Imam Ibnu Majah : 201
حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ حَمَّادٍ الْمِصْرِيُّ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ سِنَانٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ أَيُّمَا دَاعٍ دَعَا إِلَى ضَلَالَةٍ فَاتُّبِعَ فَإِنَّ لَهُ مِثْلَ أَوْزَارِ مَنْ اتَّبَعَهُ وَلَا يَنْقُصُ مِنْ أَوْزَارِهِمْ شَيْئًا وَأَيُّمَا دَاعٍ دَعَا إِلَى هُدًى فَاتُّبِعَ فَإِنَّ لَهُ مِثْلَ أُجُورِ مَنْ اتَّبَعَهُ وَلَا يَنْقُصُ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا
हमसे कहा गा है [ईसा बिन हम्माद अल मिश्री] ने कहा, हमसे [अल लैट्स बिन सद] से [यजीद बिन अबू हबीब] से [सद बिन सिनान] से [अनस बिन मलिक] से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम से कहा गया है: 'जो भी गलती के लिए बुलाता है, तो उसके पीछे अन्य लोग आएंगे, जो पाप का अनुसरण करेंगे ओनके पापन से कटौती किहे बिना ओका। और जे मार्गदर्शन के लिए पुकार करे तब ओकरे पुकार के पालन दूसर लोग भी करत हैं, तब ओका पालन करै वालेन का इनाम मिलैगा, बिना उनके इनाम का जरा भी कम किहे'।
Imam Ibnu Majah : 202
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ دَعَا إِلَى هُدًى كَانَ لَهُ مِنْ الْأَجْرِ مِثْلُ أُجُورِ مَنْ اتَّبَعَهُ لَا يَنْقُصُ ذَلِكَ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا وَمَنْ دَعَا إِلَى ضَلَالَةٍ فَعَلَيْهِ مِنْ الْإِثْمِ مِثْلُ آثَامِ مَنْ اتَّبَعَهُ لَا يَنْقُصُ ذَلِكَ مِنْ آثَامِهِمْ شَيْئًا
हमसे कहा गा है [अबू मरवान मुहम्मद बिन उथमान अल उत्समानी] ने कहा, हमसे [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] से [अल 'अला` बिन अब्दुर्रहमान] से [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] से कहा गया है रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई भी अपने मार्गदर्शन में उन लोगन के इनाम पाएगा, जे ओनके इनाम का जरा भी कम किहे बिना ओकर पालन करा। जे ओनका भटकय का निमंत्रण देत है, ओनके लिए पाप ओनके पाप का जरा भी कम किहे बिना बाद के पापन के तरह होई'।
Imam Ibnu Majah : 203
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ سَنَّ سُنَّةً حَسَنَةً فَعُمِلَ بِهَا بَعْدَهُ كَانَ لَهُ أَجْرُهُ وَمِثْلُ أُجُورِهِمْ مِنْ غَيْرِ أَنْ يَنْقُصَ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا وَمَنْ سَنَّ سُنَّةً سَيِّئَةً فَعُمِلَ بِهَا بَعْدَهُ كَانَ عَلَيْهِ وِزْرُهُ وَمِثْلُ أَوْزَارِهِمْ مِنْ غَيْرِ أَنْ يَنْقُصَ مِنْ أَوْزَارِهِمْ شَيْئًا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन याह्या] कहिन, हमसे कहिन [अबू नुआइम] कहिन, हमसे [इस्माइल] [अल हकाम] से [अबू जुहैफा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई अच्छा सुन्नत बनायेगा और फिर अपने बाद के लोग द्वारा करेगा, तब उन्हें उनके इनाम के समान इनाम मिलेगा, बिना इनके इनाम को जरा भी कम किए। अऊर जे बुरा सुन्नत करत है, फिर ओका ओकरे बाद केहू द्वारा अंजाम दिया जात है, तब उ ओनके पापन का जरा भी कम किहे बिना ओकरे पालन करै वालेन के पाप के समान उठावत है'।
Imam Ibnu Majah : 204
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ لَيْثٍ عَنْ بَشِيرِ بْنِ نَهِيكٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْ دَاعٍ يَدْعُو إِلَى شَيْءٍ إِلَّا وُقِفَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ لَازِمًا لِدَعْوَتِهِ مَا دَعَا إِلَيْهِ وَإِنْ دَعَا رَجُلٌ رَجُلًا
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [अबू मुआविया] से [अल लैट्स] से [बसीर बिन नाहिक] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कियामत के दिन कौनो भी बुलावे वाला न होई जे कुछ के लिए पुकारे लेकिन ओकरे पुकार के हिसाब से ओका सामना करै का परी, भले ही उ एक आदमी होय जे एक आदमी का बुलावा दे'।
Imam Ibnu Majah : 205
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ الْمُزَنِيُّ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ جَدِّيأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحْيَا سُنَّةً مِنْ سُنَّتِي فَعَمِلَ بِهَا النَّاسُ كَانَ لَهُ مِثْلُ أَجْرِ مَنْ عَمِلَ بِهَا لَا يَنْقُصُ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا وَمَنْ ابْتَدَعَ بِدْعَةً فَعُمِلَ بِهَا كَانَ عَلَيْهِ أَوْزَارُ مَنْ عَمِلَ بِهَا لَا يَنْقُصُ مِنْ أَوْزَارِ مَنْ عَمِلَ بِهَا شَيْئًا
हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे बतावा गा है [जैद बिन अल हुबाब] कहिन, हमसे बतावा गा है [कत्सिर बिन अमरू बिन औफ अल मुजानी] कहिन, हमका [मेरे पिता] से [मेरे दादा] से बतावा गा है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैह वल्लाह एक जीवन लावै के लिए कहिन: मेरे सुन्नतों से सुन्नत, तब लोग करत हैं, तब उसे मिलेगा जैसा कि उन लोगन का इनाम मिलत है जे बिना इनाम का जरा भी कम किहे। औ जे पाखंड करत है, औ फिर पाखंड कउनौ अउर द्वारा कीन जात है, तब ऊका वही पाप भोगै का परी, जे पाप किहिस है'।
Imam Ibnu Majah : 206
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي أُوَيْسٍ حَدَّثَنِي كَثِيرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ أَحْيَا سُنَّةً مِنْ سُنَّتِي قَدْ أُمِيتَتْ بَعْدِي فَإِنَّ لَهُ مِنْ الْأَجْرِ مِثْلَ أَجْرِ مَنْ عَمِلَ بِهَا مِنْ النَّاسِ لَا يَنْقُصُ مِنْ أُجُورِ النَّاسِ شَيْئًا وَمَنْ ابْتَدَعَ بِدْعَةً لَا يَرْضَاهَا اللَّهُ وَرَسُولُهُ فَإِنَّ عَلَيْهِ مِثْلَ إِثْمِ مَنْ عَمِلَ بِهَا مِنْ النَّاسِ لَا يَنْقُصُ مِنْ آثَامِ النَّاسِ شَيْئًا
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन याह्या] कहिन, हमसे कहिन [इस्माइल बिन अबू उवैस] कहिन, हमका बताइन [कतीसर बिन अब्दुल्ला] से [अपने पिता] से [अपने दादा] उ कहिन; हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'जे मोर सुन्नत का पुनर्जीवित करी जवन मोर मरे के बाद छोड़ दीन गै रही, ओका ओनके इनाम के तरह इनाम मिली, जे ओनके इनाम का जरा भी कम किहे। अऊर जे कोई भी पाखंड करत है जेका अल्लाह अऊर ओकरे रसूल पसंद नाहीं करत हैं, उ ओनके पाप का जरा भी कम किहे बिना ओनके पाप भुगतत है'।
Imam Ibnu Majah : 207
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ وَسُفْيَانُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ شُعْبَةُ خَيْرُكُمْ وَقَالَ سُفْيَانُ أَفْضَلُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [यह्या बिन सईद अल कथथान] कहिन, हमसे कहिन [स्युबाह] अऊर [सुफयान] से [अलकामह बिन मर्तसाद] से [सद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] से [उस्मान] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: -स्यूबाह कहते हैं; 'तुम मा से सबसे अच्छा- सुफयान कहिन; 'आपके बीच सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति वह है जो कुरान का अध्ययन करत है और फिर ओका पढ़ावत है'।
Imam Ibnu Majah : 208
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْضَلُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ
हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे [सुफयान] से [अलकमह बिन मर्तसाद] [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] से [उथमान बिन अफ्फान] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम में से श्रेष्ठ वे हैं जो कुरान का अध्ययन करते हैं और उसे पढ़ाते हैं'।
Imam Ibnu Majah : 209
حَدَّثَنَا أَزْهَرُ بْنُ مَرْوَانَ حَدَّثَنَا الْحَارِثُ بْنُ نَبْهَانَ حَدَّثَنَا عَاصِمُ بْنُ بَهْدَلَةَ عَنْ مُصْعَبِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خِيَارُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ قَالَ وَأَخَذَ بِيَدِي فَأَقْعَدَنِي مَقْعَدِي هَذَا أُقْرِئُ
हमसे कहिन [अजहर बिन मरवान] कहिन, हमसे कहिन [अल हरिथ बिन नाभान] कहिन, हमसे [अशिम बिन बहदालाह] [मुशाब बिन सद] से [अपने पिता] से कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम में से श्रेष्ठ वे हैं जो कुरान का अध्ययन करते हैं और उसे पढ़ाते हैं'। उ कहिन; 'फिर उ हमार हाथ पकड़िन अऊर हमका अपनी सीट पर बइठाइन। ई मोर लिए एक श्रद्धांजलि है'।
Imam Ibnu Majah : 210
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ أَبِي مُوسَى الْأَشْعَرِيِّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَثَلُ الْمُؤْمِنِ الَّذِي يَقْرَأُ الْقُرْآنَ كَمَثَلِ الْأُتْرُجَّةِ طَعْمُهَا طَيِّبٌ وَرِيحُهَا طَيِّبٌ وَمَثَلُ الْمُؤْمِنِ الَّذِي لَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ كَمَثَلِ التَّمْرَةِ طَعْمُهَا طَيِّبٌ وَلَا رِيحَ لَهَا وَمَثَلُ الْمُنَافِقِ الَّذِي يَقْرَأُ الْقُرْآنَ كَمَثَلِ الرَّيْحَانَةِ رِيحُهَا طَيِّبٌ وَطَعْمُهَا مُرٌّ وَمَثَلُ الْمُنَافِقِ الَّذِي لَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ كَمَثَلِ الْحَنْظَلَةِ طَعْمُهَا مُرٌّ وَلَا رِيحَ لَهَا
हमका बतावा गा है कि [मुहम्मद बिन बसिस्यार] अऊर [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] दुइनौ कहिन; हमसे [यह्या बिन सईद] से [स्यु'बाह] से [कतदाह] से [अनस बिन मलिक] से [अबू मूसा अल अस्यारी] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहिन है: 'कुरान पढ़ै वाले आस्तिक के दृष्टान्त उत्रुजा के फल के तरह है, ई अच्छा स्वाद लेत है अऊर सुगंधित है। कुरान न पढ़ै वाले आस्तिकन कै दृष्टान्त खजूर के समान है, इनका स्वाद अच्छा है लेकिन गंध नहीं होत है। और कुरान पढ़ने वाले पाखंडी का दृष्टान्त रैहाना फल के समान है, महक अच्छी और कड़वा स्वाद है। उधर, कुरान न पढ़ने वाले पाखंडी का दृष्टान्त हंझलाह के फल के समान है, इसका स्वाद कड़वा है और गंध नहीं है'।
Imam Ibnu Majah : 211
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ أَبُو بِشْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بُدَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِلَّهِ أَهْلِينَ مِنْ النَّاسِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ مَنْ هُمْ قَالَ هُمْ أَهْلُ الْقُرْآنِ أَهْلُ اللَّهِ وَخَاصَّتُهُ
हमसे कहिन [बकर बिन खलफ अबू बिसर] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुर्रहमान बिन महदी] कहिन, हमसे [अब्दुर्रहमान बिन बुदैल] [अपने पिता] से [अनस बिन मलिक] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, अल्लाह के पास मनुष्यन में से कईयो विशेषज्ञ - संरक्षक हैं'। मित्रन ने पूछा; 'हे अल्लाह के रसूल, ई कौन हैं?' उ जवाब दिहिन: 'ई कुरान के लोग हैं, ई अल्लाह के विशेषज्ञ अऊर खास लोग हैं'।
Imam Ibnu Majah : 212
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ كَثِيرِ بْنِ دِينَارٍ الْحِمْصِيُّ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَرْبٍ عَنْ أَبِي عُمَرَ عَنْ كَثِيرِ بْنِ زَاذَانَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَرَأَ الْقُرْآنَ وَحَفِظَهُ أَدْخَلَهُ اللَّهُ الْجَنَّةَ وَشَفَّعَهُ فِي عَشَرَةٍ مِنْ أَهْلِ بَيْتِهِ كُلُّهُمْ قَدْ اسْتَوْجَبُوا النَّارَ
हमसे कहिन है [अमरू बिन उथमान बिन सईद बिन कतसीर बिन दिनार अल हिमशी] कहिन, हमसे [मुहम्मद बिन हरब] से [अबू उमर] से [कतसिर बिन ज़डज़ान] से [अशिम बिन दलामराह] से [अली बिन अबी तालिब] कहिन हैं; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो भी कुरान पढ़ेगा अऊर ओका रट लेई, अल्लाह ओका स्वर्ग मा रख देई अऊर ओकरे परिवार के दस लोगन के लिए शौफिया करी जेका नरक मा जाय का चाही'।
Imam Ibnu Majah : 213
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأَوْدِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ عَطَاءٍ مَوْلَى أَبِي أَحْمَدَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَعَلَّمُوا الْقُرْآنَ وَاقْرَءُوهُ وَارْقُدُوا فَإِنَّ مَثَلَ الْقُرْآنِ وَمَنْ تَعَلَّمَهُ فَقَامَ بِهِ كَمَثَلِ جِرَابٍ مَحْشُوٍّ مِسْكًا يَفُوحُ رِيحُهُ كُلَّ مَكَانٍ وَمَثَلُ مَنْ تَعَلَّمَهُ فَرَقَدَ وَهُوَ فِي جَوْفِهِ كَمَثَلِ جِرَابٍ أُوكِيَ عَلَى مِسْكٍ
हमसे कहिन है [अमरू बिन अब्दुल्लाह अल औदी] कहिन, हमसे [अबू उसामा] [अब्दुल हामिद बिन जाफर] से [अल मकबुरी] से ['अथो`] अबू अहमद के पूर्व दास, [अबू हुरैरा] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कुरान का अध्ययन अऊर पढ़ा, अऊर ओसे अलग न होइ। सचमुच कुरान का दृष्टान्त अऊर जे मनई ओकर अध्ययन करत है अऊर फिर ओकर अभ्यास करत है, कस्तूरी के तेल से किनारे तक भरे थैली के तरह है, अऊर ओकर सुगंध हर जगह से सुंघी जा सकत है। उधर एक मनई के दृष्टान्त जे ईका सीखत है अऊर फिर ओका छुपाय के रखत है, ऊ कस्तूरी से भरे थैली के समान है।'
Imam Ibnu Majah : 214
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عَامِرِ بْنِ وَاثِلَةَ أَبِي الطُّفَيْلِأَنَّ نَافِعَ بْنَ عَبْدِ الْحَارِثِ لَقِيَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ بِعُسْفَانَ وَكَانَ عُمَرُ اسْتَعْمَلَهُ عَلَى مَكَّةَ فَقَالَ عُمَرُ مَنْ اسْتَخْلَفْتَ عَلَى أَهْلِ الْوَادِي قَالَ اسْتَخْلَفْتُ عَلَيْهِمْ ابْنَ أَبْزَى قَالَ وَمَنْ ابْنُ أَبْزَى قَالَ رَجُلٌ مِنْ مَوَالِينَا قَالَ عُمَرُ فَاسْتَخْلَفْتَ عَلَيْهِمْ مَوْلًى قَالَ إِنَّهُ قَارِئٌ لِكِتَابِ اللَّهِ تَعَالَى عَالِمٌ بِالْفَرَائِضِ قَاضٍ قَالَ عُمَرُ أَمَا إِنَّ نَبِيَّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ يَرْفَعُ بِهَذَا الْكِتَابِ أَقْوَامًا وَيَضَعُ بِهِ آخَرِينَ
हमसे कहिन [अबू मरवान मुहम्मद बिन उथमान अल उत्समानी] कहिन, हमसे [इब्राहिम बिन सद] [इब्नू शिहाब] से [अमीर बिन वत्सिलाह अबू थुफैल] से कहिन कि नफी बिन अब्दुल हरिथ उस्फान क्षेत्र मा उमर बिन खत्थाब से मिले रहे। अऊर उमर ओका मक्का के राज्यपाल नियुक्त किहिन। उमर कहिन; 'बाहरी इलाका मा जनता का नेतृत्व करै खातिर केका नियुक्त करत हौ?' नफी' ने जवाब दिया; 'मैंने उनके लिए इब्न अब्जा का नियुक्त किया है'। उमर ने पूछा; 'इब्न अब्ज़ा कौन है?' नफी' ने जवाब दिया; 'वह हमरे पूर्व गुलाम में से एक है'। उमर कहिन; 'तुम उनके लिए एक गुलाम पाला?' नफी' ने जवाब दिया; 'वह अइसन है जे अल्लाह के किताब याद रखत है, फराइद के विज्ञान समझत है अऊर क़दली है'। [उमर] कहिन; 'वास्तव में, आपके पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'वास्तव में, ई किताब से अल्लाह एक लोगन का ऊंचा उठाई अऊर दूसर का विनम्र करिहैं'।
Imam Ibnu Majah : 215
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ غَالِبٍ الْعَبَّادَانِيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زِيَادٍ الْبَحْرَانِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا ذَرٍّ لَأَنْ تَغْدُوَ فَتَعَلَّمَ آيَةً مِنْ كِتَابِ اللَّهِ خَيْرٌ لَكَ مِنْ أَنْ تُصَلِّيَ مِائَةَ رَكْعَةٍ وَلَأَنْ تَغْدُوَ فَتَعَلَّمَ بَابًا مِنْ الْعِلْمِ عُمِلَ بِهِ أَوْ لَمْ يُعْمَلْ خَيْرٌ لَكَ مِنْ أَنْ تُصَلِّيَ أَلْفَ رَكْعَةٍ
हमसे कहिन [अब्बास बिन अब्दुल्ला अल वसिथी] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन गालिब अल 'अब्बादानी] से [अब्दुल्ला बिन जियाद अल बहरानी] से [अली बिन जैद] से [सैद इब्नुल मुसैयब] से [अबू ज़ार] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझसे कहा: 'हे अबू ज़ार, तुम सुबह-सुबह अल्लाह के किताब से एक आयत का अध्ययन करब तोहरे लिए सौ रकात नमाज पढ़ै से अच्छा है। और अगर आप सुबह जल्दी ज्ञान का एक अध्याय पढ़ो और फिर अभ्यास करो या अभ्यास न करो तो आपके लिए हजार रकात नमाज पढ़ने से अच्छा है।'
Imam Ibnu Majah : 216
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ أَبُو بِشْرٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يُرِدْ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ
हमसे कहिन है [बकर बिन खलफ अबू बिसिर] ने कहा, हमसे [अब्दुल अ'ला] से [ममर] से [जुहरी] से [सैद इब्नुल मुसैयब] से [अबू हुरैरा] ने कहा है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह जेका अच्छाई पावै के इच्छा है, अल्लाह ओका धर्म के बारे मा समझ देई'।
Imam Ibnu Majah : 217
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ جَنَاحٍ عَنْ يُونُسَ بْنِ مَيْسَرَةَ بْنِ حَلْبَسٍ أَنَّهُ حَدَّثَهُ قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ يُحَدِّثُعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ الْخَيْرُ عَادَةٌ وَالشَّرُّ لَجَاجَةٌ وَمَنْ يُرِدْ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मार] कहिन, हमसे कहिन [अल वालिद बिन मुस्लिम] कहिन, हमसे [मरवान बिन जानह] [यूनुस बिन मैसरह बिन हलबास] से कहिन कि उ ओनसे कहिन, उ कहिन; हम [मुआविया बिन अबू सुफियान] का रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतावत सुने रहेन, कि उ कहिन: 'अच्छाई एक आदत है - एक आस्तिक के लिए - अऊर बुराई दुश्मनी है। अऊर जेका अल्लाह केहू के लिए अच्छाई चाहत है, अल्लाह ओका धर्म समझि देई'।
Imam Ibnu Majah : 218
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ جَنَاحٍ أَبُو سَعْدٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقِيهٌ وَاحِدٌ أَشَدُّ عَلَى الشَّيْطَانِ مِنْ أَلْفِ عَابِدٍ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मार] कहिन, हमसे कहिन [अल वलिद बिन मुस्लिम] कहिन, हमसे [रौह बिन जनह अबू सद] [मुजाहिद] से [इब्न अब्बास] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक फकीह शैतान पर हजार नमाजों से कठिन है'।
Imam Ibnu Majah : 219
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دَاوُدَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ جَمِيلٍ عَنْ كَثِيرِ بْنِ قَيْسٍ قَالَكُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ أَبِي الدَّرْدَاءِ فِي مَسْجِدِ دِمَشْقَ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا أَبَا الدَّرْدَاءِ أَتَيْتُكَ مِنْ الْمَدِينَةِ مَدِينَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِحَدِيثٍ بَلَغَنِي أَنَّكَ تُحَدِّثُ بِهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَمَا جَاءَ بِكَ تِجَارَةٌ قَالَ لَا قَالَ وَلَا جَاءَ بِكَ غَيْرُهُ قَالَ لَا قَالَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ وَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ لَتَضَعُ أَجْنِحَتَهَا رِضًا لِطَالِبِ الْعِلْمِ وَإِنَّ طَالِبَ الْعِلْمِ يَسْتَغْفِرُ لَهُ مَنْ فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ حَتَّى الْحِيتَانِ فِي الْمَاءِ وَإِنَّ فَضْلَ الْعَالِمِ عَلَى الْعَابِدِ كَفَضْلِ الْقَمَرِ عَلَى سَائِرِ الْكَوَاكِبِ إِنَّ الْعُلَمَاءَ هُمْ وَرَثَةُ الْأَنْبِيَاءِ إِنَّ الْأَنْبِيَاءَ لَمْ يُوَرِّثُوا دِينَارًا وَلَا دِرْهَمًا إِنَّمَا وَرَّثُوا الْعِلْمَ فَمَنْ أَخَذَهُ أَخَذَ بِحَظٍّ وَافِرٍ
हमसे कहिन [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहिन, हमसे [अब्दुल्ला बिन दाउद] से [अशिम बिन राजा` बिन हैवाह] से [दाउद बिन जमील] से [कटसिर बिन कैस] कहिन हैं; 'जब मैं दमिश्क मस्जिद मा [अबू दरदा] के बगल मा बैठा रहा, त अचानक केहू आवा अऊर कहिस; 'हे अबू दरदा, मैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नगरी मदीना से आपके पास एक हदीस के कारण आया है जो मेरे पास पहुँचा है, जो आपने पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायित किया है ! ' तब अबू दरदा ने पूछा; 'का तुम काम के लिए आए रहेव?' कथिर बिन कैस ने जवाब दिया; 'नहीं,' अबू दरदा ने फिर पूछा, 'का ई एहसे अहै कि अउरौ मामला अहैं?' कथिर बिन कैस ने जवाब दिया; 'नहीं,' कथिर बिन कैस कहिन; 'सचमुच, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'जो कोई भी ज्ञान पाने के रास्ते पर चलता है, अल्लाह उसके लिए स्वर्ग का रास्ता आसान बना देगा। स्वर्गदूत आपन पंख फैलाइहैं काहे से कि उ ज्ञान के साधक से प्रसन्न हैं। अऊर एक ज्ञान के साधक से आकाश अऊर पृथ्वी के निवासी, यहां तक कि पानी मा मछरी से भी माफी मांगिहैं। सचमुच, पूजा मा विशेषज्ञ से एक पुण्यवान व्यक्ति के श्रेष्ठता सब तारा पर पूर्णिमा के तरह है। सचमुच विद्वान पैगम्बरन के वारिस हैं, अऊर पैगम्बरन का दीनार या दिरहम नाहीं मिला, बल्कि ओनका ज्ञान मिला। जे लेइहै, तब ऊ बहुत बड़ा हिस्सा लिहे है'।
Imam Ibnu Majah : 220
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ شِنْظِيرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَلَبُ الْعِلْمِ فَرِيضَةٌ عَلَى كُلِّ مُسْلِمٍ وَوَاضِعُ الْعِلْمِ عِنْدَ غَيْرِ أَهْلِهِ كَمُقَلِّدِ الْخَنَازِيرِ الْجَوْهَرَ وَاللُّؤْلُؤَ وَالذَّهَبَ
हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मार] कहिन, हमसे कहिन [हफ्श बिन सुलेमान] कहिन, हमसे [कत्सिर बिन सिंझिर] [मुहम्मद बिन सिरिन] से [अनास बिन मलिक] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ज्ञान खोजना हर मुसलमान के लिए एक दायित्व है। अऊर जवन मनई ज्ञान का विशेषज्ञन के हाथ मा नाहीं रखत है, ऊ वइसने है जइसे सुअर के गले मा मोती, हीरा अऊर सोना रखत है'।