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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4241

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَسْعَدَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ بَنِي آدَمَ خَطَّاءٌ وَخَيْرُ الْخَطَّائِينَ التَّوَّابُونَ

हमसे कहिस है [अहमद बिन मणि'] हमसे कहिस है [जैद बिन हुबाब] हमसे [अली बिन मस'दह] [कतादाह] से [अनस] से कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आदम के सब संतान गलती किहिन हैं, अऊर गलती करै वाला सबसे अच्छा मनई उहै है जे तुरंत पश्चाताप करत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4242

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ الْجَزَرِيِّ عَنْ زِيَادِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ ابْنِ مَعْقِلٍ قَالَ دَخَلْتُ مَعَ أَبِي عَلَى عَبْدِ اللَّهِ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ النَّدَمُ تَوْبَةٌ فَقَالَ لَهُ أَبِي أَنْتَ سَمِعْتَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ النَّدَمُ تَوْبَةٌ قَالَ نَعَمْ

हमसे कहिन है [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे [सुफयान] से [अब्दुल करीम अल जजारी] से [जियाद बिन अबू मरियम] से [इब्न म'किल] कहिन हैं; मैं [अब्दुल्ला] से मिले खातिर अपने पिता के साथे रहा, तब हम ओनका कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'पछतावा पश्चाताप का एक रूप है'। तौ मोर पिताजी उनसे पूछिन; 'क्या आपने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना है कि पछतावा ही पश्चाताप है?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4243

حَدَّثَنَا رَاشِدُ بْنُ سَعِيدٍ الرَّمْلِيُّ أَنْبَأَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ ابْنِ ثَوْبَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَيَقْبَلُ تَوْبَةَ الْعَبْدِ مَا لَمْ يُغَرْغِرْ

हमसे कहिन है [रसीद बिन सईद अर रामली] हमसे कहिन है [अल वालिद बिन मुस्लिम] से [इब्नू त्सौबान] से [उनके पिता] से [मखुल] से [जुबैर बिन नुफैर] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'वास्तव मा अल्लाह वल्लाह तब तक एक सेवक का प्रतिशोध स्वीकार करिहैं, जब तक अबहीं तक नाहीं मरा है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4244

حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حَبِيبٍ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ سَمِعْتُ أَبِي حَدَّثَنَا أَبُو عُثْمَانَ عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ رَجُلًا أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ أَنَّهُ أَصَابَ مِنْ امْرَأَةٍ قُبْلَةً فَجَعَلَ يَسْأَلُ عَنْ كَفَّارَتِهَا فَلَمْ يَقُلْ لَهُ شَيْئًا فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { وَأَقِمْ الصَّلَاةَ طَرَفَيْ النَّهَارِ وَزُلَفًا مِنْ اللَّيْلِ إِنَّ الْحَسَنَاتِ يُذْهِبْنَ السَّيِّئَاتِ ذَلِكَ ذِكْرَى لِلذَّاكِرِينَ } فَقَالَ الرَّجُلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلِي هَذِهِ فَقَالَ هِيَ لِمَنْ عَمِلَ بِهَا مِنْ أُمَّتِي

हमका बतावा गा है [इशाक बिन इब्राहिम बिन हबीब] हमसे [अल मुतमीर] बताइन हैं, हम [इब्न मसूद] से [मेरे पिता] से [अबू उथमान] से कहिन कि एक आदमी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला अऊर ओसे कहिस कि उ एक औरत का चूमिस रहा, यहिसे उ ओकरे कफरा के बारे मा पूछिस। मुला ऊ कुछु नाय बोलिस। फिर अल्लाह अज्जा वजल्ला ने ई आयत उतारिन: 'अऊर दिन के दुइनौ छोर - सुबह अऊर शाम - अऊर रात के शुरुआत मा नमाज का स्थापित करा। वास्तव मा, अच्छा काम से बुरा काम के पाप मिट जात हैं। ई ओन लोगन के लिए एक चेतावनी है जे याद करत हैं'। -क्यूएस हड; 114- आदमी ने पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, का ई आयत मोर खातिर है?' उन्होंने जवाब दिया: 'आयत उन लोगन के लिए है जो मेरी उम्मत से करत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4245

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ قَالَ قَالَ الزُّهْرِيُّ أَلَا أُحَدِّثُكَ بِحَدِيثَيْنِ عَجِيبَيْنِ أَخْبَرَنِي حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَسْرَفَ رَجُلٌ عَلَى نَفْسِهِ فَلَمَّا حَضَرَهُ الْمَوْتُ أَوْصَى بَنِيهِ فَقَالَ إِذَا أَنَا مِتُّ فَأَحْرِقُونِي ثُمَّ اسْحَقُونِي ثُمَّ ذَرُّونِي فِي الرِّيحِ فِي الْبَحْرِ فَوَاللَّهِ لَئِنْ قَدَرَ عَلَيَّ رَبِّي لَيُعَذِّبُنِي عَذَابًا مَا عَذَّبَهُ أَحَدًا قَالَ فَفَعَلُوا بِهِ ذَلِكَ فَقَالَ لِلْأَرْضِ أَدِّي مَا أَخَذْتِ فَإِذَا هُوَ قَائِمٌ فَقَالَ لَهُ مَا حَمَلَكَ عَلَى مَا صَنَعْتَ قَالَ خَشْيَتُكَ أَوْ مَخَافَتُكَ يَا رَبِّ فَغَفَرَ لَهُ لِذَلِكَ

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन यह्या] अऊर [इशाक बिन मंसूर] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [अब्दुर्राजाक] हमसे कहिस है [मामर] उ कहिन; [अज जुहरी] कहिन; 'का हम तोहका दुई अद्भुत हदीस बताई? ई [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] द्वारा [अबू हुरैरा] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से मोका बतावा गा रहा, उ कहिन: 'एक आदमी खुद से अन्याय किहिस है, जब मृत्यु आई है, तौ उ अपने बेटवा के साथ वसीयत बनाई, कहिस; 'जब मैं मर जाऊँ, तब मोरे देह का जलाओ, फिर मोहि धूल बनाओ, अऊर धूल का बिखेरि दो कि समंदर के हवा से उड़ जाय।' अल्लाह के कसम, अगर मोर रब्ब मोर सजा तय कइ देत, तौ केहू मोका सजा नाहीं दे पावत। उ फिर कहिन: 'तब उइ किहिन, तब धरती से कहा गा; 'जो लिहे हौ वापस दइ द्या'। फिर अचानक ऊ व्यक्ति खड़ा होइगा, फिर ओसे पूछिस; 'तुमका अइसन करै के लिए का प्रेरित किहिस?' आदमी जवाब दिहिस; 'काहे से कि हे मोर प्रभु, मैं तोहसे डरत हउँ'। तौ ओका माफ कै दीन गा रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4246

قَالَ الزُّهْرِيُّ وَحَدَّثَنِي حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ دَخَلَتْ امْرَأَةٌ النَّارَ فِي هِرَّةٍ رَبَطَتْهَا فَلَا هِيَ أَطْعَمَتْهَا وَلَا هِيَ أَرْسَلَتْهَا تَأْكُلُ مِنْ خَشَاشِ الْأَرْضِ حَتَّى مَاتَتْقَالَ الزُّهْرِيُّ لِئَلَّا يَتَّكِلَ رَجُلٌ وَلَا يَيْئَسَ رَجُلٌ

-अभी भी पिछली हदीस के समान संचरण रेखा से- [अज जुहरी] ने कहा; अऊर ई [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] द्वारा [अबू हुरैरा] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावा गा है कि उ कहिन: 'एक औरत अपने बोरा मा एक बिल्ली के कारण नरक मा चली गै, उ न तो ओका खिलाइस अऊर न ही ओका जाने दिहिस जब तक कि उ मर जाय तक पृथ्वी के जानवरन से भोजन नाहीं पावत रही'। अज जुहरी कहिन; 'ताकि केहू खाली ओकरे ऊपर भरोसा न करै अऊर उम्मीद न छोड़ै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4247

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ مُوسَى بْنِ الْمُسَيَّبِ الثَّقَفِيِّ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ يَا عِبَادِي كُلُّكُمْ مُذْنِبٌ إِلَّا مَنْ عَافَيْتُ فَسَلُونِي الْمَغْفِرَةَ فَأَغْفِرَ لَكُمْ وَمَنْ عَلِمَ مِنْكُمْ أَنِّي ذُو قُدْرَةٍ عَلَى الْمَغْفِرَةِ فَاسْتَغْفَرَنِي بِقُدْرَتِي غَفَرْتُ لَهُ وَكُلُّكُمْ ضَالٌّ إِلَّا مَنْ هَدَيْتُ فَسَلُونِي الْهُدَى أَهْدِكُمْ وَكُلُّكُمْ فَقِيرٌ إِلَّا مَنْ أَغْنَيْتُ فَسَلُونِي أَرْزُقْكُمْ وَلَوْ أَنَّ حَيَّكُمْ وَمَيِّتَكُمْ وَأَوَّلَكُمْ وَآخِرَكُمْ وَرَطْبَكُمْ وَيَابِسَكُمْ اجْتَمَعُوا فَكَانُوا عَلَى قَلْبِ أَتْقَى عَبْدٍ مِنْ عِبَادِي لَمْ يَزِدْ فِي مُلْكِي جَنَاحُ بَعُوضَةٍ وَلَوْ اجْتَمَعُوا فَكَانُوا عَلَى قَلْبِ أَشْقَى عَبْدٍ مِنْ عِبَادِي لَمْ يَنْقُصْ مِنْ مُلْكِي جَنَاحُ بَعُوضَةٍ وَلَوْ أَنَّ حَيَّكُمْ وَمَيِّتَكُمْ وَأَوَّلَكُمْ وَآخِرَكُمْ وَرَطْبَكُمْ وَيَابِسَكُمْ اجْتَمَعُوا فَسَأَلَ كُلُّ سَائِلٍ مِنْهُمْ مَا بَلَغَتْ أُمْنِيَّتُهُ مَا نَقَصَ مِنْ مُلْكِي إِلَّا كَمَا لَوْ أَنَّ أَحَدَكُمْ مَرَّ بِشَفَةِ الْبَحْرِ فَغَمَسَ فِيهَا إِبْرَةً ثُمَّ نَزَعَهَا ذَلِكَ بِأَنِّي جَوَادٌ مَاجِدٌ عَطَائِي كَلَامٌ إِذَا أَرَدْتُ شَيْئًا فَإِنَّمَا أَقُولُ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ

हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन सैद] हमसे ['अब्दह बिन सुलेमान] से [मूसा बिन अल मुसायब अत त्साकाफी] से [शर बिन हौस्याब] से [अब्दुर्रहमान बिन घनमीन] से [अबू ज़ार] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'निश्चित रूप से अल्लाह तबराका व तआला ने कहा: 'हे मेरे सेवकों, निस्चय ही आप दोषी हैं सिवाय उन लोगन के जिनका मैं माफ करत हउँ, एहसे मुझसे माफी मांगौ, मैं आप सबका माफ करब अऊर जे जानत है कि मोर पास माफ करै के क्षमता है अऊर माफी माँगत है, मैं ओनके सबका माफ करब, गुमराह सिवाय ओनके जिनका मैं मार्गदर्शन देत हौं, तब पूछौ। मोर लिए मार्गदर्शन, मैं निश्चित रूप से तोहका मार्गदर्शन देब, तुममें से हर एक गरीब है, सिवाय ओनके जेकरे लिए मोर पास पर्याप्त है, तौ मुझसे माँगौ, मैं निश्चित रूप से तोहार रोजी-रोटी प्रदान करब, अगर तोहरे बीच के जीवित अऊर मृतक, साथ ही साथ तोहरे बीच के पहिला अऊर आखिरी, चाहे समुद्र हो या जमीन पर, उ सब मोर सबसे पुण्य सेवकन के आसपास इकट्ठा होइहैं, तब भी अगर ई मोर शक्ति उतना बड़ा न होय। मच्छर के पंख, न ही अगर उ मोर सेवकन मा सबसे बुरा व्यक्ति के ऊपर इकट्ठा होइहैं, तौ ई ओका कम नाहीं करी। अगर आप सब मा से जिंदा अऊर मृतक, साथ ही साथ आप सब मा से पहिला अऊर आखिरी, चाहे समुद्र मा हो या जमीन पर, सब एक साथ इकट्ठा होइहैं अऊर हर कोई उ का चाहत है, तौ ई मोर शक्ति का कम नाहीं करि, सिवाय एक मनई के जइसे, जे समुद्र मा सुई डुबोवत है अऊर फिर सुई का फिर से उठावत है - एकर कौनो प्रभाव नाहीं है - ई एहसे अहै काहे से कि मैं अपने उपहार मा सबसे उदार अऊर सबसे कुलीन हौं, अगर मैं कुछ चाहत हौं अऊर ई कहब: होइ।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4248

حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكْثِرُوا ذِكْرَ هَاذِمِ اللَّذَّاتِ يَعْنِي الْمَوْتَ

हमसे कहिन है [महमूद बिन घैलान] हमसे [अल फदल बिन मूसा] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'कुछ अइसन चीज के बारे मा अउर याद रखौ जवन सुख का नष्ट कइ सकत है, यानी मौत'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4249

حَدَّثَنَا الزُّبَيْرُ بْنُ بَكَّارٍ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ عِيَاضٍ حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ فَرْوَةَ بْنِ قَيْسٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَكُنْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَهُ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ فَسَلَّمَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُّ الْمُؤْمِنِينَ أَفْضَلُ قَالَ أَحْسَنُهُمْ خُلُقًا قَالَ فَأَيُّ الْمُؤْمِنِينَ أَكْيَسُ قَالَ أَكْثَرُهُمْ لِلْمَوْتِ ذِكْرًا وَأَحْسَنُهُمْ لِمَا بَعْدَهُ اسْتِعْدَادًا أُولَئِكَ الْأَكْيَاسُ

हमका रिपोर्ट किहिन हैं [अज जुबैर बिन बक्कर] हमका रिपोर्ट किहिन हैं [अनस बिन इयादल] हमका [नफी' बिन अब्दुल्ला] [फरवाह बिन कैस] से [अथा बिन अबू रबाह] से [इब्न उमर] से रिपोर्ट किहिन हैं कि उ कहिन; मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ रहा, अचानक एक अंसार आदमी उनके पास आया, फिर उन्होंने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से नमस्कार किया और पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, मुख्य मोमिन कैसे हैं?' उ जवाब दिहिन: 'सबसे अच्छा नैतिकता वाला व्यक्ति'। ऊ फिर से पूछिस; 'कउन आस्तिक सबसे बुद्धिमान है?' उ जवाब दिहिन: 'जे लोग मृत्यु का सबसे ज्यादा याद करत हैं, अऊर जे मरे के बाद सबसे अच्छा तैयारी करत हैं, उई बुद्धिमान लोग हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4250

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنِي ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ ضَمْرَةَ بْنِ حَبِيبٍ عَنْ أَبِي يَعْلَى شَدَّادِ بْنِ أَوْسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْكَيِّسُ مَنْ دَانَ نَفْسَهُ وَعَمِلَ لِمَا بَعْدَ الْمَوْتِ وَالْعَاجِزُ مَنْ أَتْبَعَ نَفْسَهُ هَوَاهَا ثُمَّ تَمَنَّى عَلَى اللَّهِ

हमका सूचित किहिन है [हिस्याम बिन अब्दुल मलिक अल हिमशी] हमका सूचित किहिन हैं [बकिया बिन अल वालिद] हमका [इब्न अबू मरियम] [डलामरह बिन हबीब] से [अबू या'ला स्याददाद बिन औस] से सूचित किहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक समझदार - बुद्धिमान - व्यक्ति वह है जो अपनी इच्छाओं को रोक सकत है और मरे के बाद के लिए अच्छा काम कर सकत है, और एक कमजोर व्यक्ति वह व्यक्ति है जो अपनी इच्छाओं का पालन करत है और हमेशा अल्लाह के सपने - खाली - देखत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4251

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْحَكَمِ بْنِ أَبِي زِيَادٍ حَدَّثَنَا سَيَّارٌ حَدَّثَنَا جَعْفَرٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ عَلَى شَابٍّ وَهُوَ فِي الْمَوْتِ فَقَالَ كَيْفَ تَجِدُكَ قَالَ أَرْجُو اللَّهَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَأَخَافُ ذُنُوبِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَجْتَمِعَانِ فِي قَلْبِ عَبْدٍ فِي مِثْلِ هَذَا الْمَوْطِنِ إِلَّا أَعْطَاهُ اللَّهُ مَا يَرْجُو وَآمَنَهُ مِمَّا يَخَافُ

हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन अल हाकम बिन अबू जियाद] हमसे कहिन है [सैयार] हमसे [जाफर] से [त्साबित] से [अनस] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक जवान से मिले रहे जे मरत रहा, उ पूछिन: 'तुम कैसे हौ?' उ जवाब दिहिस; 'मैं सचमुच अल्लाह से आशा करत हउँ, हे अल्लाह के रसूल, अऊर मैं अपने पापन से बहुत डरत हउँ'। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ऐसी स्थिति में एक नौकर के दिल में कुछ भी इकट्ठा नहीं होत है, लेकिन अल्लाह ओका वही देई जेकर उ आशा करत है, अऊर जेसे उ डरत है, ओके बारे में ओका सुरक्षा के भावना देई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4252

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ عَنْ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَيِّتُ تَحْضُرُهُ الْمَلَائِكَةُ فَإِذَا كَانَ الرَّجُلُ صَالِحًا قَالُوا اخْرُجِي أَيَّتُهَا النَّفْسُ الطَّيِّبَةُ كَانَتْ فِي الْجَسَدِ الطَّيِّبِ اخْرُجِي حَمِيدَةً وَأَبْشِرِي بِرَوْحٍ وَرَيْحَانٍ وَرَبٍّ غَيْرِ غَضْبَانَ فَلَا يَزَالُ يُقَالُ لَهَا ذَلِكَ حَتَّى تَخْرُجَ ثُمَّ يُعْرَجُ بِهَا إِلَى السَّمَاءِ فَيُفْتَحُ لَهَا فَيُقَالُ مَنْ هَذَا فَيَقُولُونَ فُلَانٌ فَيُقَالُ مَرْحَبًا بِالنَّفْسِ الطَّيِّبَةِ كَانَتْ فِي الْجَسَدِ الطَّيِّبِ ادْخُلِي حَمِيدَةً وَأَبْشِرِي بِرَوْحٍ وَرَيْحَانٍ وَرَبٍّ غَيْرِ غَضْبَانَ فَلَا يَزَالُ يُقَالُ لَهَا ذَلِكَ حَتَّى يُنْتَهَى بِهَا إِلَى السَّمَاءِ الَّتِي فِيهَا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ وَإِذَا كَانَ الرَّجُلُ السُّوءُ قَالَ اخْرُجِي أَيَّتُهَا النَّفْسُ الْخَبِيثَةُ كَانَتْ فِي الْجَسَدِ الْخَبِيثِ اخْرُجِي ذَمِيمَةً وَأَبْشِرِي بِحَمِيمٍ وَغَسَّاقٍ وَآخَرَ مِنْ شَكْلِهِ أَزْوَاجٌ فَلَا يَزَالُ يُقَالُ لَهَا ذَلِكَ حَتَّى تَخْرُجَ ثُمَّ يُعْرَجُ بِهَا إِلَى السَّمَاءِ فَلَا يُفْتَحُ لَهَا فَيُقَالُ مَنْ هَذَا فَيُقَالُ فُلَانٌ فَيُقَالُ لَا مَرْحَبًا بِالنَّفْسِ الْخَبِيثَةِ كَانَتْ فِي الْجَسَدِ الْخَبِيثِ ارْجِعِي ذَمِيمَةً فَإِنَّهَا لَا تُفْتَحُ لَكِ أَبْوَابُ السَّمَاءِ فَيُرْسَلُ بِهَا مِنْ السَّمَاءِ ثُمَّ تَصِيرُ إِلَى الْقَبْرِ

हमसे कहा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [स्याबाबा] से [इब्न अबू दज़ी`ब] से [मुहम्मद बिन अमरू बिन अथा] से [सैद बिन यासर] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'मृतक का एंजिल्ला द्वारा दर्शाया जाई अगर सही व्यक्ति है, तब स्वर्गदूत कहिहैं; 'अच्छे शरीर मा हे भली आत्मा बाहर आओ। आराम अऊर सुगंध के साथ धन्य अऊर खुश बाहर आवा, अऊर एक रब्ब के साथ जे नाराज न होई'। अऊर रोना ओनके सामने तब तक चिल्लावा जात रहा जब तक कि ओनके आत्मा बाहर न निकली। तब ऊ स्वर्ग मा उठावा जाई अऊर पूछा जाई; 'ई मनई कौन अहै? उइ -देवदूत- जवाब दिहिन; 'फलाना अऊर फलाना'। तब ओसे कहिन; 'स्वागत है, हे भली आत्मा, जो भले शरीर में है। आराम अऊर सुगंध के साथ धन्य अऊर खुश बाहर आवा, अऊर एक रब्ब के साथ जे नाराज न होई'। अऊर पुकार ओनके पास तब तक चिल्लावा जात रहा जब तक कि उ आकाश मा नाहीं पहुँचा जहाँ अल्लाह अज्जा वजल्ला रहे। हालाँकि, अगर लाश कउनो बुरे मनई से है, तौ ई कहा जाई -उसे-; 'बाहर आवा, हे दुष्ट शरीर मा दुष्ट आत्मा, अपमान मा बाहर आवा अऊर गरम पानी अऊर दुर्गन्ध प्राप्त करा, साथ ही साथ अन्य कईयो यातना भी प्राप्त करा'। रोना तब तक जारी रहा जब तक कि ओकर आत्मा बाहर नाहीं निकली। तब ऊ स्वर्ग मा उठाई जाई, तब स्वर्ग के द्वार ओकरे लिए न खुली। उनसे पूछा; 'ई मनई कौन अहै?' जवाब दिहिन; 'फलाना अऊर फलाना'। फिर कहिन; 'दुष्ट शरीर मा दुष्ट आत्मा के लिए बधाई नाहीं है, अपमानित होइके वापस आ जा, काहे से कि तोहरे लिए स्वर्ग के फाटक नाहीं खुलिहैं'। फिर ओका आकाश से उतारा गा रहा, तौ उ कब्र मा लौटि गा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4253

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ ثَابِتٍ الْجَحْدَرِيُّ وَعُمَرُ بْنُ شَبَّةَ بْنِ عَبِيدَةَ قَالَا حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيٍّ أَخْبَرَنِي إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ أَجَلُ أَحَدِكُمْ بِأَرْضٍ أَوْثَبَتْهُ إِلَيْهَا الْحَاجَةُ فَإِذَا بَلَغَ أَقْصَى أَثَرِهِ قَبَضَهُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ فَتَقُولُ الْأَرْضُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ رَبِّ هَذَا مَا اسْتَوْدَعْتَنِي

हमका बतावा गा है कि [अहमद बिन थाबित अल जहदारी] अऊर [उमर बिन स्याब्बाह बिन आबिदा] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है ['उमर बिन अली] ने हमसे [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [कैस बिन अबू हाजिम] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'अगर आप में से एक के मौत पृथ्वी पर एक जगह पर निर्धारित कीन गा है, तौ ओका उ जगह जाय के जरूरत दीन जाई। अऊर जब उ आपन यात्रा के अंत तक पहुँच जाई, त अल्लाह सुभानाहू ओकर जान ले लेई, अऊर धरती कायाम के दिन कही; 'हे मोर प्रभु, ई उहै है जेका तुम मोहि सौंपे हौ'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4254

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ أَبُو سَلَمَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامٍ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحَبَّ لِقَاءَ اللَّهِ أَحَبَّ اللَّهُ لِقَاءَهُ وَمَنْ كَرِهَ لِقَاءَ اللَّهِ كَرِهَ اللَّهُ لِقَاءَهُ فَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَرَاهِيَةُ لِقَاءِ اللَّهِ فِي كَرَاهِيَةِ لِقَاءِ الْمَوْتِ فَكُلُّنَا يَكْرَهُ الْمَوْتَ قَالَ لَا إِنَّمَا ذَاكَ عِنْدَ مَوْتِهِ إِذَا بُشِّرَ بِرَحْمَةِ اللَّهِ وَمَغْفِرَتِهِ أَحَبَّ لِقَاءَ اللَّهِ فَأَحَبَّ اللَّهُ لِقَاءَهُ وَإِذَا بُشِّرَ بِعَذَابِ اللَّهِ كَرِهَ لِقَاءَ اللَّهِ وَكَرِهَ اللَّهُ لِقَاءَهُ

हमसे कहा गा है [यह्या बिन खलफ अबू सलामा] ने हमसे [अब्दुल अ'ला] से [सैद] से [कतदाह] से [जुरराह बिन औफा] से [सैद बिन हिशम] से ['ऐस्या] से कहा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'जो कोई भी अल्लाह से प्यार करत है, तब अल्लाह से मिले, जे ओसे नफरत करत है, अल्लाह से मिलब, तब अल्लाह ओसे मिलब से नफरत करत है'। त पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, फिर अल्लाह से मुठभेड़ से नफरत करै का मतलब है मौत से नफरत करै? भले ही हम मौत से नफरत करत हैं'। ऊ कहिस: 'नहीं, लेकिन तब ओकर मौत आवत है। अगर ई बतावा जात है कि ओका अल्लाह के रहम अऊर ओकर माफी मिली, तौ ऊ अल्लाह से मिलब पसंद करत है, तौ अल्लाह ओसे मिलब पसंद करत है, अऊर अगर ई बतावा जात है कि ओका अल्लाह के सजा मिली, तौ ऊ अल्लाह से मिले से नफरत करत है, तौ अल्लाह भी ओसे मिले से नफरत करत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4255

حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَتَمَنَّى أَحَدُكُمْ الْمَوْتَ لِضُرٍّ نَزَلَ بِهِ فَإِنْ كَانَ لَا بُدَّ مُتَمَنِّيًا الْمَوْتَ فَلْيَقُلْ اللَّهُمَّ أَحْيِنِي مَا كَانَتْ الْحَيَاةُ خَيْرًا لِي وَتَوَفَّنِي إِذَا كَانَتْ الْوَفَاةُ خَيْرًا لِي

हमसे कहिन ['इमरान बिन मूसा] हमसे कहिन [अब्दुल वारित्स बिन सैद] हमसे [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] [अनास] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम में से कोई भी अपने ऊपर आई विपत्ति के कारण मरने का सपना न देखे। हालांकि, अगर ओका मउत के सपना देखै का मजबूर कीन जात है, तौ ओका दुआ करै का चाही: 'हे अल्लाह, जब तक मोर जीवन अच्छा है, तब तक मोका जिंदा रखौ, अऊर जब तक मोर मोर लिए अच्छा है, तब तक मरो'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4256

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ شَيْءٌ مِنْ الْإِنْسَانِ إِلَّا يَبْلَى إِلَّا عَظْمًا وَاحِدًا وَهُوَ عَجْبُ الذَّنَبِ وَمِنْهُ يُرَكَّبُ الْخَلْقُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैराह] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'इंसान मा कुछौ भी घिसत नाहीं है अऊर केवल एक हड्डी, यानी पूंछ का आधार बचत है। अऊर वहिसे पुनरुत्थान के दिन सब प्राणी फिर से इकट्ठा होइहैं।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4257

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَحِيرٍ عَنْ هَانِئٍ مَوْلَى عُثْمَانَ قَالَكَانَ عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ إِذَا وَقَفَ عَلَى قَبْرٍ يَبْكِي حَتَّى يَبُلَّ لِحْيَتَهُ فَقِيلَ لَهُ تَذْكُرُ الْجَنَّةَ وَالنَّارَ وَلَا تَبْكِي وَتَبْكِي مِنْ هَذَا قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْقَبْرَ أَوَّلُ مَنَازِلِ الْآخِرَةِ فَإِنْ نَجَا مِنْهُ فَمَا بَعْدَهُ أَيْسَرُ مِنْهُ وَإِنْ لَمْ يَنْجُ مِنْهُ فَمَا بَعْدَهُ أَشَدُّ مِنْهُ قَالَ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا رَأَيْتُ مَنْظَرًا قَطُّ إِلَّا وَالْقَبْرُ أَفْظَعُ مِنْهُ

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन इशाक] हमसे कहिस है [यह्या बिन मैइन] हमसे [हिस्याम बिन यूसुफ] से [अब्दुल्ला बिन बहिर] से [हानी` उथमान के पूर्व दास] से कहिस है; 'अगर [उथमान बिन अफ्फान] एक कब्र पर रुक जात, तौ उ तब तक रोवत जब तक कि ओकर दाढ़ी गीली न होइ जात। उनसे पूछा; 'जन्नत-नरक का याद है का?, रोवत नाहीं हौ, खाली यहि कारन रोवत हौ का?' उ जवाब दिहिस; 'वास्तव में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, कब्र परलोक में रुकने का पहला स्थान है। अगर ऊ ईसे बच जात है, तौ बाद मा ओकर व्यवसाय आसान होइ जाई - लेकिन अगर ऊ ईसे बचत नाहीं है, तौ बाद मा ई अउर कठिन होइ जाई।' उथमान कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी कहा: 'मैंने कभी एक दृश्य नहीं देखा लेकिन एक कब्र कुछ और से बदतर है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4258

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ عَنْ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْمَيِّتَ يَصِيرُ إِلَى الْقَبْرِ فَيُجْلَسُ الرَّجُلُ الصَّالِحُ فِي قَبْرِهِ غَيْرَ فَزِعٍ وَلَا مَشْعُوفٍ ثُمَّ يُقَالُ لَهُ فِيمَ كُنْتَ فَيَقُولُ كُنْتُ فِي الْإِسْلَامِ فَيُقَالُ لَهُ مَا هَذَا الرَّجُلُ فَيَقُولُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَنَا بِالْبَيِّنَاتِ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ فَصَدَّقْنَاهُ فَيُقَالُ لَهُ هَلْ رَأَيْتَ اللَّهَ فَيَقُولُ مَا يَنْبَغِي لِأَحَدٍ أَنْ يَرَى اللَّهَ فَيُفْرَجُ لَهُ فُرْجَةٌ قِبَلَ النَّارِ فَيَنْظُرُ إِلَيْهَا يَحْطِمُ بَعْضُهَا بَعْضًا فَيُقَالُ لَهُ انْظُرْ إِلَى مَا وَقَاكَ اللَّهُ ثُمَّ يُفْرَجُ لَهُ قِبَلَ الْجَنَّةِ فَيَنْظُرُ إِلَى زَهْرَتِهَا وَمَا فِيهَا فَيُقَالُ لَهُ هَذَا مَقْعَدُكَ وَيُقَالُ لَهُ عَلَى الْيَقِينِ كُنْتَ وَعَلَيْهِ مُتَّ وَعَلَيْهِ تُبْعَثُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ وَيُجْلَسُ الرَّجُلُ السُّوءُ فِي قَبْرِهِ فَزِعًا مَشْعُوفًا فَيُقَالُ لَهُ فِيمَ كُنْتَ فَيَقُولُ لَا أَدْرِي فَيُقَالُ لَهُ مَا هَذَا الرَّجُلُ فَيَقُولُ سَمِعْتُ النَّاسَ يَقُولُونَ قَوْلًا فَقُلْتُهُ فَيُفْرَجُ لَهُ قِبَلَ الْجَنَّةِ فَيَنْظُرُ إِلَى زَهْرَتِهَا وَمَا فِيهَا فَيُقَالُ لَهُ انْظُرْ إِلَى مَا صَرَفَ اللَّهُ عَنْكَ ثُمَّ يُفْرَجُ لَهُ فُرْجَةٌ قِبَلَ النَّارِ فَيَنْظُرُ إِلَيْهَا يَحْطِمُ بَعْضُهَا بَعْضًا فَيُقَالُ لَهُ هَذَا مَقْعَدُكَ عَلَى الشَّكِّ كُنْتَ وَعَلَيْهِ مُتَّ وَعَلَيْهِ تُبْعَثُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ تَعَالَى

हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमका [स्याबाबा] से [इब्न अबू दज़ी`ब] से [मुहम्मद बिन अमरू बिन अल अथा] से [सैद बिन यासर] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावा गा है कि उ कहिन: 'कब्र मा - जब एक लाश मा घुस जात है - तौ एक सही व्यक्ति होई बिना डर अऊर चिंता के भावना के अपनी कब्र मा बैठा रहा। तब ओसे कहा जाई; 'तुम्हार जीवन का अंत कैसे होई?' तब उ जवाब देई; 'मैं इस्लाम के स्थिति मा हौं -समर्पण-'। फिर फिर से पूछा; 'ई आदमी कौन है?' उ जवाब देई; 'मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, उ अल्लाह से जानकारी लेके हमरे पास आए हैं, फिर हमने पुष्टि की'। ओसे फिर से पूछा; 'का तुम अल्लाह का देखिन?' उ जवाब दिहिन; 'अल्लाह का देखब केहू के लायक नाहीं है'। फिर नरक के सीमा से सटे अंतराल ओनके लिए खोला गा रहा, उ आग के लौ एक दूसरे से टकरात देखिन। अऊर ओसे कहा गा रहा; 'देखौ भगवान तोहका बचावै के ताईं का किहिन हैं'। फिर ओकरे लिए एक खाई खुलि गै जवन स्वर्ग का अवरुद्ध कइ दिहिस अऊर उ सजावट अऊर वहिमा निहित सब सुंदरता का देखिस। यहिसे ओसे कहा गा रहा; 'ई तोहार जगह है'। अऊर ओसे कहिन; 'इ विश्वास पर कि आप व्यायाम किहिन, अऊर यहिके कारण आपका मार डारा गा रहा अऊर यहिके साथ आप भी पुनर्जीवित होइ जइहैं, भगवान करे'। अऊर एक दुष्ट मनई डर अऊर चिंता से भरा अपनी कब्र मा बइठ जाई। तब उनसे पूछा; 'तुम्हार जीवन का अंत कैसे होई?' उ जवाब दिहिस; 'हमका नाइ पता'। ओसे पूछिन; 'ई मनई कौन अहै?' उ जवाब दिहिस; 'मैंने लोगन का कुछ बात करत सुना अऊर मैं भी ओनके अनुसरण किहिन'। तब एक खाई खुलि गै जवन स्वर्ग का घेरि लिहिस, अऊर उ वहिमा निहित सुंदरता का देखिस, तौ उ ओसे कहिस; 'उनका देखो जिनसे अल्लाह तुमको दूर रखे है'। फिर एक खाई खुलि गै जवन नरक का घेरि लिहिस अऊर उ देखिस कि लौ एक दूसरे से टकरात है, तौ उ ओसे कहिस; 'ई तोहार जगह है, तोहरे मा मौजूद संदेह के लिए। यहि कारन से तुम मर गयेव अऊर यहिके साथ तुम भी जिन्दा होइ गयेव, भगवान करे त'आला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4259

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ{ يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا بِالْقَوْلِ الثَّابِتِ }قَالَ نَزَلَتْ فِي عَذَابِ الْقَبْرِ يُقَالُ لَهُ مَنْ رَبُّكَ فَيَقُولُ رَبِّيَ اللَّهُ وَنَبِيِّي مُحَمَّدٌ فَذَلِكَ قَوْلُهُ{ يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا بِالْقَوْلِ الثَّابِتِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الْآخِرَةِ }

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे कहिस है [स्यूबाह] से ['अलकामा बिन मर्तसाद] से [सद बिन उबैदा] से [अल बर्रा` बिन अजीब] से पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वसल्लम उ कहिन: दुनिया मा अऊर परलोक मा जीवन मा दृढ़ शब्द; -क्यूएस इब्राहिम; 27-. उ कहिन: 'ई श्लोक कब्र के यातना के बारे मा प्रकट भवा रहा, मृतक से कहा गा रहा; 'तुम्हारा रब्ब कौन है? त उ जवाब देई; 'रब्ब अल्लाह है, अऊर मोर पैगम्बर मुहम्मद है'। अऊर ई ओकरे वचनन का अर्थ है; ' 'अल्लाह उन लोगन के विश्वास के पुष्टि करत है जे ई अडिग वचन के साथ ई दुनिया अऊर परलोक मा जीवन मा विश्वास करत हैं; -क्यूएस इब्राहिम; 27-'.

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4260

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا مَاتَ أَحَدُكُمْ عُرِضَ عَلَى مَقْعَدِهِ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ إِنْ كَانَ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَمِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَإِنْ كَانَ مِنْ أَهْلِ النَّارِ فَمِنْ أَهْلِ النَّارِ يُقَالُ هَذَا مَقْعَدُكَ حَتَّى تُبْعَثَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] हमसे कहिन है ['उबैदुल्लाह बिन उमर] से [नफी'] से [इब्न उमर] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उ कहिन: 'अगर तुममें से कोई मर जात है, तो ओकर निवास स्थान सुबह अऊर शाम होई। अगर उ स्वर्गवासी से है, तौ उ स्वर्ग के निवासी होई, अऊर अगर उ नरक के निवासी से है, तौ उ नरक के निवासी होई, कहा जात है; 'यह तोहार निवास है, 'जब तक कि ऊ पुनरुत्थान के दिन पुनर्जीवित न होइ जाय'।