इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
Free Download / Download

Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 21

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُنْذِرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْفُضَيْلِ حَدَّثَنَا الْمَقْبُرِيُّ عَنْ جَدِّهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ لَا أَعْرِفَنَّ مَا يُحَدَّثُ أَحَدُكُمْ عَنِّي الْحَدِيثَ وَهُوَ مُتَّكِئٌ عَلَى أَرِيكَتِهِ فَيَقُولُ اقْرَأْ قُرْآنًا مَا قِيلَ مِنْ قَوْلٍ حَسَنٍ فَأَنَا قُلْتُهُ

हमसे कहिन [अली इब्नुल मुंडजीर] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन फुदलैल] कहिन, हमसे [अल मकबुरी] से [अपने दादा] से [अबू हुरैराह] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन: 'सच मा हम तोहसे कहब, वहाँ कोई है जे तोहसे हमार विश्वास नाहीं चाहत है। अपनी सीट पर पीछे झुक के उ कहिन; 'कुरान पढ़ो, जो कुछ भी कहा जात है - कुरान में - अच्छा शब्द है, तो मैं कहूंगा'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 22

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ آدَمَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ شُعْبَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ح و حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَقَالَ لِرَجُلٍ يَا ابْنَ أَخِي إِذَا حَدَّثْتُكَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَلَا تَضْرِبْ لَهُ الْأَمْثَالَقَالَ أَبُو الْحَسَنِ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْكَرَابِيسِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْجَعْدِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ مِثْلَ حَدِيثِ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ رَضِيَ اللَّهُ تَعَالَى عَنْهُ

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन अब्बाद बिन आदम] कहिन, हमसे [मेरे पिता] से [स्यूबाह] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैराह] से कहिन है। एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे कहिन [हन्नाद बिन अस सारी] कहिन, हमसे कहिन [अब्दह बिन सुलेमान] कहिन, हमसे [मुहम्मद बिन अमरू] [अबू सलामा] से कहिन कि [अबू हुरैरा] एक बार केहू से कहिन; 'हे मोर भतीजा, अगर मैं तोहका रसूल से हदीस पढ़त हउँ, तौ ओकरे अलावा अउर दृष्टान्त मत बनावा'। अबुल हसन कहिन; हमका बतावा है याह्या बिन अब्दुल्लाह अल कराबिसी ने कहा, हमसे अली रादलियाहु ताआला 'अन्हू' के हदीस के अनुसार अमरू बिन मुर्राह से स्यूबाह से अली बिन अल जा'द बतावा है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 23

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ الْبَطِينُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ قَالَمَا أَخْطَأَنِي ابْنُ مَسْعُودٍ عَشِيَّةَ خَمِيسٍ إِلَّا أَتَيْتُهُ فِيهِ قَالَ فَمَا سَمِعْتُهُ يَقُولُ بِشَيْءٍ قَطُّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا كَانَ ذَاتَ عَشِيَّةٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَكَسَ قَالَ فَنَظَرْتُ إِلَيْهِ فَهُوَ قَائِمٌ مُحَلَّلَةً أَزْرَارُ قَمِيصِهِ قَدْ اغْرَوْرَقَتْ عَيْنَاهُ وَانْتَفَخَتْ أَوْدَاجُهُ قَالَ أَوْ دُونَ ذَلِكَ أَوْ فَوْقَ ذَلِكَ أَوْ قَرِيبًا مِنْ ذَلِكَ أَوْ شَبِيهًا بِذَلِكَ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [मुआज़ बिन मुआज़] से [इब्न औन] कहिन, हमका [मुस्लिम अल बथिन] से [इब्राहिम अत तैमी] से [अपने पिता] से [अमरू बिन मैमून] कहिन; उ कहिन; [इब्नू मसूद] गुरुवार रात का मोका दोष नाहीं दिहिन, लेकिन मैं उनके पास गय रहौं। -अमरू बिन मैमुन कहिन; - रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हदीस से उनका कुछ कहते नहीं सुना। तब एक रात ऊ कहिस; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन, सो माथा झुकाये। -अमरू बिन मैमुन कहिन; - हम फिर ओका देखेन, ऊ अपने बागे के बटन दबावत खड़ा रहा, ओकर आँसू बहत रहे अऊर ओकर गर्दन मा नस उठत अऊर गिरत रही। उ कहिन: 'या वहिके अलावा, या वहिके ऊपर, या वहिके पास, या वहिके समान'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 24

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ مُعَاذٍ عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ قَالَكَانَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ إِذَا حَدَّثَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَفَرَغَ مِنْهُ قَالَ أَوْ كَمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] ने कहा, हमसे [मुआज़ बिन मुआज़] से [इब्न औन] से [मुहम्मद बिन सिरिन] ने कहा है; जब [अनस बिन मलिक] अल्लाह के रसूल के एक हदीस पढ़ के खतम किहिन, तौ उ कहिन; 'या जइसे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 25

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَقُلْنَا لِزَيْدِ بْنِ أَرْقَمَ حَدِّثْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ كَبِرْنَا وَنَسِينَا وَالْحَدِيثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَدِيدٌ

हमसे कहिस है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमका [घुंदर] [स्यूबाह] से बताइस है। अऊर दूसर मार्ग से; हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन बसिस्यार] हमसे कहिस है [अब्दुर्रहमान बिन महदी] कहिस, हमसे कहिस है [स्युअबाह] से [अमरू बिन मुर्रा] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] उ कहिस; हम [जैद बिन अरकाम] से कहिन; 'हमका रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस बतावा,' उ कहिन; 'हम बूढ़े और भूलने वाले हो गए हैं, जबकि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हदीस बहुत कठोर -भारी- है।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 26

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي السَّفَرِ قَالَ سَمِعْتُ الشَّعْبِيَّ يَقُولُجَالَسْتُ ابْنَ عُمَرَ سَنَةً فَمَا سَمِعْتُهُ يُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا

हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमीर] कहिन, हमसे [अबू अन नदर] [स्यूबाह] से [अब्दुल्लाह बिन अबू अस सफर] से कहिन हैं; 'मैंने [अश श'बी] का कहते सुना; 'मैं [इब्नू उमर] के साथे एक साल तक पढ़ाई किहिन, लेकिन हम उनका रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से एकौ हदीस पढ़त नाहीं सुने रहेन'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 27

حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ ابْنِ طَاوُسٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقُولُإِنَّمَا كُنَّا نَحْفَظُ الْحَدِيثَ وَالْحَدِيثُ يُحْفَظُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَّا إِذَا رَكِبْتُمْ الصَّعْبَ وَالذَّلُولَ فَهَيْهَاتَ

हमसे कहिन [अल अब्बास बिन अब्दुल अजिम अल 'अनबारी] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुरजाक] कहिन, हमसे [ममर] [इब्न थावस] से [अपने पिता] से कहिन; उ कहिन; हम [इब्न अब्बास] का कहत सुने रहेन; 'पहिले हम हदीस रटत रहेन, जबकि हदीस सीधे पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से रटत रहेन। तौ अगर तुम परेशानी करौ अऊर लिप्त हो जाओ, तौ ई कबहूँ संभव नाहीं होई।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 28

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ قَرَظَةَ بْنِ كَعْبٍ قَالَبَعَثَنَا عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ إِلَى الْكُوفَةِ وَشَيَّعَنَا فَمَشَى مَعَنَا إِلَى مَوْضِعٍ يُقَالُ لَهُ صِرَارٌ فَقَالَ أَتَدْرُونَ لِمَ مَشَيْتُ مَعَكُمْ قَالَ قُلْنَا لِحَقِّ صُحْبَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلِحَقِّ الْأَنْصَارِ قَالَ لَكِنِّي مَشَيْتُ مَعَكُمْ لِحَدِيثٍ أَرَدْتُ أَنْ أُحَدِّثَكُمْ بِهِ وَأَرَدْتُ أَنْ تَحْفَظُوهُ لِمَمْشَايَ مَعَكُمْ إِنَّكُمْ تَقْدَمُونَ عَلَى قَوْمٍ لِلْقُرْآنِ فِي صُدُورِهِمْ هَزِيزٌ كَهَزِيزِ الْمِرْجَلِ فَإِذَا رَأَوْكُمْ مَدُّوا إِلَيْكُمْ أَعْنَاقَهُمْ وَقَالُوا أَصْحَابُ مُحَمَّدٍ فَأَقِلُّوا الرِّوَايَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا شَرِيكُكُمْ

हमसे कहिन [अहमद बिन अब्दाह] कहिन, हमसे [हम्मद बिन जैद] से [मुजालिद] से [अश शबी] से [कारजह बिन काब] कहिन; उमर बिन खठाब भेजिन अऊर हमका कूफा लइ गइन। ऊ हमरे साथ चलत रहा जब तक कि हम शिरार नाम के जगह पर नाहीं पहुँचेन। तब उ कहिन; 'का तुम जानत हौ कि हम तोहरे साथे काहे चलत हई?' करजह बिन काअब ने कहा; हमने जवाब दिया, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ करै के अधिकार अऊर अंसार के दोस्तन के अधिकार के कारण'। [उमर कहिन]; 'मैं आपके साथ चलत हउँ काहे से कि एक हदीस है जेका मैं आप तक पहुँचावै चाहत हउँ, अऊर मैं चाहत हउँ कि आप ओका याद करौ काहे से कि मैं आपके साथ यात्रा करत हउँ, उ कहिन; 'सचमुच तुम एक लोगन के पास आए हौ काहे से कि कुरान ओनके स्तन मा उबलत बर्तन के तरह उबलत है। अगर उइ तोहका देखिहैं तौ उइ तोहरे ऊपर आपन गर्दन झुकिहैं अऊर कहिहैं; 'हे मुहम्मद के मित्र रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कुछ हदीस सुनाओ और मैं तुम्हारा साथी हूँ'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 29

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ قَالَصَحِبْتُ سَعْدَ بْنَ مَالِكٍ مِنْ الْمَدِينَةِ إِلَى مَكَّةَ فَمَا سَمِعْتُهُ يُحَدِّثُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِحَدِيثٍ وَاحِدٍ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुर्रहमान] कहिन, हमसे कहिन [हम्मद बिन जैद] से [यह्या बिन सैद] से [अस साहिब बिन यजीद] उ कहिन; 'मैं [स'द बिन मलिक] के साथ मदीना से मक्का तक गय रहौं, अऊर मैं उनका रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एकौ हदीस पढ़त नाहीं सुनेव'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 30

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَسُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالُوا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [सुवैद बिन सैद] अऊर [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन जुराह] अऊर [इस्माइल बिन मूसा] से कहा गा है कि उइ कहिन; हमसे [शारिक] [सिमक] से [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्ला बिन मसूद] से [अपने पिता] से संबंधित है उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो जानबूझकर मेरे नाम से झूठ बोले, वह नरक में अपनी आसन तैयार कर ले'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 31

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَامِرِ بْنِ زُرَارَةَ وَإِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى قَالَا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ عَلِيٍّ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَكْذِبُوا عَلَيَّ فَإِنَّ الْكَذِبَ عَلَيَّ يُولِجُ النَّارَ

हमका बतावा गा है कि [अब्दुल्ला बिन अमीर बिन जुराह] अऊर [इस्माइल बिन मूसा] दुइनौ कहिन; हमसे [शरीक] से [मंसूर] से [रिब'ई बिन हिरासी] से [अली] से संबंधित है उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'मेरे नाम से झूठ न बोलौ, काहे से कि मोर नाम से झूठ बोलै से तोहका नरक मा डाला जाई'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 32

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ الْمِصْرِيُّ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ حَسِبْتُهُ قَالَ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन रुम्ह अल मिश्री] कहिन, हमसे [अल लैट्स बिन सद] [इब्नू शिहाब] से [अनस बिन मलिक] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे मोर नाम से झूठ बोलत है, - हमका लागत है कि उ कहिन: - जानबूझ के, नरक मा आपन आसन तैयार करै दे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 33

حَدَّثَنَا أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन है [अबू खैत्सामाह जुहैर बिन हरब] कहिन, हमका [हुसैम] से [अबू अज जुबैर] से [जाबिर] कहिन हैं; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो जानबूझकर मेरे नाम से झूठ बोले, वह नरक में अपनी आसन तैयार कर ले'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 34

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَقَوَّلَ عَلَيَّ مَا لَمْ أَقُلْ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] ने कहा, हमसे [मुहम्मद बिन बिसिर] से [मुहम्मद बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] ने कहा है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी मेरी तरफ से कुछ ऐसा बोले जो मैंने नहीं कहा है, वह नरक में अपनी आसन तैयार कर ले'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 35

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَعْلَى التَّيْمِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مَعْبَدِ بْنِ كَعْبٍ عَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ عَلَى هَذَا الْمِنْبَرِ إِيَّاكُمْ وَكَثْرَةَ الْحَدِيثِ عَنِّي فَمَنْ قَالَ عَلَيَّ فَلْيَقُلْ حَقًّا أَوْ صِدْقًا وَمَنْ تَقَوَّلَ عَلَيَّ مَا لَمْ أَقُلْ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] बताइस है, हमसे [यह्या बिन या'ला अत तैमी] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [म'बाद बिन का'ब] से [अबू कतदाह] कहिस है; हम इ मंच से रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'मोसे ज्यादा हदीस न पढ़ौ, एहसे जे मोर नाम से बोलत है, ऊ सच्चाई या ईमानदारी से बोलै। जे मोर नाम से कुछ अइसन कहे जवन हम नाहीं कहे हई, उ नरक मा आपन आसन तैयार करै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 36

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ جَامِعِ بْنِ شَدَّادٍ أَبِي صَخْرَةَ عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قُلْتُ لِلزُّبَيْرِ بْنِ الْعَوَّامِمَا لِيَ لَا أَسْمَعُكَ تُحَدِّثُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا أَسْمَعُ ابْنَ مَسْعُودٍ وَفُلَانًا وَفُلَانًا قَالَ أَمَا إِنِّي لَمْ أُفَارِقْهُ مُنْذُ أَسْلَمْتُ وَلَكِنِّي سَمِعْتُ مِنْهُ كَلِمَةً يَقُولُ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [मुहम्मद बिन बसिसियार] दुइनौ कहिन; हमका बताइस है [घुंदर मुहम्मद बिन जाफर] कहिन, हमसे [स्यूबाह] से [जामी' बिन स्याददाद अबू शखरा] से [अमीर बिन अब्दुल्ला बिन जुबैर] से [अपने पिता] कहिन हैं; उ कहिन; हम [जुबैर बिन अव्वाम] से कहेन; 'हम तुमका रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से हदीस बतावत काहे नाहीं सुनेन, जइसे कि हम एक बार इब्न मसूद, फुलान अऊर फुलान से सुनेन?' उ जवाब दिहिस; 'वास्तव मा, जब से हम इस्लाम अपनाये हई, तब से हम अल्लाह के रसूल से अलग नाहीं भए हई, लेकिन हम एक वाक्य सुनेन हई जे उ कहिन: 'जे जानबूझ के हमार नाम से झूठ बोलत है, उ नरक मा आपन आसन तैयार करै दे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 37

حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ عَطِيَّةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ

हमसे कहिन [सुवैद बिन सैद] कहिन, हमसे [अली बिन मुशीर] से [मुथरीफ] से ['अथिया] से [अबू सैद] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो जानबूझकर मेरे नाम से झूठ बोले, वह नरक में अपनी आसन तैयार कर ले'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 38

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ هَاشِمٍ عَنْ ابْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] ने कहा, हमसे [अली बिन हिशम] से [इब्न अबू लैला] से [अल हकाम] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [अली रदलियाहू अनहू] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा है, उन्होंने कहा: 'वह मुझसे कुछ देर तक कहता है, हदीस झूठ है, फिर झूठो में से एक है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 39

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِ

हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबाह] कहिन, हमसे कहिन हैं [वाकी]। एक अउर पंक्ति के अनुसार; हमसे [मुहम्मद बिन बसिसियार] कहिन है, उ कहिन; हमका बताइस है [मुहम्मद बिन जाफर] दुइनौ कहिन; हमका [स्यू'बाह] से [अल हकाम] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [समूरा बिन जुंदब] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'जो भी मुझसे हदीस सुनावत है, जब उ देखत है कि हदीस झूठ है, तौ उ झूठियन मा से एक है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 40

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَلِيٍّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ رَوَى عَنِّي حَدِيثًا وَهُوَ يَرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبَيْنِحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنْبَأَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُوسَى الْأَشْيَبُ عَنْ شُعْبَةَ مِثْلَ حَدِيثِ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ

हमसे कहिन है [उथमान बिन अबू स्याबा] ने कहा, हमसे कहा है [मुहम्मद बिन फुदलैल] से [अल अमासी] से [अल हाकम] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [अली] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'जो भी मुझसे एक हदीस का हदीस करत है, तब तक उ हदीस है, झूठे मा से एक'। हमका बताइस है [मुहम्मद बिन अब्दुल्ला] कहिन, हमका [अल हसन बिन मूसा अल अस्याब] [समूराह बिन जुंदब] के हदीस के अनुसार [स्यूबाह] से रिपोर्ट किहिन है।