Imam Ibnu Majah : 101
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّلْحِيُّ أَنْبَأَنَا دَاوُدُ بْنُ عَطَاءٍ الْمَدِينِيُّ عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوَّلُ مَنْ يُصَافِحُهُ الْحَقُّ عُمَرُ وَأَوَّلُ مَنْ يُسَلِّمُ عَلَيْهِ وَأَوَّلُ مَنْ يَأْخُذُ بِيَدِهِ فَيُدْخِلُهُ الْجَنَّةَ
हमसे कहिन है [इस्माइल बिन मुहम्मद अथ थाल्ही] कहिन, हमसे [दाउद बिन 'अथो` अल मदनी] से [सालिह बिन कैसान] से [इब्नू शिहाब] से [सैद बिन अल मुसैयाब] से [उबै बिन काअब] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल हक ने पहला व्यक्ति जेकरे साथ हाथ मिलावा रहा उ उमर रहा, उ पहिला व्यक्ति रहा जेका अभिवादन कीन गा रहा अऊर पहिला व्यक्ति रहा जेका हाथ से पकड़ा गा रहा अऊर फिर स्वर्ग मा डाला गा रहा'।
Imam Ibnu Majah : 102
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ أَبُو عُبَيْدٍ الْمَدِينِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الْمَاجِشُونِ قَالَ حَدَّثَنِي الزَّنْجِيُّ بْنُ خَالِدٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ أَعِزَّ الْإِسْلَامَ بِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ خَاصَّةً
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन उबैद अबू उबैद अल मदीनी] उ कहिन; हमसे [अब्दुल मलिक अल मजिस्यून] कहिन हैं, उ कहिन; मोका [अल ज़ंजी बिन खालिद] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से [ऐस्याह] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे अल्लाह, उमर बिन खठाब के विशेष शौफ्तार से इस्लाम का महिमामंडन करा'।
Imam Ibnu Majah : 103
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلَمَةَ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا يَقُولُخَيْرُ النَّاسِ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبُو بَكْرٍ وَخَيْرُ النَّاسِ بَعْدَ أَبِي بَكْرٍ عُمَرُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे [स्युबाह] [अमरू बिन मुर्रा] से [अब्दुल्ला बिन सलामा] कहिन; हम [अली] का कहत सुने रहेन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद सबसे अच्छा इंसान अबू बकर रहे, अऊर अबू बकर के बाद सबसे अच्छा इंसान उमर रहे'।
Imam Ibnu Majah : 104
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْحَارِثِ الْمِصْرِيُّ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَكُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَيْنَا أَنَا نَائِمٌ رَأَيْتُنِي فِي الْجَنَّةِ فَإِذَا أَنَا بِامْرَأَةٍ تَتَوَضَّأُ إِلَى جَانِبِ قَصْرٍ فَقُلْتُ لِمَنْ هَذَا الْقَصْرُ فَقَالَتْ لِعُمَرَ فَذَكَرْتُ غَيْرَتَهُ فَوَلَّيْتُ مُدْبِرًا قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ فَبَكَى عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقَالَ أَعَلَيْكَ بِأَبِي وَأُمِّي يَا رَسُولَ اللَّهِ أَغَارُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अल हरिथ अल मिश्री] कहिन, हमसे कहिन [लैट्स बिन सद] कहिन, हमसे कहिन [उकैल] के [इब्न शिहाब] कहिन, हमसे [सैद बिन मुसैयब] कहिन कि [अबू हुरैरा] कहिन; जब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बैठे थे तो उन्होंने कहा: 'जब मैं सो रहा था तो अपने आप को स्वर्ग में देखा, जाहिर तौर पर वहाँ एक औरत थी जो एक महल के बगल में वजू ले रही थी, तो मैंने पूछा: 'यह महल किसका है? ' औरत ने जवाब दिया: 'उमर का'। तौ वहिके ईर्ष्या याद आई, फिर पलट के देखिन।' अबू हुरैरा कहिन; त उमर बिन खठथब रोए, कहिन: 'मेरे पिता अऊर माता आपके फिरौती के रूप मा, का हम आपसे ईर्ष्या करत हई?'
Imam Ibnu Majah : 105
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ غُضَيْفِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ اللَّهَ وَضَعَ الْحَقَّ عَلَى لِسَانِ عُمَرَ يَقُولُ بِهِ
हमसे कहिन [अबू सलामा याह्या बिन खलफ] कहिन, हमसे [अब्दुल अ'ला] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [मखुल] से [गुदलैफ बिन अल हरिथ] से [अबू ज़ार] कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'वास्तव मा, अल्लाह उमर के बातन मा सच्चाई रखिन जवन उ हमेशा बोलत रहें'।
Imam Ibnu Majah : 106
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي عُثْمَانُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِكُلِّ نَبِيٍّ رَفِيقٌ فِي الْجَنَّةِ وَرَفِيقِي فِيهَا عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ
हमसे कहिन है [अबू मारवान मुहम्मद बिन उथमान अल उत्समानी] ने कहा, हमसे कहा है कि हमार पिता [उथमान बिन खालिद] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू जिनाद] से [उनके पिता] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हल्लाहु पैगम्बर के पास स्वर्ग में एक करीबी दोस्त है, स्वर्ग मा उथमान बिन 'अफ्फान' है।
Imam Ibnu Majah : 107
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي عُثْمَانُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقِيَ عُثْمَانَ عِنْدَ بَابِ الْمَسْجِدِ فَقَالَ يَا عُثْمَانُ هَذَا جِبْرِيلُ أَخْبَرَنِي أَنَّ اللَّهَ قَدْ زَوَّجَكَ أُمَّ كُلْثُومٍ بِمِثْلِ صَدَاقِ رُقَيَّةَ عَلَى مِثْلِ صُحْبَتِهَا
हमसे कहिन [अबू मरवान मुहम्मद बिन उथमान अल उथमानी] कहिन, हमका [उथमान बिन खालिद] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू जिनाद] से [अपने पिता] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मस्जिद के दरवाजे पर उथमान से मिले, फिर उ कहिन: 'हे उस्मान, ई जिबरील है, उ मोका सूचित किहिन कि अल्लाह ने तुम्हार शादी उम्म कुल्थुम से एक दहेज से किहिन है जइसन कि रुकैया का दीन गा रहा अऊर जइसे कि तुम उनके साथ रहत हौ'।
Imam Ibnu Majah : 108
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ هِشَامِ بْنِ حَسَّانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ قَالَذَكَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِتْنَةً فَقَرَّبَهَا فَمَرَّ رَجُلٌ مُقَنَّعٌ رَأْسُهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا يَوْمَئِذٍ عَلَى الْهُدَى فَوَثَبْتُ فَأَخَذْتُ بِضَبْعَيْ عُثْمَانَ ثُمَّ اسْتَقْبَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ هَذَا قَالَ هَذَا
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन इदरीस] से [हिस्याम बिन हसन] से [मुहम्मद बिन सिरिन] से [काअब बिन उजराह] कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने बदनामी का जिक्र किया और संकेत दिया कि उनका आगमन नजदीक आ रहा है। तब एक आदमी टोपी पहनकर गुजर रहा था तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ई आदमी एक दिन हिदायत से ऊपर होई'। त हम कूद के उस्मान के बांह पकड़ लिहेन अऊर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास वापस मुड़ेन अऊर कहेन; 'ई मनई! ' उ कहिन: 'ई मनई'।
Imam Ibnu Majah : 109
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْفَرَجُ بْنُ فَضَالَةَ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ يَزِيدَ الدِّمَشْقِيِّ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عُثْمَانُ إِنْ وَلَّاكَ اللَّهُ هَذَا الْأَمْرَ يَوْمًا فَأَرَادَكَ الْمُنَافِقُونَ أَنْ تَخْلَعَ قَمِيصَكَ الَّذِي قَمَّصَكَ اللَّهُ فَلَا تَخْلَعْهُ يَقُولُ ذَلِكَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍقَالَ النُّعْمَانُ فَقُلْتُ لِعَائِشَةَ مَا مَنَعَكِ أَنْ تُعْلِمِي النَّاسَ بِهَذَا قَالَتْ أُنْسِيتُهُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया] कहिन, हमसे कहिन [अल फराज बिन फदलालाह] से [रबीअह बिन यजीद अद दिमासीकी] से [अन नुमान बिन बसीर] से [ऐसिया] उ कहिन, रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन, अगर अल्लाह उमान एक दिन तोहका अधिकार देत है: फिर पाखंडी चाहत हैं कि तुम उ चोगा उतारौ जेका अल्लाह तोहका पहिनाइन है, तौ ई मत करौ'। उ ई बात तीन बार दोहराइन'। एक नु'मान कहिन; हम ऐसिया से पूछेन; 'का कारन रहा कि आप लोगन का ई समस्या के बारे मा नाहीं बताइन?' आयशा कहिन; 'मैं ओनके बारे मा भूल गय रहौं'।
Imam Ibnu Majah : 110
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَرَضِهِ وَدِدْتُ أَنَّ عِنْدِي بَعْضَ أَصْحَابِي قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَا نَدْعُو لَكَ أَبَا بَكْرٍ فَسَكَتَ قُلْنَا أَلَا نَدْعُو لَكَ عُمَرَ فَسَكَتَ قُلْنَا أَلَا نَدْعُو لَكَ عُثْمَانَ قَالَ نَعَمْ فَجَاءَ فَخَلَا بِهِ فَجَعَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُكَلِّمُهُ وَوَجْهُ عُثْمَانَ يَتَغَيَّرُقَالَ قَيْسٌ فَحَدَّثَنِي أَبُو سَهْلَةَ مَوْلَى عُثْمَانَ أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ قَالَ يَوْمَ الدَّارِ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَهِدَ إِلَيَّ عَهْدًا فَأَنَا صَائِرٌ إِلَيْهِ وَقَالَ عَلِيٌّ فِي حَدِيثِهِ وَأَنَا صَابِرٌ عَلَيْهِ قَالَ قَيْسٌ فَكَانُوا يُرَوْنَهُ ذَلِكَ الْيَوْمَ
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमेर] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [वाकी'] कहिन, हमसे कहिन हैं [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [ऐस्याह] उ कहिन, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब उ बीमार रहे तब कहिन: 'हम चाहब कि अगर हमार कुछ दोस्त हमार बगल मा होतिन'। हम तब पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, का हमरे लिए जरूरी है कि हम आपके लिए अबू बकर का बुलावा जाय?' ऊ चुप रहा। हम फिर से पूछेन; 'का हमका तोहरे खातिर उमर का बोलावा जाय?' ऊ अबहियों चुप रहा। हम फिर से पूछेन; 'का हमका तोहरे खातिर उथमान का बोलावा जाय?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ'। तब उथमान आवा अऊर ओकरे साथे अकेले रहा। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे बात की, जब तक कि उस्मान का चेहरा नहीं बदल गया।' कैस कहिन; 'मुझे [अबू सह्लाह] ने उस्मान का एक पूर्व दास बताया, [उस्मान बिन अफ्फान] ने अपने घर के घेराबंदी के दिन कहा; 'वास्तव मा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोसे एक वादा किहिन हैं अऊर मैं उ वादा पूरा करब'। अऊर अली ने अपने हदीस मा बतावा है; 'मैं यहि पर धैर्य रखब'। कैस कहिन; 'त उइ ओका उ दिन मार डारिन'।
Imam Ibnu Majah : 111
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ وعَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ زِرِّ بْنِ حُبَيْشٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَعَهِدَ إِلَيَّ النَّبِيُّ الْأُمِّيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ لَا يُحِبُّنِي إِلَّا مُؤْمِنٌ وَلَا يُبْغِضُنِي إِلَّا مُنَافِقٌ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] अऊर [अबू मुआविया] अऊर [अब्दुल्ला बिन नुमीर] से [अल अमासी] से [आदि बिन थाबित] से [जिर्री बिन हुबैसी] से [अली रादलियाहु अनहू] कहिन हैं, उ कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम, अल उमी - एक अनपढ़ व्यक्ति - ने मुझसे वादा किया, कि उ मुझसे एक आस्तिक के अलावा प्यार नहीं करिहैं अऊर एक पाखंडी के अलावा मुझसे नफरत न करिहैं'।
Imam Ibnu Majah : 112
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ قَالَ سَمِعْتُ إِبْرَاهِيمَ بْنَ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لِعَلِيٍّ أَلَا تَرْضَى أَنْ تَكُونَ مِنِّي بِمَنْزِلَةِ هَارُونَ مِنْ مُوسَى
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन बस्यार] कहिन, हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमका बताइन है [स्यूबाह] से [सद बिन इब्राहिम] उ कहिन; हम [इब्राहिम बिन सईद बिन अबू वक्काश] का [अपने पिता] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावत सुने रहेन, कि उ अली से कहिन: 'का तुम प्रसन्न नाहीं हौ, अगर मोर साथ तोहार स्थिति मूसा के साथे हारून के स्थिति के तरह है'।
Imam Ibnu Majah : 113
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو الْحُسَيْنِ أَخْبَرَنِي حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدِ بْنِ جُدْعَانَ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَأَقْبَلْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حَجَّتِهِ الَّتِي حَجَّ فَنَزَلَ فِي بَعْضِ الطَّرِيقِ فَأَمَرَ الصَّلَاةَ جَامِعَةً فَأَخَذَ بِيَدِ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَقَالَ أَلَسْتُ أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ قَالُوا بَلَى قَالَ أَلَسْتُ أَوْلَى بِكُلِّ مُؤْمِنٍ مِنْ نَفْسِهِ قَالُوا بَلَى قَالَ فَهَذَا وَلِيُّ مَنْ أَنَا مَوْلَاهُ اللَّهُمَّ وَالِ مَنْ وَالَاهُ اللَّهُمَّ عَادِ مَنْ عَادَاهُ
हमका बतावा गा है [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे बतावा गा है [अबुल हुसैन] कहिन, हमका बतावा गा है [हम्मद बिन सलामा] से [अली बिन जैद बिन जुदआन] से [आदी बिन थाबित] से [बर्रा` बिन अजीब] उ कहिन, 'हम रसूलुल्लाह सल्लाह वल्लाज के साथ मिलके जब हल्लाम पर गए हज। फिर उ यात्रा के बीच मा रुके, उ फिर जमात प्रार्थना का आदेश दिहिन। तब उन्होंने अली रदलियाल्लाहु अन्हू का हाथ पकड़कर कहा : 'का मैं मोमिनन के लिए उनकी आत्मा से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हूँ?' मित्रन ने जवाब दिहिन; 'सही'। उ आगे कहिन: 'का हम एक आस्तिक के लिए ओसे ज्यादा महत्वपूर्ण नाहीं हई? उइ जवाब दिहिन; 'सही'। ऊ कहिस: 'फिर ई - अली- उ मनई के रखवाला है जे मोका आपन रखवाला बनाइस है। हे अल्लाह ओनके प्यार करै वालेन के मदद करौ। हे अल्लाह, जे ओनके दुश्मन हैं, ओनका दुश्मन बनावा'।
Imam Ibnu Majah : 114
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي لَيْلَى حَدَّثَنَا الْحَكَمُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَكَانَ أَبُو لَيْلَى يَسْمُرُ مَعَ عَلِيٍّ فَكَانَ يَلْبَسُ ثِيَابَ الصَّيْفِ فِي الشِّتَاءِ وَثِيَابَ الشِّتَاءِ فِي الصَّيْفِ فَقُلْنَا لَوْ سَأَلْتَهُ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَ إِلَيَّ وَأَنَا أَرْمَدُ الْعَيْنِ يَوْمَ خَيْبَرَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَرْمَدُ الْعَيْنِ فَتَفَلَ فِي عَيْنِي ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ أَذْهِبْ عَنْهُ الْحَرَّ وَالْبَرْدَ قَالَ فَمَا وَجَدْتُ حَرًّا وَلَا بَرْدًا بَعْدَ يَوْمِئِذٍ وَقَالَ لَأَبْعَثَنَّ رَجُلًا يُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيُحِبُّهُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ لَيْسَ بِفَرَّارٍ فَتَشَرَّفَ لَهُ النَّاسُ فَبَعَثَ إِلَى عَلِيٍّ فَأَعْطَاهَا إِيَّاهُ
हमसे कहिन [उथमान बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे कहिन [इब्न अबू लैला] कहिन, हमसे [अल हकाम] [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से कहिन; उ कहिन; अबू लैला [अली] से बातचीत किहिन। अऊर अली आमतौर पर जाड़ा मा गर्मी के कपड़ा अऊर गर्मी मा जाड़ा के कपड़ा पहिरत है। त हम बड़बड़ाए; 'चलो हम ओसे पूछित है'। उ जवाब दिहिन; 'खैबर युद्ध के समय रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भेजा था, जबकि मोय आँखी का रोग रहा। हमने अल्लाह के रसूल से कहा; 'हे अल्लाह के रसूल, सचमुच मोर आँखिन मा दर्द है। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दुआ करत समय मोर आँखिन मा फूंक दिहिस: 'हे अल्लाह, गर्मी अऊर ठंड से दूर रहौ'। अली कहिन; 'फिर ऊ दिन से अब तक हमका गर्मी या ठंड का अनुभव नाहीं भा है'। अऊर उ कहिन: 'सचमुच, मैं एक अइसन मनई का भेजब जे अल्लाह अऊर ओकरे रसूल से प्यार करत है, अऊर कायर न होय।' तौ लोग ओका पावै के ताईं दौड़िन लेकिन प्रेरित भेजिन अऊर ओनका झंडा दइ दिहिन'।
Imam Ibnu Majah : 115
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُوسَى الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا الْمُعَلَّى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْحَسَنُ وَالْحُسَيْنُ سَيِّدَا شَبَابِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَأَبُوهُمَا خَيْرٌ مِنْهُمَا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन मूसा अल वसिथी] कहिन, हमसे कहिन [अल मुअल्ला बिन अब्दुर्रहमान] कहिन, हमसे [इब्न अबू दज़ीब] [नफी'] से [इब्न उमर] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हसन और हुसैन स्वर्ग के युवाओं के दो नेता हैं। औ दुइनौ कै बाप दुइनौ ते बढ़िया है'।
Imam Ibnu Majah : 116
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالُوا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ حُبْشِيِّ بْنِ جُنَادَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ عَلِيٌّ مِنِّي وَأَنَا مِنْهُ وَلَا يُؤَدِّي عَنِّي إِلَّا عَلِيٌّ
हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [सुवैद बिन सईद] अऊर [इस्माइल बिन मूसा] से कहा गा है; हमका [शारीक] [अबू इशाक] से [हुब्सी बिन जुनादाह] से कहिन है, उ कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'अली हमार हिस्सा है अऊर हम अली का हिस्सा हई। अऊर अली के अलावा मोर दायित्वन का केहू निभात नाहीं है।
Imam Ibnu Majah : 117
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ الرَّازِيُّ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى أَنْبَأَنَا الْعَلَاءُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ الْمِنْهَالِ عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ عَلِيٌّ أَنَا عَبْدُ اللَّهِ وَأَخُو رَسُولِهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا الصِّدِّيقُ الْأَكْبَرُ لَا يَقُولُهَا بَعْدِي إِلَّا كَذَّابٌ صَلَّيْتُ قَبْلَ النَّاسِ بِسَبْعِ سِنِينَ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन इस्माइल अर रज़ी] कहिन, हमसे कहिन [उबैदुल्लाह बिन मूसा] कहिन, हमसे ['अला` बिन सालिह] [मिनहाल] से [अब्बाद बिन अब्दुल्ला] कहिन; [अली] कहिन; 'मैं अल्लाह का सेवक अऊर रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का भाई हौं, अऊर मैं अश सिद्दीक अल अकबर हौं, मोर बाद एक झूठे के अलावा केहू ई बात नाहीं कहिस है। मैं लोगन के सामने प्रार्थना स्थापित किहे हई, सात साल से'।
Imam Ibnu Majah : 118
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ ابْنِ سَابِطٍ وَهُوَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ قَالَقَدِمَ مُعَاوِيَةُ فِي بَعْضِ حَجَّاتِهِ فَدَخَلَ عَلَيْهِ سَعْدٌ فَذَكَرُوا عَلِيًّا فَنَالَ مِنْهُ فَغَضِبَ سَعْدٌ وَقَالَ تَقُولُ هَذَا لِرَجُلٍ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ كُنْتُ مَوْلَاهُ فَعَلِيٌّ مَوْلَاهُ وَسَمِعْتُهُ يَقُولُ أَنْتَ مِنِّي بِمَنْزِلَةِ هَارُونَ مِنْ مُوسَى إِلَّا أَنَّهُ لَا نَبِيَّ بَعْدِي وَسَمِعْتُهُ يَقُولُ لَأُعْطِيَنَّ الرَّايَةَ الْيَوْمَ رَجُلًا يُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया] कहिन, हमसे [मूसा बिन मुस्लिम] [इब्न सबित] से कहिन - अर्थात् अब्दुर्रहमान - [स'द बिन अबू वक्काश] से उ कहिन; मुआविया अपनी तीर्थयात्रा के हिस्सा से पहुँचे, फिर सद उनसे मिले खातिर अंदर आए, उइ अली के बारे मा चर्चा किहिन अऊर उनके बारे मा गपशप किहिन। त सअद नाराज होइके कहिन: 'तुम एक अइसन मनई से ई बात कहौ जेका हम खुदै रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'जे मोका आपन रखवाली बनावत है, तब अली भी ओकर रखवाली है'। अउर मइँ ओका कहत सुनेउँ: ‘तोहार पद मोरे बगल मा हारून के पद मूसा के बगल मँ वइसने अहइ। बस ई बात है कि मोर बाद कौनो नबी नाहीं है'। अऊर हम ओनका कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा हम आज एक अइसन मनई का झंडा देब जे अल्लाह अऊर ओकरे रसूल से प्यार करत है'।
Imam Ibnu Majah : 119
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ قُرَيْظَةَ مَنْ يَأْتِينَا بِخَبَرِ الْقَوْمِ فَقَالَ الزُّبَيْرُ أَنَا فَقَالَ مَنْ يَأْتِينَا بِخَبَرِ الْقَوْمِ فَقَالَ الزُّبَيْرُ أَنَا ثَلَاثًا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِكُلِّ نَبِيٍّ حَوَارِيٌّ وَإِنَّ حَوَارِيَّ الزُّبَيْرُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे [सुफयान] [मुहम्मद बिन अल मुनकादिर] से [जाबिर] कहिन; 'कुरैजाह युद्ध के दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हमका ऊ लोगन के बारे मा खबर कौन ला सकत है?' जुबैर कहिन; 'मैं'। ऊ फिर चिल्लाय दिहिस- 'उस लोगन के बारे मा हमका खबर कौन लाय सकत है?' जुबैर कहिन; 'मैं,' ऊ तीन बार दोहराइस। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'हर पैगम्बर के पास एक हवरी होत है - एक वफादार सहायक-, अऊर जुबैर मोर हवरी होत है'।
Imam Ibnu Majah : 120
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ الزُّبَيْرِ قَالَلَقَدْ جَمَعَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَوَيْهِ يَوْمَ أُحُدٍ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया] कहिन, हमसे [हिस्याम बिन उर्वाह] [अपने पिता] से [अब्दुल्ला बिन जुबैर] से [जुबैर] कहिन; 'उहुद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लड़ाई मा अपने माता-पिता का मोर खातिर इकट्ठा किहिन'।