Imam Ibnu Majah : 41
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ مَيْمُونِ بْنِ أَبِي شَبِيبٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [वाकी'] से [सुफयान] से [हबीब बिन अबू थाबित] से [मैमुन बिन अबू स्याब] से [मुघिरह बिन स्यूबाह] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई मुझसे हदीस पहुंचाता है, जबकि वह देखत है कि हदीस झूठ है, तो वह झूठों में से एक है'।
Imam Ibnu Majah : 42
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ بَشِيرِ بْنِ ذَكْوَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي الْمُطَاعِ قَالَ سَمِعْتُ الْعِرْبَاضَ بْنَ سَارِيَةَ يَقُولُقَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَوَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً وَجِلَتْ مِنْهَا الْقُلُوبُ وَذَرَفَتْ مِنْهَا الْعُيُونُ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَعَظْتَنَا مَوْعِظَةَ مُوَدِّعٍ فَاعْهَدْ إِلَيْنَا بِعَهْدٍ فَقَالَ عَلَيْكُمْ بِتَقْوَى اللَّهِ وَالسَّمْعِ وَالطَّاعَةِ وَإِنْ عَبْدًا حَبَشِيًّا وَسَتَرَوْنَ مِنْ بَعْدِي اخْتِلَافًا شَدِيدًا فَعَلَيْكُمْ بِسُنَّتِي وَسُنَّةِ الْخُلَفَاءِ الرَّاشِدِينَ الْمَهْدِيِّينَ عَضُّوا عَلَيْهَا بِالنَّوَاجِذِ وَإِيَّاكُمْ وَالْأُمُورَ الْمُحْدَثَاتِ فَإِنَّ كُلَّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ
हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन अहमद बिन बसीर बिन ज़ाकवान अदिमासिकी] कहिन, हमसे कहिन [अल वालिद बिन मुस्लिम] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन अल 'अला`] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन अबी अल मुथा'] उ कहिन; हम ['इरबादल बिन सरियाह] का कहत सुने रहेन; 'एक दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरे बीच मा खड़ा रहा। उ सलाह दिहिन जवन बहुतै मार्मिक रही, जेहिसे दिल काँप उठिन अऊर आंसू बहिन। फिर ई कहिस; 'हे अल्लाह के रसूल आपने हमको एक विदाई नसीहत दी है तो हमको वसीयत दो'। उ कहिन: 'तुमका अल्लाह से डरना चाही, एक हबासी गुलाम का भी सुनौ अऊर ओकर बात मानौ। अऊर मोर मरे के बाद तुमका बहुत भयानक विवाद देखब, एहसे तुमका मोर सुन्नत अऊर मार्गदर्शन पावै वाले रशिदुन खुलफौर के सुन्नत से चिपक के रहौ। अपने दाढ़ के दाँत से सुन्नत काटौ, अऊर बनावटी चीजन का पालन न करौ, काहे से कि वास्तव मा सब बिद'ह पाखंड है।'
Imam Ibnu Majah : 43
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ بِشْرِ بْنِ مَنْصُورٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ السَّوَّاقُ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ حَبِيبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو السُّلَمِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ الْعِرْبَاضَ بْنَ سَارِيَةَ يَقُولُوَعَظَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَوْعِظَةً ذَرَفَتْ مِنْهَا الْعُيُونُ وَوَجِلَتْ مِنْهَا الْقُلُوبُ فَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ هَذِهِ لَمَوْعِظَةُ مُوَدِّعٍ فَمَاذَا تَعْهَدُ إِلَيْنَا قَالَ قَدْ تَرَكْتُكُمْ عَلَى الْبَيْضَاءِ لَيْلُهَا كَنَهَارِهَا لَا يَزِيغُ عَنْهَا بَعْدِي إِلَّا هَالِكٌ مَنْ يَعِشْ مِنْكُمْ فَسَيَرَى اخْتِلَافًا كَثِيرًا فَعَلَيْكُمْ بِمَا عَرَفْتُمْ مِنْ سُنَّتِي وَسُنَّةِ الْخُلَفَاءِ الرَّاشِدِينَ الْمَهْدِيِّينَ عَضُّوا عَلَيْهَا بِالنَّوَاجِذِ وَعَلَيْكُمْ بِالطَّاعَةِ وَإِنْ عَبْدًا حَبَشِيًّا فَإِنَّمَا الْمُؤْمِنُ كَالْجَمَلِ الْأَنِفِ حَيْثُمَا قِيدَ انْقَادَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ الْمِسْمَعِيُّ حَدَّثَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ الْعِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الصُّبْحِ ثُمَّ أَقْبَلَ عَلَيْنَا بِوَجْهِهِ فَوَعَظَنَا مَوْعِظَةً بَلِيغَةً فَذَكَرَ نَحْوَهُ
हमका बतावा गा है कि [इस्माइल बिन बिसिर बिन मंसूर] अऊर [इशाक बिन इब्राहिम अस सव्वाक] दुइनौ कहिन; हमसे [अब्दुर्रहमान बिन महदी] से [मुआविया बिन सालिह] से [डलामरह बिन हबीब] से [अब्दुर्रहमान बिन अमरू अस सुलामी] से कहिन है कि उ ['इरबदल बिन सरिया] का कहत सुने रहे; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें एक ऐसी नसीहत दी कि आँसू बहे और दिल काँप उठे। यहिसे हम ओसे कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, ई वाकई विदाई सलाह है, तौ तुम हमका का वसीयत करत हौ?' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम्हारे लिए स्पष्ट मार्गदर्शन छोड़ा है, रात दिन जैसी है। मोर बाद केहू ओसे मुँह नाहीं मोड़ै, बल्कि उ नष्ट होइ जाई। तुममें से जे जिन्दा है, बहुत विवाद देखिहैं। तौ तुमका मोर सुन्नत से जवन पता है, ओसे चिपक के रहब जरूरी है, अऊर मोर मार्गदर्शन पावै वाले रशीदुन खुलफौर के सुन्नत से, ओन सुन्नतन का अपने दाढ़ के दाँत से काटौ। तुमका एक हबासी गुलाम के भी आज्ञाकारी होवे के चाही। आस्तिक वश मा ऊँट के समान है, जहाँ बंधा है वहाँ मान लेगा'। हमसे कहिन [यह्या बिन हकीम] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल मलिक बिन अश शब्बा अल मिसमाई] कहिन, हमसे [तसौर बिन यजीद] से [खालिद बिन मदन] से [अब्दुर्रहमान बिन अमरू] से ['इरबदल बिन सरिया] कहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका सुबह के नमाज मा अगुवाई किहिन, फिर हमरे तरफ मुड़िन अऊर बहुतै मार्मिक सलाह दिहिन'। फिर उ ऊपर के हदीस के अनुसार उल्लेख किहिन।
Imam Ibnu Majah : 44
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَأَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَطَبَ احْمَرَّتْ عَيْنَاهُ وَعَلَا صَوْتُهُ وَاشْتَدَّ غَضَبُهُ كَأَنَّهُ مُنْذِرُ جَيْشٍ يَقُولُ صَبَّحَكُمْ مَسَّاكُمْ وَيَقُولُ بُعِثْتُ أَنَا وَالسَّاعَةَ كَهَاتَيْنِ وَيَقْرِنُ بَيْنَ إِصْبَعَيْهِ السَّبَّابَةِ وَالْوُسْطَى وَيَقُولُ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ خَيْرَ الْأُمُورِ كِتَابُ اللَّهِ وَخَيْرُ الْهَدْيِ هَدْيُ مُحَمَّدٍ وَشَرُّ الْأُمُورِ مُحْدَثَاتُهَا وَكُلُّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ وَكَانَ يَقُولُ مَنْ تَرَكَ مَالًا فَلِأَهْلِهِ وَمَنْ تَرَكَ دَيْنًا أَوْ ضَيَاعًا فَعَلَيَّ وَإِلَيَّ
हमका बतावा गा है कि [सुवैद बिन सैद] अऊर [अहमद बिन थाबित अल जहदरी] दुइनौ कहिन; हमका [अब्दुल वहाब अत्स त्साकाफी] से [जाफर बिन मुहम्मद] से [अपने पिता] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] से कहिन है; 'जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उपदेश दिया तो उनकी आँखें लाल हो गईं, उनकी आवाज ऊँची थी और उनकी भावनाएं भावुक हो गईं, मानो उ सैनिकन का चेतावनी दे रहे हों, उ चिल्लाए: 'खबरदार, दुश्मन सुबह आएगा, दुपहरिया में दुश्मन आएगा! ' अऊर उ चिल्लाया: 'मुझे न्याय के दिन के आगमन के साथ इन -दुइ उंगली- के तरह भेजा गा रहा,' उ आपन दुइ उंगली एक साथ रखिन; तर्जनी अऊर बीच वाली उंगली। उ तब कहिन: ''अम्मा बा'दू; सचमुच, सबसे अच्छी चीज अल्लाह के किताब है अऊर सबसे अच्छी मार्गदर्शन मुहम्मद के मार्गदर्शन है, सबसे बुरी चीज उ है जवन बनावटी है, अऊर हर पाखंड पाखंड है'। अऊर उ हमेशा कहत रहें: 'जे संपत्ति छोड़त है, ऊ ओकरे वारिसन के लिए है। अउर जे कर्ज या भरोसा छोड़त है, मैं वहन करब'।
Imam Ibnu Majah : 45
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ بْنِ مَيْمُونٍ الْمَدَنِيُّ أَبُو عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّمَا هُمَا اثْنَتَانِ الْكَلَامُ وَالْهَدْيُ فَأَحْسَنُ الْكَلَامِ كَلَامُ اللَّهِ وَأَحْسَنُ الْهَدْيِ هَدْيُ مُحَمَّدٍ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَمُحْدِثَاتِ الْأُمُورِ فَإِنَّ شَرَّ الْأُمُورِ مُحْدَثَاتُهَا وَكُلُّ مُحْدَثَةٍ بِدْعَةٌ وَكُلُّ بِدْعَةٍ ضَلَالَةٌ أَلَا لَا يَطُولَنَّ عَلَيْكُمْ الْأَمَدُ فَتَقْسُوَ قُلُوبُكُمْ أَلَا إِنَّ مَا هُوَ آتٍ قَرِيبٌ وَإِنَّمَا الْبَعِيدُ مَا لَيْسَ بِآتٍ أَلَا أَنَّمَا الشَّقِيُّ مَنْ شَقِيَ فِي بَطْنِ أُمِّهِ وَالسَّعِيدُ مَنْ وُعِظَ بِغَيْرِهِ أَلَا إِنَّ قِتَالَ الْمُؤْمِنِ كُفْرٌ وَسِبَابُهُ فُسُوقٌ وَلَا يَحِلُّ لِمُسْلِمٍ أَنْ يَهْجُرَ أَخَاهُ فَوْقَ ثَلَاثٍ أَلَا وَإِيَّاكُمْ وَالْكَذِبَ فَإِنَّ الْكَذِبَ لَا يَصْلُحُ بِالْجِدِّ وَلَا بِالْهَزْلِ وَلَا يَعِدُ الرَّجُلُ صَبِيَّهُ ثُمَّ لَا يَفِي لَهُ فَإِنَّ الْكَذِبَ يَهْدِي إِلَى الْفُجُورِ وَإِنَّ الْفُجُورَ يَهْدِي إِلَى النَّارَ وَإِنَّ الصِّدْقَ يَهْدِي إِلَى الْبِرِّ وَإِنَّ الْبِرَّ يَهْدِي إِلَى الْجَنَّةِ وَإِنَّهُ يُقَالُ لِلصَّادِقِ صَدَقَ وَبَرَّ وَيُقَالُ لِلْكَاذِبِ كَذَبَ وَفَجَرَ أَلَا وَإِنَّ الْعَبْدَ يَكْذِبُ حَتَّى يُكْتَبَ عِنْدَ اللَّهِ كَذَّابًا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन उबैद बिन मैमून अल मदनी अबू उबैद] कहिन, हमसे [मेरे पिता] [मुहम्मद बिन जाफर बिन अबू कथिर] से [मूसा बिन उकबा] से [अबू इशाक] से [अबुल अह्वाश] से [अब्दुल्ला बिन मसूद] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'दोनों वचन अऊर मार्गदर्शन हैं। तो सबसे अच्छा शब्द कलामुल्ला है, और सबसे अच्छा मार्गदर्शन मुहम्मद का मार्गदर्शन है। कृपया जानौ, नई चीजन का न बनावा। सचमुच, सबसे बुरी चीजें नई चीजें -निर्मित- हैं, अऊर हर नई चीज बिद'ह है, अऊर हर बिद'ह पाखंड है। जानौ, बहुत देर तक सपना न देखौ, जब तक कि तुम्हार दिल कठोर न होइ जाय। जानौ कि सब कुछ आवै वाला है, अऊर जवन दूर है, उ कुछ अइसन है जवन नाहीं आवै वाला है। जान लीजिए कि दुखी वो है जो मा के पेट में दुखी होता है और सुखी व्यक्ति वो है जिसे दूसरे लोगों से सलाह दी जाय जानौ, सचमुच, मुसलमान का मारब कफि है, अऊर ओकर अपमान करब दुष्टता है। एक मुसलमान का अपने भाई से तीन दिन से ज्यादा बात न करना हलाल नहीं है। जानौ, झूठ बोलै से दूर रहौ, दरअसल झूठ बोलब जायज नाहीं है चाहे ऊ गंभीरता से कीन जाय या चंचलता से। केहू बच्चा से वादा न करै अऊर फिर वादा न निभावै। सचमुच, झूठ बोलै से पापपूर्ण कर्म होइहैं अऊर वास्तव मा पापपूर्ण कर्मन से नरक होइहैं। सचमुच, ईमानदारी से अच्छाई अऊर अच्छाई से स्वर्ग दिखाई देई। अऊर ई एक ईमानदार मनई से कहा जाई; उ ईमानदारी से काम किहिन अऊर अच्छा किहिन। जबकि झूठे लोगन से ई कहा जात है; उ झूठ अऊर पाप किहिन है। एक सेवक जवन हमेशा झूठ बोलत है, अल्लाह के नजर मा झूठा के रूप मा दर्ज कीन जाई'।
Imam Ibnu Majah : 46
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ خِدَاشٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ ح و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ وَيَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْتَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذِهِ الْآيَةَ{ هُوَ الَّذِي أَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ آيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ أُمُّ الْكِتَابِ وَأُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌ إِلَى قَوْلِهِ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُوا الْأَلْبَابِ }فَقَالَ يَا عَائِشَةُ إِذَا رَأَيْتُمْ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِيهِ فَهُمْ الَّذِينَ عَنَاهُمْ اللَّهُ فَاحْذَرُوهُمْ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन खालिद बिन खिदास] कहिन, हमसे कहिन [इस्माइल बिन उलैया] कहिन, हमसे कहिन [अय्यूब]। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे [अहमद बिन थाबित अल जहदरी] अऊर [यह्या बिन हकीम] से कहिन हैं, दुइनौ कहिन; हमसे [अब्दुल वहाब] ने कहा है, [अय्यूब] से [अब्दुल्लाह बिन अबू अवलका] से [ऐस्याह] ने कहा है,; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी- 'वही है जिसने आपके पास किताब - कुरान - उतराई है। यहिके सामग्री मा अइसन आयत हैं जवन निरपेक्ष हैं, जवन कुरान के मुख्य सामग्री हैं अऊर दूसर आयत हैं जवन मुतस्याबिहात हैं, जेहिसे उनके शब्दन तक पहुँचावा जात है: 'अऊर उनसे समझ के अलावा कौनो सबक नाहीं सीखा जा सकत है'। फिर उ कहिन: 'हे आयशा, अगर तुम लोगन का ई बारे मा बहस करत देखत हौ, तौ उ लोग उहै हैं जेकरे अल्लाह ने इरादा किहिन रहा, तौ ओनसे सावधान रहौ'।
Imam Ibnu Majah : 47
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ ح و حَدَّثَنَا حَوْثَرَةُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ دِينَارٍ عَنْ أَبِي غَالِبٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا ضَلَّ قَوْمٌ بَعْدَ هُدًى كَانُوا عَلَيْهِ إِلَّا أُوتُوا الْجَدَلَ ثُمَّ تَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ }الْآيَةَ
हमसे कहिन है [अली बिन अल मुंडजिर] कहिन, हमसे कहिन हैं [मुहम्मद बिन फुदलैल], अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [हौतसरह बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बिसिर] दुइनौ कहिन; हमका [हज्जाज बिन दीनार] [अबू गालिब] से [अबू उमामा] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक जनता जब तक मार्गदर्शन मा रही तब तक मार्गदर्शन के बाद भटक नाहीं जाई, सिवाय ओनके जे बहस करब पसंद करत हैं'। तब ई श्लोक पढ़िन- 'लेकिन ई लोग बहस करै का पसंद करै वाले लोग हैं'।
Imam Ibnu Majah : 48
حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْعَسْكَرِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيٍّ أَبُو هَاشِمِ بْنِ أَبِي خِدَاشٍ الْمَوْصِلِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِحْصَنٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ أَبِي عَبْلَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الدَّيْلَمِيِّ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ لِصَاحِبِ بِدْعَةٍ صَوْمًا وَلَا صَلَاةً وَلَا صَدَقَةً وَلَا حَجًّا وَلَا عُمْرَةً وَلَا جِهَادًا وَلَا صَرْفًا وَلَا عَدْلًا يَخْرُجُ مِنْ الْإِسْلَامِ كَمَا تَخْرُجُ الشَّعَرَةُ مِنْ الْعَجِينِ
हमसे कहिन [दाउद बिन सुलेमान अल 'असकारी] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अली अबू हसीम बिन अबू खिदासी अल मौशिली] उ कहिन; हमका [मुहम्मद बिन मिहशान] से [इब्राहिम बिन अबू 'अबला] से [अब्दुल्ला बिन अद दैलामी] से [हुज़दैफा] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह पाखंड करै वालेन का स्वीकार नाहीं करिहैं; उपवास, नमाज, दान, हज, उमरा, जेहाद, व्यवहार अऊर न्याय। उ इस्लाम से वइसने बाहर आवा जइसे आटा से बाल निकलत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 49
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مَنْصُورٍ الْحَنَّاطُ عَنْ أَبِي زَيْدٍ عَنْ أَبِي الْمُغِيرَةِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَى اللَّهُ أَنْ يَقْبَلَ عَمَلَ صَاحِبِ بِدْعَةٍ حَتَّى يَدَعَ بِدْعَتَهُ
हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन सैद] कहिन, हमसे [बिसिर बिन मंशुर अल हन्नाथ] [अबू जैद] से [अबू अल मुघिराह] से [अब्दुल्ला बिन अब्बास] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह एक पाखंडी के कामन का स्वीकार करै से तब तक हिचकिचात है जब तक कि उ आपन पाखंड छोड़ न दे'।
Imam Ibnu Majah : 50
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ وَهَارُونُ بْنُ إِسْحَقَ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ وَرْدَانَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَرَكَ الْكَذِبَ وَهُوَ بَاطِلٌ بُنِيَ لَهُ قَصْرٌ فِي رَبَضِ الْجَنَّةِ وَمَنْ تَرَكَ الْمِرَاءَ وَهُوَ مُحِقٌّ بُنِيَ لَهُ فِي وَسَطِهَا وَمَنْ حَسَّنَ خُلُقَةُ بُنِيَ لَهُ فِي أَعْلَاهَا
हमसे [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम अद दिमासिकी] अऊर [हारून बिन इशाक] से कहिन हैं, दुइनौ कहिन; हमका [इब्न अबू फुदैक] [सलामा बिन वारदान] से [अनस बिन मलिक] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि जो झूठ त्याग देगा, जबकि झूठा है, उसके लिए स्वर्ग के किनारे महल बन जायेगा। जे सही कहिके बहस त्यागै, ओकरे लिए सरग के बीच मा महल बनि जाई। जे आपन नैतिकता सुधारै, ओकरे खातिर परम स्वर्ग मा महल बनि जाई'।
Imam Ibnu Majah : 51
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ وَعَبْدَةُ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ ح و حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ وَمَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَحَفْصُ بْنُ مَيْسَرَةَ وَشُعَيْبُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَقْبِضُ الْعِلْمَ انْتِزَاعًا يَنْتَزِعُهُ مِنْ النَّاسِ وَلَكِنْ يَقْبِضُ الْعِلْمُ بِقَبْضِ الْعُلَمَاءِ فَإِذَا لَمْ يُبْقِ عَالِمًا اتَّخَذَ النَّاسُ رُءُوسًا جُهَّالًا فَسُئِلُوا فَأَفْتَوْا بِغَيْرِ عِلْمٍ فَضَلُّوا وَأَضَلُّوا
हमसे [अबू कुरैब] बताय के उ कहिन; हमका [अब्दुल्लाह बिन इदरीस] अऊर [अब्दह] अऊर [अबू मुआविया] अऊर [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] अऊर [मुहम्मद बिन बिसिर] बताइन हैं। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे [सुवैद बिन सैद] बताय के बाद उ कहिन; हमका [अली बिन मुशीर] अऊर [मलिक बिन अनस] अऊर [हफ्श बिन मैसरह] अऊर [स्यु'एब बिन इशाक] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [उनके पिता] से [अब्दुल्ला बिन अमरू बिन अल 'अश] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में अल्लाह सिर्फ इंसान से ज्ञान नहीं छीन लेत है। हालांकि, उलेमा का मार के ज्ञान छीन लेत है। बिलकुल भी पुण्यवान न बचे तो लोग मूरख नेताओं को ले लेंगे, जब पूछा जाएगा तो बिना ज्ञान के फतवा दे देंगे, फिर भटक जाएंगे और भटकाएंगे'।
Imam Ibnu Majah : 52
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي أَيُّوبَ حَدَّثَنِي أَبُو هَانِئٍ حُمَيْدُ بْنُ هَانِئٍ الْخَوْلَانِيُّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أُفْتِيَ بِفُتْيَا غَيْرَ ثَبَتٍ فَإِنَّمَا إِثْمُهُ عَلَى مَنْ أَفْتَاهُ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन यजीद] से [सैद बिन अबू अय्यूब] कहिन, हमका [अबू हानी` हुमैद बिन हानी` अल खौलानी] से [अबू उथमान मुस्लिम बिन यासर] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि जिसको फतवा दिया जाय जो सच नहीं है तो पाप उस फतवा देने वाले पर है
Imam Ibnu Majah : 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ الْهَمْدَانِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ وَجَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ أَنْعُمٍ هُوَ الْإِفْرِيقِيُّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعِلْمُ ثَلَاثَةٌ فَمَا وَرَاءَ ذَلِكَ فَهُوَ فَضْلٌ آيَةٌ مُحْكَمَةٌ أَوْ سُنَّةٌ قَائِمَةٌ أَوْ فَرِيضَةٌ عَادِلَةٌ
हमसे कहिन है [मुहम्मद इब्नुल 'अला` अल हमदानी] कहिन; मोका [रिसिदीन बिन सद] अऊर [जाफर बिन औन] से [इब्नू अन'म] - अर्थात् अल अफ्रीकी - [अब्दुर्रहमान बिन रफी'] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ज्ञान तीन हैं, जबकि बाकी केवल गुण हैं; मुहकामत आयत, सीधा सुन्नत अऊर निष्पक्ष फराइदल।
Imam Ibnu Majah : 54
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ حَمَّادٍ سَجَّادَةُ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأُمَوِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سَعِيدِ بْنِ حَسَّانَ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَيٍّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ قَالَلَمَّا بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْيَمَنِ قَالَ لَا تَقْضِيَنَّ وَلَا تَفْصِلَنَّ إِلَّا بِمَا تَعْلَمُ فَإِنْ أَشْكَلَ عَلَيْكَ أَمْرٌ فَقِفْ حَتَّى تَبَيَّنَهُ أَوْ تَكْتُبَ إِلَيَّ فِيهِ
हमसे कहिन [अल हसन बिन हम्माद सज्जादह] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन सईद अल उमावी] से [मुहम्मद बिन सईद बिन हसन] से [उबदह बिन नुसाई] से [अब्दुर्रहमान बिन घनीम] कहिन, हमसे कहिन [मुआदज बिन जबल] उ कहिन; जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोहि यमन भेजा, तो उन्होंने कहा: 'कभौ निर्धारित या फैसला न करौ, सिवाय आप जवन जानत हौ। अगर आपका कौनो समस्या का अनुभव होत है, तौ तब तक रुके रहौ जब तक कि ई स्पष्ट न होइ जाय या आप मोका एक चिट्ठी न लिखौ'।
Imam Ibnu Majah : 55
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الرِّجَالِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَمْرٍو الْأَوْزَاعِيِّ عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَمْ يَزَلْ أَمْرُ بَنِي إِسْرَائِيلَ مُعْتَدِلًا حَتَّى نَشَأَ فِيهِمْ الْمُوَلَّدُونَ أَبْنَاءُ سَبَايَا الْأُمَمِ فَقَالُوا بِالرَّأْيِ فَضَلُّوا وَأَضَلُّوا
हमसे कहिन [सुवैद बिन सईद] कहिन, हमसे [इब्नू अबू अर रिजल] से [अब्दुर्रहमान बिन अमरू अल औजाई] से ['अब्दुल्लाह बिन अबू लुबाबा] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल 'अश] कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'इसराइल के बच्चन के कामकाज तब तक स्थिर रहा जब तक कि कैदियन से वंशज नाहीं निकलिन। उइ तर्क का उपयोग कइके बहस करत हैं, यहिसे उइ गुमराह अऊर भ्रामक हैं'।
Imam Ibnu Majah : 56
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الطَّنَافِسِيُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِيمَانُ بِضْعٌ وَسِتُّونَ أَوْ سَبْعُونَ بَابًا أَدْنَاهَا إِمَاطَةُ الْأَذَى عَنْ الطَّرِيقِ وَأَرْفَعُهَا قَوْلُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَالْحَيَاءُ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ ح و حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ سُهَيْلٍ جَمِيعًا عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद अथ थनाफुस] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे [सुफयान] [सुहैल बिन अबू सालिह] से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ईमान मा उनसठ, या सत्तर दरवाजा होत हैं। सबसे निचला है सड़क से कांटे हटा रहा है, और सबसे ऊँचा है कहावत ला इलाहा इल्लाह -अल्ला के सिवाय कोई भगवान नहीं है-। लज्जा आस्था का हिस्सा है'। हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] उ कहिन; हमका [अबू खालिद अल अहमर] [इब्न अजलान] से बताइस है। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमका [अमरू बिन रफी'] कहिन, हमका [जरीर] [सुहैल] से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सब कुछ बताइन हैं जइसे कि ऊपर के हदीस।
Imam Ibnu Majah : 57
حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ أَبِي سَهْلٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَسَمِعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ فَقَالَ إِنَّ الْحَيَاءَ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِ
हमका बतावा गा है कि [सहल बिन अबू सहल] अऊर [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन यजीद] दुइनौ कहिन; हमका [सुफयान] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [अपने पिता] से कहिन है उ कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक आदमी को अपने भाई को शर्म के बारे में सलाह देते सुना। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा, शर्म ईमान का हिस्सा है'।
Imam Ibnu Majah : 58
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ كِبْرٍ وَلَا يَدْخُلُ النَّارَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ
हमसे कहिन [सुवैद बिन सैद] कहिन, हमसे [अली बिन मुशीर] [अल अमासी] से कहिन। अऊर एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन है [अली बिन मैमून अर रक्की] कहिन, हमसे कहिन हैं [सैद बिन मसलमा] से [अल अमासी] से [इब्राहिम] से [अलकमा] से [अब्दुल्ला] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जिसके दिल में सरसों के दाने का वजन अहंकार है, वह स्वर्ग में नहीं प्रवेश करेगा, और जिसके दिल में सरसों के दाने का वजन है, वह नरक में नहीं जाएगा'।
Imam Ibnu Majah : 59
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَلَّصَ اللَّهُ الْمُؤْمِنِينَ مِنْ النَّارِ وَأَمِنُوا فَمَا مُجَادَلَةُ أَحَدِكُمْ لِصَاحِبِهِ فِي الْحَقِّ يَكُونُ لَهُ فِي الدُّنْيَا أَشَدَّ مُجَادَلَةً مِنْ الْمُؤْمِنِينَ لِرَبِّهِمْ فِي إِخْوَانِهِمْ الَّذِينَ أُدْخِلُوا النَّارَ قَالَ يَقُولُونَ رَبَّنَا إِخْوَانُنَا كَانُوا يُصَلُّونَ مَعَنَا وَيَصُومُونَ مَعَنَا وَيَحُجُّونَ مَعَنَا فَأَدْخَلْتَهُمْ النَّارَ فَيَقُولُ اذْهَبُوا فَأَخْرِجُوا مَنْ عَرَفْتُمْ مِنْهُمْ فَيَأْتُونَهُمْ فَيَعْرِفُونَهُمْ بِصُوَرِهِمْ لَا تَأْكُلُ النَّارُ صُوَرَهُمْ فَمِنْهُمْ مَنْ أَخَذَتْهُ النَّارُ إِلَى أَنْصَافِ سَاقَيْهِ وَمِنْهُمْ مَنْ أَخَذَتْهُ إِلَى كَعْبَيْهِ فَيُخْرِجُونَهُمْ فَيَقُولُونَ رَبَّنَا أَخْرَجْنَا مَنْ قَدْ أَمَرْتَنَا ثُمَّ يَقُولُ أَخْرِجُوا مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ وَزْنُ دِينَارٍ مِنْ الْإِيمَانِ ثُمَّ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ وَزْنُ نِصْفِ دِينَارٍ ثُمَّ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍقَالَ أَبُو سَعِيدٍ فَمَنْ لَمْ يُصَدِّقْ هَذَا فَلْيَقْرَأْ{ إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ وَإِنْ تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِنْ لَدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا }
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन याह्या] कहिस है, हमसे कहिस है [अब्दुर्राज़ाक] कहिस है, हमसे कहिस है [मामर] से [जैद बिन असलम] से ['अथो` बिन यासर] से [अबू सैद अल खुदरी] उ कहिस; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर अल्लाह ने मुमिनन का नरक से उठावा है अऊर उ लोग सुरक्षित महसूस करत हैं, तौ दुनिया मा होए वाले अधिकार के मामलन मा आप में से एक के साथ अपने दोस्त के बीच कौनो भी बहस मोमिनन के अपने प्रभु के साथ अपने भाईयन के नरक मा डाले जाने के बारे में बहस से ज्यादा जोर से नाहीं होई'। उ कहिन: 'जो लोग बिसवास करत हैं, उई कहत हैं; 'हे हमरे प्रभु, हमरे भाई हमरे साथ नमाज पढ़त रहें, हमरे साथ रोजा रखत रहें, हमरे साथ हज करत रहें, लेकिन तुमने उनका नरक में काहे डाला! 'अल्लाह कहत है: 'जाओ अऊर ओनके बीच से ओनका बाहर लाओ जेका तुम जानत हौ'। सो वे उनके पास आइन औ उनके रूप ते पहिचानिन, उनके रूप अग्नि से न भस्म भए ॥ ओनमा से एक अपने दुइनौ बछड़न के हिस्सा तक आग से भस्म होइ गवा रहा। अऊर कुछ उनके टखनन तक आग से भस्म होइ चुका रहा। तौ उइ ओका निकारिन। तब उइ चिल्लाए; 'हमरे प्रभु, हम ओनका बाहर लइ आये हन जेका तू हमका आज्ञा दिहे अहा'। फिर उ कहिन: 'उन मनई का बाहर लावा जेकरे दिल मा एक दीनार के लायक विश्वास है। फिर उ मनई है जेकरे दिल मा आधा दीनार वजन के आस्था है। फिर उ मनई है जेकरे दिल मा सरसों के दाना के बराबर भारी विश्वास है'। अबू सैद ने कहा: 'जे ई बात का नाहीं मानत है, तौ ऊ पढ़े: 'सचमुच, अल्लाह एक कण के बराबर भी केहू के साथ अन्याय नाहीं करत है, अऊर अगर कण के बराबर कौनो गुण है, तौ अल्लाह निश्चित रूप से ओका गुणा करिहैं अऊर अपने से बहुत बड़ा इनाम देइहैं'।
Imam Ibnu Majah : 60
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ نَجِيحٍ وَكَانَ ثِقَةً عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ جُنْدُبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ فِتْيَانٌ حَزَاوِرَةٌ فَتَعَلَّمْنَا الْإِيمَانَ قَبْلَ أَنْ نَتَعَلَّمَ الْقُرْآنَ ثُمَّ تَعَلَّمْنَا الْقُرْآنَ فَازْدَدْنَا بِهِ إِيمَانًا
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे कहिन [हम्मद बिन नजीह] -उ त्सिकाह -भरोसा किहिन- - [अबू इमरान अल जौनी] से [जुंदुब बिन अब्दुल्ला] उ कहिन; 'जब हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहे, तब हम मजबूत जवान रहे। हम कुरान पढ़ै से पहिले ईमान पढ़ेन, फिर हम कुरान पढ़ेन, तौ हमार ईमान बढ़िगा'।