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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Malik (الامام مالك) - 1594 Hadith

Hadith

Imam Malik : 1

قَالَ حَدَّثَنِي اللَّيْثِيّ عَنْ مَالِك بْن أَنَس عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَخَّرَ الصَّلَاةَ يَوْمًا فَدَخَلَ عَلَيْهِ عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ فَأَخْبَرَهُ أَنَّ الْمُغِيرَةَ بْنَ شُعْبَةَ أَخَّرَ الصَّلَاةَ يَوْمًا وَهُوَ بِالْكُوفَةِ فَدَخَلَ عَلَيْهِ أَبُو مَسْعُودٍ الْأَنْصَارِيُّ فَقَالَمَا هَذَا يَا مُغِيرَةُ أَلَيْسَ قَدْ عَلِمْتَ أَنَّ جِبْرِيلَ نَزَلَ فَصَلَّى فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ صَلَّى فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ صَلَّى فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ صَلَّى فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ صَلَّى فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ بِهَذَا أُمِرْتُ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ اعْلَمْ مَا تُحَدِّثُ بِهِ يَا عُرْوَةُ أَوَ إِنَّ جِبْرِيلَ هُوَ الَّذِي أَقَامَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقْتَ الصَّلَاةِقَالَ عُرْوَةُ كَذَلِكَ كَانَ بَشِيرُ بْنُ أَبِي مَسْعُودٍ الْأَنْصَارِيُّ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ قَالَ عُرْوَةُ وَلَقَدْ حَدَّثَتْنِي عَائِشَةُ زَوْجُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُصَلِّي الْعَصْرَ وَالشَّمْسُ فِي حُجْرَتِهَا قَبْلَ أَنْ تَظْهَرَ

कथाकार बजलाह; हमरा [इब्न शिहाब] स मालिक बिन अनस स अल लैत्सी कहि देने छथि; एक दिन उमर बिन अब्दुल अजीज अपन नमाज समाप्त केलनि, उर्वाह बिन अज़ जुबैर हुनका सं भेंट केलनि आ कहलनि जे एक दिन मुगीरा बिन स्यूबाह हुनकर नमाज समाप्त केलनि जखन ओ कुफा मे छलाह, तें इब्नू मसूद हुनका सं भेंट केलनि आ हुनका डांटलनि; 'अहाँक की कहबाक मतलब हे मुघिरह ? की अहाँ के नै बुझल अछि, जिब्रिल उतरि गेल छलाह तखन नमाज केने छलाह आ रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम नमाज में शामिल भ गेल छलाह, फेर ओ नमाज केलनि आ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज में शामिल भ गेलाह, फेर ओ नमाज केलनि आ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सेहो नमाज में शामिल भ गेलाह, तखन ओ नमाज केलनि आ रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज में शामिल भ गेलाह. तखन जिब्राईल कहलथिन; ‘एना हमरा आदेश भेल,’ तखन उमर बिन अब्दुल अजीज पुछलखिन, ‘अहाँ जे रिपोर्ट करैत छी ताहि पर ध्यान दियौक, हे उरवाह! की जिब्रिल छलाह जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नमाज के समय सिखबैत छलाह? [उरवाह] उत्तर देलक; '[बसीर बिन मसूद अल अंसारी] [अपन पिता] के सेहो एना कहलनि' तखन [उरवाह] पुष्टि केलनि; आरू नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ पत्नी हमरा [ऐस्याह] क॑ बतैन॑ छेलै कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ दुपहर केरऽ नमाज तखनिये करलकै जब॑ सूर्य अभी भी नै दिखाई दै छेलै ।

Hadith

Imam Malik : 2

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍأَنَّهُ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ عَنْ وَقْتِ صَلَاةِ الصُّبْحِ قَالَ فَسَكَتَ عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى إِذَا كَانَ مِنْ الْغَدِ صَلَّى الصُّبْحَ حِينَ طَلَعَ الْفَجْرُ ثُمَّ صَلَّى الصُّبْحَ مِنْ الْغَدِ بَعْدَ أَنْ أَسْفَرَ ثُمَّ قَالَ أَيْنَ السَّائِلُ عَنْ وَقْتِ الصَّلَاةِ قَالَ هَأَنَذَا يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ مَا بَيْنَ هَذَيْنِ وَقْتٌ

हमरा मालिक सँ [जैद बिन असलम] सँ ['अथो` बिन यासर] सँ याह्या कहि देने छथि, ओ कहलनि; एक आदमी रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आबि सुबह के नमाज के समय के बारे में पूछलकै। -'अथो` बिन यासर- कहलक; तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप रहलाह, जाबत दोसर दिन भोर भेला पर भोरका नमाज नहि केलनि, दोसर दिन जखन आकाश पीयर भ गेल छल तखन नमाज केलनि। तखन -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- पुछलखिन: 'ओ आदमी कतय अछि जे हमरा स भोर के नमाज के समय के बारे में पूछलक?' -पुरुष- उत्तर देलक; 'हम, हे अल्लाह के रसूलुल्लाह,' तखन ओ कहलनि: 'भोर के नमाज के समय एहि दुनू समय के बीच अछि'।

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Imam Malik : 3

و حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَائِشَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهَا قَالَتْإِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيُصَلِّي الصُّبْحَ فَيَنْصَرِفُ النِّسَاءُ مُتَلَفِّعَاتٍ بِمُرُوطِهِنَّ مَا يُعْرَفْنَ مِنْ الْغَلَسِ

हमरा मलिक स याह्या [याह्या बिन सईद] स [अमरा बिन अब्दुररहमान] स [ऐश्याह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहलथि अछि; 'जखन रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सुबह के नमाज समाप्त केलनि त महिला सब अपन कपड़ा स झाँपि क बाहर निकललीह, आ एखनो हुनकर पहचान नहि भ सकल छल कियाक त अन्हार छल'।

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Imam Malik : 4

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ وَعَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ وَعَنْ الْأَعْرَجِ كُلُّهُمْ يُحَدِّثُونَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَدْرَكَ رَكْعَةً مِنْ الصُّبْحِ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ الصُّبْحَ وَمَنْ أَدْرَكَ رَكْعَةً مِنْ الْعَصْرِ قَبْلَ أَنْ تَغْرُبَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ الْعَصْرَ

हमरा मलिक स [जैद बिन असलम] स [अथो` बिन यासर] स, [बस्र बिन सैद] स [अल अ'राज] स कहल गेल अछि, सबटा [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहला अछि जे जेकरा सूर्य उगय स पहिने एकटा रकात भोर के नमाज भेटैत अछि, ओकरा भोर के नमाज भेट गेल अछि। जे कियो सूर्यास्त स पहिने अस्र नमाज के एक रकाअत पूरा क लैत अछि तखन ओ अस्र के नमाज पूरा क लेने अछि |

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Imam Malik : 5

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ مَوْلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ كَتَبَ إِلَى عُمَّالِهِ إِنَّ أَهَمَّ أَمْرِكُمْ عِنْدِي الصَّلَاةُ فَمَنْ حَفِظَهَا وَحَافَظَ عَلَيْهَا حَفِظَ دِينَهُ وَمَنْ ضَيَّعَهَا فَهُوَ لِمَا سِوَاهَا أَضْيَعُ ثُمَّ كَتَبَ أَنْ صَلُّوا الظُّهْرَ إِذَا كَانَ الْفَيْءُ ذِرَاعًا إِلَى أَنْ يَكُونَ ظِلُّ أَحَدِكُمْ مِثْلَهُ وَالْعَصْرَ وَالشَّمْسُ مُرْتَفِعَةٌ بَيْضَاءُ نَقِيَّةٌ قَدْرَ مَا يَسِيرُ الرَّاكِبُ فَرْسَخَيْنِ أَوْ ثَلَاثَةً قَبْلَ غُرُوبِ الشَّمْسِ وَالْمَغْرِبَ إِذَا غَرَبَتْ الشَّمْسُ وَالْعِشَاءَ إِذَا غَابَ الشَّفَقُ إِلَى ثُلُثِ اللَّيْلِ فَمَنْ نَامَ فَلَا نَامَتْ عَيْنُهُ فَمَنْ نَامَ فَلَا نَامَتْ عَيْنُهُ فَمَنْ نَامَ فَلَا نَامَتْ عَيْنُهُ وَالصُّبْحَ وَالنُّجُومُ بَادِيَةٌ مُشْتَبِكَةٌ

ई हमरा मलिक सं अब्दुल्ला बिन उमर के पूर्व गुलाम [नाफी'] सं संबंधित छल; [उमर बिन अल खत्ताब] एक बेर अपन नौकर सब के लिखने छलाह, ‘हमर विचार स अहाँक काज में सबस महत्वपूर्ण अछि नमाज। जे एकर पहरा रखैत अछि आ एकर निर्वाह करैत अछि ओ अपन धर्मक रक्षा केने अछि । जे एकर उपेक्षा करत, तखन आन कर्म बेसी उपेक्षित होयत,' तखन ओ लिखलनि; 'अहाँकेँ धुहर नमाज तखन करबाक चाही जखन अहाँक छाया एक हाथ हो जा धरि ओ अहाँक शरीरक आकारक ठीक बराबर नहि भ' जाय ।' अहाँ के अस्र के नमाज तखन करबाक चाही जखन सूर्य एखनो बेसी आ साफ उज्जर हो आ सूर्यास्त सं करीब दू-तीन फरसाख पहिने सवारी के लंबाई के संग। सूर्यास्त भेला पर मगरीब नमाज, आ ईशा` जखन स्याफक - सूर्यास्तक बाद आकाश मे लाल गोधूलि - राति के एक तिहाई तक गायब भ गेल हो | जे सुतल अछि ओकर आँखि नहि सुतैत अछि आ जे सुतल अछि ओकर आँखि नहि सुतैत अछि । आ जखन तारा एक संग मिश्रित देखाइत अछि तखन भोरका नमाज करू।'

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Imam Malik : 6

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ كَتَبَ إِلَى أَبِي مُوسَى أَنْ صَلِّ الظُّهْرَ إِذَا زَاغَتْ الشَّمْسُ وَالْعَصْرَ وَالشَّمْسُ بَيْضَاءُ نَقِيَّةٌ قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَهَا صُفْرَةٌ وَالْمَغْرِبَ إِذَا غَرَبَتْ الشَّمْسُ وَأَخِّرْ الْعِشَاءَ مَا لَمْ تَنَمْ وَصَلِّ الصُّبْحَ وَالنُّجُومُ بَادِيَةٌ مُشْتَبِكَةٌ وَاقْرَأْ فِيهَا بِسُورَتَيْنِ طَوِيلَتَيْنِ مِنْ الْمُفَصَّلِ

हमरा मलिक स हुनकर मामा स - [अबू सुहैल] - [अपन पिता] स रिवायत भेल छल, जे [उमर बिन अल खत्ताब] अबू मूसा अल अस्या'री कए लिखने छथि : धुहर नमाज तखन करू जखन सूर्य विचलित भ गेल होए आ असर नमाज तखन करू जखन सूर्य पीयर होएबा स पहिने साफ उज्जर देखाएत। सूर्यास्त भेला पर मगरीब के नमाज करू, आ जागल रहैत ईशा के नमाज समाप्त करू, आ जखन तारा लाइन में लागल देखाइत अछि तखन फजर के नमाज करू, आ ओहि में दू टा नमहर सूरह पढ़ू जे अल मुफसल के सूरह के श्रेणी में शामिल अछि - ओ सूरा जे अंत तक सूरह अल हुजुरात स शुरू होइत अछि- .

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Imam Malik : 7

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ كَتَبَ إِلَى أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ أَنْ صَلِّ الْعَصْرَ وَالشَّمْسُ بَيْضَاءُ نَقِيَّةٌ قَدْرَ مَا يَسِيرُ الرَّاكِبُ ثَلَاثَةَ فَرَاسِخَ وَأَنْ صَلِّ الْعِشَاءَ مَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ ثُلُثِ اللَّيْلِ فَإِنْ أَخَّرْتَ فَإِلَى شَطْرِ اللَّيْلِ وَلَا تَكُنْ مِنْ الْغَافِلِينَ

हमरा मालिक सँ [हिस्यम बिन उर्वाह] सँ [अपन पिता] सँ कहने छलाह; [उमर बिन अल खट्ठाब] एक बेर अबू मूसा अल अस्यारी के लिखने छलाह, जे तीन फरसख के यात्रा के संग सूर्य के साफ उज्जर देखबा में अस्र के नमाज करू, आ रात के एक तिहाई के लेल अहाँ सब के बीच ईशा के नमाज करू, अगर अहाँ एकरा समाप्त करय चाहैत छी त आधा रात के लेल आ ओहि में स एक नै बनू जे लापरवाह छथि।

Hadith

Imam Malik : 8

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَزِيدَ بْنِ زِيَادٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَافِعٍ مَوْلَى أُمِّ سَلَمَةَ زَوْجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّهُ سَأَلَ أَبَا هُرَيْرَةَ عَنْ وَقْتِ الصَّلَاةِ فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ أَنَا أُخْبِرُكَ صَلِّ الظُّهْرَ إِذَا كَانَ ظِلُّكَ مِثْلَكَ وَالْعَصْرَ إِذَا كَانَ ظِلُّكَ مِثْلَيْكَ وَالْمَغْرِبَ إِذَا غَرَبَتْ الشَّمْسُ وَالْعِشَاءَ مَا بَيْنَكَ وَبَيْنَ ثُلُثِ اللَّيْلِ وَصَلِّ الصُّبْحَ بِغَبَشٍ يَعْنِي الْغَلَسَ

हमरा [यजीद बिन जियाद] स मालिक स [अब्दुल्लाह बिन रफी’] स पूर्व गुलाम उम्म सलामाह, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स कहने छलाह, ओ अबू हुरैरा स नमाज क समय क बारे मे पूछलथि। त [अबू हुरैरा] कहलनि; हम अहाँकेँ बुझा देब, - अर्थात्; - मध्याह्न के नमाज तखन करू जखन अहाँक छाया अहाँक ऊँचाई ठीक हो, आ अस्र नमाज तखन करू जखन अहाँक छाया दू गुना नमहर हो, मगरिब नमाज जखन सूर्य डूब जायत आ ईशा` नमाज अहाँ आ राति के एक तिहाई के बीच करू | आ राति के अंत में भोर के नमाज अन्हार रहैत करू।

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Imam Malik : 9

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَ كُنَّا نُصَلِّي الْعَصْرَ ثُمَّ يَخْرُجُ الْإِنْسَانُ إِلَى بَنِي عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ فَيَجِدُهُمْ يُصَلُّونَ الْعَصْرَ

हमरा ई मलिक सँ [इशक बिन अब्दुल्लाह बिन अबू तलहा] सँ [अनास बिन मलिक] सँ रिवायत भेल छल, ओ कहलनि; 'हम सभ अस्र नमाज क' रहल छलहुँ, तखन एकटा आदमी बानी 'अमर बिन औफ' लग निकलल, आ एखनो ओकरा सभ केँ अस्र नमाज करैत भेटल।'

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Imam Malik : 10

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَكُنَّا نُصَلِّي الْعَصْرَ ثُمَّ يَذْهَبُ الذَّاهِبُ إِلَى قُبَاءٍ فَيَأْتِيهِمْ وَالشَّمْسُ مُرْتَفِعَةٌ

हमरा ई मलिक सँ [इब्न सिहाब] सँ [अनस बिन मलिक] सँ रिवायत भेल छल, ओ कहलनि; 'हमरा लोकनि दुपहरक नमाज केलौं, तखन हमरा सभ मे सँ एक गोटे कुबा गेलहुँ`, आ जखन ओतय पहुँचलहुँ तखन रौद एखनो बेसी छल'।

Hadith

Imam Malik : 11

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ أَنَّهُ قَالَمَا أَدْرَكْتُ النَّاسَ إِلَّا وَهُمْ يُصَلُّونَ الظُّهْرَ بِعَشِيٍّ

हमरा ई मलिक सँ [रबीअह बिन अबू अब्दुररहमान] सँ [अल कासिम बिन मुहम्मद] सँ रिवायत भेल छल, ओ कहलनि; 'हमरा लोक नहि भेटल सिवाय एहि बातक जे ओ 'अस्य्य' के समय धुहर नमाज क' रहल छल ।

Hadith

Imam Malik : 12

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ عَمِّهِ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ قَالَكُنْتُ أَرَى طِنْفِسَةً لِعَقِيلِ بْنِ أَبِي طَالِبٍ يَوْمَ الْجُمُعَةِ تُطْرَحُ إِلَى جِدَارِ الْمَسْجِدِ الْغَرْبِيِّ فَإِذَا غَشِيَ الطِّنْفِسَةَ كُلَّهَا ظِلُّ الْجِدَارِ خَرَجَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَصَلَّى الْجُمُعَةَقَالَ مَالِكٌ ثُمَّ نَرْجِعُ بَعْدَ صَلَاةِ الْجُمُعَةِ فَنَقِيلُ قَائِلَةَ الضَّحَاءِ

हमरा मालिक सँ याह्या अपन मामा सँ - [अबू सुहैल बिन मलिक] - [अपन पिता] सँ कहने छलाह, ओ कहलनि; 'हम शुक्र दिन मस्जिद के पश्चिमी देवाल पर उकाइल बिन अबू तालिब के गलीचा देखलहुं, ताहि लेल जखन गलीचा के छाया पूरा गलीचा के ढकने छल, तखन [उमर बिन अल खट्ठाब] बाहर आबि जुमा के नमाज केलखिन्ह'. मालिक बजलाह; 'तखन जुमाक नमाजक बाद घर गेलहुँ आ दुपहर मे कैलुला सुति गेलहुँ' ।

Hadith

Imam Malik : 13

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ ابْنِ أَبِي سَلِيطٍ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَصَلَّى الْجُمُعَةَ بِالْمَدِينَةِ وَصَلَّى الْعَصْرَ بِمَلَلٍقَالَ مَالِك وَذَلِكَ لِلتَّهْجِيرِ وَسُرْعَةِ السَّيْرِ

हमरा [‘अमरू बिन याह्या अल मज़िनी] स [इब्न अबू सलीथ] स मालिक स रिवायत भेल अछि, जे [उस्मान बिन अफ्फान] मदीना मे जुमा क नमाज आ मालाल मे अस्र नमाज केलथि, यानी जुमा के नमाज के जल्दी करय लेल आ यात्रा में तेजी लाबय लेल’।

Hadith

Imam Malik : 14

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَدْرَكَ رَكْعَةً مِنْ الصَّلَاةِ فَقَدْ أَدْرَكَ الصَّلَاةَ

हमरा कहल गेल अछि जे मालिक सँ [इब्न शिहाब] सँ [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] सँ [अबू हुरैरा] सँ रसुलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ याह्या कहलनि: 'जेकरा एक रकाअत नमाज भेटैत छैक, तखन ओकरा ओ नमाज भेटि गेलैक'।

Hadith

Imam Malik : 15

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ كَانَ يَقُولُإِذَا فَاتَتْكَ الرَّكْعَةُ فَقَدْ فَاتَتْكَ السَّجْدَةُ

हमरा मलिक स [नफी'] स [अब्दुल्लाह बिन उमर बिन खथाब] स कहल गेल अछि कहल गेल अछि; 'रूकु छूटि गेल त' एक रक'आह छूटि गेल अछि'।

Hadith

Imam Malik : 16

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ كَانَ يَقُولُدُلُوكُ الشَّمْسِ مَيْلُهَا

याह्या हमरा [नाफी'] स मालिक स बतेलथि, [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहलनि; ''दुलुकुस स्याम्सी' - सूर्यक शिफ्ट - केर अर्थ ओकर फिसलन थिक' ।

Hadith

Imam Malik : 17

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ دَاوُدَ بْنِ الْحُصَيْنِ قَالَ أَخْبَرَنِي مُخْبِرٌ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ كَانَ يَقُولُدُلُوكُ الشَّمْسِ إِذَا فَاءَ الْفَيْءُ وَغَسَقُ اللَّيْلِ اجْتِمَاعُ اللَّيْلِ وَظُلْمَتُهُ

हमरा मलिक सं रिवायत भेल जे [दाउद बिन अल हुशैन] कहलनि जे कियो हमरा सूचित केने छथि जे [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] कहलनि; ''दुलुकुस स्यामसी - सूर्यक शिफ्टिंग - ' केर अर्थ तखन होइत छैक जखन छाया प्रकट भ' गेल हो । 'घसाकुल लैल - राति के अन्हार - ' एकटा एहन राति अछि जे मौन आ अन्हार भ' गेल अछि' ।

Hadith

Imam Malik : 18

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الَّذِي تَفُوتُهُ صَلَاةُ الْعَصْرِ كَأَنَّمَا وُتِرَ أَهْلَهُ وَمَالَهُ

हमरा कहलऽ गेलऽ छै कि मालिक स॑ [नफी’] स॑ [अब्दुल्लाह बिन उमर] रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ याह्या न॑ कहलकै कि जे व्यक्ति अस्र के नमाज स॑ चूक जाय छै, वू वू व्यक्ति के तरह छै जेकरऽ परिवार आरू संपत्ति के नुकसान होय जाय छै’ ।

Hadith

Imam Malik : 19

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ انْصَرَفَ مِنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ فَلَقِيَ رَجُلًا لَمْ يَشْهَدْ الْعَصْرَ فَقَالَ عُمَرُ مَا حَبَسَكَ عَنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ فَذَكَرَ لَهُ الرَّجُلُ عُذْرًا فَقَالَ عُمَرُ طَفَّفْتَقَالَ يَحْيَى قَالَ مَالِك وَيُقَالُ لِكُلِّ شَيْءٍ وَفَاءٌ وَتَطْفِيفٌ

हमरा मलिक स रिवायत भेल जे [याह्या बिन सईद] कहलनि जे, [उमर बिन अल-खत्ताब] के अस्र के नमाज समाप्त केलाक बाद ओ एकटा एहन आदमी लग आबि गेलाह जे अस्र के नमाज में शामिल नहि भेल छल, आ हुनका स पूछलखिन: 'असर के नमाज में शामिल होबय सं की रोकल गेल?' ओ आदमी ओकरा कारण कहलक, तेँ उमर कहलक: 'अहाँ अपन इनाम कम क' देलहुँ।' मालिक बजलाह: 'सब किछु पूर्ण आ अभाव अछि।'

Hadith

Imam Malik : 20

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُإِنَّ الْمُصَلِّيَ لَيُصَلِّي الصَّلَاةَ وَمَا فَاتَهُ وَقْتُهَا وَلَمَا فَاتَهُ مِنْ وَقْتِهَا أَعْظَمُ أَوْ أَفْضَلُ مِنْ أَهْلِهِ وَمَالِهِ

मलिक हमरा बतौलनि जे याह्या बिन सैद कहलनि: "नमाज करयवला अपन समय बर्बाद नहि करैत अछि। जँ ओकर समय नमाज सँ बर्बाद भ' जाइत छैक त' ओकर परिवार आ धन गमाब' सँ नीक।"