Imam Ibnu Majah : 4201
حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ الْحَسَنِ الْمَرْوَزِيُّ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ وَابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ عُيَيْنَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي بَكْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ ذَنْبٍ أَجْدَرُ أَنْ يُعَجِّلَ اللَّهُ لِصَاحِبِهِ الْعُقُوبَةَ فِي الدُّنْيَا مَعَ مَا يَدَّخِرُ لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِنْ الْبَغْيِ وَقَطِيعَةِ الرَّحِمِ
हमसे कहिन है [अल हुसैन बिन अल हसन अल मावरजी] हमसे [अब्दुल्ला बिन मुबारक] अऊर [इब्न उलेयाह] से [उयैना बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू बकराह] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अइसन कौनो पाप नाहीं है जेकरे खातिर अल्लाह तुरंत अपराधी का ई दुनिया मा सजा देई अऊर दुर्व्यवहार अऊर दोस्ती के संबंध तोड़ै के अलावा परलोक मा ओकरे लिए छोड़ देई'।
Imam Ibnu Majah : 4202
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ مُوسَى عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَسْرَعُ الْخَيْرِ ثَوَابًا الْبِرُّ وَصِلَةُ الرَّحِمِ وَأَسْرَعُ الشَّرِّ عُقُوبَةً الْبَغْيُ وَقَطِيعَةُ الرَّحِمِ
हमसे कहिन है [सुवैद बिन सैद] हमसे [सालीह बिन मूसा] से [मुआविया बिन इशाक] से ['ऐस्याह बिन थल्हा] से ['ऐस्याह उम्मुल मुकमिनिन] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अच्छे काम जेकर तुरंत इनाम मिली, उ अच्छा करब अऊर दोस्ती के बंधन का जोड़ब है, जबकि पापपूर्ण काम जेका तुरंत दंडित कीन जाई, उ अन्याय अऊर दोस्ती के बंधन का तोड़ब है'।
Imam Ibnu Majah : 4203
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدٍ الْمَدَنِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ دَاوُدَ بْنِ قَيْسٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ مَوْلَى بَنِي عَامِرٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ حَسْبُ امْرِئٍ مِنْ الشَّرِّ أَنْ يَحْقِرَ أَخَاهُ الْمُسْلِمَ
हमका बतावा गा है [याकूब बिन हुमैद अल मदनी] हमसे [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] से [दाउद बिन कैस] से [अबू सैद, अमीर के पूर्व दास] से [अबू हुरैरा] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'यह काफी है कि केहू मुसलमान कहिस कि उ अपने भाई से बुराई किहिस'।
Imam Ibnu Majah : 4204
حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَنْبَأَنَا عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ سِنَانِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ أَوْحَى إِلَيَّ أَنْ تَوَاضَعُوا وَلَا يَبْغِي بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ
हमसे कहिन [हर्मलह बिन याह्या] हमसे कहिन हैं [अब्दुल्ला बिन वहब] हमसे कहिन हैं [अमरू बिन अल हरित] से [यजीद बिन अबू हबीब] से [सिनान बिन सद] से [अनस बिन मलिक] उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में अल्लाह ने मुझ पर प्रकट किया है कि तुम विनम्र हो, और तुम में से कुछ लोग दूसरों के साथ दुर्व्यवहार न करें'।
Imam Ibnu Majah : 4205
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا أَبُو عَقِيلٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ حَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ يَزِيدَ وَعَطِيَّةُ بْنُ قَيْسٍ عَنْ عَطِيَّةَ السَّعْدِيِّ وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَبْلُغُ الْعَبْدُ أَنْ يَكُونَ مِنْ الْمُتَّقِينَ حَتَّى يَدَعَ مَا لَا بَأْسَ بِهِ حَذَرًا لِمَا بِهِ الْبَأْسُ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [हसीम बिन अल कासिम] हमसे कहिन है [अबू 'अकील] हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन यजीद] ने हमसे [रबीअह बिन यजीद] अऊर ['अथियाह बिन कैस] से ['अथियाह अस सादी] से कहिन है - अऊर उ प्रोहिला के एक साथी हैं। अलैहि वसल्लम- उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'एक सेवक धर्मनिष्ठा के स्तर तक नाहीं पहुँचा है कि उ कुछ अइसन चीज का त्याग करै जवन जायज है - जायज है - कुछ अइसन चीज से सावधानी के रूप मा जवन निषिद्ध है'।
Imam Ibnu Majah : 4206
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ وَاقِدٍ حَدَّثَنَا مُغِيثُ بْنُ سُمَيٍّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَقِيلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّ النَّاسِ أَفْضَلُ قَالَ كُلُّ مَخْمُومِ الْقَلْبِ صَدُوقِ اللِّسَانِ قَالُوا صَدُوقُ اللِّسَانِ نَعْرِفُهُ فَمَا مَخْمُومُ الْقَلْبِ قَالَ هُوَ التَّقِيُّ النَّقِيُّ لَا إِثْمَ فِيهِ وَلَا بَغْيَ وَلَا غِلَّ وَلَا حَسَدَ
हमसे कहिन है [हिस्याम बिन अम्मार] हमसे कहिन हैं [यह्या बिन हमजाह] हमसे कहिन हैं [जैद बिन वाकिद] हमसे कहिन हैं [मुगित्स बिन सुमाय] [अब्दुल्ला बिन अमरू] से उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; 'सबसे कुलीन मनुष्य कौन है?' उन्होंने उत्तर दिया : 'सब - लोग - जिनके मन दुखी है और जिनकी बात - उनकी बात - सत्य है '। उइ कहिन; 'हम पहिले से ओकरे सच्चे बातन का जानित है, तौ दुखी दिल का का मतलब है?' उ कहिन: 'एक हृदय जवन भक्त अऊर स्वच्छ है, वहिमा कौनो अवज्ञा या निरंकुशता नाहीं है, साथै साथ द्वेष अऊर हसाद भी नाहीं है'।
Imam Ibnu Majah : 4207
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ أَبِي رَجَاءٍ عَنْ بُرْدِ بْنِ سِنَانٍ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ وَاثِلَةَ بْنِ الْأَسْقَعِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ كُنْ وَرِعًا تَكُنْ أَعْبَدَ النَّاسِ وَكُنْ قَنِعًا تَكُنْ أَشْكَرَ النَّاسِ وَأَحِبَّ لِلنَّاسِ مَا تُحِبُّ لِنَفْسِكَ تَكُنْ مُؤْمِنًا وَأَحْسِنْ جِوَارَ مَنْ جَاوَرَكَ تَكُنْ مُسْلِمًا وَأَقِلَّ الضَّحِكَ فَإِنَّ كَثْرَةَ الضَّحِكِ تُمِيتُ الْقَلْبَ
हमसे कहिन है [अली बिन मुहम्मद] हमसे [अबू मुआविया] से [अबू राजा`] से [बर्द बिन सिनान] से [मखुल] से [वत्सिलाह बिन अल असका'] से [अबू हुरैरा] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे अबू हुरैरा वारा आदमी बनो', तुम निश्चित रूप से सबसे भक्त इंसान बन जाओगे। अइसन मनई बनौ जे पर्याप्त महसूस करत है, आप निस्संदेह सबसे आभारी मनुष्य बन जइहौ। इंसानन से वइसने प्यार करा जइसे आप खुद से प्यार करत हई, आप निश्चित रूप से एक आस्तिक बन जइहौ। अपने पड़ोसियन के साथे आपन संबंध सुधारौ, आप निश्चित रूप से आत्मसमर्पण करै वाला मनई बनब। अउर कम हँसौ, काहे से कि ज्यादा हँसै से दिल मर जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4208
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ رُمْحٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ عَنْ الْمَاضِي بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا عَقْلَ كَالتَّدْبِيرِ وَلَا وَرَعَ كَالْكَفِّ وَلَا حَسَبَ كَحُسْنِ الْخُلُقِ
हमसे [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन रुम्ह] हमसे [अब्दुल्ला बिन वाहब] [अल मदली बिन मुहम्मद] से ['अली बिन सुलेमान] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [अबू इदरीस अल खौलानी] से [अबू ज़ार] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कि सादगी ईमान का हिस्सा है, कहा जात है कि अल-बदजादजाह एक साधारण रवैया है।
Imam Ibnu Majah : 4209
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَلَفٍ الْعَسْقَلَانِيُّ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا سَلَّامُ بْنُ أَبِي مُطِيعٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْحَسَبُ الْمَالُ وَالْكَرَمُ التَّقْوَى
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन खलफ अल 'असकलानी] हमसे कहिन हैं [यूनुस बिन मुहम्मद] हमसे [सल्लम बिन अबू मुथी] [कतादाह] से [अल हसन] से [समुराह बिन जुंदब] से कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आदर धन के साथ है जबकि महिमा धर्मनिष्ठा के साथ है'।
Imam Ibnu Majah : 4210
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ كَهْمَسِ بْنِ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي السَّلِيلِ ضُرَيْبِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَأَعْرِفُ كَلِمَةً وَقَالَ عُثْمَانُ آيَةً لَوْ أَخَذَ النَّاسُ كُلُّهُمْ بِهَا لَكَفَتْهُمْ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيَّةُ آيَةٍ قَالَ{ وَمَنْ يَتَّقِ اللَّهَ يَجْعَلْ لَهُ مَخْرَجًا }
हमका बतावा गा है कि [हिस्याम बिन अम्मर] अऊर [उस्मान बिन अबू स्याबा] दुइनौ कहिन; हमका [अल मुतमीर बिन सुलेमान] से [कहमास बिन अल हसन] से [अबू अस सलील डलुरैब बिन नुफैर] से [अबू ज़ार] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में मैं एक वाक्य जानत हौं। ' जब उस्मान कहिन; 'एक छंद, अगर सब लोग लइ लेतिन तौ निश्चित रूप से ई छंद ओनके लिए काफी होई'। उइ पूछत हैं; 'हे अल्लाह के रसूल, ऊ कौन सी आयत है?' उ जवाब दिहिन: 'जे अल्लाह से डरत है, निश्चित रूप से उ ओके लिए एक रास्ता प्रदान करिहै'।
Imam Ibnu Majah : 4211
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا نَافِعُ بْنُ عُمَرَ الْجُمَحِيُّ عَنْ أُمَيَّةَ بْنِ صَفْوَانَ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي زُهَيْرٍ الثَّقَفِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَخَطَبَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالنَّبَاوَةِ أَوْ الْبَنَاوَةِ قَالَ وَالنَّبَاوَةُ مِنْ الطَّائِفِ قَالَ يُوشِكُ أَنْ تَعْرِفُوا أَهْلَ الْجَنَّةِ مِنْ أَهْلِ النَّارِ قَالُوا بِمَ ذَاكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ بِالثَّنَاءِ الْحَسَنِ وَالثَّنَاءِ السَّيِّئِ أَنْتُمْ شُهَدَاءُ اللَّهِ بَعْضُكُمْ عَلَى بَعْضٍ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [यजीद बिन हारून] हमसे [नफी' बिन उमर अल जुमाही] से [उमय्याह बिन शफवान] से [अबू बकर बिन अबू जुहैर अत त्साकाफी] से [उनके पिता] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरे सामने प्रचार किहिन जब उ नबवा या बनावा मा रहे - अबू जुहैर कहिन; 'ना बावाह त`इफ क्षेत्र का हिस्सा है'। - उ कहिन: 'तुम लगभग स्वर्ग के लोगन अऊर नरक के लोगन के बीच अंतर बता सकत हौ'। उइ पूछत हैं; 'हे अल्लाह के रसूल, ई कैसे पता चल सकत है?' उ जवाब दिहिन: 'अच्छी प्रशंसा अऊर बुरा अपमान के साथ। तुम अल्लाह के गवाह हौ - जे गवाही देई - कुछ अऊर दूसरन के बीच।
Imam Ibnu Majah : 4212
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ جَامِعِ بْنِ شَدَّادٍ عَنْ كُلْثُومٍ الْخُزَاعِيِّ قَالَأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ لِي أَنْ أَعْلَمَ إِذَا أَحْسَنْتُ أَنِّي قَدْ أَحْسَنْتُ وَإِذَا أَسَأْتُ أَنِّي قَدْ أَسَأْتُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا قَالَ جِيرَانُكَ قَدْ أَحْسَنْتَ فَقَدْ أَحْسَنْتَ وَإِذَا قَالُوا إِنَّكَ قَدْ أَسَأْتَ فَقَدْ أَسَأْتَ
हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [जामी' बिन स्याददा] से [कुल्त्सुम अल खुजाई] से कहिन है, उ कहिन; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास एक बार एक आदमी ने आया और कहा; 'हे अल्लाह के रसूल, हम कैसे जान सकित है कि हम अच्छा किहे हई या बुरा?' यहिसे उ जवाब दिहिस: 'अगर तोहार पड़ोसी कहत है कि तू अच्छा किहे अहा, तौ एकर मतलब है कि तू अच्छा किहे अहा। लेकिन अगर तोहार पड़ोसी कहत है कि तुम बुराई करत हौ, तौ एकर मतलब है कि तुम बुराई किहे हौ'।
Imam Ibnu Majah : 4213
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَجُلٌ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَيْفَ لِي أَنْ أَعْلَمَ إِذَا أَحْسَنْتُ وَإِذَا أَسَأْتُ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا سَمِعْتَ جِيرَانَكَ يَقُولُونَ أَنْ قَدْ أَحْسَنْتَ فَقَدْ أَحْسَنْتَ وَإِذَا سَمِعْتَهُمْ يَقُولُونَ قَدْ أَسَأْتَ فَقَدْ أَسَأْتَ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन यह्या] हमसे कहिस है [अब्दुर्राजाक] हमसे कहिस है [मामर] से [मंसूर] से [अबू वैल] से [अब्दुल्ला] उ कहिन; एक आदमी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; 'हमका कइसे पता चलै कि हम अच्छा किहे हई अऊर हम बुरा किहे हई?' ऊ जवाब दिहिस: 'अगर तुम सुनत हौ कि तोहार पड़ोसी कहत है कि तुम अच्छा किहे हौ, तौ तुम एक अच्छा मनई हौ। लेकिन अगर आप अपने पड़ोसी का ई कहत सुनत हई कि आप कुछ बुरा किहे हई, त आप एक बुरा मनई हई'।
Imam Ibnu Majah : 4214
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى وَزَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ قَالَا حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا أَبُو هِلَالٍ حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ أَبِي ثُبَيْتٍ عَنْ أَبِي الْجَوْزَاءِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْلُ الْجَنَّةِ مَنْ مَلَأَ اللَّهَ أُذُنَيْهِ مِنْ ثَنَاءِ النَّاسِ خَيْرًا وَهُوَ يَسْمَعُ وَأَهْلُ النَّارِ مَنْ مَلَأَ أُذُنَيْهِ مِنْ ثَنَاءِ النَّاسِ شَرًّا وَهُوَ يَسْمَعُ
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन यह्या] अऊर [जियाद बिन अहजाम] दुइनौ कहिन; हमसे कहिस है [मुस्लिम बिन इब्राहिम] हमसे कहिस है [अबू हिलाल] हमसे ['उकबाह बिन अबू त्सुबैत] [अबू अल जौज्जा`] से [इब्न अब्बास] से कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'स्वर्ग का निवासी उ व्यक्ति है जेकर कान अल्लाह ने इंसानन से अच्छी तारीफ से भर दिहिस है, अऊर उ सुनत है। उधर, नरक के निवासी वै लोग हैं जिनके कान अल्लाह द्वारा इंसानन के बुरे अपमान से भर जात हैं अऊर उ ओनका सुनत हैं।'
Imam Ibnu Majah : 4215
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ عَنْ أَبِي ذَرٍّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قُلْتُ لَهُ الرَّجُلُ يَعْمَلُ الْعَمَلَ لِلَّهِ فَيُحِبُّهُ النَّاسُ عَلَيْهِ قَالَ ذَلِكَ عَاجِلُ بُشْرَى الْمُؤْمِنِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिन हैं [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] [अबू इमरान अल जौनी] से [अब्दुल्लाह बिन अस शमित] से [अबू ज़ार] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन हैं, अबू ज़ार ने कहा; हम उनसे पूछेन; 'एक आदमी अल्लाह के खातिर अच्छा काम करत है, तब लोग ओ आदमी के काम से मोहब्बत हो जात हैं'। उ कहिन: 'ई एक अच्छी खबर है जवन विश्वासियन के लिए जल्द ही आवै वाली है'।
Imam Ibnu Majah : 4216
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سِنَانٍ أَبُو سِنَانٍ الشَّيْبَانِيُّ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي أَعْمَلُ الْعَمَلَ فَيُطَّلَعُ عَلَيْهِ فَيُعْجِبُنِي قَالَ لَكَ أَجْرَانِ أَجْرُ السِّرِّ وَأَجْرُ الْعَلَانِيَةِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बस्यार] हमसे कहिन हैं [अबू दाउद] हमसे कहिन हैं [सैद बिन सिनान अबू सिनान अस स्याबानी] से [हबीब बिन अबू थाबित] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैराह] उ कहिन; एक मनई पूछिस; 'हे अल्लाह के रसूल, सचमुच मैंने एक काम किया है, तब यह काम मुझे तब तक दिखाया गया जब तक कि मैं कर्म से चकित नहीं रहा'। उ कहिन: 'तुम्हारे लिए दुई इनाम हैं, एक इनाम छुपावै का अऊर एक इनाम प्रकट होय का'।
Imam Ibnu Majah : 4217
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ قَالَا أَنْبَأَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ وَهُوَ يَخْطُبُ النَّاسَ فَقَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ وَلِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ فَهِجْرَتُهُ إِلَى اللَّهِ وَإِلَى رَسُولِهِ وَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ لِدُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ امْرَأَةٍ يَتَزَوَّجُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [यजीद बिन हारून] कहिन हैं। अऊर ई दूसर मार्ग से सुनावा गा रहा, ई हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन रुम्ह] हमसे कहिस है [अल लैट्स बिन सद] दुइनौ कहिन; हमका [यह्या बिन सईद] सूचित किहिन हैं कि [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] रिपोर्ट किहिन हैं कि उ एक बार ['अलकमह बिन वकाश] सुनिन कि उ [उमर बिन खत्थब] का लोगन के सामने प्रचार करत सुने रहे, उ कहिन;; 'मैंने एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'वास्तव में हर काम इरादे के अनुसार होत है, अऊर एक व्यक्ति के लिए इनाम उ इरादा के अनुसार होत है। तौ जे अल्लाह अऊर ओकरे रसूल के लिए प्रवास करत है, ओकरे प्रवास का इनाम अल्लाह अऊर ओकरे रसूल के लिए है, अऊर जे दुनिया या ओ औरत के लिए प्रवास करत है जेसे उ शादी करिहै, तब ओकरे प्रवास के इनाम ओकरे प्रवास के उद्देश्य के अनुसार होई।'
Imam Ibnu Majah : 4218
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ أَبِي كَبْشَةَ الْأَنْمَارِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلُ هَذِهِ الْأُمَّةِ كَمَثَلِ أَرْبَعَةِ نَفَرٍ رَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ مَالًا وَعِلْمًا فَهُوَ يَعْمَلُ بِعِلْمِهِ فِي مَالِهِ يُنْفِقُهُ فِي حَقِّهِ وَرَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ عِلْمًا وَلَمْ يُؤْتِهِ مَالًا فَهُوَ يَقُولُ لَوْ كَانَ لِي مِثْلُ هَذَا عَمِلْتُ فِيهِ مِثْلَ الَّذِي يَعْمَلُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهُمَا فِي الْأَجْرِ سَوَاءٌ وَرَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ مَالًا وَلَمْ يُؤْتِهِ عِلْمًا فَهُوَ يَخْبِطُ فِي مَالِهِ يُنْفِقُهُ فِي غَيْرِ حَقِّهِ وَرَجُلٌ لَمْ يُؤْتِهِ اللَّهُ عِلْمًا وَلَا مَالًا فَهُوَ يَقُولُ لَوْ كَانَ لِي مِثْلُ هَذَا عَمِلْتُ فِيهِ مِثْلَ الَّذِي يَعْمَلُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهُمَا فِي الْوِزْرِ سَوَاءٌحَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ الْمَرْوَزِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ ابْنِ أَبِي كَبْشَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ بْنِ سَمُرَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ مُفَضَّلٍ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ ابْنِ أَبِي كَبْشَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ
हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [वाकी] हमसे [अल अमासी] [सलीम बिन अबू जाद] से [अबू कबस्याह अल अनमारी] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'इस उम्मत का उदाहरण चार आदमी के समान है, अर्थात्; एक आदमी को अल्लाह द्वारा धन और ज्ञान दिया जात है, फिर वह अपने ज्ञान के अनुसार अपनी धन खर्च करत... कोई जिसे अल्लाह ने ज्ञान दिया और धन नहीं दिया, तब बोला; 'अगर मोर पास उ होत जवन ई मनई के पास रहा, तौ मैं उ करत जवन उ किहिन'। तौ इनाम के मामलन मा, दुइनौ एकै हैं। अऊर एक मनई जेका अल्लाह से धन मिला है अऊर ओका ज्ञान नाहीं मिला है, तब ऊ आपन धन का बरबाद करत है अऊर ओका सही तरीका से खर्च नाहीं करत है। और एक आदमी जो अल्लाह द्वारा धन या ज्ञान के रूप में नहीं दिया गया था, तब उन्होंने कहा; 'अगर मोर पास उ होत जवन ई मनई के पास रहा, तौ मैं वइसने करत जइसे उ किहिन'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'त पाप के मामलन मा, उ दुइनौ एकै हैं'। हमसे कहिन है [इशाक बिन मंसूर अल मावरजी] हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] हमसे [ममर] से [मंसूर] से [सलीम बिन अबू अल जाद] से [इब्नू अबू कबस्याह] से [उनके पिता] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन हैं। अऊर ई एक अउर मार्ग से सुनावा गा है, हमका बतावा है [मुहम्मद बिन इस्माइल बिन समुराह] हमसे [अबू उसामा] से [मुफदलाल] से [मंसूर] से [सलीम बिन अबू अल जाद] से [इब्नू अबू कबस्याह] से [उनके पिता] से पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वल्लाह वल्लाह वल्लाह से बताइस है।
Imam Ibnu Majah : 4219
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى قَالَا حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ عَنْ شَرِيكٍ عَنْ لَيْثٍ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا يُبْعَثُ النَّاسُ عَلَى نِيَّاتِهِمْ
हमका बतावा गा है कि [अहमद बिन सिनान] अऊर [मुहम्मद बिन यह्या] दुइनौ कहिन; हमका [यजीद बिन हारून] से [शारीक] से [लैट्स] से [थावस] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'केवल लोग अपने-अपने इरादे के अनुसार इकट्ठा होंगे'।
Imam Ibnu Majah : 4220
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ أَنْبَأَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ أَنْبَأَنَا شَرِيكٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحْشَرُ النَّاسُ عَلَى نِيَّاتِهِمْ
हमसे कहिस है [जुहैर बिन मुहम्मद] हमसे कहिस है [जकरिया बिन आदि] हमसे [शरीक] से [अल अमासी] से [अबू सुफियान] से [जाबिर] कहिस है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'लोग अपने-अपने इरादे के अनुसार इकट्ठा होंगे'।