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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4281

حَدَّثَنَا جُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى بْنُ أَبِي الْمُسَاوِرِ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَمَعَ اللَّهُ الْخَلَائِقَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أُذِنَ لِأُمَّةِ مُحَمَّدٍ فِي السُّجُودِ فَيَسْجُدُونَ لَهُ طَوِيلًا ثُمَّ يُقَالُ ارْفَعُوا رُءُوسَكُمْ قَدْ جَعَلْنَا عِدَّتَكُمْ فِدَاءَكُمْ مِنْ النَّارِ

हमसे [जुब्बारा बिन अल मुघल्लास] हमसे [अब्दुल अ'ला बिन अबू अल मुसवीर] [अबू बुरदह] से [अपने पिता] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर अल्लाह क़ामत के दिन अपनी प्राणी इकट्ठा करै तो मुहम्मद के लोगन का सजदा करै का इजाजत है, यहिसे उ बहुत देर तक सजदा करत हैं, तब ओनसे कहा जाई: 'अपना माथा उठावा, निश्चय ही हम नरक के आग से फिरौती बनाये हैं।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4282

حَدَّثَنَا جُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ سُلَيْمٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ هَذِهِ الْأُمَّةَ مَرْحُومَةٌ عَذَابُهَا بِأَيْدِيهَا فَإِذَا كَانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ دُفِعَ إِلَى كُلِّ رَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ رَجُلٌ مِنْ الْمُشْرِكِينَ فَيُقَالُ هَذَا فِدَاؤُكَ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन है [जुब्बारा बिन अल मुघल्लास] हमसे [कत्सिर बिन सुलेम] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में ई उम्मत एक प्रिय उम्मत है, ओकर सजा ओकरे दुइनौ हाथन के बीच है, अगर क़ामत का दिन आवा है, तौ एक मुसलमान मुशरीकियन में से एक का धक्का देई, ई कहते हुए; 'ई नरक के आग से तोहार फिरौती है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4283

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ لِلَّهِ مِائَةَ رَحْمَةٍ قَسَمَ مِنْهَا رَحْمَةً بَيْنَ جَمِيعِ الْخَلَائِقِ فَبِهَا يَتَرَاحَمُونَ وَبِهَا يَتَعَاطَفُونَ وَبِهَا تَعْطِفُ الْوَحْشُ عَلَى أَوْلَادِهَا وَأَخَّرَ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ رَحْمَةً يَرْحَمُ بِهَا عِبَادَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू सैबा] हमसे कहिन है [यजीद बिन हारून] हमसे कहिन है [अब्दुल मलिक] से [अथा] से [अबू हुरैराह] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उ कहिन: 'वास्तव मा, अल्लाह के पास सौ आशीर्वाद अऊर एक दया बाँटी जात है, जेकरे साथ एक दूसरे के साथ, अऊर दया करत हैं। उइ एक दूसरे से भी प्यार करत हैं, जेहिसे जंगली जानवर अपने बच्चन से प्यार करत हैं। अऊर उ उनतीस अनुग्रह छोड़ि दिहिन हैं जवन पुनरुत्थान के दिन उनके सेवकन का दीन जइहैं।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4284

حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ وَأَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَلَقَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ يَوْمَ خَلَقَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضَ مِائَةَ رَحْمَةٍ فَجَعَلَ فِي الْأَرْضِ مِنْهَا رَحْمَةً فَبِهَا تَعْطِفُ الْوَالِدَةُ عَلَى وَلَدِهَا وَالْبَهَائِمُ بَعْضُهَا عَلَى بَعْضٍ وَالطَّيْرُ وَأَخَّرَ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ فَإِذَا كَانَ يَوْمُ الْقِيَامَةِ أَكْمَلَهَا اللَّهُ بِهَذِهِ الرَّحْمَةِ

हमका बतावा गा है कि [अबू कुरैब] अऊर [अहमद बिन सिनान] दुइनौ कहिन; हमका [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू शालिह] से [अबू सैद] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह अज्जा वजल्ला ने उस दिन सौ बरकत बनाई है जब उन्होंने आकाश और धरती बनाई है। अऊर उ धरती के चेहरा पर एक अनुग्रह रखिन, जेहिसे एक महतारी अपने बच्चा से प्यार कर सकत है, जानवर एक दूसरे से प्यार करत हैं, साथ ही पक्षी भी। अऊर उ न्याय के दिन तक उन्नीस अनुग्रह छोड़ि दिहिन हैं। त जब क़यामत का दिन आवत है, तौ अल्लाह ई कृपा से ओका पूरा करिहैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4285

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَمَّا خَلَقَ الْخَلْقَ كَتَبَ بِيَدِهِ عَلَى نَفْسِهِ إِنَّ رَحْمَتِي تَغْلِبُ غَضَبِي

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] अऊर [अबू बकर बिन अबू स्याबा] दुइनौ कहिन; हमका [अबू खालिद अल अहमर] से [इब्न अल अजलान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जब अल्लाह अज्जा वजल्ला ने अपनी प्राणी बनाई, तो उ खुद से वादा किहिन; सचमुच, मोर दया मोर क्रोध पर विजय पावत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4286

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عُمَيْرٍ عَنْ ابْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَمَرَّ بِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا عَلَى حِمَارٍ فَقَالَ يَا مُعَاذُ هَلْ تَدْرِي مَا حَقُّ اللَّهِ عَلَى الْعِبَادِ وَمَا حَقُّ الْعِبَادِ عَلَى اللَّهِ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّ حَقَّ اللَّهِ عَلَى الْعِبَادِ أَنْ يَعْبُدُوهُ وَلَا يُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَحَقُّ الْعِبَادِ عَلَى اللَّهِ إِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ أَنْ لَا يُعَذِّبَهُمْ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल मलिक बिन अबू अस स्यावरीब] हमसे कहिन हैं [अबू 'अवाना] हमसे [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [इब्नू अबू लैला] से [मुआदज बिन जबल] कहिन हैं; 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे पास से गुजरे, जब मैं गधे पर रहा तो पूछा: 'हे मुआज़, क्या तुम जानते हो कि अल्लाह के अधिकार अपने सेवकों पर क्या है? अउर एक सेवक का अल्लाह के प्रति का अधिकार है?' हम जवाब दिहेन; 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'वास्तव मा अल्लाह का अपने सेवकन के प्रति अधिकार ई है कि उ ओनके पूजा करैं अऊर ओनके साथ कुछौ न जोड़ैं, जबकि एक सेवक का अल्लाह के प्रति अधिकार ई है कि अगर उ अइसन करत हैं, तौ उ ओनका सजा नाहीं देई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4287

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ أَعْيَنَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ يَحْيَى الشَّيْبَانِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بْنِ حَفْصٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَكُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَعْضِ غَزَوَاتِهِ فَمَرَّ بِقَوْمٍ فَقَالَ مَنْ الْقَوْمُ فَقَالُوا نَحْنُ الْمُسْلِمُونَ وَامْرَأَةٌ تَحْصِبُ تَنُّورَهَا وَمَعَهَا ابْنٌ لَهَا فَإِذَا ارْتَفَعَ وَهَجُ التَّنُّورِ تَنَحَّتْ بِهِ فَأَتَتْ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَتْ أَنْتَ رَسُولُ اللَّهِ قَالَ نَعَمْ قَالَتْ بِأَبِي أَنْتَ وَأُمِّي أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَرْحَمِ الرَّاحِمِينَ قَالَ بَلَى قَالَتْ أَوَلَيْسَ اللَّهُ بِأَرْحَمَ بِعِبَادِهِ مِنْ الْأُمِّ بِوَلَدِهَا قَالَ بَلَى قَالَتْ فَإِنَّ الْأُمَّ لَا تُلْقِي وَلَدَهَا فِي النَّارِ فَأَكَبَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَبْكِي ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ إِلَيْهَا فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يُعَذِّبُ مِنْ عِبَادِهِ إِلَّا الْمَارِدَ الْمُتَمَرِّدَ الَّذِي يَتَمَرَّدُ عَلَى اللَّهِ وَأَبَى أَنْ يَقُولَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ

हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे कहिन हैं [इब्राहिम बिन अयान] हमसे कहिन हैं [इस्माइल बिन याह्या अस स्याबानी] से [अब्दुल्ला बिन उमर बिन हफश] से [नफी'] से [इब्न उमर] उ कहिन; 'जब हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक लड़ाई में रहे, तब उ एक लोगन से मिले, फिर उ पूछिन: 'वे कौन हैं?' उइ जवाब दिहिन; 'हम मुसलमान हैं', और एक औरत और उसका बच्चा चूल्हा जला रहे थे, जब लौ बड़ी हुई तो औरत अपने बच्चा को लेकर चली गई, फिर वह पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आई और बोली; "का तुम अल्लाह के रसूल हौ?" उ जवाब दिहिस; "हाँ" औरत ने पूछा; "मेरे पिता अऊर माता आपके फिरौती के रूप मा। का अल्लाह दयालुओं मा सबसे दयालु नाहीं है?" उ जवाब दिहिस; "ठीक है" उ पूछिन; "का अल्लाह अपने सेवकन पर जतना दयालु नाहीं है, ओसे ज्यादा दयालु नाहीं है, जेतना कि एक महतारी अपने बच्चा के प्रति करत है?" औरत कहिस; "निश्चित रूप से एक महतारी अपने बच्चा का आग मा नाहीं फेंकत?" तौ पैगम्बर रोवत-रोवत मुँह नीचे लेट गें, फिर औरत का देखै के लिए आपन सिर उठाइन अऊर कहिन: "वास्तव मा, अल्लाह अपने सेवकन का सजा नाहीं देई सिवाय जिद्दी असंतुष्टन के जे अल्लाह के अवहेलना करत हैं अऊर ला इलाहा इल्लाहु कहै से मना करत हैं।"

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4288

حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ الْوَلِيدِ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ هَاشِمٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عَبْدِ رَبِّهِ بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ النَّارَ إِلَّا شَقِيٌّ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَمَنْ الشَّقِيُّ قَالَ مَنْ لَمْ يَعْمَلْ لِلَّهِ بِطَاعَةٍ وَلَمْ يَتْرُكْ لَهُ مَعْصِيَةً

हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन अल वलिद अद दिमासिकी] हमसे कहिन है [अमरू बिन हसीम] हमसे [अब्द रब्बी बिन सैद] से [सैद अल मकबुरी] से [अबू हुरैरा] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक दरिद्र व्यक्ति के अलावा कोई भी नरक में नहीं जाएगा'। कहेन; 'हे रसूल अल्लाह कौन है दरिद्र व्यक्ति?' उ जवाब दिहिन: 'जो मनई आज्ञाकारी है अऊर अवज्ञा भी छोड़ देत है, उ अल्लाह के खातिर नाहीं है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4289

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ حَدَّثَنَا سُهَيْلُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَخُو حَزْمٍ الْقُطَعِيِّ حَدَّثَنَا ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَرَأَ أَوْ تَلَا هَذِهِ الْآيَةَ{ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَى وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ }فَقَالَ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنَا أَهْلٌ أَنْ أُتَّقَى فَلَا يُجْعَلْ مَعِي إِلَهٌ آخَرُ فَمَنْ اتَّقَى أَنْ يَجْعَلَ مَعِي إِلَهًا آخَرَ فَأَنَا أَهْلٌ أَنْ أَغْفِرَ لَهُقَالَ أَبُو الْحَسَنِ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَاهُ إِبْرَاهِيمُ بْنُ نَصْرٍ حَدَّثَنَا هُدْبَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي حَزْمٍ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فِي هَذِهِ الْآيَةِ{ هُوَ أَهْلُ التَّقْوَى وَأَهْلُ الْمَغْفِرَةِ }قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَبُّكُمْ أَنَا أَهْلٌ أَنْ أُتَّقَى فَلَا يُشْرَكَ بِي غَيْرِي وَأَنَا أَهْلٌ لِمَنْ اتَّقَى أَنْ يُشْرِكَ بِي أَنْ أَغْفِرَ لَهُ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [जियाद बिन हबाब] हमसे कहिन है [सुहैल बिन अब्दुल्ला उनकर भाई हजम बिन अल कथ'ई] हमसे [थाबित अल बुनानी] से [अनस बिन मलिक] से कहिन है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ई गौरव पढ़ा है, अर्थात् अल्लाह - हमका - ओसे डरब अऊर माफ करै का अधिकार है'। -क्यूएस अल मुदातसिर; 56- उन्होंने कहा: 'अल्लाह अज्जा वजल्ला कहते हैं: 'मैं एक ऐसा जीव हूं जिससे डरना चाहिए, इसलिए मेरे साथ कोई दूसरा भगवान नहीं बनाया जाना चाहिए, इसलिये जो कोई भी दूसरे भगवान के साथ मेरे साथ रहने से डरता है, तो मुझे उसे माफ करने का अधिकार है'। अबू हसन अल कत्थान ने कहा; हमसे कहिन है इब्राहिम बिन नसर हमसे कहिन है कि हुदबाह बिन खालिद हमसे सुहैल बिन अबू हजम से थाबित से अनस से कहिन है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने ई आयत के बारे मा कहिन, अर्थात्: ': उ - अल्लाह - उ रब्ब है जे हमका - ओसे डरय के लायक है अऊर ओका माफ करै का अधिकार है'। -क्यूएस अल मुदातसिर; ।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4290

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ حَدَّثَنِي عَامِرُ بْنُ يَحْيَى عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرٍو يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَاحُ بِرَجُلٍ مِنْ أُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَى رُءُوسِ الْخَلَائِقِ فَيُنْشَرُ لَهُ تِسْعَةٌ وَتِسْعُونَ سِجِلًّا كُلُّ سِجِلٍّ مَدَّ الْبَصَرِ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ هَلْ تُنْكِرُ مِنْ هَذَا شَيْئًا فَيَقُولُ لَا يَا رَبِّ فَيَقُولُ أَظَلَمَتْكَ كَتَبَتِي الْحَافِظُونَ ثُمَّ يَقُولُ أَلَكَ عَنْ ذَلِكَ حَسَنَةٌ فَيُهَابُ الرَّجُلُ فَيَقُولُ لَا فَيَقُولُ بَلَى إِنَّ لَكَ عِنْدَنَا حَسَنَاتٍ وَإِنَّهُ لَا ظُلْمَ عَلَيْكَ الْيَوْمَ فَتُخْرَجُ لَهُ بِطَاقَةٌ فِيهَا أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ قَالَ فَيَقُولُ يَا رَبِّ مَا هَذِهِ الْبِطَاقَةُ مَعَ هَذِهِ السِّجِلَّاتِ فَيَقُولُ إِنَّكَ لَا تُظْلَمُ فَتُوضَعُ السِّجِلَّاتُ فِي كِفَّةٍ وَالْبِطَاقَةُ فِي كِفَّةٍ فَطَاشَتْ السِّجِلَّاتُ وَثَقُلَتْ الْبِطَاقَةُقَالَ مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى الْبِطَاقَةُ الرُّقْعَةُ وَأَهْلُ مِصْرَ يَقُولُونَ لِلرُّقْعَةِ بِطَاقَةً

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन यह्या] हमसे कहिन हैं [इब्न अबू मरियम] हमसे कहिन हैं [लैट्स] हमसे कहिन हैं [अमीर बिन यह्या] से [अबू अब्दुर्रहमान अल हुबुली] उ कहिन; हम [अब्दुल्ला बिन अमरू] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कामत के दिन मोर उम्मत से एक आदमी सब प्राणियन के सिर के ऊपर चिल्लाएगा, एहसे ओनके पास उन्नीस नोटबुक बांटी जइहैं, हर एक नोटबुक जब तक आँख देख सकत है। तब अल्लाह अज्जा वजल्ला ने कहा: 'का तुम ई अभिलेख से कुछौ नकारत हौ?' उ जवाब दिहिस; 'नहीं, मोर प्रभु'। अल्लाह ने फिर से पूछा; 'का मोर लेखन परी आपसे गलत किहिस?' तब उ कहिन: 'का तोहरे पास कउनो कारण है? का तोहरे लगे कउनो दया है?' तौ डर के साथ, आदमी जवाब दिहिस; 'नै'। अल्लाह कहते हैं: 'हाँ, सचमुच आपके पास हमरे साथ कुछ अच्छाई है। सचमुच, आज के दिन तोहरे साथे अउर अन्याय नाहीं होई'। तौ उनका एक कार्ड जारी कीन गा रहा जेहिमा लिखा रहा; 'ला इलाहा इल्लाह व अन्ना मुहम्मदन 'अब्दुहु व रसुउलूहु -अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है अऊर मुहम्मद ओकर सेवक अऊर दूत है-'। उ कहिन: 'आदमी कहिन; 'ओ माई रब्ब, ई कार्ड का ई नोटबुक से का लेना-देना?' अल्लाह ने जवाब दिया: 'वास्तव में आप पर अन्याय नहीं होगा'। तौ तराजू के एक तरफ - तरफ - नोट रखौ, अऊर दूसर तरफ - दूसर तरफ - तराजू के कार्ड रखौ, ई पता चलत है कि नोट हल्का अऊर कार्ड भारी हैं'। मुहम्मद बिन याह्या कहिन; 'कार्ड एक प्लेट है, अऊर मिस्रवासी कहत रहें कि प्लेट कार्ड हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4291

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا حَدَّثَنَا عَطِيَّةُ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ لِي حَوْضًا مَا بَيْنَ الْكَعْبَةِ وَبَيْتِ الْمَقْدِسِ أَبْيَضَ مِثْلَ اللَّبَنِ آنِيَتُهُ عَدَدُ النُّجُومِ وَإِنِّي لَأَكْثَرُ الْأَنْبِيَاءِ تَبَعًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बिसिर] हमसे कहिन है [जकरिया] हमसे ['अथिया] [अबू सईद अल खुदरी] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में मेरे पास एक झील है - चौड़ी - कबाद के बीच मकबाद के बीच, जैसा कि मिल्ते, के रूप में अऊर जेहिसे कईयो तारा पीत हैं, अऊर वास्तव मा मैं उ पैगम्बर हौं जेकर भविष्य मा क़यामत के दिन नबियन मा सबसे ज्यादा अनुयायी हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4292

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ أَبِي مَالِكٍ سَعْدِ بْنِ طَارِقٍ عَنْ رِبْعِيٍّ عَنْ حُذَيْفَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ حَوْضِي لَأَبْعَدُ مِنْ أَيْلَةَ إِلَى عَدَنَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَآنِيَتُهُ أَكْثَرُ مِنْ عَدَدِ النُّجُومِ وَلَهُوَ أَشَدُّ بَيَاضًا مِنْ اللَّبَنِ وَأَحْلَى مِنْ الْعَسَلِ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنِّي لَأَذُودُ عَنْهُ الرِّجَالَ كَمَا يَذُودُ الرَّجُلُ الْإِبِلَ الْغَرِيبَةَ عَنْ حَوْضِهِ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتَعْرِفُنَا قَالَ نَعَمْ تَرِدُونَ عَلَيَّ غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِنْ أَثَرِ الْوُضُوءِ لَيْسَتْ لِأَحَدٍ غَيْرِكُمْ

हमसे कहिन है [उस्मान बिन अबू स्याबा] हमसे [अली बिन मुशिर] से [अबू मलिक सद बिन तारिक] से [रिब'ई] से [हुजैफा] कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा मोर झील ऐला से अदन तक के रूप मा चौड़ा है, जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, एकर चश्मा वाकई आकाश के तारा के संख्या से अधिक है, ई दूध के सफेदी से सफेद अऊर शहद के मिठास से मीठ है। जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, मैं ओका लोगन से बचावब, जइसे एक मनई विदेशी ऊंटन से आपन झील के रक्षा करत है। तब उनसे पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, का तुम हमका पहिचानत हौ?' उ जवाब दिहिन: 'हाँ, तुम मोहि चेहरा अऊर कलाई अऊर गोड़ वजू से सफेद होइके प्रकट भए, जवन तुमरे अलावा अउर केहू के पास नाहीं रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4293

حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُهَاجِرٍ حَدَّثَنِي الْعَبَّاسُ بْنُ سَالِمٍ الدِّمَشْقِيُّ نُبِّئْتُ عَنْ أَبِي سَلَّامٍ الْحَبَشِيِّ قَالَبَعَثَ إِلَيَّ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ فَأَتَيْتُهُ عَلَى بَرِيدٍ فَلَمَّا قَدِمْتُ عَلَيْهِ قَالَ لَقَدْ شَقَقْنَا عَلَيْكَ يَا أَبَا سَلَّامٍ فِي مَرْكَبِكَ قَالَ أَجَلْ وَاللَّهِ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ قَالَ وَاللَّهِ مَا أَرَدْتُ الْمَشَقَّةَ عَلَيْكَ وَلَكِنْ حَدِيثٌ بَلَغَنِي أَنَّكَ تُحَدِّثُ بِهِ عَنْ ثَوْبَانَ مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْحَوْضِ فَأَحْبَبْتُ أَنْ تُشَافِهَنِي بِهِ قَالَ فَقُلْتُ حَدَّثَنِي ثَوْبَانُ مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ حَوْضِي مَا بَيْنَ عَدَنَ إِلَى أَيْلَةَ أَشَدُّ بَيَاضًا مِنْ اللَّبَنِ وَأَحْلَى مِنْ الْعَسَلِ أَكَاوِيبُهُ كَعَدَدِ نُجُومِ السَّمَاءِ مَنْ شَرِبَ مِنْهُ شَرْبَةً لَمْ يَظْمَأْ بَعْدَهَا أَبَدًا وَأَوَّلُ مَنْ يَرِدُهُ عَلَيَّ فُقَرَاءُ الْمُهَاجِرِينَ الدُّنْسُ ثِيَابًا وَالشُّعْثُ رُءُوسًا الَّذِينَ لَا يَنْكِحُونَ الْمُنَعَّمَاتِ وَلَا يُفْتَحُ لَهُمْ السُّدَدُقَالَ فَبَكَى عُمَرُ حَتَّى اخْضَلَّتْ لِحْيَتُهُ ثُمَّ قَالَ لَكِنِّي قَدْ نَكَحْتُ الْمُنَعَّمَاتِ وَفُتِحَتْ لِي السُّدَدُ لَا جَرَمَ أَنِّي لَا أَغْسِلُ ثَوْبِي الَّذِي عَلَى جَسَدِي حَتَّى يَتَّسِخَ وَلَا أَدْهُنُ رَأْسِي حَتَّى يَشْعَثَ

हमका बतावा गा है [महमूद बिन खालिद अद दिमासिकी] हमसे कहिन है [मरवान बिन मुहम्मद] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन मुहाजिर] हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन सलीम अद दिमासिकी] हमका [अबू सलाम अल हबासी] से बतावा गा है, उ कहिन; उमर बिन अब्दुल अजीज ने मुझे बुलाया, फिर मैं एक बारीद के बारे में उनके पास आया, जब मैं पहुंचा, तो उन्होंने कहा; 'वास्तव में हमने आप पर आपके वाहन का बोझ डाला है, हे अबू सलाम'। उ जवाब दिहिन; 'बेशक, अल्लाह कसम, हे अमीरुल मुकमिनिन'। उमर बिन अब्दुल अजीज कहिन; 'अल्लाह के कसम, मैं तोहरे सफर मा तोहरे ऊपर बोझ नाहीं डालै चाहत हउँ, बल्कि उ हदीस के कारण जवन हमरे पास पहुँचा कि तू रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पूर्व गुलाम त्सौबान से झील के बारे मा एक कहानी सुनाइन। तौ मैं पसंद करब कि आप खुद मोका मौखिक रूप से सूचित करौ'। अबू सलाम कहिन; 'तब हम कहेन; ने मुझसे [त्सौबान, रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पूर्व दास] बतावा है कि रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव मा, मोर झील - चौड़ाई - अदन अऊर ऐलाह के बीच, दूध से सफेद अऊर शहद के मिठास से मीठ है। चश्मा आकाश मा तारा के संख्या के तरह है। जे एक घूंट पियत है, ओका हमेशा के लिए प्यास न लागी। अऊर सबसे पहिले लोग जे मोका दिखाई दिहिन, उ मुहाजिरीन के बीच से गरीब लोग रहे जे जर्जर कपड़ा अऊर जटा बाल पहिनत रहे, जेका कभी सुख महसूस नाहीं भवा रहा अऊर न ही कभी महसूस भवा रहा कि उनके लिए खाना खोला गा है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4294

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا بَيْنَ نَاحِيَتَيْ حَوْضِي كَمَا بَيْنَ صَنْعَاءَ وَالْمَدِينَةِ أَوْ كَمَا بَيْنَ الْمَدِينَةِ وَعُمَانَ

हमसे कहिस है [नशर बिन अली] हमसे कहिस है [मेरे पिता] हमसे [हिशम] से [कतदाह] से [अनस] कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरे झील के दुइनौ तरफ के बीच के दूरी शाना अऊर मदीना के बीच के दूरी के तरह है या मदीना अऊर यमन के बीच के दूरी के तरह है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4295

حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ قَالَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍقَالَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُرَى فِيهِ أَبَارِيقُ الذَّهَبِ وَالْفِضَّةِ كَعَدَدِ نُجُومِ السَّمَاءِ

हमसे कहिस है [हुमैद बिन मस'दह] हमसे कहिस है [खालिद बिन अल हरिथ] हमसे कहिस है [सैद बिन अबू अरुबाह] से [कतदाह] उ कहिन; [अनस बिन मलिक] कहिन; अल्लाह के पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'इमा सोना अऊर चाँदी से बने पीये के बर्तन देखावा गा रहें, जे आसमान के तारा के संख्या मा रहें'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4296

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ أَتَى الْمَقْبَرَةَ فَسَلَّمَ عَلَى الْمَقْبَرَةِ فَقَالَ السَّلَامُ عَلَيْكُمْ دَارَ قَوْمٍ مُؤْمِنِينَ وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَعَالَى بِكُمْ لَاحِقُونَ ثُمَّ قَالَ لَوَدِدْنَا أَنَّا قَدْ رَأَيْنَا إِخْوَانَنَا قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَوَلَسْنَا إِخْوَانَكَ قَالَ أَنْتُمْ أَصْحَابِي وَإِخْوَانِي الَّذِينَ يَأْتُونَ مِنْ بَعْدِي وَأَنَا فَرَطُكُمْ عَلَى الْحَوْضِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ تَعْرِفُ مَنْ لَمْ يَأْتِ مِنْ أُمَّتِكَ قَالَ أَرَأَيْتُمْ لَوْ أَنَّ رَجُلًا لَهُ خَيْلٌ غُرٌّ مُحَجَّلَةٌ بَيْنَ ظَهْرَانَيْ خَيْلٍ دُهْمٍ بُهْمٍ أَلَمْ يَكُنْ يَعْرِفُهَا قَالُوا بَلَى قَالَ فَإِنَّهُمْ يَأْتُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِنْ أَثَرِ الْوُضُوءِ قَالَ أَنَا فَرَطُكُمْ عَلَى الْحَوْضِ ثُمَّ قَالَ لَيُذَادَنَّ رِجَالٌ عَنْ حَوْضِي كَمَا يُذَادُ الْبَعِيرُ الضَّالُّ فَأُنَادِيهِمْ أَلَا هَلُمُّوا فَيُقَالُ إِنَّهُمْ قَدْ بَدَّلُوا بَعْدَكَ وَلَمْ يَزَالُوا يَرْجِعُونَ عَلَى أَعْقَابِهِمْ فَأَقُولُ أَلَا سُحْقًا سُحْقًا

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] से [अल 'अला` बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैराह] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है, कि उ एक बार एक कब्रिस्तान का दौरा किहिन अऊर उ हमेशा कब्र का नमस्कार किहिन, उ हमेशा मुक्ति का अभिवादन कहिन: आप पर, मुसलमानन के घर, अऊर भगवान करे अल्लाह तआला, हम आपके पीछे चलब'। फिर उ कहिन: 'हमका सचमुच उम्मीद है कि हम अपने भाइयन से मिल पाएब'। मित्रन ने पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल हम आपके भाई नहीं हैं?' उ जवाब दिहिन: 'तुम मोर दोस्त अऊर मोर भाई हौ जे मोर बाद आए रहेव, सचमुच मैं आपन झील मा तोहार इंतजार करत हउँ'। उइ पूछत हैं; 'हे अल्लाह के रसूल, तुम अपनी उम्मत से उन लोगन का कैसे पहचान सकत हौ, जेका तुम नाहीं जानत हौ?' उ जवाब दिहिन: 'तुमका का लागत है कि अगर केहू के पास काला घोड़न के समूह के बीच मा चेहरा अऊर दुइनौ टखनन पर सफेद बाल वाला घोड़ा है? का ऊ पहिचाने लायक नाहीं है?' उइ जवाब दिहिन; 'बिल्कुल'। उ कहिन: 'सचमुच, उ लोग जला के पानी से आपन चेहरा अऊर कलाई अऊर गोड़ सफेद होइके क़ामत के दिन आवैहैं'। ऊ कहिस: 'मैं झील के किनारे तोहार इंतजार करत हउँ'। फिर ऊ आगे कहिस- 'जानौ कि मोर झील के रखवाली वइसने कीन जाई जइसे ऊ आवारा ऊंटन से झील के रखवाली करत है। तब मइँ ओनका बोलाउब; 'आओ ओरे'। तौ कहा जात है; 'वास्तव मा, उइ तोहरे बाद बदल दिहिन हैं, अऊर उइ अबहियों इका घुमा रहे हैं, यहिसे हम कहित है; 'जा, जा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4297

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ مُسْتَجَابَةٌ فَتَعَجَّلَ كُلُّ نَبِيٍّ دَعْوَتَهُ وَإِنِّي اخْتَبَأْتُ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لِأُمَّتِي فَهِيَ نَائِلَةٌ مَنْ مَاتَ مِنْهُمْ لَا يُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैराह] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हर पैगम्बर के नमाज प्रभावी होत है - ई स्वीकार कीन जात है -, एहसे सब पैगम्बर आपन नमाज का उपयोग करै के जल्दी मा हैं। वास्तव मा, मैं अपनी उम्मत के लिए मध्यस्थता करै के लिए अपनी प्रार्थना का बचावत हउँ - भविष्य मा - ताकि ई उन लोगन द्वारा प्राप्त कीन जा सके जे उनके बीच मर जात हैं, बिना कुछौ के साथ अल्लाह के साथ साथी जोड़े'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4298

حَدَّثَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى وَأَبُو إِسْحَقَ الْهَرَوِيُّ إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَاتِمٍ قَالَا حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا عَلِيُّ بْنُ زَيْدِ بْنِ جُدْعَانَ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَا سَيِّدُ وَلَدِ آدَمَ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ مَنْ تَنْشَقُّ الْأَرْضُ عَنْهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ وَأَنَا أَوَّلُ شَافِعٍ وَأَوَّلُ مُشَفَّعٍ وَلَا فَخْرَ وَلِوَاءُ الْحَمْدِ بِيَدِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا فَخْرَ

हमका बतावा गा है कि [मुजाहिद बिन मूसा] अऊर [अबू इशाक अल हरावी इब्राहिम बिन अब्दुल्ला बिन हातिम] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [हुसैम] हमसे [अली बिन जैद बिन जुदआन] से [अबू नदलाह] से [अबू सईद] कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं आदम के बच्चन का नेता हौं अउर घमंडी नाहीं हौं। मैं पहिला मनई हउँ जे पृथ्वी का खोलिन - ओका पुनर्जीवित किहिन - न्याय के दिन, अऊर मैं घमंडी नाहीं हउँ। मैं मध्यस्थता करै वाला पहिला मनई रहा अऊर मध्यस्थता करै के लिए कहा गा रहा अऊर मैं घमंडी नाहीं रहा। तारीफ का झंडा पुनरुत्थान के दिन मोर हाथ मा है अऊर घमंडी नाहीं है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4299

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حَبِيبٍ قَالَا حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَّا أَهْلُ النَّارِ الَّذِينَ هُمْ أَهْلُهَا فَلَا يَمُوتُونَ فِيهَا وَلَا يَحْيَوْنَ وَلَكِنْ نَاسٌ أَصَابَتْهُمْ نَارٌ بِذُنُوبِهِمْ أَوْ بِخَطَايَاهُمْ فَأَمَاتَتْهُمْ إِمَاتَةً حَتَّى إِذَا كَانُوا فَحْمًا أُذِنَ لَهُمْ فِي الشَّفَاعَةِ فَجِيءَ بِهِمْ ضَبَائِرَ ضَبَائِرَ فَبُثُّوا عَلَى أَنْهَارِ الْجَنَّةِ فَقِيلَ يَا أَهْلَ الْجَنَّةِ أَفِيضُوا عَلَيْهِمْ فَيَنْبُتُونَ نَبَاتَ الْحِبَّةِ تَكُونُ فِي حَمِيلِ السَّيْلِ قَالَ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ الْقَوْمِ كَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ كَانَ فِي الْبَادِيَةِ

हमका बतावा गा है कि [नशर बिन अली] अऊर [इशाक बिन इब्राहिम बिन हबीब] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [बिसिर बिन अल मुफदलाल] हमसे [सैद बिन यजीद] से [अबू नदलाह] से [अबू सईद] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'नरक के निवासी, जेहिमा उई सही मायने मा रहत हैं, उई न मौत का स्वाद चखिहैं अऊर न ही उई वहिमा रहिहैं। हालाँकि, उई लोग हैं जे अपने पापन अऊर गलतियन के कारण नरक के आग के चपेट मा आ जइहैं, यहिसे ओनका एक क्षण के लिए मौत के घाट उतार दीन जई। अऊर जब उ कोयला बन गए हैं, तब ओनका मध्यस्थता करै के अनुमति है। फिर झुण्ड बना के लाया, फिर स्वर्ग नदियन में नहवाये ॥ तौ कहा जात है; 'हे स्वर्गवासी, इनका कुछ पियै दे'। यहिसे उइ नदी के बहाव मा हिब्बा पौधा - अनाज - उगाइन'। कथावाचक कहिन; 'तब ओनमा से एक कहिन; 'ऐसा लागत रहा मानो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अभी-अभी अंदरूनी से आए रहे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4300

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ شَفَاعَتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ لِأَهْلِ الْكَبَائِرِ مِنْ أُمَّتِي

हमसे कहिन है [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम अद दिमासिकी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे कहिन हैं [जुहैर बिन मुहम्मद] से [जाफर बिन मुहम्मद] से [अपने पिता] से [जाबिर] उ कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा, क़यामत के दिन हमार शौफ्तार हमार उम्मत के गंभीर पापन के अपराधियन के लिए होई'।