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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
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Imam Ibnu Majah (الامام ابن ماجه) - 4332 Hadith

Hadith

Imam Ibnu Majah : 181

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ خَيْثَمَةَ عَنْ عَدِيِّ ابْنِ حَاتِمٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلَّا سَيُكَلِّمُهُ رَبُّهُ لَيْسَ بَيْنَهُ وَبَيْنَهُ تَرْجُمَانٌ فَيَنْظُرُ مِنْ عَنْ أَيْمَنَ مِنْهُ فَلَا يَرَى إِلَّا شَيْئًا قَدَّمَهُ ثُمَّ يَنْظُرُ مِنْ عَنْ أَيْسَرَ مِنْهُ فَلَا يَرَى إِلَّا شَيْئًا قَدَّمَهُ ثُمَّ يَنْظُرُ أَمَامَهُ فَتَسْتَقْبِلُهُ النَّارُ فَمَنْ اسْتَطَاعَ مِنْكُمْ أَنْ يَتَّقِيَ النَّارَ وَلَوْ بِشِقِّ تَمْرَةٍ فَلْيَفْعَلْ

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [वाकी'] [अल अमासी] से [खैत्सामाह] से [आदि बिन हातिम] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुममें कोई नहीं है सिवाय अपने रब्ब से बात करे के और दुइनौ के बीच दुभाषिया नाहीं है। फिर उ अपने दाहिने ओर देखिन, यहिसे उ वहिजा कुछौ नाहीं देखिन जब तक कि उ ओनके सामने प्रस्तुत नाइ कीन गा रहा। फिर ऊ अपने बाईं ओर मुड़ गवा, यहिसे ऊ वहिजा कुछौ नाहीं देखिस जब तक कि ऊ ओका प्रस्तुत नाहीं कीन गा रहा। तब ऊ अपने सामने देखिस, तौ पता चला कि नरक के आगि ओकरे सामने है। तौ आप मा से जे एक तारीख से भी नरक के अग्नि से बचै में सक्षम है, उ अइसन करै'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 182

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الصَّمَدِ عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا أَبُو عِمْرَانَ الْجَوْنِيُّ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قَيْسٍ الْأَشْعَرِيِّ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَنَّتَانِ مِنْ فِضَّةٍ آنِيَتُهُمَا وَمَا فِيهِمَا وَجَنَّتَانِ مِنْ ذَهَبٍ آنِيَتُهُمَا وَمَا فِيهِمَا وَمَا بَيْنَ الْقَوْمِ وَبَيْنَ أَنْ يَنْظُرُوا إِلَى رَبِّهِمْ تَبَارَكَ وَتَعَالَى إِلَّا رِدَاءُ الْكِبْرِيَاءِ عَلَى وَجْهِهِ فِي جَنَّةِ عَدْنٍ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन बसिस्यार] कहिन, हमसे कहिन [अबू अब्दुश शमाद अब्दुल अजीज बिन अब्दुश शमाद] कहिन, हमसे [अबू इमरान अल जौनी] से [अबू बकर बिन अब्दुल्ला बिन कैस अल अस्यारी] से [अपने पिता] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'दो स्वर्ग हैं जिनके जार और उनमें जो है वह चाँदी के बने हैं। अऊर दुइ स्वर्ग हैं जहाँ जार अऊर ओनमा जवन है सोना से बनी है। जब उ आपन रब्ब तबराका वा ताआला देखत हैं तौ ओनका कुछौ बाधा नाहीं डालत है, सिवाय महान शाल के जवन स्वर्ग 'अदन' मा उनके चेहरा पर है।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 183

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْقُدُّوسِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ صُهَيْبٍ قَالَتَلَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذِهِ الْآيَةَ{ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَى وَزِيَادَةٌ }وَقَالَ إِذَا دَخَلَ أَهْلُ الْجَنَّةِ الْجَنَّةَ وَأَهْلُ النَّارِ النَّارَ نَادَى مُنَادٍ يَا أَهْلَ الْجَنَّةِ إِنَّ لَكُمْ عِنْدَ اللَّهِ مَوْعِدًا يُرِيدُ أَنْ يُنْجِزَكُمُوهُ فَيَقُولُونَ وَمَا هُوَ أَلَمْ يُثَقِّلْ اللَّهُ مَوَازِينَنَا وَيُبَيِّضْ وُجُوهَنَا وَيُدْخِلْنَا الْجَنَّةَ وَيُنْجِنَا مِنْ النَّارِ قَالَ فَيَكْشِفُ الْحِجَابَ فَيَنْظُرُونَ إِلَيْهِ فَوَاللَّهِ مَا أَعَطَاهُمْ اللَّهُ شَيْئًا أَحَبَّ إِلَيْهِمْ مِنْ النَّظَرِ يَعْنِي إِلَيْهِ وَلَا أَقَرَّ لِأَعْيُنِهِمْ

हमसे कहिन [अब्दुल कुदुस बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [हज्जाज] कहिन, हमसे [हम्मद] [थाबित अल बुनानी] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [शुहैब] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ई आयत पढ़ी: 'जो लोग अच्छा करत हैं, उनके लिए सबसे अच्छा इनाम है - स्वर्ग - अऊर एक अतिरिक्त,' उ कहिन: 'जब स्वर्ग के निवासी स्वर्ग मा घुस जात हैं अऊर नरक के निवासी नरक मा घुस जात हैं, तौ एक पुकारै वाला पुकारत है: 'हे स्वर्ग के निवासी, अल्लाह आपके लिए वचन देई। तोहरे बरे पूरा करा,' उइ पूछिन; 'वह का है? का अल्लाह हमरे तराजू का तौल नाहीं किहिन, हमरे चेहरा का सफेद नाहीं किहिन, हमका स्वर्ग मा भर्ती नाहीं किहिन अऊर हमका नरक के आग से नाहीं बचाइन? उ कहिन: 'फिर हिजाब उतार दीन गा रहा, ताकि उ लोग ओका देख सकै। अल्लाह के कसम, अल्लाह ने ओनका कुछौ अइसन नाहीं दिहिस है जवन ओनका देखै से ज्यादा ओनके लिए प्रसन्न अऊर आँखिन का प्रसन्न होय'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 184

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ تَمِيمِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْالْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي وَسِعَ سَمْعُهُ الْأَصْوَاتَ لَقَدْ جَاءَتْ الْمُجَادِلَةُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا فِي نَاحِيَةِ الْبَيْتِ تَشْكُو زَوْجَهَا وَمَا أَسْمَعُ مَا تَقُولُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ قَدْ سَمِعَ اللَّهُ قَوْلَ الَّتِي تُجَادِلُكَ فِي زَوْجِهَا }

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [अबू मुआविया] कहिन, हमसे कहिन [अल अमासी] से [तमीम बिन सलामा] से [उर्वाह बिन जुबैर] से [ऐसिया] उ कहिन; 'अल्लाह का स्तन्य है जेकर सुनवाई सब आवाजन का घेर लेत है। एक औरत आई अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खिलाफ मुकदमा दायर किहिन जब हम घर के बगल मा रहेन, उ अपने पति के बारे मा शिकायत किहिन। हम नाहीं सुनेन कि उ का कहिन, लेकिन अल्लाह प्रकट किहिन; 'वास्तव मा, अल्लाह ने उ शब्दन का सुना है जवन आपके पति के बारे मा आपके खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ावत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 185

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَى نَفْسِهِ بِيَدِهِ قَبْلَ أَنْ يَخْلُقَ الْخَلْقَ رَحْمَتِي سَبَقَتْ غَضَبِي

हमका बताइस है [मुहम्मद बिन यह्या] कहिन, हमसे [शफवान बिन ईसा] [इब्न अजलान] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अपने हाथ से, आपके रब्ब ने प्राणी बनावै से पहिले अपने लिए फरमान लिखे हैं; मोर दया मोर क्रोध से पहिले होइ गै है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 186

حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُنْذِرِ الْحِزَامِيُّ وَيَحْيَى بْنُ حَبِيبِ بْنِ عَرَبِيٍّ قَالَا حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ كَثِيرٍ الْأَنْصَارِيُّ الْحَرَامِيُّ قَالَ سَمِعْتُ طَلْحَةَ بْنَ خِرَاشٍ قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُلَمَّا قُتِلَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرِو بْنِ حَرَامٍ يَوْمَ أُحُدٍ لَقِيَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا جَابِرُ أَلَا أُخْبِرُكَ مَا قَالَ اللَّهُ لِأَبِيكَ وَقَالَ يَحْيَى فِي حَدِيثِهِ فَقَالَ يَا جَابِرُ مَا لِي أَرَاكَ مُنْكَسِرًا قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ اسْتُشْهِدَ أَبِي وَتَرَكَ عِيَالًا وَدَيْنًا قَالَ أَفَلَا أُبَشِّرُكَ بِمَا لَقِيَ اللَّهُ بِهِ أَبَاكَ قَالَ بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ مَا كَلَّمَ اللَّهُ أَحَدًا قَطُّ إِلَّا مِنْ وَرَاءِ حِجَابٍ وَكَلَّمَ أَبَاكَ كِفَاحًا فَقَالَ يَا عَبْدِي تَمَنَّ عَلَيَّ أُعْطِكَ قَالَ يَا رَبِّ تُحْيِينِي فَأُقْتَلُ فِيكَ ثَانِيَةً فَقَالَ الرَّبُّ سُبْحَانَهُ إِنَّهُ سَبَقَ مِنِّي أَنَّهُمْ إِلَيْهَا لَا يَرْجِعُونَ قَالَ يَا رَبِّ فَأَبْلِغْ مَنْ وَرَائِي قَالَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ وَلَا تَحْسَبَنَّ الَّذِينَ قُتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ أَمْوَاتًا بَلْ أَحْيَاءٌ عِنْدَ رَبِّهِمْ يُرْزَقُونَ }

हमसे कहिन है [इब्राहिम बिन अल मुंडज़िर अल हिजामी] अऊर [यह्या बिन हबीब बिन अरबी] दुइनौ [मूसा बिन इब्राहिम बिन कत्सिर अल अंशारी अल हरमिया] से कहिन; हम [थल्हाह बिन खिरासी] का कहत सुने रहेन; हम [जाबिर बिन अब्दुल्ला] का कहत सुने रहेन; जब अब्दुल्ला बिन अमरू बिन हराम उहुद के लड़ाई मा मर गए, त रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम मुझसे मिले अऊर कहिन: 'हे जाबीर, का तुम चाहत हौ कि हम तुमका बताई कि अल्लाह तुमरे पिता से का कहिन?' याह्या अपने हदीस मा कहत हैं; उन्होंने कहा : 'हे जाबीर, मैं तोहका उदास काहे देखौं।' हम -जाबिर- जवाब दिहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, मोर पिताजी आपन शहादत से मिले, जबकि उ आपन पीछे बच्चा अऊर कर्ज छोड़िन'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का आप चाहत हई कि हम आपका उ खुशखबरी देई जवन अल्लाह आपके पिता का दिहिस रहा?' उ जवाब दिहिस; 'मैं करब, अल्लाह के रसूल'। उ कहिन: 'अल्लाह हिजाब के पीछे के अलावा कभौ केहू से बात नाहीं किहिन, जब उ आपके पिता से आमने-सामने बात किहिन, तब उ कहिन: 'हे मोर सेवक, हमसे पूछौ, हम तोहका जरूर देब,' उ जवाब दिहिन; 'हे प्रभु, मोका फिर से जिन्दा करा ताकि मैं दूसरी बार अपने रास्ते मा मारा जाऊँ'। अल्लाह कहत हैं: 'वास्तव मा ई बात मुझसे गुजर गै है कि उ लोग फिर से वहिके पास नाहीं लौटिहैं,' उ कहिन; 'ओ रब्ब, फिर मोर पीछे वाले का बतावा।' उन्होंने कहा: 'तब अल्लाह तआला ने प्रकट किया: 'यह मत सोचो कि जो लोग अल्लाह के रास्ते में गिरते हैं, वे मर गए हैं; दरअसल, उइ रोजी-रोटी पावै से अपने रब्ब के साथ रहत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 187

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ يَضْحَكُ إِلَى رَجُلَيْنِ يَقْتُلُ أَحَدُهُمَا الْآخَرَ كِلَاهُمَا دَخَلَ الْجَنَّةَ يُقَاتِلُ هَذَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيُسْتَشْهَدُ ثُمَّ يَتُوبُ اللَّهُ عَلَى قَاتِلِهِ فَيُسْلِمُ فَيُقَاتِلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَيُسْتَشْهَدُ

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [वाकी'] से [सुफयान] से [अबू अज जिनाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा अल्लाह दुइ मनई पर हँसत है, जेहिमा से एक दूसर का मार देत है, जबकि दुइनौ जन्नत मा प्रवेश करत हैं। एक लड़ा अल्लाह के रास्ते में और गिरा तब अल्लाह ने कातिल को माफ कर दिया यहिके बाद उ इस्लाम धर्म अपनाइन, फिर अल्लाह के राह मा लड़िन अऊर मर गए भी'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 188

حَدَّثَنَا حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى وَيُونُسُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ كَانَ يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقْبِضُ اللَّهُ الْأَرْضَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَطْوِي السَّمَاءَ بِيَمِينِهِ ثُمَّ يَقُولُ أَنَا الْمَلِكُ أَيْنَ مُلُوكُ الْأَرْضِ

हमका बतावा गा है कि [हर्मलह बिन यह्या] अऊर [यूनुस बिन अब्दुल अ'ला] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन वहाब] कहिन, हमका [यूनुस] से [इब्न शिहाब] से [सैद बिन अल मुसैयब] से कहिन है कि [अबू हुरैराह] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह क़ामत के दिन धरती को पकड़ लेगा और अपने दाहिने हाथ से आसमान को मोड़ लेगा, फिर कहेगा: 'मैं राजा हूँ, धरती के राजा कहाँ हैं? ''

Hadith

Imam Ibnu Majah : 189

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ أَبِي ثَوْرٍ الْهَمْدَانِيُّ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمِيرَةَ عَنْ الْأَحْنَفِ بْنِ قَيْسٍ عَنْ الْعَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ قَالَ كُنْتُ بِالْبَطْحَاءِ فِي عِصَابَةٍ وَفِيهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَمَرَّتْ بِهِ سَحَابَةٌ فَنَظَرَ إِلَيْهَا فَقَالَ مَا تُسَمُّونَ هَذِهِ قَالُوا السَّحَابُ قَالَ وَالْمُزْنُ قَالُوا وَالْمُزْنُ قَالَ وَالْعَنَانُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ قَالُوا وَالْعَنَانُ قَالَ كَمْ تَرَوْنَ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَ السَّمَاءِ قَالُوا لَا نَدْرِي قَالَ فَإِنَّ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهَا إِمَّا وَاحِدًا أَوْ اثْنَيْنِ أَوْ ثَلَاثًا وَسَبْعِينَ سَنَةً وَالسَّمَاءُ فَوْقَهَا كَذَلِكَ حَتَّى عَدَّ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ ثُمَّ فَوْقَ السَّمَاءِ السَّابِعَةِ بَحْرٌ بَيْنَ أَعْلَاهُ وَأَسْفَلِهِ كَمَا بَيْنَ سَمَاءٍ إِلَى سَمَاءٍ ثُمَّ فَوْقَ ذَلِكَ ثَمَانِيَةُ أَوْعَالٍ بَيْنَ أَظْلَافِهِنَّ وَرُكَبِهِنَّ كَمَا بَيْنَ سَمَاءٍ إِلَى سَمَاءٍ ثُمَّ عَلَى ظُهُورِهِنَّ الْعَرْشُ بَيْنَ أَعْلَاهُ وَأَسْفَلِهِ كَمَا بَيْنَ سَمَاءٍ إِلَى سَمَاءٍ ثُمَّ اللَّهُ فَوْقَ ذَلِكَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन याह्या] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] कहिन, हमसे कहिन [अल वालिद बिन अबू त्सौर अल हमदानी] से [सिमक] से [अब्दुल्ला बिन अमीरा] से [अल अहनाफ बिन कैस] से [अब्बास बिन अब्दुल मुथल्लिब] उ कहिन; 'जब मैं बथहा मा रहा` तौ मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के उपस्थिति मा युद्ध सैनिकन मा शामिल होइ गयौं। अचानक एक बादल गुजर गवा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फिर ओका देखिन अऊर कहिन: 'तुम ईका का कहत हौ?' उइ जवाब दिहिन; 'बादर'। उ कहिन: 'अऊर बादल है,' उइ कहिन; 'अऊर बादल छाए'। उ कहिन: 'अऊर मेगा,' अबू बकर कहिन; उइ कहिन: 'अऊर मेगा'। उ पूछिन: 'तुमका लागत है कि तुम अऊर आकाश के बीच के दूरी का है?' उइ जवाब दिहिन; 'हमका पता नाहीं रहा'। अल्लाह के रसूल कहिन: 'वास्तव मा आप अऊर आकाश के बीच के दूरी एक, या दुई, या सत्तर साल होइ सकत है। अऊर ओकरे ऊपर आसमान, ई भी उतना दूरी है'। जब तक ऊ सातवाँ आकाश गिनिन ॥ आगे कहिन, 'फिर सातवें आकाश के ऊपर समुन्दर है, ऊपर तल के बीच के दूरी एक आकाश से दूसर आकाश के समान है। फिर वहिके ऊपर आठ स्वर्गदूत हैं, उनके खुर अऊर उनके घुटनन के बीच के ऊंचाई एक आकाश अऊर दूसर आकाश के बीच के तरह है, फिर उनके पीठ के ऊपर एक सिंहासन है जेकर ऊंचाई अऊर तल एक आकाश अऊर दूसर आकाश के बीच है। अऊर अल्लाह तबाराक वा ताआला ओसे ऊपर है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 190

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ حُمَيْدِ بْنِ كَاسِبٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا قَضَى اللَّهُ أَمْرًا فِي السَّمَاءِ ضَرَبَتْ الْمَلَائِكَةُ أَجْنِحَتَهَا خُضْعَانًا لِقَوْلِهِ كَأَنَّهُ سِلْسِلَةٌ عَلَى صَفْوَانٍ فَ { إِذَا فُزِّعَ عَنْ قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ قَالُوا الْحَقَّ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ } فَيَسْمَعُهَا مُسْتَرِقُو السَّمْعِ بَعْضُهُمْ فَوْقَ بَعْضٍ فَيَسْمَعُ الْكَلِمَةَ فَيُلْقِيهَا إِلَى مَنْ تَحْتَهُ فَرُبَّمَا أَدْرَكَهُ الشِّهَابُ قَبْلَ أَنْ يُلْقِيَهَا إِلَى الَّذِي تَحْتَهُ فَيُلْقِيهَا عَلَى لِسَانِ الْكَاهِنِ أَوْ السَّاحِرِ فَرُبَّمَا لَمْ يُدْرَكْ حَتَّى يُلْقِيَهَا فَيَكْذِبُ مَعَهَا مِائَةَ كَذْبَةٍ فَتَصْدُقُ تِلْكَ الْكَلِمَةُ الَّتِي سُمِعَتْ مِنْ السَّمَاءِ

हमका बतावा गा है [याकूब बिन हुमैद बिन कासिब] कहिन, ई हमका [सुफयान बिन उयैना] द्वारा [अमरू बिन दीनार] से [इकरीमा] से [अबू हुरैरा] पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से बतावा गा है, उ कहिन: 'जब अल्लाह आकाश मा एक बात का फरमान करत है तौ ओनके देवदूत ओनके पंखन के अधीनता करत हैं शब्द, एक बड़ी चट्टान पर एक चेन के तरह। जब ओनके मन स्थिर होइ जात है, तौ उई कहत हैं; 'हमरे रब्ब का कहिन? ' उइ जवाब दिहिन; 'अल हक, अऊर उ सबसे ऊंचा, सबसे महान है'। समाचार चोरी करै वाले जिन्न ओनके बात सुनिन, -उनका ढेर लगावा गा- कुछ दूसरन के ऊपर। सुने वाक्यन का चोरी करब अऊर फिर ओनका अपने से नीचे वालेन तक पहुँचावै। ई हो सकत है कि जिन्न का अपने नीचे वालेन तक पहुँचावै से पहिले एक तारा से टकरा गा होय, फिर उइ एक शमन या जादूगर के मुँह तक पहुँचावै। ई हो सकत है कि ओनका कौनो तारा न मारा गा रहा ताकि उ लोग ओका बता सकै, फिर ओका सौ झूठ के साथ मिलाइन। तब सुने गए वाक्य आकाश से आये वाक्य के अनुरूप हो सकत हैं'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 191

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَ قَامَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِخَمْسِ كَلِمَاتٍ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَنَامُ وَلَا يَنْبَغِي لَهُ أَنْ يَنَامَ يَخْفِضُ الْقِسْطَ وَيَرْفَعُهُ يُرْفَعُ إِلَيْهِ عَمَلُ اللَّيْلِ قَبْلَ عَمَلِ النَّهَارِ وَعَمَلُ النَّهَارِ قَبْلَ عَمَلِ اللَّيْلِ حِجَابُهُ النُّورُ لَوْ كَشَفَهُ لَأَحْرَقَتْ سُبُحَاتُ وَجْهِهِ مَا انْتَهَى إِلَيْهِ بَصَرُهُ مِنْ خَلْقِهِ

हमसे [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे [अबू मुआविया] से [अल अमासी] से [अमरू बिन मुर्रा] से [अबू उबैदा] से [अबू मूसा] कहिन; उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पांच वाक्य सुनावत समय हमरे बीच मा खड़ा होइके कहिन: 'वास्तव मा अल्लाह सोवत नाहीं है अऊर ओकरे लिए सोवै लायक नाहीं है, ऊ तराजू का नीचे उतार के ऊपर उठावत है, दिन के कामन से पहिले रात के काम ओकरे पास नियुक्त कीन जइहैं, अऊर दिन के कामन के पहिले दिन के मृतक ओकरे ऊपर नियुक्त कीन जइहैं अऊर हिजाब के रात ओकरे ऊपर होइहैं। रोशनी। अगर उ ई प्रकट करत, तौ ओकर चेहरा के रोशनी सब कुछ जला देत जहाँ तक ओकर आँखि देख सकत रही।'

Hadith

Imam Ibnu Majah : 192

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْمَسْعُودِيُّ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَنَامُ وَلَا يَنْبَغِي لَهُ أَنْ يَنَامَ يَخْفِضُ الْقِسْطَ وَيَرْفَعُهُ حِجَابُهُ النُّورُ لَوْ كَشَفَهَا لَأَحْرَقَتْ سُبُحَاتُ وَجْهِهِ كُلَّ شَيْءٍ أَدْرَكَهُ بَصَرُهُ ثُمَّ قَرَأَ أَبُو عُبَيْدَةَ { أَنْ بُورِكَ مَنْ فِي النَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَا وَسُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ }

हमसे कहिन [अली बिन मुहम्मद] कहिन, हमसे कहिन [वाकी'] कहिन, हमसे [अल मस'उदी] [अमरू बिन मुर्रा] से [अबू उबैदा] से [अबू मूसा] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में अल्लाह सोता नहीं है और न ही उनके लिए सोने लायक है। ऊ तराजू का नीचे अऊर ऊपर उठावत है। ओकर हिजाब रोशनी से है। अगर उ इका प्रकट करत, तौ ओकरे चेहरा के पवित्रता सब कुछ जला देई जहाँ तक ओकर आँखि देख सकत रही'। तब अबू उबैदा ने आयत पढ़ी; 'कि जे अग्नि के पास हैं, अऊर ओनके आसपास वाले, धन्य होइ गें हैं। अऊर महिमा अल्लाह के, दुनिया के रब्ब।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 193

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَمِينُ اللَّهِ مَلْأَى لَا يَغِيضُهَا شَيْءٌ سَحَّاءُ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ وَبِيَدِهِ الْأُخْرَى الْمِيزَانُ يَرْفَعُ الْقِسْطَ وَيَخْفِضُ قَالَ أَرَأَيْتَ مَا أَنْفَقَ مُنْذُ خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَمْ يَنْقُصْ مِمَّا فِي يَدَيْهِ شَيْئًا

हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे कहिन [यजीद बिन हारून] कहिन, हमसे कहिन [मुहम्मद बिन इशाक] से [अबू अज जिनाद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'अल्लाह दाहिना हाथ कम होत है अऊर भले ही दिन कम नाहीं होत है अऊर नीरस भी नाहीं होत है। हमेशा देत रहौ। जब उनके दूसर हाथ मा संतुलन रहा, तौ उ तराजू का ऊपर-नीचा करत रहें।' उ आगे कहिन: 'का तुमने ई नाहीं देखा कि अल्लाह कैसे - रोजी-रोटी - प्रदान करत अहै जब से उ आकाश अऊर पृथ्वी का बनाइन है, अऊर ई उनके हाथन मा जवन कुछौ है ओका कम नाहीं बनाइस है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 194

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ مِقْسَمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ يَقُولُ يَأْخُذُ الْجَبَّارُ سَمَاوَاتِهِ وَأَرْضَهُ بِيَدِهِ وَقَبَضَ بِيَدِهِ فَجَعَلَ يَقْبِضُهَا وَيَبْسُطُهَا ثُمَّ يَقُولُ أَنَا الْجَبَّارُ أَيْنَ الْجَبَّارُونَ أَيْنَ الْمُتَكَبِّرُونَ قَالَ وَيَتَمَيَّلُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ يَمِينِهِ وَعَنْ يَسَارِهِ حَتَّى نَظَرْتُ إِلَى الْمِنْبَرِ يَتَحَرَّكُ مِنْ أَسْفَلِ شَيْءٍ مِنْهُ حَتَّى إِنِّي أَقُولُ أَسَاقِطٌ هُوَ بِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

हमका बतावा गा है कि [हिस्याम बिन अम्मर] अऊर [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] दुइनौ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] कहिन, हमसे [मेरे पिता] से [उबैदुल्लाह बिन मिकसम] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] कहिन हैं; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पल्पिट से कहते सुना: 'सर्वशक्तिमान, अपने हाथन से आकाश अऊर धरती का लेत अऊर पकड़त है। तब उन्होंने इसे पकड़कर फैलाया और चिल्लाया- 'मैं सर्वशक्तिमान सार हूँ, कहाँ हैं जो घमंडी और घमंडी हैं! ' इब्न उमर कहिन: रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम दाहिने अऊर बाएं झुके रहे जब तक कि हम मंच के तल का हिलत नाहीं देखेन। वहि बिंदु तक जहाँ हम बुदबुदाइन; 'शायद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वजह से पल्पिट गिर जाय'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 195

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا ابْنُ جَابِرٍ قَالَ سَمِعْتُ بُسْرَ بْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا إِدْرِيسَ الْخَوْلَانِيَّ يَقُولُ حَدَّثَنِي النَّوَّاسُ بْنُ سَمْعَانَ الْكِلَابِيُّ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا مِنْ قَلْبٍ إِلَّا بَيْنَ إِصْبَعَيْنِ مِنْ أَصَابِعِ الرَّحْمَنِ إِنْ شَاءَ أَقَامَهُ وَإِنْ شَاءَ أَزَاغَهُ وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ يَا مُثَبِّتَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قُلُوبَنَا عَلَى دِينِكَ قَالَ وَالْمِيزَانُ بِيَدِ الرَّحْمَنِ يَرْفَعُ أَقْوَامًا وَيَخْفِضُ آخَرِينَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ

हमसे कहिन [हिस्याम बिन अम्मर] कहिन, हमसे कहिन [शदकाह बिन खालिद] कहिन, हमसे कहिन [इब्न जाबीर] उ कहिन; हम [बुसर बिन उबैदुल्लाह] का कहत सुने रहेन; हम [अबू इदरीस अल खौलानी] का कहत सुने रहेन; हमसे कहिन है [अन नववास बिन सामन अल किलाबी] उ कहिन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'जब तक अर रहमान के दुइ अंगुली के बीच न होय ​​तब तक दिल का एकौ टुकड़ा नाहीं होत। अगर उ चाहत है, तौ उ ईका सीधा करि देई, अऊर अगर उ चाहत है, तौ उ ईका भटका देई'। अऊर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमेशा प्रार्थना करत रहें: 'हे दिल का मजबूत करै वाला, अपने दीन मा मोर दिल का मजबूत करा'। उ कहिन: 'दान के तराजू अर रहमान के हाथ मा है, उ एक जनता का उठावत है अऊर दूसरन का उतारत है जब तक कि क़यामत तक उतारत है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 196

حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِسْمَعِيلَ عَنْ مُجَالِدٍ عَنْ أَبِي الْوَدَّاكِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ لَيَضْحَكُ إِلَى ثَلَاثَةٍ لِلصَّفِّ فِي الصَّلَاةِ وَلِلرَّجُلِ يُصَلِّي فِي جَوْفِ اللَّيْلِ وَلِلرَّجُلِ يُقَاتِلُ أُرَاهُ قَالَ خَلْفَ الْكَتِيبَةِ

हमसे [अबू कुरैब मुहम्मद इब्नुल 'अला`] कहिन, हमसे [अब्दुल्लाह बिन इस्माइल] [मुजालिद] से [अबुल वद्दक] से [अबू सईद अल खुदरी] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह तीन समूहन पर हँसे; एक मनई जवन प्रार्थना के पंक्ति मा है, एक मनई जवन आधी रात मा प्रार्थना करत है, अऊर एक मनई जे युद्ध मा है'। हमका लागत है कि उ कहिन: 'बटालियन के पीछे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 197

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ عُثْمَانَ يَعْنِي ابْنَ الْمُغِيرَةِ الثَّقَفِيَّ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْرِضُ نَفْسَهُ عَلَى النَّاسِ فِي الْمَوْسِمِ فَيَقُولُ أَلَا رَجُلٌ يَحْمِلُنِي إِلَى قَوْمِهِ فَإِنَّ قُرَيْشًا قَدْ مَنَعُونِي أَنْ أُبَلِّغَ كَلَامَ رَبِّي

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन याह्या] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन राजा`] कहिन, हमसे [इजरायल] बताइन [उथमान] से - अर्थात् अल मुघिरा अत्स त्साकाफी के बेटवा - [सलीम बिन अबुल जाद] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] से उ कहिन; हज के मौसम मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगन के साथे घुलमिल के कहिन: 'का केहू मोका अपने लोगन के पास ले जाय का तैयार है, दरअसल कुरैश ने मोका अपने प्रभु के वचन पहुँचावै से रोका है'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 198

حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا الْوَزِيرُ بْنُ صَبِيحٍ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ حَلْبَسٍ عَنْ أُمِّ الدَّرْدَاءِ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي قَوْلِهِ تَعَالَى { كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِي شَأْنٍ } قَالَ مِنْ شَأْنِهِ أَنْ يَغْفِرَ ذَنْبًا وَيُفَرِّجَ كَرْبًا وَيَرْفَعَ قَوْمًا وَيَخْفِضَ آخَرِينَ

हमसे कहिन है [हिस्याम बिन अम्मर] ने कहा, हमसे कहा है [अल वजीर बिन शबीह] ने कहा, हमसे [यूनुस बिन हलबास] से [उम्मू दरदा`] से [अबी दरदा`] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अल्लाह के शब्दन के बारे मा बतावा है: 'जब भी उ व्यस्त है', अल्लाह कहिन: उ व्यस्त है; पाप माफ करा, कठिनाइयन का मिटावा, एक लोगन के हैसियत बढ़ावा अऊर दूसरन का नीचे लावा।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 199

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي الشَّوَارِبِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عُمَيْرٍ عَنْ الْمُنْذِرِ بْنِ جَرِيرٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ سَنَّ سُنَّةً حَسَنَةً فَعُمِلَ بِهَا كَانَ لَهُ أَجْرُهَا وَمِثْلُ أَجْرِ مَنْ عَمِلَ بِهَا لَا يَنْقُصُ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا وَمَنْ سَنَّ سُنَّةً سَيِّئَةً فَعُمِلَ بِهَا كَانَ عَلَيْهِ وِزْرُهَا وَوِزْرُ مَنْ عَمِلَ بِهَا مِنْ بَعْدِهِ لَا يَنْقُصُ مِنْ أَوْزَارِهِمْ شَيْئًا

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अब्दुल मलिक बिन अबू स्यावरीब] कहिन, हमसे कहिन [अबू 'अवाना] कहिन, हमसे [अब्दुल मलिक बिन उमैर] [अल मुंडजीर बिन जरीर] से [अपने पिता] से कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई अच्छा सुन्नत बनाये, फिर उ सुन्नत का अंजाम दे, तब उसे अपना फल मिलेगा और उसका पालन करै वालेन का फल मिलेगा, बिना उनका फल जरा भी कम किहे। अऊर जे बुरा सुन्नत बनावत है अऊर फिर उ सुन्नत का लागू करत है, तब उ आपन पाप अऊर ओकरे पीछे चलै वालेन के पाप का भुगति है, बिना ओनके पाप का जरा भी कम किहे'।

Hadith

Imam Ibnu Majah : 200

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ عَبْدِ الصَّمَدِ بْنِ عَبْدِ الْوَارِثِ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ أَيُّوبَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَجَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَحَثَّ عَلَيْهِ فَقَالَ رَجُلٌ عِنْدِي كَذَا وَكَذَا قَالَ فَمَا بَقِيَ فِي الْمَجْلِسِ رَجُلٌ إِلَّا تَصَدَّقَ عَلَيْهِ بِمَا قَلَّ أَوْ كَثُرَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ اسْتَنَّ خَيْرًا فَاسْتُنَّ بِهِ كَانَ لَهُ أَجْرُهُ كَامِلًا وَمِنْ أُجُورِ مَنْ اسْتَنَّ بِهِ وَلَا يَنْقُصُ مِنْ أُجُورِهِمْ شَيْئًا وَمَنْ اسْتَنَّ سُنَّةً سَيِّئَةً فَاسْتُنَّ بِهِ فَعَلَيْهِ وِزْرُهُ كَامِلًا وَمِنْ أَوْزَارِ الَّذِي اسْتَنَّ بِهِ وَلَا يَنْقُصُ مِنْ أَوْزَارِهِمْ شَيْئًا

हमसे कहिन [अब्दुल वारित्स बिन अब्दुश शमाद बिन अब्दुल वारित्स] कहिन, हमसे कहिन [मेरे पिता] कहिन, हमसे कहिन [मेरे पिता] से [अय्यूब] से [मुहम्मद बिन सिरिन] से [अबू हुरैरा] उ कहिन; एक आदमी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया, फिर उन्होंने उन्हें प्रेरणा दी -कुछ से अच्छा काम करना-। हमरे बीच से एक मनई कहिस; 'मोरे पास अइसन अऊर अइसन है'। अबू हुरैरा ने कहा: तो कोई भी सभा में नहीं रहा जब तक कि उ पैगम्बर को दान नहीं देत रहा, चाहे थोड़ा हो या बहुत। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी कहा: 'जो कोई अच्छा सुन्नत बनाये, तब वह सुन्नत मिसाल बन जात है, तब उसे अपने कर्मों का फल पूरी तरह से मिलेगा साथ ही साथ जो लोग उसका पालन करत हैं, उनके फल का जरा भी कम किए बिना। और जो कोई बुरा सुन्नत करे तब सुन्नत मिसाल बन जात है तब अपने कर्मों के पापों को पूर्ण रूप से भुगतेगा साथ ही साथ अपने पापों को जरा भी कम किए बिना उनके पालन करै वालेन के पापों का'।