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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4301

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَسَدٍ حَدَّثَنَا أَبُو بَدْرٍ حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ خَيْثَمَةَ عَنْ نُعَيْمِ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُيِّرْتُ بَيْنَ الشَّفَاعَةِ وَبَيْنَ أَنْ يَدْخُلَ نِصْفُ أُمَّتِي الْجَنَّةَ فَاخْتَرْتُ الشَّفَاعَةَ لِأَنَّهَا أَعَمُّ وَأَكْفَى أَتُرَوْنَهَا لِلْمُتَّقِينَ لَا وَلَكِنَّهَا لِلْمُذْنِبِينَ الْخَطَّائِينَ الْمُتَلَوِّثِينَ

हमसे कहिस है [इस्माइल बिन असद] हमसे कहिस है [अबू बदर] हमसे कहिस है [जियाद बिन खैत्सामा] से [नूआइम बिन अबू हिंद] से [रिब'ई बिन हिरासी] से [अबू मूसा अल असियारी] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुझे अपने उम्मत के आधे हिस्से में से एक का चयन करै का कहा गा रहा, जेका शौफ्तार दइके स्वर्ग मा प्रवेश कीन जाई, यहिसे हम शौफ्तार का चुनेन, काहे से कि वास्तव मा शौफ्तार अधिक व्यापक अऊर अधिक पर्याप्त है। आपका क्या विचार है, क्या यह केवल उन्हें ही दिया जात है जो पुण्यवान हैं? नाहीं, लेकिन ई पापियन अऊर बहुत गलती करै वाले मनईन का भी दीन जात है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4302

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَجْتَمِعُ الْمُؤْمِنُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يُلْهَمُونَ أَوْ يَهُمُّونَ شَكَّ سَعِيدٌ فَيَقُولُونَ لَوْ تَشَفَّعْنَا إِلَى رَبِّنَا فَأَرَاحَنَا مِنْ مَكَانِنَا فَيَأْتُونَ آدَمَ فَيَقُولُونَ أَنْتَ آدَمُ أَبُو النَّاسِ خَلَقَكَ اللَّهُ بِيَدِهِ وَأَسْجَدَ لَكَ مَلَائِكَتَهُ فَاشْفَعْ لَنَا عِنْدَ رَبِّكَ يُرِحْنَا مِنْ مَكَانِنَا هَذَا فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ وَيَذْكُرُ وَيَشْكُو إِلَيْهِمْ ذَنْبَهُ الَّذِي أَصَابَ فَيَسْتَحْيِي مِنْ ذَلِكَ وَلَكِنْ ائْتُوا نُوحًا فَإِنَّهُ أَوَّلُ رَسُولٍ بَعَثَهُ اللَّهُ إِلَى أَهْلِ الْأَرْضِ فَيَأْتُونَهُ فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ وَيَذْكُرُ سُؤَالَهُ رَبَّهُ مَا لَيْسَ لَهُ بِهِ عِلْمٌ وَيَسْتَحْيِي مِنْ ذَلِكَ وَلَكِنْ ائْتُوا خَلِيلَ الرَّحْمَنِ إِبْرَاهِيمَ فَيَأْتُونَهُ فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ وَلَكِنْ ائْتُوا مُوسَى عَبْدًا كَلَّمَهُ اللَّهُ وَأَعْطَاهُ التَّوْرَاةَ فَيَأْتُونَهُ فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ وَيَذْكُرُ قَتْلَهُ النَّفْسَ بِغَيْرِ النَّفْسِ وَلَكِنْ ائْتُوا عِيسَى عَبْدَ اللَّهِ وَرَسُولَهُ وَكَلِمَةَ اللَّهِ وَرُوحَهُ فَيَأْتُونَهُ فَيَقُولُ لَسْتُ هُنَاكُمْ وَلَكِنْ ائْتُوا مُحَمَّدًا عَبْدًا غَفَرَ اللَّهُ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ وَمَا تَأَخَّرَ قَالَ فَيَأْتُونِي فَأَنْطَلِقُ قَالَ فَذَكَرَ هَذَا الْحَرْفَ عَنْ الْحَسَنِ قَالَ فَأَمْشِي بَيْنَ السِّمَاطَيْنِ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ ثُمَّ عَادَ إِلَى حَدِيثِ أَنَسٍ قَالَ فَأَسْتَأْذِنُ عَلَى رَبِّي فَيُؤْذَنُ لِي فَإِذَا رَأَيْتُهُ وَقَعْتُ سَاجِدًا فَيَدَعُنِي مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَدَعَنِي ثُمَّ يُقَالُ ارْفَعْ يَا مُحَمَّدُ وَقُلْ تُسْمَعْ وَسَلْ تُعْطَهْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَحْمَدُهُ بِتَحْمِيدٍ يُعَلِّمُنِيهِ ثُمَّ أَشْفَعُ فَيَحُدُّ لِي حَدًّا فَيُدْخِلُهُمْ الْجَنَّةَ ثُمَّ أَعُودُ الثَّانِيَةَ فَإِذَا رَأَيْتُهُ وَقَعْتُ سَاجِدًا فَيَدَعُنِي مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَدَعَنِي ثُمَّ يُقَالُ لِي ارْفَعْ مُحَمَّدُ قُلْ تُسْمَعْ وَسَلْ تُعْطَهْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَرْفَعُ رَأْسِي فَأَحْمَدُهُ بِتَحْمِيدٍ يُعَلِّمُنِيهِ ثُمَّ أَشْفَعُ فَيَحُدُّ لِي حَدًّا فَيُدْخِلُهُمْ الْجَنَّةَ ثُمَّ أَعُودُ الثَّالِثَةَ فَإِذَا رَأَيْتُ رَبِّي وَقَعْتُ سَاجِدًا فَيَدَعُنِي مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَدَعَنِي ثُمَّ يُقَالُ ارْفَعْ مُحَمَّدُ قُلْ تُسْمَعْ وَسَلْ تُعْطَهْ وَاشْفَعْ تُشَفَّعْ فَأَرْفَعُ رَأْسِي فَأَحْمَدُهُ بِتَحْمِيدٍ يُعَلِّمُنِيهِ ثُمَّ أَشْفَعُ فَيَحُدُّ لِي حَدًّا فَيُدْخِلُهُمْ الْجَنَّةَ ثُمَّ أَعُودُ الرَّابِعَةَ فَأَقُولُ يَا رَبِّ مَا بَقِيَ إِلَّا مَنْ حَبَسَهُ الْقُرْآنُ

हमसे कहिन है [नशर बिन अली] हमसे कहिन हैं [खालिद बिन अल हरिथ] हमसे [कतादाह] से [अनस बिन मलिक] से कहिन हैं कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'कामत के दिन, विश्वासी इकट्ठा होइहैं अऊर ओनका प्रेरित कीन जाई - या एक वृत्ति दीन जाई - कहिन - उई संदेह करत हैं-; 'हमका अपने रब्ब 'अज़्ज़ा वजल्ला से मध्यस्थता माँगै का चाही ताकि हम वहि जगह से आगे बढ़ सकित है जहाँ हम अबही हैं'। तब वे आदम अलैहिस सलाम के पास आए और कहा; 'हे आदम, तुम मानव जाति के पिता हौ, अल्लाह तुमका अपने हाथन से बनाइस अऊर अपने स्वर्गदूतन से तुम्हें प्रणाम कराइस, अऊर तुमका सब चीजन के नाम भी सिखाइस, तौ अपने रब्ब से शौफत माँगौ ताकि उ हमका हमरे जगह से हटा दे! ' त आदम कहिस; 'तुमका मतलब ई मैं नाहीं हउँ' तब आदम ने अपने किहे पापन का जिक्र किहिन, जेहिसे कि ई पापन ओनका अल्लाह से शर्मिंदा कइ दिहिन, -आदम कहिन-; लेकिन तुम नूह के पास आए काहे से कि उ पहिला दूत रहे जेका अल्लाह ने धरती पर भेजा रहा,' फिर उ लोग नूह के पास आए, लेकिन उ कहिन; 'यह हम नाहीं कहित है,' फिर उ शर्मिंदगी के हद तक बिना ज्ञान के अपने प्रभु से अपनी गलतियन अऊर अनुरोधन का जिक्र किहिन; 'लेकिन इब्राहिम के पास आओ, अर रहमान के प्रिय,' तो वे उनके पास आए, लेकिन उ भी कहिन; 'तुमका मतलब ई हमसे नाहीं है, बल्कि तुम मूसा के पास आवत हौ, एक सेवक जेसे अल्लाह सीधे बात किहिन अऊर तोराह दिहिन'। एह बरे उ पचे मूसा के पास आए अउर मूसा भी कहेस; 'तुमका मतलब है कि ई हम नाहीं हई,' जब उ बिना कौनो अच्छा कारण के मारे गए मनई का जिक्र करत रहेन; 'लेकिन तुम यीशु के पास आवा, अल्लाह के सेवक अऊर ओकर रसूल, ओकर वचन अऊर आत्मा'। त उइ यीशु के पास आए, तब यीशु ने भी कहा; 'आपका मतलब ई हमसे नाहीं है, बल्कि आप मुहम्मद के पास आवत हैं, एक सेवक जेकर पाप अल्लाह द्वारा माफ कर दिहिन हैं, अतीत अऊर भविष्य दुइनौ'। उ कहिन: 'त उइ मोर पास आए, फिर मैं चला गवा'। कथावाचक कहिन; 'फिर उ अल हसन से वाक्य का जिक्र किहिन, उ कहिन: तौ मैं विश्वासियन से लोगन के पंक्तियन के बीच चलत रहेंव'। कथावाचक कहिन; फिर वापस अनस के हदीस पर; उ कहिन: 'त हम अपने रब्ब से अनुमति माँगिन, तब हमका अनुमति मिली। जब हम अपने रब्ब का देखेन, त हम तुरंत सजदा करिन, फिर उ हमका सजद करै दिहिन जइसे उ चाहिन, तब ई कहा गा; 'हे मुहम्मद, जाग जा! बोलौ अऊर तोहका सुना जाई! माँगौ अऊर तोहका दीन जाई! अऊर मध्यस्थता माँगौ अऊर तोहका - मध्यस्थता करै का अधिकार-' दीन जाई। त हम ओनके प्रशंसा के साथ प्रशंसा किहिन जवन उ हमका सिखाइन, फिर हम मध्यस्थता किहिन अऊर उ हमका सीमा दिहिन, फिर हम लोगन का स्वर्ग मा प्रवेश दिहेन। फिर मैं दूसरी बार -अपने रब्ब के पास- लौटि गय, जब हम अपने रब्ब का देखेन त हम तुरंत सजदा करिन, फिर उ हमका सजदा करै दिहिन जइसे उ चाहत रहे। फिर ई कहिस; 'हे मुहम्मद, जाग जा! बोलौ अऊर तोहका सुना जाई! माँगौ अऊर तोहका दीन जाई! अऊर मध्यस्थता माँगौ तब तोहका - मध्यस्थता करै का अधिकार-' दीन जाई। तौ हम आपन माथा उठायेन अऊर ओनके प्रशंसा के साथे ओनके प्रशंसा किहेन जवन उ हमका सिखाइन, फिर हम मध्यस्थता किहिन अऊर उ हमका सीमा दिहिन, फिर हम लोगन का स्वर्ग मा प्रवेश दिहेन'। फिर मैं तीसरी बार -अपने रब्ब के पास- लौटि गय, अऊर जब हम अपने रब्ब का देखेन त हम तुरंत अपने रब्ब के सामने सजदा किहिन, फिर उ हमका अपने मन मुताबिक सजदा करै दिहिन। फिर ई कहिस; 'हे मुहम्मद, जाग जा! बोलौ अऊर तोहका सुना जाई! माँगौ अऊर तोहका दीन जाई! अऊर मध्यस्थता माँगौ तब तोहका - मध्यस्थता करै का अधिकार-' दीन जाई। तौ हम आपन माथा उठायेन अऊर ओनके प्रशंसा के साथे ओनके प्रशंसा किहेन जवन उ हमका सिखाइन, फिर हम मध्यस्थता किहिन अऊर उ हमका सीमा दिहिन, फिर हम लोगन का स्वर्ग मा प्रवेश दिहेन'। फिर मैं चौथी बार अपने रब्ब के पास लौटा, फिर मैं कहिन: 'हे रब्ब, कुरान से बाधित लोगन के अलावा कुछौ नाहीं बचा है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4303

قَالَ يَقُولُ قَتَادَةُ عَلَى أَثَرِ هَذَا الْحَدِيثِ وَحَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَكَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ شَعِيرَةٍ مِنْ خَيْرٍ وَيَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَكَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ بُرَّةٍ مِنْ خَيْرٍ وَيَخْرُجُ مِنْ النَّارِ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَكَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ ذَرَّةٍ مِنْ خَيْرٍ

-अभी भी पिछली हदीस के समान संचरण रेखा से- रावी ने कहा; [कतदाह] ने इस अत्सर हदीस के बारे में कहा है, अऊर हमसे [अनस बिन मलिक] बतावा है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'जो व्यक्ति ला इलाह इल्लाह कहता है - अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है - वह नरक से बाहर आ जाएगा अगर उसके दिल में अच्छाई हो तो एक दाना भी गेहूँ का का अच्छाई सरसों के साग का एक दाना भी है'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4304

حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَرْوَانَ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا عَنْبَسَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَلَّاقِ بْنِ أَبِي مُسْلِمٍ عَنْ أَبَانَ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَشْفَعُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ثَلَاثَةٌ الْأَنْبِيَاءُ ثُمَّ الْعُلَمَاءُ ثُمَّ الشُّهَدَاءُ

हमसे कहिन [सैद बिन मरवान] हमसे कहिन हैं [अहमद बिन यूनुस] हमसे कहिन हैं ['अनबसह बिन अब्दुर्रहमान] से ['अल्लाक बिन अबू मुस्लिम] से [अबन बिन 'उथमान] से ['उथमान बिन 'अफ्फान] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कियामत के दिन तीन समूह मध्यस्थता करिहैं, अर्थात्; नबी फिर विद्वानन अऊर शहीदन का।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4305

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ الطُّفَيْلِ بْنِ أُبَيِّ بْنِ كَعْبٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ كُنْتُ إِمَامَ النَّبِيِّينَ وَخَطِيبَهُمْ وَصَاحِبَ شَفَاعَتِهِمْ غَيْرَ فَخْرٍ

हमसे [इस्माइल बिन अब्दुल्लाह अर रक्की] बतावा गा है ['उबैदुल्लाह बिन अमरू] से [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन 'अकील] से [अत थुफैल बिन अबू उबै बिन काअब] से [उनके पिता] से कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैही वसल्लम ने कहा है: जब जुलाईज का दिन नेता आई, वल्लस नबियन अऊर ओनके प्रवक्ता, ओनके मध्यस्थता के मालिक जे घमंडी नाहीं है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4306

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ ذَكْوَانَ عَنْ أَبِي رَجَاءٍ الْعُطَارِدِيِّ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ الْحُصَيْنِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيَخْرُجَنَّ قَوْمٌ مِنْ النَّارِ بِشَفَاعَتِي يُسَمَّوْنَ الْجَهَنَّمِيِّينَ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिन हैं [यह्या बिन सईद] हमसे कहिन हैं [अल हसन बिन ज़ाकवान] से [अबू राजा` अल 'उथारिदी] से ['इमरान बिन हुशैन] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'एक लोग ओनसे निकलिहैं काहे से कि मोर शथ्य के कारण उ जुहान कहे जइहैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4307

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا خَالِدٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي الْجَدْعَاءِأَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَيَدْخُلَنَّ الْجَنَّةَ بِشَفَاعَةِ رَجُلٍ مِنْ أُمَّتِي أَكْثَرُ مِنْ بَنِي تَمِيمٍ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ سِوَاكَ قَالَ سِوَايَ قُلْتُ أَنْتَ سَمِعْتَهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَنَا سَمِعْتُهُ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन हैं ['अफ्फान] हमसे कहिन हैं [वुहैब] हमसे [खालिद] से [अब्दुल्ला बिन अबू स्याबा] से [अब्दुल्लाह बिन अबू जुदा`] से कहिन हैं कि उ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहत सुने हैं कि: आदमी जे बानी तमीम से अधिक संख्या मा है'। उइ -दोस्तन- पूछिन; 'हे अल्लाह के रसूल, कौन - का कोई है जो शौच करत है - आपके अलावा?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ, अपने अलावा अउर केहू'। अब्दुल्ला बिन स्याक ने कहा; 'का तुम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुनेन?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ, हम ओसे सुनेन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4308

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ جَابِرٍ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَ بْنَ عَامِرٍ يَقُولُ سَمِعْتُ عَوْفَ بْنَ مَالِكٍ الْأَشْجَعِيَّ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَدْرُونَ مَا خَيَّرَنِي رَبِّيَ اللَّيْلَةَ قُلْنَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّهُ خَيَّرَنِي بَيْنَ أَنْ يَدْخُلَ نِصْفُ أُمَّتِي الْجَنَّةَ وَبَيْنَ الشَّفَاعَةِ فَاخْتَرْتُ الشَّفَاعَةَ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ ادْعُ اللَّهَ أَنْ يَجْعَلَنَا مِنْ أَهْلِهَا قَالَ هِيَ لِكُلِّ مُسْلِمٍ

हमसे कहिस है [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे कहिस है [शदाकाह बिन खालिद] हमसे कहिस है [इब्न जाबीर] उ कहिन; हम [सुलेम बिन अमीर] का कहत सुने रहेन; हम ['औफ बिन मलिक अल अस्यजाई] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का तुम जानत हौ कि मोर रब्ब आज रात मोका का विकल्प दिहिस?' हम जवाब दिहेन; 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'वास्तव मा उ मोका आपन आधा उम्मत के स्वर्ग मा प्रवेश या शौफ्तार के अधिनियमन के बीच एक विकल्प दिहिन, यहिसे हम शवचय का चुनेन'। हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, हमरे लिए अल्लाह से दुआ करौ कि हमका शौफ्तार करै वालेन मा से एक बनावा जाय!'। उ जवाब दिहिन: 'श्याफात सब मुसलमानन पर लागू होत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4309

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي وَيَعْلَى قَالَا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ نُفَيْعٍ أَبِي دَاوُدَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ نَارَكُمْ هَذِهِ جُزْءٌ مِنْ سَبْعِينَ جُزْءًا مِنْ نَارِ جَهَنَّمَ وَلَوْلَا أَنَّهَا أُطْفِئَتْ بِالْمَاءِ مَرَّتَيْنِ مَا انْتَفَعْتُمْ بِهَا وَإِنَّهَا لَتَدْعُو اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ أَنْ لَا يُعِيدَهَا فِيهَا

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमीर] हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] अऊर [या'ला] दुइनौ कहिन; हमका [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [नुफाई अबू दाउद] से [अनस बिन मलिक] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, आपकी आग नरक के आग के सत्तर भागन में से एक हिस्सा है, अगर ई दुइ बार पानी से न बुझाई जाय, तौ आप निश्चित रूप से ओकर उपयोग नाहीं कर पइहैं, अऊर वास्तव में उ हमेशा अल्लाह अज्जा वजल्ला से प्रार्थना करत है कि उ ओका फिर से जहांनाम मा वापस न लौटावै।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4310

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اشْتَكَتْ النَّارُ إِلَى رَبِّهَا فَقَالَتْ يَا رَبِّ أَكَلَ بَعْضِي بَعْضًا فَجَعَلَ لَهَا نَفَسَيْنِ نَفَسٌ فِي الشِّتَاءِ وَنَفَسٌ فِي الصَّيْفِ فَشِدَّةُ مَا تَجِدُونَ مِنْ الْبَرْدِ مِنْ زَمْهَرِيرِهَا وَشِدَّةُ مَا تَجِدُونَ مِنْ الْحَرِّ مِنْ سَمُومِهَا

हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अब्दुल्ला बिन इदरीस] से [अल अमासी] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आग ने अपने प्रभु से शिकायत की, तो उन्होंने कहा; 'हे मोर रब्ब, मोर एक हिस्सा दूसर हिस्सा खात है'। यहिसे उ आगि का दुइ साँस बनाइस, जाड़ा के साँस अऊर गर्मी के साँस। डंक के कारण आप बहुत ठंडा हो जात हैं अऊर गर्म हवा के कारण आप बहुत गर्म हो जात हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4311

حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ الدُّورِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُوقِدَتْ النَّارُ أَلْفَ سَنَةٍ فَابْيَضَّتْ ثُمَّ أُوقِدَتْ أَلْفَ سَنَةٍ فَاحْمَرَّتْ ثُمَّ أُوقِدَتْ أَلْفَ سَنَةٍ فَاسْوَدَّتْ فَهِيَ سَوْدَاءُ كَاللَّيْلِ الْمُظْلِمِ

हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन मुहम्मद अद दूरी] हमसे कहिन है [यह्या बिन अबू बुकैर] हमसे कहिन है [शरीक] से [अशिम] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से उ कहिन: 'नरक के आग हजार साल तक जलावा जात है जब तक कि ई बहुत जला नाहीं जात है, फिर से एक साल तक जब तक कि ई बहुत लाल न होइ जाय अऊर फिर ई एक हजार साल तक फिर से प्रज्वलित कीन जात है जब तक कि ई बहुत काला न होइ जाय, यानी रात के अंधेरे के तरह'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4312

حَدَّثَنَا الْخَلِيلُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ الْحَرَّانِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُؤْتَى يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِأَنْعَمِ أَهْلِ الدُّنْيَا مِنْ الْكُفَّارِ فَيُقَالُ اغْمِسُوهُ فِي النَّارِ غَمْسَةً فَيُغْمَسُ فِيهَا ثُمَّ يُقَالُ لَهُ أَيْ فُلَانُ هَلْ أَصَابَكَ نَعِيمٌ قَطُّ فَيَقُولُ لَا مَا أَصَابَنِي نَعِيمٌ قَطُّ وَيُؤْتَى بِأَشَدِّ الْمُؤْمِنِينَ ضُرًّا وَبَلَاءً فَيُقَالُ اغْمِسُوهُ غَمْسَةً فِي الْجَنَّةِ فَيُغْمَسُ فِيهَا غَمْسَةً فَيُقَالُ لَهُ أَيْ فُلَانُ هَلْ أَصَابَكَ ضُرٌّ قَطُّ أَوْ بَلَاءٌ فَيَقُولُ مَا أَصَابَنِي قَطُّ ضُرٌّ وَلَا بَلَاءٌ

हमसे [अल खलील बिन अमरू] हमसे [मुहम्मद बिन सलामाह अल हररानी] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [हुमैद अत थाविल] से [अनस बिन मलिक] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कामत के दिन एक काफिर आएगा जिसने दुनिया में सबसे ज्यादा सुख महसूस किया तब कहा जाएगा; 'ओका नरक मा डुबोवा!'। यहिसे उ नरक मा डूब गा रहा। तब ओसे कहा गा; 'ओ फुलान, तनिक सुख मिला का?'। उ जवाब दिहिन; 'नहीं, हमका कभौं भी कउनौ सुख नाहीं मिला'। तब एक आस्तिक आवा जे सबसे ज्यादा दुख उठाइस रहा अऊर सबसे कठिन परीक्षण उठाइस रहा -जब दुनिया मा रहा-, अऊर ई कहा गा रहा -ओसे-; 'ओका स्वर्ग मा रखौ!'। यहिसे ओका स्वर्ग मा डाला गा रहा। तब उनसे पूछा; 'अरे फलाना, थोड़ा दुख या परीक्षण महसूस कर रहे हो का?' उ जवाब दिहिस; 'नहीं, हमका जरा भी दुख या परीक्षा महसूस नाहीं भै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4313

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ الْمُخْتَارِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْكَافِرَ لَيَعْظُمُ حَتَّى إِنَّ ضِرْسَهُ لَأَعْظَمُ مِنْ أُحُدٍ وَفَضِيلَةُ جَسَدِهِ عَلَى ضِرْسِهِ كَفَضِيلَةِ جَسَدِ أَحَدِكُمْ عَلَى ضِرْسِهِ

हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अब्दुर्रहमान] हमसे कहिस है [ईसा बिन अल मुह्तर] से [मुहम्मद बिन अबू लैला] से ['अथिया अल 'औफी] से [अबू सईद अल खुदरी] से पैगम्बर सल्लल्लाह वल्लाह अलैम ने कहा कि उ नाराज होइहैं: बढ़ो, ताकि ओनके दाँत पहाड़न उहुद से बड़ा होइहैं, अऊर ओकरे शरीर अऊर ओकरे दाढ़न के बीच का आकार - नरक के निवासी - आपके शरीर अऊर आपके दाढ़न के बीच के आकार के तरह होई।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4314

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ أَبِي هِنْدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ قَيْسٍ قَالَكُنْتُ عِنْدَ أَبِي بُرْدَةَ ذَاتَ لَيْلَةٍ فَدَخَلَ عَلَيْنَا الْحَارِثُ بْنُ أُقَيْشٍ فَحَدَّثَنَا الْحَارِثُ لَيْلَتَئِذٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ مِنْ أُمَّتِي مَنْ يَدْخُلُ الْجَنَّةَ بِشَفَاعَتِهِ أَكْثَرُ مِنْ مُضَرَ وَإِنَّ مِنْ أُمَّتِي مَنْ يَعْظُمُ لِلنَّارِ حَتَّى يَكُونَ أَحَدَ زَوَايَاهَا

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अब्दुर्रहीम बिन सुलेमान] [दाउद बिन अबू हिंद] से कहिन हैं [अब्दुल्ला बिन कैस] उ कहिन; एक रात, जब हम अबू बुरदाह के बगल मा रहेन, त अचानक [अल हरिथ बिन उकैस] हमसे मिले आए, उहै रात उ हमसे कहिन कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहिन: 'वास्तव मा, मोर उम्मत मा जे मोर शौफ्तार के कारण स्वर्ग मा प्रवेश करत हैं, उ मुलार कबीले से ज्यादा हैं, अऊर मोर उम्मत मा भी बड़े हैं। नरक अपने एक किनारे तक पहुँचै के लिए'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4315

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ يَزِيدَ الرَّقَاشِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُرْسَلُ الْبُكَاءُ عَلَى أَهْلِ النَّارِ فَيَبْكُونَ حَتَّى يَنْقَطِعَ الدُّمُوعُ ثُمَّ يَبْكُونَ الدَّمَ حَتَّى يَصِيرَ فِي وُجُوهِهِمْ كَهَيْئَةِ الْأُخْدُودِ لَوْ أُرْسِلَتْ فِيهَا السُّفُنُ لَجَرَتْ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] हमसे [मुहम्मद बिन उबैद] से [अल अमासी] से [यजीद अर रकासी] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'रोना नरक के निवासियन का भेजा गा रहा, जेहिसे कि निवासियन सब वहिमा रोए, जब तक कि ओनके आंसू खतम नाइ होइ गए, फिर उइ अपने चेहरा से खून के आंसू निकलत रोए ताकि पानी ओनके सामने एक नदी के तरह फैल गवा कि अगर जहाज आवत हैं, तौ जहाज ओमा पाल होइ जात हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4316

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَرَأَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنْتُمْ مُسْلِمُونَ }وَلَوْ أَنَّ قَطْرَةً مِنْ الزَّقُّومِ قَطَرَتْ فِي الْأَرْضِ لَأَفْسَدَتْ عَلَى أَهْلِ الدُّنْيَا مَعِيشَتَهُمْ فَكَيْفَ بِمَنْ لَيْسَ لَهُ طَعَامٌ غَيْرُهُ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे [इब्न अबू आदि] से [स्यूबाह] से [सुलेमान] से [मुजाहिद] से [इब्न अब्बास] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पढ़ा: 'हे इमानदार लोग, जब तक आपने सही मायने में आत्मसमर्पण नहीं किया है, तब तक न मरो, अगर ज़कुम के फल से बूंदें धरती पर टपकती हैं, तो यह सही मायने में धरती के निवासियों के जीवन को बर्बाद कर देगी, तो का होई अगर फल के अलावा अउर कुछ भोजन न हो?'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4317

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَادَةَ الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ مُحَمَّدٍ الزُّهْرِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَأْكُلُ النَّارُ ابْنَ آدَمَ إِلَّا أَثَرَ السُّجُودِ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَى النَّارِ أَنْ تَأْكُلَ أَثَرَ السُّجُودِ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन उबदह अल वशिथी] हमसे कहिन है [याकूब बिन मुहम्मद अज़ जुहरी] हमसे [इब्राहिम बिन सद] से [अज जुहरी] से [अथा बिन यजीद] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन हैं कि उ कहिन: जिनके पास सजदा के निशान हैं, काहे से कि अल्लाह ने नरक के आग से सजदा के निशान जलावै से मना करिन है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4318

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُؤْتَى بِالْمَوْتِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَيُوقَفُ عَلَى الصِّرَاطِ فَيُقَالُ يَا أَهْلَ الْجَنَّةِ فَيَطَّلِعُونَ خَائِفِينَ وَجِلِينَ أَنْ يُخْرَجُوا مِنْ مَكَانِهِمْ الَّذِي هُمْ فِيهِ ثُمَّ يُقَالُ يَا أَهْلَ النَّارِ فَيَطَّلِعُونَ مُسْتَبْشِرِينَ فَرِحِينَ أَنْ يُخْرَجُوا مِنْ مَكَانِهِمْ الَّذِي هُمْ فِيهِ فَيُقَالُ هَلْ تَعْرِفُونَ هَذَا قَالُوا نَعَمْ هَذَا الْمَوْتُ قَالَ فَيُؤْمَرُ بِهِ فَيُذْبَحُ عَلَى الصِّرَاطِ ثُمَّ يُقَالُ لِلْفَرِيقَيْنِ كِلَاهُمَا خُلُودٌ فِيمَا تَجِدُونَ لَا مَوْتَ فِيهَا أَبَدًا

हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [मुहम्मद बिन बिसिर] [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जब कायामत का दिन होई, तब मृत्यु होई। फिर ऊ शिरथ पुल के बीच मा रुका। तौ कहा जात है; 'हे स्वर्ग के निवासी'। उइ जहाँ रहे वहिसे निकारे जाए के डर के साथ मुड़े। फिर ई कहिस; 'हे नरक के निवासी'। यहिसे उइ जहाँ से रहे वहिसे मुक्त होए के खुशी अऊर गर्व के भावना के साथ मुड़े। फिर ई कहिस; 'का तुम लोग ई जानत हौ?' उइ जवाब दिहिन; 'हाँ, ई मौत है'। -अल्लाह के रसूल ने कहा-: 'त हुकुम हुआ कि मौत लाई जाय। फिर शिरथ पुल पै वध कीन गा। फिर दुइनौ टोली से कहा गा; 'तुम जवन जगह पाए हौ, वहि जगह -तुम- रहौ, अऊर वहिमा फिर कबहूँ मृत्यु न होई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4319

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَعْدَدْتُ لِعِبَادِيَ الصَّالِحِينَ مَا لَا عَيْنٌ رَأَتْ وَلَا أُذُنٌ سَمِعَتْ وَلَا خَطَرَ عَلَى قَلْبِ بَشَرٍقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَمِنْ بَلْهَ مَا قَدْ أَطْلَعَكُمْ اللَّهُ عَلَيْهِ اقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ{ فَلَا تَعْلَمُ نَفْسٌ مَا أُخْفِيَ لَهُمْ مِنْ قُرَّةِ أَعْيُنٍ جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ }قَالَ وَكَانَ أَبُو هُرَيْرَةَ يَقْرَؤُهَا مِنْ قُرَّاتِ أَعْيُنٍ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैराह] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह अज्जा वजल्ला ने कहा; 'मैं अपने धर्मी सेवकन के लिए कुछ अइसन तैयार किहे हउँ जेका कउनो आँखि नाहीं देखिस, कउनो कान नाहीं सुना, अऊर कउनो मानव हृदय कबो पार नाहीं किहिस।' अबू हुरैरा कहिन; 'तुममें से जेके मन का उजागर कीन गा है, तौ पढ़ौ, अगर तुम चाहौ: 'कोऊ नाहीं जाने कि उनके लिए का छुपा है, अर्थात् - विविध आशीर्वाद - आँखिन का प्रिय, उनके किहे के बदले में'। क्यूएस अस सजदह; 17.

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4320

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ حَجَّاجٍ عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَشِبْرٌ فِي الْجَنَّةِ خَيْرٌ مِنْ الْأَرْضِ وَمَا عَلَيْهَا الدُّنْيَا وَمَا فِيهَا

हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [हज्जाज] से ['अथिया] से [अबू सैद अल खुदरी] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उ कहिन: 'सचमुच स्वर्ग मा एक इंच धरती से अच्छा है अऊर धरती पर सब कुछ है जवन चेहरा मा है अऊर सब कुछ है'।