इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
Free Download / Download

Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 161

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ حَدَّثَنِي كَثِيرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَحِمَ اللَّهُ الْأَنْصَارَ وَأَبْنَاءَ الْأَنْصَارِ وَأَبْنَاءَ أَبْنَاءِ الْأَنْصَارِ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [खालिद बिन मखलाद] कहिन, हमसे [कत्सिर बिन अब्दुल्ला बिन अमरू बिन औफ] [अपने पिता] से [अपने दादा] से कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अंसार, अंसार के बच्चा अऊर अंसार के नाती-पोता पर अल्लाह रहम करै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 162

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلَّادٍ الْبَاهِلِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَضَمَّنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَيْهِ وَقَالَ اللَّهُمَّ عَلِّمْهُ الْحِكْمَةَ وَتَأْوِيلَ الْكِتَابِ

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] अऊर [अबू बकर बिन खल्लाद अल बहिली] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुल वहाब] कहिन, हमसे [खालिद अल हद्दा] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] कहिन हैं; 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने प्रार्थना करत समय मोका गले लगावा: 'हे अल्लाह, ओका किताब के बुद्धिमत्ता अऊर तविल सिखावा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 163

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ عَبِيدَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَوَذَكَرَ الْخَوَارِجَ فَقَالَ فِيهِمْ رَجُلٌ مُخْدَجُ الْيَدِ أَوْ مَوْدُونُ الْيَدِ أَوْ مَثْدُونُ الْيَدِ وَلَوْلَا أَنْ تَبْطَرُوا لَحَدَّثْتُكُمْ بِمَا وَعَدَ اللَّهُ الَّذِينَ يَقْتُلُونَهُمْ عَلَى لِسَانِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قُلْتُ أَنْتَ سَمِعْتَهُ مِنْ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِي وَرَبِّ الْكَعْبَةِ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू सैयबा] कहिन, हमसे [इस्माइल बिन उलेय्या] से [अय्यूब] से [मुहम्मद बिन सिरिन] से [अबिदा] से [अली बिन अबू तालिब] कहिन हैं उ खवारिज का जिक्र करत समय कहिन; 'इनके बीच एक आदमी है जेकर हाथ विकृत है, या ओकर हाथ पतला है, या ओकर हाथ छोट है, अगर तुम ओनके दुरुपयोग न करब, तौ मैं निश्चित रूप से तुमका कुछ बताउब जवन अल्लाह ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शब्दन के माध्यम से ओनके मारे वालेन से वादा किहिन है'। हम पूछेन; 'का तुमने ई मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है?' अली जवाब दिहिस; 'हाँ, काबा के मालिक रब्ब के द्वारा,' ऊ तीन बार दोहराइस।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 164

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْرُجُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ قَوْمٌ أَحْدَاثُ الْأَسْنَانِ سُفَهَاءُ الْأَحْلَامِ يَقُولُونَ مِنْ خَيْرِ قَوْلِ النَّاسِ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ تَرَاقِيَهُمْ يَمْرُقُونَ مِنْ الْإِسْلَامِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنْ الرَّمِيَّةِ فَمَنْ لَقِيَهُمْ فَلْيَقْتُلْهُمْ فَإِنَّ قَتْلَهُمْ أَجْرٌ عِنْدَ اللَّهِ لِمَنْ قَتَلَهُمْ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन जुराह] दुइनौ कहिन; हमका [अबू बकर बिन अय्यासी] से [अशिम] से [जिर्र] से [अब्दुल्ला बिन मसूद] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'समय के अंत में युवाओं का एक समूह उभर आएगा। ई बेवकूफ लोग रहे, मानवीय भाषण के सबसे अच्छा उपयोग कइके बोलत रहे, कुरान पढ़त रहे लेकिन ओनके गले से नाहीं गुजरत रहे, अऊर उ इस्लाम का धनुष से तीर के तरह छोड़ दिहिन। जे इनसे मिले, वइसे मारैं। काहे से कि ओनका मारय से अल्लाह के इनाम मिली'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 165

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ قَالَقُلْتُ لِأَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ هَلْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ فِي الْحَرُورِيَّةِ شَيْئًا فَقَالَ سَمِعْتُهُ يَذْكُرُ قَوْمًا يَتَعَبَّدُونَ يَحْقِرُ أَحَدُكُمْ صَلَاتَهُ مَعَ صَلَاتِهِمْ وَصَوْمَهُ مَعَ صَوْمِهِمْ يَمْرُقُونَ مِنْ الدِّينِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنْ الرَّمِيَّةِ أَخَذَ سَهْمَهُ فَنَظَرَ فِي نَصْلِهِ فَلَمْ يَرَ شَيْئًا فَنَظَرَ فِي رِصَافِهِ فَلَمْ يَرَ شَيْئًا فَنَظَرَ فِي قِدْحِهِ فَلَمْ يَرَ شَيْئًا فَنَظَرَ فِي الْقُذَذِ فَتَمَارَى هَلْ يَرَى شَيْئًا أَمْ لَا

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [यजीद बिन हारून] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] उ कहिन; 'मैंने [अबू सईद अल खुदरी] से पूछा; 'का आपने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का हरुरिय्याह के बारे मा सुना है?' उ जवाब दिहिस; 'मैंने उनका पूजा विशेषज्ञन के एक समूह का जिक्र करत सुना। आप ओनके प्रार्थना के तुलना मा आपन प्रार्थना अऊर उपवास का कम आंकब। धनुष से तीर के तरह ई धर्म से भागे। ऊ तीर लिहिस अऊर तीर के नोक का देखिस लेकिन कुछौ नाहीं देखिस, फिर किनारे का देखिस लेकिन कुछौ नाहीं देखिस, फिर छेद का देखिस लेकिन कुछौ नाहीं देखिस, फिर तीर के पंख का देखिस लेकिन अनिश्चित रहा कि ऊ कुछौ देखिस कि नाहीं।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 166

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ الْمُغِيرَةِ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلَالٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ بَعْدِي مِنْ أُمَّتِي أَوْ سَيَكُونُ بَعْدِي مِنْ أُمَّتِي قَوْمٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ حُلُوقَهُمْ يَمْرُقُونَ مِنْ الدِّينِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنْ الرَّمِيَّةِ ثُمَّ لَا يَعُودُونَ فِيهِ هُمْ شِرَارُ الْخَلْقِ وَالْخَلِيقَةِقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الصَّامِتِ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِرَافِعِ بْنِ عَمْرٍو أَخِي الْحَكَمِ بْنِ عَمْرٍو الْغِفَارِيِّ فَقَالَ وَأَنَا أَيْضًا قَدْ سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [अबू उसामा] से [सुलेमान बिन मुघिराह] से [हुमैद बिन हिलाल] से [अब्दुल्ला बिन ऐश शमित] से [अबू ज़ार] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में मेरे बाद मेरे लोग, या उन्होंने कहा, 'मेरे बाद मेरे लोगों में से कुरान पढ़ने वाले लोगों का एक समूह होगा लेकिन यह उनके गले से नहीं गुजरेगा, वे इस धर्म से उड़ जाएंगे जैसे तीर अपने धनुष से उड़ता है और वापस नहीं लौटेगा। उ प्राणी मा सबसे बुरा हैं'। [अब्दुल्ला बिन ऐश शमित] कहिन; हम ई हदीस का जिक्र अल हाकम बिन अमरू अल घिफारी के भाई [रफी' बिन अमरू] से किहेन, फिर उ कहिन; 'मैंने भी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 167

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيَقْرَأَنَّ الْقُرْآنَ نَاسٌ مِنْ أُمَّتِي يَمْرُقُونَ مِنْ الْإِسْلَامِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنْ الرَّمِيَّةِ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [सुवैद बिन सैद] दुइनौ कहिन; हमका [अबुल अह्वाश] से [सिमक] से [इकरिमा] से [इब्न अब्बास] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा मोर उम्मा से कुरान पढ़ै वाले लोगन का एक समूह दिखाई देई, उ इस्लाम से उड़ि जइहैं जइसे धनुष से तीर उड़त है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 168

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْجِعْرَانَةِ وَهُوَ يَقْسِمُ التِّبْرَ وَالْغَنَائِمَ وَهُوَ فِي حِجْرِ بِلَالٍ فَقَالَ رَجُلٌ اعْدِلْ يَا مُحَمَّدُ فَإِنَّكَ لَمْ تَعْدِلْ فَقَالَ وَيْلَكَ وَمَنْ يَعْدِلُ بَعْدِي إِذَا لَمْ أَعْدِلْ فَقَالَ عُمَرُ دَعْنِي يَا رَسُولَ اللَّهِ حَتَّى أَضْرِبَ عُنُقَ هَذَا الْمُنَافِقِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ هَذَا فِي أَصْحَابٍ أَوْ أُصَيْحَابٍ لَهُ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ تَرَاقِيَهُمْ يَمْرُقُونَ مِنْ الدِّينِ كَمَا يَمْرُقُ السَّهْمُ مِنْ الرَّمِيَّةِ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] कहिन, हमसे [सुफयान बिन उयैना] से [अबी जुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] कहिन हैं: जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिरानाह मा सोना अऊर युद्ध लूट का बँटवारा करत रहें, तौ उ बिलाल के बगल मा रहें। अचानक एक मनई कहिस; 'हे मुहम्मद, निष्पक्ष बनो, सचमुच तुम निष्पक्ष नाहीं हौ'। तो अल्लाह के रसूल ने जवाब दिया: 'हाय तुमको, अगर मैं न्याय नहीं करूँगा तो न्याय कौन कर सकता है?' उमर कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, ई पाखंडी के गर्दन काट देई'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में उनके पास दोस्त हैं, या उ कहिन; 'उनके कुछ दोस्त कुरान पढ़िन लेकिन उ उनके गले से नाहीं गुजरा, उइ ई धर्म का धनुष से चला तीर के तरह छोड़ दिहिन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 169

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ الْأَزْرَقُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ ابْنِ أَبِي أَوْفَى قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْخَوَارِجُ كِلَابُ النَّارِ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [अल अजराक] [अल अमासी] से [इब्न अबू औफा] कहिन; उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'खवारिज लोग नरक के कुत्ते हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 170

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَنْشَأُ نَشْءٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ تَرَاقِيَهُمْ كُلَّمَا خَرَجَ قَرْنٌ قُطِعَ قَالَ ابْنُ عُمَرَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ كُلَّمَا خَرَجَ قَرْنٌ قُطِعَ أَكْثَرَ مِنْ عِشْرِينَ مَرَّةً حَتَّى يَخْرُجَ فِي عِرَاضِهِمْ الدَّجَّالُ

हमका बतावा गा है [हिस्याम बिन अम्मार] कहिन, हमसे बतावा गा है [यह्या बिन हमजाह] कहिन, हमका बतावा गा है [अल औजाई] से [नफी'] से [इब्न उमर] रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम कहिन: 'एक पीढ़ी होई जवन कुरान पढ़त है' लेकिन हर बार ओनके माध्यम से नहीं पढ़त है, पीढ़ी निकलत है ई बाधित होई'। इब्न उमर कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'हर पीढ़ी बीस बार बाधित होई, जब तक कि उनके वंशज के बीच दज्जल उभर न आवै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 171

حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ أَبُو بِشْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْرُجُ قَوْمٌ فِي آخِرِ الزَّمَانِ أَوْ فِي هَذِهِ الْأُمَّةِ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ لَا يُجَاوِزُ تَرَاقِيَهُمْ أَوْ حُلُوقَهُمْ سِيمَاهُمْ التَّحْلِيقُ إِذَا رَأَيْتُمُوهُمْ أَوْ إِذَا لَقِيتُمُوهُمْ فَاقْتُلُوهُمْ

हमसे कहिन है [बकर बिन खलफ अबू बिसिर] कहिन, हमसे [अब्दुर्राजाक] [ममर] से [कतादाह] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अंतकाल में एक समूह प्रकट होगा, या उन्होंने कहा; 'ई उम्मत मा कुरान पढ़त हैं लेकिन गले से आगे नहीं जात हैं, इनकी विशेषता मुंडा सिर है, देखो या मिले तो मार डालो'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 172

حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي غَالِبٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ يَقُولُشَرُّ قَتْلَى قُتِلُوا تَحْتَ أَدِيمِ السَّمَاءِ وَخَيْرُ قَتِيلٍ مَنْ قَتَلُوا كِلَابُ أَهْلِ النَّارِ قَدْ كَانَ هَؤُلَاءِ مُسْلِمِينَ فَصَارُوا كُفَّارًا قُلْتُ يَا أَبَا أُمَامَةَ هَذَا شَيْءٌ تَقُولُهُ قَالَ بَلْ سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमका बतावा गा है [सहल बिन अबू सहल] कहिन, हमका [सुफयान बिन उयैना] द्वारा [अबू गालिब] से [अबू उमामा] बतावा गा है, उ कहिन: '-खवारिज हैं- आकाश के सतह के नीचे मारे गए लोगन मा से सबसे बुरा, अऊर कुत्तन के नरक द्वारा मारे गए लोगन मा से सबसे अच्छा। पहले तो मुसलमान थे फिर काफिर हो गये'। हम पूछेन; 'हे अबू उमामह, क्या ये तुम्हारे वचन हैं?' उ जवाब दिहिस; 'वास्तव मा, हम ई सीधे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनेन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 173

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي وَوَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا خَالِي يَعْلَى وَوَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ قَالُوا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَظَرَ إِلَى الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ قَالَ إِنَّكُمْ سَتَرَوْنَ رَبَّكُمْ كَمَا تَرَوْنَ هَذَا الْقَمَرَ لَا تَضَامُّونَ فِي رُؤْيَتِهِ فَإِنْ اسْتَطَعْتُمْ أَنْ لَا تُغْلَبُوا عَلَى صَلَاةٍ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا فَافْعَلُوا ثُمَّ قَرَأَ{ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَقَبْلَ الْغُرُوبِ }

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] कहिन, हमसे कहिन है [मेरे पिता] अऊर [वाकी]। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमका [अली बिन मुहम्मद] से हमार चाचा [या'ला] अऊर [वाकी'] अऊर [अबू मुआविया] से बतावा गा है कि उइ कहिन; हमका [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [जरीर बिन अब्दुल्ला] से कहिन है; 'जब हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठे रहेन, तौ उ एक पूरी रात मा चाँद देखिन, फिर कहिन: 'वास्तव मा, तुम आपन रब्ब का वइसने देखब जइसे तुम ई चाँद का देखत हौ। जब आप ईका देखब त भीड़ नाहीं होई। अगर आप भोर से पहिले अऊर सूर्यास्त से पहिले प्रार्थना करै से चूक न पावै में सक्षम हैं, तौ करौ'। फिर उ पढ़िन: 'अऊर सूरज उगै अऊर डूबै से पहिले अपने रब्ब के तारीफ कइके खुद का महिमामंडन करा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 174

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عِيسَى الرَّمْلِيُّ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَضَامُّونَ فِي رُؤْيَةِ الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ قَالُوا لَا قَالَ فَكَذَلِكَ لَا تَضَامُّونَ فِي رُؤْيَةِ رَبِّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] कहिन, हमसे [यह्या बिन ईसा अर रामली] से [अल अमासी] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का तुम पूर्णिमा के रात मा चाँद देखत समय झटका देत हौ?' उइ जवाब दिहिन; 'नै'। फिर उ कहिन: 'ऐसन, जब तुम कृयामत के दिन आपन रब्ब देखब त तुम एक साथ भीड़ नाहीं करब'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 175

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ السَّمَّانِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنَرَى رَبَّنَا قَالَ تَضَامُّونَ فِي رُؤْيَةِ الشَّمْسِ فِي الظَّهِيرَةِ فِي غَيْرِ سَحَابٍ قُلْنَا لَا قَالَ فَتَضَارُّونَ فِي رُؤْيَةِ الْقَمَرِ لَيْلَةَ الْبَدْرِ فِي غَيْرِ سَحَابٍ قَالُوا لَا قَالَ إِنَّكُمْ لَا تَضَارُّونَ فِي رُؤْيَتِهِ إِلَّا كَمَا تَضَارُّونَ فِي رُؤْيَتِهِمَا

हमसे [मुहम्मद बिन 'अला` अल हमदानी] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन इदरीस] [अल अमासी] से [अबू सालिह अस सम्मान] से [अबू सैद] कहिन; हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, का हम आपन रब्ब देख सकित है?' उ जवाब दिहिस: 'का तुम जब बादलन के बिना साफ दिन मा सूरज देखत हौ तौ झटका देत हौ?' हम जवाब दिहेन; 'नहीं,' उ कहिन: 'का तुम पूरी रात मा चाँद का देखत समय एक दूसरे का झटका देत हौ?' उइ जवाब दिहिन; 'नहीं,' अल्लाह के रसूल कहिन: 'वास्तव मा, जब तुम ओका देखब तौ तुम एक साथ दबा नाहीं जइहौ, सिवाय यहिके कि जब तुम दुइनौ का देखब तौ तुमरी हालत होई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 176

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ عَنْ وَكِيعِ بْنِ حُدُسٍ عَنْ عَمِّهِ أَبِي رَزِينٍ قَالَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنَرَى اللَّهَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَا آيَةُ ذَلِكَ فِي خَلْقِهِ قَالَ يَا أَبَا رَزِينٍ أَلَيْسَ كُلُّكُمْ يَرَى الْقَمَرَ مُخْلِيًا بِهِ قَالَ قُلْتُ بَلَى قَالَ فَاللَّهُ أَعْظَمُ وَذَلِكَ آيَةٌ فِي خَلْقِهِ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [यजीद बिन हारून] कहिन, हमसे [हम्मद बिन सलामा] [या'ला बिन 'अथो`] से [वाकी' बिन हुदुस] से अपने चाचा [अबू रज़िन] से कहिन; हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, क्या हम कामत के दिन अल्लाह का दर्शन करब? फिर ओकरे प्राणी मा का चिन्ह पावा जात हैं?' उ जवाब दिहिन: 'हे अबू रज़िन, का तुम सब चाँद का साफ नाहीं देख सकत हौ?' हम जवाब दिहेन; 'हाँ,' उ कहिन: 'तब अल्लाह बड़ा है अऊर ई उनके प्राणी के लिए संकेत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 177

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ عَنْ وَكِيعِ بْنِ حُدُسٍ عَنْ عَمِّهِ أَبِي رَزِينٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ضَحِكَ رَبُّنَا مِنْ قُنُوطِ عِبَادِهِ وَقُرْبِ غِيَرِهِ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَوَ يَضْحَكُ الرَّبُّ قَالَ نَعَمْ قُلْتُ لَنْ نَعْدَمَ مِنْ رَبٍّ يَضْحَكُ خَيْرًا

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [यजीद बिन हारून] कहिन, हमसे [हम्मद बिन सलामा] [या'ला बिन 'अथो`] से [वाकी' बिन हुदुस] से अपने चाचा [अबू रज़िन] से कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'हमरे रब्ब अपने सेवकन के पूजा अऊर ओनके ईर्ष्या के हद पर हँसत हैं'। अबू रजिन कहिन; हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, का रब्ब हँस रहा है?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ, ई सही है,' हम कहेन: 'हमेशा के लिए हमका अच्छाई मिली अगर हमार रब्ब हँसत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 178

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ يَعْلَى بْنِ عَطَاءٍ عَنْ وَكِيعِ بْنِ حُدُسٍ عَنْ عَمِّهِ أَبِي رَزِينٍ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيْنَ كَانَ رَبُّنَا قَبْلَ أَنْ يَخْلُقَ خَلْقَهُ قَالَ كَانَ فِي عَمَاءٍ مَا تَحْتَهُ هَوَاءٌ وَمَا فَوْقَهُ هَوَاءٌ وَمَا ثَمَّ خَلْقٌ عَرْشُهُ عَلَى الْمَاءِ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [मुहम्मद बिन अश शब्बा] दुइनौ कहिन; हमका [यजीद बिन हारून] बताइस है, हमका [हम्मद बिन सलामा] से [या'ला बिन 'अथो`] से [वाकी' बिन हुदुस] से अपने चाचा [अबू रज़िन] से कहिस है, उ कहिन; हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, आपन प्राणी बनावै से पहिले हमार रब्ब कहाँ रहा?' उ जवाब दिहिन: 'वह एक वैक्यूम मा है, नीचे अऊर ऊपर हवा नाहीं है, अऊर न प्राणी हैं। यहिके बाद उ 'पानी पर आपन सिंहासन' बनाइन।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 179

حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ الْمَازِنِيِّ قَالَبَيْنَمَا نَحْنُ مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ وَهُوَ يَطُوفُ بِالْبَيْتِ إِذْ عَرَضَ لَهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا ابْنَ عُمَرَ كَيْفَ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ فِي النَّجْوَى قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ يُدْنَى الْمُؤْمِنُ مِنْ رَبِّهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حَتَّى يَضَعَ عَلَيْهِ كَنَفَهُ ثُمَّ يُقَرِّرُهُ بِذُنُوبِهِ فَيَقُولُ هَلْ تَعْرِفُ فَيَقُولُ يَا رَبِّ أَعْرِفُ حَتَّى إِذَا بَلَغَ مِنْهُ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَبْلُغَ قَالَ إِنِّي سَتَرْتُهَا عَلَيْكَ فِي الدُّنْيَا وَأَنَا أَغْفِرُهَا لَكَ الْيَوْمَ قَالَ ثُمَّ يُعْطَى صَحِيفَةَ حَسَنَاتِهِ أَوْ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ قَالَ وَأَمَّا الْكَافِرُ أَوْ الْمُنَافِقُ فَيُنَادَى عَلَى رُءُوسِ الْأَشْهَادِقَالَ خَالِدٌ فِي الْأَشْهَادِ شَيْءٌ مِنْ انْقِطَاعٍ{ هَؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَى رَبِّهِمْ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ }

हमसे कहिन [हुम्मीद बिन मस'अदाह] कहिन, हमसे कहिन [खालिद बिन अल हरिथ] कहिन, हमसे कहिन [कतादाह] से [शफवान बिन मुहरिज़ अल मजिनी] से कहिन; 'जब हम [अब्दुल्ला बिन उमर] के साथे काबा मा तवाफ करत रहेन, त अचानक एक आदमी उनके पास आवा अऊर पूछिस; 'हे इब्न उमर, जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने मुनाजात का जिक्र किया तो तुमने क्या सुना?' उ जवाब दिहिन: 'मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'कामत के दिन मुमिन का अपने रब्ब के करीब लाया जाई जब तक कि ओकर छाया ओकरे ऊपर न रखी जाय, फिर उ आपन पापन कबूल करि। तब अल्लाह ने कहा: 'का तुम जानत हौ? ' उ जवाब दिहिस; 'ओ रब्ब, हाँ हम जानित है'। तौ जब अल्लाह के इच्छा के अनुसार ओकर पाप ढेर होइ गें तौ अल्लाह कहिन: 'मैं तोहरे खातिर दुनिया मा उ पाप ढक दिहेंव, तौ आज ओनका माफ करब'। उ कहिन: 'तब ओका ओकरे अच्छाई के रिकॉर्ड दीन गा, या ओकरे दाहिने हाथ से ओकरे किताब दीन गै'। उ कहिन: 'रही बात काफिर या पाखंडी के तौ ओका जनता के सामने बोलावा जात है'। खालिद कहिन; 'जनता के सामने कुछ डिस्कनेक्ट है; 'ई लोग हैं जे अपने प्रभु के खिलाफ झूठ बोले हैं। याद रखौ, अल्लाह का अभिशाप गलत काम करै वालेन पर पड़त है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 180

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ الْعَبَّادَانِيُّ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ الرَّقَاشِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَا أَهْلُ الْجَنَّةِ فِي نَعِيمِهِمْ إِذْ سَطَعَ لَهُمْ نُورٌ فَرَفَعُوا رُءُوسَهُمْ فَإِذَا الرَّبُّ قَدْ أَشْرَفَ عَلَيْهِمْ مِنْ فَوْقِهِمْ فَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ يَا أَهْلَ الْجَنَّةِ قَالَ وَذَلِكَ قَوْلُ اللَّهِ{ سَلَامٌ قَوْلًا مِنْ رَبٍّ رَحِيمٍ }قَالَ فَيَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَيَنْظُرُونَ إِلَيْهِ فَلَا يَلْتَفِتُونَ إِلَى شَيْءٍ مِنْ النَّعِيمِ مَا دَامُوا يَنْظُرُونَ إِلَيْهِ حَتَّى يَحْتَجِبَ عَنْهُمْ وَيَبْقَى نُورُهُ وَبَرَكَتُهُ عَلَيْهِمْ فِي دِيَارِهِمْ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल मलिक बिन अबू स्यावरीब] कहिन, हमसे कहिन [अबू अशिम अल अब्बादानी] कहिन, हमसे [अल फदल अर रक्कासी] [मुहम्मद अल मुनकादिर] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जब स्वर्ग के लोग अपने आनंद में रहे, तो अचानक एक रोशनी किरण चमकी, उन्होंने अपने सिर उठाए, पता चला कि उनके ऊपर उनका रब्ब प्रकट हुआ है, फिर कहिन: 'समृद्धि आप पर हो, हे स्वर्ग के लोग'। उ कहिन: 'यह अल्लाह का वचन है; परम दयालु प्रभु से बधाई के रूप मा अभिवादन। उ फिर कहिन: 'अल्लाह ओनका देखिन अऊर उ ओनका देखिन, उ लोग मुँह नाहीं फेरिन काहे से कि ओनका देखत समय ओनका अच्छा लागत रहा, ई तब तक जारी रहा जब तक कि अल्लाह ओनसे गायब नाहीं होइ गें। जबकि उनकर रोशनी अऊर आशीर्वाद अबहियों ओनके ऊपर अऊर ओनके घरन मा बना अहै'।