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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 61

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ نِزَارٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صِنْفَانِ مِنْ هَذِهِ الْأُمَّةِ لَيْسَ لَهُمَا فِي الْإِسْلَامِ نَصِيبٌ الْمُرْجِئَةُ وَالْقَدَرِيَّةُ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन फुदलैल] कहिन, हमसे [अली बिन निजर] [अपने पिता] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'इस उम्मत के दुई समूह हैं जे इस्लाम का हिस्सा नाहीं हैं; अर्थात् मुरजीअह अऊर कादरिया'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 62

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ كَهْمَسِ بْنِ الْحَسَنِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ قَالَ كُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ شَعَرِ الرَّأْسِ لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ سَفَرٍ وَلَا يَعْرِفُهُ مِنَّا أَحَدٌ فَجَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَهُ إِلَى رُكْبَتِهِ وَوَضَعَ يَدَيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَحَجُّ الْبَيْتِ فَقَالَ صَدَقْتَ فَعَجِبْنَا مِنْهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَرُسُلِهِ وَكُتُبِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ فَعَجِبْنَا مِنْهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ ثُمَّ قَالَ يَا مُحَمَّدُ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَمَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَمَا أَمَارَتُهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي تَلِدُ الْعَجَمُ الْعَرَبَ وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبِنَاءِ قَالَ ثُمَّ قَالَ فَلَقِيَنِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ثَلَاثٍ فَقَالَ أَتَدْرِي مَنْ الرَّجُلُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ ذَاكَ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ مَعَالِمَ دِينِكُمْ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] से [कहमास बिन अल हसन] से [अब्दुल्ला बिन बुरैदा] से [यह्या बिन यमर] से [इब्न उमर] से [उमर] कहिन; 'हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठे रहेन, तब एक आदमी आवा जे बहुत सफेद कपड़ा पहिनले रहे, बाल बहुत काला रहे, ऊ लंबी यात्रा के निशान नाहीं देख पावत रहे, अऊर हममें से केहू ओका नाहीं जानत रहा। फिर उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठिन, जबकि रसूलुल्लाह के घुटनन पर आपन घुटना रखत अऊर आपन हाथ ओनके जांघन पर रखत। तब व्यक्ति ने पूछा; 'हे मुहम्मद, इस्लाम का है?' उ जवाब दिहिन: 'गवाही दइ द्या कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है अऊर मैं अल्लाह का दूत हौं, नमाज पढ़ौ, जकात दे, रमदलान के महीना मा रोजा रखौ अऊर बैतुल्लाह के तीर्थयात्रा करौ'। उ फिर कहिन: 'तुम सही कहत हौ'। तौ हम हैरान रहेन, उहै पूछिन अऊर उहै पुष्टि किहिन। फिर पुछि पूछिन कि हे मुहम्मद ईमान का होत है? उ जवाब दिहिन: 'तुम अल्लाह, ओकरे स्वर्गदूतन, ओकरे रसूलन, ओकरे किताबन, आखिरी दिन अऊर कादर, अच्छा अऊर बुरा दुइनौ मा विश्वास करत हौ'। उ कहिन: 'तुम सही कहत हौ'। तौ हम हैरान रहेन, उ पूछिन अऊर उ भी पुष्टि किहिन। फिर पुछि पूछिन कि हे मुहम्मद इहसान क्या है? उन्होंने जवाब दिया : 'तुम अल्लाह का अइसे पूजा करत हौ मानो तुम उनका देखत हो। अगर आप ओका नाहीं देख सकत हई, त उ वास्तव मा आपका देखत है'। ऊ पूछिस कि 'आयाम का दिन कब आई?' उ जवाब दिहिन: 'जेसे ई बारे मा पूछा जात है, ऊ पूछै वाले से ज्यादा नाहीं जानत है।' ऊ पूछिस: 'का संकेत हैं?' उ जवाब दिहिस: 'एक दास औरत अपने मालिक के बच्चा का जन्म दिहिस'। -वाकी' कहिन; 'यानी, 'अजम - अरब राष्ट्र से नाहीं - अरब लोगन का जन्म दिहिस - 'अऊर आप लोगन का देखेन जे नंगे पाँव अऊर नंगे छाती, गरीब अऊर भेड़ चरवाहा इमारत बनावै मा एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करत रहे'। इब्न उमर कहिन; उमर कहिन; 'फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन दिन बाद मुझसे मिले, तब उन्होंने पूछा: 'का तुम जानत हौ कि ऊ आदमी कौन है?' हम जवाब दिहेन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'यह जिब्राईल रहा जवन तोहरे पास तोहरे धार्मिक बातन के बारे मा सिखावै आय रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 63

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَبِي حَيَّانَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بَارِزًا لِلنَّاسِ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَلِقَائِهِ وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ الْآخِرِ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ وَلَكِنْ سَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا إِذَا وَلَدَتْ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا فَذَلِكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا تَطَاوَلَ رِعَاءُ الْغَنَمِ فِي الْبُنْيَانِ فَذَلِكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ فَتَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ{ إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ }الْآيَةَ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [इस्माइल बिन उलैया] से [अबू हयान] से [अबू ज़ुरअह] से [अबू हुरैरा] कहिन; 'एक दिन जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुसलमानों के बीच थे तो एक आदमी आकर पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, ईमान का होत है?' उ जवाब दिहिन: 'तुम अल्लाह, ओकरे स्वर्गदूतन, ओकरे किताबन, ओकरे रसूलन, ओकरे सभाओं मा विश्वास करत हौ, अऊर तुम आखिरी दिन कायामत के दिन मा विश्वास करत हौ'। उसने पूछा कि हे अल्लाह के रसूल इस्लाम क्या है ? उन्होंने जवाब दिया: 'तुम अल्लाह के इस्तमात करत हौ अऊर ओनके साथ कुछौ संगत नाहीं करत हौ, फर्ज नमाज पढ़ौ, फर्ज जकात पढ़ौ अऊर रमदलान के महीना मा रोजा रखौ'। उन्होंने फिर पूछा : 'हे अल्लाह के रसूल, इहसान क्या है?' उन्होंने जवाब दिया : 'तुम अल्लाह का अइसे पूजा करत हौ मानो तुम उनका देखत हो। अगर आप ओका नाहीं देखत हई, त उ वास्तव मा आपका देखत है'। उन्होंने फिर पूछा कि या रसूल अल्लाह दुनिया का अंत कब होगा? उ जवाब दिहिन: 'जेसे पूछा जात है, ऊ पूछै वाले से ज्यादा नाहीं जानत है। लेकिन मैं तोहका संकेतन के बारे मा बताउब; अगर एक गुलाम अपने मालिक के बच्चा का जन्म देत है, तौ उ संकेतन में से एक रहा। बकरी पालक इमारत बनावै मा प्रतिस्पर्धा करत हैं, ई संकेतन में से एक है। पाँच मा - अलौकिक समस्या के कुंजी - अल्लाह के अलावा केहू नाहीं जानत'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी: 'वास्तव में, केवल अल्लाह के पास क़यामत के दिन का ज्ञान है; अऊर उहै है जे बरसात करत है, अऊर जानत है कि गर्भ मा का है। अऊर केहू ई नाहीं जान सकत है - निश्चितता के साथ - कि उ कल का कोशिश करिहैं। अऊर केहू ई नाहीं जान सकत कि ऊ धरती पर कहाँ मरि जाई। सचमुच अल्लाह सर्व जानत है, सर्व जानत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 64

حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ صَالِحٍ أَبُو الصَّلْتِ الْهَرَوِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُوسَى الرِّضَا عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ الْحُسَيْنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِيمَانُ مَعْرِفَةٌ بِالْقَلْبِ وَقَوْلٌ بِاللِّسَانِ وَعَمَلٌ بِالْأَرْكَانِقَالَ أَبُو الصَّلْتِ لَوْ قُرِئَ هَذَا الْإِسْنَادُ عَلَى مَجْنُونٍ لَبَرَأَ

हमका बतावा गा है कि [सहल बिन अबू सहल] अऊर [मुहम्मद बिन इस्माइल] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुस सलाम बिन सालिह अबू अश शाल्ट अल हरावी] कहिन, हमसे [अली बिन मूसा अर रिडला] [अपने पिता] से [जाफर बिन मुहम्मद] से [अपने पिता] से [अली बिन अल हसन] से [अपने पिता] से [अली बिन अबू तालिब] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'ईमान दिल मा ज्ञान है, जीभ से बात, अऊर अंग से कर्म'। अबू ऐश शाल्ट ने कहा; 'यह सनद पगले को पढ़ा जाये तो ठीक हो जाये'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 65

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ أَوْ قَالَ لِجَارِهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन बसिस्यार] अऊर [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमसे कहिन है [स्यूबाह] कहिन; हम [कोतादह] का [अनास बिन मलिक] से एक हदीस बतावत सुने रहेन, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम में से कोई तब तक विश्वास नहीं करेगा जब तक कि वह अपने भाई से प्यार नहीं करेगा, या उसने कहा, 'अपने पड़ोसी से जैसा कि वह खुद से प्यार करत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 66

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَلَدِهِ وَوَالِدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन बसिस्यार] अऊर [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमसे कहिन है [स्यूबाह] कहिन; हम [कोतादह] [अनास बिन मलिक] से सुनेन, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम में से कोई तब तक विश्वास नहीं करेगा जब तक कि मैं उ व्यक्ति न बन जाऊं जेसे उ अपने बच्चन, अपने माता-पिता अऊर सब इंसानन से ज्यादा प्यार करत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 67

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ حَتَّى تُؤْمِنُوا وَلَا تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُّوا أَوَ لَا أَدُلُّكُمْ عَلَى شَيْءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُمْ أَفْشُوا السَّلَامَ بَيْنَكُمْ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [वाकी'] अऊर [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'उनके हाथ मा मोर आत्मा है, जब तक आप विश्वास नाहीं करब तब तक आप स्वर्ग मा प्रवेश नाहीं करब, अऊर जब तक आप एक दूसरे से प्यार करब तब तक आप विश्वास नाहीं करब। का हम तोहका एक अभ्यास देखावब कि अगर तू अभ्यास करब त तू एक दूसरे से प्यार करब? आप लोगन के बीच नमस्कार फैलावा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 68

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِبَابُ الْمُسْلِمِ فُسُوقٌ وَقِتَالُهُ كُفْرٌ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमेयर] कहिन, हमसे कहिन ['अफ्फान] कहिन, हमसे [स्यूबाह] [अल अमासी] से कहिन। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे कहिन [ईसा बिन यूनुस] कहिन, हमसे [अल अमासी] [अबू वैल] से [अब्दुल्ला] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुसलमान का निंदा करब दुष्टता है अऊर ओका मारब कफिर है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 69

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ الرَّازِيُّ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ فَارَقَ الدُّنْيَا عَلَى الْإِخْلَاصِ لِلَّهِ وَحْدَهُ وَعِبَادَتِهِ لَا شَرِيكَ لَهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ مَاتَ وَاللَّهُ عَنْهُ رَاضٍ قَالَ أَنَسٌ وَهُوَ دِينُ اللَّهِ الَّذِي جَاءَتْ بِهِ الرُّسُلُ وَبَلَّغُوهُ عَنْ رَبِّهِمْ قَبْلَ هَرْجِ الْأَحَادِيثِ وَاخْتِلَافِ الْأَهْوَاءِ وَتَصْدِيقُ ذَلِكَ فِي كِتَابِ اللَّهِ فِي آخِرِ مَا نَزَلَ يَقُولُ اللَّهُ { فَإِنْ تَابُوا } قَالَ خَلْعُ الْأَوْثَانِ وَعِبَادَتِهَا { وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوْا الزَّكَاةَ } وَقَالَ فِي آيَةٍ أُخْرَى { فَإِنْ تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوْا الزَّكَاةَ فَإِخْوَانُكُمْ فِي الدِّينِ } حَدَّثَنَا أَبُو حَاتِمٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى الْعَبْسِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ الرَّازِيُّ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ أَنَسٍ مِثْلَهُ

हमसे कहिन [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहिन, हमसे कहिन [अबू अहमद] कहिन, हमसे [अबू जाफर अर रज़ी] [रबी' बिन अनस] से [अनस बिन मलिक] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे अल्लाह के प्रति ईमानदारी के स्थिति मा मरत है, ओकर पूजा करत है अऊर ओकरे साथ साथी न करत है, नमाज का पालन करत है अऊर जकात देत है, तौ उ अल्लाह के प्रसन्नता मा मरत है'। अनस कहिन; 'वही रसूलन द्वारा लावा गा अल्लाह का धर्म है, उइ चर्चा अऊर कामुक विवादन के भ्रम से पहिले अपने रब्ब से पहुँचाइन। ई बात अल्लाह के किताब मा अवलोकित आयत के अंत मा मिलत है, अल्लाह कहत है: 'अगर उ लोग पश्चाताप करैं - अनस ने कहा; मूर्तियन अऊर ओनके दासता का त्याग करब, नमाज का पालन करब अऊर जकात देब'। उनके एक अउर शब्द मा: 'अगर उइ पश्चाताप करत हैं, नमाज का पालन करत हैं, जकात देत हैं, तौ उइ दीन मा आपके भाई हैं'। हमसे [अबू हातिम] कहिन, हमसे कहिन [उबैदुल्लाह बिन मूसा अल 'अबसी] कहिन, हमसे [अबू जाफर अर रज़ी] [अर रबी' बिन अनस] से बताइन हैं जइसे कि उपरोक्त हदीस।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 70

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا أَبُو جَعْفَرٍ عَنْ يُونُسَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ

हमसे कहिन [अहमद बिन अल अजहर] कहिन, हमसे कहिन [अबू अन नदलर] कहिन, हमसे कहिन [अबू जाफर] से [यूनुस] से [अल हसन] से [अबू हुरैरा] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुझे आदेश मिला कि जब तक लोग गवाही न दे कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है, अऊर मैं अल्लाह का दूत हौं, नमाज पढ़त अऊर जकात देत हौं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 71

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ بَهْرَامَ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ

हमसे कहिन [अहमद बिन अल अजहर] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन यूसुफ] कहिन, हमसे [अब्दुल हमीद बिन बहराम] से [स्याहर बिन हौस्याब] से [अब्दुर्रहमान बिन घनीम] से [मुआदज बिन जबल] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुझे आदेश मिला कि जब तक लोग गवाही न दें कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कोई भगवान नहीं है और वास्तव में मैं अल्लाह का दूत हौं, नमाज स्थापित करत हौं अउर जकात देत हौं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 72

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ الرَّازِيُّ أَنْبَأَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ اللَّيْثِيُّ حَدَّثَنَا نِزَارُ بْنُ حَيَّانَ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صِنْفَانِ مِنْ أُمَّتِي لَيْسَ لَهُمَا فِي الْإِسْلَامِ نَصِيبٌ أَهْلُ الْإِرْجَاءِ وَأَهْلُ الْقَدَرِ حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ الْبُخَارِيُّ سَعِيدُ بْنُ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ بْنُ خَارِجَةَ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ يَعْنِي ابْنَ عَيَّاشٍ عَنْ عَبْدِ الْوَهَّابِ بْنِ مُجَاهِدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَا الْإِيمَانُ يَزِيدُ وَيَنْقُصُ حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ الْبُخَارِيُّ حَدَّثَنَا الْهَيْثَمُ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ عَنْ حَرِيزِ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ الْحَارِثِ أَظُنُّهُ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ قَالَ الْإِيمَانُ يَزْدَادُ وَيَنْقُصُ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन इस्माइल अर रज़ी] कहिन, हमसे कहिन [यूनुस बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद अल लैट्स] कहिन, हमसे [निजर बिन हयान] से [इकरिमा] से [इब्न अब्बास] अऊर [जाबिर बिन अब्दुल्ला] दुइनौ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरी उम्मत के दुई समूह हैं जेकर इस्लाम मा बिल्कुल भी हिस्सा नाहीं है; मुरजीआह अऊर कादरिया के अनुयायी'। हमसे कहिन अबू उथमान अल बुखारी सैद बिन सद उ कहिन; हमका अल हैत्सम बिन खरीजा बताइन हैं, उ कहिन; हमका बताइस है कि इस्माइल - अर्थात् इब्न इयासी - अब्दुल वहाब बिन मुजाहिद से मुजाहिद से इब्न अब्बास अऊर अबू हुरैराह दुइनौ कहिन, 'विश्वास बढ़त अऊर घटत है'। हमसे कहिन अबू उथमान अल बुखारी कहिन, हमसे कहिन अल हैत्सम कहिन, हमका बताइन इस्माइल जरीर बिन उथमान से अल हरिथ से हम सोचा कि ई अबू दरदा से मुजाहिद से रहा` उ कहिन; 'विश्वास बढ़त अऊर कम होत जात है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 73

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَمُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍحَدَّثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ الصَّادِقُ الْمَصْدُوقُ أَنَّهُ يُجْمَعُ خَلْقُ أَحَدِكُمْ فِي بَطْنِ أُمِّهِ أَرْبَعِينَ يَوْمًا ثُمَّ يَكُونُ عَلَقَةً مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ يَكُونُ مُضْغَةً مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ يَبْعَثُ اللَّهُ إِلَيْهِ الْمَلَكَ فَيُؤْمَرُ بِأَرْبَعِ كَلِمَاتٍ فَيَقُولُ اكْتُبْ عَمَلَهُ وَأَجَلَهُ وَرِزْقَهُ وَشَقِيٌّ أَمْ سَعِيدٌ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إِلَّا ذِرَاعٌ فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الْكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ فَيَدْخُلُهَا وَإِنَّ أَحَدَكُمْ لَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَتَّى مَا يَكُونُ بَيْنَهُ وَبَيْنَهَا إِلَّا ذِرَاعٌ فَيَسْبِقُ عَلَيْهِ الْكِتَابُ فَيَعْمَلُ بِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَيَدْخُلُهَا

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] अऊर [मुहम्मद बिन फुदलैल] अऊर [अबू मुआविया]। एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [अली बिन मैमून अर रक्की] कहिन, हमसे [अबू मुआविया] अऊर [मुहम्मद बिन उबैद] [अल अमासी] से [जैद बिन वहाब] कहिन; [अब्दुल्लाह बिन मसूद] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमसे, एक ईमानदार और भरोसेमंद व्यक्ति से कहा है: 'तुम में से हर एक का सृष्टि चालीस दिन तक मां के पेट में जमा हो जात है जब तक कि ऊ खून का थक्का न बन जाय। फिर ई वइसने मांस का गांठ बन गवा, फिर अल्लाह ने उनके पास एक दूत भेजा, उनका चार वाक्य के साथ आदेश मिला, फिर उन्होंने कहा: 'अपने कर्म, अपनी मृत्यु अऊर अपनी जीविका के साथ-साथ अपनी दुख या खुशी भी लिखो'। ओकरे द्वारा जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, वास्तव मा तुममें से एक ने स्वर्ग के निवासियन के काम किहिन जब तक कि ओकरे अऊर स्वर्ग के बीच एक हाथ के अलावा कौनो दूरी नाहीं रही, लेकिन अभिलेख ओकरे पहिले तब तक रहा जब तक कि उ नरक के निवासियन के कामन का अंजाम नाहीं दिहिस अऊर अंततः नरक मा प्रवेश नाहीं करिस। अऊर सचमुच, तुममें से एक ने नरक के निवासियन के काम तब तक किहिन जब तक कि ओकरे अऊर नरक के बीच एक हाथ के अलावा कौनो दूरी नाइ रही, लेकिन अभिलेख ओकरे पहिले तब तक रहा जब तक कि उ स्वर्ग के निवासियन के काम नाहीं किहिन अऊर अंत मा उ स्वर्ग मा प्रवेश नाहीं किहिन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 74

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سِنَانٍ عَنْ وَهْبِ بْنِ خَالِدٍ الْحِمْصِيِّ عَنْ ابْنِ الدَّيْلَمِيِّ قَالَوَقَعَ فِي نَفْسِي شَيْءٌ مِنْ هَذَا الْقَدَرِ خَشِيتُ أَنْ يُفْسِدَ عَلَيَّ دِينِي وَأَمْرِي فَأَتَيْتُ أُبَيَّ بْنَ كَعْبٍ فَقُلْتُ أَبَا الْمُنْذِرِ إِنَّهُ قَدْ وَقَعَ فِي نَفْسِي شَيْءٌ مِنْ هَذَا الْقَدَرِ فَخَشِيتُ عَلَى دِينِي وَأَمْرِي فَحَدِّثْنِي مِنْ ذَلِكَ بِشَيْءٍ لَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يَنْفَعَنِي بِهِ فَقَالَ لَوْ أَنَّ اللَّهَ عَذَّبَ أَهْلَ سَمَاوَاتِهِ وَأَهْلَ أَرْضِهِ لَعَذَّبَهُمْ وَهُوَ غَيْرُ ظَالِمٍ لَهُمْ وَلَوْ رَحِمَهُمْ لَكَانَتْ رَحْمَتُهُ خَيْرًا لَهُمْ مِنْ أَعْمَالِهِمْ وَلَوْ كَانَ لَكَ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ ذَهَبًا أَوْ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ تُنْفِقُهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ مَا قُبِلَ مِنْكَ حَتَّى تُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ فَتَعْلَمَ أَنَّ مَا أَصَابَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُخْطِئَكَ وَأَنَّ مَا أَخْطَأَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُصِيبَكَ وَأَنَّكَ إِنْ مُتَّ عَلَى غَيْرِ هَذَا دَخَلْتَ النَّارَ وَلَا عَلَيْكَ أَنْ تَأْتِيَ أَخِي عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ فَتَسْأَلَهُ فَأَتَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ فَسَأَلْتُهُ فَذَكَرَ مِثْلَ مَا قَالَ أُبَيٌّ وَقَالَ لِي وَلَا عَلَيْكَ أَنْ تَأْتِيَ حُذَيْفَةَ فَأَتَيْتُ حُذَيْفَةَ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ مِثْلَ مَا قَالَا وَقَالَ ائْتِ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَاسْأَلْهُ فَأَتَيْتُ زَيْدَ بْنَ ثَابِتٍ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّ اللَّهَ عَذَّبَ أَهْلَ سَمَاوَاتِهِ وَأَهْلَ أَرْضِهِ لَعَذَّبَهُمْ وَهُوَ غَيْرُ ظَالِمٍ لَهُمْ وَلَوْ رَحِمَهُمْ لَكَانَتْ رَحْمَتُهُ خَيْرًا لَهُمْ مِنْ أَعْمَالِهِمْ وَلَوْ كَانَ لَكَ مِثْلُ أُحُدٍ ذَهَبًا أَوْ مِثْلُ جَبَلِ أُحُدٍ ذَهَبًا تُنْفِقُهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ مَا قَبِلَهُ مِنْكَ حَتَّى تُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ كُلِّهِ فَتَعْلَمَ أَنَّ مَا أَصَابَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُخْطِئَكَ وَمَا أَخْطَأَكَ لَمْ يَكُنْ لِيُصِيبَكَ وَأَنَّكَ إِنْ مُتَّ عَلَى غَيْرِ هَذَا دَخَلْتَ النَّارَ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [इशाक बिन सुलेमान] उ कहिन; हम [अबू सिनान] का [वहब बिन खालिद अल हिमशी] से [इब्न अद दैलामी] से सुनेन, उ कहिन; 'किस्मत के बारे मा मोर आत्मा मा कुछ अटक गा है। हमका चिंता रही कि ई हमार धर्म अऊर हमार कामकाज का नुकसान पहुँचाई, यहिसे हम [उबाई बिन काब] के पास गयेन। हम उनसे पूछेन; 'हे अबुल मुंडजीर, कुछ अइसन है जउन मोहि नियति के मामला मा परेशान करत है, मैं चिंतित हौं कि यहिसे मोर धर्म अउर मोर कामकाज का नुकसान होइ। तो इससे संबंधित कुछ बताओ, अल्लाह को इससे फायदा हो'। ऊ कहत है; 'अगर अल्लाह आकाश अऊर धरती के निवासियन का सजा देई, तौ उ ओनका सजा जरूर देई, अऊर उ ओनके साथे अन्याय नाहीं करी।' अगर उ दया देत, तौ ओकर दया ओनके कर्मन से अच्छा होत। अगर आपके पास माउंट उहुद जइसन सोना है अऊर फिर आप ओका अल्लाह के राह मा खर्च करब, तब तक ई स्वीकार नाहीं होई जब तक कि आप भाग्य मा विश्वास नाहीं करब। जान लीजिए कि जो तुम्हारा हिस्सा है, वह तुमसे अलग नहीं होगा, और जो तुम्हारा नहीं है, वह तुम्हारा हिस्सा नहीं होगा। अगर आप इनके अलावा अन्य परिस्थितियन मा मर जात हैं तौ आप नरक मा जइहैं। अगर तुम मेरे भाई, अब्दुल्ला बिन मसूद के पास आओ, तो उनसे पूछो तो कोई बुराई नहीं है'। त हम [अब्दुल्ला] के पास गयेन अऊर उनसे ई बारे मा पूछेन, अऊर उ कहिन जवन उबई कहिन। फिर उ मोसे कहिन, 'अगर तुम हुजैफा आवा तौ कुछौ बुराई नाहीं है'। तौ मैं [हुदजैफा] के पास गय अऊर उनसे यहिके बारे मा पूछेन। फिर उ जवाब दिहिन जइसे उ दुइनौ कहिन'। हुजइफा कहिन; 'जैद बिन थाबित के पास आओ और उनसे पूछो'। त हम [जैद बिन थाबित] के पास गयेन अऊर उनसे पूछेन, तब उ जवाब दिहिन, 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'अगर अल्लाह आकाश अऊर धरती के निवासियन का सजा देई, त निश्चित रूप से उ ओनका सजा देई, अऊर उ ओनके साथ अन्याय नाहीं करी। अगर उ दया देत, तौ ओकर दया ओनके कर्मन से अच्छा होत। अगर आपके पास माउंट उहुद जइसन सोना है अऊर फिर आप ओका अल्लाह के राह मा खर्च करब, तब तक ई स्वीकार नाहीं होई जब तक कि आप भाग्य मा विश्वास नाहीं करब। जान लीजिए कि जो तुम्हारा हिस्सा है, वह तुमसे अलग नहीं होगा, और जो तुम्हारा नहीं है, वह तुम्हारा हिस्सा नहीं होगा। अगर तुम इनके अलावा अउर परिस्थितियन मा मर जात हौ तौ तुम नरक मा जइहौ'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 75

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَكُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبِيَدِهِ عُودٌ فَنَكَتَ فِي الْأَرْضِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلَّا وَقَدْ كُتِبَ مَقْعَدُهُ مِنْ الْجَنَّةِ وَمَقْعَدُهُ مِنْ النَّارِ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَفَلَا نَتَّكِلُ قَالَ لَا اعْمَلُوا وَلَا تَتَّكِلُوا فَكُلٌّ مُيَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ ثُمَّ قَرَأَ{ فَأَمَّا مَنْ أَعْطَى وَاتَّقَى وَصَدَّقَ بِالْحُسْنَى فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْيُسْرَى وَأَمَّا مَنْ بَخِلَ وَاسْتَغْنَى وَكَذَّبَ بِالْحُسْنَى فَسَنُيَسِّرُهُ لِلْعُسْرَى }

हमसे कहिन है [उथमान बिन अबू स्याबाह] कहिन, हमसे कहिन हैं [वाकी]। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया] अऊर [वाकी'] से [अल अमासी] से [सद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] से [अली बिन अबू तालिब] उ कहिन: 'हम एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहुअलम के बगल मा बैठे रहेन जब उनकर हाथ अलाहिल रहा। उ ओका जमीन पर फेंक दिहिस फिर आपन माथा उठाइस अऊर कहिस: 'तुममें से हर एक का स्वर्ग मा एक आसन अऊर नरक मा एक आसन सौंपा गा है'। उनसे पूछा गया: 'हे अल्लाह के रसूल, अगर हम बस आत्मसमर्पण कर दे तो का होई?' उ जवाब दिहिस: 'नहीं, करत रहौ अऊर हार न मानौ। सबका ओकरे लिए जवन बनावा गा रहा, वहिके अनुसार आसान बनावा जाई'। फिर उ पढ़िन: 'जहाँ तक उ मनई के बात है जे अल्लाह के राह मा -अपना धन- देत है- अऊर धर्मनिष्ठ है, अऊर पुष्टि करत है कि सबसे अच्छा इनाम -स्वर्ग- है, तौ हम ओकरे लिए -एक आसान रास्ता- तैयार करब। अऊर जहाँ तक ओनके बारे मा जे शरारती हैं अऊर महसूस करत हैं कि उ पर्याप्त हैं, अऊर सबसे अच्छा इनाम से इनकार करत हैं, तब हम ओनके लिए एक कठिन रास्ता तैयार करब।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 76

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّنَافِسِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمُؤْمِنُ الْقَوِيُّ خَيْرٌ وَأَحَبُّ إِلَى اللَّهِ مِنْ الْمُؤْمِنِ الضَّعِيفِ وَفِي كُلٍّ خَيْرٌ احْرِصْ عَلَى مَا يَنْفَعُكَ وَاسْتَعِنْ بِاللَّهِ وَلَا تَعْجَزْ فَإِنْ أَصَابَكَ شَيْءٌ فَلَا تَقُلْ لَوْ أَنِّي فَعَلْتُ كَذَا وَكَذَا وَلَكِنْ قُلْ قَدَّرَ اللَّهُ وَمَا شَاءَ فَعَلَ فَإِنَّ لَوْ تَفْتَحُ عَمَلَ الشَّيْطَانِ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद अथ थानाफुसी] दुइनौ कहिन; हमका [अब्दुल्ला बिन इदरीस] से [रबिया बिन उथमान] से [मुहम्मद बिन यह्या बिन हिब्बान] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक मजबूत मोमिन एक कमजोर मोमिन से अच्छा अऊर अल्लाह से ज्यादा प्यारा है, अऊर हर एक मा अच्छाई है। आपके लिए फायदेमंद हर चीज के लिए उत्साहित रहें, अल्लाह से मदद मांगें और कमजोर न रहें। अगर आप कउनौ आपदा से टकरा जात हैं तौ कुछौ न बोलौ; 'अगर हम ई अऊर ई करित'। लेकिन हम कहित है; 'ई भगवान के फरमान है, उ जवन चाहे करत है'। काहे से कि 'अगर शैतान दरवाजा खोल दे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 77

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَيَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ سَمِعَ طَاوُسًا يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يُخْبِرُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ احْتَجَّ آدَمُ وَمُوسَى عَلَيْهِمَا السَّلَام فَقَالَ لَهُ مُوسَى يَا آدَمُ أَنْتَ أَبُونَا خَيَّبْتَنَا وَأَخْرَجْتَنَا مِنْ الْجَنَّةِ بِذَنْبِكَ فَقَالَ لَهُ آدَمُ يَا مُوسَى اصْطَفَاكَ اللَّهُ بِكَلَامِهِ وَخَطَّ لَكَ التَّوْرَاةَ بِيَدِهِ أَتَلُومُنِي عَلَى أَمْرٍ قَدَّرَهُ اللَّهُ عَلَيَّ قَبْلَ أَنْ يَخْلُقَنِي بِأَرْبَعِينَ سَنَةً فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى فَحَجَّ آدَمُ مُوسَى ثَلَاثًا

हमका बतावा गा है कि [हिस्याम बिन अम्मर] अऊर [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब] दुइनौ कहिन; हमसे [सुफयान बिन उयैना] [अमरू बिन दिनार] से कहिन है कि उ [थावस] का कहत सुने रहे; हम [अबू हुरैराह] का पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हमका उपदेश देत सुने रहेन, उ कहिन: 'आदम अऊर मूसा' अलैहिमस सलाम एक दूसरे से बहस किहिन। मूसा ने कहा: 'हे आदम तुम हमारे बाप हो। तुम हमका निराश किहे हौ अऊर अपने पाप के कारण हमका स्वर्ग से निकार दिहे हौ'। आदम ने जवाब दिया: 'हे मूसा, अल्लाह ने अपने वचन से तुम्हें चुना है और अपने हाथ से तुम्हें तौरात लिखा है। का तुम मोका ओन चीजन के लिए डांटत हौ जवन अल्लाह मोका चालीस साल बनावै से पहिले मोर खिलाफ तय किहिन हैं'। तौ आदम के तर्क से मूसा का हरावा गा, फिर आदम के तर्क से मूसा का हरावा गा। ऊ तीन बार दोहराइस।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 78

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيٍّ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ عَبْدٌ حَتَّى يُؤْمِنَ بِأَرْبَعٍ بِاللَّهِ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ وَبِالْبَعْثِ بَعْدَ الْمَوْتِ وَالْقَدَرِ

हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन जुरराह] कहिन, हमका [शरीक] से [मंसूर] से [रिब'ई] से [अली रदलियाल्लाहु अन्हू] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'नौकर जब तक चार बातन पर विश्वास न करि; अल्लाह मा विश्वास जेकर कौनो साथी नाहीं है, ई विश्वास कि हम अल्लाह के दूत हई, मृत्यु के बाद पुनरुत्थान मा विश्वास अऊर किस्मत मा विश्वास'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 79

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا طَلْحَةُ بْنُ يَحْيَى بْنِ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَمَّتِهِ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ دُعِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى جِنَازَةِ غُلَامٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ طُوبَى لِهَذَا عُصْفُورٌ مِنْ عَصَافِيرِ الْجَنَّةِ لَمْ يَعْمَلْ السُّوءَ وَلَمْ يُدْرِكْهُ قَالَ أَوَ غَيْرُ ذَلِكَ يَا عَائِشَةُ إِنَّ اللَّهَ خَلَقَ لِلْجَنَّةِ أَهْلًا خَلَقَهُمْ لَهَا وَهُمْ فِي أَصْلَابِ آبَائِهِمْ وَخَلَقَ لِلنَّارِ أَهْلًا خَلَقَهُمْ لَهَا وَهُمْ فِي أَصْلَابِ آبَائِهِمْ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिन, हमसे कहिन है [थलहा बिन यह्या बिन थलहा बिन उबैदुल्लाह] से अपनी चाची [ऐस्याह बिन थलहा] से [ऐस्याह उम्मुल मुकमिनिन रदलियाहु अन्हा] उ कहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अंसार से एक बच्चा के शरीर मा शामिल होवे के लिए आमंत्रित कीन गा रहा। त हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, ई स्वर्गीय कबूतर से एक कबूतर के लिए बहुत सौभाग्य है, उ कुछ बुरा नाहीं किहिन अऊर न ही ओसे सामना किहिन'। उ कहिन: 'या यहिके अलावा, हे ऐस्या, वास्तव मा अल्लाह ने अपने निवासियन के लिए एक जन्नत बनाई है। अल्लाह ने ओनके लिए ओनका तब बनावा जब उ ओनके पिता के पसलियन मा रहे। अल्लाह ने अपने निवासियन के लिए नरक भी बनावा। जब उ अपने पिता के पसलियन मा रहे, तब उ ओनका अपने लिए बनाइन।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 80

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ عَنْ زِيَادِ بْنِ إِسْمَعِيلَ الْمَخْزُومِيِّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَجَاءَ مُشْرِكُو قُرَيْشٍ يُخَاصِمُونَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْقَدَرِ فَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ{ يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلَى وُجُوهِهِمْ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ إِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ }

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [वाकी'] कहिस, हमसे कहिस है [सुफयान अत्स त्सौरी] से [जियाद बिन इस्माइल अल मखज़ुमी] से [मुहम्मद बिन अब्बाद बिन जाफर] से [अबू हुरैराह] उ कहिस; 'कुरैश के मुशरक पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से किस्मत के बारे में बहस करै आए रहे। तौ ई श्लोक उतरा: 'उ दिन उई नरक के आगि मा आपन मुँह झुकाइहैं। साकोर के नरक के लौ का महसूस करा। सचमुच, हम क़ोदर के साथ सब कुछ बनावत हैं।