Imam Ibnu Majah : 4181
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَوْ تَعْلَمُونَ مَا أَعْلَمُ لَضَحِكْتُمْ قَلِيلًا وَلَبَكَيْتُمْ كَثِيرًا
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमसे कहिन हैं [अब्दुस शमाद बिन अब्दुल वारित्स] हमसे [हम्मम] से [कतादाह] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के शांति अऊर बरकत) कहिन: 'अगर तुम जानत रहौ कि हम का जानित है, तौ तुम बहुत हँसब अऊर हँसब।
Imam Ibnu Majah : 4182
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي فُدَيْكٍ عَنْ مُوسَى بْنِ يَعْقُوبَ الزَّمْعِيِّ عَنْ أَبِي حَازِمٍ أَنَّ عَامِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَاهُ أَخْبَرَهُأَنَّهُ لَمْ يَكُنْ بَيْنَ إِسْلَامِهِمْ وَبَيْنَ أَنْ نَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ يُعَاتِبُهُمْ اللَّهُ بِهَا إِلَّا أَرْبَعُ سِنِينَ{ وَلَا يَكُونُوا كَالَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلُ فَطَالَ عَلَيْهِمْ الْأَمَدُ فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْ وَكَثِيرٌ مِنْهُمْ فَاسِقُونَ }
हमका बतावा गा है [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम] हमका [मुहम्मद बिन अबू फुदैक] से [मूसा बिन याकूब अज़ ज़म'ई] से [अबू हाजिम] से कहिन है कि [अमीर बिन अब्दुल्ला बिन अज़ जुबैर] ने उनसे कहा है, कि [उनके पिता] ने उनसे कहा था, कि उनके इस्लाम अऊर अल्लाह के रहस्योद्घाटन के बीच के दूरी, जेकरे साथ उनके साथ केवल चार साल आलोचना कीन गै रही: '-...अऊर ओनका ओन लोगन के तरह न होवे देइ जेनके ऊपर बाइबिल पहिले प्रकट कीन गै रही। ओनके लिए, फिर ओनके ऊपर बहुत समय बीत गवा अऊर ओनके दिल कठोर होइ गें। अऊर ओनमा से अधिकांश दुष्ट लोग हैं- ' -Qs. अल हदीद: 16-।
Imam Ibnu Majah : 4183
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ الْحَنَفِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حُنَيْنٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُكْثِرُوا الضَّحِكَ فَإِنَّ كَثْرَةَ الضَّحِكِ تُمِيتُ الْقَلْبَ
हमसे कहिन है [बकर बिन खलफ] हमसे कहिन है [अबू बकर अल हनफी] हमसे कहिन है [अब्दुल हमीद बिन जाफर] से [इब्राहिम बिन अब्दुल्ला बिन हुनैन] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'बहुत हँसौ मत, काहे से कि बहुत ज्यादा हँसब दिल का मार देई'।
Imam Ibnu Majah : 4184
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ لِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اقْرَأْ عَلَيَّ فَقَرَأْتُ عَلَيْهِ بِسُورَةِ النِّسَاءِ حَتَّى إِذَا بَلَغْتُ{ فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِنْ كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَى هَؤُلَاءِ شَهِيدًا }فَنَظَرْتُ إِلَيْهِ فَإِذَا عَيْنَاهُ تَدْمَعَانِ
हमसे कहिन है [अल हन्नाद बिन अस सर्री] हमसे [अबू अल अह्वाश] से [अल अमासी] से [इब्राहिम] से ['अलकामा] से [अब्दुल्लाह] से कहिन है, 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार मुझसे कहा था: 'मेरे लिए -आयत- पढ़ो! ' त हम अन निसा का पत्र पढ़ेन, जब हम श्लोक पर आए: '-त का होई -काफिरन के साथ-, अगर हम हर लोगन से एक गवाह -प्रेरित- लाए अऊर हम तोहका -मुहम्मद- ओनके ऊपर गवाह के रूप मा -तुम्हारे लोगन के रूप मा-' -प्रश्न. अन निसा: 41-, तब हम उनके दुइनौ आँखिन मा आँसू देखेन'।
Imam Ibnu Majah : 4185
حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ دِينَارٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ الْخُرَاسَانِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ الْبَرَاءِ قَالَكُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي جِنَازَةٍ فَجَلَسَ عَلَى شَفِيرِ الْقَبْرِ فَبَكَى حَتَّى بَلَّ الثَّرَى ثُمَّ قَالَ يَا إِخْوَانِي لِمِثْلِ هَذَا فَأَعِدُّوا
हमसे कहिन [अल कासिम बिन जकारिया बिन दीनार] हमसे कहिन हैं [इशाक बिन मंसूर] हमसे [अबू राजा अल खुरासानी] से [मुहम्मद बिन मलिक] से [अल बार्रा] से कहिन हैं, 'हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शरीर के साथ गये रहेन, फिर उ कब्र के किनारे बैठे रहे अऊर जब तक हम जमीन पर नहीं रहे। उ कहिन: 'हे मोर भाई, कुछ अइसने खातिर तैयार होइ जा'।
Imam Ibnu Majah : 4186
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ بَشِيرِ بْنِ ذَكْوَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا أَبُو رَافِعٍ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ابْكُوا فَإِنْ لَمْ تَبْكُوا فَتَبَاكَوْا
हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन अहमद बिन बसीर बिन ज़ाकवान अद दिमासिकी] हमसे कहिन है [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे [अबू रफी'] से [इब्नू अबू अवलका] से [अब्दुर्रहमान बिन अस साब] से [सअद बिन अबू वकाश] से उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लाह वल्लाह वल्लाह वल्लाह वल्लम ने कहा: रोय नाहीं सकत फिर कोशिश करा। रोवै का'।
Imam Ibnu Majah : 4187
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدِّمَشْقِيُّ وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ حَدَّثَنِي حَمَّادُ بْنُ أَبِي حُمَيْدٍ الزُّرَقِيُّ عَنْ عَوْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ عَبْدٍ مُؤْمِنٍ يَخْرُجُ مِنْ عَيْنَيْهِ دُمُوعٌ وَإِنْ كَانَ مِثْلَ رَأْسِ الذُّبَابِ مِنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ثُمَّ تُصِيبُ شَيْئًا مِنْ حُرِّ وَجْهِهِ إِلَّا حَرَّمَهُ اللَّهُ عَلَى النَّارِ
हमका बतावा गा है कि [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम अद दिमासिकी] अऊर [इब्राहिम बिन अल मुंडजिर] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [इब्न अबू फुदैक] ने हमसे [हम्मद बिन अबू हुमैद अज जुराकी] से ['औन बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [उनके पिता] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से कहिन है, 'अल्लाह के रसूल सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मुझे विश्वास नहीं है कि उनकी आंखों से भी आँसू उतना बड़ा है अल्लाह के डर से मक्खी के सिर के रूप मा, फिर ई ओकरे चेहरा पर टकरात है लेकिन अल्लाह ओका नरक से बचा लेई'।
Imam Ibnu Majah : 4188
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ مَالِكِ بْنِ مِغْوَلٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ سَعِيدٍ الْهَمْدَانِيِّ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ{ وَالَّذِينَ يُؤْتُونَ مَا آتَوْا وَقُلُوبُهُمْ وَجِلَةٌ }أَهُوَ الَّذِي يَزْنِي وَيَسْرِقُ وَيَشْرَبُ الْخَمْرَ قَالَ لَا يَا بِنْتَ أَبِي بَكْرٍ أَوْ يَا بِنْتَ الصِّدِّيقِ وَلَكِنَّهُ الرَّجُلُ يَصُومُ وَيَتَصَدَّقُ وَيُصَلِّي وَهُوَ يَخَافُ أَنْ لَا يُتَقَبَّلَ مِنْهُ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [वाकी'] से [मलिक बिन मिघवाल] से [अब्दुर्रहमान बिन सईद अल हमदानी] से ['ऐस्याह] उ कहिन, 'मैंने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, अल्लाह का वचन का है: '-अऊर जवन लोग देत हैं, उ दिल से डरत हैं। अल मुकमिनुन: 60-, व्यभिचार, चोरी अऊर केवल शराब पीने वाले लोगन का संबोधित करत है?' उ जवाब दिहिन: 'नहीं, अबू बकर के बिटिया - या अस सिद्दीक के बिटिया -, लेकिन - आयत - केहू के संबोधित है जे रोजा रखत है, दान देत है अऊर नमाज करत है, जबकि ओका डर है कि ओकर काम स्वीकार न होइ जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4189
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ إِسْمَعِيلَ بْنِ عِمْرَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ يَزِيدَ بْنِ جَابِرٍ حَدَّثَنِي أَبُو عَبْدِ رَبٍّ قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ كَالْوِعَاءِ إِذَا طَابَ أَسْفَلُهُ طَابَ أَعْلَاهُ وَإِذَا فَسَدَ أَسْفَلُهُ فَسَدَ أَعْلَاهُ
हमसे कहिन है ['उथमान बिन इस्माइल बिन इमरान अद दिमासिकी] हमसे कहिन हैं [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे कहिन हैं [अब्दुर्रहमान बिन यजीद बिन जाबिर] हमसे कहिन हैं [अबू अब्द रब्ब] उ कहिन; हम [मुआविया बिन अबू सुफियान] का कहत सुने रहेन, 'हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'वास्तव मा एक मनई के काम एक पीये के बर्तन के तरह होत है, अगर नीचे साफ है तौ ऊपर भी साफ है, लेकिन अगर नीचे बादल है तौ सतह भी बादल है'।
Imam Ibnu Majah : 4190
حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عُبَيْدٍ الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ عَنْ وَرْقَاءَ بْنِ عُمَرَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ ذَكْوَانَ أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْعَبْدَ إِذَا صَلَّى فِي الْعَلَانِيَةِ فَأَحْسَنَ وَصَلَّى فِي السِّرِّ فَأَحْسَنَ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ هَذَا عَبْدِي حَقًّا
हमसे कहिन है [कत्सिर बिन उबैद अल हिमशी] हमसे [बकिया] से [वर्का बिन उमर] हमसे [अब्दुल्ला बिन ज़ाकवान अबू अज़ जिनाद] से [अबु हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लाहु अलैहि वल्लाम ने कहा, अगर वहाँ सेवक है: खुलापन के स्थिति मा प्रार्थना करत है फिर उ अच्छा प्रार्थना करत है, साथ ही जब उ गुप्त रूप से प्रार्थना करत है अऊर अपनी नमाज में सुधार करत है, तब अल्लाह 'अज्जा वजल्ला कहिहैं, 'ई सचमुच मोर सेवक है''।
Imam Ibnu Majah : 4191
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالَا حَدَّثَنَا شَرِيكُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَارِبُوا وَسَدِّدُوا فَإِنَّهُ لَيْسَ أَحَدٌ مِنْكُمْ بِمُنْجِيهِ عَمَلُهُ قَالُوا وَلَا أَنْتَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ وَلَا أَنَا إِلَّا أَنْ يَتَغَمَّدَنِي اللَّهُ بِرَحْمَةٍ مِنْهُ وَفَضْلٍ
हमका बतावा गा है कि [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन जुराह] अऊर [इस्माइल बिन मूसा] दुइनौ कहिन; हमसे [स्यारिक बिन अब्दुल्ला] [अल अमासी] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'समर्पित अऊर गंभीर रहौ -अपनी पूजा मा-, काहे से कि वास्तव मा आप मा से केहू भी ओकरे कर्मन के कारण उद्धार नाहीं पावत है'। उन्होंने कहा कि 'तौ भी करौ हे अल्लाह के रसूल! ' उ जवाब दिहिन: 'हम भी, केवल अल्लाह ही हमका अपनी कृपा अऊर महिमा से ढँक देत है'।
Imam Ibnu Majah : 4192
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ قَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ أَنَا أَغْنَى الشُّرَكَاءِ عَنْ الشِّرْكِ فَمَنْ عَمِلَ لِي عَمَلًا أَشْرَكَ فِيهِ غَيْرِي فَأَنَا مِنْهُ بَرِيءٌ وَهُوَ لِلَّذِي أَشْرَكَ
हमसे कहिन है [अबू मरवान अल उत्समानी] हमसे [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] से [अल अला बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैराह] से कहिन हैं, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह अज्जा वजल्ला ने कहा; 'मैं एक अइसन प्राणी हौं जेका साथियन के जरूरत नाहीं है, यहिसे जे भी अइसन काम करत है जेहिमा मोर अलावा अउर साथी शामिल हैं, तौ मैं खुद का ओसे अलग करत हौं, अऊर उ ओन साथियन से संबंधित है जेका उ शामिल करत है।'
Imam Ibnu Majah : 4193
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَهَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْحَمَّالُ وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ الْبُرْسَانِيُّ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ زِيَادِ بْنِ مِينَاءَ عَنْ أَبِي سَعْدِ بْنِ أَبِي فَضَالَةَ الْأَنْصَارِيِّ وَكَانَ مِنْ الصَّحَابَةِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا جَمَعَ اللَّهُ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ لِيَوْمٍ لَا رَيْبَ فِيهِ نَادَى مُنَادٍ مَنْ كَانَ أَشْرَكَ فِي عَمَلٍ عَمِلَهُ لِلَّهِ فَلْيَطْلُبْ ثَوَابَهُ مِنْ عِنْدِ غَيْرِ اللَّهِ فَإِنَّ اللَّهَ أَغْنَى الشُّرَكَاءِ عَنْ الشِّرْكِ
हमसे [मुहम्मद बिन बसिसयार] अऊर [हारून बिन अब्दुल्लाह अल हमाल] अऊर [इशाक बिन मंशुर] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बकर अल बुरसानी] हमसे कहिन है [अब्दुल हमीद बिन जाफर] ने हमका [मेरे पिता] से [जियाद बिन मीना] से [अबू स'द अबूलाह बिन फदलाह अलहरी अलहमल के एक साथी] से कहिन है। पैगम्बर, उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'जब अल्लाह क़यामत के दिन पहिले अऊर दूसर का इकट्ठा करत है - एक अइसन दिन जेहिमा कउनो संदेह नाहीं है -, तब एक बुलावै वाला होई जे कही, 'जे शर्क करत है जेका उ अल्लाह के अलावा करत है, ओका अल्लाह के अलावा अन्य से प्रतिशोध माँगै का चाही, ओका सच्चाई के जरूरत नाहीं है'।
Imam Ibnu Majah : 4194
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ كَثِيرِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ رُبَيْحِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَخَرَجَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نَتَذَاكَرُ الْمَسِيحَ الدَّجَّالَ فَقَالَ أَلَا أُخْبِرُكُمْ بِمَا هُوَ أَخْوَفُ عَلَيْكُمْ عِنْدِي مِنْ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ قَالَ قُلْنَا بَلَى فَقَالَ الشِّرْكُ الْخَفِيُّ أَنْ يَقُومَ الرَّجُلُ يُصَلِّي فَيُزَيِّنُ صَلَاتَهُ لِمَا يَرَى مِنْ نَظَرِ رَجُلٍ
हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन सैद] हमसे कहिन है [अबू खालिद अल अहमर] से [कत्सिर बिन जैद] से [रुबैह बिन अब्दुर्रहमान बी अबू सैद अल खुदरी] से [उनके पिता] से [अबू सैद] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमरे साथ बाहर आए, जब हम एक दूसरे के बारे मा मसीह दज्जल, फिर उ कहिन: 'का हम तोहका कुछ अइसन बात बताई कि हमका मसीहा अद दज्जल से ज्यादा तोहरे बारे मा चिंता है?' अबू सईद कहिन, 'हम जवाब दिहेन, 'जरूर'। उ कहिन: 'छुपी हुई शिर्क, यानी कोई अइसन मनई जे नमाज पढ़त है अऊर अपनी नमाज का बेहतर बनावत है ई उम्मीद मा कि केहू ओका नोटिस करी'।
Imam Ibnu Majah : 4195
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَلَفٍ الْعَسْقَلَانِيُّ حَدَّثَنَا رَوَّادُ بْنُ الْجَرَّاحِ عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ الْحَسَنِ بْنِ ذَكْوَانَ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَيٍّ عَنْ شَدَّادِ بْنِ أَوْسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَخْوَفَ مَا أَتَخَوَّفُ عَلَى أُمَّتِي الْإِشْرَاكُ بِاللَّهِ أَمَا إِنِّي لَسْتُ أَقُولُ يَعْبُدُونَ شَمْسًا وَلَا قَمَرًا وَلَا وَثَنًا وَلَكِنْ أَعْمَالًا لِغَيْرِ اللَّهِ وَشَهْوَةً خَفِيَّةً
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन खलफ अल 'असकलानी] हमसे [रववाद बिन अल जर्राह] से [अमीर बिन अब्दुल्ला] से [अल हसन बिन ज़ाकवान] से ['उबदह बिन नुसाई] से [स्याद्दाद बिन औस] से कहिन है, 'रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसललम ने कहा: उम्मा अल्लाह मा शिर्क है, मैं ई नाहीं कहत हउँ कि उ सूरज अऊर चाँद के पूजा करत हैं, अऊर न ही उ मूर्ति के पूजा करत हैं, बल्कि उ अल्लाह अऊर छुपी इच्छाओं के अलावा दूसरन के लिए अच्छा काम करत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 4196
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ الْمُخْتَارِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ يُسَمِّعْ يُسَمِّعْ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ يُرَاءِ يُرَاءِ اللَّهُ بِهِ
हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अबू कुरैब] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [बकर बिन अब्दुर्रहमान] हमसे [ईसा बिन अल मुख्तार] से [मुहम्मद बिन अबू लैला] से [अथिया अल औफी] से [अबू सैद अल खुदरी] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहिन हैं, उ कहिन: 'जे दूसरन से सुनय चाहत है - तब अल्लाह दूसर लोगन से सुनाई देई - अऊर दूसरन के लिए - जे केहू दूसर लोगन से देखै चाहत है, तब अल्लाह ओका देखाई'।
Imam Ibnu Majah : 4197
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ عَنْ جُنْدَبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يُرَاءِ يُرَاءِ اللَّهُ بِهِ وَمَنْ يُسَمِّعْ يُسَمِّعْ اللَّهُ بِهِ
हमसे कहा है [हारून बिन इशाक] ने बताया है [मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब] से [सुफियान] से [सलामा बिन कुहैल] से [जुंदब] उन्होंने कहा, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई रिया करेगा', अल्लाह जरूर देगा, और जो भी करेगा - अल्लाह करेगा - वह - निश्चित रूप से ईका स्वीकार करा - लोग ईका सुनिहैं -'।
Imam Ibnu Majah : 4198
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي وَمُحَمَّدُ ابْنُ بِشْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا حَسَدَ إِلَّا فِي اثْنَتَيْنِ رَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ مَالًا فَسَلَّطَهُ عَلَى هَلَكَتِهِ فِي الْحَقِّ وَرَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ حِكْمَةً فَهُوَ يَقْضِي بِهَا وَيُعَلِّمُهَا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] अऊर [मुहम्मद बिन बिसिर] दुइनौ कहिन; हमसे [इस्माइल बिन अबू खालिद] [कैस बिन अबू हाजिम] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से कहिन है कि उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'दुई मामलन के अलावा कौनो द्वेष नाहीं है; जेका अल्लाह द्वारा धन मिला है, फिर उ ओका सत्य के राह मा खर्च करत है, अऊर जेका अल हिकम - ज्ञान मिला है - फिर उ ओका व्यवहार मा लावत है'।
Imam Ibnu Majah : 4199
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا حَسَدَ إِلَّا فِي اثْنَتَيْنِ رَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ الْقُرْآنَ فَهُوَ يَقُومُ بِهِ آنَاءَ اللَّيْلِ وَآنَاءَ النَّهَارِ وَرَجُلٌ آتَاهُ اللَّهُ مَالًا فَهُوَ يُنْفِقُهُ آنَاءَ اللَّيْلِ وَآنَاءَ النَّهَارِ
हमका बतावा गा है कि [यह्या बिन हकीम] अऊर [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन यजीद] दुइनौ कहिन; हमका [सुफयान] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [अपने पिता] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'दुई मामलन के अलावा हसद -ईर्ष्या- नाहीं है; जेका अल्लाह ने कुरान - बुद्धिमत्ता - दी है, तब ऊ दिन-रात ओका करत है, अऊर जेका अल्लाह ने धन-दौलत दिहिस है, तब ऊ दिन-रात खर्च करत है'।
Imam Ibnu Majah : 4200
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْحَمَّالُ وَأَحْمَدُ بْنُ الْأَزْهَر قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ عَنْ عِيسَى بْنِ أَبِي عِيسَى الْحَنَّاطِ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَنَسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْحَسَدُ يَأْكُلُ الْحَسَنَاتِ كَمَا تَأْكُلُ النَّارُ الْحَطَبَ وَالصَّدَقَةُ تُطْفِئُ الْخَطِيئَةَ كَمَا يُطْفِئُ الْمَاءُ النَّارَ وَالصَّلَاةُ نُورُ الْمُؤْمِنِ وَالصِّيَامُ جُنَّةٌ مِنْ النَّارِ
हमका बतावा गा है कि [हारून बिन अब्दुल्लाह अल हमाल] अऊर [अहमद बिन अल अजहर] दुइनौ कहिन; हमसे [इब्न अबू फुदैक] से [ईसा बिन अबू ईसा अल हन्नाथ] से [अबू अज जिनाद] से [अनस] से कहिन है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'ईश्वर अच्छाई का भस्म करिहैं जइसे आग लकड़ी का भस्म करत है, अऊर भिक्षा गलती का मिटा देई जइसे पानी आग का बुझा सकत है। प्रार्थना एक आस्तिक का प्रकाश है, जबकि उपवास नरक के आग से ढाल है'।