इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)
Free Download / मुफ्त डाउनलोड

Imam Darimi (الامام الدارمي) - 3469 हदीस

हदीस

Imam Darimi : 21

حَدَّثَنَا فَرْوَةُ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ أَبِي ثَوْرٍ الْهَمْدَانِيُّ عَنْ إِسْمَعِيلَ السُّدِّيِّ عَنْ عَبَّادٍ أَبِي يَزِيدَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَكَّةَ فَخَرَجْنَا مَعَهُ فِي بَعْضِ نَوَاحِيهَا فَمَرَرْنَا بَيْنَ الْجِبَالِ وَالشَّجَرِ فَلَمْ نَمُرَّ بِشَجَرَةٍ وَلَا جَبَلٍ إِلَّا قَالَ السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ

हमनी के बतवले बा [फरवाह] हमनी के बतवले बाड़े [अल वलीद बिन अबू त्साउर अल हमदानी] से [इस्माइल अस सुद्दी] से [अब्बाद बिन अबू यजीद] से [अली बिन अबू तालिब] से रदलियाल्लाहुअनहू उ कहले; हम मक्का में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहनी। तब हम उनका साथे निकलनी त एको पेड़ भा पहाड़ी से ना गुजरनी बाकिर ऊ कहले; असलामू 'अलाईका या रसूलुल्लाह -सुरक्षा हमेशा तोहरा पर बा, हे रसुलुल्लाह-।

हदीस

Imam Darimi : 22

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شِمْرِ بْنِ عَطِيَّةَ عَنْ رَجُلٍ مِنْ مُزَيْنَةَ أَوْ جُهَيْنَةَ قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْفَجْرَ فَإِذَا هُوَ بِقَرِيبٍ مِنْ مِائَةِ ذِئْبٍ قَدْ أَقْعَيْنَ وُفُودُ الذِّئَابِ فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَرْضَخُوا لَهُمْ شَيْئًا مِنْ طَعَامِكُمْ وَتَأْمَنُونَ عَلَى مَا سِوَى ذَلِكَ فَشَكَوْا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْحَاجَةَ قَالَ فَآذِنُوهُنَّ قَالَ فَآذَنُوهُنَّ فَخَرَجْنَ وَلَهُنَّ عُوَاءٌ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन यूसुफ] हमनी के [सुफयान] से [अल अ'मासी] से [सिमर बिन अथियाह] से [केहू] से मुजैना या जुहैना से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भोर में नमाज पढ़त सौ भेड़िया के लगे निकलल, जवन सब पहिलही से कूदत रहले। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खाली ओह लोग से - साथी लोग से कहले रहले - ' कृपया, आपन खाना के तनी-मनी ओह लोग के झुंड - भेड़िया में फेंक दीं - तब राउर बाकी खाना सुरक्षित हो जाई। ' तब उ लोग अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एगो जरूरत के शिकायत कईले। नबी इहो कहले कि भेड़िया के बताईं। त दोस्त लोग भेड़िया के झुंड से कहल कि ओह लोग के जरूरत बा आ ओकरा से गुजरे के बा. भेड़िया के झुंड अपने आप एगो हुंकार के संगे चल गईल।

हदीस

Imam Darimi : 23

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ جَاءَ جِبْرِيلُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ جَالِسٌ حَزِينٌ وَقَدْ تَخَضَّبَ بِالدَّمِ مِنْ فِعْلِ أَهْلِ مَكَّةَ مِنْ قُرَيْشٍ فَقَالَ جِبْرِيلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَلْ تُحِبُّ أَنْ أُرِيَكَ آيَةً قَالَ نَعَمْ فَنَظَرَ إِلَى شَجَرَةٍ مِنْ وَرَائِهِ فَقَالَ ادْعُ بِهَا فَدَعَا بِهَا فَجَاءَتْ وَقَامَتْ بَيْنَ يَدَيْهِ فَقَالَ مُرْهَا فَلْتَرْجِعْ فَأَمَرَهَا فَرَجَعَتْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَسْبِي حَسْبِي

हमनी के बतवले बाड़े [इशाक बिन इब्राहिम] हमनी के बतवले बाड़े [अबू मुअवियाह] हमनी के [अबू सूफियान] से [अनस बिन मलिक] से [अल अमासी] बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; जिब्रिल रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास तब अइले जब उ मक्का में कुरैश काफिरन के इलाज के चलते उदास होके खून से लथपथ बइठल रहले, तब जिब्रिल कहले: हे रसुलुल्लाह, का रउवा चाहत बानी कि हम रउवा के सुभानाहु व ताला के सत्ता के निशानी देखाईं? नबी जवाब दिहले: 'हाँ': तब उनुका पीछे एगो पेड़ देखाई देलस, जिब्रिल कहले: पेड़ के बोलाई, त उ उनुका के बोलवले अवुरी पेड़ आके उनुका सोझा खड़ा हो गईल, फेर जिब्रिल कहले: 'उनुका के वापस आवे के आदेश दीं'। त उ ओकरा के वापस आवे के आदेश देले अवुरी पेड़ वापस आ गईल - अपना मूल जगह प - अल्लाह के रसूलुल्लाह कहले: इहे काफी बा।

हदीस

Imam Darimi : 24

أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي ظَبْيَانَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَتَى رَجُلٌ مِنْ بَنِي عَامِرٍ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا أُرِيكَ آيَةً قَالَ بَلَى قَالَ فَاذْهَبْ فَادْعُ تِلْكَ النَّخْلَةَ فَدَعَاهَا فَجَاءَتْ تَنْقُزُ بَيْنَ يَدَيْهِ قَالَ قُلْ لَهَا تَرْجِعْ قَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْجِعِي فَرَجَعَتْ حَتَّى عَادَتْ إِلَى مَكَانِهَا فَقَالَ يَا بَنِي عَامِرٍ مَا رَأَيْتُ رَجُلًا كَالْيَوْمِ أَسْحَرَ مِنْهُ

हमनी के जानकारी देले बा [इशहाक बिन इब्राहिम] हमनी के [जरीर] अवुरी [अबू मुअवियाह] से [अल अमासी] से [अबू झाबियन] से [इब्न अब्बास] से [इब्न अब्बास] रदलियाहु' अंहू के जानकारी देले बाड़े उ कहले; बानी अमीर से केहू रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आइल, फिर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले; का रउवा चाहब कि हम रउवा के एगो निशानी देखाईं - अल्लाह सुभनाहु व ताला के महानता - उ जवाब देले: हँ! प्रेरित कहले: जाके खजूर के पेड़ के बोला, तब उ ओकरा के बोलवले अवुरी खजूर ओकरा सोझा कूदत आ गईल, तब उ आदमी कहलस; ओकरा के वापस आवे के कह दीं, तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पेड़ से कहले: वापस आ जा, फेर पेड़ वापस आ गईल जब तक कि उ अपना जगह प ना पहुंच गईल, उ आदमी फोन कईले; हे अमीर के संतान, हम एको आदमी नइखी देखले जे ओकरा से जादा जादू-टोना में निपुण होखे।

हदीस

Imam Darimi : 25

أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا شُعَيْبُ بْنُ صَفْوَانَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ أَبِي الضُّحَى عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ دَعَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَطَلَبَ بِلَالٌ الْمَاءَ ثُمَّ جَاءَ فَقَالَ لَا وَاللَّهِ مَا وَجَدْتُ الْمَاءَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَلْ مِنْ شَنٍّ فَأَتَاهُ بِشَنٍّ فَبَسَطَ كَفَّيْهِ فِيهِ فَانْبَعَثَتْ تَحْتَ يَدَيْهِ عَيْنٌ قَالَ فَكَانَ ابْنُ مَسْعُودٍ يَشْرَبُ وَغَيْرُهُ يَتَوَضَّأُ

हमनी के बतवले बा [इस्माइल बिन इब्राहिम] हमनी के [शुआइब बिन शफवान] से ['अथा` बिन अस सा`इब] से [अबू अल द्लुहा] से [इब्न अब्बास] रदलियाल्लाहुअनहु से बतवले बाड़े उ कहले कि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बिलाल के बोलवले, आ बिलाल पानी खोजले तब आके कहले; ना, अल्लाह सुभानाहु व तआला के कसम हम पानी के मध्यस्थता ना करेनी, फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूछले: का रउवा लगे पानी के बर्तन बा?, फिर उ -बिलाल- ओकरा के पानी के बर्तन देले अवुरी उ बर्तन में हाथ पसार देले, फेर पानी उनुका हथेली से बह गईल, रवीर कहले; इब्न मसूद आ अउरी लोग भी पी के वजूद कइल -पानी से-।

हदीस

Imam Darimi : 26

أَخْبَرَنَا أَبُو النُّعْمَانَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ الْأَسْوَدِ بْنِ قَيْسٍ عَنْ نُبَيْحٍ الْعَنَزِيِّ قَالَ قَالَ جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ غَزَوْنَا أَوْ سَافَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ يَوْمَئِذٍ بِضْعَةَ عَشَرَ وَمِائَتَانِ فَحَضَرَتْ الصَّلَاةُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلْ فِي الْقَوْمِ مِنْ طَهُورٍ فَجَاءَ رَجُلٌ يَسْعَى بِإِدَاوَةٍ فِيهَا شَيْءٌ مِنْ مَاءٍ لَيْسَ فِي الْقَوْمِ مَاءٌ غَيْرُهُ فَصَبَّهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي قَدَحٍ ثُمَّ تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ انْصَرَفَ وَتَرَكَ الْقَدَحَ فَرَكِبَ النَّاسُ ذَلِكَ الْقَدَحَ وَقَالُوا تَمَسَّحُوا تَمَسَّحُوا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رِسْلِكُمْ حِينَ سَمِعَهُمْ يَقُولُونَ ذَلِكَ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَفَّهُ فِي الْمَاءِ وَالْقَدَحِ وَقَالَ بِسْمِ اللَّهِ ثُمَّ قَالَ أَسْبِغُوا الطُّهُورَ فَوَالَّذِي هُوَ ابْتَلَانِي بِبَصَرِي لَقَدْ رَأَيْتُ الْعُيُونَ عُيُونَ الْمَاءِ تَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ أَصَابِعِهِ فَلَمْ يَرْفَعْهَا حَتَّى تَوَضَّئُوا أَجْمَعُونَ

हमनी के बतवले बा [अबू अन नु’मान] हमनी के [अबू अवानाह] से [अल असवद बिन कैस] से [नुबैह अल अनाजी] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] कहले कि; हमनी के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से लड़ले बानी जा भा यात्रा कइले बानी जा। ओह दिन हमनी के दू सौ लोग रहनी जा। एकरा बाद नमाज के समय आ गईल। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूछले कि का सब लोग शुद्ध बा? तब केहू पानी से भरल चमड़ा के जेरी कैन लेके आइल, आ ओह पानी के छोड़ के अउरी पानी ना रहे। फिर अल्लाह के रसूलुल्लाह एकरा के एगो बड़ बर्तन में डाल देले, फिर सबसे बढ़िया वज़ूज़ से वज़ूद कईले, फिर बर्तन से मुड़ गईले। त लोग दौड़त-दौड़ के बर्तन के ओर बढ़ल कि; 'बस रगड़े के बा।' ' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: 'माफ करीं, हमरा के रास्ता दे दीं'। प्रेरित इ बात तब कहले जब उ लोग के ऊपर बोलत सुनले। एकरा बाद रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना हाथ के हथेली पानी में रख के कहले कि अल्लाह सुभानाहु व तआला के नाम प तब उ कहले कि, आपन वज़ूद पूरा करीं। -जाबिर रदलियाल्लाहुअनहु- कहले; हमरा दृष्टि के अस्पष्ट ना करे वाला के द्वारा हम साफ देखनी कि उनकर अँगुरी से पानी निकलत बा आ जबले ऊ सब वजूद ना कर लिहले तबले ऊ हाथ ना उठवले.

हदीस

Imam Darimi : 27

أَخْبَرَنَا أَبُو الْوَلِيدِ الطَّيَالِسِيُّ وَسَعِيدُ بْنُ الرَّبِيعِ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ وَحُصَيْنٍ سَمِعَا سَالِمَ بْنَ أَبِي الْجَعْدِ يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ أَصَابَنَا عَطَشٌ فَجَهَشْنَا فَانْتَهَيْنَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَوَضَعَ يَدَهُ فِي تَوْرٍ فَجَعَلَ يَفُورُ كَأَنَّهُ عُيُونٌ مِنْ خَلَلِ أَصَابِعِهِ وَقَالَ اذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فَشَرِبْنَا حَتَّى وَسِعَنَا وَكَفَانَا وَفِي حَدِيثِ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ فَقُلْنَا لِجَابِرٍ كَمْ كُنْتُمْ قَالَ كُنَّا أَلْفًا وَخَمْسَ مِائَةٍ وَلَوْ كُنَّا مِائَةَ أَلْفٍ لَكَفَانَا

हमनी के बतावल गइल बा कि [अबू अल वालिद अल थयालित्सी] आ [सैद बिन अर रबी’] दुनु कहले रहले; हमनी के [स्यूबाह] [अमर बिन मुर्राह] से बतवले बाड़े अवुरी [हुशैन] दुनो [सलीम बिन अबू जाद] के कहत सुनले बाड़े; हम [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] रदलियाल्लाहुअनहु के कहत सुनले बानी; हमनी के बहुत प्यास लागल आ हमनी के जल्दी से रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे चल गईनी जा, फिर उ आपन हाथ घड़ा में डाल देले अवुरी उनुका अँगुरी से पानी झरना निहन निकल गईल, अवुरी उ कहले: अल्लाह सुभानाहु व तआला के नाम भी कहेनी - एहसे हमनी के अल्लाह सुभानाहु व तआला के नाम भी कहनी - अवुरी हमनी के तब तक पी गईनी जा, जब तक हमनी के पेट ना भर गईल अवुरी भरपूर ना हो गईल। अमरू बिन मुर्राह के हदीस में हम जाबिर रदलियाल्लाहुअनहु से पूछले बानी; रउरा में से केतना - ओह घरी -? ऊ जवाब दिहलन; हमनी के पन्द्रह सौ रहनी जा, भले हमनी के - ओह घरी - एक लाख रहनी जा, त हमनी खातिर पानी काफी रहित।

हदीस

Imam Darimi : 28

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقَاشِيُّ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا الْجَعْدُ أَبُو عُثْمَانَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ شَكَا أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعَطَشَ فَدَعَا بِعُسٍّ فَصُبَّ فِيهِ مَاءٌ وَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ فِيهِ قَالَ فَجَعَلْتُ أَنْظُرُ إِلَى الْمَاءِ يَنْبُعُ عُيُونًا مِنْ بَيْنِ أَصَابِعِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالنَّاسُ يَسْتَقُونَ حَتَّى اسْتَقَى النَّاسُ كُلُّهُمْ

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अर रक्कासी] हमनी के बतवले बाड़े [जफर बिन सुलेमान] हमनी के बतवले बाड़े [अल जादु अबू उस्मान] हमनी के बतवले बाड़े [अनास बिन मलिक] रदलियाल्लाहुअनहू हमनी के बतवले बाड़े [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] रदलियाहुअनहू उ कहले कि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी लोग उनका से प्यास के शिकायत कइल - जवन ओह लोग के महसूस भइल - तब ऊ एगो बड़हन बर्तन मंगले आ ओकरा में पानी बाँट दिहले आ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओह बर्तन में आपन हाथ डाल दिहले. कथाकार कहले कि; हम देखनी कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अँगुरी से पानी के झरना बहत रहे, लोग एकरा के पीये खातिर ले गईल ताकि उ सब एकरा से पी सके।

हदीस

Imam Darimi : 29

أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى عَنْ إِسْرَائِيلَ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ سَمِعَ عَبْدُ اللَّهِ بِخَسْفٍ فَقَالَ كُنَّا أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعُدُّ الْآيَاتِ بَرَكَةً وَأَنْتُمْ تَعُدُّونَهَا تَخْوِيفًا إِنَّا بَيْنَمَا نَحْنُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَيْسَ مَعَنَا مَاءٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اطْلُبُوا مَنْ مَعَهُ فَضْلُ مَاءٍ فَأُتِيَ بِمَاءٍ فَصَبَّهُ فِي الْإِنَاءِ ثُمَّ وَضَعَ كَفَّهُ فِيهِ فَجَعَلَ الْمَاءُ يَخْرُجُ مِنْ بَيْنِ أَصَابِعِهِ ثُمَّ قَالَ حَيَّ عَلَى الطَّهُورِ الْمُبَارَكِ وَالْبَرَكَةُ مِنْ اللَّهِ تَعَالَى فَشَرِبْنَا و قَالَ عَبْدُ اللَّهِ كُنَّا نَسْمَعُ تَسْبِيحَ الطَّعَامِ وَهُوَ يُؤْكَلُ

हमनी के [उबैदुल्लाह बिन मूसा] के [इजराइल] से [मंसूर] से [इब्राहिम] से [अलकामा] से [अब्दुल्लाह] से रिपोर्ट कईला के बाद उ कहले कि; अब्दुल्ला चंद्रग्रहण के बारे में सुनले, तब उ कहले; हमनी के, पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दोस्त, निशान - अल्लाह सुभानाहु व तआला के शक्ति के - के बरकत मानत बानी जा जबकि रउआ ओकरा के कुछ भयावह मानत बानी जा। सचमुच जब हमनी के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे रहनी जा त हमनी के लगे पानी ना रहे। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, जेकरा लगे पानी के फालतू बा, ओकरा से पूछीं। ' तब एकरा के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के लगे ले आवल गईल अवुरी उ एकरा के एगो बर्तन में डाल देले, उ अपना हाथ के हथेली ओकरा में डाल देले, अवुरी नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के अँगुरी से पानी निकलल अवुरी उ चिल्ला के कहले: जल्दी आके अपना के साफ कर, जवन कि बरकत से भरल बा, अवुरी उ बरकत आपन होखे खाली अल्लाह सुभानाहु वा ताला के, तब हमनी के पी लेनी जा। अब्दुल्ला कहले कि; पहिले हमनी के खाना खात घरी के दुआ तक सुनत रहनी जा।

हदीस

Imam Darimi : 30

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو الْجَوَّابِ عَنْ عَمَّارِ بْنِ رُزَيْقٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ زُلْزِلَتْ الْأَرْضُ عَلَى عَهْدِ عَبْدِ اللَّهِ فَأُخْبِرَ بِذَلِكَ فَقَالَ إِنَّا كُنَّا أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ نَرَى الْآيَاتِ بَرَكَاتٍ وَأَنْتُمْ تَرَوْنَهَا تَخْوِيفًا بَيْنَا نَحْنُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ إِذْ حَضَرَتْ الصَّلَاةُ وَلَيْسَ مَعَنَا مَاءٌ إِلَّا يَسِيرٌ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَاءٍ فِي صَحْفَةٍ وَوَضَعَ كَفَّهُ فِيهِ فَجَعَلَ الْمَاءُ يَنْبَجِسُ مِنْ بَيْنِ أَصَابِعِهِ ثُمَّ نَادَى حَيَّ عَلَى الْوَضُوءِ وَالْبَرَكَةُ مِنْ اللَّهِ فَأَقْبَلَ النَّاسُ فَتَوَضَّئُوا وَجَعَلْتُ لَا هَمَّ لِي إِلَّا مَا أُدْخِلُهُ بَطْنِي لِقَوْلِهِ وَالْبَرَكَةُ مِنْ اللَّهِ فَحَدَّثْتُ بِهِ سَالِمَ بْنَ أَبِي الْجَعْدِ فَقَالَ كَانُوا خَمْسَ عَشْرَةَ مِائَةٍ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] हमनी के [अबू अल जवाब] से [अमर बिन रुजैक] से [अल अ'मासी] से [इब्राहिम] से [अलकामा] से [अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े उ कहले कि; अब्दुल्ला के समय में भूकंप आईल रहे अवुरी इ घटना अब्दुल्ला के बतावल गईल अवुरी उ कहले कि हमनी के दोस्त लोग निशान - अल्लाह सुभानाहु व ताला के महानता - के बरकत मानतानी, जबकि आप लोग एकरा के भयावह चीज़ मानतानी। एक बेर जब हमनी के रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे यात्रा प रहनी जा त अचानक नमाज के समय आ गईल, जबकि हमनी के तनी-मनी पानी के छोड़ के पानी ना ले आईल। तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एगो बड़हन बर्तन में पानी मंगले, आ ओकरा पर हाथ के हथेली रखले। हैरानी के बात बा कि उनुका अँगुरी के बीच से पानी निकल गईल अवुरी फेर उ चिल्ला के कहले कि, 'हाय, अल्लाह सुभानाहु व ताला से वज़ूद के पानी अवुरी बरकत लेवे खाती इहाँ आव'। त सभे वजूद लेत रहे जबकि हमरा कवनो इच्छा ना रहे सिवाय एह बात के कि हम बस एकरा के पी के पानी पेट में डाल देनी काहे कि उ कहले रहले कि: अल्लाह से बरकत। हम ई घटना [सलीम बिन अबू अल जा'द] के बतवनी, त उ कहले; उ लोग -ओह समय- पंद्रह लोग के संख्या रहे।

हदीस

Imam Darimi : 31

أَخْبَرَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ أَخْبَرَنَا مُعَاذُ بْنُ الْعَلَاءِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَخْطُبُ إِلَى جِذْعٍ فَلَمَّا اتَّخَذَ الْمِنْبَرَ حَنَّ الْجِذْعُ حَتَّى أَتَاهُ فَمَسَحَهُ

हमनी के [उस्मान बिन उमर] के रिपोर्ट हमनी के [मुअदज बिन अल अला`] से [नाफी’] से [इब्न उमर] से बतावल गईल बा शुरू में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा लकड़ी के टुकड़ा प झुक के उपदेश देत रहले। मंच के इस्तेमाल कइला के बाद -आ लकड़ी के इस्तेमाल ना भइल- लकड़ी कराह उठल एहसे ऊ ओकरा के सहला दिहलन.

हदीस

Imam Darimi : 32

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا تَمِيمُ بْنُ عَبْدِ الْمُؤْمِنِ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ حَيَّانَ حَدَّثَنِي ابْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَطَبَ قَامَ فَأَطَالَ الْقِيَامَ فَكَانَ يَشُقُّ عَلَيْهِ قِيَامُهُ فَأُتِيَ بِجِذْعِ نَخْلَةٍ فَحُفِرَ لَهُ وَأُقِيمَ إِلَى جَنْبِهِ قَائِمًا لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَطَبَ فَطَالَ الْقِيَامُ عَلَيْهِ اسْتَنَدَ إِلَيْهِ فَاتَّكَأَ عَلَيْهِ فَبَصُرَ بِهِ رَجُلٌ كَانَ وَرَدَ الْمَدِينَةَ فَرَآهُ قَائِمًا إِلَى جَنْبِ ذَلِكَ الْجِذْعِ فَقَالَ لِمَنْ يَلِيهِ مِنْ النَّاسِ لَوْ أَعْلَمُ أَنَّ مُحَمَّدًا يَحْمَدُنِي فِي شَيْءٍ يَرْفُقُ بِهِ لَصَنَعْتُ لَهُ مَجْلِسًا يَقُومُ عَلَيْهِ فَإِنْ شَاءَ جَلَسَ مَا شَاءَ وَإِنْ شَاءَ قَامَ فَبَلَغَ ذَلِكَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ ائْتُونِي بِهِ فَأَتَوْهُ بِهِ فَأُمِرَ أَنْ يَصْنَعَ لَهُ هَذِهِ الْمَرَاقِيَ الثَّلَاثَ أَوْ الْأَرْبَعَ هِيَ الْآنَ فِي مِنْبَرِ الْمَدِينَةِ فَوَجَدَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي ذَلِكَ رَاحَةً فَلَمَّا فَارَقَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْجِذْعَ وَعَمَدَ إِلَى هَذِهِ الَّتِي صُنِعَتْ لَهُ جَزِعَ الْجِذْعُ فَحَنَّ كَمَا تَحِنُّ النَّاقَةُ حِينَ فَارَقَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَزَعَمَ ابْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ سَمِعَ حَنِينَ الْجِذْعِ رَجَعَ إِلَيْهِ فَوَضَعَ يَدَهُ عَلَيْهِ وَقَالَ اخْتَرْ أَنْ أَغْرِسَكَ فِي الْمَكَانِ الَّذِي كُنْتَ فِيهِ فَتَكُونَ كَمَا كُنْتَ وَإِنْ شِئْتَ أَنْ أَغْرِسَكَ فِي الْجَنَّةِ فَتَشْرَبَ مِنْ أَنْهَارِهَا وَعُيُونِهَا فَيَحْسُنُ نَبْتُكَ وَتُثْمِرُ فَيَأْكُلَ أَوْلِيَاءُ اللَّهِ مِنْ ثَمَرَتِكَ وَنَخْلِكَ فَعَلْتُ فَزَعَمَ أَنَّهُ سَمِعَ مِنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَقُولُ لَهُ نَعَمْ قَدْ فَعَلْتُ مَرَّتَيْنِ فَسُئِلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ اخْتَارَ أَنْ أَغْرِسَهُ فِي الْجَنَّةِ

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन हुमैद] हमनी के बतवले बाड़े [तमीम बिन अब्दुल मुकमीन] हमनी के बतवले बाड़े [सालिह बिन हयान] हमरा के [इब्नु बुराइदा] [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; शुरू में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़ा होके प्रचार करत रहले, अवुरी उ बहुत दिन तक खड़ा रहले। त उनुका खातिर ई बहुते बोझिल रहे. एकरा बाद खजूर के पत्ता लेके जमीन से पोखरा बनवले अवुरी खजूर के पेड़ के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में लगा देले ताकि उ खड़ा होखे के समय एकर इस्तेमाल क सकस। अगर भविष्यवक्ता बहुत देर तक उपदेश देत रहले अवुरी खड़ा रहले त खजूर प झुक गईले। अभी मदीना आइल एगो आदमी ई घटना देखलस, खजूर के पेड़ के बगल में खड़ा रहे। त ऊ आदमी आपन चिंता अपना आसपास के लोग तक पहुँचा दिहलस; 'अगर हमरा मालूम रहित कि मुहम्मद हमरा के तारीफ करीहे कि हम अपना बोझ के हल्का करे खाती कुछ कईले बानी त हम उनुका के एगो अयीसन सीट बना देले रहती, जवना प उ खड़ा हो सकेले, अगर उनुका पसंद होखे त उ बईठ सकेले अवुरी अगर उनुका पसंद होखे त उ ओ जगह प खड़ा हो सकेले।' ' तब इ मामला रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे पहुंचावल गईल अवुरी उ कहले कि, 'ओह आदमी के हमरा सोझा ले आव'। फेर एह आदमी के ले आ के आदेश दिहल गइल कि तीन चार सीढ़ी वाला सीढ़ी बनावल जाव जइसे अब मदीना के मंच पर बा. रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एह बात से सहज महसूस भइल. जब ऊ पेड़ के तने से निकल के - जवना के ऊ पहिले इस्तेमाल कइले रहले - आ ओह मंच पर झुक गइलन जवन उनका खातिर बनल रहे त खजूर के पेड़ दुखी महसूस कइलसि आ ऊंट के कराह जइसन कराह उठल जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओकरा के छोड़ दिहलन. इब्न बुराइदाह अपना पिता से मानत रहले कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब खजूर के पेड़ के कराह सुनले त फेर ओकरा प हाथ रखले अवुरी कहले कि, 'चुन कि हम आपके वापस मूल जगह प रोपब कि हम आपके - बाद में - स्वर्ग में रोपब ताकि आप नदी अवुरी झरना से उ पानी चूस सकी जवन आपके बढ़न्ती के निमन अवुरी फलदायी बनावेला, अवुरी ताकि के संत।' अल्लाह सुभानाहु व ताआला तोहार फल - खजूर - खा सकेला तब हम करब। ' इब्न बुराइदा के पिता के मानना रहे कि उ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनले बाड़े, उ खजूर से कहले: 'ठीक बा, हम कईले बानी - नबी आपन बात दु बेर दोहरवले।' ' तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछल गईल त उ जवाब देले कि हम तना चुनले बानी ताकि बाद में स्वर्ग में रोप सकी।

हदीस

Imam Darimi : 33

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ كَثِيرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيِّ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُومُ إِلَى جِذْعٍ قَبْلَ أَنْ يُجْعَلَ الْمِنْبَرُ فَلَمَّا جُعِلَ الْمِنْبَرُ حَنَّ ذَلِكَ الْجِذْعُ حَتَّى سَمِعْنَا حَنِينَهُ فَوَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ عَلَيْهِ فَسَكَنَ

[मुहम्मद बिन कथिर] हमनी के [सुलेमान बिन कथिर] से [अज जुहरी] से [सैद बिन अल मुसैयब] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से रदलियाल्लाहुअनहु से रिपोर्ट कईले बाड़े कि: अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) मंच बनावे से पहिले खजूर के पेड़ प झुक के खड़ा रहले। जब मंच बनत रहे त खजूर के पेड़ तब तक कराहत रहे जब तक कि हमनी के ओकर कराह ना सुननी जा, तब तक रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ओकरा प हाथ रखले अवुरी उ चुप हो गईल।

हदीस

Imam Darimi : 34

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ كَثِيرٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ حَفْصِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ إِلَى خَشَبَةٍ فَلَمَّا صُنِعَ الْمِنْبَرُ فَجَلَسَ عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَنَّتْ حَنِينَ الْعِشَارِ حَتَّى وَضَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَهُ عَلَيْهَا فَسَكَنَتْ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन कत्सिर] हमनी के [सुलेमान बिन कत्सिर] से [याह्या बिन सईद] से [हफस बिन उबैदुल्लाह] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] रदलियाल्लाहुअनहु से बतवले बाड़े उ कहले; पहिले नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लकड़ी के लाठी पर झुक के उपदेश देत रहले, एहसे जब मंच बन गइल रहे त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओकरा पर बइठ गइलन, फेर लकड़ी के लाठी ऊंट के कुहरत नियर कराहत रहे, एहसे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओकरा पर हाथ रखले आ ऊ चुप हो गइल.

हदीस

Imam Darimi : 35

أَخْبَرَنَا فَرْوَةُ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّا عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي كَرِبٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَنَّتْ الْخَشَبَةُ حَنِينَ النَّاقَةِ الْخَلُوجِ

हमनी के बतवले बा [फरवाह] हमनी के [याह्या बिन जकरयाह] से [अपना पिता] से [अबू इशक] से [सईद बिन अबू कर्ब] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े रदलियाल्लाहुअनहू उ कहले; लकड़ी अपना बछड़ा के पीछे कुहरत ऊंट नियर कराह उठल।

हदीस

Imam Darimi : 36

أَخْبَرَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ الطُّفَيْلِ بْنِ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي إِلَى جِذْعٍ وَيَخْطُبُ إِلَيْهِ إِذْ كَانَ الْمَسْجِدُ عَرِيشًا فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِهِ أَلَا نَجْعَلُ لَكَ عَرِيشًا تَقُومُ عَلَيْهِ يَرَاكَ النَّاسُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَتُسْمِعُ مِنْ خُطْبَتِكَ قَالَ نَعَمْ فَصَنَعَ لَهُ الثَّلَاثَ دَرَجَاتٍ هُنَّ اللَّوَاتِي عَلَى الْمِنْبَرِ فَلَمَّا صُنِعَ الْمِنْبَرُ وَوُضِعَ فِي مَوْضِعِهِ الَّذِي وَضَعَهُ فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَلَمَّا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُرِيدُ الْمِنْبَرَ مَرَّ عَلَيْهِ فَلَمَّا جَاوَزَهُ خَارَ الْجِذْعُ حَتَّى تَصَدَّعَ وَانْشَقَّ فَرَجَعَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَسَحَهُ بِيَدِهِ حَتَّى سَكَنَ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى الْمِنْبَرِ قَالَ فَكَانَ إِذَا صَلَّى صَلَّى إِلَيْهِ فَلَمَّا هُدِمَ الْمَسْجِدُ أَخَذَ ذَلِكَ الْجِذْعَ أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ فَلَمْ يَزَلْ عِنْدَهُ حَتَّى بَلِيَ وَأَكَلَتْهُ الْأَرَضَةُ وَعَادَ رُفَاتًا

हमनी के [जकारिया बिन अदी] के [उबैदुल्लाह बिन अम्र] से [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अकील] से [अथ थुफाइल बिन उबै बिन काअब] से [उनकर पिता] रदलियाल्लाहुअनहु से रिपोर्ट कईले बाड़े उ कहले कि; पहिले नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खजूर के पेड़ पर झुक के नमाज पढ़त रहले आ ओइसहीं प्रवचन देत घरी जब मस्जिदन में अबहीं ले आश्रय ना रहे. तब उनकर दोस्त के एगो आदमी उनका से कहलस; 'का हमनी के साहब, एगो आश्रय - मंच - बना के मंच के अइसन जगह पर रखब जा जहाँ रउआ ओकरा पर खड़ा हो सकेनी आ लोग रउआ के शुक्रवार के प्रवचन में देख सके आ रउआ के प्रवचन सुन सके।' ऊ जवाब दिहले: 'हँ, रउरा कर सकेनी'. त उनुका खातिर तीन सीढ़ी मंच पर बना के ओह जगह पर रखल गइल जहाँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रखले रहले - खजूर के तना -। मंच पर अइले त खजूर के पेड़ के पास से गुजरत रहले, आ खजूर तब तक रोवत रहे जब तक कि उ खजूर ना फट गईल। तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका लगे वापस आ गइलन। ऊ ओकरा के हाथ से तबले रगड़त रहले जबले कि ताड़ के पेड़ फेर से शांत ना हो गइल आ भविष्यवक्ता मंच पर ना लवट अइले. आ जब नबी नमाज कइलन त ऊ पेड़ के ओर मुँह कइले. जब मस्जिद गिरावल गइल त उबाई बिन काअब खजूर के तना लेके तब तक रखले जब तक कि ऊ सड़ ना गइल आ जबले ऊ नष्ट ना हो गइल तबले दीमक खा गइल.

हदीस

Imam Darimi : 37

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ أَبِي الْوَدَّاكِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ إِلَى لِزْقِ جِذْعٍ فَأَتَاهُ رَجُلٌ رُومِيٌّ فَقَالَ أَصْنَعُ لَكَ مِنْبَرًا تَخْطُبُ عَلَيْهِ فَصَنَعَ لَهُ مِنْبَرًا هَذَا الَّذِي تَرَوْنَ قَالَ فَلَمَّا قَامَ عَلَيْهِ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُ حَنَّ الْجِذْعُ حَنِينَ النَّاقَةِ إِلَى وَلَدِهَا فَنَزَلَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَضَمَّهُ إِلَيْهِ فَسَكَنَ فَأُمِرَ بِهِ أَنْ يُحْفَرَ لَهُ وَيُدْفَنَ

हमनी के बतवले बा [उबैदुल्लाह बिन सईद] हमनी के [अबू उसामाह] से [मुजालिद] से [अबू अल वद्दक] से [अबू सईद] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; एकरा से पहिले रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खजूर के डाढ़ पर झुक के उपदेश देत रहले, तब एगो रोमन उनुका लगे आके कहले रहले; हम एगो मंच बनाइब आ राजा ऊपर से प्रचार कर सकेलें, एहसे ऊ मंच बनवले जइसे रउरा देखत बानी. कथाकार कहले कि; त जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़ा रहले - मंच पर - प्रवचन देत रहले त खजूर ओंट निहन कराह उठल जवना के बछड़ा गंवा चुकल रहे। तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका लगे उतर के गले लगा लिहले आ ऊ चुप हो गइले, तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका के एगो छेद बना के दफनावे के आदेश दिहले.

हदीस

Imam Darimi : 38

أَخْبَرَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا الصَّعْقُ قَالَ سَمِعْتُ الْحَسَنَ يَقُولُ لَمَّا أَنْ قَدِمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ جَعَلَ يُسْنِدُ ظَهْرَهُ إِلَى خَشَبَةٍ وَيُحَدِّثُ النَّاسَ فَكَثُرُوا حَوْلَهُ فَأَرَادَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُسْمِعَهُمْ فَقَالَ ابْنُوا لِي شَيْئًا أَرْتَفِعُ عَلَيْهِ قَالُوا كَيْفَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ قَالَ عَرِيشٌ كَعَرِيشِ مُوسَى فَلَمَّا أَنْ بَنَوْا لَهُ قَالَ الْحَسَنُ حَنَّتْ وَاللَّهِ الْخَشَبَةُ قَالَ الْحَسَنُ سُبْحَانَ اللَّهِ هَلْ تُبْتَغَى قُلُوبُ قَوْمٍ سَمِعُوا قَالَ أَبُو مُحَمَّد يَعْنِي هَذَا

हमनी के बतवले बाड़े [मुस्लिम बिन इब्राहिम] हमनी के बतवले बाड़े [एश शाक] उ कहले बाड़े; हम [अल हसन] के कहत सुनले बानी; जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना अइले त लोग के सलाह देत घरी एगो पेड़ से पीठ झुका लिहले। धीरे-धीरे उनका आसपास के लोग के संख्या बढ़ल। एह से उनकर इरादा रहे कि सभे - बिना अपवाद के - उनकर बात सुने। त ऊ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि कृपया हमरा के मूसा के जइसन ऊँच मंच बनाईं! ' जब उ लोग बनवले त अल्लाह के ओर से पेड़ के तने - अलहासन कहले - कराह उठल। अल हसन फेरु से कहले; महिमा अल्लाह सुभानाहु व ताआला के होखे, का ई बात सुने वाला लोग के दिल से अबहियों -आज्ञाकारी- होखे के उम्मीद कइल जा सकेला? अबू मुहम्मद कहले कि; मतलब ई -कहानी- सुनल लोग।

हदीस

Imam Darimi : 39

أَخْبَرَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَمَّارِ بْنِ أَبِي عَمَّارٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَخْطُبُ إِلَى جِذْعٍ قَبْلَ أَنْ يَتَّخِذَ الْمِنْبَرَ فَلَمَّا اتَّخَذَ الْمِنْبَرَ وَتَحَوَّلَ إِلَيْهِ حَنَّ الْجِذْعُ فَاحْتَضَنَهُ فَسَكَنَ وَقَالَ لَوْ لَمْ أَحْتَضِنْهُ لَحَنَّ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ أَخْبَرَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ بِمِثْلِهِ

हमनी के बतावल गइल बा कि [हज्जाज बिन मिन्हल] हमनी के [हमद बिन सलामाह] [अमर बिन अबू अमर] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़न कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर उनुका के मंच बनावे से पहिले एगो पेड़ पर झुक के उपदेश दिहले रहले. जब ओकरा के मंच बना के ओकरा ओर मुड़ल त पेड़ के तने कराह उठल, जबले कि ऊ ओकरा के गले ना लगा लिहलसि आ ऊ चुप ना हो गइल. उ आगे कहले कि, 'जदी हम उनुका के गले ना लगाईब त उ दुनिया के अंत तक जरूर रोईहे।' ' हमनी के बतवले बा [अल हज्जाज बिन मिन्हल] हमनी के [हमद] से [थाबीत] से [अनास बिन मलिक] रदलियाल्लाहुअनहू से ऊपर के हदीस निहन बतवले बाड़े।

हदीस

Imam Darimi : 40

أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ حَنَّتْ الْخَشَبَةُ الَّتِي كَانَ يَقُومُ عِنْدَهَا فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَيْهَا فَوَضَعَ يَدَهُ عَلَيْهَا فَسَكَنَتْ

हमनी के बतवले बा [अब्दुल्लाह बिन यजीद] हमनी के [अल मसौदी] से [अबू हाजिम] से [सहल बिन सईद] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; जवना पेड़ पर ऊ खड़ा होके झुकत रहले ओकर तने कराह उठल, तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका सोझा खड़ा होके ओकरा पर हाथ रखले, त पेड़ स्थिर गिर गइल।