Imam Darimi : 1
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُؤَاخَذُ الرَّجُلُ بِمَا عَمِلَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ قَالَ مَنْ أَحْسَنَ فِي الْإِسْلَامِ لَمْ يُؤَاخَذْ بِمَا كَانَ عَمِلَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَمَنْ أَسَاءَ فِي الْإِسْلَامِ أُخِذَ بِالْأَوَّلِ وَالْآخِرِ
हमनी के [मुहम्मद बिन यूसुफ] से [सुफयान] से [अल अ'मासी] से [अबू व`इल] से [अब्दुल्लाह] से बतवले, उ कहले; एगो आदमी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आके कहलस कि हे रसूलुल्लाह, का केहू के अज्ञानता के दौर में कईल गईल बुरा काम के सजा मिली? रसूलुल्लाह जवाब दिहलन: जे भी अपना इस्लामी काल में बढ़िया व्यवहार कइलस, ओकरा के अज्ञानता के दौर में ओकर बुरा काम के सजा ना मिलल, लेकिन जे भी अपना इस्लामी काल में बुरा - बुराई - व्यवहार कइलस, ओकरा के सजा दिहल गइल -अपना पाप खातिर- चाहे ऊ भूत होखे भा भविष्य।
Imam Darimi : 2
أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ النَّضْرِ الرَّمْلِيُّ عَنْ مَسَرَّةَ بْنِ مَعْبَدٍ مِنْ بَنِي الْحَارِثِ بْنِ أَبِي الْحَرَامِ مِنْ لَخْمٍ عَنْ الْوَضِينِ أَنَّ رَجُلًا أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا كُنَّا أَهْلَ جَاهِلِيَّةٍ وَعِبَادَةِ أَوْثَانٍ فَكُنَّا نَقْتُلُ الْأَوْلَادَ وَكَانَتْ عِنْدِي ابْنَةٌ لِي فَلَمَّا أَجَابَتْ وَكَانَتْ مَسْرُورَةً بِدُعَائِي إِذَا دَعَوْتُهَا فَدَعَوْتُهَا يَوْمًا فَاتَّبَعَتْنِي فَمَرَرْتُ حَتَّى أَتَيْتُ بِئْرًا مِنْ أَهْلِي غَيْرَ بَعِيدٍ فَأَخَذْتُ بِيَدِهَا فَرَدَّيْتُ بِهَا فِي الْبِئْرِ وَكَانَ آخِرَ عَهْدِي بِهَا أَنْ تَقُولَ يَا أَبَتَاهُ يَا أَبَتَاهُ فَبَكَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى وَكَفَ دَمْعُ عَيْنَيْهِ فَقَالَ لَهُ رَجُلٌ مِنْ جُلَسَاءِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحْزَنْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَهُ كُفَّ فَإِنَّهُ يَسْأَلُ عَمَّا أَهَمَّهُ ثُمَّ قَالَ لَهُ أَعِدْ عَلَيَّ حَدِيثَكَ فَأَعَادَهُ فَبَكَى حَتَّى وَكَفَ الدَّمْعُ مِنْ عَيْنَيْهِ عَلَى لِحْيَتِهِ ثُمَّ قَالَ لَهُ إِنَّ اللَّهَ قَدْ وَضَعَ عَنْ الْجَاهِلِيَّةِ مَا عَمِلُوا فَاسْتَأْنِفْ عَمَلَكَ
हमनी के [अल वलीद बिन अन नडलर अर रामली] के [मसरराह बिन म'बाद] से - बनी अल हरिथ बिन अबू अल हरम से लखमीन से - [अल वदलीन] से बतावल गईल बा कि एगो आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आके कहलस कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमनी के एगो अज्ञानी लोग रहनी जा जवन मूर्ति के इबादत करत रहे अवुरी हमनी के अपना बच्चा के मार देले रहनी, ओ समय हमनी के बच्चा रहले जे हमरा के फोन कइला पर खुश रहले. एक दिन हम उनका के फोन कईनी त उ तुरंत जवाब देके हमरा पीछे-पीछे चल गईले। जब हम एगो पारिवारिक इनार पर पहुँचनी त तुरंत उनकर हाथ पकड़ के इनार में फेंक दिहनी, उहाँ से हमार समय के अंत हो गईल। उ बोलवले 'हे बाबूजी, हे बाबूजी।' ' अल्लाह के रसूलुल्लाह तब तक रोवत रहले जब तक कि उनकर लोर ना बह गईल। तब केहू रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे बइठल आदमी से कहलस कि तू रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दुखी कर देले बाड़ू। रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओह आदमी से कहले: ओकरा के होखे के चाहीं काहे कि ऊ कवनो महत्वपूर्ण बात के बारे में पूछत रहे जवना के ऊ सामना करत रहे, तब रसूलुल्लाह ओह आदमी से कहले: फेर से आपन कहानी दोहराईं, फेर ऊ कहानी दोहरवले आ रसूलुल्लाह फेर से रोवत रहले जबले कि ओकर लोर ना बह गइल, दाढ़ी भींज ना गइल, फेर ऊ कहले: अल्लाह सुब्हानाहु वताला अज्ञानता के दौर में कइल गइल पाप के मिटा दिहले बाड़न, एहसे, अपना काम के शुरुआत एगो नया साफ चादर से करीं.
Imam Darimi : 3
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ مُعَاوِيَةَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سُلَيْمَانَ الْمُؤَدِّبِ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ مُجَاهِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي مَوْلَايَ أَنَّ أَهْلَهُ بَعَثُوا مَعَهُ بِقَدَحٍ فِيهِ زُبْدٌ وَلَبَنٌ إِلَى آلِهَتِهِمْ قَالَ فَمَنَعَنِي أَنْ آكُلَ الزُّبْدَ لِمَخَافَتِهَا قَالَ فَجَاءَ كَلْبٌ فَأَكَلَ الزُّبْدَ وَشَرِبَ اللَّبَنَ ثُمَّ بَالَ عَلَى الصَّنَمِ وَهُوَ إِسَافٌ وَنَائِلَةُ قَالَ هَارُونُ كَانَ الرَّجُلُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ إِذَا سَافَرَ حَمَلَ مَعَهُ أَرْبَعَةَ أَحْجَارٍ ثَلَاثَةً لِقِدْرِهِ وَالرَّابِعَ يَعْبُدُهُ وَيُرَبِّي كَلْبَهُ وَيَقْتُلُ وَلَدَهُ
[हारून बिन मु`अवियाह] हमनी के [इब्राहिम बिन सुलेमान अल मु`अदीब] से [मुजाहिद] से [अल अ'माश] से जानकारी देले बाड़े, [हमार पूर्व गुलाम] हमरा के बतवले; कि उनकर परिवार पनीर आ दूध से भरल बर्तन के जिम्मा देले बा जवना के ऊ अपना देवता लोग के चढ़ावे खातिर; हमार परिवार ओह देवता लोग के डर से हमरा के पनीर खाए से मना कर दिहलस; तब एगो कुकुर आके पनीर खा के दूध पी के मूर्तियन पर पेशाब कइलस, माने कि इकाफ आ नैला के मूर्ति। हारून कहले: अज्ञानता के जमाना में जब आदमी यात्रा करे के चाहत रहे त चार गो पत्थर लेत रहे, जवना में से तीन पत्थर घड़ा - कड़ाही/पात्र के सहारा/बटावे खातिर रहे आ चउथा ओकरा खातिर पूजा करे खातिर, अपना कुकुर के प्रशिक्षण देवे खातिर, आ अपना बच्चा के मारे खातिर रहे।
Imam Darimi : 4
حَدَّثَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا رَيْحَانُ هُوَ ابْنُ سَعِيدٍ السَّامِيُّ حَدَّثَنَا عَبَّادٌ هُوَ ابْنُ مَنْصُورٍ عَنْ أَبِي رَجَاءٍ قَالَ كُنَّا فِي الْجَاهِلِيَّةِ إِذَا أَصَبْنَا حَجَرًا حَسَنًا عَبَدْنَاهُ وَإِنْ لَمْ نُصِبْ حَجَرًا جَمَعْنَا كُثْبَةً مِنْ رَمْلٍ ثُمَّ جِئْنَا بِالنَّاقَةِ الصَّفِيِّ فَتَفَاجُّ عَلَيْهَا فَنَحْلُبُهَا عَلَى الْكُثْبَةِ حَتَّى نَرْوِيَهَا ثُمَّ نَعْبُدُ تِلْكَ الْكُثْبَةَ مَا أَقَمْنَا بِذَلِكَ الْمَكَانِ قَالَ أَبُو مُحَمَّد الصَّفِيُّ الْكَثِيرَةُ الْأَلْبَانِ
हमनी के बतावल गईल बा [मुजाहिद बिन मूसा] हमनी के बतवले बाड़े [रैहान इब्नु सईद अस सामी] हमनी के बतवले बाड़े [‘अब्बाद इब्नु मंसूर] [अबू राजा’ से], उ कहले बाड़े कि: अज्ञानता के जमाना में जब हमनी के एगो निमन पत्थर मिलल त हमनी के ओकर पूजा कईनी जा अवुरी जब निमन पत्थर ना मिलल त हमनी के बालू जमा कईनी। फेर हम एगो शफी ऊंट ले अइनी, जब ऊंट ओकरा पर स्ट्रडलिंग करत रहे त ओकर दूध निचोड़ के बालू के ढेर के पानी देनी जवन हमनी के बटोरले रहनी जा, फेर जबले ओह जगह पर रहत रहनी जा तबले बालू के ढेर के पूजा कइनी जा। अबू मुहम्मद कहले कि: शाफी ऊंट उंट ह जवना में बहुत दूध होखेला।
Imam Darimi : 5
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ قَالَ قَالَ كَعْبٌ نَجِدُهُ مَكْتُوبًا مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا فَظٌّ وَلَا غَلِيظٌ وَلَا صَخَّابٌ بِالْأَسْوَاقِ وَلَا يَجْزِي بِالسَّيِّئَةِ السَّيِّئَةَ وَلَكِنْ يَعْفُو وَيَغْفِرُ وَأُمَّتُهُ الْحَمَّادُونَ يُكَبِّرُونَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى كُلِّ نَجْدٍ وَيَحْمَدُونَهُ فِي كُلِّ مَنْزِلَةٍ وَيَتَأَزَّرُونَ عَلَى أَنْصَافِهِمْ وَيَتَوَضَّئُونَ عَلَى أَطْرَافِهِمْ مُنَادِيهِمْ يُنَادِي فِي جَوِّ السَّمَاءِ صَفُّهُمْ فِي الْقِتَالِ وَصَفُّهُمْ فِي الصَّلَاةِ سَوَاءٌ لَهُمْ بِاللَّيْلِ دَوِيٌّ كَدَوِيِّ النَّحْلِ وَمَوْلِدُهُ بِمَكَّةَ وَمُهَاجِرُهُ بِطَابَةَ وَمُلْكُهُ بِالشَّامِ
हमनी के बतवले बा [अल हसन बिन अर रबी'] हमनी के [अबुल अहवाश] से [अल अ'मासी] से [अबू सालिह] से बतवले बाड़े, उ कहले; [काअब] कहले कि; हमनी के लिखल मिलल: मुहम्मद रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, उ अपना भाषण में कठोर ना रहले, चरित्र में कठोर ना रहले, बाजार में रहला प जोर से ना बोलत रहले, बुराई के बदला बुराई से ना देत रहले, बालुक माफ अवुरी माफ क के जवाब देत रहले, उनुकर लोग हमेशा तहमद करत रहले -अल्लाह के तारीफ करत- बर्तकबीर -अल्लाह के महिमा करत- हर ऊँच जगह/चढ़ाई, चाहे युद्ध, उ लोग हर घर में अल्लाह सुभानाहु व ताला के तारीफ करत रहले, अपना बीच के हिस्सा में सरोंग पहिनले रहले, अपना वज़ूद के हर सदस्य प वज़ूद करत रहले, उनुकर नमाज के पुकार आसमान में सुनाई देवेला, युद्ध के दौरान उनुकर शफ नमाज के दौरान उनुकर शाफ निहन होखेला, उनुकर आवाज़ - कुरान पढ़े अवुरी ज़िकर बनावे के समय - मधुमक्खी के गर्जना निहन होखेला, उनुकर जन्मस्थान मक्का में होखेला अवुरी उनुकर प्रवास स्थल थाबा में होखेला - मदीना - आ ओकर राज शाम में बा।
Imam Darimi : 6
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ حَدَّثَنِي خَالِدٌ هُوَ ابْنُ يَزِيدَ عَنْ سَعِيدٍ هُوَ ابْنُ أَبِي هِلَالٍ عَنْ هِلَالِ بْنِ أُسَامَةَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ ابْنِ سَلَامٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ إِنَّا لَنَجِدُ صِفَةَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّا أَرْسَلْنَاكَ شَاهِدًا وَمُبَشِّرًا وَنَذِيرًا وَحِرْزًا لِلْأُمِّيِّينَ أَنْتَ عَبْدِي وَرَسُولِي سَمَّيْتُهُ الْمُتَوَكِّلَ لَيْسَ بِفَظٍّ وَلَا غَلِيظٍ وَلَا صَخَّابٍ بِالْأَسْوَاقِ وَلَا يَجْزِي بِالسَّيِّئَةِ مِثْلَهَا وَلَكِنْ يَعْفُو وَيَتَجَاوَزُ وَلَنْ أَقْبِضَهُ حَتَّى نُقِيمَ الْمِلَّةَ الْمُتَعَوِّجَةَ بِأَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ يَفْتَحُ بِهِ أَعْيُنًا عُمْيًا وَآذَانًا صُمًّا وَقُلُوبًا غُلْفًا قَالَ عَطَاءُ بْنُ يَسَارٍ وَأَخْبَرَنِي أَبُو وَاقِدٍ اللَّيْثِيُّ أَنَّهُ سَمِعَ كَعْبًا يَقُولُ مِثْلَ مَا قَالَ ابْنُ سَلَامٍ
हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन सालिह] हमरा के बतवले बाड़े [अल लैट्स] हमरा के [खालिद इब्नू यजीद] से [सईद इब्न अबू हिलाल] से [हिलाल बिन उसामा] से [‘अथा’ बिन यासर] से [इब्न सलाम] से बतवले बाड़े, कि उ कहले बाड़े; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चरित्र के खोज कइनी 'वास्तव में हम तोहरा के गवाह, खुशखबरी देवे वाला आ चेतावनी देवे वाला के रूप में भेजले बानी', जे उम्मी के मदद करेला, तू हमार सेवक हउअ हमार रसूलुल्लाह, हम ओकर नाम अल मुतावक्किल रखले बानी, ओकर भाषण कठोर ना रहे आ ओकर स्वभाव कठोर ना रहे, उ बाजार में चिल्लात ना रहे आ बुराई के बदला ना देत रहे, लेकिन ओकरा के माफ क के हम एगो अइसन धर्म के सीधा कर दिहनी जवन एह गवाही से हट गइल रहे कि कवनो देवता नइखे. के अल्लाह सुभानाहु व ताला के अलावा इबादत होखे के अधिकार बा, एह गवाही से हमनी के आन्हर आँख, बहरा कान आ बंद दिल खोल सकेनी जा। ['अथा` बिन यासर] कहले कि; [अबू वकिद अल लैत्सी] हमरा के बतवले कि उ [काअब] के भी इब्न सलाम के कहल बात सुनले बाड़े।
Imam Darimi : 7
أَخْبَرَنَا زَيْدُ بْنُ عَوْفٍ قَالَ وَحَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ ذَكْوَانَ أَبِي صَالِحٍ عَنْ كَعْبٍ فِي السَّطْرِ الْأَوَّلِ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ عَبْدِي الْمُخْتَارُ لَا فَظٌّ وَلَا غَلِيظٌ وَلَا صَخَّابٌ فِي الْأَسْوَاقِ وَلَا يَجْزِي بِالسَّيِّئَةِ السَّيِّئَةَ وَلَكِنْ يَعْفُو وَيَغْفِرُ مَوْلِدُهُ بِمَكَّةَ وَهِجْرَتُهُ بِطَيْبَةَ وَمُلْكُهُ بِالشَّامِ وَفِي السَّطْرِ الثَّانِي مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ أُمَّتُهُ الْحَمَّادُونَ يَحْمَدُونَ اللَّهَ فِي السَّرَّاءِ وَالضَّرَّاءِ يَحْمَدُونَ اللَّهَ فِي كُلِّ مَنْزِلَةٍ وَيُكَبِّرُونَ عَلَى كُلِّ شَرَفٍ رُعَاةُ الشَّمْسِ يُصَلُّونَ الصَّلَاةَ إِذَا جَاءَ وَقْتُهَا وَلَوْ كَانُوا عَلَى رَأْسِ كُنَاسَةٍ وَيَأْتَزِرُونَ عَلَى أَوْسَاطِهِمْ وَيُوَضِّئُونَ أَطْرَافَهُمْ وَأَصْوَاتُهُمْ بِاللَّيْلِ فِي جَوِّ السَّمَاءِ كَأَصْوَاتِ النَّحْلِ
हमनी के बतवले बा [जैद बिन यूसुफ] हमनी के [अबू अवानाह] से [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [जकवान अबू सालिह] से [काअब] से बतवले बाड़े कि पहिला पैराग्राफ में इ लिखल बा; मुहम्मद अल्लाह सुभानाहु व ताला के रसूलुल्लाह हउवें, आ हमार चुनल नौकर हउवें, उनकर भाषण कठोर नइखे, उनकर स्वभाव जोर से नइखे, बाजार में जोर से ना बोलत बा, बुराई के बदला बुराई से ना देत बा बलुक माफी आ माफी से जवाब देत बा, उनकर जन्मस्थान मक्का में बा आ प्रवास के जगह थाइबा में बा आ उनकर राज्य/शक्ति शाम में बा। आ दूसरा पैराग्राफ में लिखल बा कि मुहम्मद अल्लाह सुभनाहु व ताला के रसूलुल्लाह हवें, उनकर लोग अइसन लोग हवे जे हमेशा अल्लाह के पूरा महिमा खातिर स्तुति करे ला, सूरज के पर्यवेक्षक - नमाज के समय जाने खातिर - समय आवे पर नमाज करे ला, भले ऊ लोग गंदा जगह पर होखे, बीच में सरोंग पहिन के, अपना वजूद के सभ हिस्सा धो के, आ रात में ओह लोग के आवाज हवा में सुनल जाला जइसे कि ऊ लोग मधुमक्खी के गर्जन - पूजा आ रोवे में जिद्द के कारण।
Imam Darimi : 8
أَخْبَرَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا مَعْنُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ أَبِي فَرْوَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ سَأَلَ كَعْبَ الْأَحْبَارِ كَيْفَ تَجِدُ نَعْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي التَّوْرَاةِ فَقَالَ كَعْبٌ نَجِدُهُ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ يُولَدُ بِمَكَّةَ وَيُهَاجِرُ إِلَى طَابَةَ وَيَكُونُ مُلْكُهُ بِالشَّامِ وَلَيْسَ بِفَحَّاشٍ وَلَا صَخَّابٍ فِي الْأَسْوَاقِ وَلَا يُكَافِئُ بِالسَّيِّئَةِ السَّيِّئَةَ وَلَكِنْ يَعْفُو وَيَغْفِرُ أُمَّتُهُ الْحَمَّادُونَ يَحْمَدُونَ اللَّهَ فِي كُلِّ سَرَّاءَ وَضَرَّاءَ وَيُكَبِّرُونَ اللَّهَ عَلَى كُلِّ نَجْدٍ يُوَضِّئُونَ أَطْرَافَهُمْ وَيَأْتَزِرُونَ فِي أَوْسَاطِهِمْ يُصَفُّونَ فِي صَلَوَاتِهِمْ كَمَا يُصَفُّونَ فِي قِتَالِهِمْ دَوِيُّهُمْ فِي مَسَاجِدِهِمْ كَدَوِيِّ النَّحْلِ يُسْمَعُ مُنَادِيهِمْ فِي جَوِّ السَّمَاءِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुजाहिद बिउन मूसा] हमनी के बतवले बाड़े [मा'न बिन ईसा] हमनी के [मुअविया बिन सालिह] [अबू फरवाह] से [इब्न अब्बास] रदलियाल्लाहुअनहु से बतवले बाड़े, कि उ काब अल अहबर से पूछले बाड़े; तोराह में रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चरित्र कईसे मिलल?, [काअब] जवाब दिहले; हमनी के पाता चलल कि मुहम्मद बिन अब्दुल्ला के जनम मक्का में भईल रहे, थाबाह चाहे मदीना में प्रवास कईले रहले, उनुकर राज्य सीरिया में होई, उ कवनो क्रूर इंसान ना हवे, उ बाजार में जोरदार हल्ला ना करेले, उ बुराई के बदला ना देवेले बालुक माफ करेले अवुरी माफ करेले, उनुकर लोग हमेशा उनुकर तारीफ करेला। इ लोग अल्लाह सुभानाहु व ताला के तारीफ करेले चाहे उ लोग अच्छा समय में होखे चाहे बुरा समय में, उ लोग हमेशा अल्लाह सुभानाहु व ताला के महिमा करेला हर जीत में, उ लोग अपना वज़ूद के सदस्य के धोवेले, अपना बीच के हिस्सा में सरोंग पहिनेले, उ लोग नमाज में लाइन में लाग जाले जईसे उ लोग युद्ध में मार्च करेले, उ लोग के मस्जिद में आवाज़ मधुमक्खी के गर्जन निहन होखेला, उ लोग के मु`ज़िन के आवाज़ आसमान में सुनाई देवेला।
Imam Darimi : 9
أَخْبَرَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ الْمِيثَمِيُّ حَدَّثَنَا بَحِيرُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ الْحَضْرَمِيِّ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَقَدْ جَاءَكُمْ رَسُولٌ إِلَيْكُمْ لَيْسَ بِوَهِنٍ وَلَا كَسِلٍ لِيَخْتِنَ قُلُوبًا غُلْفًا وَيَفْتَحَ أَعْيُنًا عُمْيًا وَيُسْمِعَ آذَانًا صُمًّا وَيُقِيمَ أَلْسِنَةً عُوجًا حَتَّى يُقَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ
हमनी के बतवले बा [हैवा बिन स्यूरैह] हमनी के बतवले बाड़े [बकियाह बिन अल वलीद अल मैतामी] हमनी के [बुहैर बिन सआद] [खालिद बिन म'दान] से [जुबैर बिन नुफैर अल हदलरामी] से बतवले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि रउरा लगे एगो दूत आइल बा जे ना त कमजोर बा ना आलसी, -जेकर भेजल गइल बा- लापरवाह दिल के जगावे, बंद आँख खोले, आ बहिर कान के सुनावे, टेढ़ जीभ के सीधा करे, जेहसे कि कहल जाव; अकेले अल्लाह सुभानाहु व तआला के छोड़ के कवनो देवता के इबादत के अधिकार नईखे।
Imam Darimi : 10
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ الْحِزَامِيُّ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي قَيْسٍ عَنْ عَطَاءٍ قَالَ كَانَ رَجُلٌ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَهُ إِلَيْهِ حَاجَةٌ فَمَشَى مَعَهُ حَتَّى دَخَلَ قَالَ فَإِحْدَى رِجْلَيْهِ فِي الْبَيْتِ وَالْأُخْرَى خَارِجَهُ كَأَنَّهُ يُنَاجِي فَالْتَفَتَ فَقَالَ أَتَدْرِي مَنْ كُنْتُ أُكَلِّمُ إِنَّ هَذَا مَلَكٌ لَمْ أَرَهُ قَطُّ قَبْلَ يَوْمِي هَذَا اسْتَأْذَنَ رَبَّهُ أَنْ يُسَلِّمَ عَلَيَّ قَالَ إِنَّا آتَيْنَاكَ أَوْ أَنْزَلْنَا الْقُرْآنَ فَصْلًا وَالسَّكِينَةَ صَبْرًا وَالْفُرْقَانَ وَصْلًا
हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन यजीद अल हिजामी] हमनी के [इशाक बिन सुलेमान] के ['अमर बिन अबू कैस] से ['अथा`] से बतवले बाड़े, उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एगो साथी के उनकर जरूरत रहे। उ उनका साथे चलत रहले, जब तक कि जब उ घर में घुस गईल रहले अवुरी उनुकर एगो गोड़ भीतर रहे अवुरी दूसरा घर के बहरी रहे, त अयीसन लागल कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कवनो आदमी से बातचीत करत रहले, ओकरा बाद उ मुड़ के दोस्त से बात कईले: का रउवा जानतानी कि हम केकरा से बात करत रहनी? ऊ एगो परी रहले जेकरा के हम पहिले कबो ना देखले रहनी, परी हमरा के नमस्कार करे के अनुमति अपना प्रभु से मंगले. अल्लाह कहत बाड़न कि ‘वास्तव में हमनी का रउरा लगे आइल बानी जा भा कुरान के केस के फैसला करे वाला आ अस सकीना के धैर्य आ अल फुर्कून के मार्गदर्शक के रूप में भेजले बानी जा.
Imam Darimi : 11
أَخْبَرَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا رَيْحَانُ هُوَ ابْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبَّادٌ هُوَ ابْنُ مَنْصُورٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ عَطِيَّةَ أَنَّهُ سَمِعَ رَبِيعَةَ الْجُرَشِيَّ يَقُولُ أُتِيَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيلَ لَهُ لِتَنَمْ عَيْنُكَ وَلْتَسْمَعْ أُذُنُكَ وَلْيَعْقِلْ قَلْبُكَ قَالَ فَنَامَتْ عَيْنَايَ وَسَمِعَتْ أُذُنَايَ وَعَقَلَ قَلْبِي قَالَ فَقِيلَ لِي سَيِّدٌ بَنَى دَارًا فَصَنَعَ مَأْدُبَةً وَأَرْسَلَ دَاعِيًا فَمَنْ أَجَابَ الدَّاعِيَ دَخَلَ الدَّارَ وَأَكَلَ مِنْ الْمَأْدُبَةِ وَرَضِيَ عَنْهُ السَّيِّدُ وَمَنْ لَمْ يُجِبْ الدَّاعِيَ لَمْ يَدْخُلْ الدَّارَ وَلَمْ يَطْعَمْ مِنْ الْمَأْدُبَةِ وَسَخِطَ عَلَيْهِ السَّيِّدُ قَالَ فَاللَّهُ السَّيِّدُ وَمُحَمَّدٌ الدَّاعِي وَالدَّارُ الْإِسْلَامُ وَالْمَأْدُبَةُ الْجَنَّةُ
हमनी के बतवले बाड़े [मुजाहिद बिन मूसा] हमनी के बतवले बाड़े [रैहान इब्नु सईद] हमनी के [अब्बाद इब्नु मंसूर] से [अय्यूब] से [अबू किलाबाह] से [अथिया] से बतवले बाड़े कि उ [रबीअह अल जुरासी] के कहत सुनले बाड़े; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ले आवल गइल आ उनुका से कहल गइल कि कृपया आपन आँख सुते दीं, कान सुने दीं, आ दिल सोचे दीं. ऊ कहले: तब हमार आँख देखत बा, कान सुनत बा, आ दिल सोचत बा। ऊ कहले कि; हमरा जानकारी मिलल 'एगो लॉर्ड बा जे घर बनावेला, फिर भोज के इंतजाम करेला, फिर भोज में नेवता देवे खातिर केहु के भेज देला, जे फोन करेवाला के पुकार के जवाब देके घर में घुस के खाना खाई, प्रभु ओकरा से खुश हो जईहे।' दूसर ओर जे फोन करेवाला के पुकार के कवनो जवाब ना दिही अवुरी घर में ना घुसी अवुरी खाना ना खाई, तब मास्टर साहेब ओकरा से नाराज हो जईहे। तब कहलन- मालिक अल्लाह सुभानाहु वा ताला हउवें, फोन करे वाला मुहम्मद शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हउवें, घर इस्लाम ह, आ खाना स्वर्ग ह.
Imam Darimi : 12
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مَيْمُونٍ التَّمِيمِيِّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ إِلَى الْبَطْحَاءِ وَمَعَهُ ابْنُ مَسْعُودٍ فَأَقْعَدَهُ وَخَطَّ عَلَيْهِ خَطًّا ثُمَّ قَالَ لَا تَبْرَحَنَّ فَإِنَّهُ سَيَنْتَهِي إِلَيْكَ رِجَالٌ فَلَا تُكَلِّمْهُمْ فَإِنَّهُمْ لَنْ يُكَلِّمُوكَ فَمَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَيْثُ أَرَادَ ثُمَّ جَعَلُوا يَنْتَهُونَ إِلَى الْخَطِّ لَا يُجَاوِزُونَهُ ثُمَّ يَصْدُرُونَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى إِذَا كَانَ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ جَاءَ إِلَيَّ فَتَوَسَّدَ فَخِذِي وَكَانَ إِذَا نَامَ نَفَخَ فِي النَّوْمِ نَفْخًا فَبَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُتَوَسِّدٌ فَخِذِي رَاقِدٌ إِذْ أَتَانِي رِجَالٌ كَأَنَّهُمْ الْجِمَالُ عَلَيْهِمْ ثِيَابٌ بِيضٌ اللَّهُ أَعْلَمُ مَا بِهِمْ مِنْ الْجَمَالِ حَتَّى قَعَدَ طَائِفَةٌ مِنْهُمْ عِنْدَ رَأْسِهِ وَطَائِفَةٌ مِنْهُمْ عِنْدَ رِجْلَيْهِ فَقَالُوا بَيْنَهُمْ مَا رَأَيْنَا عَبْدًا أُوتِيَ مِثْلَ مَا أُوتِيَ هَذَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ عَيْنَيْهِ لَتَنَامَانِ وَإِنَّ قَلْبَهُ لَيَقْظَانُ اضْرِبُوا لَهُ مَثَلًا سَيِّدٌ بَنَى قَصْرًا ثُمَّ جَعَلَ مَأْدُبَةً فَدَعَا النَّاسَ إِلَى طَعَامِهِ وَشَرَابِهِ ثُمَّ ارْتَفَعُوا وَاسْتَيْقَظَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عِنْدَ ذَلِكَ فَقَالَ لِي أَتَدْرِي مَنْ هَؤُلَاءِ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ هُمْ الْمَلَائِكَةُ قَالَ وَهَلْ تَدْرِي مَا الْمَثَلُ الَّذِي ضَرَبُوهُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ الرَّحْمَنُ بَنَى الْجَنَّةَ فَدَعَا إِلَيْهَا عِبَادَهُ فَمَنْ أَجَابَهُ دَخَلَ جَنَّتَهُ وَمَنْ لَمْ يُجِبْهُ عَاقَبَهُ وَعَذَّبَهُ
हमनी के सूचित कइले बा [अल हसन बिन अली] हमनी के [अबू उसामाह] [जफर बिन मैमुन अत तमीमी] से [अबू उस्मान अन नहदी] से बतवले बाड़न कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम बाथा` निकल गइलन आ उनुका साथे इब्न मसूद रदलियाहुअनहु, तब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बथा` गइलन इब्न मसूद रदलियाल्लाहुअनहु के साथे, फिर इब्न मसूद के बइठा के उनका खातिर लाइन बनवले। तब कहलन कि कबो एह जगह से मत निकलीं काहे कि कुछ आदमी रउरा से भेंट करीहें आ रउरा ओह लोग से ना बोलब, आ ऊ लोग रउरा से ना बोली. फिर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम जहाँ मन करे आपन सफर जारी रखले। फेर लाइन पर आ गइलन आ ओकरा से ना गुजरल, फेर अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे चल गइलन. रात के अंत तक उ हमरा लगे आके हमार जांघ के तकिया बना के सुत गईले, अवुरी जब सुतत रहले त उनुकर सांस सुनाई देत रहे। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा जांघ पर सुतल रहले त मरद सब सफेद कपड़ा पहिनले सुन्दर चेहरा लेके आ गईले। आह, केतना सुन्दर बा लोग! ताकि ओह लोग के एगो समूह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सिर पर बइठल आ एगो अउरी समूह हमनी के बगल में आ ऊ लोग एक दोसरा से कहल कि: हमनी के कबो कवनो नौकर ना भइल होखे जवना के अइसन उपहार दिहल गइल होखे जइसन कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दिहल गइल रहे. ई आदमी के आँख सुतल बा लेकिन ओकर दिल जागल बा, ओकरा खातिर एगो दृष्टांत बनाईं। खैर, ऊ त एगो मास्टर जइसन बा जे महल बनावेला, फेर पकवान बनावेला फेर लोग के खाए-पीए के नेवता देला, फेर जनता आसमान में चढ़ जाला. तब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नींद खुलल त उ हमरा से कहले: का रउवा जानत बानी कि उ लोग के हवे? तब हम जवाब देनी कि अल्लाह सुभनाहु व ताला अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह एकरा से जादे जानत बाड़े। तब उ कहले: उ लोग स्वर्गदूत हवे। फेर ऊ फेरु कहले: का रउरा मालूम बा कि उपमा का ह? हम कहनी कि अल्लाह सुभानाहु व ताला आ उनकर रसूलुल्लाह जे बेहतर जानत रहले जवाब दिहले: अर रहमान स्वर्ग बनवले, फेर अपना लगे अपना नौकरन के बोलवले -नेवता दिहले-, जे स्वीकार करी ऊ स्वर्ग में घुस जाई आ जे मना करी तब ऊ ओकरा के सजा दिही आ यातना दी.
Imam Darimi : 13
أَخْبَرَنَا نُعَيْمُ بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ عَنْ بَحِيرٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَمْرٍو السُّلَمِيُّ عَنْ عُتْبَةَ بْنِ عَبْدٍ السُّلَمِيِّ أَنَّهُ حَدَّثَهُمْ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهُ رَجُلٌ كَيْفَ كَانَ أَوَّلُ شَأْنِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ كَانَتْ حَاضِنَتِي مِنْ بَنِي سَعْدِ بْنِ بَكْرٍ فَانْطَلَقْتُ أَنَا وَابْنٌ لَهَا فِي بَهْمٍ لَنَا وَلَمْ نَأْخُذْ مَعَنَا زَادًا فَقُلْتُ يَا أَخِي اذْهَبْ فَأْتِنَا بِزَادٍ مِنْ عِنْدِ أُمِّنَا فَانْطَلَقَ أَخِي وَمَكَثْتُ عِنْدَ الْبَهْمِ فَأَقْبَلَ طَائِرَانِ أَبْيَضَانِ كَأَنَّهُمَا نَسْرَانِ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ أَهُوَ هُوَ قَالَ الْآخَرُ نَعَمْ فَأَقْبَلَا يَبْتَدِرَانِي فَأَخَذَانِي فَبَطَحَانِي لِلْقَفَا فَشَقَّا بَطْنِي ثُمَّ اسْتَخْرَجَا قَلْبِي فَشَقَّاهُ فَأَخْرَجَا مِنْهُ عَلَقَتَيْنِ سَوْدَاوَيْنِ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ ائْتِنِي بِمَاءِ ثَلْجٍ فَغَسَلَ بِهِ جَوْفِي ثُمَّ قَالَ ائْتِنِي بِمَاءِ بَرَدٍ فَغَسَلَ بِهِ قَلْبِي ثُمَّ قَالَ ائْتِنِي بِالسَّكِينَةِ فَذَرَّهُ فِي قَلْبِي ثُمَّ قَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ حُصْهُ فَحَاصَهُ وَخَتَمَ عَلَيْهِ بِخَاتَمِ النُّبُوَّةِ ثُمَّ قَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ اجْعَلْهُ فِي كِفَّةٍ وَاجْعَلْ أَلْفًا مِنْ أُمَّتِهِ فِي كِفَّةٍ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا أَنَا أَنْظُرُ إِلَى الْأَلْفِ فَوْقِي أُشْفِقُ أَنْ يَخِرَّ عَلَيَّ بَعْضُهُمْ فَقَالَ لَوْ أَنَّ أُمَّتَهُ وُزِنَتْ بِهِ لَمَالَ بِهِمْ ثُمَّ انْطَلَقَا وَتَرَكَانِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفَرِقْتُ فَرَقًا شَدِيدًا ثُمَّ انْطَلَقْتُ إِلَى أُمِّي فَأَخْبَرْتُهَا بِالَّذِي لَقِيتُ فَأَشْفَقَتْ أَنْ يَكُونَ قَدْ الْتَبَسَ بِي فَقَالَتْ أُعِيذُكَ بِاللَّهِ فَرَحَلَتْ بَعِيرًا لَهَا فَجَعَلَتْنِي عَلَى الرَّحْلِ وَرَكِبَتْ خَلْفِي حَتَّى بُلْغَتِنَا إِلَى أُمِّي فَقَالَتْ أَدَّيْتُ أَمَانَتِي وَذِمَّتِي وَحَدَّثَتْهَا بِالَّذِي لَقِيتُ فَلَمْ يَرُعْهَا ذَلِكَ وَقَالَتْ إِنِّي رَأَيْتُ حِينَ خَرَجَ مِنِّي يَعْنِي نُورًا أَضَاءَتْ مِنْهُ قُصُورُ الشَّامِ
हमनी के बतवले बाड़े [नुअइम बिन हम्मद] हमनी के बतवले बाड़े [बकियाह] से [बाहिर] से [खालिद बिन म'दान] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुर रहमान बिन अमर अस सुलामी] से [उतबाह बिन अब्द अस सुलामी] कि उ उनुका से कहले रहले, अवुरी उ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी में से एक रहले, एगो आदमी पूछले बाड़े रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम: हे रसूलुल्लाह, राउर जीवन के शुरुआत का रहे? ऊ जवाब दिहले: ओह घरी हमार पालन पोषण करे वाली महतारी बानी सअद बिन बकर के एगो औरत रहली। ओह घरी हम आ ओह जनजाति के एगो अउरी छोट लइका पशुधन के चरावत रहनी। काहे कि हमनी के रोजाना ना ले अइनी जा, हम अपना दोस्त से पूछनी- ए भाई, घरे जाके हमनी के माई से खुजली मांगऽ। तब भाई चल गईले आ हम अकेले रह गईनी पशुपालन के देखभाल करे खातिर। अचानक दू गो उज्जर चिरई चील नियर आ गइल, एगो दोसरा से कहलस, का साँचहू ऊ ह? एगो अउरी जवाब दिहलस; हॅंं! फेर दुनु जाना हमरा के घेर के खींच के पसरले, फेर हमार पेट काट के खोल देले फिर हमार दिल निकाल के, काट के दुगो करिया गांठ निकाल देले। तबे दुनु में से एगो अपना दोस्त से कहलस: हमरा के बर्फ के पानी दे दीं त ओकरा बाद उ हमार पेट धोवे में इस्तेमाल करीहे। फेर फेरु कहलस: हमरा के ठंडा पानी दे दीं'। आ उ हमार दिल धोवत रहले। तब कहलस: हमरा के अस सकीना -शांति- दे द! तब उ हमरा दिल में छिड़क देले। तबे ओहमें से एगो अपना दोस्त से कहलस: ओकरा के सिलाई करऽ! फिर सिलाई कइले आ ओकरा के खतम नुबुवाह -नबी लोग के आवरण- से चिन्हित कइले। तब ओहमें से एगो अपना दोस्त से कहलस: ओकरा के एक तराजू पर डाल दीं आ ओकरा हजार लोग के एक तराजू पर डाल दीं. तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: ओह घरी हम अपना ऊपर हजार लोग के देखले रहनी एहसे हमरा डर रहे कि ओहमें से कुछ लोग हमरा पर गिर जाई, तब ऊ आदमी फेर से कहलसि: अगर ओकर लोग ओकरा से तौलल जाव त ऊ निश्चित रूप से अपना लोग से भारी हो जाई आ तब दुनु जने हमरा के छोड़ के चल गइल. अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, हम बहुत डेरा गईनी, एहसे हम अपना भींजल नर्स के लगे भाग गईनी अवुरी हमरा संगे का भईल बा, ओकरा के बतवनी। उ चिंतित रहली कि कहीं हमरा संगे कुछ हो सकता, एहसे उ कहली कि हम आपके खाती अल्लाह सुभनाहु व ताला से शरण लेतानी। तब उ आपन माउंट तैयार क के हमरा के ऊंट प बईठा के हमरा पीछे सवार हो गईले जब तक कि हमनी के माई के लगे ना पहुंचनी जा, तब उ उनुका से कहले: हम जवन भरोसा अवुरी बोझ हमरा प लगावल गईल बा, ओकरा के पूरा क देले बानी, तब उ उनुका के बतवले कि हमरा संगे का भईल बा। बाकिर एहसे ऊ परेशान ना भइल, असल में माई जवाब दिहली: असल में हम ओकरा के तब देखनी जब ऊ अभी हमरा पेट से निकलल रहले, माने कि ऊ रोशनी जवन सीरिया के सिंहासन के रोशन करेला.
Imam Darimi : 14
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عِمْرَانَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ عُثْمَانَ الْقُرَشِيُّ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ الْغِفَارِيِّ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ عَلِمْتَ أَنَّكَ نَبِيٌّ حَتَّى اسْتَيْقَنْتَ فَقَالَ يَا أَبَا ذَرٍّ أَتَانِي مَلَكَانِ وَأَنَا بِبَعْضِ بَطْحَاءِ مَكَّةَ فَوَقَعَ أَحَدُهُمَا عَلَى الْأَرْضِ وَكَانَ الْآخَرُ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ أَهُوَ هُوَ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَزِنْهُ بِرَجُلٍ فَوُزِنْتُ بِهِ فَوَزَنْتُهُ ثُمَّ قَالَ فَزِنْهُ بِعَشَرَةٍ فَوُزِنْتُ بِهِمْ فَرَجَحْتُهُمْ ثُمَّ قَالَ زِنْهُ بِمِائَةٍ فَوُزِنْتُ بِهِمْ فَرَجَحْتُهُمْ ثُمَّ قَالَ زِنْهُ بِأَلْفٍ فَوُزِنْتُ بِهِمْ فَرَجَحْتُهُمْ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَيْهِمْ يَنْتَثِرُونَ عَلَيَّ مِنْ خِفَّةِ الْمِيزَانِ قَالَ فَقَالَ أَحَدُهُمَا لِصَاحِبِهِ لَوْ وَزَنْتَهُ بِأُمَّتِهِ لَرَجَحَهَا
हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन इमरान] हमनी के बतवले बाड़े [अबू दाउद] हमनी के [जफर बिन उस्मान अल कुरसी] [उस्मान बिन उर्वाह बिन अज़ जुबैर] से [उनकर पिता] से [अबू ज़ार अल घिफारी] रदलियाहुआनहू से बतवले बाड़े, उ कहले; हम पूछनी कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, रउआ कइसे निश्चिंत हो सकेनी कि रउआ नबी हईं? नबी जवाब दिहले: हे अबू ज़ार, दू गो फरिश्ता हमरा लगे तब अइले जब हम मक्का के एगो घाटी में रहनी। ओहमें से एगो धरती पर उतरेला आ दोसरका आकाश आ धरती के बीच में होला. ओहमें से एगो अपना दोस्त से कहलस: का साँचहू ऊ ऊ ह? तब ओकर दोस्त जवाब दिहलस: हँ! तब फेरु कहलस: तब ओकरा के केहू से तौल लीं, तब हमरा के दस लोग से तौलल जाई आ हम ओह लोग से भारी बानी। फेरु फेरु कहलन: 'ओकर सौ लोग से तौलऽ', त हमार तौलल गइल आ हम ओह लोग से भारी हो गइनी। फेरु फेरु कहलन: ‘तब हजार लोग से अपना के तौलऽ’, फेर हमरा के तौलल गइल आ हम ओह लोग से भारी हो गइल रहीं. ओह घरी हमरा लागल कि तराजू बहुते संकरी होखला का चलते ओह लोग के धक्का-मुक्की करत देखनी, तब दुनु स्वर्गदूतन में से एगो अपना दोस्त से कहलसि कि भलही ओकरा के अपना सगरी लोग से तौलल जाव बाकिर ऊ ओह लोग से भारी होखी.
Imam Darimi : 15
أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ خَلِيلٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُنَادِيهِمْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّمَا أَنَا رَحْمَةٌ مُهْدَاةٌ
हमनी के बतवले बाड़े [इस्माइल बिन खलील] हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन मुशीर] [अबू सालिह] से हमनी के [अल अ'मासी] बतवले बाड़े, उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर ओह लोग के बोलवले रहले; हे लोग, साँचहू हम दया आ मार्गदर्शक हईं।
Imam Darimi : 16
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا أَبُو حَيَّانَ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ فَأَقْبَلَ أَعْرَابِيٌّ فَلَمَّا دَنَا مِنْهُ قَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيْنَ تُرِيدُ قَالَ إِلَى أَهْلِي قَالَ هَلْ لَكَ فِي خَيْرٍ قَالَ وَمَا هُوَ قَالَ تَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ قَالَ وَمَنْ يَشْهَدُ عَلَى مَا تَقُولُ قَالَ هَذِهِ السَّلَمَةُ فَدَعَاهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهِيَ بِشَاطِئِ الْوَادِي فَأَقْبَلَتْ تَخُدُّ الْأَرْضَ خَدًّا حَتَّى قَامَتْ بَيْنَ يَدَيْهِ فَاسْتَشْهَدَهَا ثَلَاثًا فَشَهِدَتْ ثَلَاثًا أَنَّهُ كَمَا قَالَ ثُمَّ رَجَعَتْ إِلَى مَنْبَتِهَا وَرَجَعَ الْأَعْرَابِيُّ إِلَى قَوْمِهِ وَقَالَ إِنْ اتَّبَعُونِي أَتَيْتُكَ بِهِمْ وَإِلَّا رَجَعْتُ فَكُنْتُ مَعَكَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन सरीफ] हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन फुदलैल] हमनी के [अबू हयान] से ['अथा`] से [इब्न उमर] रदलियाल्लाहुअनहू से बतवले बाड़े, उ कहले; जब हमनी के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम के साथे एगो सफर में रहनी जा त हमनी के एगो बेदुइन अरब से भेंट भईल आ हमनी के ओकरा लगे पहुंचला के बाद रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका से कहले कि तू कहाँ जात बाड़ू? बेदुइन अरब जवाब दिहलस: हम अपना परिवार से मिले के चाहत बानी। तब प्रेरित कहले: का रउवां कुछ अच्छा चाहत बानी? ऊ जवाब दिहलन कि भलाई का होला? रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: यानी कि रउआ गवाही देत बानी कि अल्लाह सुभानाहु व ताला के अलावा कवनो देवता इबादत के लायक नईखन अवुरी गवाही देत बानी कि मुहम्मद सल्लाह अलैहि वसल्लम उनुकर सेवक अवुरी रसूलुल्लाह हवे। बेदुइन अरब कहलस: त रउआ जवन कहले बानी ओकर सच्चाई के साबित कर सकेला? नबी जवाब दिहले: सलामा के पेड़, त नबी उनुका के बोलवले जब तक कि पेड़ पहाड़ी के किनारे रहे, फिर पेड़ धरती के फाड़ के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे तब तक पहुंच गईल जब तक कि पेड़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने ना पहुंच गईल। प्रेरित उनुका से तीन बेर गवाही देवे के कहले। उ तीन बेर गवाही भी देले जईसे कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले रहले अवुरी ओकरा बाद पेड़ वापस उ जगह प आ गईल जहां उ उग गईल रहे। बेदुइन अरब अपना लोग के लगे लवट के कहलस; अगर उ लोग हमरा पीछे पड़ जास त हम ओह लोग के राजा -रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- से मिले ले जाईब, अगर ना त हम राजा के लगे वापस आ जाईब अवुरी उनुका संगे रहब।
Imam Darimi : 17
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ خَرَجْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي سَفَرٍ وَكَانَ لَا يَأْتِي الْبَرَازَ حَتَّى يَتَغَيَّبَ فَلَا يُرَى فَنَزَلْنَا بِفَلَاةٍ مِنْ الْأَرْضِ لَيْسَ فِيهَا شَجَرٌ وَلَا عَلَمٌ فَقَالَ يَا جَابِرُ اجْعَلْ فِي إِدَاوَتِكَ مَاءً ثُمَّ انْطَلِقْ بِنَا قَالَ فَانْطَلَقْنَا حَتَّى لَا نُرَى فَإِذَا هُوَ بِشَجَرَتَيْنِ بَيْنَهُمَا أَرْبَعُ أَذْرُعٍ فَقَالَ يَا جَابِرُ انْطَلِقْ إِلَى هَذِهِ الشَّجَرَةِ فَقُلْ يُقَلْ لَكِ الْحَقِي بِصَاحِبَتِكِ حَتَّى أَجْلِسَ خَلْفَكُمَا فَرَجَعَتْ إِلَيْهَا فَجَلَسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَلْفَهُمَا ثُمَّ رَجَعَتَا إِلَى مَكَانِهِمَا فَرَكِبْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَسُولُ اللَّهِ بَيْنَنَا كَأَنَّمَا عَلَيْنَا الطَّيْرُ تُظِلُّنَا فَعَرَضَتْ لَهُ امْرَأَةٌ مَعَهَا صَبِيٌّ لَهَا فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ ابْنِي هَذَا يَأْخُذُهُ الشَّيْطَانُ كُلَّ يَوْمٍ ثَلَاثَ مِرَارٍ قَالَ فَتَنَاوَلَ الصَّبِيَّ فَجَعَلَهُ بَيْنَهُ وَبَيْنَ مُقَدَّمِ الرَّحْلِ ثُمَّ قَالَ اخْسَأْ عَدُوَّ اللَّهِ أَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اخْسَأْ عَدُوَّ اللَّهِ أَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثًا ثُمَّ دَفَعَهُ إِلَيْهَا فَلَمَّا قَضَيْنَا سَفَرَنَا مَرَرْنَا بِذَلِكَ الْمَكَانِ فَعَرَضَتْ لَنَا الْمَرْأَةُ مَعَهَا صَبِيُّهَا وَمَعَهَا كَبْشَانِ تَسُوقُهُمَا فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ اقْبَلْ مِنِّي هَدِيَّتِي فَوَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ مَا عَادَ إِلَيْهِ بَعْدُ فَقَالَ خُذُوا مِنْهَا وَاحِدًا وَرُدُّوا عَلَيْهَا الْآخَرَ قَالَ ثُمَّ سِرْنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَنَا كَأَنَّمَا عَلَيْنَا الطَّيْرُ تُظِلُّنَا فَإِذَا جَمَلٌ نَادٌّ حَتَّى إِذَا كَانَ بَيْنَ سِمَاطَيْنِ خَرَّ سَاجِدًا فَحَبَسَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ عَلَيَّ النَّاسَ مَنْ صَاحِبُ الْجَمَلِ فَإِذَا فِتْيَةٌ مِنْ الْأَنْصَارِ قَالُوا هُوَ لَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَمَا شَأْنُهُ قَالُوا اسْتَنَيْنَا عَلَيْهِ مُنْذُ عِشْرِينَ سَنَةً وَكَانَتْ بِهِ شُحَيْمَةٌ فَأَرَدْنَا أَنْ نَنْحَرَهُ فَنَقْسِمَهُ بَيْنَ غِلْمَانِنَا فَانْفَلَتَ مِنَّا قَالَ بِيعُونِيهِ قَالُوا لَا بَلْ هُوَ لَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ أَمَّا لِي فَأَحْسِنُوا إِلَيْهِ حَتَّى يَأْتِيَهُ أَجَلُهُ قَالَ الْمُسْلِمُونَ عِنْدَ ذَلِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ نَحْنُ أَحَقُّ بِالسُّجُودِ لَكَ مِنْ الْبَهَائِمِ قَالَ لَا يَنْبَغِي لِشَيْءٍ أَنْ يَسْجُدَ لِشَيْءٍ وَلَوْ كَانَ ذَلِكَ كَانَ النِّسَاءُ لِأَزْوَاجِهِنَّ
उबैदुल्लाह बिन मूसा हमनी के ईसा बिन अब्दुल मलिक से जाबिर (र.स.) से अबू अज़ जुबैर से रिपोर्ट कइले बाड़न जे कहले बाड़न कि हम रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथे कवनो यात्रा पर निकलनी, आ जब भी उ अपना के राहत देवे के चाहत रहले त उ लुका जात रहले ताकि उनुका के ना देखल जा सके। हमनी के एगो विशाल खुला मैदान में रहनी जा जवना में कवनो पेड़-पौधा भा जीवन के निशान ना रहे, त उ कहले- हे जाबीर, अपना बर्तन के संगे कुछ पानी ले, अवुरी हमनी के यात्रा जारी राखी। जाबिर कहले, हम आपन सफर तब तक जारी रखनी जब तक हमनी के ना लउकल। अचानक चार हाथ के अंतर पर दू गो पेड़ लउकल। ऊ कहले: कृपया ओह पेड़ के नजदीक आ ओकरा से बात करीं, ऊ जवाब दी, त ओकरा के बताईं: रउरा बगल के पेड़ पर जा ताकि हम रउरा दुनु जने के पीछे बइठ सकीले. पेड़ अपना साथी, ओकरा बगल के पेड़ के लगे पहुंचल अवुरी ओ लोग के पीछे रसूलुल्लाह (स.अ.व.) बईठ गईले, अवुरी ओकरा बाद दुनो पेड़ अपना जगह प वापस आ गईले। आगे हमनी के आपन माउंट पर चढ़ गईनी जा, आ जइसे हमनी के ऊपर कवनो चिरई हमनी के ढंकले होखे, तब एगो औरत आ ओकर बच्चा अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रोक दिहलस, उ कहले; हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमार बच्चा असल में रोज तीन बेर शैतान से परेशान होखेला। जाबिर कहले कि; तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बच्चा के लेके अपना गाड़ी के सामने रखले तब उ कहले; चल जा, हे अल्लाह के दुश्मन! हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हईं। प्रेरित तीन बेर कहले रहले। ओकरा बाद उ महिला के वापस क देले। जब हम अपना सफर से लवटनी त मूल सड़क से गुजरनी त एगो मेहरारू आ ओकर लइका दू गो भेड़न के लेके हमनी के रोक दिहलसि जवना के ऊ चरावत रहली. तब उ कहले कि; 'हे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, हमरा से ई वरदान स्वीकार करऽ, जेकरा खातिर तोहरा के सही मायने में भेजले बा, शैतान फेर ना आई। ' ऊ कहले: एगो ले के दोसरका ओकरा के वापस कर दीं। फेर हमनी के सफर जारी रखनी जा आ चिरई जइसे हमनी के आश्रय देत बाड़ी स, अचानक एगो ऊंट भाग गईल, लेकिन जब उ दुगो पेड़ के बगइचा में पहुंचल त उ तुरंत प्रणाम क के सजदा कईलस अवुरी अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओकरा के पकड़ लेले। रसूलुल्लाह लोग से पूछले कि हे लोग इहाँ आ जा, ई ऊंट केकर ह? तब अंसार के कुछ युवक जवाब देले कि, ए अल्लाह के रसूलुल्लाह, इ हमनी के ह, उ पूछले कि एकरा में का बुराई बा? उ लोग जवाब देले- 'हमनी के बीस साल से एकर देखभाल करत थक गईल बानी जा अवुरी एकरा में बहुत चर्बी बढ़ गईल बा - इ मोट हो गईल बा - एहसे हम एकरा के कत्ल करे के चाहत रहनी अवुरी अपना बच्चा के बीच बांटल चाहत रहनी, लेकिन उ हमनी से भाग गईल। ऊ कहले: 'ठीक बा, त हमरा के बेच दीं।' ऊ लोग जवाब दिहल: 'अरे कवनो जरूरत नइखे महामहिम, बाकिर महामहिम खातिर उपहार के रूप में ई काफी बा।' नबी कहले कि ठीक बा, अगर इ हमार बा त एकरा संगे बढ़िया व्यवहार करीं, जब तक कि एकर मौत ना हो जाए।' ओह घरी मुसलमान लोग कहल कि; हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमनी के जानवर के राजा के सजदा करे के अधिका हक बा, उ कहले कि: एक -जीव- के दूसरा -जीव के सजदा कईल ठीक नईखे, जदी इ जरुरी रहित त महिला के अपना पति के सजदा करे के इजाजत होईत।
Imam Darimi : 18
حَدَّثَنَا يَعْلَى حَدَّثَنَا الْأَجْلَحُ عَنْ الذَّيَّالِ بْنِ حَرْمَلَةَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ أَقْبَلْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى دُفِعْنَا إِلَى حَائِطٍ فِي بَنِي النَّجَّارِ فَإِذَا فِيهِ جَمَلٌ لَا يَدْخُلُ الْحَائِطَ أَحَدٌ إِلَّا شَدَّ عَلَيْهِ فَذَكَرُوا ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَتَاهُ فَدَعَاهُ فَجَاءَ وَاضِعًا مِشْفَرَهُ عَلَى الْأَرْضِ حَتَّى بَرَكَ بَيْنَ يَدَيْهِ فَقَالَ هَاتُوا خِطَامًا فَخَطَمَهُ وَدَفَعَهُ إِلَى صَاحِبِهِ ثُمَّ الْتَفَتَ فَقَالَ مَا بَيْنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ إِلَّا يَعْلَمُ أَنِّي رَسُولُ اللَّهِ إِلَّا عَاصِيَ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ
हमनी के बतवले बा [या'ला] हमनी के [अल अजलाह] से [अदज ज़ाय्यल बिन हरमलाह] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] रदलियाल्लाहुआनहु से बतवले बाड़े उ कहले; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे यात्रा से लवट अइनी। जब तक हमनी के एगो बानी नज्जर गाँव में ना पहुंचनी जा, अचानक एगो ऊंट बागान में घुसे के चाहत सब के रोकत रहे। इ बात रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बतावल गईल रहे, एहसे उ उनुका लगे जाके ऊंट के बोलवले। ऊंट आके आपन होठ धरती पर तब तक रखलस जब तक कि ओकरा सामने घुटना ना झुक गईल। फेर कहलस: हमरा खातिर एगो रस्सी ले आवऽ, फेर ओकरा के रस्सी से बान्ह के अपना मालिक के वापस कर दिहलस। फेर ऊ पीछे मुड़ के देखलन आ कहले: आकाश आ धरती के बीच केहू ना बाकिर ऊ जानत बा कि हम वाकई में अल्लाह सुभानाहु व ताला के रसूलुल्लाह हईं सिवाय ओह लोग के जे आज्ञा ना मानेला; जिन्न आ इंसान से मिलल बा.
Imam Darimi : 19
أَخْبَرَنَا الْحَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ فَرْقَدٍ السَّبَخِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ امْرَأَةً جَاءَتْ بِابْنٍ لَهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ ابْنِي بِهِ جُنُونٌ وَإِنَّهُ يَأْخُذُهُ عِنْدَ غَدَائِنَا وَعَشَائِنَا فَيُخَبَّثُ عَلَيْنَا فَمَسَحَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَدْرَهُ وَدَعَا فَثَعَّ ثَعَّةً وَخَرَجَ مِنْ جَوْفِهِ مِثْلُ الْجِرْوِ الْأَسْوَدِ فَسَعَى
हमनी के बतावल गइल बा कि [अल हज्जाज बिन मिन्हल] हमनी के [हमद बिन सलामाह] से [फरकाद अस सबखी] से [सईद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] रदलियाहुअनहु से बतवले बाड़न कि एगो औरत अपना बच्चा के रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे ले आवे आइल रहली आ कहली कि: 'हे रसुलुल्लाह, हमार बच्चा एगो के कब्जा में रहे जिन्न, जिन्न हमेशा अंदर आवेला जब हमनी के दुपहरिया आ रात के खाना खात होखेनी जा। हमनी के, आ हमनी के बदनाम करे के। 'तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ उनकरा खातिर दुआ कइले। फेर उल्टी भइल आ कुछ - करिया पिल्ला जइसन - मुँह से निकलल आ फेर चल गइल.
Imam Darimi : 20
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَعِيدٍ أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي بُكَيْرٍ الْعَبْدِيُّ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ طَهْمَانَ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَأَعْرِفُ حَجَرًا بِمَكَّةَ كَانَ يُسَلِّمُ عَلَيَّ قَبْلَ أَنْ أُبْعَثَ إِنِّي لَأَعْرِفُهُ الْآنَ
हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन सईद] हमनी के बतवले बाड़े [यह्या बिन अबू बकर अल अब्दी] से [इब्राहिम बिन थहमन] से [सिमक] से [जाबिर बिन समुरा] रदलियाहुअनहू से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हम सचमुच जानतानी कि मक्का में एगो पत्थर बा, जवना से उ हमरा के भेजला से पहिले हमरा के अभिवादन करत रहले। सचमुच हमरा अब सचमुच पता चल गईल बा'।