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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 121

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَهَدِيَّةُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَتْ عَائِشُةُيَا عُرْوَةُ كَانَ أَبَوَاكَ مِنْ الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِنْ بَعْدِ مَا أَصَابَهُمْ الْقَرْحُ أَبُو بَكْرٍ وَالزُّبَيْرُ

हमका बतावा गा है कि [हिस्याम बिन अम्मर] अऊर [हदिया बिन अब्दुल वहाब] दुइनौ कहिन; हमका [सुफयान बिन उयैना] [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से कहिन है, उ कहिन; [आइशा] कहिन; 'हे उर्वाह, तोहार माता-पिता ओन लोगन मा से रहे जे घायल होए के बाद अल्लाह अऊर रसूल के पुकार का जवाब दिहिन; अर्थात् अबू बकर अऊर जुबैर'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 122

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ وَعَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأَوْدِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الصَّلْتُ الْأَزْدِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو نَضْرَةَ عَنْ جَابِرٍأَنَّ طَلْحَةَ مَرَّ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ شَهِيدٌ يَمْشِي عَلَى وَجْهِ الْأَرْضِ

हमका बतावा गा है कि [अली बिन मुहम्मद] अऊर ['अ'इमरू बिन अब्दुल्लाह अल ऑडी] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिस, हमसे कहिस है [अश शाल्ट अल 'अज़दी] कहिस, हमसे कहिस [अबू नदलराह] के [जाबिर] कहिस; 'थल्हा पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले, फिर बोले: 'धरती के सतह पर एक शहीद चल रहा है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 123

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنِي إِسْحَقُ بْنُ يَحْيَى بْنِ طَلْحَةَ عَنْ مُوسَى بْنِ طَلْحَةَ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ قَالَنَظَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى طَلْحَةَ فَقَالَ هَذَا مِمَّنْ قَضَى نَحْبَهُ

हमसे कहिन [अहमद बिन अल अजहर] कहिन, हमसे कहिन [अमरू बिन उथमान] कहिन, हमसे कहिन [जुहैर बिन मुआविया] कहिन, हमका बताइन [इशाक बिन याह्या बिन थल्हा] से [मूसा बिन थल्हा] से [मुआविया बिन अबू सुफियान] उ कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तल्हा को देखा और कहा: 'वह गिरने वाले म से है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 124

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا إِسْحَقُ عَنْ مُوسَى بْنِ طَلْحَةَ قَالَكُنَّا عِنْدَ مُعَاوِيَةَ فَقَالَ أَشْهَدُ لَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ طَلْحَةُ مِمَّنْ قَضَى نَحْبَهُ

हमसे कहिन [अहमद बिन सिनान] कहिन, हमसे कहिन [यजीद बिन हारून] कहिन, हमसे [इशाक] [मूसा बिन तल्हा] से कहिन; उ कहिन; जब हम [मुआविया] के साथ रहेन, तब उ कहिन; मैं गवाही देत ​​हउँ कि हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'थलहा ओन लोगन मा से एक है जे गिर जइहैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 125

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ إِسْمَعِيلَ عَنْ قَيْسٍ قَالَرَأَيْتُ يَدَ طَلْحَةَ شَلَّاءَ وَقَى بِهَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ أُحُدٍ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] से [इस्माइल] से [कैस] कहिन; 'मैं [थलहा के] हाथन का लकवाग्रस्त देखेन काहे से कि उ उहुद के लड़ाई के दौरान पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के रक्षा करै के लिए ओनके इस्तेमाल किहिन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 126

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَمَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَمَعَ أَبَوَيْهِ لِأَحَدٍ غَيْرَ سَعْدِ بْنِ مَالِكٍ فَإِنَّهُ قَالَ لَهُ يَوْمَ أُحُدٍ ارْمِ سَعْدُ فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बश्यार] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमका बताइन [स्युबाह] से [सद बिन इब्राहिम] से [अब्दुल्ला बिन स्यादाद] से [अली रदियाल्लाहु 'अन्हु] उ कहिन; 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का अपने माता-पिता का सद बिन मलिक के अलावा अउर केहू के लिए इकट्ठा करत नाहीं देखा। उहुद के युद्ध मा उ ओसे कहिन: 'फेंक, हे सद! मोर पिता अऊर महतारी तोहार फिरौती के रूप मा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 127

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ ح و حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَعِيلَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ سَمِعْتُ سَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍ يَقُولُلَقَدْ جَمَعَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ أُحُدٍ أَبَوَيْهِ فَقَالَ ارْمِ سَعْدُ فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन रुम्ह] कहिन, हमसे कहिन है [लैट्स बिन सद]। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमका बतावा है [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे [हातिम बिन इस्माइल] अऊर [इस्माइल बिन अय्यासी] का [यह्या बिन सैद] से [इब्नुल मुसैयब] कहिन; हम [स'द बिन अबू वक्काश] का कहत सुने रहेन; 'उहुद के लड़ाई मा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपने माता-पिता का इकट्ठा किहिन -कसम खाई- मोर लिए, उ कहिन: 'हे सद, मोर पिता अऊर महतारी का आपन फिरौती के रूप मा फेंकौ'।

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Imam Ibnu Majah : 128

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ وَخَالِي يَعْلَى وَوَكِيعٌ عَنْ إِسْمَعِيلَ عَنْ قَيْسٍ قَالَ سَمِعْتُ سَعْدَ بْنَ أَبِي وَقَّاصٍ يَقُولُإِنِّي لَأَوَّلُ الْعَرَبِ رَمَى بِسَهْمٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन इदरीस] अऊर मोर चाचा [या'ला] अऊर [वाकी'] [इस्माइल] से [कैस] से कहिन हैं, उ कहिन; हम [स'द बिन अबू वक्काश] का कहत सुने रहेन; 'सचमुच, मैं अल्लाह के राह मा तीर चलावै वाला पहिला अरब रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 129

حَدَّثَنَا مَسْرُوقُ بْنُ الْمَرْزُبَانِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ هَاشِمِ بْنِ هَاشِمٍ قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ يَقُولَ قَالَ سَعْدُ بْنُ أَبِي وَقَّاصٍمَا أَسْلَمَ أَحَدٌ فِي الْيَوْمِ الَّذِي أَسْلَمْتُ فِيهِ وَلَقَدْ مَكَثْتُ سَبْعَةَ أَيَّامٍ وَإِنِّي لَثُلُثُ الْإِسْلَامِ

हमसे कहिन [मसरूक बिन अल मरज़ुबान] कहिन, हमसे [यह्या बिन अबू ज़ैदा] [हसीम बिन हसीम] से कहिन हैं, उ कहिन; हम [इब्नुल मुसय्यब] का कहत सुने रहेन; [सअद बिन अबू वक्काश] ने कहा: 'मेरे इस्लाम के दिन कोई भी इस्लाम धर्म अपनाया नहीं, और मैं सात दिन तक रहा हूँ, और मैं इस्लाम का एक तिहाई हूँ'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 130

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ الْمُثَنَّى أَبُو الْمُثَنَّى النَّخَعِيُّ عَنْ جَدِّهِ رِيَاحِ بْنِ الْحَارِثِ سَمِعَ سَعِيدَ بْنَ زَيْدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ نُفَيْلٍ يَقُولُكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَاشِرَ عَشَرَةٍ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ فِي الْجَنَّةِ وَعُمَرُ فِي الْجَنَّةِ وَعُثْمَانُ فِي الْجَنَّةِ وَعَلِيٌّ فِي الْجَنَّةِ وَطَلْحَةُ فِي الْجَنَّةِ وَالزُّبَيْرُ فِي الْجَنَّةِ وَسَعْدٌ فِي الْجَنَّةِ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ فِي الْجَنَّةِ فَقِيلَ لَهُ مَنْ التَّاسِعُ قَالَ أَنَا

हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे कहिन [ईसा बिन यूनुस] कहिन, हमसे कहिन [शदाकाह बिन मुत्सना अबुल मुत्सना अन नखाई] अपने दादा [रियाह बिन इब्नुल हरिथ] से उ [सैद बिन जैद बिन अमरू बिन नुफैल] कहत सुने; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दस लोग का दसवां है'। कहिन कहिन; 'अबू बकर सरग मा, उमर सरग मा, उस्मान सरग मा, अली सरग मा, तल्हा सरग मा, जुबैर सरग मा, स'द सरग मा अऊर अब्दुर्रहमान सरग मा'। तब उनसे पूछा गया कि 'नौवाँ कौन है?' उ जवाब दिहिस: 'मैं हौं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 131

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ حُصَيْنٍ عَنْ هِلَالِ بْنِ يَسَافٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ ظَالِمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ قَالَأَشْهَدُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنِّي سَمِعْتُهُ يَقُولُ اثْبُتْ حِرَاءُ فَمَا عَلَيْكَ إِلَّا نَبِيٌّ أَوْ صِدِّيقٌ أَوْ شَهِيدٌ وَعَدَّهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَعُثْمَانُ وَعَلِيٌّ وَطَلْحَةُ وَالزُّبَيْرُ وَسَعْدٌ وَابْنُ عَوْفٍ وَسَعِيدُ بْنُ زَيْدٍ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बश्यार] कहिन, हमसे [इब्न अबू 'आदी] से [स्यू'बाह] से [हुशैन] से [हिलाल बिन यासफ] से [अब्दुल्ला बिन झालिम] से [सैद बिन जैद] कहिन; मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से गवाही देत ​​हउँ कि हम ओनका कहत सुने रहेन: 'हे हीरा', चुप रहो!, काहे से कि तोहरे ऊपर एक पैगम्बर या शिद्दीक -एक ईमानदार व्यक्ति- या स्याहद -एक शहीद-' है। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ओनके जिक्र किहिन: 'अबू बकर, उमर, उथमान, अली, तल्हा, जुबैर, सद, इब्न औफ अऊर सैद बिन जैद'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 132

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ جَمِيعًا عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ صِلَةَ بْنِ زُفَرَ عَنْ حُذَيْفَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِأَهْلِ نَجْرَانَ سَأَبْعَثُ مَعَكُمْ رَجُلًا أَمِينًا حَقَّ أَمِينٍ قَالَ فَتَشَرَّفَ لَهُ النَّاسُ فَبَعَثَ أَبَا عُبَيْدَةَ بْنَ الْجَرَّاحِ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] [सुफयान] से कहिन। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमसे [स्यूबाह] [अबू इशाक] से [शीला बिन जुफर] से [हुजैफा] से सब कुछ बताइन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नजरन के लोगन से कहा: 'मैं आपके साथ एक अइसन मनई भेजब जेकरे ऊपर सही मायने मा भरोसा कीन जा सकत है'। हुजैफा ने कहा: 'तो लोग उम्मीद करत रहे कि उनका चुना जाई, लेकिन उ अबू उबैदा बिन अल जर्राह का भेजिन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 133

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ صِلَةَ بْنِ زُفَرَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِأَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ هَذَا أَمِينُ هَذِهِ الْأُمَّةِ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन आदम] कहिन, हमसे [इजरायल] से [अबू इशाक] से [शीला बिन जुफर] से [अब्दुल्ला] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अबू उबैदा बिन अल जर्राह से कहा: 'ई व्यक्ति ई उम्मत का एक भरोसेमंद व्यक्ति है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 134

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْ كُنْتُ مُسْتَخْلِفًا أَحَدًا عَنْ غَيْرِ مَشُورَةٍ لَاسْتَخْلَفْتُ ابْنَ أُمِّ عَبْدٍ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमका [सुफयान] से [अबू इशाक] से [अल हरिथ] से [अली] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अगर मैं बिना विचार-विमर्श के उत्तराधिकारी चुनै का तैयार रहित, तौ मैं निश्चित रूप से इब्न उम्मी 'अब्द' का चुनब।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 135

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلَّالُ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ زِرٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍأَنَّ أَبَا بَكْرٍ وَعُمَرَ بَشَّرَاهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحَبَّ أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ غَضًّا كَمَا أُنْزِلَ فَلْيَقْرَأْهُ عَلَى قِرَاءَةِ ابْنِ أُمِّ عَبْدٍ

हमसे कहिन [अल हसन बिन अली अल खल्लाल] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन आदम] कहिन, हमसे कहिन [अबू बकर बिन अय्यासी] से [अशिम] से [जिर्र] से [अब्दुल्ला बिन मसूद]; कि [अबू बकर] अऊर [उमर] ने ओनका खुशखबरी दिहिन, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे कुरान का वइसने सही ढंग से पढ़ै का पसंद करत है जइसे कि ई नाजल भा है, तौ उ इब्न उम्मी 'अब्द' के पढ़े के आधार पर पढ़ै।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 136

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سُوَيْدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْنُكَ عَلَيَّ أَنْ تَرْفَعَ الْحِجَابَ وَأَنْ تَسْمَعَ سِوَادِي حَتَّى أَنْهَاكَ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन इदरीस] से [अल हसन बिन उबैदुल्लाह] से [इब्राहिम बिन सुवैद] से [अब्दुर्रहमान बिन यजीद] से [अब्दुल्लाह] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझसे कहा: 'तुम मुझे अनुमति दे जब तक तुम अपना परदा नहीं खोलो और अंत तक मेरी सलाह न सुनो'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 137

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي سَبْرَةَ النَّخَعِيِّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ الْقُرَظِيِّ عَنْ الْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ قَالَكُنَّا نَلْقَى النَّفَرَ مِنْ قُرَيْشٍ وَهُمْ يَتَحَدَّثُونَ فَيَقْطَعُونَ حَدِيثَهُمْ فَذَكَرْنَا ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَا بَالُ أَقْوَامٍ يَتَحَدَّثُونَ فَإِذَا رَأَوْا الرَّجُلَ مِنْ أَهْلِ بَيْتِي قَطَعُوا حَدِيثَهُمْ وَاللَّهِ لَا يَدْخُلُ قَلْبَ رَجُلٍ الْإِيمَانُ حَتَّى يُحِبَّهُمْ لِلَّهِ وَلِقَرَابَتِهِمْ مِنِّي

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन थारीफ] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन फुदलैल] कहिन, हमका बताइन [अल अमासी] से [अबू सबराह अन नखाई] से [मुहम्मद बिन काअब अल कुराजी] से [अल अब्बास बिन अब्दुल मुथलिब] उ कहिन; 'हम कुरैश के लोगन के एक समूह से मिलेन जे गपशप करत रहे, अचानक उइ आपन बातचीत तोड़ दिहिन -हमरे आवै के साथ-। हमने यह घटना पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक पहुँचाई। तौ उ कहिन: 'उनका का बात है, उ लोग बात करत रहें, लेकिन जब उ लोग मोर मंदिर के एक आदमी का देखिन तौ उ लोग बात करब बंद कइ दिहिन। अल्लाह के कसम, जब तक उ अल्लाह के खातिर अऊर मोर निकटता के कारण ओनसे प्यार न करत है, तब तक ईमान एक आदमी के दिल मा नहीं घुसत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 138

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ الضَّحَّاكِ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ كَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ الْحَضْرَمِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ اتَّخَذَنِي خَلِيلًا كَمَا اتَّخَذَ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا فَمَنْزِلِي وَمَنْزِلُ إِبْرَاهِيمَ فِي الْجَنَّةِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ تُجَاهَيْنِ وَالْعَبَّاسُ بَيْنَنَا مُؤْمِنٌ بَيْنَ خَلِيلَيْنِ

हमसे कहिन [अब्दुल वहाब बिन अदल डलाहक] कहिन, हमसे [इस्माइल बिन अय्यासी] से [शफवान बिन अमरू] से [अब्दुर्रहमान बिन जुबैर बिन नुफैर] से [कत्सिर बिन मुर्राह अल हदलरमी] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सचमुच अल्लाह ने मुझे अपना प्रेमी बनाया जैसे उ अब्राहम को अपना प्रेमी बनाया। कायामत के दिन स्वर्ग मा मोर निवास अउर इब्राहिम के निवास एक दूसरे के सामने होइहैं। जबकि अल अब्बास हमरे बीच है, अल्लाह के दुई प्रेमी, जे एक आस्तिक है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 139

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي يَزِيدَ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِلْحَسَنِ اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّهُ فَأَحِبَّهُ وَأَحِبَّ مَنْ يُحِبُّهُ قَالَ وَضَمَّهُ إِلَى صَدْرِهِ

हमसे कहिन है [अहमद बिन अब्दाह] ने कहा, हमसे [सुफयान बिन उयैना] से [उबैदुल्लाह बिन अबू यजीद] से [नफी' बिन जुबैर] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहा है, उ अल हसन से कहिन: 'हे अल्लाह, वाकई मा हम ओसे प्यार करत हई अऊर जे ओसे प्यार करत हई'। अबू हुरैरा कहिन; 'फिर उ ओका अपने छाती मा गले लगा लिहिन।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 140

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي عَوْفٍ أَبِي الْجَحَّافِ وَكَانَ مَرْضِيًّا عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَحَبَّ الْحَسَنَ وَالْحُسَيْنَ فَقَدْ أَحَبَّنِي وَمَنْ أَبْغَضَهُمَا فَقَدْ أَبْغَضَنِي

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] से [सुफयान] से [दाऊद बिन अबू औफ अबुल जहाफ] से कहिन हैं - उ एक धन्य व्यक्ति हैं - [अबू हाजिम] से [अबू हुरैरा] से उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे हसन अऊर हुसैन से प्यार करत है तौ उ मोसे प्यार किहिस है, अऊर जे ओन दुइनौ से नफरत करत है, उ मोसे नफरत किहिस है'।