Imam Ibnu Majah : 4141
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ وَأَبُو خَالِدٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ ضِجَاعُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَدَمًا حَشْوُهُ لِيفٌ
हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन सैद] हमसे कहिन हैं [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] अऊर [अबू खालिद] से [हिस्याम बिन 'उर्वाह] से [उनके पिता] से ['ऐस्याह] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का बिस्तर पुआल से भरी त्वचा से बना रहा - फाइबर-'।
Imam Ibnu Majah : 4142
حَدَّثَنَا وَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَلِيٍّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَى عَلِيًّا وَفَاطِمَةَ وَهُمَا فِي خَمِيلٍ لَهُمَا وَالْخَمِيلُ الْقَطِيفَةُ الْبَيْضَاءُ مِنْ الصُّوفِ قَدْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَهَّزَهُمَا بِهَا وَوِسَادَةٍ مَحْشُوَّةٍ إِذْخِرًا وَقِرْبَةٍ
हमसे कहिन है [वाशिल बिन अब्दुल अ'ला] हमसे [मुहम्मद बिन फुदलैल] से ['अथा बिन अस सायब] से [अपने पिता] से [अली] से कहिन हैं, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार अली अऊर फातिमा से मिले रहे, जब उ दुइनौ ऊन से बने अपने कंबल मा रहे। अउर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम खुदै दुइनौ के ताईं ऊनी कपड़ा, तकिया अउर चमड़ा के पीये के बर्तन तैयार किहिन।'
Imam Ibnu Majah : 4143
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنِي سِمَاكٌ الْحَنَفِيُّ أَبُو زُمَيْلٍ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْعَبَّاسِ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَدَخَلْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَلَى حَصِيرٍ قَالَ فَجَلَسْتُ فَإِذَا عَلَيْهِ إِزَارٌ وَلَيْسَ عَلَيْهِ غَيْرُهُ وَإِذَا الْحَصِيرُ قَدْ أَثَّرَ فِي جَنْبهِ وَإِذَا أَنَا بِقَبْضَةٍ مِنْ شَعِيرٍ نَحْوِ الصَّاعِ وَقَرَظٍ فِي نَاحِيَةٍ فِي الْغُرْفَةِ وَإِذَا إِهَابٌ مُعَلَّقٌ فَابْتَدَرَتْ عَيْنَايَ فَقَالَ مَا يُبْكِيكَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ فَقُلْتُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ وَمَالِي لَا أَبْكِي وَهَذَا الْحَصِيرُ قَدْ أَثَّرَ فِي جَنْبِكَ وَهَذِهِ خِزَانَتُكَ لَا أَرَى فِيهَا إِلَّا مَا أَرَى وَذَلِكَ كِسْرَى وَقَيْصَرُ فِي الثِّمَارِ وَالْأَنْهَارِ وَأَنْتَ نَبِيُّ اللَّهِ وَصَفْوَتُهُ وَهَذِهِ خِزَانَتُكَ قَالَ يَا ابْنَ الْخَطَّابِ أَلَا تَرْضَى أَنْ تَكُونَ لَنَا الْآخِرَةُ وَلَهُمْ الدُّنْيَا قُلْتُ بَلَى
हमसे कहा है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] ने हमसे कहा है [उमर बिन यूनुस] ने हमसे कहा है ['इकरिमा बिन अम्मर] ने मुझसे कहा है [सिमक अल हनफी अबू जुमैल] ने मुझसे कहा है [अब्दुल्ला बिन अल 'अब्बास] ने मुझसे कहा है [उमर बिन खत्ताब] उन्होंने कहा, 'मैं एक बार रसूलुल्लाह से तब मिला जब वल्लाह वल्लाह चटाई'। उमर आगे कहिन, 'फिर हम बैठेन, हम पायेन कि ऊ खाली एक कपड़ा पहिने रहा अऊर जवने के ऊ पहिने रहा, वहिके अलावा अउर कउनो कपड़ा नाहीं रहा, जबकि चटाई ओकरे बगल मा एक छाप छोड़ि दिहिस रहा। हम कमरा के कोने मा पड़े अऊर त्वचा लटकत टैनिंग के लिए उपयोग कीन जाय वाली एक मुट्ठी गेहूं के बारे मा एक शा' अऊर पत्तियन का भी -देखेन। हमका एहसास नाहीं भवा कि हमार आँखिन मा आँसू भर गें। उ पूछिन: 'हे इब्नुल खत्ताब, तोहका का रोवावा?' हम जवाब दिहेन, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, जब तक ई चटाई आपके तरफ बनी रही, तब तक हम आंसू कैसे न बहा सकित है, अऊर हम आपके कमरा मा कुछौ नाहीं देखित है, सिवाय जवन हम देखित है। जबकि किसरा के राजा अऊर रोमन सम्राट फल अऊर नदियन से भरे रहे, तुम अल्लाह के पैगम्बर अऊर उनके चुने हुए हौ, लेकिन तुम्हार कमरा बस इहै है!'. उन्होंने जवाब दिया: 'हे इब्नुल खत्ताब, का तुम प्रसन्न नाहीं हौ कि हमका परलोक मिली अऊर ओनका दुनिया मिली?' हम जवाब दिहेन, 'जरूर'।
Imam Ibnu Majah : 4144
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ حَبِيبٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ عَامِرٍ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَأُهْدِيَتْ ابْنَةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَيَّ فَمَا كَانَ فِرَاشُنَا لَيْلَةَ أُهْدِيَتْ إِلَّا مَسْكَ كَبْشٍ
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन थारीफ] अऊर [इशाक बिन इब्राहिम बिन हबीब] दुइनौ कहिन; हमका [मुहम्मद बिन फुदलैल] से [मुजालिद] से [अमीर] से [अल हरित्स] से ['अली] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बिटिया हमका दीन गै रही, जब रात मा जेहि दिन उ हमका दिहिन, हमरे पास गद्दा नाहीं रहा बल्कि केवल ऊन से बना रहा'।
Imam Ibnu Majah : 4145
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ شَقِيقٍ عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَأْمُرُ بِالصَّدَقَةِ فَيَنْطَلِقُ أَحَدُنَا يَتَحَامَلُ حَتَّى يَجِيءَ بِالْمُدِّ وَإِنَّ لِأَحَدِهِمْ الْيَوْمَ مِائَةَ أَلْفٍقَالَ شَقِيقٌ كَأَنَّهُ يُعَرِّضُ بِنَفْسِهِ
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] अऊर [अबू कुरैब] दुइनौ कहिन; हमसे [अबू उसामा] से [जैदा] से [अल अमासी] से [स्याक] से [अबू मसूद] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका भिक्षा देय का आदेश दिहिन। फिर हममें से एक -कोशिस करत- तब तक चला गवा जब तक कि ऊ -एक भिक्षा- एक कीचड़ के साथ वापस न आ जाय, ओनमा से एक के लिए, आज के लिए, एक लाख दिरहम के बराबर होई'। स्याक कहिन, 'ई अइसे रहा जइसे उ खुद का जबरदस्ती करत रहा'।
Imam Ibnu Majah : 4146
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ أَبِي نَعَامَةَ سَمِعَهُ مِنْ خَالِدِ بْنِ عُمَيْرٍ قَالَخَطَبَنَا عُتْبَةُ بْنُ غَزْوَانَ عَلَى الْمِنْبَرِ فَقَالَ لَقَدْ رَأَيْتُنِي سَابِعَ سَبْعَةٍ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا لَنَا طَعَامٌ نَأْكُلُهُ إِلَّا وَرَقُ الشَّجَرِ حَتَّى قَرِحَتْ أَشْدَاقُنَا
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [वाकी'] [अबू नआमा] से कहिन हैं अऊर उ [खालिद बिन उमैर] से सुनिन कि उ कहिन, '[उत्बाह बिन गज़वान] एक बार हमरे सामने पल्पिट पर उपदेश दिहिन, कहिन, 'सचमुच मैं अल्लाह के उद्धारकर्ता के साथ सातवें लोग हौं अलैहि वसल्लम, अऊर हमका पत्तियन के अलावा खाए लायक भोजन नाहीं मिला, जेहिसे कोना हमार मुँह बहुत चोट खात है'।
Imam Ibnu Majah : 4147
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبَّاسٍ الْجُرَيْرِيِّ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا عُثْمَانَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّهُمْ أَصَابَهُمْ جُوعٌ وَهُمْ سَبْعَةٌ قَالَ فَأَعْطَانِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَبْعَ تَمَرَاتٍ لِكُلِّ إِنْسَانٍ تَمْرَةٌ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [घुंदर] से [स्यूबाह] से ['अब्बास अल जुरैरी] कहिन हैं; हम [अबू उस्मान] का [अबू हुरैराह] से बतावत सुने रहेन, कि ओनका भूख लाग रही, अऊर उ समय ओनमा से सात रहे, एहसे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमका सात खजूर दिहिन अऊर हममें से हर एक का एक खजूर मिला'।
Imam Ibnu Majah : 4148
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ أَبِي عُمَرَ الْعَدَنِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَاطِبٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ بْنِ الْعَوَّامِ عَنْ أَبِيهِ قَالَلَمَّا نَزَلَتْ{ ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنْ النَّعِيمِ }قَالَ الزُّبَيْرُ وَأَيُّ نَعِيمٍ نُسْأَلُ عَنْهُ وَإِنَّمَا هُوَ الْأَسْوَدَانِ التَّمْرُ وَالْمَاءُ قَالَ أَمَا إِنَّهُ سَيَكُونُ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन याह्या बिन अबू उमर अल 'अदानी] हमसे [सुफयान बिन उयैना] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [यह्या बिन अब्दुर्रहमान बिन हाथिब] से [अब्दुल्ला बिन अज़ जुबैर बिन अल 'अवाम] से [अपने पिता] से उ कहिन, 'जब 'जब नीचे आएगा' - आप निश्चित रूप से पूछेंगे: उ दिन सुखन के बारे मा - जेकरे बारे मा तुम उ दुनिया मा घमंड करत हौ-' -प्रश्न। ताकातुर: 8- मा, जुबैर ने पूछा, 'हम कौन से एहसान के लिए जवाबदेह होंगे? यहि बीच, हमरे आशीर्वाद मा अल असवादैन -खजूर अऊर पानी- के अलावा कुछौ नाहीं है?' उ कहिन: 'अऊर ई निश्चित रूप से होई'।
Imam Ibnu Majah : 4149
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَبَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ ثَلَاثُ مِائَةٍ نَحْمِلُ أَزْوَادَنَا عَلَى رِقَابِنَا فَفَنِيَ أَزْوَادُنَا حَتَّى كَانَ يَكُونُ لِلرَّجُلِ مِنَّا تَمْرَةٌ فَقِيلَ يَا أَبَا عَبْدِ اللَّهِ وَأَيْنَ تَقَعُ التَّمْرَةُ مِنْ الرَّجُلِ فَقَالَ لَقَدْ وَجَدْنَا فَقْدَهَا حِينَ فَقَدْنَاهَا وَأَتَيْنَا الْبَحْرَ فَإِذَا نَحْنُ بِحُوتٍ قَدْ قَذَفَهُ الْبَحْرُ فَأَكَلْنَا مِنْهُ ثَمَانِيَةَ عَشَرَ يَوْمًا
हमसे कहिन है [उथमान बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है ['अब्दह बिन सुलेमान] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [वहब बिन कैसान] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमका तीन सौ मनई भेजिन। हम अपने गर्दन के ऊपर प्रावधान ले जात रहेन। फिर हमार प्रावधान खतम होइ गवा ताकि हममें से एक के पास केवल एक तारीख रही। तो जाबिर से पूछा गया कि हे अबू अब्दुल्ला एक तारीख एक आदमी के लिए क्या कर सकती है? जाबीर ने कहा, 'जौने दिन हमरे पास आपूर्ति खतम होइ गै, हमका एक बड़ी मछरी मिली जवन समुद्र के पानी से उड़ गै रही, तौ हम अठारह दिन तक ओका खाये रहेन'।
Imam Ibnu Majah : 4150
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي السَّفَرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَمَرَّ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَحْنُ نُعَالِجُ خُصًّا لَنَا فَقَالَ مَا هَذَا فَقُلْتُ خُصٌّ لَنَا وَهَى نَحْنُ نُصْلِحُهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أُرَى الْأَمْرَ إِلَّا أَعْجَلَ مِنْ ذَلِكَ
हमसे कहिन है [अबू कुरैब] हमसे कहिन है [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू अस सफर] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमरे पास से गुजरे जब हम अपने बूथन के देखभाल करत रहेन जवन कि पत्तियन अऊर लकड़ी से बने रहे, उ कहिन:' हम जवाब दिहेन, 'ई हमार क्यूबिकल है जेका हम मरम्मत करत हैं'। उ कहिन: 'हमका लागत है कि मौत वहिसे जल्दी आ जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4151
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عُثْمَانَ الدِّمَشْقِيُّ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى بْنِ أَبِي فَرْوَةَ حَدَّثَنِي إِسْحَقُ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَمَرَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقُبَّةٍ عَلَى بَابِ رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَقَالَ مَا هَذِهِ قَالُوا قُبَّةٌ بَنَاهَا فُلَانٌ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُلُّ مَالٍ يَكُونُ هَكَذَا فَهُوَ وَبَالٌ عَلَى صَاحِبِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَبَلَغَ الْأَنْصَارِيَّ ذَلِكَ فَوَضَعَهَا فَمَرَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدُ فَلَمْ يَرَهَا فَسَأَلَ عَنْهَا فَأُخْبِرَ أَنَّهُ وَضَعَهَا لِمَا بَلَغَهُ عَنْكَ فَقَالَ يَرْحَمُهُ اللَّهُ يَرْحَمُهُ اللَّهُ
हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन उथमान अद दिमासिकी] हमसे कहिन है [अल वालिद बिन मुस्लिम] हमसे कहिन है [ईसा बिन अब्दुल अला बिन अबू फरवाह] ने हमसे [इशाक बिन अबू थलहा] से [अनस] से कहिन है, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने डोलाहु अलैहि वसल्लम ने सूरज डोलाहु अलैहि वसल्लाम के पास अनास के पास पहुँचा, उन्होंने पूछा: 'ई का अहै?' उइ जवाब दिहिन, 'फलाना द्वारा बनावा गा गुंबद'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'हर संपत्ति - इस्तेमाल - इस तरह, क़यामत के दिन अपने मालिक के लिए एक आपदा होई'। पता चला कि उनकी बात अंसार आदमी तक पहुंच गई, तो उन्होंने तुरंत उन्हें गिरा दिया। थोरी देर बाद लौटि के वहि जगह से गुजरिन, मुला फिर से देखिन नाहीं, तौ वहिके बारे मा पूछिन। तब उनसे कहा गा कि 'तुम्हार बात सुन के मालिक उखारि दिहिस है'। उ कहिन: 'अल्लाह ओनके ऊपर रहम करै, अल्लाह ओनके ऊपर रहम करै'।
Imam Ibnu Majah : 4152
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سَعِيدِ بِنِ عَمْرِو بْنِ سَعِيدِ بْنِ الْعَاصِ عَنْ أَبِيهِ سَعِيدٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَلَقَدْ رَأَيْتُنِي مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَنَيْتُ بَيْتًا يُكِنُّنِي مِنْ الْمَطَرِ وَيُكِنُّنِي مِنْ الشَّمْسِ مَا أَعَانَنِي عَلَيْهِ خَلْقُ اللَّهِ تَعَالَى
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन यह्या] हमसे कहिन हैं [अबू नुआइम] हमसे [इशाक बिन सैद बिन अमरू बिन सैद बिन अल 'अश] से [अपने पिता अर्थात् सैद] से [इब्न उमर] कहिन हैं; 'मैं एक बार रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे एक घर बनावै का सपना देखे रहेन जवन मोका बारिश अऊर तपती धूप से बचा सकै, अऊर अल्लाह के कौनो भी प्राणी मोर मदद नाहीं किहिस - रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के अलावा -'।
Imam Ibnu Majah : 4153
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ حَارِثَةَ بْنِ مُضَرِّبٍ قَالَأَتَيْنَا خَبَّابًا نَعُودُهُ فَقَالَ لَقَدْ طَالَ سَقْمِي وَلَوْلَا أَنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تَتَمَنَّوْا الْمَوْتَ لَتَمَنَّيْتُهُ وَقَالَ إِنَّ الْعَبْدَ لَيُؤْجَرُ فِي نَفَقَتِهِ كُلِّهَا إِلَّا فِي التُّرَابِ أَوْ قَالَ فِي الْبِنَاءِ
हमसे कहिन है [इस्माइल बिन मूसा] हमसे [शारीक] [अबू इशाक] से [हरित्साह बिन मुदलारिब] से कहिन है, उ कहिन, 'हम [खब्बाब] से मिले गये रहेन, फिर उ कहिन, 'मेरी पीड़ा काफी लंबा होइ गै है, अगर हम अल्लाह के रसूल सल्लाहुअलाह वल्लम से नाहीं सुनित: बेशक हमका ई उम्मीद रही। अऊर उ इहौ कहिन: 'वास्तव मा, एक नौकर का जमीन के मामलन के वित्तपोषण के अलावा ओकरे सब आजीविका के लिए पुरस्कृत कीन जाई'। या उ कहिन: 'निर्माण मामलन मा'।
Imam Ibnu Majah : 4154
حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ ابْنِ هُبَيْرَةَ عَنْ أَبِي تَمِيمٍ الْجَيْشَانِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ يَقُولُسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْ أَنَّكُمْ تَوَكَّلْتُمْ عَلَى اللَّهِ حَقَّ تَوَكُّلِهِ لَرَزَقَكُمْ كَمَا يَرْزُقُ الطَّيْرَ تَغْدُو خِمَاصًا وَتَرُوحُ بِطَانًا
हमसे कहिन है [हर्मलह बिन यह्या] हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन वहब] ने हमसे [इब्नू लहिअह] से [इब्न हुबैरा] से [अबू तमीम अल जैस्यानी] से कहिन है; हम [उमर] का कहत सुने रहेन, 'हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'अगर आप सच्चा भरोसा के साथ अल्लाह पर आपन भरोसा रखत हई, त उ निश्चित रूप से आपका रोजी रोटी देई जइसे उ पक्षियन का रोजी रोटी देत है, जे भूखे रहत हैं अऊर घर पेट भरे आवत हैं'।
Imam Ibnu Majah : 4155
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَلَّامِ بْنِ شُرَحْبِيلَ أَبِي شُرَحْبِيلَ عَنْ حَبَّةَ وَسَوَاءٍ ابْنَيْ خَالِدٍ قَالَادَخَلْنَا عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يُعَالِجُ شَيْئًا فَأَعَنَّاهُ عَلَيْهِ فَقَالَ لَا تَيْئَسَا مِنْ الرِّزْقِ مَا تَهَزَّزَتْ رُءُوسُكُمَا فَإِنَّ الْإِنْسَانَ تَلِدُهُ أُمُّهُ أَحْمَرَ لَيْسَ عَلَيْهِ قِشْرٌ ثُمَّ يَرْزُقُهُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ
हमसे कहा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [सल्लम बिन सुरहबिल अबू स्यरहबिल] से [हब्बा] अऊर [सव्वा] उनके बेटवा खालिद से कहिन हैं, दुनौ कहिन, 'हम एक बार पैगम्बर सल्लाहु अलैहि वल्लाम से मिले रहेन जब हम उनसे कुछ शिकायत करत रहेन, फिर उ कहिन: 'जब तक तुम्हार माथा चलत है, तब तक भगवान के आशीर्वाद से निराश न होइ। काहे से कि वास्तव मा एक इंसान ओकरे महतारी से लाल अवस्था मा पैदा होत रहा, बिना कुछ होय के, तब अल्लाह 'अज्जा वजल्ला ओका रोजी रोटी दिहिस'।
Imam Ibnu Majah : 4156
حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ أَنْبَأَنَا أَبُو شُعَيْبٍ صَالِحُ بْنُ زُرَيْقٍ الْعَطَّارُ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْجُمَحِيُّ عَنْ مُوسَى بْنِ عُلَيِّ بْنِ رَبَاحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ مِنْ قَلْبِ ابْنِ آدَمَ بِكُلِّ وَادٍ شُعْبَةً فَمَنْ اتَّبَعَ قَلْبُهُ الشُّعَبَ كُلَّهَا لَمْ يُبَالِ اللَّهُ بِأَيِّ وَادٍ أَهْلَكَهُ وَمَنْ تَوَكَّلَ عَلَى اللَّهِ كَفَاهُ التَّشَعُّبَ
हमसे कहिन है [इशाक बिन मंशुर] हमसे कहिन है [अबू स्यूएब सालिह बिन जुरैक अल 'अत्तर] हमसे कहिन है [सैद बिन अब्दुर्रहमान अल जुमाही] से [मूसा बिन अली बिन रबाह] से [अपने पिता] से [अमरू बिन अल 'अश] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लाहुलाह वल्लुलाम ने कहा: आदम के संतान के दिल मा धन जमा करै के प्रवृत्ति होत है, जे ई प्रवृत्ति का पालन करत है, अल्लाह ओका यहिके साथ नष्ट होइ देई, लेकिन जे अल्लाह पर आपन भरोसा रखत है, अल्लाह ओका पूरा करि।
Imam Ibnu Majah : 4157
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ طَرِيفٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَمُوتَنَّ أَحَدٌ مِنْكُمْ إِلَّا وَهُوَ يُحْسِنُ الظَّنَّ بِاللَّهِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन थारीफ] हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सुफियान] से [जाबिर] कहिन हैं, 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'तुममें से कोई भी अल्लाह के प्रति सद्भावना के शर्त के अलावा न मर जाय'।
Imam Ibnu Majah : 4158
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَيَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُؤْمِنُ الْقَوِيُّ خَيْرٌ وَأَحَبُّ إِلَى اللَّهِ مِنْ الْمُؤْمِنِ الضَّعِيفِ وَفِي كُلٍّ خَيْرٌ احْرِصْ عَلَى مَا يَنْفَعُكَ وَلَا تَعْجِزْ فَإِنْ غَلَبَكَ أَمْرٌ فَقُلْ قَدَرُ اللَّهِ وَمَا شَاءَ فَعَلَ وَإِيَّاكَ وَاللَّوْ فَإِنَّ اللَّوْ تَفْتَحُ عَمَلَ الشَّيْطَانِ
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अस शबाह] हमसे [सुफयान बिन उयैना] से [इब्न अजलान] से [अल अराज] से [अबू हुरैरा] से अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक कहिन हैं: 'एक मजबूत आस्तिक अल्लाह से बेहतर अऊर अधिक प्यार करत है, अऊर ओनमा से हर एक मा अच्छाई है। कुछ अइसन चीज के बारे मा गंभीर होइ जा जवन आपके लिए उपयोगी है अऊर आत्मा मा कमजोर न होइ। अगर कुछ आप पर हावी हो जाय तो कहो कि अल्लाह का फरमान तय हो गया है, जो उन्होंने चाहे है वह होगा। अऊर 'अगर केवल' कहै से दूर रहौ, काहे से कि वास्तव मा 'अगर केवल' अभिव्यक्ति शैतान के प्रवेश के अवसर खोलत है।
Imam Ibnu Majah : 4159
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْفَضْلِ عَنْ سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْكَلِمَةُ الْحِكْمَةُ ضَالَّةُ الْمُؤْمِنِ حَيْثُمَا وَجَدَهَا فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا
हमसे कहिन है [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल वहाब] हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन नुमीर] से [इब्राहिम बिन अल फदल्ल] से [सैद अल मकबुरी] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'बुद्धि का वचन एक खोया हुआ वस्तु है, यहै से उ कहाँ भी पावै का अधिकार है ई'।
Imam Ibnu Majah : 4160
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِنْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نِعْمَتَانِ مَغْبُونٌ فِيهِمَا كَثِيرٌ مِنْ النَّاسِ الصِّحَّةُ وَالْفَرَاغُ
हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन अब्दुल अजिम अल अंबारी] हमसे [शफवान बिन ईसा] [अब्दुल्ला बिन सैद बिन अबू हिंद] से [अपने पिता] से कहिन हैं उ कहिन; हम [इब्न अब्बास] का कहत सुने रहेन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'दुई सुख जवन अक्सर अधिकांश लोग भूल जात हैं, उहै स्वास्थ्य अऊर खाली समय है'।