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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4121

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْأَكْثَرُونَ هُمْ الْأَسْفَلُونَ إِلَّا مَنْ قَالَ هَكَذَا وَهَكَذَا وَهَكَذَا ثَلَاثًا

हमसे कहिन है [यह्या बिन हकीम] हमसे कहिन है [यह्या बिन सईद अल कत्थान] से [मुहम्मद बिन अजलान] से [उनके पिता] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जेकरे पास बहुत धन है उ उहै व्यक्ति है जे निम्नतम स्तर पर है, सिवाय ओन लोगन के, जे कहत हैं 'अइसन, यहि तरह अऊर यहि तरह'। ऊ तीन बार कहिस।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4122

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي سُهَيْلِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا أُحِبُّ أَنَّ أُحُدًا عِنْدِي ذَهَبًا فَتَأْتِي عَلَيَّ ثَالِثَةٌ وَعِنْدِي مِنْهُ شَيْءٌ إِلَّا شَيْءٌ أَرْصُدُهُ فِي قَضَاءِ دَيْنٍ

हमसे कहा गा है [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब] हमसे [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] से [अबू सुहैल बिन मलिक] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सचमुच, मैं उहुद पर्वत के रूप मा बड़ा सोना नाहीं चाहत हउँ, तब तक मैं तीसरे से कुछ आवा हउँ, ई, सिवाय कुछ अइसन चीज के जेका हम कर्ज चुकावै के ताई तैयार किहे हई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4123

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ أَبِي عُبَيْدِ اللَّهِ مُسْلِمِ بْنِ مِشْكَمٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ غَيْلَانَ الثَّقَفِيِّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ مَنْ آمَنَ بِي وَصَدَّقَنِي وَعَلِمَ أَنَّ مَا جِئْتُ بِهِ هُوَ الْحَقُّ مِنْ عِنْدِكَ فَأَقْلِلْ مَالَهُ وَوَلَدَهُ وَحَبِّبْ إِلَيْهِ لِقَاءَكَ وَعَجِّلْ لَهُ الْقَضَاءَ وَمَنْ لَمْ يُؤْمِنْ بِي وَلَمْ يُصَدِّقْنِي وَلَمْ يَعْلَمْ أَنَّ مَا جِئْتُ بِهِ هُوَ الْحَقُّ مِنْ عِنْدِكَ فَأَكْثِرْ مَالَهُ وَوَلَدَهُ وَأَطِلْ عُمُرَهُ

हमसे कहिन है [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे कहिन है [शदाका बिन खालिद] हमसे कहिन है [यजीद बिन अबू मरियम] से [अबू 'उबिदुल्लाह मुस्लिम बिन मिसिकम] से [अमरू बिन घैलान अत त्साकाफी] उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम प्रार्थना किहिन: अरे जे मुझ पर विश्वास करै अऊर मुझ पर विश्वास करै जानत है कि जो मैं लावत हौं ऊ तुम्हारे ते सच है, सो ओकर सम्पति औ ओकरे बच्चन के सम्पति कम करौ, औ ओनका प्यार दौ ताकि वे तुमसे मिलि सकैं औ तुम्हारे निर्णयन का तेज कर सकैं। औ जो मोहि बिसवास नाहीं करै, मोहि धर्मी न ठहरावै औ न जानै कि जो मैं लावत हौं, वही सत्य है जो तुम्हारे ते आवत है, तौ ओकर धन, संतान बढ़ाओ औ जीवन लम्बा करो'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4124

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا غَسَّانُ بْنُ بُرْزِينَ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْجُمَحِيُّ حَدَّثَنَا غَسَّانُ بْنُ بُرْزِينَ حَدَّثَنَا سَيَّارُ بْنُ سَلَامَةَ عَنْ الْبَرَاءِ السَّلِيطِيِّ عَنْ نُقَادَةَ الْأَسَدِيِّ قَالَبَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى رَجُلٍ يَسْتَمْنِحُهُ نَاقَةً فَرَدَّهُ ثُمَّ بَعَثَنِي إِلَى رَجُلٍ آخَرَ فَأَرْسَلَ إِلَيْهِ بِنَاقَةٍ فَلَمَّا أَبْصَرَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اللَّهُمَّ بَارِكْ فِيهَا وَفِيمَنْ بَعَثَ بِهَا قَالَ نُقَادَةُ فَقُلْتُ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِيمَنْ جَاءَ بِهَا قَالَ وَفِيمَنْ جَاءَ بِهَا ثُمَّ أَمَرَ بِهَا فَحُلِبَتْ فَدَرَّتْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ أَكْثِرْ مَالَ فُلَانٍ لِلْمَانِعِ الْأَوَّلِ وَاجْعَلْ رِزْقَ فُلَانٍ يَوْمًا بِيَوْمٍ لِلَّذِي بَعَثَ بِالنَّاقَةِ

हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे कहिस है [गस्सान बिन बुर्जिन]। -एक अउर तरीका से ई बतावा गा है- हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन मुआविया अल जुमाही] हमसे कहिन हैं [घसान बिन बुर्जिन] हमसे [सैयार बिन सलामा] [अल बर्रा अस सलीथी] से [नुकादा अल असदी] से कहिन हैं, उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैही वसल्लम ने एक मनाकात के लिए एक मनई भेजिन - लेकिन उनकर जसल्लाह, मनई ईका अस्वीकार करौ। फिर उ मोका दूसर मनई से मिले खातिर भेजिन, फिर उ मनई - दूसरा - उनके पास एक ऊँट भेजिन, जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ऊँट का देखिन, तौ उ प्रार्थना किहिन: 'हे अल्लाह, ओनका अऊर ओनके साथे भेजे गए मनई का आशीर्वाद दे'। नुकादा ने कहा, 'तब हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से कहा, 'वही तरह उनके साथ आए लोगन के साथ'। यहिके बाद, उइ ओकर दूध का तब तक व्यक्त करै का आदेश दिहिन जब तक कि उ बहुतायत मा न होइ जाय, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने प्रार्थना किहिन: 'हे अल्लाह फलाने के धन बढ़ाओ - यानी जे पहिले मना किहिस - अऊर फलाने के भाग्य का हर दिन - स्थानांतरण - ऊँट देय वाले व्यक्ति के पास कराओ'।

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Imam Ibnu Majah : 4125

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ حَمَّادٍ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ أَبِي حَصِينٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَعِسَ عَبْدُ الدِّينَارِ وَعَبْدُ الدِّرْهَمِ وَعَبْدُ الْقَطِيفَةِ وَعَبْدُ الْخَمِيصَةِ إِنْ أُعْطِيَ رَضِيَ وَإِنْ لَمْ يُعْطَ لَمْ يَفِ

हमसे कहिन है [अल हसन बिन हम्माद] हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अयासी] से [अबू हाशीन] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के रसूल अलैहि वसल्लम) कहिन: 'दीनार के दास, दिरहम के दास, रेशम के दास अऊर रेशम के दास -मखमल- वस्त्र, अगर ओका दीन जात है तौ ऊ प्रसन्न होत है अऊर अगर ओका नाहीं दीन जात है तौ ऊ अवज्ञाकारी होत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4126

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَعِسَ عَبْدُ الدِّينَارِ وَعَبْدُ الدِّرْهَمِ وَعَبْدُ الْخَمِيصَةِ تَعِسَ وَانْتَكَسَ وَإِذَا شِيكَ فَلَا انْتَقَشَ

हमसे कहिन है [याकूब बिन हुमैद] हमसे कहिन है [इशाक बिन सईद] से [शोफवान बिन सुलेम] से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हाय दिनार के दास पर, दास के दास दीर्हम अऊर दास- कपड़ा, ऊ नष्ट होइ जाई अऊर ऊ हार जाई, अगर ऊ काँटा पावत है तौ ऊ ओका बाहर नाहीं निकाल सकत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4127

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ الْغِنَى عَنْ كَثْرَةِ الْعَرَضِ وَلَكِنَّ الْغِنَى غِنَى النَّفْسِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [सुफयान बिन उयैना] से [अबू अज़ जिनाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'ई धन नाहीं है जवन बहुत सम्पत्ति रखै से आवत है, बल्कि दिल मा धन है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4128

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ لَهِيعَةَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ وَحُمَيْدِ بْنِ هَانِئٍ الْخَوْلَانِيِّ أَنَّهُمَا سَمِعَا أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيَّ يُخْبِرُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ قَدْ أَفْلَحَ مَنْ هُدِيَ إِلَى الْإِسْلَامِ وَرُزِقَ الْكَفَافَ وَقَنَعَ بِهِ

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन रुम्ह] हमसे [अब्दुल्लाह बिन लाहिअह] से ['उबैदुल्लाह बिन अबू जाफर] अऊर [हुमैद बिन हानी` अल खौलानी] से कहिन है कि दुइनौ जने [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल 'अश] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू बिन अल 'अश] से रिपोर्ट सुनिन हैं रसूलुल्लाहुलाहुल्लाह वल्लाह, 'वास्तव मा भाग्यशाली उ व्यक्ति है जेका इस्लाम के मार्गदर्शन मिला है, रोजी रोटी दीन गा है जवन ओका काफी है, अऊर उ ओका पावै मा खुश है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4129

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ اجْعَلْ رِزْقَ آلِ مُحَمَّدٍ قُوتًا

हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमेर] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [वाकी'] हमसे कहिन है [अल अमासी] से ['उमाराह बिन अल काका'] से [अबू ज़ुरअह] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहिन: 'हे अल्लाह, मुहम्मद के परिवार के रोजी-रोटी का केवल बुनियादी भोजन तक सीमित बनावा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4130

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي وَيَعْلَى عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ نُفَيْعٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ غَنِيٍّ وَلَا فَقِيرٍ إِلَّا وَدَّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَنَّهُ أُتِيَ مِنْ الدُّنْيَا قُوتًا

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला बिन नुमीर] हमसे [मेरे पिता] अऊर [या'ला] से [इस्माइल बिन अबू खालिद] से [नफई'] से [अनस] से उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के शांति अऊर बरकत) कहिन: 'जुग के दिन केहू नाहीं होई चाहे अमीर हो, या गरीब चाहत है कि पिछली दुनिया मा ओका केवल बुनियादी भोजन दीन जात'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4131

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَمُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي شُمَيْلَةَ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ مِحْصَنٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَصْبَحَ مِنْكُمْ مُعَافًى فِي جَسَدِهِ آمِنًا فِي سِرْبِهِ عِنْدَهُ قُوتُ يَوْمِهِ فَكَأَنَّمَا حِيزَتْ لَهُ الدُّنْيَا

हमका बतावा गा है कि [सुवैद बिन सैद] अऊर [मुजाहिद बिन मूसा] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [मरवान बिन मुआविया] हमसे [अब्दुर्रहमान बिन अबू स्यूमैलाह] [सलामा बिन उबैदुल्लाह बिन मिहशान अल अंसारी] से [अपने पिता] से कहिन है, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी सुबह शरीर में स्वस्थ है, तो दिन में बुनियादी भोजन है, अगर दुनिया ओकरे बरे इकट्ठा कीन गै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4132

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ انْظُرُوا إِلَى مَنْ هُوَ أَسْفَلَ مِنْكُمْ وَلَا تَنْظُرُوا إِلَى مَنْ هُوَ فَوْقَكُمْ فَإِنَّهُ أَجْدَرُ أَنْ لَا تَزْدَرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ قَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ عَلَيْكُمْ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [वाकी'] अऊर [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अबू सलीह] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'उन लोगन का देखौ जे आपसे निचला हैं, अऊर उन लोगन का न देखौ जे आपसे ऊपर हैं, त वास्तव मा आपसे बेहतर हैं, अल्लाह के आशीर्वाद का कम न समझौ'। अबू मुआविया ने संपादकीय रूप से कहा, 'अल्लाह का आशीर्वाद आप पर है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4133

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ بُرْقَانَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ الْأَصَمِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَرَفَعَهُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَنْظُرُ إِلَى صُوَرِكُمْ وَأَمْوَالِكُمْ وَلَكِنْ إِنَّمَا يَنْظُرُ إِلَى أَعْمَالِكُمْ وَقُلُوبِكُمْ

हमसे कहिन है [अहमद बिन सिनान] हमसे कहिन है [कत्सिर बिन हिशम] हमसे कहिन है [जफर बिन बुर्कान] हमसे [यजीद बिन अल अशम] [अबू हुरैराह] से कहिन है जेका पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का आशीर्वाद मिला रहा, उ कहिन: 'वास्तव मा, अल्लाह आपके रूप अऊर आपके सम्पत्ति का नाहीं देखत है, बल्कि केवल आपके देखत है, कर्म अऊर तोहरे मन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4134

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ وَأَبُو أُسَامَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْإِنْ كُنَّا آلَ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَنَمْكُثُ شَهْرًا مَا نُوقِدُ فِيهِ بِنَارٍ مَا هُوَ إِلَّا التَّمْرُ وَالْمَاءُ إِلَّا أَنَّ ابْنَ نُمَيْرٍ قَالَ نَلْبَثُ شَهْرًا

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [अब्दुल्ला बिन नुमीर] अऊर [अबू उसामा] से [हिस्याम बिन 'उर्वाह] से [अपने पिता] से ['आइशा] से कहिन हैं, 'वास्तव मा, हम एक बार एक महीना तक बिना आग जलाये जिए रहेन -खाना नाहीं बनावत रहेन-, हम सब खजूर खात रहेन' अऊर पानी खात रहेन।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4135

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْلَقَدْ كَانَ يَأْتِي عَلَى آلِ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الشَّهْرُ مَا يُرَى فِي بَيْتٍ مِنْ بُيُوتِهِ الدُّخَانُ قُلْتُ فَمَا كَانَ طَعَامُهُمْ قَالَتْ الْأَسْوَدَانِ التَّمْرُ وَالْمَاءُ غَيْرَ أَنَّهُ كَانَ لَنَا جِيرَانٌ مِنْ الْأَنْصَارِ جِيرَانُ صِدْقٍ وَكَانَتْ لَهُمْ رَبَائِبُ فَكَانُوا يَبْعَثُونَ إِلَيْهِ أَلْبَانَهَاقَالَ مُحَمَّدٌ وَكَانُوا تِسْعَةَ أَبْيَاتٍ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [यजीद बिन हारून] हमसे [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से ['ऐसिया] कहिन हैं, उ कहिन, 'वास्तव मा मुहम्मद के परिवार मा एक महीना बीत गा है, मुहम्मद के परिवारन मा धुँआ के जरा भी दृश्य नाहीं देखा गा'। मुहम्मद बिन अमरू पूछिन, 'तो वै का खात हैं?' आयशा ने जवाब दिया, 'अल असवादैन; खजूर अऊर पानी, लेकिन हमरे पास अंसार के बीच से पड़ोसी हैं - अऊर उ अच्छा पड़ोसी हैं - जेकरे पास पशुधन है, उ अक्सर ओका आपन दूध भेजत हैं'। मुहम्मद कहिन, 'उनकर परिवार - अल्लाह के रसूल - नौ घरन मा रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4136

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ يَقُولُرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَلْتَوِي فِي الْيَوْمِ مِنْ الْجُوعِ مَا يَجِدُ مِنْ الدَّقَلِ مَا يَمْلَأُ بِهِ بَطْنَهُ

हमसे कहिस है [नशर बिन अली] हमसे कहिस है [बिसिर बिन उमर] हमसे [स्यु'बाह] [सिमक] से [अन नुमान बिन बसीर] से कहिस है; हम [उमर बिन खथब] का कहत सुने रहेन, 'एक दिन हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का भूख के कारण झुकत देखेन, उनका कौनो खजूर नाहीं मिला - जवन क्षतिग्रस्त होइ चुका रहा - जेका उ अपने पेट मा डाल सकत रहे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4137

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى أَنْبَأَنَا شَيْبَانُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مِرَارًا وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ مَا أَصْبَحَ عِنْدَ آلِ مُحَمَّدٍ صَاعُ حَبٍّ وَلَا صَاعُ تَمْرٍ وَإِنَّ لَهُ يَوْمَئِذٍ تِسْعَ نِسْوَةٍ

हमसे कहा है [अहमद बिन मणि'] हमसे कहा है [अल हसन बिन मूसा] हमसे [स्याबान] से [कतादाह] से [अनस बिन मलिक] ने कहा है, 'अक्सर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'उसकी कसम जिसके हाथ में मुहम्मद है, तो एक सुबह मुहम्मद परिवार को नहीं मिला'। गेंहू के शा' अऊर खजूर के एक शा' नाहीं। भले ही वहि समय उनके पास नौ मेहरारू रहीं।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4138

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبُو الْمُغِيرَةِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْمَسْعُودِيُّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ بَذِيمَةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَصْبَحَ فِي آلِ مُحَمَّدٍ إِلَّا مُدٌّ مِنْ طَعَامٍ أَوْ مَا أَصْبَحَ فِي آلِ مُحَمَّدٍ مُدٌّ مِنْ طَعَامٍ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन याह्या] हमसे कहिन है [अबू अल मुघिराह] हमसे [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्ला अल मसूदी] से [अली बिन बडजिमा] से [अबू उबैदा] से [अब्दुल्ला] उ कहिन, 'रसल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: सुबह एक ही खाना नाहीं मिला, लेकिन ओहम्मद परिवार का खाली एक खाना मिला'। एक कीचड़'। या, 'एक बार सुबह मुहम्मद के परिवार मा खाना के एक कीचड़ के अलावा कुछौ नाहीं रहा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4139

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبْدِ الْأَكْرَمِ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْكُوفَةِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ صُرَدٍ قَالَأَتَانَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَكَثْنَا ثَلَاثَ لَيَالٍ لَا نَقْدِرُ أَوْ لَا يَقْدِرُ عَلَى طَعَامٍ

हमका बतावा गा है कि [नशर बिन अली] ने मोका [मेरे पिता] से [स्यूबाह] से [अब्दुल अकरम] से कूफा के लोगन से एक आदमी, [उनके पिता] से [सुलेमान बिन शूरद] से उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम एक बार हमरे पास आए रहे फिर हम तीन दिन तक रहे, जेहिके दौरान हमका कौनो खाना नाहीं मिला'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 4140

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَأُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بِطَعَامٍ سُخْنٍ فَأَكَلَ فَلَمَّا فَرَغَ قَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ مَا دَخَلَ بَطْنِي طَعَامٌ سُخْنٌ مُنْذُ كَذَا وَكَذَا

हमसे कहिन है [सुवैद बिन सईद] हमसे कहिन है [अली बिन मुशिर] से [अल अमासी] से [अबू शालिह] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'एक दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का खाना दीन गा रहा जवन अबहियों गर्म रहा अऊर फिर उ ओका खा लिहिन, खाना खाए के बाद उ कहिन: 'अल्लाह के स्तुति हो, जब से मोर पेट मा ई खाना गर्म नाहीं रहा अऊर तब से ई'।