Imam Malik : 21
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍأَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ أُغْمِيَ عَلَيْهِ فَذَهَبَ عَقْلُهُ فَلَمْ يَقْضِ الصَّلَاةَقَالَ مَالِك وَذَلِكَ فِيمَا نَرَى وَاللَّهُ أَعْلَمُ أَنَّ الْوَقْتَ قَدْ ذَهَبَ فَأَمَّا مَنْ أَفَاقَ فِي الْوَقْتِ فَإِنَّهُ يُصَلِّي
हमरा मलिक स [नफी’] स कहल गेल छल, जे [अब्दुल्लाह बिन उमर] बेहोश भ गेल छलाह आ हुनकर याददाश्त खत्म भ गेल छल, आ ओ अपन नमाज नहि बनौलथि। मालिक बजलाह; 'हमरा सभक विचार मे अल्लाह बेसी नीक जकाँ जनैत छथि, तेँ जखन समय बीति गेल अछि, रहल बात समयक प्रति जागरूक व्यक्तिक त' ओकरा नमाज अवश्य करबाक चाही'।
Imam Malik : 22
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ قَفَلَ مِنْ خَيْبَرَ أَسْرَى حَتَّى إِذَا كَانَ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ عَرَّسَ وَقَالَ لِبِلَالٍ اكْلَأْ لَنَا الصُّبْحَ وَنَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصْحَابُهُ وَكَلَأَ بِلَالٌ مَا قُدِّرَ لَهُ ثُمَّ اسْتَنَدَ إِلَى رَاحِلَتِهِ وَهُوَ مُقَابِلُ الْفَجْرِ فَغَلَبَتْهُ عَيْنَاهُ فَلَمْ يَسْتَيْقِظْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَا بِلَالٌ وَلَا أَحَدٌ مِنْ الرَّكْبِ حَتَّى ضَرَبَتْهُمْ الشَّمْسُ فَفَزِعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ بِلَالٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخَذَ بِنَفْسِي الَّذِي أَخَذَ بِنَفْسِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْتَادُوا فَبَعَثُوا رَوَاحِلَهُمْ وَاقْتَادُوا شَيْئًا ثُمَّ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَأَقَامَ الصَّلَاةَ فَصَلَّى بِهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الصُّبْحَ ثُمَّ قَالَ حِينَ قَضَى الصَّلَاةَ مَنْ نَسِيَ الصَّلَاةَ فَلْيُصَلِّهَا إِذَا ذَكَرَهَا فَإِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ أَقِمْ الصَّلَاةَ لِذِكْرِي }
हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ याह्या जखन रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर पर विजय प्राप्त केलनि तखन राति के अंत धरि चललनि तखन आराम करबाक लेल रुकि गेलाह, फेर बिलाल केँ कहलनि; ‘हमरा सब के जगाबै के लेल भोर में जागू’, तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम आ ओकर साथी सुति गेलै, जखन कि बिलाल मजबूत भ क पहरा दैत रहलै, जखन भोर के नजदीक आबि गेलै त ओ अपन वाहन पर झुकि गेलै, आ अंततः ओकरा नींद आबि गेलै। रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, बिलाल आ अन्य साथी सब ताबत धरि नहि जागल जाबत धरि सूर्य हुनका सब के नहि जगौलक, रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम आश्चर्यचकित भ गेलाह, आ बिलाल हुनका कहलखिन; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा संग किछु एहन भेल अछि जेना अहाँक संग भेल अछि,' तखन रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वस्ल्लम कहलनि: 'अपन पर्वत के नेतृत्व करू', त ओ सब उठि क किछु समय लेल अपन माउंट के मार्गदर्शन केलनि, तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम बिलाल के इकामा कहय लेल कहलखिन्ह, आ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग सुबह के नमाज के नमाज पढ़लनि हुनका सब के, जखन ओ अपन नमाज समाप्त केलनि त कहलनि, 'जे नमाज पढ़ब बिसरि जाइत अछि तखन ओकरा स्मरण भेला पर प्रार्थना करैत अछि |' कारण अल्लाह तआला अपन किताब मे कहैत छथि : 'हमरा याद करबाक लेल नमाज स्थापित करू।' '' .
Imam Malik : 23
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّهُ قَالَعَرَّسَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةً بِطَرِيقِ مَكَّةَ وَوَكَّلَ بِلَالًا أَنْ يُوقِظَهُمْ لِلصَّلَاةِ فَرَقَدَ بِلَالٌ وَرَقَدُوا حَتَّى اسْتَيْقَظُوا وَقَدْ طَلَعَتْ عَلَيْهِمْ الشَّمْسُ فَاسْتَيْقَظَ الْقَوْمُ وَقَدْ فَزِعُوا فَأَمَرَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَرْكَبُوا حَتَّى يَخْرُجُوا مِنْ ذَلِكَ الْوَادِي وَقَالَ إِنَّ هَذَا وَادٍ بِهِ شَيْطَانٌ فَرَكِبُوا حَتَّى خَرَجُوا مِنْ ذَلِكَ الْوَادِي ثُمَّ أَمَرَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَنْزِلُوا وَأَنْ يَتَوَضَّئُوا وَأَمَرَ بِلَالًا أَنْ يُنَادِيَ بِالصَّلَاةِ أَوْ يُقِيمَ فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالنَّاسِ ثُمَّ انْصَرَفَ إِلَيْهِمْ وَقَدْ رَأَى مِنْ فَزَعِهِمْ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ اللَّهَ قَبَضَ أَرْوَاحَنَا وَلَوْ شَاءَ لَرَدَّهَا إِلَيْنَا فِي حِينٍ غَيْرِ هَذَا فَإِذَا رَقَدَ أَحَدُكُمْ عَنْ الصَّلَاةِ أَوْ نَسِيَهَا ثُمَّ فَزِعَ إِلَيْهَا فَلْيُصَلِّهَا كَمَا كَانَ يُصَلِّيهَا فِي وَقْتِهَا ثُمَّ الْتَفَتَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ فَقَالَ إِنَّ الشَّيْطَانَ أَتَى بِلَالًا وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فَأَضْجَعَهُ فَلَمْ يَزَلْ يُهَدِّئُهُ كَمَا يُهَدَّأُ الصَّبِيُّ حَتَّى نَامَ ثُمَّ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا فَأَخْبَرَ بِلَالٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِثْلَ الَّذِي أَخْبَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَا بَكْرٍ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ أَشْهَدُ أَنَّكَ رَسُولُ اللَّهِ
[जैद बिन असलम] स मालिक स हमरा कहने छल ओ कहलक; एक राति नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मक्का के एकटा सड़क पर आराम करय लेल रुकि गेलाह, बिलाल के नमाज के समय हुनका सब के जगाबय के काज सौंप देलखिन्ह, फेर बिलाल के नींद आबि गेलनि आ ओहो सब के सूरज उगय धरि। ओ सब सदमा के हालत में जागल, तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन जे अपन गाड़ी घाटी स बाहर भगा दियौ। तखन - रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम - कहलनि: 'सत्ते, एहि घाटी मे एकटा शैतान अछि,' तखन ओ सभ चलैत रहल जा धरि ओ सभ ओहि ठाम सँ नहि निकलि गेल, तखन ओ सभ ओकरा सभ केँ वज़ूद लेल रुकबाक आदेश देलक आ बिलाल केँ कहलक जे नमाज वा इकमाह केर आह्वान करू, तखन अल्लाह केर रसूलुल्लाह लोकक संग नमाज पढ़लनि, तकर बाद ओ डर सँ ओकरा सभ दिस तकैत घुमि गेलाह, तखन कहलनि: 'हे लोक, अल्लाह हमरा सभक लेल ल' गेल छथि।' आत्मा, जँ ओ चाहथि तँ एहि समयक अतिरिक्त हमरा सभक आत्मा केँ अवश्य ल' लेताह, जँ अहाँ सभ मे सँ कियो प्रार्थना सँ नींद आबि जायत वा बिसरि जायत आ तखन मोन पाड़ि जायत तखन ओहिना करू जेना ओ अपन समय मे केने छलाह' | रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अबू बकर दिस घुमि क’ कहलनि: ‘सत्ते शैतान बिलाल लग आबि गेल जखन ओ नमाज पढ़ैत छलाह आ हुनका नींद आबि गेलनि, आ ओ एखनो हुनका ओहिना लुभाबैत रहलाह जेना माँ अपन बच्चा केँ सुतिबैत छथि जा धरि ओ नींद नहि आबि जाइत अछि’, तखन ओ बिलाल केँ फोन केलनि आ ओ रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केँ कहलनि जेना ओ अबू बकर, तखन अबूल केँ रिपोर्ट केलनि बकर कहलक; 'हम गवाही दैत छी जे अहाँ अल्लाह के रसूलुल्लाह छी'।
Imam Malik : 24
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ فَإِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ وَقَالَ اشْتَكَتْ النَّارُ إِلَى رَبِّهَا فَقَالَتْ يَا رَبِّ أَكَلَ بَعْضِي بَعْضًا فَأَذِنَ لَهَا بِنَفَسَيْنِ فِي كُلِّ عَامٍ نَفَسٍ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٍ فِي الصَّيْفِ
यह्या हमरा मालिक स॑ [जैद बिन असलम] स॑ [‘अथो` बिन यासर] स॑ बतैन॑ छै, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै: ‘सत्ते, जहानम केरऽ उड़ाबै स॑ तेज गर्मी आबै छै, ई लेली अगर गर्मी तेज छै त॑ नमाज क॑ तब तलक टाली दियौ जब॑ तलक ओकरा छाया नै होय जाय छै’ । आ ओ कहलनि: 'नरक अपन रब्ब सँ शिकायत करैत अछि, आ कहैत अछि; 'हे हमर रब्ब, हमरा मे सँ किछु गोटे दोसर केँ खाइत छथि' तखन -अल्लाह 'अज्जा वजल्ला- हर साल दू साँस, जाड़ मे एकटा साँस आ गर्मी मे दोसर साँस'क अनुमति दैत छथि'।
Imam Malik : 25
و حَدَّثَنَا مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ مَوْلَى الْأَسْوَدِ بْنِ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَعَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ فَإِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ وَذَكَرَ أَنَّ النَّارَ اشْتَكَتْ إِلَى رَبِّهَا فَأَذِنَ لَهَا فِي كُلِّ عَامٍ بِنَفَسَيْنِ نَفَسٍ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٍ فِي الصَّيْفِ
मलिक हमरा [अब्दुल्लाह बिन यजीद] अल असवद बिन सुफियान के पूर्व गुलाम स, [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] स, आ [मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन त्साउबान] स [अबू हुरैरा] स कहने छथि, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि: 'जँ गर्मी तेज अछि, तखन नमाज के इंतजार करू जा धरि छाया नहि भ' जाय, कारण... जहानम के प्रहार से तीव्र गर्मी आबै छै,' आरू वू कहलकै, 'ओ नरक अपनऽ रब्ब के शिकायत करै छै, तखनिये अल्लाह हर साल दू साँस, जाड़ा में एक सांस आरू गर्मी में एक सांस के साथ एकरा प्रवेश करै के अनुमति दै छै'।
Imam Malik : 26
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اشْتَدَّ الْحَرُّ فَأَبْرِدُوا عَنْ الصَّلَاةِ فَإِنَّ شِدَّةَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ
कथाकार बुझबैत छथि; आरू ई हमरा स॑ मलिक स॑ [अबू अज़ जिनाद] स॑ [अल अ’राज] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ कहलऽ गेलऽ छै: ‘जब॑ गर्मी तेज होय जाय छै त॑ नमाज के समय क॑ तब तलक टाली दियौ जब॑ तलक कि ठंडा नै होय जाय, कैन्हेंकि गर्मी के कठोरता जहनम के उड़ाबै स॑ आबै छै’ ।
Imam Malik : 27
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ فَلَا يَقْرُبْ مَسَاجِدَنَا يُؤْذِينَا بِرِيحِ الثُّومِ
हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [सैद बिन मुसैयब] सँ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ याह्या कहलनि: 'जे कियो ई गाछ -प्याज- खाइत अछि, हमर मस्जिद लग नहि जाउ, कारण एकर गंध हमरा सभ केँ परेशान क' सकैत अछि'।
Imam Malik : 28
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمُجَبَّرِأَنَّهُ كَانَ يَرَى سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ إِذَا رَأَى الْإِنْسَانَ يُغَطِّي فَاهُ وَهُوَ يُصَلِّي جَبَذَ الثَّوْبَ عَنْ فِيهِ جَبْذًا شَدِيدًا حَتَّى يَنْزِعَهُ عَنْ فِيهِ
मलिक हमरा [अब्दुररहमान बिन अल मुजब्बर] स कहलक, जे ओ [सलीम बिन अब्दुल्लाह] के देखलक, जखन ओ एकटा एहन व्यक्ति के देखलक जे नमाज पढ़ैत काल मुँह झाँपि लेने छल, त ओ अपन कमीज एतेक जोर स खींच लेलक जे ओकर मुँह स खसि पड़ल'।
Imam Malik : 29
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ وَهُوَ جَدُّ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَهَلْ تَسْتَطِيعُ أَنْ تُرِيَنِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ نَعَمْ فَدَعَا بِوَضُوءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى يَدِهِ فَغَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ ثُمَّ تَمَضْمَضَ وَاسْتَنْثَرَ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ يَدَيْهِ مَرَّتَيْنِ مَرَّتَيْنِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثُمَّ مَسَحَ رَأْسَهُ بِيَدَيْهِ فَأَقْبَلَ بِهِمَا وَأَدْبَرَ بَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ ثُمَّ ذَهَبَ بِهِمَا إِلَى قَفَاهُ ثُمَّ رَدَّهُمَا حَتَّى رَجَعَ إِلَى الْمَكَانِ الَّذِي بَدَأَ مِنْهُ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ
याह्या हमरा मलिक स [अमर इब्न याह्या अल मज़िनी] स [अपन पिता] स बतेलथि, ओ अब्दुल्ला जैद बिन असीम स कहलथि, जे अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व.) क साथी मे स एक अम्र इब्न याह्या अल मज़िनी क दादा छलाह: 'की अहाँ हमरा देखा सकैत छी जे कोना अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व.)। आ अल्लाह के बरकत हुनका पर हो) वजूद केलनि?' अब्दुल्लाह बिन जैद बिन असीम कहलनि: 'हाँ।' तेँ ओ वजूदक लेल पानि मँगलनि, हाथ पर ढारि देलनि आ दू बेर धोलनि। तखन मुँह कुल्ला कए तीन बेर इस्तीनसर बनौलनि। फेर तीन बेर मुँह धोलक, फेर दू बेर कोहनी धरि बाँहि धो लेलक। फेर दुनू हाथसँ माथ पोछलनि , आगू-पाछू , माथक आगूसँ शुरू केलनि फेर गरदनिक पाछू धरि आगू बढ़लाह आ जतयसँ शुरू भेल छलाह ओतय घुरि गेलाह तखन पैर धो लेलनि ।
Imam Malik : 30
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا تَوَضَّأَ أَحَدُكُمْ فَلْيَجْعَلْ فِي أَنْفِهِ مَاءً ثُمَّ لِيَنْثِرْ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ
हमरा मलिक स अबू अज़ जिनाद स [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहल गेल अछि: 'जखन अहाँ मे स कियो वजूद करैत अछि त ओकरा नाक मे पानि डालबाक चाही आ फेर इस्टिंत्सर करबाक चाही। आ जे पाथरसँ प्रार्थना करत, ओ विषम संख्यासँ हो'।
Imam Malik : 31
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَوَضَّأَ فَلْيَسْتَنْثِرْ وَمَنْ اسْتَجْمَرَ فَلْيُوتِرْ
हमरा मलिक स [इब्नु शिहाब] स [अबू इदरीस अल खौलानी] स [अबू हुरैरा] स रिवायत अछि, अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलखिन: 'जे वजूद करत ओकरा इस्तीजमर करबाक चाही आ जे इस्तीजमर करत ओकरा विषम संख्या स करबाक चाही'।
Imam Malik : 32
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ طَحْلَاءَ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أَبَاهُ حَدَّثَهُ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِيَتَوَضَّأُ بِالْمَاءِ لِمَا تَحْتَ إِزَارِهِ
हमरा [याह्या बिन मुहम्मद बिन थहला`] स मालिक स [उस्मान बिन अब्दुररहमान] स कहल गेल अछि, जे [हुनकर पिता] हुनका कहलथि जे ओ सुनने छथि जे [उमर बिन अल खत्ताब] इस्टिंजा` के लेल प्रयोग होबय बला पानि स वज़ूद करैत छथि |
Imam Malik : 33
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا اسْتَيْقَظَ أَحَدُكُمْ مِنْ نَوْمِهِ فَلْيَغْسِلْ يَدَهُ قَبْلَ أَنْ يُدْخِلَهَا فِي وَضُوئِهِ فَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَا يَدْرِي أَيْنَ بَاتَتْ يَدُهُ
हमरा ई बात याह्या द्वारा मलिक सँ अबू अज़ जिनाद सँ [अल अ'राज] सँ [अबू हुरैराह] सँ कहल गेल अछि, अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'जखन अहाँ मे सँ कियो नींद सँ जागत त' वजूदक पानि मे राखय सँ पहिने ओकर हाथ धोउ, कारण अहाँ मे सँ एकटा केँ ई नहि बुझल छैक जे ओकर हाथ राति कतय बितेलक'।
Imam Malik : 34
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَإِذَا نَامَ أَحَدُكُمْ مُضْطَجِعًا فَلْيَتَوَضَّأْ
ई हमरा मलिक सँ [जैद बिन असलम] सँ रिवायत भेल छल, [उमर बिन अल खत्ताब] कहलनि; 'अहाँ सभ मे सँ कियो पीठ पर पड़ल सुतय तऽ वजूद करबाक चाही।'
Imam Malik : 35
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَأَنَّ تَفْسِيرَ هَذِهِ الْآيَةِ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ وَامْسَحُوا بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى الْكَعْبَيْنِ }أَنَّ ذَلِكَ إِذَا قُمْتُمْ مِنْ الْمَضَاجِعِ يَعْنِي النَّوْمَ
मलिक हमरा [जैद बिन असलम] स, आयत के व्याख्या के संबंध में कहलखिन: 'हे विश्वासी सब जखन नमाज करय चाहैत छी त कोहनी तक मुँह आ हाथ धोउ, आ टखने तक माथ आ पैर पोछू' जे नींद स उठला पर होइत अछि।
Imam Malik : 36
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَكَانَ يَنَامُ جَالِسًا ثُمَّ يُصَلِّي وَلَا يَتَوَضَّأُ
कथाकार बुझेलनि; हमरा [नाफी’] स मालिक स रिवायत भेल जे [इब्न उमर] एक बेर उठि कए बैसल सुतैत छलाह, फेर ओ नमाज पढ़ैत छलाह आ वज़ूद नहि करैत छलाह।
Imam Malik : 37
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ سَلَمَةَ مِنْ آلِ بَنِي الْأَزْرَقِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ وَهُوَ مِنْ بَنِي عَبْدِ الدَّارِ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُجَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنْ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أَفَنَتَوَضَّأُ بِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُ
कथाकार बुझबैत छथि; हमरा बनी अल अरजाक के बीच [शफवान बिन सुलैम] स [सईद बिन सलामाह] स मालिक स, बानी अब्दुद दार के बीच [अल मुगिराह बिन अबू बुरदाह] स, जे ओ [अबू हुरैराह] के कहैत सुनने छथि; कियो रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग आबि कहलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम सब समुद्र पर जहाज चला केलहुं जखन कि हम सब मात्र कनि पानि ल क चललहुं।' जँ हुनका संग वज़ूद करब तँ प्यासल रहब, की हुनका संग वजूद क' सकैत छी?' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे समुद्रक पानि पवित्र अछि, ओकर लाश हलाल अछि।
Imam Malik : 38
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ حُمَيْدَةَ بِنْتِ عُبَيْدِ بْنِ رِفَاعَةَ عَنْ خَالَتِهَا كَبْشَةَ بِنْتِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ وَكَانَتْ تَحْتَ ابْنِ أَبِي قَتَادَةَ الْأَنْصَارِيِّ أَنَّهَا أَخْبَرَتْهَاأَنَّ أَبَا قَتَادَةَ دَخَلَ عَلَيْهَا فَسَكَبَتْ لَهُ وَضُوءًا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ لِتَشْرَبَ مِنْهُ فَأَصْغَى لَهَا الْإِنَاءَ حَتَّى شَرِبَتْ قَالَتْ كَبْشَةُ فَرَآنِي أَنْظُرُ إِلَيْهِ فَقَالَ أَتَعْجَبِينَ يَا ابْنَةَ أَخِي قَالَتْ فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّهَا لَيْسَتْ بِنَجَسٍ إِنَّمَا هِيَ مِنْ الطَّوَّافِينَ عَلَيْكُمْ أَوْ الطَّوَّافَاتِ
कथाकार बुझेलनि; हमरा मलिक स [इशाक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहह] स [हुमैदा बिन उबैद बिन रिफाअह] स अपन मौसी स - [कब्स्याह बिंत कअब बिन मलिक] स कहने छथि - आ ओ अबू कतादाह अल अंसारी क देखभाल मे छलीह, ओ हुनका सूचित केलथि जे [अबू कतादाह] हुनका लग गेल छलाह, कबसिया हुनका लेल वजूद क पानि ढारि देलथि, अचानक एकटा बिलाड़ि आबि गेल आ ओकर वजूदक पानि पीबि लेलक, तेँ ओ बर्तनकेँ नजदीक आनि देलक जाहिसँ बिलाड़ि ओहिसँ पीबि गेल । कबस्याह बाजल; तखन ओ हमरा देखैत छलीह जे हुनका देखैत छलहुँ आ बजलीह; 'अहाँ आश्चर्यचकित छी हे हमर भाइक बेटी?' ओ बजलीह; तखन हम जवाब देलियनि, 'हँ'। अबू कतादाह बतौलनि, जे अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'बिलाड़ि अशुद्ध नहि होइत अछि, कारण ओ जानवर अछि जे हमरा सभक आसपास अछि'।
Imam Malik : 39
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَاطِبٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ خَرَجَ فِي رَكْبٍ فِيهِمْ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ حَتَّى وَرَدُوا حَوْضًا فَقَالَ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِ لِصَاحِبِ الْحَوْضِ يَا صَاحِبَ الْحَوْضِ هَلْ تَرِدُ حَوْضَكَ السِّبَاعُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ يَا صَاحِبَ الْحَوْضِ لَا تُخْبِرْنَا فَإِنَّا نَرِدُ عَلَى السِّبَاعِ وَتَرِدُ عَلَيْنَا
कथाकार बुझेलनि; हमरा [याह्या बिन सैद] स मालिक स [मुहम्मद बिन इब्राहिम बिन अल हरिथ अत तैमी] स [याह्या बिन अब्दुररहमान बिन हथिब] स कहने छथि, जे [उमर बिन अल खथाब] एक बेर एकटा समूह क संग बाहर निकलल छलाह जाहि मे ‘अमर बिन अल ऐश छल, जखन ओ सब एकटा पोखरि मे आयल छलाह, ‘अमरू बिन अल ऐश पोखरि क मालिक स कहलथि; 'हे पोखरिक रखवाला, अहाँक पोखरि सँ कोनो जंगली जानवर पीबि रहल अछि की?' तखन उमर बिन अल खथाब टोकलनि; 'हे पोखरिक रखवाला, हमरा सभकेँ सूचित नहि करू, हम सभ ओहि पानिसँ पीबैत छी जे जंगली जानवर सभ पीने अछि आ जंगली जानवर सभ सेहो ओहि पानिसँ पीबैत छी जे हम सभ पीने छी' ।
Imam Malik : 40
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُإِنْ كَانَ الرِّجَالُ وَالنِّسَاءُ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيَتَوَضَّئُونَ جَمِيعًا
कथाकार बुझेलनि; [नफी'] स मालिक स हमरा कहने अछि; कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाहु 'अलैहि वसल्लम के समय में पुरुष और महिला एक साथ वज़ूद किया' |