Imam Ibnu Majah : 4101
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبِ بْنِ عَرَبِيٍّ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ مُجَالِدِ بْنِ سَعِيدٍ الْهَمْدَانِيِّ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ الْهَمْدَانِيِّ قَالَ حَدَّثَنَا الْمُسْتَوْرِدُ بْنُ شَدَّادٍ قَالَإِنِّي لَفِي الرَّكْبِ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ أَتَى عَلَى سَخْلَةٍ مَنْبُوذَةٍ قَالَ فَقَالَ أَتُرَوْنَ هَذِهِ هَانَتْ عَلَى أَهْلِهَا قَالَ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مِنْ هَوَانِهَا أَلْقَوْهَا أَوْ كَمَا قَالَ قَالَ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَلدُّنْيَا أَهْوَنُ عَلَى اللَّهِ مِنْ هَذِهِ عَلَى أَهْلِهَا
हमसे कहिन है [यह्या बिन हबीब बिन अरबी] हमसे [हम्मद बिन जैद] [मुजालिद बिन सईद अल हमदानी] से [कैस बिन अबू हाजिम अल हमदानी] से कहिन हैं; हमसे [अल मुस्तौरिद बिन स्याददाद] बताइन हैं, उ कहिन, 'वास्तव मा, मैं एक बार अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे चलत रहेंव, अचानक उ एक बकरी के बच्चा के पास से गुजरिन जेका फेंक दीन गा रहा'। मुस्तौरिद ने कहा, 'तब उन्होंने कहा: 'का तुमका लागत है कि ई अपने मालिक के लिए घृणित चीज है?' मुस्तौरिद कहिन, 'उनसे पूछा गा रहा, 'हे अल्लाह के रसूल, काहे से कि ई घिनौना रहा कि मालिक ओका फेंक दिहिस'। या यहि तरह कहा जात है। उ कहिन: 'उनके हाथन मा मोर आत्मा है, ई दुनिया अपने मालिक के ई - शव - से वास्तव मा घृणित है'।
Imam Ibnu Majah : 4102
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مَيْمُونٍ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا أَبُو خُلَيْدٍ عُتْبَةُ بْنُ حَمَّادٍ الدِّمَشْقِيُّ عَنْ ابْنِ ثَوْبَانَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ قُرَّةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ ضَمْرَةَ السَّلُولِيِّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَقُولُ الدُّنْيَا مَلْعُونَةٌ مَلْعُونٌ مَا فِيهَا إِلَّا ذِكْرَ اللَّهِ وَمَا وَالَاهُ أَوْ عَالِمًا أَوْ مُتَعَلِّمًا
हमसे कहिन है [अली बिन मैमून अर रक्की] हमसे [अबू खुलैद उतबाह बिन हम्माद अद दिमासिकी] से [इब्नू त्सौबान] से [अथा बिन कुर्राह] से [अब्दुल्लाह बिन दलामराह अस सलूली] से कहिन हैं, उ कहिन; हमसे [अबू हुरैराह] बताइन हैं, उ कहिन, 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'दुनिया शापित है अऊर जवन कुछ वहिमा है, उ शापित है, सिवाय अल्लाह के याद अऊर जवन ओसे संबंधित है, या कोई अइसन व्यक्ति जे 'धर्मी है अऊर आपन ज्ञान सिखावत है'।
Imam Ibnu Majah : 4103
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الدُّنْيَا سِجْنُ الْمُؤْمِنِ وَجَنَّةُ الْكَافِرِ
हमसे कहिन है [अबू मरवान मुहम्मद बिन उस्मान अल उत्समानी] हमसे कहिन है [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] से [अल अला बिन अब्दुर्रहमान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'दुनिया इमानदारन अऊर जेल के लिए जन्नत के तरह है।' काफिरन का।
Imam Ibnu Majah : 4104
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبِ بْنِ عَرَبِيٍّ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ لَيْثٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَأَخَذَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِبَعْضِ جَسَدِي فَقَالَ يَا عَبْدَ اللَّهِ كُنْ فِي الدُّنْيَا كَأَنَّكَ غَرِيبٌ أَوْ كَأَنَّكَ عَابِرُ سَبِيلٍ وَعُدَّ نَفْسَكَ مِنْ أَهْلِ الْقُبُورِ
हमसे कहिन है [यह्या बिन हबीब बिन अरबी] हमसे कहिन है [हम्मद बिन जैद] से [लैट्स] से [मुजाहिद] से [इब्न उमर] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम एक बार मोर शरीर के एक हिस्सा पकड़े रहे अऊर कहिन: 'हे अब्दुल्लाह, ई दुनिया मा अइसे रहौ मानो तुम एक अजनबी या एक संभावित भटकत हो, अऊर खुद का एक संभावित रूप से तैयार करौ कब्र के निवासी'।
Imam Ibnu Majah : 4105
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَاقِدٍ عَنْ بُسْرِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا أُخْبِرُكَ عَنْ مُلُوكِ الْجَنَّةِ قُلْتُ بَلَى قَالَ رَجُلٌ ضَعِيفٌ مُسْتَضْعِفٌ ذُو طِمْرَيْنِ لَا يُؤْبَهُ لَهُ لَوْ أَقْسَمَ عَلَى اللَّهِ لَأَبَرَّهُ
हमसे कहिन है [हिस्याम बिन अम्मर] हमसे कहिन है [सुवैद बिन अब्दुल अजीज] से [जैद बिन वाकिद] से [बुसीर बिन उबैदुल्लाह] से [अबू इदरीस अल खौलानी] से [मुआदज बिन जबल] उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: मैं स्वर्ग के राजा से कहे हौं? हम जवाब दिहेन, 'जरूर'। उ कहिन: 'अर्थात, केहू कमजोर अऊर उत्पीड़ित है, ओकरे पास खाली दुइ टुकड़ा कपड़ा हैं जवन घिसल अऊर अनजान हैं। अगर उ अल्लाह से कसम खाई, तौ उ निश्चित रूप से स्वीकार कीन जाई'।
Imam Ibnu Majah : 4106
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَعْبَدِ بْنِ خَالِدٍ قَالَ سَمِعْتُ حَارِثَةَ بْنَ وَهْبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَا أُنَبِّئُكُمْ بِأَهْلِ الْجَنَّةِ كُلُّ ضَعِيفٍ مُتَضَعِّفٍ أَلَا أُنَبِّئُكُمْ بِأَهْلِ النَّارِ كُلُّ عُتُلٍّ جَوَّاظٍ مُسْتَكْبِرٍ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] हमसे कहिन हैं [अब्दुर्रहमान बिन महदी] हमसे कहिन हैं [सुफयान] से [म'बद बिन खालिद] उ कहिन; हम [हरित्साह बिन वाहब] का कहत सुने रहेन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'का हम तोहका स्वर्ग के निवासियन का बताई? अर्थात् हर उ मनई जे कमजोर अऊर उत्पीड़ित है। अउर का मैं तोहका नरक के निवासी बताऊँ? उ एक अइसन मनई है जवन कठोर, अभद्र अऊर घमंडी काम करत है'।
Imam Ibnu Majah : 4107
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ صَدَقَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَيُّوبَ بْنِ سُلَيْمَانَ عَنْ أَبِي أُمَامَةَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ أَغْبَطَ النَّاسِ عِنْدِي مُؤْمِنٌ خَفِيفُ الْحَاذِ ذُو حَظٍّ مِنْ صَلَاةٍ غَامِضٌ فِي النَّاسِ لَا يُؤْبَهُ لَهُ كَانَ رِزْقُهُ كَفَافًا وَصَبَرَ عَلَيْهِ عَجِلَتْ مَنِيَّتُهُ وَقَلَّ تُرَاثُهُ وَقَلَّتْ بَوَاكِيهِ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन यह्या] हमसे कहिन है [अमरू बिन अबू सलामा] से [शदकाह बिन अब्दुल्ला] से [इब्राहिम बिन मुर्रा] से [अय्यूब बिन सुलेमान] से [अबू उमामा] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'वास्तव मा, सबसे ईर्ष्या करै वाला व्यक्ति एक गरीब है, जइसे कि नमाज अपने प्रभु का अच्छी तरह से पूजा करत है, लोगन से अनजान, हमेशा महसूस करत रहा कि ओका जवन सौभाग्य मिला है, ओसे ओकरे पास काफी है, हमेशा धैर्यवान रहा, ओकर मृत्यु जल्दी होइ जात रही, ओकर विरासत छोट रही अऊर बहुत लोग ओकरे मउत पर नाहीं रोवत रहे'।
Imam Ibnu Majah : 4108
حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عُبَيْدٍ الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ بْنُ سُوَيْدٍ عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أُمَامَةَ الْحَارِثِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْبَذَاذَةُ مِنْ الْإِيمَانِ قَالَ الْبَذَاذَةُ الْقَشَافَةُ يَعْنِي التَّقَشُّفَ
हमसे कहिन है [कत्सिर बिन 'उबैद अल हिमशी] हमसे [अय्यूब बिन सुवैद] [उसामा बिन जैद] से [अब्दुल्लाह बिन अबू उमामह अल हरित्सी] से [अपने पिता] से कहिन हैं, उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'अनिच्छा फैता का हिस्सा है'। अबू उमामह ने कहा, 'जर्जर का मतलब है पहनावा मा साधारण - घमंडी नाहीं-'।
Imam Ibnu Majah : 4109
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمٍ عَنْ ابْنِ خُثَيْمٍ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ يَزِيدَأَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ أَلَا أُنَبِّئُكُمْ بِخِيَارِكُمْ قَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ خِيَارُكُمْ الَّذِينَ إِذَا رُءُوا ذُكِرَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ
हमसे कहिन है [सुवैद बिन सईद] हमसे [यह्या बिन सुलैम] [इब्नू खुत्सैम] से [स्याहर बिन हौसब] से [असमा बिन यजीद] से कहिन हैं, कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने हैं: 'का हम तोहका तोहरे सबसे अच्छा बताई?' उइ जवाब दिहिन, 'बिलकुल, हे अल्लाह के रसूल'। उन्होंने कहा: 'तुम में से सबसे अच्छे वे हैं जो अगर डरते हैं तो हमेशा अल्लाह 'अज्जा वजल्ला' को याद रखेंगे।
Imam Ibnu Majah : 4110
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّ قَالَمَرَّ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلٌ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَقُولُونَ فِي هَذَا الرَّجُلِ قَالُوا رَأْيَكَ فِي هَذَا نَقُولُ هَذَا مِنْ أَشْرَفِ النَّاسِ هَذَا حَرِيٌّ إِنْ خَطَبَ أَنْ يُخَطَّبَ وَإِنْ شَفَعَ أَنْ يُشَفَّعَ وَإِنْ قَالَ أَنْ يُسْمَعَ لِقَوْلِهِ فَسَكَتَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَرَّ رَجُلٌ آخَرُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا تَقُولُونَ فِي هَذَا قَالُوا نَقُولُ وَاللَّهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا مِنْ فُقَرَاءِ الْمُسْلِمِينَ هَذَا حَرِيٌّ إِنْ خَطَبَ لَمْ يُنْكَحْ وَإِنْ شَفَعَ لَا يُشَفَّعْ وَإِنْ قَالَ لَا يُسْمَعْ لِقَوْلِهِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَهَذَا خَيْرٌ مِنْ مِلْءِ الْأَرْضِ مِثْلَ هَذَا
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अस शबाह] हमसे कहिन है [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] ने हमसे [मेरे पिता] से [सहल बिन सद अस सैदी] से कहिन है, 'एक आदमी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से गुजरा, तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: आप इस आदमी के बारे में का सोचत हैं?' उइ जवाब दिहिन, 'हमरी राय है कि ऊ कुलीन वर्ग से है, अगर ऊ प्रस्ताव रखत है तौ ऊ निश्चित रूप से स्वीकार कीन जाई, अऊर अगर ऊसे मदद माँगी जाई तौ ऊ निश्चित रूप से मदद करी, अऊर अगर ऊ बोलत है तौ ओकर बात निश्चित रूप से सुनी जाई'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप रहे। कुछ पल बाद एक आदमी उनके सामने से गुजरा, फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: 'तुम इस व्यक्ति के बारे में क्या सोचते हो?' उइ जवाब दिहिन, 'हमरे विचार से, अल्लाह के कसम, हे अल्लाह के रसूल... ई मनई मुसलमानन मा सबसे गरीब मनई है, अगर ऊ प्रपोज करत है, तौ ओकर प्रस्ताव निश्चित रूप से खारिज होइ जाई, अगर ओसे मदद माँगी जाई तौ ऊ मदद नाहीं करी, अऊर अगर ऊ बोलत है तौ ओकर बात नाहीं सुनी जाई'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में ई व्यक्ति - जे गरीब दिखत है - ई व्यक्ति से दुनिया अऊर ओकरे हर चीज से अच्छा है - अर्थात् उ व्यक्ति जे कुलीन दिखत है -'।
Imam Ibnu Majah : 4111
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ الْجُبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُبَيْدَةَ أَخْبَرَنِي الْقَاسِمُ بْنُ مِهْرَانَ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ عَبْدَهُ الْمُؤْمِنَ الْفَقِيرَ الْمُتَعَفِّفَ أَبَا الْعِيَالِ
हमसे कहिन है ['उबैदुल्लाह बिन यूसुफ अल जुबैरी] हमसे कहिन हैं [हम्मद बिन ईसा] हमसे कहिन हैं [मूसा बिन उबैदा] ने हमसे [अल कासिम बिन मिहरान] से ['इमरान बिन हुशैन] से कहिन हैं, 'रसूलुल्लाह शाल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में अल्लाह, उनकर सेवक हैं, जे उनकर सेवक हैं अऊर रक्षा कर सकत हैं, परिवार के सम्मान'।
Imam Ibnu Majah : 4112
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدْخُلُ فُقَرَاءُ الْمُؤْمِنِينَ الْجَنَّةَ قَبْلَ الْأَغْنِيَاءِ بِنِصْفِ يَوْمٍ خَمْسِ مِائَةِ عَامٍ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन बिसिर] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैराह] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कहा: 'इमानन के बीच से गरीब लोग आधा दूरी से पहिले स्वर्ग मा घुस जइहैं एक दिन जवन पाँच सौ साल के बराबर है'।
Imam Ibnu Majah : 4113
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ الْمُخْتَارِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ فُقَرَاءَ الْمُهَاجِرِينَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِمِقْدَارِ خَمْسِ مِائَةِ سَنَةٍ
हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे कहिस है [बकर बिन अब्दुर्रहमान] हमसे कहिस है [ईसा बिन अल मुह्तार] से [मुहम्मद बिन अबू लैला] से ['अथिया अल 'औफी] से [अबू सैद अल खुदरी] से रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैही वसललम, उ कहिन कि लोग विश्वास करिहैं: लोगन से पहिले स्वर्ग मा प्रवेश करा आधा दिन पाँच सौ साल के बराबर है'।
Imam Ibnu Majah : 4114
حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ أَنْبَأَنَا أَبُو غَسَّانَ بَهْلُولٌ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُبَيْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَاشْتَكَى فُقَرَاءُ الْمُهَاجِرِينَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا فَضَّلَ اللَّهُ بِهِ عَلَيْهِمْ أَغْنِيَاءَهُمْ فَقَالَ يَا مَعْشَرَ الْفُقَرَاءِ أَلَا أُبَشِّرُكُمْ أَنَّ فُقَرَاءَ الْمُؤْمِنِينَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِنِصْفِ يَوْمٍ خَمْسِ مِائَةِ عَامٍ ثُمَّ تَلَا مُوسَى هَذِهِ الْآيَةَ{ وَإِنَّ يَوْمًا عِنْدَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍ مِمَّا تَعُدُّونَ }
हमसे कहिन है [इशाक बिन मंशुर] हमसे कहिन है [अबू गसन बहलुल] हमसे कहिन है [मूसा बिन उबैदा] से [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] उ कहिन, 'मुहाजिरीन के गरीब लोग अल्लाह के रसूल से शिकायत किहिन सल्लाहु अलैहि अलैह अल्लाह के स्वर्ग के अनुग्रह के बारे मा कहिन: 'हे गरीब लोग, का हम तोहका खुशखबरी देब? सचमुच, विश्वासियन मा गरीब अऊर गरीब आधा दिन के दूरी से अमीरन से पहिले स्वर्ग मा प्रवेश करिहैं जवन पाँच सौ साल के बराबर है'। तब मूसा ने यह श्लोक पढ़ा: '-निश्चय ही आपके प्रभु के साथ एक दिन आपके हिसाब से हजार के समान है-' -प्रश्न। अल हज: 47-।
Imam Ibnu Majah : 4115
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ الْكِنْدِيُّ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ أَبُو يَحْيَى حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ أَبُو إِسْحَقَ الْمَخْزُومِيُّ عَنْ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَكَانَ جَعْفَرُ بْنُ أَبِي طَالِبٍ يُحِبُّ الْمَسَاكِينَ وَيَجْلِسُ إِلَيْهِمْ وَيُحَدِّثُهُمْ وَيُحَدِّثُونَهُ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَكْنِيهِ أَبَا الْمَسَاكِينِ
हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन सईद अल किंडी] हमसे कहिन हैं [इस्माइल बिन इब्राहिम अत तैमी अबू याह्या] हमसे [इब्राहिम अबू इशाक अल महजुमी] से [अल मकबुरी] से [अबू हुरैरा] से कहिन हैं, उ कहिन, 'जाफर बिन अबू तालिब का गरीब लोग बहुत पसंद रहे अऊर ओनके साथे अक्सर कहानियन मा भी उई कहिन ओका कहानी सुनाइन। यहिसे, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनका अबू अल मसाकिन -गरीबन के पिता-' उपनाम दिहिन।
Imam Ibnu Majah : 4116
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ سِنَانٍ عَنْ أَبِي الْمُبَارَكِ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَأَحِبُّوا الْمَسَاكِينَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ فِي دُعَائِهِ اللَّهُمَّ أَحْيِنِي مِسْكِينًا وَأَمِتْنِي مِسْكِينًا وَاحْشُرْنِي فِي زُمْرَةِ الْمَسَاكِينِ
हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अब्दुल्ला बिन सैद] दुइनौ कहिन; हमसे [अबू खालिद अल अहमर] से [यजीद बिन सिनान] से [अबू अल मुबारक] से ['अथा] से [अबू सैद अल खुदरी] से कहिन है: 'लव यू गरीब लोग। काहे से कि वास्तव मा हम एक बार पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का अपनी दुआ मा कहत सुने रहेन: 'हे अल्लाह, हे मोर रब्ब, जब हम गरीब होब त हमका जीवन दे, अऊर जब हम गरीब होब त हमका मरवा अऊर जब हम गरीब होब त हमका इकट्ठा करा''।
Imam Ibnu Majah : 4117
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ الْعَنْقَزِيُّ حَدَّثَنَا أَسْبَاطُ بْنُ نَصْرٍ عَنْ السُّدِّيِّ عَنْ أَبِي سَعْدٍ الْأَزْدِيِّ وَكَانَ قَارِئَ الْأَزْدِ عَنْ أَبِي الْكَنُودِ عَنْ خَبَّابٍفِي قَوْلِهِ تَعَالَى{ وَلَا تَطْرُدْ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ إِلَى قَوْلِهِ فَتَكُونَ مِنْ الظَّالِمِينَ }قَالَ جَاءَ الْأَقْرَعُ بْنُ حَابِسٍ التَّمِيمِيُّ وَعُيَيْنَةُ بْنُ حِصْنٍ الْفَزَارِيُّ فَوَجَدَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَعَ صُهَيْبٍ وَبِلَالٍ وَعَمَّارٍ وَخَبَّابٍ قَاعِدًا فِي نَاسٍ مِنْ الضُّعَفَاءِ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ فَلَمَّا رَأَوْهُمْ حَوْلَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَقَرُوهُمْ فَأَتَوْهُ فَخَلَوْا بِهِ وَقَالُوا إِنَّا نُرِيدُ أَنْ تَجْعَلَ لَنَا مِنْكَ مَجْلِسًا تَعْرِفُ لَنَا بِهِ الْعَرَبُ فَضْلَنَا فَإِنَّ وُفُودَ الْعَرَبِ تَأْتِيكَ فَنَسْتَحْيِي أَنْ تَرَانَا الْعَرَبُ مَعَ هَذِهِ الْأَعْبُدِ فَإِذَا نَحْنُ جِئْنَاكَ فَأَقِمْهُمْ عَنْكَ فَإِذَا نَحْنُ فَرَغْنَا فَاقْعُدْ مَعَهُمْ إِنْ شِئْتَ قَالَ نَعَمْ قَالُوا فَاكْتُبْ لَنَا عَلَيْكَ كِتَابًا قَالَ فَدَعَا بِصَحِيفَةٍ وَدَعَا عَلِيًّا لِيَكْتُبَ وَنَحْنُ قُعُودٌ فِي نَاحِيَةٍ فَنَزَلَ جِبْرَائِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام فَقَالَ{ وَلَا تَطْرُدْ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِمْ مِنْ شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِمْ مِنْ شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنْ الظَّالِمِينَ }ثُمَّ ذَكَرَ الْأَقْرَعَ بْنَ حَابِسٍ وَعُيَيْنَةَ بْنَ حِصْنٍ فَقَالَ{ وَكَذَلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُمْ بِبَعْضٍ لِيَقُولُوا أَهَؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِمْ مِنْ بَيْنِنَا أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ }ثُمَّ قَالَ{ وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَى نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ }قَالَ فَدَنَوْنَا مِنْهُ حَتَّى وَضَعْنَا رُكَبَنَا عَلَى رُكْبَتِهِ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَجْلِسُ مَعَنَا فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَقُومَ قَامَ وَتَرَكَنَا فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ وَاصْبِرْ نَفْسَكَ مَعَ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ وَلَا تَعْدُ عَيْنَاكَ عَنْهُمْ }وَلَا تُجَالِسْ الْأَشْرَافَ{ تُرِيدُ زِينَةَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَلَا تُطِعْ مَنْ أَغْفَلْنَا قَلْبَهُ عَنْ ذِكْرِنَا }يَعْنِي عُيَيْنَةَ وَالْأَقْرَعَ{ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ وَكَانَ أَمْرُهُ فُرُطًا }قَالَ هَلَاكًا قَالَ أَمْرُ عُيَيْنَةَ وَالْأَقْرَعِ ثُمَّ ضَرَبَ لَهُمْ مَثَلَ الرَّجُلَيْنِ وَمَثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَاقَالَ خَبَّابٌ فَكُنَّا نَقْعُدُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا بَلَغْنَا السَّاعَةَ الَّتِي يَقُومُ فِيهَا قُمْنَا وَتَرَكْنَاهُ حَتَّى يَقُومَ
हमसे कहिन है [अहमद बिन मुहम्मद बिन याह्या बिन सईद अल कत्थान] हमसे कहिन हैं [अमरू बिन मुहम्मद अल 'अंकाज़ी] हमसे [असबत बिन नशर] से [अस सुद्दी] से [अबू सद अल अजदी] आजाद के लोगन के क़िरात विशेषज्ञन में से एक, [अबूद कब्बा से] अल्लाह के बारे में। ताआला: '-अऊर ओनका मत भगावा जे सुबह अऊर शाम के दिन अपने प्रभु का पुकारत हैं-' जब तक कि ओनके वचन न होइ, '-ताकि तुम गलती करै वालेन मा से एक होइ जाओ-' -प्रश्न। अल अनाम: 52-। खब्बाब कहिन, 'अल अकरा' बिन हबीस अतमीमी अऊर 'उयैना बिन हिश्न अल फजारी आए अऊर दुइनौ जने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कमजोर विश्वासियन मा से शुहैब, बिलाल, अम्मर अऊर खब्बाब के साथे एक मजलिस मा बैठे पाए। जब दुइनौ जने देखिन कि हम पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के आसपास हैं, तौ उइ उनके पास आए अऊर उनकर निंदा करत कहिन, 'वास्तव मा, हम चाहित है कि आप हमरे लिए एक विशेष मजलिस बनावा, ताकि अरबन का पता चलै कि हमरे पास का श्रेष्ठता है, काहे से कि एक अरब प्रतिनिधिमंडल आपके पास आ जाई, अऊर उ शर्मिंदा होइहैं अगर अरबन का पता चलै कि उनके पास मजलिस नौकर हैं। इसलिये जब हम आपके पास आएंगे तो हमसे दूर भगाओ, जब हम खतम कर लेंगे तब आप अपने मन मुताबिक उनसे बैठक कर लेंगे'। उ जवाब दिहिन: 'हाँ'। उइ कहिन, 'अपने ऊपर हमरे खिलाफ एक वाचा लिखा'। कथावाचक ने कहा, 'फिर ऊ एक कागज माँगिस औ अली से कहिस कि लिखौ, इधर हम मस्जिद के कोने मा बइठ गयेन। त जिबरील अलैहि सलाम आए अऊर अल्लाह के वचन पहुँचावत कहिन: '-अऊर ओनका निष्कासित न करौ जे सुबह अऊर शाम का अपने भगवान का पुकारत हैं, जब तक कि उ ओनके प्रसन्नता के इच्छा रखत हैं, आप ओनके कामन के जरा भी जिम्मेदारी नाहीं उठावत हैं अऊर उ आपन कर्मन के जरा भी जिम्मेदारी नाहीं उठावत हैं, जेकरे कारण आप -उनका निष्कासित करै का अधिकार रखत हैं - तौ आप लोगन मा से होइहैं। गलत काम करै वाले-' -प्रश्न अल अनाम; 52-. तब जिबरील ने अल अकरा बिन हबीस अऊर उयैना बिन हिश्न का जिक्र करत हुए कहा: '-अऊर इ तरह हमने ओनमा से कुछ - अमीर लोगन का - ओनमा से कुछ - गरीबन - के साथ परीक्षण किहिन है, ताकि - अमीर लोग - कहें: 'का ई हमरे बीच के लोग हैं जेका अल्लाह अनुग्रह दिहिन हैं?' -अल्लाह कहत हैं-: 'का अल्लाह ओन लोगन के बारे मा बेहतर नाहीं जानत हैं जे ओनके प्रति आभारी हैं?' क्यूएस अल अनम; 63. तब उ इ भी कहेस; 'जब हमरी आयतों को मानने वाले तुम्हारे पास आए तब कहो: 'सलामुन अलैकुम'। आपके प्रभु ने अपने आप पर करुणा का नियंत्रित किया है, ...- ' -प्रश्न. अल अनाम; 54-. खबाब ने कहा, 'यहिके बाद हम उनके पास गयेन कि हमरे घुटने अऊर उनके घुटने एक दूसरे से छुए, अऊर उ समय रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमरे साथ सभा मा बैठे रहे, जब उ खड़ा होइके हमसे दूर जाय वाले रहे, तब अल्लाह ने प्रकट किहिन: '-अऊर ओनके साथ धीरज रखौ जे सुबह गोधूलि बेला मा अपने भगवान का पुकारत हैं अऊर ओकरे राजी के उम्मीद करत हैं; अऊर आपन आँखिन ओनसे न हटै...- ' -प्रश्न. अल कहफ: 28-। अर्थात् अमीर लोगन के साथ पार्टी न करौ - ओनके बीच -। '-काहे से- ई दुनिया के गहना के उम्मीद करा; अऊर ओनके पीछे न चलौ जेकरे दिल मा हम हमका याद करै मा कोताही बरतेन...- ' -प्रश्न. अल कहफ: 28-, अर्थात् 'उयैना अऊर अल अकरा' '-...साथ ही साथ अपनी इच्छाओं का पालन करब अऊर उहै स्थिति है जवन सीमा पार करत है- ' -प्रश्न। अल कहफ: 28-। खबाब कहिन, 'वही तबाही है'। खबाब ने फिर कहा, 'ई अल अकरा' और 'उयैना बात तो बहुत बुरी है। फिर अल्लाह ने ओन दुइनौ लोगन का अऊर दुनिया अऊर परलोक के जीवन का एक मिसाल बनावा'। खब्बाब ने कहा, 'तो हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक बैठक में बैठे, जब उनके खड़े होने का समय आया, तो हम खड़े हो गए और उन्हें छोड़ दिया, इससे पहले कि उ खड़े हो जाय'।
Imam Ibnu Majah : 4118
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَكِيمٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا قَيْسُ بْنُ الرَّبِيعِ عَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ شُرَيْحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سَعْدٍ قَالَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ فِينَا سِتَّةٍ فِيَّ وَفِي ابْنِ مَسْعُودٍ وَصُهَيْبٍ وَعَمَّارٍ وَالْمِقْدَادِ وَبِلَالٍ قَالَ قَالَتْ قُرَيْشٌ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّا لَا نَرْضَى أَنْ نَكُونَ أَتْبَاعًا لَهُمْ فَاطْرُدْهُمْ عَنْكَ قَالَ فَدَخَلَ قَلْبَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ ذَلِكَ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَدْخُلَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ{ وَلَا تَطْرُدْ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ }الْآيَةَ
हमसे कहिन है [यह्या बिन हकीम] हमसे कहिन है [अबू दाउद] हमसे कहिन है [कैस बिन अर रबी'] से [अल मिकदाम बिन सूरैह] से [अपने पिता] से [सअद] उ कहिन, 'ई आयत हमरे छह के बारे मा प्रकट कीन गा रहा, अर्थात् खुद, इब्न मसूद, शुहैब, अमरीब, अमरीलाल अऊर बिलाल'। सद ने कहा, 'कुरैश ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा, 'वास्तव में हम उनके अनुयायी बनना पसंद नहीं करत हैं, इसलिए उन्हें अपने से दूर भगाओ! ' सद ने कहा, 'यह पता चला है कि कुरैश के वचन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दिल में घुसे जैसा कि अल्लाह ने प्रवेश करना चाहा, अल्लाह अल्लाह अज्जा वजल्ला ने तब यह आयत प्रकट की: '-अऊर उन लोगन का बाहर न निकालौ जे सुबह अऊर शाम अपने भगवान का पुकारत हैं, जब तक कि उ ओकरे खुसी के तलाश करत हैं। अल अनाम; 52-.
Imam Ibnu Majah : 4119
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ الْمُخْتَارِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ وَيْلٌ لِلْمُكْثِرِينَ إِلَّا مَنْ قَالَ بِالْمَالِ هَكَذَا وَهَكَذَا وَهَكَذَا وَهَكَذَا أَرْبَعٌ عَنْ يَمِينِهِ وَعَنْ شِمَالِهِ وَمِنْ قُدَّامِهِ وَمِنْ وَرَائِهِ
हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अबू कुरैब] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [बकर बिन अब्दुर्रहमान] हमसे कहिन है [ईसा बिन अल मुख्तार] से [मुहम्मद बिन अबू लैला] से ['अथिया अल 'औफी] से [अबू सैद अल खुदरी] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम से, कि उ कहिन: 'हाय उ व्यक्ति के जेकरे पास बहुत धन है, सिवाय अपने धन के साथ, जे कहत है, 'अइसन, यहि तरह, यहि तरह अऊर यहि तरह'। उ ई चार बार किहिन, दाहिने, बायें, आगे अऊर पीछे।'
Imam Ibnu Majah : 4120
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنِي أَبُو زُمَيْلٍ هُوَ سِمَاكٌ عَنْ مَالِكِ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْأَكْثَرُونَ هُمْ الْأَسْفَلُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِلَّا مَنْ قَالَ بِالْمَالِ هَكَذَا وَهَكَذَا وَكَسَبَهُ مِنْ طَيِّبٍ
हमसे कहिन है [अल अब्बास बिन अब्दुल अजिम अल अनबारी] हमसे कहिन है [अन नदलर बिन मुहम्मद] हमसे कहिन है [इकरिमाह बिन अम्मर] ने हमसे [अबू जुमैल] बताये हैं -यानी। सिमक- से [मलिक बिन मर्तसाद] से [अपने पिता] से [अबू ज़ार] से उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जेकरे पास बहुत धन है उ क़यामत के दिन सबसे निचला पद मा आवै वाला है, सिवाय उ व्यक्ति के जे आपन धन से कहत है, 'ऐसन अऊर अइसने, अऊर उ आपन धन अच्छा से प्राप्त करै'।