह के रसूल अपने सभी साथियों के साथ आए।" मेरी पत्नी ने कहा: "क्या रसूल ने तुमसे पहले पूछा था कि हमारे पास कितना खाना है?" "फिर मैंने उससे कहा: "तुम बिल्कुल सही हो।" फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए और अंदर गए, फिर अपने साथियों से कहा, "सावधान रहो, भीड़ मत लगाना!" फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भुनी हुई रोटी और बर्तन पर आशीर्वाद दिया। जाबिर ने कहा: "फिर हमने रोटी को ग्रिल से और मांस को बर्तन से निकाला, फिर हमने उसे हिलाया और चम्मच से उन्हें दिया। "फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, "एक प्लेट में सात-सात या आठ-आठ लोग एक साथ बैठ जाएं।" जब उन्होंने खा लिया, तो हमने ग्रिल और बर्तन का ढक्कन खोला और पाया कि दोनों पहले की तरह ही भरे हुए थे। और यह तब तक चलता रहा जब तक सभी मुसलमानों का पेट भर गया और कुछ ही खाना बचा। फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमसे कहा: "सच में, लोग सब भर गए हैं, अब खाओ, तुम और तुम्हारे परिवार!" तो उस दिन हमने उस रोटी और मांस से कई बार खाया। जाबिर ने कहा: "मुझे बताया गया था कि जाबिर के घर पर खाने वाले साथियों की संख्या लगभग आठ सौ या तीन सौ लोग थे।" ऐमन ने कहा: मुझे नहीं पता कि इनमें से कौन सी संख्या सही है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा भोजन पर कृपा बरसाने की कहानी

इमाम दरिमी : 43

أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ هُوَ ابْنُ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ أَمَرَ أَبُو طَلْحَةَ أُمَّ سُلَيْمٍ أَنْ تَجْعَلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَعَامًا يَأْكُلُ مِنْهُ قَالَ ثُمَّ بَعَثَنِي أَبُو طَلْحَةَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَتَيْتُهُ فَقُلْتُ بَعَثَنِي إِلَيْكَ أَبُو طَلْحَةَ فَقَالَ لِلْقَوْمِ قُومُوا فَانْطَلَقَ وَانْطَلَقَ الْقَوْمُ مَعَهُ فَقَالَ أَبُو طَلْحَةَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّمَا صَنَعْتُ طَعَامًا لِنَفْسِكَ خَاصَّةً فَقَالَ لَا عَلَيْكَ انْطَلِقْ قَالَ فَانْطَلَقَ وَانْطَلَقَ الْقَوْمُ قَالَ فَجِيءَ بِالطَّعَامِ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ وَسَمَّى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ قَالَ فَأَذِنَ لَهُمْ فَقَالَ كُلُوا بِاسْمِ اللَّهِ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ قَامُوا ثُمَّ وَضَعَ يَدَهُ كَمَا صَنَعَ فِي الْمَرَّةِ الْأُولَى وَسَمَّى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ ائْذَنْ لِعَشَرَةٍ فَأَذِنَ لَهُمْ فَقَالَ كُلُوا بِاسْمِ اللَّهِ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا ثُمَّ قَامُوا حَتَّى فَعَلَ ذَلِكَ بِثَمَانِينَ رَجُلًا قَالَ وَأَكَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَهْلُ الْبَيْتِ وَتَرَكُوا سُؤْرًا

हमें बताया है [ज़कारिया बिन अदी] ने हमें बताया है [उबैदुल्लाह इब्न अम्र] [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [अब्दुर रहमान बिन अबू लैला] से [अनस बिन मलिक] उन्होंने कहा; अबू तल्हा ने उम्म सुलैम को आदेश दिया कि वह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए उनके खाने के लिए खाना बनाएं। उन्होंने कहा; फिर अबू तल्हा ने मुझे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास भेजा। मैं उनसे मिला, फिर मैंने कहा; अबू तल्हा ने मुझे राजा के पास भेजा, तो उन्होंने कहा; "ए मुसलमानों, चलो।" और वह चला गया, इसलिए दोस्त भी चले गए। कथावाचक ने कहा; फिर खाना लाया गया, फिर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उस पर हाथ रखा और खाने के लिए (आशीर्वाद) दुआ की और कहा; "इसे दस लोगों को दो।" कथावाचक ने कहा; फिर खाना उन्हें दिया गया। फिर उसने कहा: "अल्लाह सुब्हानहु व तआला के नाम पर खाओ।" फिर उन्होंने तब तक खाया जब तक उनका पेट भर नहीं गया, फिर वे उठे ताकि वह अस्सी लोगों के साथ ऐसा कर सके। कहने वाले ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने घर के मालिक के साथ खाया और अभी भी एक बड़ा कटोरा बचा हुआ था।

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम का प्रेम अंतिम भाग की ओर

इमाम दरिमी : 44

أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبَانُ هُوَ الْعَطَّارُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ أَنَّهُ طَبَخَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِدْرًا فَقَالَ لَهُ نَاوِلْنِي الذِّرَاعَ وَكَانَ يُعْجِبُهُ الذِّرَاعُ فَنَاوَلَهُ الذِّرَاعَ ثُمَّ قَالَ نَاوِلْنِي الذِّرَاعَ فَنَاوَلَهُ ذِرَاعًا ثُمَّ قَالَ نَاوِلْنِي الذِّرَاعَ فَقُلْتُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ وَكَمْ لِلشَّاةِ مِنْ ذِرَاعٍ فَقَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ أَنْ لَوْ سَكَتَّ لَأُعْطِيتُ أَذْرُعًا مَا دَعَوْتُ بِهِ

हमें बताया है [मुस्लिम बिन इब्राहिम] ने हमें बताया है [अबान अल अतहर] ने हमें [क़तादा] [स्याहर बिन हौस्याब] से [अबू उबैद] से बताया है कि उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए एक बर्तन पकाया। फिर उन्होंने उनसे कहा: "मुझे संपिल दो" और उनका पसंदीदा संपिल का मांस था। उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उलना (संपिल) का हिस्सा भी दिया। फिर उन्होंने कहा: "कृपया मुझे उलना का मांस दें" तो उन्होंने उन्हें उलना का मांस दिया। "फिर उन्होंने फिर कहा: "मुझे उलना का मांस दो", तो मैंने कहा; "ऐ अल्लाह के पैगंबर सुब्हानहु व तआला (वास्तव में) एक बकरे में कितनी उलना हड्डियाँ होती हैं?" उन्होंने जवाब दिया: "उसकी कसम जो उसके हाथ में है, अगर तुम चुप रहो, तो तुम निश्चित रूप से मेरे कहे अनुसार उलना का मांस दे पाओगे।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को एक महिला ने बकरा भेंट किया

इमाम दरिमी : 45

أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ نُبَيْحٍ الْعَنَزِيِّ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْمُشْرِكِينَ لِيُقَاتِلَهُمْ فَقَالَ أَبِي عَبْدُ اللَّهِ يَا جَابِرُ لَا عَلَيْكَ أَنْ تَكُونَ فِي نَظَّارِي أَهْلِ الْمَدِينَةِ حَتَّى تَعْلَمَ إِلَى مَا يَصِيرُ أَمْرُنَا فَإِنِّي وَاللَّهِ لَوْلَا أَنِّي أَتْرُكُ بَنَاتٍ لِي بَعْدِي لَأَحْبَبْتُ أَنْ تُقْتَلَ بَيْنَ يَدَيَّ قَالَ فَبَيْنَمَا أَنَا فِي النَّظَّارِينَ إِذْ جَاءَتْ عَمَّتِي بِأَبِي وَخَالِي لِتَدْفِنَهُمَا فِي مَقَابِرِنَا فَلَحِقَ رَجُلٌ يُنَادِي إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُكُمْ أَنْ تَرُدُّوا الْقَتْلَى فَتَدْفِنُوهَا فِي مَضَاجِعِهَا حَيْثُ قُتِلَتْ فَرَدَدْنَاهُمَا فَدَفَنَّاهُمَا فِي مَضْجَعِهِمَا حَيْثُ قُتِلَا فَبَيْنَا أَنَا فِي خِلَافَةِ مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ إِذْ جَاءَنِي رَجُلٌ فَقَالَ يَا جَابِرُ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ لَقَدْ أَثَارَ أَبَاكَ عُمَّالُ مُعَاوِيَةَ فَبَدَا فَخَرَجَ طَائِفَةٌ مِنْهُمْ فَانْطَلَقْتُ إِلَيْهِ فَوَجَدْتُهُ عَلَى النَّحْوِ الَّذِي دَفَنْتُهُ لَمْ يَتَغَيَّرْ إِلَّا مَا لَمْ يَدَعْ الْقَتِيلَ قَالَ فَوَارَيْتُهُ وَتَرَكَ أَبِي عَلَيْهِ دَيْنًا مِنْ التَّمْرِ فَاشْتَدَّ عَلَيَّ بَعْضُ غُرَمَائِهِ فِي التَّقَاضِي فَأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَبِي أُصِيبَ يَوْمَ كَذَا وَكَذَا وَإِنَّهُ تَرَكَ عَلَيْهِ دَيْنًا مِنْ التَّمْرِ وَإِنَّهُ قَدْ اشْتَدَّ عَلَيَّ بَعْضُ غُرَمَائِهِ فِي الطَّلَبِ فَأُحِبُّ أَنْ تُعِينَنِي عَلَيْهِ لَعَلَّهُ أَنْ يُنْظِرَنِي طَائِفَةً مِنْ تَمْرِهِ إِلَى هَذَا الصِّرَامِ الْمُقْبِلِ قَالَ نَعَمْ آتِيكَ إِنْ شَاءَ اللَّهُ قَرِيبًا مِنْ وَسَطِ النَّهَارِ قَالَ فَجَاءَ وَمَعَهُ حَوَارِيُّوهُ قَالَ فَجَلَسُوا فِي الظِّلِّ وَسَلَّمَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتَأْذَنَ ثُمَّ دَخَلَ عَلَيْنَا قَالَ وَقَدْ قُلْتُ لِامْرَأَتِي إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَائِيَّ الْيَوْمَ وَسَطَ النَّهَارِ فَلَا يَرَيَنَّكِ وَلَا تُؤْذِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي شَيْءٍ وَلَا تُكَلِّمِيهِ فَفَرَشَتْ فِرَاشًا وَوِسَادَةً وَوَضَعَ رَأْسَهُ فَنَامَ فَقُلْتُ لِمَوْلًى لِي اذْبَحْ هَذِهِ الْعَنَاقَ وَهِيَ دَاجِنٌ سَمِينَةٌ فَالْوَحَى وَالْعَجَلَ افْرُغْ مِنْهَا قَبْلَ أَنْ يَسْتَيْقِظَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا مَعَكَ فَلَمْ نَزَلْ فِيهَا حَتَّى فَرَغْنَا مِنْهَا وَهُوَ نَائِمٌ فَقُلْتُ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ يَسْتَيْقِظُ يَدْعُو بِطَهُورِهِ وَأَنَا أَخَافُ إِذَا فَرَغَ أَنْ يَقُومَ فَلَا يَفْرُغَ مِنْ طُهُورِهِ حَتَّى يُوضَعَ الْعَنَاقُ بَيْنَ يَدَيْهِ فَلَمَّا اسْتَيْقَظَ قَالَ يَا جَابِرُ ايْتِنِي بِطَهُورٍ قَالَ نَعَمْ فَلَمْ يَفْرُغْ مِنْ وُضُوئِهِ حَتَّى وُضِعَتْ الْعَنَاقُ بَيْنَ يَدَيْهِ قَالَ فَنَظَرَ إِلَيَّ فَقَالَ كَأَنَّكَ قَدْ عَلِمْتَ حُبَّنَا اللَّحْمِ ادْعُ أَبَا بَكْرٍ ثُمَّ دَعَا حَوَارِيِّيهِ قَالَ فَجِيءَ بِالطَّعَامِ فَوُضِعَ قَالَ فَوَضَعَ يَدَهُ وَقَالَ بِسْمِ اللَّهِ كُلُوا فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا وَفَضَلَ مِنْهَا لَحْمٌ كَثِيرٌ وَقَالَ وَاللَّهِ إِنَّ مَجْلِسَ بَنِي سَلَمَةَ لَيَنْظُرُونَ إِلَيْهِمْ هُوَ أَحَبُّ إِلَيْهِمْ مِنْ أَعْيُنِهِمْ مَا يَقْرَبُونَهُ مَخَافَةَ أَنْ يُؤْذُوهُ ثُمَّ قَامَ وَقَامَ أَصْحَابُهُ فَخَرَجُوا بَيْنَ يَدَيْهِ وَكَانَ يَقُولُ خَلُّوا ظَهْرِي لِلْمَلَائِكَةِ قَالَ فَاتَّبَعْتُهُمْ حَتَّى بَلَغْتُ سَقُفَّةَ الْبَابِ فَأَخْرَجَتْ امْرَأَتِي صَدْرَهَا وَكَانَتْ سَتِيرَةً فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ صَلِّ عَلَيَّ وَعَلَى زَوْجِي قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْكِ وَعَلَى زَوْجِكِ ثُمَّ قَالَ ادْعُوا لِي فُلَانًا لِلْغَرِيمِ الَّذِي اشْتَدَّ عَلَيَّ فِي الطَّلَبِ فَقَالَ أَنْسِ جَابِرًا طَائِفَةً مِنْ دَيْنِكَ الَّذِي عَلَى أَبِيهِ إِلَى هَذَا الصِّرَامِ الْمُقْبِلِ قَالَ مَا أَنَا بِفَاعِلٍ قَالَ وَاعْتَلَّ وَقَالَ إِنَّمَا هُوَ مَالُ يَتَامَى فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيْنَ جَابِرٌ قَالَ قُلْتُ أَنَا ذَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ كِلْ لَهُ مِنْ الْعَجْوَةِ فَإِنَّ اللَّهَ تَعَالَى سَوْفَ يُوَفِّيهِ فَرَفَعَ رَأْسَهُ إِلَى السَّمَاءِ فَإِذَا الشَّمْسُ قَدْ دَلَكَتْ قَالَ الصَّلَاةُ يَا أَبَا بَكْرٍ قَالَ فَانْدَفَعُوا إِلَى الْمَسْجِدِ فَقُلْتُ لِغَرِيمِي قَرِّبْ أَوْعِيَتَكَ فَكِلْتُ لَهُ مِنْ الْعَجْوَةِ فَوَفَّاهُ اللَّهُ وَفَضَلَ لَنَا مِنْ التَّمْرِ كَذَا وَكَذَا قَالَ فَجِئْتُ أَسْعَى إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَسْجِدِهِ كَأَنِّي شَرَارَةٌ فَوَجَدْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ صَلَّى فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي قَدْ كِلْتُ لِغَرِيمِي تَمْرَهُ فَوَفَّاهُ اللَّهُ وَفَضَلَ لَنَا مِنْ التَّمْرِ كَذَا وَكَذَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيْنَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَ فَجَاءَ يُهَرْوِلُ قَالَ سَلْ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ غَرِيمِهِ وَتَمْرِهِ قَالَ مَا أَنَا بِسَائِلِهِ قَدْ عَلِمْتُ أَنَّ اللَّهَ سَوْفَ يُوَفِّيهِ إِذْ أَخْبَرْتَ أَنَّ اللَّهَ سَوْفَ يُوَفِّيهِ فَرَدَّدَ عَلَيْهِ وَرَدَّدَ عَلَيْهِ هَذِهِ الْكَلِمَةَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ كُلُّ ذَلِكَ يَقُولُ مَا أَنَا بِسَائِلِهِ وَكَانَ لَا يُرَاجَعُ بَعْدَ الْمَرَّةِ الثَّالِثَةِ فَقَالَ مَا فَعَلَ غَرِيمُكَ وَتَمْرُكَ قَالَ قُلْتُ وَفَّاهُ اللَّهُ وَفَضَلَ لَنَا مِنْ التَّمْرِ كَذَا وَكَذَا فَرَجَعْتُ إِلَى امْرَأَتِي فَقُلْتُ أَلَمْ أَكُنْ نَهَيْتُكِ أَنْ تُكَلِّمِي رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَيْتِي فَقَالَتْ تَظُنُّ أَنَّ اللَّهَ تَعَالَى يُورِدُ نَبِيَّهُ فِي بَيْتِي ثُمَّ يَخْرُجُ وَلَا أَسْأَلُهُ الصَّلَاةَ عَلَيَّ وَعَلَى زَوْجِي

हमें बताया है [अबू अन नुमान] ने हमें बताया है [अबू अवाना] [अल असवद] से [नुबैह अल अनाज़ी] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बहुदेववादियों से लड़ने के लिए बाहर गए। मेरे पिता (अब्दुल्ला) ने कहा; "ऐ जाबिर, जंग में मत जाओ, तुम मदीना के रहने वाले हो, जिसका काम मुस्लिम फौज की हालत पर नज़र रखना है। तो तुम सच में जानते हो कि हमारी किस्मत क्या है। अल्लाह सुब्हानहु व तआला के लिए, अगर मैं अपनी बेटियों को अपने पीछे न छोड़ता, तो मुझे बहुत खुशी होती अगर तुम मेरे सामने मारे जाते (जंग के मैदान में शहीद होते)। जाबिर ने कहा; जब मैं उन लोगों के साथ था जिनका काम हालात पर नज़र रखना और फौज की वापसी पर नज़र रखना था, तो अचानक मेरी चाची मेरे पिता और चाचा की लाशें लेकर आईं ताकि वह उन दोनों को हमारे खानदानी कब्रिस्तान में दफ़ना सकें। फिर उन्हें कोई मिला जो चिल्लाया, "बेशक, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तुम्हें हुक्म दिया था कि मरने वाले लोगों को उसी जगह लौटा दो जहाँ वे मारे गए थे, और तुम उन्हें उसी जगह दफ़ना दो जहाँ वे मारे गए थे।" "तो हमने तुरंत अपने पिता और चाचा के शवों को उस जगह पर लौटा दिया जहाँ उन्हें मारा गया था। हमने उन्हें ठीक वहीं दफ़नाया जहाँ उनका कत्लेआम हुआ था। फिर एक दिन, जब मैं (जाबिर) मुअविया बिन अबू सुफ़यान रदलिअल्लाहुअन्हु की ख़िलाफ़त के दौरान था, अचानक एक संदेशवाहक मेरे पास आया। उसने कहा; "ऐ जाबिर बिन अब्दुल्लाह, सच में मुअविया रदलिअल्लाहुअन्हु के बनाने वालों ने, जब कब्रिस्तान को तोड़ रहे थे, तो आपके पिता का (शरीर) पूरा दिखाई दे रहा था। कुछ बनाने वाले चले गए थे इसलिए मुझे अपने पिता का शरीर देखने का मौका मिला। उह... उह... मैंने अपने पिता का शरीर बिल्कुल वैसा ही पाया जैसा मैंने उन्हें दफ़नाया था, मारे गए व्यक्ति के निशानों को छोड़कर उसमें कोई बदलाव नहीं था। बताने वाले (जाबिर) ने कहा; तो मैंने उसे ढक दिया। मुझे अभी भी याद है कि मेरे पिता खजूर के रूप में एक कर्ज़ छोड़ गए थे, कुछ लोगों ने जिन्होंने उन्हें उधार दिया था, उन्होंने मुझे (तुरंत) चुकाने के लिए मजबूर किया। फिर मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला। और मैंने अपनी सारी चिंताएँ बताईं; “ऐ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, असल में मेरे पिता एक जंग में मारे गए थे, और सच में उन्होंने खजूर के रूप में एक कर्ज़ छोड़ा था, और सच में कर्ज़ के मालिकों ने मुझे (तुरंत) ये कर्ज़ चुकाने के लिए मजबूर किया। मुझे बहुत खुशी होगी अगर राजा उनकी मदद करने को तैयार हों, कौन जानता है, शायद वह अगली फ़सल के मौसम तक (बिल) टालने को तैयार हो जाएँ। उन्होंने कहा: “ठीक है, मैं इसे तुम्हें दे दूँगा, अल्लाह ने चाहा, सुभानहु व तआला, आज दोपहर के कुछ देर बाद।” नैरेटर (जाबिर) ने कहा; “फिर वह अपने वफ़ादार दोस्तों के साथ आया। "कहानी सुनाने वाले (जाबिर) ने कहा; वे शेल्टर में इंतज़ार कर रहे थे और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें सलाम किया और इजाज़त मांगी, फिर हमारे घर में आए। कहानी सुनाने वाले (जाबिर) ने कहा; "मैंने अपनी पत्नी से कहा है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आज दोपहर के बाद मुझसे मिलने आएंगे, इसलिए खुद को दिखाना मत, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को किसी भी चीज़ से नाराज़ मत करना और उनसे बात भी मत करना। "फिर मैंने एक बिस्तर बिछाया और एक तकिया दिया, फिर उसने अपना सिर नीचे किया और सो गया। फिर मैंने अपने नौकर को आदेश दिया; "इस बकरी को काट दो, यह एक शांत बच्चा है, इसमें बहुत मांस है और यह फुर्तीला है। कृपया इसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जागने से पहले तैयार कर लें, और अगर वह जागते हैं तो वह निश्चित रूप से पवित्रता के लिए पानी मांगेंगे, जबकि मुझे चिंता है कि अगर वह जागते हैं और पवित्रता पूरी करते हैं तो बकरे का मांस उनके सामने अभी तक उपलब्ध नहीं है।" जब वह अपनी नींद से जागे, तो उन्होंने कहा: "ए जाबिर, मुझे पवित्रता के लिए पानी प्रदान करें, मैंने उत्तर दिया; "हाँ, ठीक है।" इसलिए इससे पहले कि वह अपना वुज़ू पूरा करते, मैंने उनके सामने (पका हुआ) बकरे का मांस रख दिया। कथावाचक (जाबिर) ने कहा; "उसने मेरी तरफ देखा और फिर कहा; ऐसा लगता है कि आप पहले से ही हमारे पसंदीदा मांस को जानते हैं, अबू बक्र रदलिअल्लाहुअन्हु को बुलाएं। फिर भोजन लाया गया और परोसा गया। पेरावी (जाबिर) ने कहा; फिर उन्होंने कहा: अल्लाह सुभानहु व ताआला (बिस्मिल्लाह) का नाम लें और खाएं। इसलिए उन्होंने तब तक खाया जब तक कि वे भर नहीं गए और बहुत सारा मांस (पकवान से) बच गया। पेरावी (जाबिर) ने कहा; "अल्लाह सुभानहु व ताआला की कसम, वास्तव में सभा बनी सलमा ने खुद से सोचा कि वे पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपनी आंखों से भी ज्यादा प्यार करते हैं, जो उनके बहुत करीब थीं, क्योंकि वे बहुत चिंतित थे कि वे उन्हें चोट पहुंचाएंगे। फिर वह उठ गया और उसके साथी भी उठे, फिर वे उसके पास से गुजरे, और उसने कहा "मुझे अपनी स्वतंत्रता (मेरे मामले) स्वर्गदूतों पर छोड़ दो।" कथावाचक (जाबिर) ने कहा; फिर मैं उनके साथ दरवाज़े के पास लगे बोर्ड पर वापस गया, फिर मेरी पत्नी ने खुद को थोड़ा सा दिखाया जो पहले एक पर्दे से ढका हुआ था और कहा; "या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, मेरे और मेरे पति के लिए दुआ करें।" उन्होंने जवाब दिया; "अल्लाह सुब्हानहु व तआला आप और आपके पति पर अपनी रहमत बरसाए।" फिर उन्होंने कहा: "प्लीज़ मुझे ऐसा-वैसा कहिए (उस व्यक्ति को संबोधित करते हुए जो कर्ज़दार है और मुझसे इसे तुरंत चुकाने के लिए कह रहा है)।" फिर उन्होंने कहा: "जाबिर रदलिअल्लाहुअन्हु के लिए उस कर्ज़ का कुछ हिस्सा जो आप उसके पिता को देते हैं, अगली फसल के मौसम तक के लिए टाल दीजिए।" उन्होंने कहा: "मैं ऐसा नहीं कर सकता, ऐ अल्लाह के रसूल!" उन्होंने कहा: "या आप इसे कम कर दीजिए" उन्होंने कहा: "यह जायदाद अनाथों की है, ऐ अल्लाह के रसूल।" जाबिर ने कहा: "मैं अल्लाह का रसूल हूँ।" फिर रसूल ने कहा: "उसके लिए अजुवा खजूर (एक तरह की खजूर जो अलियाह मदीना में उगती है) तौल दो क्योंकि अल्लाह सुब्हानहु व तआला के पास उसके लिए ज़रूर काफ़ी खजूर होंगे", फिर रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना सिर ऊपर उठाया और पता चला कि सूरज डूब चुका था तो उन्होंने कहा: "आइए नमाज़ पढ़ें, ऐ अबू बक्र रदलिअल्लाहुअन्हु", जाबिर रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा: "वे सब मस्जिद चले गए" फिर मैंने कर्ज़दार से कहा: "अपना बर्तन पास लाओ।" फिर मैंने उसके लिए अजुवा खजूर तौले। तो अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने हमारे लिए काफ़ी खजूर दिए और हमारे लिए कुछ खजूर भी छोड़ दिए। जाबिर रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा: "तो मैं इस मस्जिद में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलने के लिए दौड़ा, जैसे कि मैं एक नीच व्यक्ति हूँ, फिर मैंने पाया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज़ अदा कर ली है, फिर मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा: वास्तव में, मैंने खजूर नाप लिए हैं और अल्लाह सुभानहु व तआला पर्याप्त हैं, और हमारे लिए इतना और इस तरह बचा है।" तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "उमर बिन खत्थब रदलिअल्लाहुअन्हु कहाँ हैं?" कथावाचक (जाबिर) ने कहा; उमर दौड़ते हुए आए, तो उन्होंने उन्हें आदेश दिया, "कृपया जाबिर बिन अब्दुल्ला रदलिअल्लाहुअन्हु से उस व्यक्ति के बारे में पूछें जिसने (उनके पिता) और उनकी खजूरें भी बकाया हैं।" उमर ने उत्तर दिया; "मुझे उससे पूछने की ज़रूरत नहीं है और मुझे यकीन है कि अल्लाह सुबहानहु व तआला निश्चित रूप से उसे पर्याप्तता प्रदान करेंगे, यही वह समय है जब आपने उससे कहा कि अल्लाह सुबहानहु व तआला उसे पर्याप्तता प्रदान करेंगे।" फिर उससे सवाल दोहराया गया, इसलिए उमर रदलिअल्लाहु अन्हु ने जवाब तीन बार दोहराया, जिसमें से सभी उन्होंने इन शब्दों के साथ कहा; "मुझे उससे पूछने की ज़रूरत नहीं है।" अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तीसरी बार के बाद अपना सवाल नहीं दोहराया, इसलिए उन्होंने पूछा: "उस व्यक्ति की हालत कैसी है जिसने आपका और आपकी खजूर का कर्जदार भी है?" कथावाचक ने कहा; तो मैंने उत्तर दिया; अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने उसे पर्याप्तता प्रदान की है और इतनी और इतनी खजूर छोड़ी हैं। फिर मैं अपनी पत्नी के पास वापस गया और कहा; "क्या मैंने आपको अपने घर में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बात करने से मना नहीं किया था?" उसने उत्तर दिया; क्या आपको लगता है कि अल्लाह सुब्हानहु व तआला अपने रसूल को मेरे घर लाए, फिर मेरे और मेरे पति के लिए खुशहाली की दुआ मांगे बिना ही चले गए?

अन्य नबियों की तुलना में पैगम्बर की श्रेष्ठता

इमाम दरिमी : 46

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَكِيمٍ حَدَّثَنِي الْحَكَمُ بْنُ أَبَانَ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ إِنَّ اللَّهَ فَضَّلَ مُحَمَّدًا عَلَى الْأَنْبِيَاءِ وَعَلَى أَهْلِ السَّمَاءِ فَقَالُوا يَا ابْنَ عَبَّاسٍ بِمَ فَضَّلَهُ عَلَى أَهْلِ السَّمَاءِ قَالَ إِنَّ اللَّهَ قَالَ لِأَهْلِ السَّمَاءِ { وَمَنْ يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَهٌ مِنْ دُونِهِ فَذَلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ كَذَلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ } الْآيَةَ وَقَالَ اللَّهُ لِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { إِنَّا فَتَحْنَا لَكَ فَتْحًا مُبِينًا لِيَغْفِرَ لَكَ اللَّهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ } قَالُوا فَمَا فَضْلُهُ عَلَى الْأَنْبِيَاءِ قَالَ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ رَسُولٍ إِلَّا بِلِسَانِ قَوْمِهِ لِيُبَيِّنَ لَهُمْ } الْآيَةَ وَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِمُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا كَافَّةً لِلنَّاسِ } فَأَرْسَلَهُ إِلَى الْجِنِّ وَالْإِنْسِ

हमें बताया है [इस्हाक बिन इब्राहीम] ने हमें बताया है [यजीद बिन अबू हकीम] ने मुझे बताया है [अल हकम बिन अबान] [इक्रिमा] से [इब्न अब्बास] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; "वास्तव में, अल्लाह सुभानहु वा तआला ने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अन्य नबियों और स्वर्ग के निवासियों पर प्रधानता दी।" फिर उन्होंने पूछा: "हे इब्न अब्बास, स्वर्ग के निवासियों पर उन्हें क्या प्रधानता दी गई थी?" इब्न अब्बास ने उत्तर दिया; "बेशक, अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने आसमान वालों से कहा है: इब्न अब्बास ने कहा: वामन याकुल मिनहुम इन्नी इलाहुन मिन दुनिही फदज़ालिज्का नज्जीही जहन्नामा कदज़ालिका नज्जी अज़हा-ज़लीमीन और जो कोई उनमें से कहे, सच में मैं अल्लाह सुब्हानहु व तआला के अलावा कोई और भगवान हूँ, तो हम उस इंसान को जहन्नम देंगे, इस तरह हम गलत काम करने वालों को बदला देते हैं। (क़स. अल अंबिया` /21:29) और अल्लाह सुब्हानहु व तआला तुम्हारे पिछले और आने वाले गुनाहों के लिए और तुम पर अपनी रहमतें पूरी करता है और तुम्हें सीधे रास्ते पर ले चलता है। फ़रमाया, `हमने कोई रसूल नहीं भेजा, बल्कि अपनी कौम की भाषा में भेजा, ताकि वह उन्हें साफ़-साफ़ समझा सके।` (क़स. इब्राहीम /14:4) और अल्लाह सुब्हानहु व तआला पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, `और हमने तुम्हें सिर्फ़ सारी इंसानों के लिए खुशखबरी देने वाला और सावधान करने वाला बनाकर भेजा है।` (क़ुरआन: सबा 34: 28), फिर उन्हें जिन्न और इंसानों के पास भेजा गया।

ईश्वर के प्रेमी के रूप में पैगंबर की प्रधानता

इमाम दरिमी : 47

أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ حَدَّثَنَا زَمْعَةُ عَنْ سَلَمَةَ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ جَلَسَ نَاسٌ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْتَظِرُونَهُ فَخَرَجَ حَتَّى إِذَا دَنَا مِنْهُمْ سَمِعَهُمْ يَتَذَاكَرُونَ فَتَسَمَّعَ حَدِيثَهُمْ فَإِذَا بَعْضُهُمْ يَقُولُ عَجَبًا إِنَّ اللَّهَ اتَّخَذَ مِنْ خَلْقِهِ خَلِيلًا فَإِبْرَاهِيمُ خَلِيلُهُ وَقَالَ آخَرُ مَاذَا بِأَعْجَبَ مِنْ { وَكَلَّمَ اللَّهُ مُوسَى تَكْلِيمًا } وَقَالَ آخَرُ فَعِيسَى كَلِمَةُ اللَّهِ وَرُوحُهُ وَقَالَ آخَرُ وَآدَمُ اصْطَفَاهُ اللَّهُ فَخَرَجَ عَلَيْهِمْ فَسَلَّمَ وَقَالَ قَدْ سَمِعْتُ كَلَامَكُمْ وَعَجَبَكُمْ أَنَّ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلُ اللَّهِ وَهُوَ كَذَلِكَ وَمُوسَى نَجِيُّهُ وَهُوَ كَذَلِكَ وَعِيسَى رُوحُهُ وَكَلِمَتُهُ وَهُوَ كَذَلِكَ وَآدَمُ اصْطَفَاهُ اللَّهُ تَعَالَى وَهُوَ كَذَلِكَ أَلَا وَأَنَا حَبِيبُ اللَّهِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا حَامِلُ لِوَاءِ الْحَمْدِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ تَحْتَهُ آدَمُ فَمَنْ دُونَهُ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ شَافِعٍ وَأَوَّلُ مُشَفَّعٍ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ مَنْ يُحَرِّكُ بِحَلَقِ الْجَنَّةِ وَلَا فَخْرَ فَيَفْتَحُ اللَّهُ فَيُدْخِلُنِيهَا وَمَعِي فُقَرَاءُ الْمُؤْمِنِينَ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَكْرَمُ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ عَلَى اللَّهِ وَلَا فَخْرَ

हमें बताया है [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल मजीद] ने हमें बताया है [ज़मह] [सलमा] से [इकरमा] से [इब्न अब्बास] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों में से लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे। फिर वह बाहर आए और जब वह उनके करीब थे तो उन्होंने उन्हें अपना नाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लेते सुना। फिर उन्होंने उनकी बातचीत को ध्यान से सुना, फिर उनमें से एक ने कहा; "यह सच में हैरान करने वाली बात है कि अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने अपने कुछ जीवों को अपना करीबी दोस्त बनाया, और इब्राहिम अल्लाह सुब्हानहु व तआला के करीबी दोस्त थे। दूसरों ने कहा; जो आयत से भी ज़्यादा हैरान करने वाली बात है, WA KALLAMA ALLAHU MUSA TAKLIIMAA और अल्लाह ने पैगंबर मूसा से सीधे बात की (Qs. An Nisa`/4: 164) जबकि दूसरों ने कहा; जबकि ईसा अल्लाह सुब्हानहु व तआला का शब्द और उनकी आत्मा हैं, दूसरों ने यह भी कहा; जबकि आदम को अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने पवित्र किया है। फिर वह उनसे मिलने के लिए बाहर गया और नमस्ते कहा, फिर कहा: "मैंने तुम्हारी बातचीत सुनी और हैरान था कि इब्राहिम अल्लाह सुब्हानहु व तआला के करीबी दोस्त थे, और वास्तव में ऐसा ही था, मूसा वह थे जिनसे उन्होंने सीधे बात की थी और वास्तव में ऐसा ही था, और ईसा उनकी आत्मा और शब्द हैं और वास्तव में ऐसा ही था, और आदम अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने उन्हें चुना और बेशक ऐसा ही था, जान लो कि मैं हबीबुल्लाह (प्यारा आदमी) अल्लाह हूँ और इसमें कोई घमंड नहीं है, मैं क़यामत के दिन तारीफ़ का झंडा उठाने वाला हूँ जिसने आदम और उनके बाद नबियों को लाया और इसमें कोई घमंड नहीं है, और मैं क़यामत के दिन देने और सिफ़ारिश करने वाला पहला आदमी था और इसमें कोई घमंड नहीं था, और मैं जन्नत के दरवाज़े की रस्सी को हिलाने वाला पहला आदमी था और इसमें कोई घमंड नहीं था, फिर अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने दरवाज़ा खोला और मुझे अंदर कर दिया, मैं मुसलमानों के गरीब लोगों के साथ अंदर गया और इसमें कोई घमंड नहीं था, और मैं पहले के लोगों में सबसे नेक था और जो लोग बाद में आए हैं वे अल्लाह सुब्हानहु व तआला के साथ हैं और उनमें कोई घमंड नहीं है।

कयामत के दिन रसूलल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम को नेता बनाया गया

इमाम दरिमी : 48

حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ مَنْصُورِ بْنِ أَبِي الْأَسْوَدِ عَنْ لَيْثٍ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَا أَوَّلُهُمْ خُرُوجًا وَأَنَا قَائِدُهُمْ إِذَا وَفَدُوا وَأَنَا خَطِيبُهُمْ إِذَا أَنْصَتُوا وَأَنَا مُسْتَشْفِعُكُمْ إِذَا حُبِسُوا وَأَنَا مُبَشِّرُهُمْ إِذَا أَيِسُوا الْكَرَامَةُ وَالْمَفَاتِيحُ يَوْمَئِذٍ بِيَدِي وَأَنَا أَكْرَمُ وَلَدِ آدَمَ عَلَى رَبِّي يَطُوفُ عَلَيَّ أَلْفُ خَادِمٍ كَأَنَّهُمْ بَيْضٌ مَكْنُونٌ أَوْ لُؤْلُؤٌ مَنْثُورٌ

हमें [सईद बिन सुलेमान] ने [मंसूर बिन अबी अल असवद] से [लैतस] से [अर रबी बिन अनस] से [अनस] रदलिअल्लाहु अन्हु से बताया है उन्होंने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मैं पुनरुत्थान के दिन कब्र से उठने वाला पहला व्यक्ति था, मैं उनका नेता था जब वे आए, मैं उनका प्रवक्ता था जब वे चुप थे, मैं वह व्यक्ति था जिसने उनके लिए सिफ़ारिश मांगी थी जब वे फंस गए थे (महस्यार के मैदान में), मैं वह व्यक्ति था जिसने उन्हें खबर दी थी जब वे निराश थे। उस दिन की महिमा और कुंजियाँ मेरे हाथों में हैं, और मैं आदम अलैहिस का बेटा हूँ जो मेरे भगवान के पास सबसे महान अभिवादन करता है, मेरे चारों ओर एक हजार सेवक हैं, जैसे कि वे सफेद रत्न या बिखरे हुए मोती हों।

पैगम्बरों के नेता के रूप में रसूलुल्लाह शालल्लाहु अलैहि वसल्लम

इमाम दरिमी : 49

أخبرنا عبد الله بن عبد الحكم المصري حدثنا بكر بن مضر عن جعفر بن ربيعة عن صالح هو ابن عطاء بن خباب مولى بني الدئل عن عطاء بن أبي رباح عن جابر بن عبد الله أن النبي صلى الله عليه وسلم قال أنا قائد المرسلين ولا فخر وأنا خاتم النبيين ولا فخر وأنا أول شافع وأول مشفع ولا فخر

हमें [अब्दुल्ला बिन अब्दुल हकम अल मिश्री] ने [बकर बिन मुदलर] ने [जाफर बिन रबीआ] से [सालिह इब्न 'अथा` बिन खब्बाब] से बताया है जो बानी अल दुइल के एक पूर्व गुलाम थे ['अथा` बिन अबी रब्बाह] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] रदलिअल्लाहुअन्हु कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मैं रसूलों का नेता हूँ, और इसमें कोई अहंकार नहीं है, मैं पैगंबरों का आवरण हूं और इसमें कोई अहंकार नहीं है, मैं पहला व्यक्ति हूं जो मध्यस्थता करेगा और पहला व्यक्ति हूं जिसकी मध्यस्थता की जाएगी और इसमें कोई अहंकार नहीं है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स्वर्ग के दरवाजे खोलने वाले पहले व्यक्ति थे

इमाम दरिमी : 50

حدثنا محمد بن عباد حدثنا سفيان هو ابن عيينة عن ابن جدعان عن أنس أن النبي صلى الله عليه وسلم قال أنا أول من يأخذ بحلقة باب الجنة فأقعقعها قال أنس كأني أنظر إلى يد رسول الله صلى الله عليه وسلم يحركها وصف لنا سفيان كذا وجمع أبو عبد الله أصابعه وحركها قال وقال له ثابت مسست يد رسول الله صلى الله عليه وسلم بيدك قال نعم قال فأعطنيها أقبلها

हमें [मुहम्मद बिन अब्बद] ने [सुफ़यान इब्न उयैनाह] को [इब्न जुदान] से [अनस] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: जाबिर बिन अब्दुल्लाह से कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: मैं स्वर्ग के द्वार की रस्सी पकड़ने वाला पहला व्यक्ति था और मैंने इसे हिलाया। अनस ने कहा; यह ऐसा था जैसे मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथ को इसे हिलाते हुए देखा, और सुफ़यान ने भी इसी तरह उल्लेख किया, और अबू अब्दुल्ला ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे हिलाया, कथावाचक ने कहा; साबित ने उससे पूछा; क्या तुम अपने हाथ से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हाथ पकड़ते हो? उसने उत्तर दिया; उन्होंने मुझे चूमने के लिए अपना हाथ भी दिया।

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम हिमायत करने वाले पहले व्यक्ति थे

इमाम दरिमी : 51

أخبرنا أحمد بن عبد الله حدثنا حسين بن علي عن زائدة عن المختار بن فلفل عن أنس قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم أنا أول شافع في الجنة

हमें बताया है [अहमद बिन अब्दुल्लाह] ने हमें बताया है [हुसैन बिन अली] ने [ज़ैदा] से [अल मुख्तार बिन फुलफुल] से [अनस] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मैं स्वर्ग में पहला व्यक्ति हूँ जो हस्तक्षेप करता है।"

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कयामत के दिन स्वर्ग में प्रवेश करने वाले पहले व्यक्ति थे

इमाम दरिमी : 52

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي يَزِيدُ هُوَ ابْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْهَادِ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنِّي لَأَوَّلُ النَّاسِ تَنْشَقُّ الْأَرْضُ عَنْ جُمْجُمَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَأُعْطَى لِوَاءَ الْحَمْدِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا سَيِّدُ النَّاسِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَآتِي بَابَ الْجَنَّةِ فَآخُذُ بِحَلْقَتِهَا فَيَقُولُونَ مَنْ هَذَا فَأَقُولُ أَنَا مُحَمَّدٌ فَيَفْتَحُونَ لِي فَأَدْخُلُ فَأَجِدُ الْجَبَّارَ مُسْتَقْبِلِي فَأَسْجُدُ لَهُ فَيَقُولُ ارْفَعْ رَأْسَكَ يَا مُحَمَّدُ وَتَكَلَّمْ يُسْمَعْ مِنْكَ وَقُلْ يُقْبَلْ مِنْكَ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَرْفَعُ رَأْسِي فَأَقُولُ أُمَّتِي أُمَّتِي يَا رَبِّ فَيَقُولُ اذْهَبْ إِلَى أُمَّتِكَ فَمَنْ وَجَدْتَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِنْ شَعِيرٍ مِنْ الْإِيمَانِ فَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ فَأَذْهَبُ فَمَنْ وَجَدْتُ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالَ ذَلِكَ أَدْخَلْتُهُمْ الْجَنَّةَ فَأَجِدُ الْجَبَّارَ مُسْتَقْبِلِي فَأَسْجُدُ لَهُ فَيَقُولُ ارْفَعْ رَأْسَكَ يَا مُحَمَّدُ وَتَكَلَّمْ يُسْمَعْ مِنْكَ وَقُلْ يُقْبَلْ مِنْكَ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَرْفَعُ رَأْسِي فَأَقُولُ أُمَّتِي أُمَّتِي يَا رَبِّ فَيَقُولُ اذْهَبْ إِلَى أُمَّتِكَ فَمَنْ وَجَدْتَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ الْإِيمَانِ فَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ فَأَذْهَبُ فَمَنْ وَجَدْتُ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالَ ذَلِكَ أَدْخَلْتُهُمْ الْجَنَّةَ وَفُرِغَ مِنْ حِسَابِ النَّاسِ وَأُدْخِلَ مَنْ بَقِيَ مِنْ أُمَّتِي فِي النَّارِ مَعَ أَهْلِ النَّارِ فَيَقُولُ أَهْلُ النَّارِ مَا أَغْنَى عَنْكُمْ أَنَّكُمْ كُنْتُمْ تَعْبُدُونَ اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُونَ بِهِ شَيْئًا فَيَقُولُ الْجَبَّارُ فَبِعِزَّتِي لَأَعْتِقَنَّهُمْ مِنْ النَّارِ فَيُرْسِلُ إِلَيْهِمْ فَيَخْرُجُونَ مِنْ النَّارِ وَقَدْ امْتُحِشُوا فَيُدْخَلُونَ فِي نَهَرِ الْحَيَاةِ فَيَنْبُتُونَ فِيهِ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي غُثَاءِ السَّيْلِ وَيُكْتَبُ بَيْنَ أَعْيُنِهِمْ هَؤُلَاءِ عُتَقَاءُ اللَّهِ فَيُذْهَبُ بِهِمْ فَيَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ فَيَقُولُ لَهُمْ أَهْلُ الْجَنَّةِ هَؤُلَاءِ الْجَهَنَّمِيُّونَ فَيَقُولُ الْجَبَّارُ بَلْ هَؤُلَاءِ عُتَقَاءُ الْجَبَّارِ

हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन सलेह] ने हमें बताया है [अल लैट्स] ने मुझे बताया है [यज़ीद इब्नु अब्दुल्ला बिन अल हद] [`अम्र बिन अबू `अम्र] से [अनस बिन मलिक] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: “बेशक, मैं पहला इंसान हूँ जिसकी धरती मेरे घमंड की वजह से क़यामत के दिन फटेगी और इसमें कोई घमंड नहीं है, मैं क़यामत के दिन जन्नत में दाखिल होने वाला पहला इंसान हूँ और इसमें कोई घमंड नहीं है, और मैं जन्नत के दरवाज़े के पास पहुँचा और रस्सी पकड़ ली, उन्होंने (जन्नत के रखवालों) पूछा यह कौन है? मैंने जवाब दिया: मैं मुहम्मद हूँ फिर उन्होंने मेरे लिए दरवाज़ा खोल दिया, फिर मैं अंदर गया और मैंने अपने सामने अल्लाह को पाया तो मैंने उन्हें सजदा किया। फिर उन्होंने कहा: अपना सिर ऊँचा करो, ऐ मुहम्मद, और बोलो और तुम्हारी बात सुनी जाएगी, माँगो और तुम्हारी दुआ कबूल की जाएगी, दुआ करो और तुम दुआ कर पाओगे। तो मैंने अपना सिर ऊँचा किया और कहा: मेरे लोगों, मेरे लोगों, ऐ मेरे रब। उन्होंने कहा: “अपने लोगों के पास जाओ और जिसके दिल में तुम पाओगे वह गेहूँ के दाने जितना बड़ा है। जन्नत। फिर मैं गया और जो भी मुझे मिला जिसका दिल दाने के बराबर था, मैंने उसे जन्नत में डाल दिया। फिर मैंने अपने सामने अल्लाह को पाया, तो मैं उनके सामने झुक गया। उन्होंने कहा: अपना सिर उठाओ और बोलो और तुम्हारी बातें सुनी जाएंगी और उन्हें कहो और वे सुनी जाएंगी और सिफ़ारिश करो और तुम सिफ़ारिश कर पाओगे। तो मैंने अपना सिर उठाया और मैंने अपने लोगों से कहा, हे रब, तो उन्होंने कहा, 'अपने लोगों के पास जाओ, जिस किसी के दिल में तुम्हें गेहूं के दाने के बराबर भी ईमान मिले, तो उसे जन्नत में भेज दो, फिर मैं गया और जिस किसी के दिल में मुझे दाने के बराबर भी ईमान मिला, मैंने उसे जन्नत में डाल दिया। 'जब सभी इंसानों के कामों की गिनती पूरी हो गई, और मेरे बचे हुए लोग जहन्नम वालों के साथ जहन्नम में डाल दिए गए, तो जहन्नम वालों ने कहा; यह तुम्हारे किसी काम का नहीं है कि तुम अल्लाह सुब्हानहु व तआला की इबादत करते थे और तुमने उनके साथ किसी को शरीक नहीं किया। तो अल्लाह ने कहा: मेरी शान की कसम, मैं उन्हें जहन्नम की आग से आज़ाद कर दूंगा। फिर यह उनके पास भेजा गया और उन्हें जहन्नम से भूनकर निकाला गया, फिर उन्हें जीवन की नदी में डाल दिया गया, फिर वे बहते हुए झाग में बीज की तरह बढ़े, और यह उनके माथे पर लिखा गया; ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने आज़ाद किया था। फिर उन्हें ले जाकर जन्नत में डाल दिया गया। तो जन्नत के रहने वालों ने उनसे कहा; "ये जहन्नम के रहने वाले हैं।" तो अल्लाह ने कहा: "अरे नहीं, ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने आज़ाद किया था।"

स्वर्गदूत गैब्रिल द्वारा पैगंबर के हृदय का शुद्धिकरण

इमाम दरिमी : 53

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي مُعَاوِيَةُ عَنْ يُونُسَ بْنِ مَيْسَرَةَ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ ابْنِ غَنْمٍ قَالَ نَزَلَ جِبْرِيلُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَشَقَّ بَطْنَهُ ثُمَّ قَالَ جِبْرِيلُ قَلْبٌ وَكِيعٌ فِيهِ أُذُنَانِ سَمِيعَتَانِ وَعَيْنَانِ بَصِيرَتَانِ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ الْمُقَفِّي الْحَاشِرُ خُلُقُكَ قَيِّمٌ وَلِسَانُكَ صَادِقٌ وَنَفْسُكَ مُطْمَئِنَّةٌ قَالَ أَبُو مُحَمَّد وَكِيعٌ يَعْنِي شَدِيدًا

हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन सलीह] ने मुझे [मुअविया] [यूनुस बिन मैसरा] से [अबू इदरीस अल खौलानी] से [इब्न घनम] से बताया है; जिब्रील अलैहिस्सलाम अल्लाह के रसूल पर उतरे और उनका पेट चीरा, फिर जिब्रील ने कहा 'एक मज़बूत दिल में दो कान होते हैं जो सुन सकते हैं और दो आँखें जो देख सकती हैं, मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। रसूलुल्लाह अल मुक़फ़्फ़ा (महान व्यक्ति) और अल हसीर (जो इकट्ठा करता है), आपके अच्छे कर्म अच्छे हैं, आपकी ज़बान भरोसेमंद है और आपकी आत्मा शांत है। अबू मुहम्मद ने कहा कि 'वाकी' शब्द का मतलब मज़बूत है।

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्र और लोगों की सुरक्षा के बारे में खबर

इमाम दरिमी : 54

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي مُعَاوِيَةُ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ رُوَيْمٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ قَيْسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ أَدْرَكَ بِيَ الْأَجَلَ الْمَرْحُومَ وَاخْتَصَرَ لِيَ اخْتِصَارًا فَنَحْنُ الْآخِرُونَ وَنَحْنُ السَّابِقُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَإِنِّي قَائِلٌ قَوْلًا غَيْرَ فَخْرٍ إِبْرَاهِيمُ خَلِيلُ اللَّهِ وَمُوسَى صَفِيُّ اللَّهِ وَأَنَا حَبِيبُ اللَّهِ وَمَعِي لِوَاءُ الْحَمْدِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَعَدَنِي فِي أُمَّتِي وَأَجَارَهُمْ مِنْ ثَلَاثٍ لَا يَعُمُّهُمْ بِسَنَةٍ وَلَا يَسْتَأْصِلُهُمْ عَدُوٌّ وَلَا يَجْمَعُهُمْ عَلَى ضَلَالَةٍ

हमें [अब्दुल्ला बिन सलेह] ने [मुअविया] को [उरवाह बिन रुवैम] से [अम्र बिन क़ैस] से बताया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने मुझे दयालु की मृत्यु की सूचना दी है और उसने मेरी आयु कम कर दी है।" इसलिए हम अंतिम लोग हैं लेकिन हम निर्णय के दिन के पूर्ववर्ती हैं। मैं एक बयान दूंगा और क्षमा करें, यह कोई अहंकार नहीं है, इब्राहीम अल्लाह सुब्हानहु व तआला (खलीलुल्लाह) के करीबी दोस्त हैं, मूसा अल्लाह सुब्हानहु व तआला की पसंद हैं और मैं अल्लाह सुब्हानहु व तआला का प्रेमी हूं और मेरे साथ निर्णय के दिन प्रशंसा का झंडा है। वास्तव में, अल्लाह सुब्हानहु व तआला ने मेरे लोगों से वादा किया है और उन्हें तीन चीजों से सुरक्षित रखा है; उन पर भयानक अकाल नहीं पड़ेगा, दुश्मन उन्हें तितर-बितर नहीं करेंगे और वे गलती से इकट्ठा नहीं होंगे।

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अनुसार आसमान से मिलने वाला खाना और कयामत की निशानियाँ

इमाम दरिमी : 55

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا أَرْطَاةُ بْنُ الْمُنْذِرِ عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ حَبِيبٍ قَالَ سَمِعْتُ مَسْلَمَةَ السَّكُونِيَّ وَقَالَ غَيْرُ مُحَمَّدٍ سَلَمَةَ السَّكُونِيَّ قَالَ بَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ قَالَ قَائِلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ أُتِيتَ بِطَعَامٍ مِنْ السَّمَاءِ قَالَ نَعَمْ أُتِيتُ بِطَعَامٍ قَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ هَلْ كَانَ فِيهِ مِنْ فَضْلٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَمَا فُعِلَ بِهِ قَالِ رُفِعَ إِلَى السَّمَاءِ وَقَدْ أُوحِيَ إِلَيَّ أَنِّي غَيْرُ لَابِثٍ فِيكُمْ إِلَّا قَلِيلًا ثُمَّ تَلْبَثُونَ حَتَّى تَقُولُوا مَتَى مَتَى ثُمَّ تَأْتُونِي أَفْنَادًا يُفْنِي بَعْضُكُمْ بَعْضًا بَيْنَ يَدَيْ السَّاعَةِ مُوتَانٌ شَدِيدٌ وَبَعْدَهُ سَنَوَاتُ الزَّلَازِلِ

हमें बताया है [मुहम्मद बिन अल मुबारक] ने हमें बताया है [मुअविया बिन याह्या] ने हमें बताया है [अर्था बिन अल मुंदज़िर] [दलमराह बिन हबीब] से उन्होंने कहा कि मैंने मसलमाह अस सकुनी को सुना -मुहम्मद के अलावा और क्या कहा- [सलामाह अस सकुनी] उन्होंने कहा; जब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास थे, अचानक किसी ने कहा; "ऐ रसूलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम, क्या आपको आसमान से खाना दिया गया था?" उन्होंने उत्तर दिया: हाँ, मुझे खाना दिया गया था। उन्होंने फिर पूछा; "ऐ अल्लाह के पैगंबर सुब्हानहु वा तआला, क्या अभी भी खाना बचा है?" उन्होंने उत्तर दिया: "हाँ।" उन्होंने फिर पूछा, उनके साथ क्या किया गया था? उन्होंने उत्तर दिया: "इसे वापस स्वर्ग में उठा लिया गया है, और यह मेरे लिए प्रकट हुआ है कि मैं अब आपके साथ नहीं रहूंगा, फिर आप तब तक जीवित रहेंगे जब तक आप नहीं कहते; "कब, कब? तब तुम ग्रुप में एक-दूसरे को खत्म करते हुए मेरे पास आए, कयामत से पहले भयानक मौतें होंगी, और उसके बाद भूकंप से भरे साल आएंगे।"

रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा दिया गया पोर्ज का कटोरा और भोजन का चमत्कार

इमाम दरिमी : 56

أَخْبَرَنَا عُثْمَانُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ عَنْ أَبِي الْعَلَاءِ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِقَصْعَةٍ مِنْ ثَرِيدٍ فَوُضِعَتْ بَيْنَ يَدَيْ الْقَوْمِ فَتَعَاقَبُوهَا إِلَى الظُّهْرِ مِنْ غُدْوَةٍ يَقُومُ قَوْمٌ وَيَجْلِسُ آخَرُونَ فَقَالَ رَجُلٌ لِسَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ أَمَا كَانَتْ تُمَدُّ فَقَالَ سَمُرَةُ مِنْ أَيِّ شَيْءٍ تَعْجَبُ مَا كَانَتْ تُمَدُّ إِلَّا مِنْ هَا هُنَا وَأَشَارَ بِيَدِهِ إِلَى السَّمَاءِ

[उथमान बिन मुहम्मद] ने हमें [यज़ीद बिन हारून] ने हमें [सुलेमान अत तैमी] [अबू अल 'अला`] से [समुराह बिन जुनदूद] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मीट दलिया से भरा एक बड़ा कटोरा दिया गया, फिर कटोरा लोगों के बीच में रख दिया गया, तो उन्होंने बारी-बारी से दोपहर के खाने के लिए ज़ुहर की नमाज़ पढ़ी, कुछ खड़े होकर और कुछ बैठकर। और किसी ने समुराह बिन जुनदुब से कहा; क्या यह खाना अभी वहाँ से आया है? समुराह ने जवाब दिया: "तुम्हें किस बात पर हैरानी हो रही है? यह वहीं से लाया गया है," जबकि उसने अपने हाथ से आसमान की ओर इशारा किया।

पूर्णिमा की तुलना में रसूलुल्लाह शालल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखना

इमाम दरिमी : 57

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ أَشْعَثَ بْنِ سَوَّارٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي لَيْلَةٍ إِضْحِيَانَ وَعَلَيْهِ حُلَّةٌ حَمْرَاءُ فَجَعَلْتُ أَنْظُرُ إِلَيْهِ وَإِلَى الْقَمَرِ قَالَ فَلَهُوَ كَانَ أَحْسَنَ فِي عَيْنِي مِنْ الْقَمَرِ

मुहम्मद बिन सईद ने हमें बताया है, अब्दुर रहमान बिन मुहम्मद ने, अश-अत्स बिन शव्वार ने, अबू इसहाक ने, जाबिर बिन समुराह ने कहा; मैंने रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पूर्णिमा की रात को देखा और उन्होंने लाल कपड़े पहने हुए थे, फिर मैंने (बारी-बारी से) उनकी तरफ देखा और चाँद को देखा।

वह रोशनी जो रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दांतों के बीच दिखाई दे रही थी

इमाम दरिमी : 58

أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي ثَابِتٍ الزُّهْرِيُّ حَدَّثَنِي إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ ابْنُ أَخِي مُوسَى عَنْ عَمِّهِ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ كُرَيْبٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْلَجَ الثَّنِيَّتَيْنِ إِذَا تَكَلَّمَ رُئِيَ كَالنُّورِ يَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ ثَنَايَاهُ

हमें बताया है [इब्राहिम बिन अल मुंदज़िर] ने हमें बताया है [अब्दुल अज़ीज़ बिन अबू साबित अज़ ज़ुहरी] ने मुझे बताया है [इस्माइल बिन इब्राहिम] - मेरे भाई के बेटे, मूसा - अपने चाचा [मूसा बिन उकबा] से [कुरैब] से [इब्न अब्बास] रदलिअल्लाहुअन्हु ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दांत ढीले थे, जब वह बोलते थे तो ऐसा लगता था कि उनके दोनों दांतों के बीच से रोशनी निकल रही है।

आईबीएनयू उमर ने रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के साहस और स्वच्छता की प्रशंसा की

इमाम दरिमी : 59

أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا مِسْعَرٌ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ قَالَ قَالَ ابْنُ عُمَرَ مَا رَأَيْتُ أَحَدًا أَنْجَدَ وَلَا أَجْوَدَ وَلَا أَشْجَعَ وَلَا أَضْوَأَ وَأَوْضَأَ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमें बताया है [महमूद बिन घैलन] ने हमें बताया है [यज़ीद बिन हारून] ने हमें बताया है [मिसर] ने [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से कहा है; [इब्न उमर] ने कहा; मैंने कभी किसी को रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ज़्यादा तेज़, साफ़-सुथरा, बहादुर और होशियार नहीं देखा।

एआर रुबाई बिनती मुअव्विदज़ में रसूलुल्लाह शाल्लाहु अलैहि वसल्लम का वर्णन उगते सूरज की तरह है

इमाम दरिमी : 60

أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍ قَالَ قُلْتُ لِلرُّبَيِّعِ بِنْتِ مُعَوِّذِ بْنِ عَفْرَاءَ صِفِي لَنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا بُنَيَّ لَوْ رَأَيْتَهُ رَأَيْتَ الشَّمْسَ طَالِعَةً

हमें बताया है [इब्राहिम बिन अल मुंदज़िर अल हिज़ामी] ने हमें बताया है [उबैदुल्लाह बिन मूसा] ने हमें बताया है [उसामा बिन ज़ैद] ने [अबू उबैदा बिन मुहम्मद बिन अम्मार बिन यासिर] से कहा; मैंने [अर रुबाई' बिन्त मुअव्विज़ बिन अफ़रा`] से कहा; कृपया, मुझे बताएं, (कैसे) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तो उन्होंने कहा; ऐ मेरे बच्चे, अगर तुमने उसे देखा, तो ऐसा लगेगा जैसे तुमने सूरज को उगते देखा हो।