Imam Ibnu Majah : 4221
حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ خَلَّادٍ الْبَاهِلِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ أَبِي يَعْلَى عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ خُثَيْمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ خَطَّ خَطًّا مُرَبَّعًا وَخَطًّا وَسَطَ الْخَطِّ الْمُرَبَّعِ وَخُطُوطًا إِلَى جَانِبِ الْخَطِّ الَّذِي وَسَطَ الْخَطِّ الْمُرَبَّعِ وَخَطًّا خَارِجًا مِنْ الْخَطِّ الْمُرَبَّعِ فَقَالَ أَتَدْرُونَ مَا هَذَا قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ هَذَا الْإِنْسَانُ الْخَطُّ الْأَوْسَطُ وَهَذِهِ الْخُطُوطُ إِلَى جَنْبِهِ الْأَعْرَاضُ تَنْهَشُهُ أَوْ تَنْهَسُهُ مِنْ كُلِّ مَكَانٍ فَإِنْ أَخْطَأَهُ هَذَا أَصَابَهُ هَذَا وَالْخَطُّ الْمُرَبَّعُ الْأَجَلُ الْمُحِيطُ وَالْخَطُّ الْخَارِجُ الْأَمَلُ
हमका बतावा गा है कि [अबू बिसियर बकर बिन खलफ] अऊर [अबू बकर बिन खल्लाद अल बहिली] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [यह्या बिन सईद] हमसे कहिन हैं [सुफयान] ने हमसे [मेरे पिता] से [अबू या'ला] से [अर रबी' बिन हुत्सैम] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है कि उ एक आयताकार रेखा बनाइन अऊर चौकोर मा बीच के रेखा का रेखांकित किहिन, अऊर कई रेखा के बीच के किनारे से बनाइन रेखा के बीच अऊर आयताकार रेखा के बाहर एक रेखा। फिर उ कहिन: 'का तुम जानत हौ कि ई का अहै?' मित्रन ने जवाब दिहिन; 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'ई बीच के रेखा मा मनई है, जबकि ई रेखा - जवन ओकरे बगल मा हैं - बाधा हैं जवन ओका निचोड़त हैं - या ओका काटत हैं - हर जगह से। अगर ऊ गलती करत है, तौ ऊ ई लाइन से टकरा जाई। आयताकार रेखा जवन एकरा घेरत है, उ मृत्यु है जवन एकरा घेरत है। अऊर बाहर के लाइन आदर्श है'।
Imam Ibnu Majah : 4222
حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ أَنْبَأَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا ابْنُ آدَمَ وَهَذَا أَجَلُهُ عِنْدَ قَفَاهُ وَبَسَطَ يَدَهُ أَمَامَهُ ثُمَّ قَالَ وَثَمَّ أَمَلُهُ
हमसे कहिन [इशाक बिन मंसूर] हमसे कहिन हैं [अन नदलर बिन स्यूमैल] हमसे [हम्मद बिन सलामा] ['उबैदिल्लाह बिन अबू बकर] से कहिन हैं; हम [अनास बिन मलिक] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ई आदम का बेटा है अऊर ई ओकर मौत है जवन ओकरे गर्दन के नाक मा पड़ी है'। अपने सामने हाथ तानत हुए, उ कहिन: 'अऊर फिर -ई- उनकर सपना है'।
Imam Ibnu Majah : 4223
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَلْبُ الشَّيْخِ شَابٌّ فِي حُبِّ اثْنَتَيْنِ فِي حُبِّ الْحَيَاةِ وَكَثْرَةِ الْمَالِ
हमसे [अबू मरवान मुहम्मद बिन उथमान अल 'उत्समानी] हमसे [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] से [अल 'अला` बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन; दरअसल, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'माता-पिता के दिल अबहियों दुइ चीजन से प्यार करै मा जवान होइहैं, अर्थात्; दुनिया से प्यार अऊर धन के बहुतायत'।
Imam Ibnu Majah : 4224
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُعَاذٍ الضَّرِيرُ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَهْرَمُ ابْنُ آدَمَ وَيَشِبُّ مِنْهُ اثْنَتَانِ الْحِرْصُ عَلَى الْمَالِ وَالْحِرْصُ عَلَى الْعُمُرِ
हमसे कहिन है [बिसिर बिन मुअदज़ अद डलारिर] हमसे [अबू अवाना] [कतादाह] से [अनास] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आदम का पुत्र बूढ़ा हो जाएगा, लेकिन फिर भी दुई तरह से दिल से जवान रहेगा, अर्थात्; धन अऊर दीर्घायु के लालची'।
Imam Ibnu Majah : 4225
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْ أَنَّ لِابْنِ آدَمَ وَادِيَيْنِ مِنْ مَالٍ لَأَحَبَّ أَنْ يَكُونَ مَعَهُمَا ثَالِثٌ وَلَا يَمْلَأُ نَفْسَهُ إِلَّا التُّرَابُ وَيَتُوبُ اللَّهُ عَلَى مَنْ تَابَ
हमसे कहा गा है [अबू मारवान अल 'उत्समानी] ने हमसे [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] से [अल 'अला' बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहा है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर आदम के बेटे के पास दुई घाटी होतीं, तो उ एक तीसरी घाटी से भरपूर आशा करत। अऊर उ खुद का नाहीं बल्कि केवल धूल से भरत है, अऊर अल्लाह केवल ओनका माफ करत है जे पश्चाताप करत हैं।'
Imam Ibnu Majah : 4226
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَرَفَةَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمُحَارِبِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَعْمَارُ أُمَّتِي مَا بَيْنَ السِّتِّينَ إِلَى السَّبْعِينَ وَأَقَلُّهُمْ مَنْ يَجُوزُ ذَلِكَ
हमसे कहा गा है [अल हसन बिन अराफा] ने मोका [अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद अल मुहारीबी] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैराह] से कहा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मेरी उम्मत के उम्र साठ से सात साल तक है, अऊर ओनमा से बहुत कम हैं -उ उमर'।
Imam Ibnu Majah : 4227
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْوَالَّذِي ذَهَبَ بِنَفْسِهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مَاتَ حَتَّى كَانَ أَكْثَرُ صَلَاتِهِ وَهُوَ جَالِسٌ وَكَانَ أَحَبَّ الْأَعْمَالِ إِلَيْهِ الْعَمَلُ الصَّالِحُ الَّذِي يَدُومُ عَلَيْهِ الْعَبْدُ وَإِنْ كَانَ يَسِيرًا
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू अल अह्वाश] से [अबू इशाक] से [अबू सलामा] से [उम्मू सलामा] कहिन हैं; 'उनकी आत्मा लेय वाले सर्वशक्तिमान शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कसम, उ तब तक नाहीं मरे जब तक कि उनकर अधिकांश प्रार्थना बैठे के स्थिति मा नाहीं कीन जात रहीं, अऊर जवन काम उ सबसे ज्यादा प्यार करत रहें, उ अच्छा काम रहें जेका एक सेवक लगातार करत रहा, भले ही उ छोट काहे न हो।'
Imam Ibnu Majah : 4228
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَتْ عِنْدِي امْرَأَةٌ فَدَخَلَ عَلَيَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَنْ هَذِهِ قُلْتُ فُلَانَةُ لَا تَنَامُ تَذْكُرُ مِنْ صَلَاتِهَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَهْ عَلَيْكُمْ بِمَا تُطِيقُونَ فَوَاللَّهِ لَا يَمَلُّ اللَّهُ حَتَّى تَمَلُّوا قَالَتْ وَكَانَ أَحَبَّ الدِّينَ إِلَيْهِ الَّذِي يَدُومُ عَلَيْهِ صَاحِبُهُ
हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू उसामा] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से ['ऐस्या] से कहिन है, उ कहिन; एक औरत मेरे साथ थी, तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझसे मिले और पूछा: 'यह औरत कौन है?' हम जवाब दिहेन; 'फुलानाह। जे कबहूँ नाहीं सोवत। -'ऐसिया ने अपनी नमाज के आदतों का जिक्र किया- तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'उन -कर्मन का पीछे छोड़ौ, उ काम करौ जवन तुम कर सकत हौ, अल्लाह के खातिर, अल्लाह तब तक ऊब महसूस नाहीं करिहैं जब तक कि तुम खुद ऊब न महसूस करौ'। 'आइशा कहिन; 'वास्तव मा - जवन धर्म से उ सबसे ज्यादा प्यार करत है, ओकर अभ्यास उहै है जेका हमेशा ओकरे अभ्यास करै वालेन द्वारा लगातार चलावा जात है'।
Imam Ibnu Majah : 4229
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ دُكَيْنٍ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الْجُرَيْرِيِّ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ عَنْ حَنْظَلَةَ الْكَاتِبِ التَّمِيمِيِّ الْأُسَيِّدِيِّ قَالَكُنَّا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرْنَا الْجَنَّةَ وَالنَّارَ حَتَّى كَأَنَّا رَأْيَ الْعَيْنِ فَقُمْتُ إِلَى أَهْلِي وَوَلَدِي فَضَحِكْتُ وَلَعِبْتُ قَالَ فَذَكَرْتُ الَّذِي كُنَّا فِيهِ فَخَرَجْتُ فَلَقِيتُ أَبَا بَكْرٍ فَقُلْتُ نَافَقْتُ نَافَقْتُ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنَّا لَنَفْعَلُهُ فَذَهَبَ حَنْظَلَةُ فَذَكَرَهُ لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا حَنْظَلَةُ لَوْ كُنْتُمْ كَمَا تَكُونُونَ عِنْدِي لَصَافَحَتْكُمْ الْمَلَائِكَةُ عَلَى فُرُشِكُمْ أَوْ عَلَى طُرُقِكُمْ يَا حَنْظَلَةُ سَاعَةً وَسَاعَةً
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमसे [अल फदल बिन दुकैन] से [सुफयान] से [अल जुरैरी] से [अबू 'उथमान] से [हंदलालाह अल कातिब अत तमीमी अल उसैयदी] से कहिन हैं, उ कहिन; 'हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल मा रहेन, उइ हमका स्वर्ग अऊर नरक के बारे मा भी बताइन रहैं तौ अइसे लागत रहा कि आपने ई हमार अपनी आँखिन से देखे हो। पै मेहरिया अउर बच्चन से मिलै के बाद मैं फिर से हंसै अउर मजाक करै लाग हौं।' हैंडलालाह कहिन; फिर हमका उ माहौल याद आवा जब हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे रहेन, तब हम तुरंत बाहर निकलेन अऊर अबू बकर से मिलेन, हम कहेन; 'मैंने पाखंड किया है, मैंने पाखंड किया है'। अबू बकर कहिन; 'वास्तव मा हम वइसन किहेन'। फिर हंदलालाह गें अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ई बात कहिन, तौ उ कहिन: 'हे हंदलालाह, अगर तुम उ हालत मा रह सकत हौ जब तुम मोर बगल मा रहेव, तौ निश्चित रूप से स्वर्गदूत हमेशा हर तरह से आपका नमस्कार करिहैं - या हर रास्ता मा तुम जात हौ - हे हंदलालाह, थोड़ा-थोड़ा -अच्छा कामन मा-'।
Imam Ibnu Majah : 4230
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عُثْمَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ الْأَعْرَجُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اكْلَفُوا مِنْ الْعَمَلِ مَا تُطِيقُونَ فَإِنَّ خَيْرَ الْعَمَلِ أَدْوَمُهُ وَإِنْ قَلَّ
हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन उस्मान अद दिमासिकी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे कहिन हैं [इब्नू लहिआह] हमसे कहिन हैं [अब्दुर्रहमान अल अराज] हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अपने कामन का अपनी क्षमता के अनुसार निभावा, वास्तव मा सबसे अच्छा काम उ होत है जवन लगातार कीन जात है, भले ही उ छोट काहे न हो।'
Imam Ibnu Majah : 4231
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأَشْعَرِيُّ عَنْ عِيسَى بْنِ جَارِيَةَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَمَرَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رَجُلٍ يُصَلِّي عَلَى صَخْرَةٍ فَأَتَى نَاحِيَةَ مَكَّةَ فَمَكَثَ مَلِيًّا ثُمَّ انْصَرَفَ فَوَجَدَ الرَّجُلَ يُصَلِّي عَلَى حَالِهِ فَقَامَ فَجَمَعَ يَدَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ عَلَيْكُمْ بِالْقَصْدِ ثَلَاثًا فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَمَلُّ حَتَّى تَمَلُّوا
हमसे कहिन है [अमरू बिन रफी'] हमसे [याकूब बिन अब्दुल्लाह अल अस्यारी] से [ईसा बिन जरियाह] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक व्यक्ति के पास से गुजरे जो एक चट्टान पर नमाज पढ़ रहा था, फिर वो मक्का के तरफ चला गया और वहां बहुत देर तक चुप रहा, फिर वापस आया और पाया कि ऊ आदमी अब भी पहिले के तरह नमाज पढ़त रहा, तो उ उठ के आपन हाथ एक साथ रख के बोला: 'हे लोग, उदार रहो- उ इ बात तीन बार कहिन- वाकई अल्लाह बोर महसूस न करब, जब तक आप खुद का ऊब महसूस न करब'।
Imam Ibnu Majah : 4232
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبِي عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنُؤَاخَذُ بِمَا كُنَّا نَعْمَلُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَحْسَنَ فِي الْإِسْلَامِ لَمْ يُؤَاخَذْ بِمَا كَانَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَمَنْ أَسَاءَ أُخِذَ بِالْأَوَّلِ وَالْآخِرِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमीर] हमसे [वाकी'] अऊर [मेरे पिता] से [अल अमासी] से [स्याकिक] से [अब्दुल्लाह] कहिन हैं; हम पूछित है; 'हे अल्लाह के रसूल, का हमका भी यातना दीन जई कि हम जहिलिया काल मा का किहेन?' तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे इस्लाम धर्म अपनावै के बाद अच्छा काम करत है, तौ ओका जाहिलिया काल मा जवन किहे रहा, वहिके खातिर ओका यातना नाहीं दीन जाई, लेकिन अगर उ बुरा काम करत है - इस्लाम धर्म अपनावै के बाद - तौ ओका पहिले अऊर बाद दुइनौ मा यातना दीन जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4233
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ مُسْلِمِ بْنِ بَانَكَ سَمِعْتُ عَامِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ يَقُولُ حَدَّثَنِي عَوْفُ بْنُ الْحَارِثِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عَائِشَةُ إِيَّاكِ وَمُحَقَّرَاتِ الْأَعْمَالِ فَإِنَّ لَهَا مِنْ اللَّهِ طَالِبًا
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन हैं [खालिद बिन मखलाद] हमसे कहिन हैं [सैद बिन मुस्लिम बिन बनक] हम [अमीर बिन अब्दुल्ला बिन अज़ जुबैर] का कहत सुने रहेन; बताइस है ['औफ बिन अल हरिथ] से ['ऐस्याह] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझसे कहा: हे 'आइशा, घृणित कामों से दूर रहो, काहे से कि वास्तव में इन कामन पर अल्लाह द्वारा मुकदमा चलावा जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4234
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَعِيلَ وَالْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَجْلَانَ عَنْ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الْمُؤْمِنَ إِذَا أَذْنَبَ كَانَتْ نُكْتَةٌ سَوْدَاءُ فِي قَلْبِهِ فَإِنْ تَابَ وَنَزَعَ وَاسْتَغْفَرَ صُقِلَ قَلْبُهُ فَإِنْ زَادَ زَادَتْ فَذَلِكَ الرَّانُ الَّذِي ذَكَرَهُ اللَّهُ فِي كِتَابِهِ{ كَلَّا بَلْ رَانَ عَلَى قُلُوبِهِمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ }
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे कहिन हैं [हातिम बिन इस्माइल] अऊर [वालिद बिन मुस्लिम] दुइनौ कहिन; हमसे [मुहम्मद बिन 'अजलान] से [अल काका' बिन हकीम] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैरा] से कहिन है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव मा, अगर कोई मुमिन पाप करत है, तो ओकरे दिल मा एक काला धब्बा होई, अगर उ पश्चाताप करत है, त ओका छोड़ देत है अऊर माफी माँगत है, तौ ओकरे दिल मा वापस आवै के इच्छा है, लेकिन अगर उ अपने दिल का वापस जोड़त है, पाप, काला धब्बा बढ़ जाई, एहसे उ आवरण है - दिल - जेकर उल्लेख भगवान के वचन मा ओकरे किताब मा है; 'ई कभी -अइसन- नाहीं है, वास्तव मा जवन उ हमेशा ढँकय के कोशिश करत हैं उ ओनके दिल हैं'। -क्यूएस अल मुथाफीफिन; 14-.
Imam Ibnu Majah : 4235
حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ الرَّمْلِيُّ حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ عَلْقَمَةَ بْنِ خَدِيجٍ الْمَعَافِرِيُّ عَنْ أَرْطَاةَ بْنِ الْمُنْذِرِ عَنْ أَبِي عَامِرٍ الْأَلْهَانِيِّ عَنْ ثَوْبَانَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لَأَعْلَمَنَّ أَقْوَامًا مِنْ أُمَّتِي يَأْتُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِحَسَنَاتٍ أَمْثَالِ جِبَالِ تِهَامَةَ بِيضًا فَيَجْعَلُهَا اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ هَبَاءً مَنْثُورًا قَالَ ثَوْبَانُ يَا رَسُولَ اللَّهِ صِفْهُمْ لَنَا جَلِّهِمْ لَنَا أَنْ لَا نَكُونَ مِنْهُمْ وَنَحْنُ لَا نَعْلَمُ قَالَ أَمَا إِنَّهُمْ إِخْوَانُكُمْ وَمِنْ جِلْدَتِكُمْ وَيَأْخُذُونَ مِنْ اللَّيْلِ كَمَا تَأْخُذُونَ وَلَكِنَّهُمْ أَقْوَامٌ إِذَا خَلَوْا بِمَحَارِمِ اللَّهِ انْتَهَكُوهَا
हमसे कहिन है [ईसा बिन यूनुस अर रामली] हमसे कहिन है ['उकबाह बिन अलकमाह बिन खदीज अल मुअफिरी] से [अर्थाह बिन अल मुंडज़िर] से [अबू अमीर अल हानी] से [त्सौबान] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कि उ कहिन: 'सचमुच मैं जानत हउँ कि उम्मत के दिन मोर लोग आवत हैं तिहामा पर्वत जितना बड़ा अच्छाई के साथ न्याय जो सफेद, फिर अल्लाह ने इसे बेकार बना दिया'। त्सौबान कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, हमसे इनकी विशेषताओं का जिक्र करो, और हमको समझाओ, ताकि जब तक हम न जानते हैं तो हम इनके जैसा न बन जाये'। उ कहिन: 'वास्तव मा, उई आपके भाई हैं अऊर आपके समूह से, उई रात मा नमाज पढ़त हैं जइसे आप करत हैं, लेकिन उई एक अइसन लोग हैं, जे अगर उई वहिके पास लौटत हैं जेका अल्लाह मना करत है, तौ उई ओका करत रहत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 4236
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ إِسْحَقَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ عَنْ أَبِيهِ وَعَمِّهِ عَنْ جَدِّهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَسُئِلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَكْثَرُ مَا يُدْخِلُ الْجَنَّةَ قَالَ التَّقْوَى وَحُسْنُ الْخُلُقِ وَسُئِلَ مَا أَكْثَرُ مَا يُدْخِلُ النَّارَ قَالَ الْأَجْوَفَانِ الْفَمُ وَالْفَرْجُ
हमका बतावा गा है कि [हारून बिन इशाक] अऊर [अब्दुल्ला बिन सैद] दुइनौ कहिन; हमका [अब्दुल्ला बिन इदरीस] [अपने पिता] से अऊर [अपने चाचा] से [अपने दादा] से [अबू हुरैरा] से बताइन है, उ कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बार पूछा गया; 'कउन चीजन के कारण बहुत लोग स्वर्ग जात हैं?' उ जवाब दिहिन: 'अल्लाह से डर अऊर कुलीन नैतिकता'। अऊर उनसे पूछा गा रहा; 'कउन चीजन के कारण बहुत लोग नरक मा जात हैं?' उ जवाब दिहिस: 'जे दुइ गुहा खुले हैं, उ मुँह अऊर जननांग हैं'।
Imam Ibnu Majah : 4237
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا شَبَابَةُ حَدَّثَنَا وَرْقَاءُ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ أَفْرَحُ بِتَوْبَةِ أَحَدِكُمْ مِنْهُ بِضَالَّتِهِ إِذَا وَجَدَهَا
हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिस है [शबाबा] हमसे कहिस है [वर्का`] से [अबू अज़ जिनाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उ कहिन: 'वास्तव मा, अल्लाह अज्जाल्ला आप में से एक से अधिक प्रसन्न है, आपन बहुत दिन से खोवा सामान ढूंढत अहै'।
Imam Ibnu Majah : 4238
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ الْمَدِينِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ بُرْقَانَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ الْأَصَمِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْ أَخْطَأْتُمْ حَتَّى تَبْلُغَ خَطَايَاكُمْ السَّمَاءَ ثُمَّ تُبْتُمْ لَتَابَ عَلَيْكُمْ
हमसे कहा गा है [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब अल मदीनी] हमसे कहिन है [अबू मुआविया] हमसे [जफर बिन बुर्कान] से [यजीद बिन अल अशम] से [अबू हुरैरा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'अगर तुम गलती करत हौ तब तक स्वर्ग अऊर तुम पश्चाताप करा, तोहार पश्चाताप निश्चित रूप से स्वीकार कीन जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4239
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ فُضَيْلِ بْنِ مَرْزُوقٍ عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَلَّهُ أَفْرَحُ بِتَوْبَةِ عَبْدِهِ مِنْ رَجُلٍ أَضَلَّ رَاحِلَتَهُ بِفَلَاةٍ مِنْ الْأَرْضِ فَالْتَمَسَهَا حَتَّى إِذَا أَعْيَى تَسَجَّى بِثَوْبِهِ فَبَيْنَا هُوَ كَذَلِكَ إِذْ سَمِعَ وَجْبَةَ الرَّاحِلَةِ حَيْثُ فَقَدَهَا فَكَشَفَ الثَّوْبَ عَنْ وَجْهِهِ فَإِذَا هُوَ بِرَاحِلَتِهِ
हमसे कहिन [सुफयान बिन वाकी'] हमसे [मेरे पिता] से [फुदलैल बिन मर्जुक] से ['अथिया] से [अबू सैद] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह अपने सेवकन के पश्चाताप से ज्यादा खुश है, न कि केहू के खुशी से जे वाहन खो देत है - एक ऊँट - जवन बहुत व्यापक रेगिस्तान मा यात्रा करत समय ओकर जीवन के सब जरूरतन का ले जात है, जब उ हर जगह देखै के कोशिश किहिस है, अऊर आपन कपड़ा ढँक के रुक जात है, अचानक ओकर आवाज सुनाई देत है, कपड़ा उ अचानक अपने सामने आपन वाहन पावत है'।
Imam Ibnu Majah : 4240
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الدَّارِمِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقَاشِيُّ حَدَّثَنَا وُهَيْبُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ التَّائِبُ مِنْ الذَّنْبِ كَمَنْ لَا ذَنْبَ لَهُ
हमसे कहिन है [अहमद बिन सईद अद दरमी] हमसे कहिन हैं [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अर रकासी] हमसे कहिन हैं [वुहैब बिन खालिद] हमसे [ममर] [अब्दुल करीम] से [अबू उबैदा बिन अब्दुल्ला] से [उनके पिता] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'पाप से पश्चाताप करै वाला मनई ओनके समान है जेकर पाप नाहीं है'।