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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4161

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا الْفُضَيْلُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ حَدَّثَنِي عُثْمَانُ بْنُ جُبَيْرٍ مَوْلَى أَبِي أَيُّوبَ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ قَالَجَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ عَلِّمْنِي وَأَوْجِزْ قَالَ إِذَا قُمْتَ فِي صَلَاتِكَ فَصَلِّ صَلَاةَ مُوَدِّعٍ وَلَا تَكَلَّمْ بِكَلَامٍ تَعْتَذِرُ مِنْهُ وَأَجْمِعْ الْيَأْسَ عَمَّا فِي أَيْدِي النَّاسِ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जियाद] हमसे कहिन है [अल फुदलैल बिन सुलेमान] हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन उथमान बिन हैत्साम] ने हमसे कहा है [उथमान बिन जुबैर] अबू अय्यूब के एक पूर्व गुलाम, [अबू अय्यूब] से उ कहिन, 'एक आदमी पैगम्बर सैल्लाह अलैह अलैह अलैह के पास आवा रहा, अल्लाह के रसूल, मोका -ज्ञान- सिखावा जवन छोट अऊर संक्षिप्त है'। उ कहिन: 'अगर तुम - चाहत हौ - प्रार्थना करै तौ प्रार्थना करौ जइसे कि केहू अलग होय चाहत है। एकौ शब्द न बोलौ जेसे पछतावा जाय। अऊर दूसर लोगन के पास जवन है, ओसे निराशा के भावना इकट्ठा करा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4162

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَوْسِ بْنِ خَالِدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلُ الَّذِي يَجْلِسُ يَسْمَعُ الْحِكْمَةَ ثُمَّ لَا يُحَدِّثُ عَنْ صَاحِبِهِ إِلَّا بِشَرِّ مَا يَسْمَعُ كَمَثَلِ رَجُلٍ أَتَى رَاعِيًا فَقَالَ يَا رَاعِي أَجْزِرْنِي شَاةً مِنْ غَنَمِكَ قَالَ اذْهَبْ فَخُذْ بِأُذُنِ خَيْرِهَا فَذَهَبَ فَأَخَذَ بِأُذُنِ كَلْبِ الْغَنَمِقَالَ أَبُو الْحَسَنِ بْنُ سَلَمَةَ حَدَّثَنَاهُ إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا مُوسَى حَدَّثَنَا حَمَّادٌ فَذَكَرَ نَحْوَهُ وَقَالَ فِيهِ بِأُذُنِ خَيْرِهَا شَاةً

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [अल हसन बिन मूसा] से [हम्मद बिन सलामा] से [अली बिन जैद] से [अस बिन खालिद] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जे बैठत है अऊर अपने साथियन के बारे मा बुद्धिमत्ता सुनावत है सिवाय बुरा के जवन उ सुनत है, जइसे कि एक मनई जे चरवाहे के पास आवा अऊर कहिस, 'हे चरवाहा, मोर बकरी मा से एक बकरी का मार डावा'। सो चरवाहा कहिस कि जा सबसे नीक बकरी लइ जा, लेकिन ऊ सबसे खराब बकरी लइके चला गा। अबू अल हसन बिन सलामा ने कहा, 'उन्होंने हमसे इस्माइल बिन इब्राहिम को बताया है, उन्होंने हमसे मूसा को बताया है, उन्होंने हमसे हम्माद को बताया है, फिर उन्होंने ऊपर के रूप में हदीस का जिक्र किया है, लेकिन उन्होंने कहा, '-लेओ- सबसे अच्छी बकरी'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4163

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ ح و حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَسْلَمَةَ جَمِيعًا عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ كِبْرٍ وَلَا يَدْخُلُ النَّارَ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ

हमसे कहिन [सुवैद बिन सैद] हमसे कहिन हैं [अली बिन मुशीर]। -दूसरे तरीका से ई बतावा गा है- हमसे कहिन है [अली बिन मैमून अर राकी] हमसे [सैद बिन मसलमा] [अल अमासी] से [इब्राहिम] से ['अलकाम] से [अब्दुल्ला] से सब कुछ बताइन हैं, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'कोई भी स्वर्ग मा नाहीं घुस जाई जेकर दिल से गर्व है, - अऊर स्वर्ग नरक मा नाहीं घुसब जेकरे हृदय मा घमंड है। विश्वास -यहाँ तक कि- एक सरसों का बीज'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4164

حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ الْأَغَرِّ أَبِي مُسْلِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي مَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا أَلْقَيْتُهُ فِي جَهَنَّمَ

हमसे कहिन है [हन्नाद बिन अस सारी] हमसे कहिन है [अबू अल अह्वाश] से ['अथा बिन अस सायब] से [अल अघर अबू मुस्लिम] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अल्लाह सुभानाहू कहिन: 'अभिमान मोर वस्त्र है, अऊर जे दुइ से एक शाल लेइ मैं, का मैं ओका जहांनाम के नरक मा फेंक देब'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4165

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ وَهَارُونُ بْنُ إِسْحَقَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ الْمُحَارِبِيُّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُ سُبْحَانَهُ الْكِبْرِيَاءُ رِدَائِي وَالْعَظَمَةُ إِزَارِي فَمَنْ نَازَعَنِي وَاحِدًا مِنْهُمَا أَلْقَيْتُهُ فِي النَّارِ

हमका बतावा गा है कि [अब्दुल्ला बिन सैद] अऊर [हारून बिन इशाक] दुइनौ कहिन; हमसे [अब्दुर्रहमान अल मुहारीबी] से ['अथा बिन अस सायब] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अल्लाह अज्जा वजल्ला कहिन: 'अभिमान हमार कपड़ा है, जबकि महानता हमार शाल है, एहसे जे भी एक चीज मा से एक का लेई, हम ओकरे भीतर फेंक देब, नरक'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4166

حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ أَنَّ دَرَّاجًا حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي الْهَيْثَمِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ يَتَوَاضَعُ لِلَّهِ سُبْحَانَهُ دَرَجَةً يَرْفَعُهُ اللَّهُ بِهِ دَرَجَةً وَمَنْ يَتَكَبَّرُ عَلَى اللَّهِ دَرَجَةً يَضَعُهُ اللَّهُ بِهِ دَرَجَةً حَتَّى يَجْعَلَهُ فِي أَسْفَلِ السَّافِلِينَ

हमसे कहिस है [हर्मलह बिन यह्या] हमसे कहिस है [इब्नू वाहब] हमसे कहिस है [अमरू बिन अल हरिथ] कि [दर्राजन] ने ओका [अबू अल हैत्सम] से [अबू सैद] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावा है, उ कहिन: 'जो भी तवादल है - अल्लाह के लिए विनम्र है - अल्लाह एक डिग्री, सुर्हान करेगा ओका एक डिग्री ऊपर उठावा, अऊर जे अल्लाह पर एक डिग्री से घमंड करत है, अल्लाह ओका एक डिग्री से निचले स्तर तक नीचे कर देई।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4167

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ وَسَلْمُ بْنُ قُتَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَإِنْ كَانَتْ الْأَمَةُ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ لَتَأْخُذُ بِيَدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَا يَنْزِعُ يَدَهُ مِنْ يَدِهَا حَتَّى تَذْهَبَ بِهِ حَيْثُ شَاءَتْ مِنْ الْمَدِينَةِ فِي حَاجَتِهَا

हमसे कहिन [नहसर बिन अली] हमसे कहिन हैं [अब्दुस शमाद] अऊर [सलम बिन कुतैबा] दुइनौ कहिन; हमका [स्यु'बाह] से ['अली बिन जैद] से [अनस बिन मलिक] से बतावा है कि उ कहिन, 'अगर मदीना के लोगन मा से एक दास महिला रही जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हाथ पकड़िस, तौ उ दास के हाथ से ओकर हाथ तब तक नाहीं हटावत जब तक कि उ ओका अपनी इच्छा मा कहाँ भी नाहीं ले जात जब तक कि उ आपन इच्छा पूरी न होइ जात'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4168

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ مُسْلِمٍ الْأَعْوَرِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعُودُ الْمَرِيضَ وَيُشَيِّعُ الْجِنَازَةَ وَيُجِيبُ دَعْوَةَ الْمَمْلُوكِ وَيَرْكَبُ الْحِمَارَ وَكَانَ يَوْمَ قُرَيْظَةَ وَالنَّضِيرِ عَلَى حِمَارٍ وَيَوْمَ خَيْبَرَ عَلَى حِمَارٍ مَخْطُومٍ بِرَسَنٍ مِنْ لِيفٍ وَتَحْتَهُ إِكَافٌ مِنْ لِيفٍ

हमसे कहिन [अमरू बिन रफी'] हमसे [जरीर] से [मुस्लिम अल अवार] से [अनस बिन मलिक] कहिन हैं, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक अइसन मनई रहे जे बीमार लोगन से मिलै, लाश पहुँचावै, नौकर के निमंत्रण पूरा करै अऊर गधा के सवारी करै का पसंद करत रहें। बनी कुरैदलाह अऊर नदलीर के निष्कासन के दिन उ गदहा पै सवार रहे, अऊर खैबर के विजय के दिन उ एक गदहा पै भी सवार रहे जेकर लगाम अऊर काठी चमड़ा से बनी रही।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4169

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْحُسَيْنِ بْنِ وَاقِدٍ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ مَطَرٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ خَطَبَهُمْ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ أَوْحَى إِلَيَّ أَنْ تَوَاضَعُوا حَتَّى لَا يَفْخَرَ أَحَدٌ عَلَى أَحَدٍ

हमसे कहिन है [अहमद बिन सईद] हमसे कहिन है [अली बिन अल हुसैन बिन वाकिद] हमसे [मेरे पिताजी] से [मथार] से [कतदाह] से [मुथरीफ] से [इयादल बिन हिमार] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन हैं, कि उ साथियन के सामने उपदेश दिहिन: इन्लाहु सल्लाहु अलैहि वसल्लम से: मोका बतावा कि तुमका विनम्र होवे के चाही, जब तक कि अउर कुछ गलत न होइ जाय। तुममें से एक दूसरे पर गर्व करत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4170

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي عُتْبَةَ مَوْلًى لِأَنَسِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَشَدَّ حَيَاءً مِنْ عَذْرَاءَ فِي خِدْرِهَا وَكَانَ إِذَا كَرِهَ شَيْئًا رُئِيَ ذَلِكَ فِي وَجْهِهِ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिसियार] हमसे कहिन हैं [यह्या बिन सैद] अऊर [अब्दुर्रहमान बिन महदी] दुइनौ कहिन; हमका [स्युबाह] से [कतदाह] से [अब्दुल्लाह बिन अबू उतबाह] से अनस बिन मलिक के एक पूर्व दास, [अबू सैद अल खुदरी] से उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैही वसल्लम एक शर्मीला व्यक्ति रहा, अऊर एक कुंवारी से ज्यादा शर्मीला रहा जवन अपने कमरा मा एकांत रही। अऊर अगर ऊ कुछ से नफरत करत है तौ ऊ ओकरे चेहरा के भाव से देखल जाई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4171

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ يَحْيَى عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِكُلِّ دِينٍ خُلُقًا وَخُلُقُ الْإِسْلَامِ الْحَيَاءُ

हमसे कहिन है [इस्माइल बिन अब्दुल्लाह अर राकी] हमसे [ईसा बिन यूनुस] से [मुआविया बिन यह्या] से [अज जुहरी] से [अनस] से कहिन है, 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव मा, हर धर्म मा नैतिकता है, जबकि इस्लाम के नैतिकता शर्म है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4172

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مُحَمَّدٍ الْوَرَّاقُ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ حَسَّانَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ الْقُرَظِيِّ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِكُلِّ دِينٍ خُلُقًا وَإِنَّ خُلُقَ الْإِسْلَامِ الْحَيَاءُ

हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन सैद] हमसे कहिन है [सैद बिन मुहम्मद अल वार्राक] हमसे कहिन है [सालिह बिन हसन] से [मुहम्मद बिन का'ब अल कुरादली] से [इब्न अब्बास] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैही वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा, हर धर्म मा नैतिकता है, जबकि इस्लाम नैतिकता है- शर्म'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4173

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ رَافِعٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَمْرٍو أَبِي مَسْعُودٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِمَّا أَدْرَكَ النَّاسُ مِنْ كَلَامِ النُّبُوَّةِ الْأُولَى إِذَا لَمْ تَسْتَحْيِ فَاصْنَعْ مَا شِئْتَ

हमसे कहिन है [अमरू बिन रफी'] हमसे [जरीर] से [मंसूर] से [रिब'इ बिन हिरासी] से ['उकबाह बिन अमरू अबू मसूद] से कहिन है, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मनुष्य नबी के मामलन के बारे मा सबसे पहिले जानत हैं, ई है कि आप कृपया नाहीं करत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4174

حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ أَبِي بَكْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْحَيَاءُ مِنْ الْإِيمَانِ وَالْإِيمَانُ فِي الْجَنَّةِ وَالْبَذَاءُ مِنْ الْجَفَاءِ وَالْجَفَاءُ فِي النَّارِ

हमसे कहिन है [इस्माइल बिन मूसा] हमसे कहिन है [हुसैम] से [मंसूर] से [अल हसन] से [अबू बकरा] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहिन: 'शर्म ईमान का हिस्सा है, अऊर ईमान स्वर्ग मा होई। इधर, गंदे शब्द बुरे व्यवहार का हिस्सा हैं, अऊर बुरा व्यवहार नरक मा होई।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4175

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلَّالُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا كَانَ الْفُحْشُ فِي شَيْءٍ قَطُّ إِلَّا شَانَهُ وَلَا كَانَ الْحَيَاءُ فِي شَيْءٍ قَطُّ إِلَّا زَانَهُ

हमसे कहा गा है [अल हसन बिन अली अल खल्लाल] हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] हमसे [मा'मर] [तसाबित] से [अनस] से कहिन है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जब तक कि ई ओका बुरा न बनावै तब तक कौनो भी चीज के प्रति घृणा नाहीं है। अऊर जब तक ऊ ओका सजावत नाहीं है, तब तक ऊ कउनौ चीज से लज्जित नाहीं होत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4176

حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ عَنْ أَبِي مَرْحُومٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ مُعَاذِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَظَمَ غَيْظًا وَهُوَ قَادِرٌ عَلَى أَنْ يُنْفِذَهُ دَعَاهُ اللَّهُ عَلَى رُءُوسِ الْخَلَائِقِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ حَتَّى يُخَيِّرَهُ فِي أَيِّ الْحُورِ شَاءَ

हमसे कहिन है [हर्मलह बिन याह्या] हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन वाहब] ने हमसे [सैद बिन अबू अय्यूब] से [अबू मरहुम] से [सहल बिन मुआज़ बिन अनस] से [उनके पिता] से कहा है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी अपने गुस्से को रोकने में सक्षम है जब तक स्वर्ग ई, तब अल्लाह ओका क़ामत के दिन सब प्राणियन के सामने बुलावा जब तक कि उ ओका -आजादी- न देई कि उ आपन पसंद के स्वर्गदूत का चुनै।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4177

حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ دِينَارٍ الشَّيْبَانِيُّ عَنْ عُمَارَةَ الْعَبْدِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ قَالَكُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَتَتْكُمْ وُفُودُ عَبْدِ الْقَيْسِ وَمَا يَرَى أَحَدٌ فِينَا نَحْنُ كَذَلِكَ إِذْ جَاءُوا فَنَزَلُوا فَأَتَوْا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبَقِيَ الْأَشَجُّ الْعَصَرِيُّ فَجَاءَ بَعْدُ فَنَزَلَ مَنْزِلًا فَأَنَاخَ رَاحِلَتَهُ وَوَضَعَ ثِيَابَهُ جَانِبًا ثُمَّ جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَشَجُّ إِنَّ فِيكَ لَخَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمَ وَالتُّؤَدَةَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَشَيْءٌ جُبِلْتُ عَلَيْهِ أَمْ شَيْءٌ حَدَثَ لِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَلْ شَيْءٌ جُبِلْتَ عَلَيْهِ

हमसे कहिन है [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल अल हमदानी] हमसे कहिन है [यूनुस बिन बुकैर] हमसे कहिन है [खालिद बिन दीनार अस स्याबानी] से ['उमरह अल अबदी] हमसे कहिन है [अबू सैद अल खुदरी] उ कहिन, 'हम एक बार रसुलुल्लाह अलैह अलैह के साथ बैठे रहेन तब उ कहिन: आप लोग के पास 'अब्दुल कैस' का प्रतिनिधिमंडल आ गया है'। लेकिन हममें से केहू ई नाहीं देखिस, जब हम अबहियों अइसने रहेन, अचानक उ लोग रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिलै आइन अऊर आइन, सिवाय अल अस्यज अल 'अशरी के जे अबहियों पीछे रहे -पीछे रह गए-। फिर उ आवा, ऊँट का बांध के अऊर आपन कपड़ा रखे के बाद उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले आवा। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'हे अस्यज, वास्तव में तुममें दुई रवैया हैं जे अल्लाह से प्यार करत हैं; विनम्र अऊर बिना जल्दबाजी के रवैया'। आशाज ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, का ई एक अइसन विशेषता है जवन हमका सौंपा गा है, या कुछ अइसन है जवन हमसे उत्पन्न होत है?' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'यही प्रकृति है जो आपको सौंपी गई है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4178

حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَقَ الْهَرَوِيُّ حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ الْفَضْلِ الْأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا قُرَّةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا أَبُو جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِلْأَشَجِّ الْعَصَرِيِّ إِنَّ فِيكَ خَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمَ وَالْحَيَاءَ

हमसे कहिन है [अबू इशाक अल हरावी] हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन अल फदल अल अंसारी] हमसे कहिन है [कुर्राह बिन खालिद] हमसे [अबू जमराह] [इब्न अब्बास] से कहिन हैं, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अलियाज अल अशरी से कहा: अल्लाह से आप दुइ प्यार करत हैं; विनम्रता अऊर शर्मिंदगी'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4179

حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ يُونُسَ بْنِ عُبَيْدٍ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ جُرْعَةٍ أَعْظَمُ أَجْرًا عِنْدَ اللَّهِ مِنْ جُرْعَةِ غَيْظٍ كَظَمَهَا عَبْدٌ ابْتِغَاءَ وَجْهِ اللَّهِ

हमसे कहिन है [जैद बिन अखज़म] हमसे कहिन है [बिसिर बिन उमर] हमसे कहिन है [हम्मद बिन सलामा] से [यूनुस बिन उबैद] से [अल हसन] से [इब्न उमर] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'अल्लाह के दृष्टि मा दबाए गए गुस्सा से बड़ा इनाम का कौनो घूँट नाहीं है भगवान के प्रसन्नता पावै के लिए सेवक'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4180

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ أَنْبَأَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى أَنْبَأَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُهَاجِرٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ مُوَرِّقٍ الْعِجْلِيِّ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي أَرَى مَا لَا تَرَوْنَ وَأَسْمَعُ مَا لَا تَسْمَعُونَ إِنَّ السَّمَاءَ أَطَّتْ وَحَقَّ لَهَا أَنْ تَئِطَّ مَا فِيهَا مَوْضِعُ أَرْبَعِ أَصَابِعَ إِلَّا وَمَلَكٌ وَاضِعٌ جَبْهَتَهُ سَاجِدًا لِلَّهِ وَاللَّهِ لَوْ تَعْلَمُونَ مَا أَعْلَمُ لَضَحِكْتُمْ قَلِيلًا وَلَبَكَيْتُمْ كَثِيرًا وَمَا تَلَذَّذْتُمْ بِالنِّسَاءِ عَلَى الْفُرُشَاتِ وَلَخَرَجْتُمْ إِلَى الصُّعُدَاتِ تَجْأَرُونَ إِلَى اللَّهِ وَاللَّهِ لَوَدِدْتُ أَنِّي كُنْتُ شَجَرَةً تُعْضَدُ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू सैबाह] हमसे कहिन है ['उबैदुल्लाह बिन मूसा] हमसे [इजरायल] से [इब्राहिम बिन मुहाजिर] से [मुजाहिद] से [मुवारिक अल 'इजली] से [अबू ज़ार] कहिन हैं, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लाहुअलाह वल्लाम इन कुछ जानत हैं: नाहीं जानत, अऊर सुनेन जवन तू नाहीं सुनेन। निस्चय ही, आकाश कराहत है अऊर ओनका कराहय का अधिकार दीन जात है। काहे से कि ई चार उंगली के स्थिति मा नाहीं है जब तक कि कौनो परी न हो जे अल्लाह के सजदा मा आपन माथा न रखे। अल्लाह के कसम, अगर तुम जानत हो कि हम का जानित है, त तुम थोड़ा हँसते अऊर बहुत रोवत, अऊर तुम अपनी पत्नी के साथे बिस्तर मा सहज महसूस नाइ करत, अऊर तुम अल्लाह से जोर से दुआ करै के लिए पहाड़ियन पर जात। अल्लाह के कसम, मैं सचमुच चाहत हउँ कि मैं एक पेड़ होत जेका काटा गा रहा'।