Imam Ibnu Majah : 141
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي رَاشِدٍ أَنَّ يَعْلَى بْنَ مُرَّةَ حَدَّثَهُمْأَنَّهُمْ خَرَجُوا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى طَعَامٍ دُعُوا لَهُ فَإِذَا حُسَيْنٌ يَلْعَبُ فِي السِّكَّةِ قَالَ فَتَقَدَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَامَ الْقَوْمِ وَبَسَطَ يَدَيْهِ فَجَعَلَ الْغُلَامُ يَفِرُّ هَا هُنَا وَهَا هُنَا وَيُضَاحِكُهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى أَخَذَهُ فَجَعَلَ إِحْدَى يَدَيْهِ تَحْتَ ذَقْنِهِ وَالْأُخْرَى فِي فَأْسِ رَأْسِهِ فَقَبَّلَهُ وَقَالَ حُسَيْنٌ مِنِّي وَأَنَا مِنْ حُسَيْنٍ أَحَبَّ اللَّهُ مَنْ أَحَبَّ حُسَيْنًا حُسَيْنٌ سِبْطٌ مِنْ الْأَسْبَاطِحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ مِثْلَهُ
हमसे [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब] बतावा गा है, हमका [याह्या बिन सुलेम] से [अब्दुल्ला बिन उथमान बिन खुतसैम] से [सैद बिन अबू रसीद] से बतावा गा है कि [या'ला बिन मुर्रा] ने ओनसे कहा कि उ लोग अल्लाह के रसूल सल्लाहुअलाह वल्लम के साथे भोज मा उपस्थित होवे के लिए बाहर आए रहे। अचानक हुसैन गली मा खेलत रहे। या'ला कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब अपने हाथ फैलाते हुए अपने साथियों से आगे बढ़े। फिर हुसैन इधर-उधर दौड़त रहे अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनके ऊपर हँसत रहे, जब तक कि आखिर मा उ ओनका उठा लिहिन अऊर आपन एक हाथ ओनके दाढ़ी के नीचे अऊर दूसर ओनके सिर के ऊपर रखिन। फिर चुम्मा लिहिन अऊर कहिन: 'हुसैन हमार हिस्सा हैं अऊर हम ओनके हिस्सा हई। अल्लाह ओनसे प्यार करिहैं जे हुसैन से प्यार करत हैं। कई उम्मत के हुसैन उम्मत'। हमसे कहिन है [अली बिन मुहम्मद] कहिन, ऊपर के हदीस के तरह [सुफयान] से [वाकी'] बताइन हैं।
Imam Ibnu Majah : 142
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلَّالُ وَعَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو غَسَّانَ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ نَصْرٍ عَنْ السُّدِّيِّ عَنْ صُبَيْحٍ مَوْلَى أُمِّ سَلَمَةَ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَعَلِيٍّ وَفَاطِمَةَ وَالْحَسَنِ وَالْحُسَيْنِ أَنَا سِلْمٌ لِمَنْ سَالَمْتُمْ وَحَرْبٌ لِمَنْ حَارَبْتُمْ
हमका बतावा गा है कि [अल हसन बिन अली अल-खल्लाल] अऊर [अली इब्नुल मुंडजिर] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अबू गस्सान] कहिन, हमसे [असबत बिन नशर] से [अस सुद्दी] से [शुबैह] उम्म सलामा के पूर्व गुलाम [जैद बिन अरकाम] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अली, फातिमा, हसन अऊर हुसैन से कहा: 'मैं ओनसे मेल मिलाप करब जे तोहरे साथ मेल मिलाप करत हैं, अऊर जेनसे तुम लड़त हौ ओनसे लड़ब'।
Imam Ibnu Majah : 143
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ هَانِئِ بْنِ هَانِئٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَكُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاسْتَأْذَنَ عَمَّارُ بْنُ يَاسِرٍ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ائْذَنُوا لَهُ مَرْحَبًا بِالطَّيِّبِ الْمُطَيَّبِ
हमका बतावा गा है कि [उथमान बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे [वाकी'] कहिन, हमसे [सुफयान] से [अबू इशाक] से [हानी` बिन हानी`] से [अली बिन अबू तालिब] कहिन; 'जब मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 'अम्मर बिन यासिर के बगल मा बैठा -बैठक मा शामिल होवे के लिए-, अल्लाह के रसूल शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'उनका अनुमति द, उन लोगन का स्वागत है जे अच्छा हैं अऊर अच्छा व्यवहार करत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 144
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا عَثَّامُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ هَانِئِ بْنِ هَانِيءٍ قَالَدَخَلَ عَمَّارٌ عَلَى عَلِيٍّ فَقَالَ مَرْحَبًا بِالطَّيِّبِ الْمُطَيَّبِ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مُلِئَ عَمَّارٌ إِيمَانًا إِلَى مُشَاشِهِ
हमसे कहिन [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहिन, हमसे कहिन ['अत्स्तसम बिन अली] से [अल अमासी] से [अबू इशाक] से [हानी` बिन हानी`] उ कहिन; "अम्मर अली से मिले गें। त [अली] कहिन: 'एक अच्छा मनई का स्वागत है जे अच्छा व्यवहार करत है। हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने हई: 'वास्तव मा, 'अम्मर अपनी आत्मा के गहराई तक विश्वास से भरा अहै'।
Imam Ibnu Majah : 145
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا جَمِيعًا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ سِيَاهٍ عَنْ حَبيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَمَّارٌ مَا عُرِضَ عَلَيْهِ أَمْرَانِ إِلَّا اخْتَارَ الْأَرْشَدَ مِنْهُمَا
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [उबैदुल्लाह बिन मूसा] कहिन। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर [अमरू बिन अब्दुल्ला] दुइनौ कहिन; हमका [वाकी'] से [अब्दुल अजीज बिन सियाह] से [हबीब बिन अबी थाबित] से ['अथो` बिन यासर] से [ऐसियाह] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अम्मर के लिए दुई चीजन का प्रस्ताव नाहीं है लेकिन उ सबसे सीधा चुनिहैं'।
Imam Ibnu Majah : 146
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي رَبِيعَةَ الْإِيَادِيِّ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ أَمَرَنِي بِحُبِّ أَرْبَعَةٍ وَأَخْبَرَنِي أَنَّهُ يُحِبُّهُمْ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَنْ هُمْ قَالَ عَلِيٌّ مِنْهُمْ يَقُولُ ذَلِكَ ثَلَاثًا وَأَبُو ذَرٍّ وَسَلْمَانُ وَالْمِقْدَادُ
हमका बतावा गा है कि [इस्माइल बिन मूसा] अऊर [सुवैद बिन सैद] दुइनौ कहिन; हमका [शरीक] से [अबू रबिया अल इयादी] से [इब्न बुरैदा] से [अपने पिता] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह ने मोका चार लोगन से प्यार करै का हुकुम दिहिन अऊर मोका सूचित किहिन कि उ भी ओनसे प्यार करत हैं'। उनसे पूछा गा रहा; 'हे अल्लाह के रसूल, ई कौन हैं?' उ जवाब दिहिन: 'अली ओनमा से एक हैं - उ तीन बार ई कहिन - फिर अबू ज़ार, सलमान अऊर मिकदाद'।
Imam Ibnu Majah : 147
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الدَّارِمِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ بْنُ قُدَامَةَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ أَبِي النَّجُودِ عَنْ زِرِّ بْنِ حُبَيْشٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَكَانَ أَوَّلَ مَنْ أَظْهَرَ إِسْلَامَهُ سَبْعَةٌ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ وَعَمَّارٌ وَأُمُّهُ سُمَيَّةُ وَصُهَيْبٌ وَبِلَالٌ وَالْمِقْدَادُ فَأَمَّا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَنَعَهُ اللَّهُ بِعَمِّهِ أَبِي طَالِبٍ وَأَمَّا أَبُو بَكْرٍ فَمَنَعَهُ اللَّهُ بِقَوْمِهِ وَأَمَّا سَائِرُهُمْ فَأَخَذَهُمْ الْمُشْرِكُونَ وَأَلْبَسُوهُمْ أَدْرَاعَ الْحَدِيدِ وَصَهَرُوهُمْ فِي الشَّمْسِ فَمَا مِنْهُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلَّا وَقَدْ وَاتَاهُمْ عَلَى مَا أَرَادُوا إِلَّا بِلَالًا فَإِنَّهُ هَانَتْ عَلَيْهِ نَفْسُهُ فِي اللَّهِ وَهَانَ عَلَى قَوْمِهِ فَأَخَذُوهُ فَأَعْطَوْهُ الْوِلْدَانَ فَجَعَلُوا يَطُوفُونَ بِهِ فِي شِعَابِ مَكَّةَ وَهُوَ يَقُولُ أَحَدٌ أَحَدٌ
हमसे कहिन [अहमद बिन सईद अद दरमी] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन अबू बुकैर] कहिन, हमसे [जाइदा बिन कुदामा] से [अशिम बिन अबू नाजुद] से [जिर्र बिन हुबैसी] से [अब्दुल्ला बिन मसूद] कहिन; 'अपना इस्लाम देखावै वाले सबसे पहिले सात मनई रहे; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अबू बकर, अम्मर अऊर उनकी महतारी सुमय्या, शुहैब, बिलाल अऊर अल मिकदाद। रही बात रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तौ अल्लाह उनके चाचा के माध्यम से उनकर रक्षा किहिन। अबू बकर अल्लाह अपने लोगन के माध्यम से ओनके रक्षा किहिन। जबकि दूसरन का, मुशर्कियन ओनका यातना दइके लोहा के कपड़ा पहिराये रहे अऊर तपती धूप के नीचे रख दिहिन रहे। ओनमा से एकौ नाहीं लेकिन उ जवन चाहत रहें ओका पूरा किहिन हैं। बिलाल का छोड़ के अल्लाह के कारन अपने लोगन के द्वारा अपमानित कीन गा रहा, उ लोग ओका लइके लरिकन का दइ दिहिन। यहिसे उ लोग ओका मकाह के सड़कन पर घूमत रहे, जब उ कहत रहा; 'इतवार इतवार'।
Imam Ibnu Majah : 148
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَدْ أُوذِيتُ فِي اللَّهِ وَمَا يُؤْذَى أَحَدٌ وَلَقَدْ أُخِفْتُ فِي اللَّهِ وَمَا يُخَافُ أَحَدٌ وَلَقَدْ أَتَتْ عَلَيَّ ثَالِثَةٌ وَمَا لِي وَلِبِلَالٍ طَعَامٌ يَأْكُلُهُ ذُو كَبِدٍ إِلَّا مَا وَارَى إِبِطُ بِلَالٍ
हमका बतावा गा है [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमका [वाकी'] से [हम्मद बिन सलामा] से [थाबित] से [अनस बिन मलिक] बतावा गा है रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'मैं अल्लाह के राह मा चोट खाए हौं जब केहू का चोट नाहीं आई है। मैं अल्लाह के राह मा डर से फंस गय हौं जब केहू अउर डर महसूस नाहीं करत है। अऊर मोर पास अइसन दिन आवा जब बिलाल अऊर हमरे पास अइसन खाना नाहीं रहा जेका बिलाल के बगल का ढँकय वाला कुछौ जिंदा चीज खा सकै।
Imam Ibnu Majah : 149
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ حَمْزَةَ عَنْ سَالِمٍأَنَّ شَاعِرًا مَدَحَ بِلَالَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ فَقَالَ بِلَالُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ خَيْرُ بِلَالٍ فَقَالَ ابْنُ عُمَرَ كَذَبْتَ لَا بَلْ بِلَالُ رَسُولِ اللَّهِ خَيْرُ بِلَالٍ
हमका [अली बिन मुहम्मद] बतावा गा है, हमका [अबू उसामा] [उमर बिन हमजा] से [सलीम] से बतावा गा है कि एक कवि गुनगुनावत बिलाल बिन अब्दुल्ला के तारीफ किहिन; 'बिलाल बिन अब्दुल्ला सबसे अच्छा बिलाल है'। त [इब्न उमर] चिल्लाए, 'तुम झूठ बोलत हौ, अइसन नाहीं है! हालांकि बिलाल रसूलुल्लाह सबसे अच्छा बिलाल है'।
Imam Ibnu Majah : 150
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي لَيْلَى الْكِنْدِيِّ قَالَجَاءَ خَبَّابٌ إِلَى عُمَرَ فَقَالَ ادْنُ فَمَا أَحَدٌ أَحَقَّ بِهَذَا الْمَجْلِسِ مِنْكَ إِلَّا عَمَّارٌ فَجَعَلَ خَبَّابٌ يُرِيهِ آثَارًا بِظَهْرِهِ مِمَّا عَذَّبَهُ الْمُشْرِكُونَ
हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर [अमरू बिन अब्दुल्ला] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिस, हमसे [सुफयान] से [अबू इशाक] से [अबू लैला अल किंदी] कहिस है; [खब्बाब] उमर के दर्शन आए, तब उमर ने कहा; 'नजदीक आवा, 'अम्मर के अलावा आपसे ई रस्म का अधिकार केहू का नाहीं है।' फिर खब्बाब अपनी पीठ पर मुशरकन द्वारा यातना के निशान देखाइस।
Imam Ibnu Majah : 151
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَرْحَمُ أُمَّتِي بِأُمَّتِي أَبُو بَكْرٍ وَأَشَدُّهُمْ فِي دِينِ اللَّهِ عُمَرُ وَأَصْدَقُهُمْ حَيَاءً عُثْمَانُ وَأَقْضَاهُمْ عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ وَأَقْرَؤُهُمْ لِكِتَابِ اللَّهِ أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ وَأَعْلَمُهُمْ بِالْحَلَالِ وَالْحَرَامِ مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ وَأَفْرَضُهُمْ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ أَلَا وَإِنَّ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَمِينًا وَأَمِينُ هَذِهِ الْأُمَّةِ أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ الْجَرَّاحِحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ مِثْلَهُ عِنْدَ ابْنِ قُدَامَةَ غَيْرَ أَنَّهُ يَقُولُ فِي حَقِّ زَيْدٍ وَأَعْلَمُهُمْ بِالْفَرَائِضِ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल वहाब बिन अब्दुल माजिद] कहिन, हमसे [खालिद अल हज़्ज़्ज़ा`] से [अबू किलाबा] से [अनस बिन मलिक] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरी उम्मत जो मेरी उम्मत के प्रति सबसे दयालु है वो है अबू बकर, इनमें से सबसे दृढ़ है उमर है, अपने लाज में सबसे सही है उथमान है, अपने फैसले में सबसे सही है अली बिन अबू तालिब है, जिसके पास अल्लाह कि किताब का सबसे अच्छा पढ़ा है उ उबै काइब है और हलाल के बारे में सबसे ज्यादा जानत है' मायने रखत है मुअदज बिन जबल, अऊर उ जे ज्ञान का सबसे अच्छा समझत है। फराइदल जैद बिन त्साबित है। जान लीजिए कि हर उम्मत का एक भरोसेमंद व्यक्ति होता है, और इस उम्मत का भरोसेमंद व्यक्ति अबू उबैदा बिन अल जर्राह है'। हमसे कहिन है [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] से [सुफियान] से [खालिद अल हज़्ज़्ज़ा`] से [अबू किलाबाह] से कहिन हैं जइसे कि ऊपर के हदीस है। बस इब्न कुदामा ने कहा; 'कि जैद उहै है जे फराइदल के विज्ञान का सबसे अच्छा जानत है'।
Imam Ibnu Majah : 152
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ أَبِي حَرْبِ بْنِ أَبِي الْأَسْوَدِ الدِّيْلِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا أَقَلَّتْ الْغَبْرَاءُ وَلَا أَظَلَّتْ الْخَضْرَاءُ مِنْ رَجُلٍ أَصْدَقَ لَهْجَةً مِنْ أَبِي ذَرٍّ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन नुमीर] कहिन, हमसे [अल अमासी] [उथमान बिन नुमीर] से [अबू हरब बिन अबुल असवाद अद दिली] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'धरती पे कदम न रखी जाएगी और न आसमान आश्रय देगा जिनकी बोली अबू धरर से ज्यादा सही है'।
Imam Ibnu Majah : 153
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَأُهْدِيَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَرَقَةٌ مِنْ حَرِيرٍ فَجَعَلَ الْقَوْمُ يَتَدَاوَلُونَهَا بَيْنَهُمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَعْجَبُونَ مِنْ هَذَا فَقَالُوا لَهُ نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَمَنَادِيلُ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ فِي الْجَنَّةِ خَيْرٌ مِنْ هَذَا
हमसे कहिन [हन्नाद बिन सर्री] कहिन, हमसे [अबुल अह्वाश] [अबू इशाक] से [बर्रा` बिन अजीब] कहिन; रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को रेशम के कपड़े का एक टुकड़ा उपहार दिया गया। यहिसे दोस्त एक दूसरे का देखै खातिर दौड़ लगाइन। रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: 'क्या आप उनके प्रति आकर्षित महसूस करत हैं?' उइ जवाब दिहिन; 'सही बात है हे अल्लाह के रसूल! उ कहिन: 'मेरे आत्मा के कसम जवन उनके हाथन मा है, स्वर्ग मा सद बिन मुआज़ का गमछा यहिसे अच्छा है'।
Imam Ibnu Majah : 154
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اهْتَزَّ عَرْشُ الرَّحْمَنِ عَزَّ وَجَلَّ لِمَوْتِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ
हमसे [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सुफयान] से [जाबिर] कहिन; रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: ''अर्सी अर रहमान 'अज्जा वजल्ला सद बिन मुआज़ के निधन से काँप गए'।
Imam Ibnu Majah : 155
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْبَجَلِيِّ قَالَمَا حَجَبَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُنْذُ أَسْلَمْتُ وَلَا رَآنِي إِلَّا تَبَسَّمَ فِي وَجْهِي وَلَقَدْ شَكَوْتُ إِلَيْهِ أَنِّي لَا أَثْبُتُ عَلَى الْخَيْلِ فَضَرَبَ بِيَدِهِ فِي صَدْرِي فَقَالَ اللَّهُمَّ ثَبِّتْهُ وَاجْعَلْهُ هَادِيًا مَهْدِيًّا
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमीर] कहिन, हमसे [अब्दुल्लाह बिन इदरीस] से [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [जरीर बिन अब्दुल्लाह अल बजाली] कहिन हैं; 'रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब से मैं इस्लाम अपनाया है तब से कभी नहीं रोका है और जब तक मुस्कुराए तब तक उन्होंने मुझे नहीं देखा है। हम उनसे शिकायत किहेन कि हम घोड़ा पर स्थिर नाहीं हई, यहिसे उ प्रार्थना करत समय आपन हाथ से हमार छाती मारिस: 'हे अल्लाह, ओका मजबूत करा अऊर ओका मार्गदर्शक अऊर मार्गदर्शक बनावा।'
Imam Ibnu Majah : 156
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَبَايَةَ بْنِ رِفَاعَةَ عَنْ جَدِّهِ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ قَالَجَاءَ جِبْرِيلُ أَوْ مَلَكٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَا تَعُدُّونَ مَنْ شَهِدَ بَدْرًا فِيكُمْ قَالُوا خِيَارَنَا قَالَ كَذَلِكَ هُمْ عِنْدَنَا خِيَارُ الْمَلَائِكَةِ
हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर [अबू कुरैब] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिस, हमसे कहिस है [सुफयान] से [यह्या बिन सैद] से ['अबयाह बिन रिफा'ह] से अपने दादा [रफी' बिन खदीज] ऊ कहिस; 'जिब्रील या एक दूत पैगम्बर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा अऊर कहिस: 'बदर मा मरे लोगन का आप कैसे स्थिति देत हई?' उइ जवाब दिहिन: 'वे हमरे बीच से चुने गए लोग हैं'। उ कहिन: 'उनके जइसन हमरे बीच मौजूद लोग भी चुने गए स्वर्गदूत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 157
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ جَمِيعًا عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَسُبُّوا أَصْحَابِي فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَوْ أَنَّ أَحَدَكُمْ أَنْفَقَ مِثْلَ أُحُدٍ ذَهَبًا مَا أَدْرَكَ مُدَّ أَحَدِهِمْ وَلَا نَصِيفَهُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] कहिन, हमसे कहिन [जरीर]। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी']। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे [अबू कुरैब] बताय के, उ कहिन; हमका [अबू मुआविया] बताइस है, [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू सईद अल खुदरी] से सब कुछ उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे दोस्तन के आलोचना न करौ। ओकरे हाथ मा मोर आत्मा है, अगर तुममें से केहू उहुद पर्वत के आकार के सोना से दान करत है, तौ उ ओनमा से एक के एक कीचड़ या ओकरे आधे से मेल नाहीं खा पावत है'।
Imam Ibnu Majah : 158
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ نُسَيْرِ بْنِ ذُعْلُوقٍ قَالَ كَانَ ابْنُ عُمَرَ يَقُولُلَا تَسُبُّوا أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمُقَامُ أَحَدِهِمْ سَاعَةً خَيْرٌ مِنْ عَمَلِ أَحَدِكُمْ عُمْرَهُ
हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर [अमरू बिन अब्दुल्ला] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिन, हमसे [सुफयान] बताइन है [नुसैर बिन ज़ु'लुक] से उ कहिन; [इब्न उमर] एक बार कहिन; 'मुहम्मद सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के दोस्तन के आलोचना न करौ, ओनमा से एक के एक पल के लिए खड़ा होब - मुहम्मद के साथ - आप सब मा से एक के जीवन भर के कर्मन से अच्छा है'।
Imam Ibnu Majah : 159
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَحَبَّ الْأَنْصَارَ أَحَبَّهُ اللَّهُ وَمَنْ أَبْغَضَ الْأَنْصَارَ أَبْغَضَهُ اللَّهُقَالَ شُعْبَةُ لِعَدِيٍّ أَسَمِعْتَهُ مِنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَ إِيَّايَ حَدَّثَ
हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर [अमरू बिन अब्दुल्ला] दुइनौ कहिन; हमसे [वाकी] ' से [स्यु'बाह] से [आदि बिन थाबित] से [बर्रा` बिन 'अजीब] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे अंसार से प्यार करत है तौ अल्लाह ओसे प्यार करत है, अऊर जे अंसार से नफरत करत है तौ अल्लाह ओसे नफरत करत है'। स्यूबाह ने आदि से पूछा; 'का तुमने बार्रा बिन अजीब से सुना है?' उ जवाब दिहिस; 'उनका ई बात खाली मोका बताई'।
Imam Ibnu Majah : 160
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ عَنْ عَبْدِ الْمُهَيْمِنِ بْنِ عَبَّاسِ بْنِ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْأَنْصَارُ شِعَارٌ وَالنَّاسُ دِثَارٌ وَلَوْ أَنَّ النَّاسَ اسْتَقْبَلُوا وَادِيًا أَوْ شِعْبًا وَاسْتَقْبَلَتْ الْأَنْصَارُ وَادِيًا لَسَلَكْتُ وَادِيَ الْأَنْصَارِ وَلَوْلَا الْهِجْرَةُ لَكُنْتُ امْرَأً مِنْ الْأَنْصَارِ
हमका बतावा गा है [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम] कहिन, हमका [इब्न अबू फुदैक] से [अब्दुल मुहैमिन बिन अब्बास बिन सहल बिन सद] से [उनके पिता] से [उनके दादा] से [उनके दादा] रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैही वसल्लम कहिन: 'अंसार मनुष्य हैं अऊर शियार कंबल हैं। अगर मनुष्य घाटी या पहाड़ी का सामना करत हैं, जबकि अंसार दूसर घाटी का सामना करत हैं, तौ मैं अंसार के बीच घाटी पर जरूर चढ़ब। अऊर अगर ई प्रवासन के लिए न होत, तौ मैं निश्चित रूप से अंसार के बीच से होत'।