Imam Tirmidzi : 161
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُوسَى الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الضُّبَعِيُّ عَنْ أَبِي عِمْرَانَ الْجَوْنِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الصَّامِتِ عَنْ أَبِي ذَرٍّ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا ذَرٍّ أُمَرَاءُ يَكُونُونَ بَعْدِي يُمِيتُونَ الصَّلَاةَ فَصَلِّ الصَّلَاةَ لِوَقْتِهَا فَإِنْ صُلِّيَتْ لِوَقْتِهَا كَانَتْ لَكَ نَافِلَةً وَإِلَّا كُنْتَ قَدْ أَحْرَزْتَ صَلَاتَكَوَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَعُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي ذَرٍّ حَدِيثٌ حَسَنٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ يَسْتَحِبُّونَ أَنْ يُصَلِّيَ الرَّجُلُ الصَّلَاةَ لِمِيقَاتِهَا إِذَا أَخَّرَهَا الْإِمَامُ ثُمَّ يُصَلِّي مَعَ الْإِمَامِ وَالصَّلَاةُ الْأُولَى هِيَ الْمَكْتُوبَةُ عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ وَأَبُو عِمْرَانَ الْجَوْنِيُّ اسْمُهُ عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ حَبِيبٍ
[मुहम्मद बिन मूसा अल बशरी] हमरा सब के रिवायत केने छथि; [जा'फर बिन सुलेमान अदल द्लुबाई] हमरा सब के [अबू इमरान अल जौनी] स [अब्दुल्लाह बिन ऐश शमीत] स [अबू धारर] स रिवायत केने छथि ओ कहलनि; 'नबी शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'हे अबू धारर, हमरा बादक नेता नमाज के मारत - तुच्छ - कम करताह, तेँ समय पर नमाज पढ़ब, जँ नमाज ओकर समयक अनुसार कयल जायत तखन अहाँ केँ नफीला केर इनाम भेटत, जँ नहि त' अहाँ अपन नमाज केर पहरा द' लेने छी'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अब्दुल्ला बिन मसूद आ उबादा बिन ऐश शमित सँ सेहो एकटा रिवायत अछि' | अबू ईसा कहलनि; अबू धारर के हदीस हसन सहीह अछि। ई मत कतेको विद्वानक अछि । हुनका सब के नीक लगैत छनि जे कोनो आदमी इमाम के देरी करय पर समय पर नमाज करय, जकर बाद ओ इमाम के संग मिल क नमाज पढ़ैत अछि. आ विज्ञान के अधिकांश विशेषज्ञ के अनुसार ओहि समय के प्रारंभ में जे नमाज केने छलाह ओ अनिवार्य नमाज छल | अबू इमरान अल जौनी के नाम अब्दुल मलिक बिन हबीब' छै।
Imam Tirmidzi : 162
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَبَاحٍ الْأَنْصَارِيِّ عَنْ أَبِي قَتَادَةَ قَالَذَكَرُوا لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَوْمَهُمْ عَنْ الصَّلَاةِ فَقَالَ إِنَّهُ لَيْسَ فِي النَّوْمِ تَفْرِيطٌ إِنَّمَا التَّفْرِيطُ فِي الْيَقَظَةِ فَإِذَا نَسِيَ أَحَدُكُمْ صَلَاةً أَوْ نَامَ عَنْهَا فَلْيُصَلِّهَا إِذَا ذَكَرَهَاوَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ مَسْعُودٍ وَأَبِي مَرْيَمَ وَعِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ وَجُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ وَأَبِي جُحَيْفَةَ وَأَبِي سَعِيدٍ وَعَمْرِو بْنِ أُمَيَّةَ الضَّمْرِيِّ وَذِي مِخْبَرٍ وَيُقَالُ ذِي مِخْمَرٍ وَهُوَ ابْنُ أَخِي النَّجَاشِيِّ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَبِي قَتَادَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الرَّجُلِ يَنَامُ عَنْ الصَّلَاةِ أَوْ يَنْسَاهَا فَيَسْتَيْقِظُ أَوْ يَذْكُرُ وَهُوَ فِي غَيْرِ وَقْتِ صَلَاةٍ عِنْدَ طُلُوعِ الشَّمْسِ أَوْ عِنْدَ غُرُوبِهَا فَقَالَ بَعْضُهُمْ يُصَلِّيهَا إِذَا اسْتَيْقَظَ أَوْ ذَكَرَ وَإِنْ كَانَ عِنْدَ طُلُوعِ الشَّمْسِ أَوْ عِنْدَ غُرُوبِهَا وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَالشَّافِعِيِّ وَمَالِكٍ و قَالَ بَعْضُهُمْ لَا يُصَلِّي حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ أَوْ تَغْرُبَ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सब के [हमद बिन जैद] के [थाबीत अल बुनानी] स [अब्दुल्लाह बिन रबाह अल अंसारी] स [अबू कतादाह] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'साथी सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जिक्र केलनि जे ओ सब सुतल रहबाक कारणे अपन नमाज छूटि गेलाह, ताहि लेल ओ कहलनि: 'नींद में कम आंकय के कोनो बात नै होइत अछि, मुदा कम आंकल तखन होइत अछि जखन अहाँ होश में छी - सुतल नै छी -।' तेँ जँ अहाँ सभ मे सँ कियो प्रार्थना करब बिसरि जाइत अछि, वा नींद आबि जाइत अछि, तखन ओकरा मोन पड़ला पर प्रार्थना करय दियौक'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न मसूद, अबू मरियम, इमरान बिन हुशैन, जुबैर बिन मुथइम, अबू जुहैफा, अबू सईद, 'अमरू बिन उमय्याह अदल द्लामरी आ जू मिखबर, जिनका ज़ू मिखमार सेहो कहल जाइत अछि - अर्थात अन नजसी के बेटा के बेटा - के सेहो रिवायत अछि |' अबू ईसा कहलनि; अबू कतादा के हदीस हसन सहीह अछि। जे व्यक्ति नींद या बिसरला के कारण नमाज करै में कोताही करै छै, फेर जागै छै या याद करै छै कि कखन नमाज के समय समाप्त होय गेलऽ छै, यानी सूर्य के उदय या अस्त होय गेलऽ छै, ओकरा बारे में विद्वानऽ के अलग-अलग विचार छै । किछु गोटे कहलनि: "ओकरा जागला पर वा मोन पड़ला पर अवश्य करबाक चाही, भले सूर्य उगैत हो वा डूबि रहल हो |" ई अहमद, इसहाक, शफीई, आ मलिक के विचार छै। जखन कि किछु गोटे कहलनि: "जा धरि सूर्य नहि उगैत अछि वा अस्त नहि भ' जायत ता धरि हुनका नमाज नहि करबाक अनुमति छनि |"
Imam Tirmidzi : 163
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَبِشْرُ بْنُ مُعَاذٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ نَسِيَ صَلَاةً فَلْيُصَلِّهَا إِذَا ذَكَرَهَاوَفِي الْبَاب عَنْ سَمُرَةَ وَأَبِي قَتَادَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَيُرْوَى عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ أَنَّهُ قَالَ فِي الرَّجُلِ يَنْسَى الصَّلَاةَ قَالَ يُصَلِّيهَا مَتَى مَا ذَكَرَهَا فِي وَقْتٍ أَوْ فِي غَيْرِ وَقْتٍ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ بْنِ حَنْبَلٍ وَإِسْحَقَ وَيُرْوَى عَنْ أَبِي بَكْرَةَ أَنَّهُ نَامَ عَنْ صَلَاةِ الْعَصْرِ فَاسْتَيْقَظَ عِنْدَ غُرُوبِ الشَّمْسِ فَلَمْ يُصَلِّ حَتَّى غَرَبَتْ الشَّمْسُ وَقَدْ ذَهَبَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْكُوفَةِ إِلَى هَذَا وَأَمَّا أَصْحَابُنَا فَذَهَبُوا إِلَى قَوْلِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ
हमरा सभ केँ [कुतैबा] आ [बिसीर बिन मुअदज] केँ कहने छथि जे ओ सभ कहलनि; हमरा सभ केँ [अबू अवानाह] केँ [कतादह] सँ [अनास बिन मलिक] सँ कहने छथि ओ कहलनि; 'अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि जे भी नमाज बिसर॑ छै, ओकरा याद करला प॑ कर॑ देलऽ जाय’ । ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे सम्राह आ अबू कतादा सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'अनस केरऽ ई हदीस हसन प्रामाणिक छै ।' अली बिन अबू तालिब स॑ रिवायत छै, कि हुनी एगो आदमी के बारे म॑ कहलकै जे नमाज बिसरी गेलऽ छेलै, हुनी कहलकै कि जब॑ भी याद आबै छै, चाहे समय के भीतर होय या समय के बाहर’ । ई राय छै स्याफी, अहमद बिन हम्बल आरू इशाक' केरऽ । अबू बकरा सँ ईहो रिवायत अछि जे एक बेर हुनका नींद आबि गेलनि आ अस्र नमाज नहि केलनि, आ सूर्यास्त भेला पर जागलनि, तेँ सूर्यास्त धरि नमाज नहि केलनि। कुफा केरऽ कुछ लोगऽ के ई राय छेलै, जबकि हमरऽ साथी सब अली बिन अबू तालिब (र.ह.व.) केरऽ प्रथा के पालन करै छेलै ।
Imam Tirmidzi : 164
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ابْنِ مَسْعُودٍ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍإِنَّ الْمُشْرِكِينَ شَغَلُوا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ أَرْبَعِ صَلَوَاتٍ يَوْمَ الْخَنْدَقِ حَتَّى ذَهَبَ مِنْ اللَّيْلِ مَا شَاءَ اللَّهُ فَأَمَرَ بِلَالًا فَأَذَّنَ ثُمَّ أَقَامَ فَصَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ أَقَامَ فَصَلَّى الْعَصْرَ ثُمَّ أَقَامَ فَصَلَّى الْمَغْرِبَ ثُمَّ أَقَامَ فَصَلَّى الْعِشَاءَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي سَعِيدٍ وَجَابِرٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ لَيْسَ بِإِسْنَادِهِ بَأْسٌ إِلَّا أَنَّ أَبَا عُبَيْدَةَ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عَبْدِ اللَّهِ وَهُوَ الَّذِي اخْتَارَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي الْفَوَائِتِ أَنْ يُقِيمَ الرَّجُلُ لِكُلِّ صَلَاةٍ إِذَا قَضَاهَا وَإِنْ لَمْ يُقِمْ أَجْزَأَهُ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब के [हुसैम] के [अबू अज़ जुबैर] स [नाफी बिन जुबैर बिन मुथइम] स [अबू उबैदा बिन अब्दुल्लाह बिन मसूद] स कहलक अछि ओ कहलनि; ' [अब्दुल्लाह बिन मसूद] कहलनि; 'मशरिक सब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खण्डक लड़ाई के दिन चारि नमाज के अंजाम देबय सं ल क अल्लाह के मर्जी सं राति बीतय तक व्यस्त राखने छल.' तखन ओ बिलाल के आदेश देलखिन -नमाज के आह्वान करू-, ताहि लेल बिलाल सेहो नमाज आ इकमात के आह्वान केलनि। तखन ओ दुपहरक नमाज केलनि, फेर बिलाल इकामत तखन दुपहरक नमाज केलनि। तखन बिलाल इकामत कहलक आ फेर मगरिबक नमाज केलनि। तखन बिलाल इकमात लेलनि आ फेर ईशाक नमाज केलनि। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू सईद आ जाबीर सँ हदीस अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्ला के हदीस के सनाद में कोनो दिक्कत नै छै, लेकिन अबू उबैदा अब्दुल्ला के बात नै सुनलकै'। किछु विद्वान लोकनि छूटल नमाज के संबंध में ई बात चुनने छथि, जे आदमी के हर नमाज के इकामाह कहबाक चाही जँ ओ ओकर भरपाई करत, आ जँ ओ नहि कहैत अछि तखन ई काफी अछि | ई शफी'क राय अछि।
Imam Tirmidzi : 165
و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ بُنْدَارٌ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَالَ يَوْمَ الْخَنْدَقِ وَجَعَلَ يَسُبُّ كُفَّارَ قُرَيْشٍ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا كِدْتُ أُصَلِّي الْعَصْرَ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاللَّهِ إِنْ صَلَّيْتُهَا قَالَ فَنَزَلْنَا بُطْحَانَ فَتَوَضَّأَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَتَوَضَّأْنَا فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعَصْرَ بَعْدَ مَا غَرَبَتْ الشَّمْسُ ثُمَّ صَلَّى بَعْدَهَا الْمَغْرِبَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
हमरा सभकेँ कहने छथि [मुहम्मद बिन बस्यार बंडर] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [मुअज बिन हिशाम] कहलनि; हमरा [हमर पिता] [याह्या बिन अबू कथिर] स कहने छथि कहने छथि; हमरा सब के [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स [अबू सलामाह बिन अब्दुर्रहमान] कहने छथि: 'खंडक युद्ध के समय उमर बिन खथथब कुरैश काफिर के खिलाफ गारी-गलौज केने छलाह, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हम मुश्किल स अस्र के नमाज क सकैत छी जा धरि सूर्यास्त नै भ जायत!' तखन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि जे अल्लाह केर कसम हमहूँ ई काज नहि केने छी। जाबिर बजलाह; 'तखन हम सब बुथान - मदीना के एकटा घाटी में रुकलहुं -, तखन रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम वज़ूद केलनि आ हम सब सेहो वज़ूद में शामिल भ गेलहुं, रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम तखन सूर्यास्त के बाद दुपहर के नमाज केलनि, तकर बाद ओ मगरिब के नमाज केलनि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि।'
Imam Tirmidzi : 166
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ وَأَبُو النَّضْرِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ طَلْحَةَ بْنِ مُصَرِّفٍ عَنْ زُبَيْدٍ عَنْ مُرَّةَ الْهَمْدَانِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةُ الْوُسْطَى صَلَاةُ الْعَصْرِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
[महमुद बिन घैलन] हमरा सभकेँ रिवायत केने छथि; [अबू दाऊद अथ थयालीसी] आरू [अबू अन नडलर] न॑ हमरा सब क॑ [मुहम्मद बिन तलहह बिन मुशर्रिफ] स॑ [जुबैद] स॑ [अल हमदानी] स॑ [अब्दुल्लाह बिन मसूद] स॑ रिवायत करल॑ छै, वू कहलकै; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वूस्थ नमाज अस्र नमाज है'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह अछि'।
Imam Tirmidzi : 167
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ صَلَاةُ الْوُسْطَى صَلَاةُ الْعَصْرِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَعَائِشَةَ وَحَفْصَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي هَاشِمِ بْنِ عُتْبَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى قَالَ مُحَمَّدٌ قَالَ عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدِيثُ الْحَسَنِ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ حَدِيثٌ صَحِيحٌ وَقَدْ سَمِعَ مِنْهُ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ سَمُرَةَ فِي صَلَاةِ الْوُسْطَى حَدِيثٌ حَسَنٌ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ الْعُلَمَاءِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ و قَالَ زَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ وَعَائِشَةُ صَلَاةُ الْوُسْطَى صَلَاةُ الظُّهْرِ و قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ وَابْنُ عُمَرَ صَلَاةُ الْوُسْطَى صَلَاةُ الصُّبْحِ حَدَّثَنَا أَبُو مُوسَى مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا قُرَيْشُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ حَبِيبِ بْنِ الشَّهِيدِ قَالَ قَالَ لِي مُحَمَّدُ بْنُ سِيرِينَ سَلِ الْحَسَنَ مِمَّنْ سَمِعَ حَدِيثَ الْعَقِيقَةِ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ سَمِعْتُهُ مِنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ قَالَ أَبُو عِيسَى و أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمَدِينِيِّ عَنْ قُرَيْشِ بْنِ أَنَسٍ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ مُحَمَّدٌ قَالَ عَلِيٌّ وَسَمَاعُ الْحَسَنِ مِنْ سَمُرَةَ صَحِيحٌ وَاحْتَجَّ بِهَذَا الْحَدِيثِ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब [अब्दाह] स [सईद] स [कतदाह] स [अल हसन] स [समराह बिन जुंडाब] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि, जे ओ कहने छथि: 'वस्ता नमाज दुपहर के नमाज अछि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अली, अब्दुल्लाह बिन मसूद, जैद बिन थाबीत, 'ऐसिया, हफशाह, अबू हुरैरा आ अबू हसीम बिन उत्बाह सँ सेहो रिवायत अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'मुहम्मद कहलनि; 'अली बिन अब्दुल्लाह कहलनि जे समराह बिन जुंडाब के हदीस हसन प्रामाणिक अछि, आ ओ हुनका सं सुनने छलाह'. अबू ईसा कहलनि; 'वस्त नमाज के संबंध में सम्राह हदीस दुपहर के नमाज है, जिसकी डिग्री हसन शाहिह है | ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू ओकरा सिनी के अलावा अन्य के साथी सिनी के बीच स॑ बहुसंख्यक वैज्ञानिकऽ न॑ लेल॑ छै । जैद बिन थाबीत आ 'ऐशा कहलनि जे वुस्ता नमाज धुहर नमाज अछि'। जखन कि इब्न अब्बास आ इब्न उमर कहलनि जे 'वुस्ता नमाज फजर के नमाज अछि'। अबू मूसा मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना हमरा लोकनि कें कहलनि; कुरैश बिन अनस हमरा सब के हबीब इब्न असी स्याहिद स बतौलनि, ओ कहलनि: 'मुहम्मद बिन सिरिन कहलनि: 'अल हसन स पूछू जे ओ अकीका के बारे में हदीस केकरा स सुनने छलाह?' तेँ हम हुनका सँ पुछलियनि, त' ओ उत्तर देलनि, 'हम सम्राह बिन जुंडाब सँ सुनलहुँ'। अबू ईसा कहलनि: मुहम्मद बिन इस्माइल हमरा लोकनि केँ कहलनि; अली बिन अब्दुल्लाह बिन अल मदीनी हमरा सब के कुरैश बिन अनस स एहि हदीस के संग बतौलनि'। मुहम्मद कहलनि: 'अली कहलनि: 'समराह सँ अल हसन सुनब सत्य अछि, आ ओ एहि हदीस पर आधारित अछि'।
Imam Tirmidzi : 168
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا مَنْصُورٌ وَهُوَ ابْنُ زَاذَانَ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ أَخْبَرَنَا أَبُو الْعَالِيَةِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَال سَمِعْتُ غَيْرَ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَكَانَ مِنْ أَحَبِّهِمْ إِلَيَّأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْفَجْرِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَعَنْ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَابْنِ مَسْعُودٍ وَعُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَابْنِ عُمَرَ وَسَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَمُعَاذِ ابْنِ عَفْرَاءَ وَالصُّنَابِحِيِّ وَلَمْ يَسْمَعْ مِنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَسَلَمَةَ بْنِ الْأَكْوَعِ وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَعَائِشَةَ وَكَعْبِ بْنِ مُرَّةَ وَأَبِي أُمَامَةَ وَعَمْرِو بْنِ عَبَسَةَ وَيَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ وَمُعَاوِيَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ الْفُقَهَاءِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ أَنَّهُمْ كَرِهُوا الصَّلَاةَ بَعْدَ صَلَاةِ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ صَلَاةِ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَأَمَّا الصَّلَوَاتُ الْفَوَائِتُ فَلَا بَأْسَ أَنْ تُقْضَى بَعْدَ الْعَصْرِ وَبَعْدَ الصُّبْحِ قَالَ عَلِيُّ ابْنُ الْمَدِينِيِّ قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ قَالَ شُعْبَةُ لَمْ يَسْمَعْ قَتَادَةُ مِنْ أَبِي الْعَالِيَةِ إِلَّا ثَلَاثَةَ أَشْيَاءَ حَدِيثَ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَحَدِيثَ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَنْبَغِي لِأَحَدٍ أَنْ يَقُولَ أَنَا خَيْرٌ مِنْ يُونُسَ بْنِ مَتَّى وَحَدِيثَ عَلِيٍّ الْقُضَاةُ ثَلَاثَةٌ
हमरा सभकेँ [अहमद बिन मनी'] कहलक अछि; हमरा सभकेँ [हुसैम] कहलक अछि; हमरा सभ केँ [मंसूर] केँ सूचित केने छथि - ओ इब्न ज़ादजान छथि- [कतादह] सँ कहलनि; हमरा सब के [अबू अल अलियाह] [इब्न अब्बास] स रिपोर्ट केने छथि कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब स बहुत किछु सुनलहुं, जेना [उमर बिन अल खथथब], आ ओ हमरा सबस बेसी पसंद करय वाला लोक मे स एक छथि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भोर के बाद सूर्योदय तक नमाज करब मना केने छलाह, आ सूर्यास्त तक अस्र के बाद नमाज पढ़ब मना केने छलाह'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अली, इब्न मसूद, उकबाह बिन अमीर, अबू हुरैरा, इब्न उमर, सम्राह बिन जुंदाब, अब्दुल्लाह बिन अम्र, मुअद बिन अफ्रा`, ऐश शुनाबीही सँ सेहो रिवायत अछि - मुदा ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम -, सलामा बिन अल अकवा',जैद बिन थबीत, 'ऐशा, काअब बिन मुर्राह, अबू उमामा, अमरू बिन अबासाह, या'ला बिन उमय्याह आ मुअवियाह'। अबू ईसा कहलनि; 'उमर सँ इब्न अब्बास केरऽ हदीस हसन सहीह छै । नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी आरू ओकरऽ बाद के लोगऽ के बीच अधिकांश फुकहा के ई राय छै कि वू सब भोर के बाद सूर्योदय तक आरू दुपहर के बाद सूर्यास्त तक नमाज करना मकरूह मान॑ छेलै । रहल बात जे नमाज छूटि जाइत छैक, तखन भोर वा दुपहरक बाद ओकरा करबा मे - मेकअप करबा मे - कोनो नुकसान नहि। अली बिन अल मदीनी कहलनि; 'याह्या बिन सै'द कहलनि; 'स्यू'बाह तीन हदीस छोड़ि अबू अल अलियाह सँ रिवायत कतादह के बारे मे कहियो नहि सुनने छलाह; उमर हदीस, आर. 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सूर्योदय तक भोर के बाद नमाज और सूर्यास्त तक अस्र के बाद नमाज करना मना कर दिया' | इब्न अब्बास केरऽ हदीस नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑, हुनी कहलकै कि कोय ई कहना उचित नै छै कि हम्में यह्या बिन माता स॑ बेहतर छियै । हदीस अली, कि कदली तीन प्रकार के होते हैं |
Imam Tirmidzi : 169
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَإِنَّمَا صَلَّى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الْعَصْرِ لِأَنَّهُ أَتَاهُ مَالٌ فَشَغَلَهُ عَنْ الرَّكْعَتَيْنِ بَعْدَ الظُّهْرِ فَصَلَّاهُمَا بَعْدَ الْعَصْرِ ثُمَّ لَمْ يَعُدْ لَهُمَاوَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَأُمِّ سَلَمَةَ وَمَيْمُونَةَ وَأَبِي مُوسَى قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ وَقَدْ رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ صَلَّى بَعْدَ الْعَصْرِ رَكْعَتَيْنِ وَهَذَا خِلَافُ مَا رُوِيَ عَنْهُ أَنَّهُ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَحَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ أَصَحُّ حَيْثُ قَالَ لَمْ يَعُدْ لَهُمَا وَقَدْ رُوِيَ عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ نَحْوُ حَدِيثِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَائِشَةَ فِي هَذَا الْبَابِ رِوَايَاتٌ رُوِيَ عَنْهَا أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا دَخَلَ عَلَيْهَا بَعْدَ الْعَصْرِ إِلَّا صَلَّى رَكْعَتَيْنِ وَرُوِيَ عَنْهَا عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ نَهَى عَنْ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ وَالَّذِي اجْتَمَعَ عَلَيْهِ أَكْثَرُ أَهْلِ الْعِلْمِ عَلَى كَرَاهِيَةِ الصَّلَاةِ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ إِلَّا مَا اسْتُثْنِيَ مِنْ ذَلِكَ مِثْلُ الصَّلَاةِ بِمَكَّةَ بَعْدَ الْعَصْرِ حَتَّى تَغْرُبَ الشَّمْسُ وَبَعْدَ الصُّبْحِ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ بَعْدَ الطَّوَافِ فَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رُخْصَةٌ فِي ذَلِكَ وَقَدْ قَالَ بِهِ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ وَبِهِ يَقُولُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ وَقَدْ كَرِهَ قَوْمٌ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ الصَّلَاةَ بِمَكَّةَ أَيْضًا بَعْدَ الْعَصْرِ وَبَعْدَ الصُّبْحِ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَبَعْضُ أَهْلِ الْكُوفَةِ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सब के [जरीर] के ['अथा` बिन सईब] स [सैद बिन जुबैर] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अस्र के बाद दू रकाअत के नमाज पढ़ने छलाह, कारण ओ मुसलमान के संपत्ति के देखभाल क रहल छलाह, ताहि लेल ओ व्यस्त छलाह आ मध्याह्न के नमाज के बाद दू रकाअत के नमाज नहि क सकैत छलाह। तेँ अस्रक बाद दुनू रकाअत केलनि, आ फेर नहि केलनि'। एहि अध्याय मे 'ऐस्याह, उम्म सलामाह, मैमुनाह, आ अबू मूसा' सँ हदीस सेहो अछि | अबू ईसा कहलनि; इब्न अब्बास के हदीस हसन हदीस छै, आरू बहुत रास रस्सूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ बतैन॑ छै कि हुनी असर के बाद दू रकाअत के नमाज करलकै । आ ई हुनका सँ - नबी - सँ जे रिवायत भेल छलनि ताहि सँ विरोध करैत अछि जे ओ सूर्यास्त धरि अस्र के बाद नमाज पर रोक लगा देने छलाह | इब्न अब्बास केरऽ हदीस अधिक प्रामाणिक छै, कैन्हेंकि ओकरा म॑ कहलऽ गेलऽ छै कि हुनी दू रकात नमाज दोहराबै के काम नै करलकै । आरू जैद बिन थाबीत स॑ भी एगो हदीस बतैलऽ गेलऽ छै जे इब्न अब्बास केरऽ हदीस स॑ मिलै छै । आरू ई भी ऐसिया स॑ कई हदीस स॑ रिवायत करलऽ गेलऽ छै जेकरा म॑ कहलऽ गेलऽ छै कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम असर समय के बाद ओकरा - ऐसिया - क॑ देखै लेली कहियो नै ऐलै जब॑ तलक कि वू दू रकाअत के नमाज नै करलकै । आरू एक आरू रिवायत ऐसिया स॑, उम्म सलामा स॑, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ कि वू सूर्यास्त तलक अस्र के बाद नमाज पढ़ै स॑ मना करी देलकै, आरू सूर्योदय तलक भोर के बाद नमाज करै स॑ मना करी देलकै । आरू वैज्ञानिक विशेषज्ञऽ के सहमति जे छै कि आसर के बाद सूर्यास्त तक, आरू भोर के बाद सूर्योदय तक नमाज पर रोक छै । सिवाय जेकरा बहिष्कृत करलऽ गेलऽ छै, जेना कि मक्का में असार के बाद सूर्यास्त तक आरू भोर के बाद तवाफ करला के बाद सूर्योदय तक नमाज पढ़ना । नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सँ रिवायत अछि जे ओ एहि मामला मे नम्रता देलनि। ई बात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सहाबा आ हुनका बाद आबय वाला के बीच के विद्वान के एकटा समूह के छल. ई राय इमाम शाफीई, अहमद, आ इशहाक के सेहो छल | एम्हर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केर सहाबा मे सँ एकटा आओर विद्वानक समूह आ हुनक बाद आयल लोकनि सेहो मक्का मे असर आ फजरक बाद नमाज पढ़ब मकरूह मानैत छलाह | ई मत सुफियन अथ थाउरी, मालिक इब्न अनस, आ कुफा के किछु लोक के छल |
Imam Tirmidzi : 170
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ كَهْمَسِ بْنِ الْحَسَنِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَيْنَ كُلِّ أَذَانَيْنِ صَلَاةٌ لِمَنْ شَاءَوَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اخْتَلَفَ أَصْحَابُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الصَّلَاةِ قَبْلَ الْمَغْرِبِ فَلَمْ يَرَ بَعْضُهُمْ الصَّلَاةَ قَبْلَ الْمَغْرِبِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُمْ كَانُوا يُصَلُّونَ قَبْلَ صَلَاةِ الْمَغْرِبِ رَكْعَتَيْنِ بَيْنَ الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِ و قَالَ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ إِنْ صَلَّاهُمَا فَحَسَنٌ وَهَذَا عِنْدَهُمَا عَلَى الِاسْتِحْبَابِ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब के [वाकी’] [कहमस बिन अल हसन] स [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] स [अब्दुल्लाह बिन मुगफ्ल] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि, ओ कहलनि: 'दू टा नमाज के बीच एकटा दुआ होइत अछि जे ई करय चाहैत छथि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अब्दुल्ला बिन अज़ जुबैर सँ सेहो इतिहास अछि' । अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्लाह बिन अल मुगफ़ल के हदीस हसन प्रामाणिक अछि।' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ कुछ साथी मगरीब स॑ पहल॑ नमाज करै के बारे म॑ असहमत छेलै, कुछ के तर्क छेलै कि मगरीब स॑ पहल॑ नमाज नै होय छै । आरू नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ बहुत सारा साथी सिनी स॑ रिवायत होय गेलऽ छै कि मगरीब स॑ पहल॑ दू रकाअत यानी इकामा आरू नमाज के बीच नमाज पढ़ै छेलै । अहमद आ इशाक कहलनि; 'जँ कियो करैत अछि तखन ई नीक बात अछि'। दुनू गोटे एकरा सुन्नत मानैत छथि ।
Imam Tirmidzi : 171
حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مُوسَى الْأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا مَعْنٌ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ وَعَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ وَعَنْ الْأَعْرَجِ يُحَدِّثُونَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَدْرَكَ مِنْ الصُّبْحِ رَكْعَةً قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ الصُّبْحَ وَمَنْ أَدْرَكَ مِنْ الْعَصْرِ رَكْعَةً قَبْلَ أَنْ تَغْرُبَ الشَّمْسُ فَقَدْ أَدْرَكَ الْعَصْرَوَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَبِهِ يَقُولُ أَصْحَابُنَا وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ وَمَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَهُمْ لِصَاحِبِ الْعُذْرِ مِثْلُ الرَّجُلِ الَّذِي يَنَامُ عَنْ الصَّلَاةِ أَوْ يَنْسَاهَا فَيَسْتَيْقِظُ وَيَذْكُرُ عِنْدَ طُلُوعِ الشَّمْسِ وَعِنْدَ غُرُوبِهَا
हमरा सब के कहने छथि [इशक बिन मूसा अल अंसारी] कहलनि; हमरा सभकेँ कहि देने अछि [मा'न] कहलक; हमरा सब [मलिक बिन अनस] के [जैद बिन असलम] स [अथा` बिन यासर] स, आ [बस्र बिन सईद] स आ [अल अ'राज] स कहलक अछि जे ओ सब [अबू हुरैरा] स कहने छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि: 'जेकरा सूर्य उगय स पहिने सुबह के एक रकात भेटैत अछि, ओकरा भेट गेल अछि। आ जकरा सूर्य डूबबासँ पहिने एक रकात अस्र नमाज भेटैत छैक, ओकरा भेटि गेलैक'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे 'ऐस्याह' केर इतिहास सेहो अछि | अबू ईसा कहलनि; अबू हुरैरा के हदीस हसन प्रामाणिक अछि। ई राय हमरा लोकनिक मित्र स्याफी, अहमद आ इशाक द्वारा लेल गेल छल । हुनकऽ अनुसार ई हदीस वू व्यक्ति प॑ लागू होय छै जेकरा पास बहाना छै, जेना कि वू आदमी जे सुतला के वजह स॑ नमाज छूटी जाय छै या बिसरी जाय छै, फेरू जागै छै या याद करै छै कि जब॑ सूर्य उगै छै या अस्त होय छै ।
Imam Tirmidzi : 172
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَجَمَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ وَبَيْنَ الْمَغْرِبِ وَالْعِشَاءِ بِالْمَدِينَةِ مِنْ غَيْرِ خَوْفٍ وَلَا مَطَرٍقَالَ فَقِيلَ لِابْنِ عَبَّاسٍ مَا أَرَادَ بِذَلِكَ قَالَ أَرَادَ أَنْ لَا يُحْرِجَ أُمَّتَهُ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ قَدْ رُوِيَ عَنْهُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ رَوَاهُ جَابِرُ بْنُ زَيْدٍ وَسَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ شَقِيقٍ الْعُقَيْلِيُّ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَيْرُ هَذَا
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [हन्नाद] कहलनि; हमरा सब के [अबू मुअवियाह] के [अल अ'मासी] स [हबीब बिन अबू थाबीत] स [सैद बिन जुबैर] स [इब्न अब्बास] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'मदीना में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मध्याह्न आ अस्र नमाज के बीच, साथ ही मगरिब आ शाम के नमाज के बीच भी बहुवचन बनाबै छेलै, डर या बारिश के कारण नै'। सईद कहलक; 'इब्न अब्बास सँ कहल गेल छल, 'ओहि सँ ओकरा की चाही?' ओ उत्तर देलनि, 'ओ अपन लोकक लेल काज कठिन नहि करय चाहैत छथि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू हुरैरा सँ एकटा हदीस सेहो अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'इब्न अब्बास केरऽ ई हदीस कई चैनलऽ स॑ बतैलऽ गेलऽ छै । अर्थात [जाबिर बिन जैद] आ [सैद बिन जुबैर] आ [अब्दुल्लाह बिन स्याकिक अल उकैली]। एकरऽ कथ्य भी ई मार्ग स॑ अलग छै; इब्न अब्बास से, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से |
Imam Tirmidzi : 173
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ حَنَشٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ جَمَعَ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ مِنْ غَيْرِ عُذْرٍ فَقَدْ أَتَى بَابًا مِنْ أَبْوَابِ الْكَبَائِرِقَالَ أَبُو عِيسَى وَحَنَشٌ هَذَا هُوَ أَبُو عَلِيٍّ الرَّحَبِيُّ وَهُوَ حُسَيْنُ بْنُ قَيْسٍ وَهُوَ ضَعِيفٌ عِنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ ضَعَّفَهُ أَحْمَدُ وَغَيْرُهُ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنْ لَا يَجْمَعَ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ إِلَّا فِي السَّفَرِ أَوْ بِعَرَفَةَ وَرَخَّصَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ فِي الْجَمْعِ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ لِلْمَرِيضِ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ يَجْمَعُ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ فِي الْمَطَرِ وَبِهِ يَقُولُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ وَلَمْ يَرَ الشَّافِعِيُّ لِلْمَرِيضِ أَنْ يَجْمَعَ بَيْنَ الصَّلَاتَيْنِ
हमरा सब के कहने छथि [अबू सलामा याह्या बिन खलाफ अल बशरी] कहलनि; हमरा सब [अल मुअतमीर बिन सुलेमान] स [अपन पिता] स [हनासी] स [इकरीमा] स [इब्न अब्बास] स पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि, ओ कहलनि: 'जे कियो बिना बहाना के दू नमाज के बीच बहुवचन करैत अछि, तखन ओ कोनो पैघ पाप के दरवाजा के एकटा दरवाजा पर आबि गेल अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'हनासी अबू अली अर रहबी छैथ, अर्थात हुसैन बिन कैस । हदीस विशेषज्ञ के अनुसार ओ कमजोर व्यक्ति छलाह | इमाम अहमद आरू अन्य लोगऽ न॑ भी एकरा कमजोर करी देल॑ छै' । ई हदीस विज्ञान के विशेषज्ञऽ द्वारा अभ्यास करलऽ जाय छै, कि यात्रा के समय या अराफा के समय के अलावा दू नमाज के नमाज करना जायज नै छै । आ ताबीइन मंडली के किछु विशेषज्ञ बीमार लोक के लेल दू टा नमाज करय लेल राहत दैत छथिन्ह. अहमद आ इशाक के ई राय अछि। एम्हर किछु वैज्ञानिक कहैत छथि जे दुनू नमाज तखने कएल जाइत अछि जखन बरखा होइत अछि । ई बात शफीई, अहमद आ इशाक केने छैथ। एम्हर इमाम स्याफी के ई विश्वास नै छै कि बीमार लोग बहुवचन में दू नमाज करी सकै छै ।
Imam Tirmidzi : 174
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْأُمَوِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ الْحَارِثِ التَّيْمِيِّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَلَمَّا أَصْبَحْنَا أَتَيْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرْتُهُ بِالرُّؤْيَا فَقَالَ إِنَّ هَذِهِ لَرُؤْيَا حَقٍّ فَقُمْ مَعَ بِلَالٍ فَإِنَّهُ أَنْدَى وَأَمَدُّ صَوْتًا مِنْكَ فَأَلْقِ عَلَيْهِ مَا قِيلَ لَكَ وَلْيُنَادِ بِذَلِكَ قَالَ فَلَمَّا سَمِعَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ نِدَاءَ بِلَالٍ بِالصَّلَاةِ خَرَجَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَجُرُّ إِزَارَهُ وَهُوَ يَقُولُ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ لَقَدْ رَأَيْتُ مِثْلَ الَّذِي قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلِلَّهِ الْحَمْدُ فَذَلِكَ أَثْبَتُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ أَتَمَّ مِنْ هَذَا الْحَدِيثِ وَأَطْوَلَ وَذَكَرَ فِيهِ قِصَّةَ الْأَذَانِ مَثْنَى مَثْنَى وَالْإِقَامَةِ مَرَّةً مَرَّةً وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ هُوَ ابْنُ عَبْدِ رَبِّهِ وَيُقَالُ ابْنُ عَبْدِ رَبٍّ وَلَا نَعْرِفُ لَهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَيْئًا يَصِحُّ إِلَّا هَذَا الْحَدِيثَ الْوَاحِدَ فِي الْأَذَانِ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ الْمَازِنِيُّ لَهُ أَحَادِيثُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ عَمُّ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ
हमरा सभकेँ कहने छथि [सैद बिन याह्या बिन सईद अल उमावी] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [हमर पिता] कहलनि; हमरा सब के [मुहम्मद बिन इशक] के [मुहम्मद बिन इब्राहिम अल हरित्स एट तैमी] स [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन जैद] स [अपन पिता] स कहलक अछि; 'एक दिन भोरे हम सब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लग गेलहुं, हम तखन हुनका अपन सपना के बारे में कहलियनि, ओ तखन कहलनि: 'ई सच्चा सपना अछि, तें बिलाल के संग ठाढ़ रहू, कारण ओकर आवाज अहां सं बेसी तेज आ नमहर अछि, ओकरा कहि दियौक जे अहाँ की कहलहुं - सपना देखलहुं -, ओकरा कहि दियौ जे एहि सं चिचियाह'।' अब्दुल्ला बिन जैद कहलनि; 'जखन उमर बिन अल खथथब बिलाल के आवाज सुनलनि त ओ अपन सरोंग ल क रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम स भेंट करय लेल निकललाह, तखन ओ कहलनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जे अहाँ के सच्चाई के संग पठौलनि, हुनकर द्वारा हमहूँ सपना देखने छी जेना ओ कहलनि'। अब्दुल्ला बिन जैद कहलनि; 'त' अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'सब स्तुति अल्लाह के अछि, तखन ई आओर मजबूत होयत'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न उमर सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्लाह बिन जैद केरऽ ई हदीस हसन प्रामाणिक छै ।' [इब्राहिम बिन सअद] न॑ [मुहम्मद बिन इशाक] स॑ ई हदीस क॑ अधिक सिद्ध आरू लम्बा लफाज के साथ बतैन॑ छै । हदीस में कहल गेल अछि जे नमाज के आह्वान दू बेर-दू बेर होइत अछि, जखन कि इकमाह एक बेर-एक बेर होइत अछि'। अब्दुल्लाह बिन जैद इब्न अब्दु रब्बी छै, आरू इब्नू अब्दु रब्बी भी कहलऽ जाय छै । आरू हम्में हुनका स॑ कहियो भी कोनो सच्चे हदीस नै जानलऽ छेलियै जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ रिवायत होय छै, एकरा अलावा ई नमाज स॑ संबंधित हदीस के अलावा । जबकि अब्दुल्लाह बिन जैद बिन अशिम अल मज़िनी के पास पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ रिवायत कई हदीस छै । ओ अब्बाद बिन तमीम के मामा छलाह।
Imam Tirmidzi : 175
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ النَّضْرِ بْنِ أَبِي النَّضْرِ حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنَا نَافِعٌ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَكَانَ الْمُسْلِمُونَ حِينَ قَدِمُوا الْمَدِينَةَ يَجْتَمِعُونَ فَيَتَحَيَّنُونَ الصَّلَوَاتِ وَلَيْسَ يُنَادِي بِهَا أَحَدٌ فَتَكَلَّمُوا يَوْمًا فِي ذَلِكَ فَقَالَ بَعْضُهُمْ اتَّخِذُوا نَاقُوسًا مِثْلَ نَاقُوسِ النَّصَارَى وَقَالَ بَعْضُهُمْ اتَّخِذُوا قَرْنًا مِثْلَ قَرْنِ الْيَهُودِ قَالَ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ أَوَلَا تَبْعَثُونَ رَجُلًا يُنَادِي بِالصَّلَاةِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا بِلَالُ قُمْ فَنَادِ بِالصَّلَاةِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ عُمَرَ
हमरा सभकेँ कहने छथि [अबू बकर बिन अन नडलर बिन अबू अन नडलर] कहलनि; हमरा सभकेँ [हज्जाज बिन मुहम्मद] कहने छथि ओ कहलनि; [इब्न जुरैर] कहलनि; [इब्न उमर] स हमरा सब [नाफी'] के रिपोर्ट केने छथि ओ कहलनि; 'जखन मुसलमान मदीना आयल त जमा भ' क' नमाज के इंतजार केलक मुदा कियो नमाज के आह्वान नहि केलक।' तखन एक दिन ओ सभ एहि पर गप्प क' रहल छलाह, किछु गोटे कहलनि; 'ईसाई जकाँ घंटीक प्रयोग करू,' आन लोक सभ बाजल; 'यहूदी जकाँ तुरहीक प्रयोग करू'। इब्न उमर कहलनि; 'तखन उमर बजलाह; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तखन कहलनि: 'हे बिलाल, ठाढ़ भ' क' नमाज पुकारू'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन शाहिह घरीब अछि, इब्न उमर के हदीस स'।
Imam Tirmidzi : 176
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُعَاذٍ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي مَحْذُورَةَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي وَجَدِّي جَمِيعًا عَنْ أَبِي مَحْذُورَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْعَدَهُ وَأَلْقَى عَلَيْهِ الْأَذَانَ حَرْفًا حَرْفًاقَالَ إِبْرَاهِيمُ مِثْلَ أَذَانِنَا قَالَ بِشْرٌ فَقُلْتُ لَهُ أَعِدْ عَلَيَّ فَوَصَفَ الْأَذَانَ بِالتَّرْجِيعِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي مَحْذُورَةَ فِي الْأَذَانِ حَدِيثٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْهُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ وَعَلَيْهِ الْعَمَلُ بِمَكَّةَ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ
हमरा सब के कहने छथि [बियसर बिन मुअज अल बशरी] कहलनि; हमरा सभकेँ [इब्राहिम बिन अब्दुल अजीज बिन अब्दुल मलिक बिन अबू महजुराह] कहलनि अछि जे ओ कहलनि; हमरा [हमर पिता] आ [हमर दादा] केँ [अबू महजुराह] सँ सूचित केने छथि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका बैसा क’ हुनका चिट्ठी-पत्र पढ़ि देलनि। इब्राहिम तखन कहलनि; '-बस- हमर सभक प्रार्थनाक आह्वान जकाँ'। बिसिर कहलकै; 'तखन हम हुनका कहलियनि, 'हमरा लेल दोहराउ!' तेँ ओ प्रार्थनाक आह्वान केँ दोहराओल गेल। अबू ईसा कहलनि; नमाज केरऽ आह्वान के संबंध म॑ अबू महजुराह केरऽ हदीस प्रामाणिक छै । ई हदीस सेहो हुनका सँ दोसर तरहेँ बतौल गेल अछि | ई हदीस मक्का के लोग बहुत हद तक करै छै, आरू ई शफीई के विचार छै ।
Imam Tirmidzi : 177
حَدَّثَنَا أَبُو مُوسَى مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ الْوَاحِدِ الْأَحْوَلِ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَيْرِيزٍ عَنْ أَبِي مَحْذُورَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَّمَهُ الْأَذَانَ تِسْعَ عَشْرَةَ كَلِمَةً وَالْإِقَامَةَ سَبْعَ عَشْرَةَ كَلِمَةًقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَأَبُو مَحْذُورَةَ اسْمُهُ سَمُرَةُ بْنُ مِعْيَرٍ وَقَدْ ذَهَبَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِلَى هَذَا فِي الْأَذَانِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ أَبِي مَحْذُورَةَ أَنَّهُ كَانَ يُفْرِدُ الْإِقَامَةَ
हमरा सब के कहने छथि [अबू मूसा मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने अछि ['अफ्फान] कहलनि; हमरा सब के [हम्मम] के [अमीर बिन अब्दुल वहिद अल अहवाल] स [मखुल] स [अब्दुल्लाह बिन मुहैरिज] स [अबू महजुराह] स कहने छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका अदान के उन्नीस वाक्य सिखबैत छलाह, जखन कि इकामा के सत्रह वाक्य छलनि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि, जखन कि अबू महजुराह के नाम समराह बिन मियार अछि' | नमाज के मामला में बहुत वैज्ञानिक एहि हदीस के पालन करैत छथि | अबू महजुराह सँ रिवायत अछि जे ओ इकमाह मे एक वाक्य-एक वाक्य कहलनि'।
Imam Tirmidzi : 178
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ وَيَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَأُمِرَ بِلَالٌ أَنْ يَشْفَعَ الْأَذَانَ وَيُوتِرَ الْإِقَامَةَوَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ مَالِكٌ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ
हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सब के [अब्दुल वहाब अतस त्साकफी] आ [यजीद बिन ज़ुरै'] के [खालिद अल हद्जा`] स [अबू किलाबाह] स [अनस बिन मलिक] स कहलक अछि; 'बिलाल के आदेश देल गेल छल जे ओ नमाज में नंबर आ इकमाह में विषम नंबर पूरा करथि'। एहि अध्याय मे इब्न उमर सँ सेहो इतिहास अछि | अबू ईसा कहलनि; 'अनस सँ ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि।' ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू ताबीईन केरऽ साथी म॑ स॑ कुछ वैज्ञानिक विशेषज्ञऽ न॑ लेल॑ छै । ई राय मालिक, स्याफी, अहमद आ इशक' सेहो लेलनि ।
Imam Tirmidzi : 179
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الْأَشَجُّ حَدَّثَنَا عُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ ابْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ قَالَكَانَ أَذَانُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ شَفْعًا شَفْعًا فِي الْأَذَانِ وَالْإِقَامَةِقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ رَوَاهُ وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى قَالَ حَدَّثَنَا أَصْحَابُ مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ زَيْدٍ رَأَى الْأَذَانَ فِي الْمَنَامِ و قَالَ شُعْبَةُ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ زَيْدٍ رَأَى الْأَذَانَ فِي الْمَنَامِ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي لَيْلَى لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الْأَذَانُ مَثْنَى مَثْنَى وَالْإِقَامَةُ مَثْنَى مَثْنَى وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَأَهْلُ الْكُوفَةِ قَالَ أَبُو عِيسَى ابْنُ أَبِي لَيْلَى هُوَ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى كَانَ قَاضِيَ الْكُوفَةِ وَلَمْ يَسْمَعْ مِنْ أَبِيهِ شَيْئًا إِلَّا أَنَّهُ يَرْوِي عَنْ رَجُلٍ عَنْ أَبِيهِ
हमरा सभकेँ [अबू सईद अल अस्याज] कहलनि अछि; हमरा सब के [उकबाह बिन खालिद] के [इब्न अबू लैला] स ['अमरू बिन मुर्राह] स [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स [अब्दुल्लाह बिन जैद] स कहलक अछि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ दू बार, दू बार नमाज आरू इकामा दोनों में' । अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्लाह बिन जैद केरऽ ई हदीस [वाकी'] न॑ [अल अ'मासी] स॑ [अमरू बिन मुर्राह] स॑ [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स॑ बतैन॑ छै । ओ कहलनि; ' [मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सब हमरा सब स रिवायत केलनि जे [अब्दुल्लाह बिन जैद] सुतल समय नमाज के आह्वान के बारे में सपना देखलनि'। एम्हर [स्यूबाह] [अम्र बिन मुर्राह] स [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स रिवायत केलथि जे [अब्दुल्लाह बिन जैद] सुतल समय नमाज के आह्वान के सपना देखलनि। आरू ई इब्न अबू लैला केरऽ रिवायत हदीस स॑ भी अधिक प्रामाणिक छै । आ अब्दुर्रहमान सेहो अब्दुल्ला बिन जैद स कहियो नहि सुनलक। किछु विद्वान लोकनि कहलनि जे दुआ के आह्वान दू बेर भेल छल | ई राय सुफियन अतस त्सौरी, बिन अल मुबारक आरू कुफा के लोगऽ न॑ लेलकै । अबू ईसा कहलनि; इब्न अबू लैला मुहम्मद बिन अब्दुररहमान बिन अबू लैला छै, कुफा में जज छेलै, आरू अपनऽ पिता स॑ कहियो हदीस नै सुनलकै । केवल ओ एकटा एहन आदमी सँ सुनलनि जे अपन पिता सँ ई बात सुनौलनि।'
Imam Tirmidzi : 180
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ حَدَّثَنَا الْمُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمُنْعِمِ هُوَ صَاحِبُ السِّقَاءِ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ الْحَسَنِ وَعَطَاءٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِبِلَالٍ يَا بِلَالُ إِذَا أَذَّنْتَ فَتَرَسَّلْ فِي أَذَانِكَ وَإِذَا أَقَمْتَ فَاحْدُرْ وَاجْعَلْ بَيْنَ أَذَانِكَ وَإِقَامَتِكَ قَدْرَ مَا يَفْرُغُ الْآكِلُ مِنْ أَكْلِهِ وَالشَّارِبُ مِنْ شُرْبِهِ وَالْمُعْتَصِرُ إِذَا دَخَلَ لِقَضَاءِ حَاجَتِهِ وَلَا تَقُومُوا حَتَّى تَرَوْنِيحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ عَبْدِ الْمُنْعِمِ نَحْوَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرٍ هَذَا حَدِيثٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ عَبْدِ الْمُنْعِمِ وَهُوَ إِسْنَادٌ مَجْهُولٌ وَعَبْدُ الْمُنْعِمِ شَيْخٌ بَصْرِيٌّ
हमरा सब के कहलक अछि [अहमद बिन अल हसन] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [अल मुअल्ला बिन असद] कहलनि; हमरा सभ [अब्दुल मुन'इम] केँ कहि देने छथि - ओ पात्रक मालिक छथि - ओ कहलनि; हमरा सब के [अल हसन] स [याह्या बिन मुस्लिम] आ [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स ['अथा`] कहने छथि; अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बिलाल स कहलखिन: हे बिलाल, अगर अहां नमाज के आह्वान करब त अपन नमाज के आह्वान धीमा करू, आ अगर अहां इकामत करब तखन एकरा तेज करू। अपन नमाज आ अपन इकमात के बीच के दूरी के बस ओहि व्यक्ति के बनाउ जे जा धरि भोजन समाप्त नै क लैत अछि, जे व्यक्ति ता धरि पीबैत अछि जा धरि ओ पीना समाप्त नहि क लैत अछि, जे व्यक्ति अपना के राहत दैत अछि ओ अपन पेशाब पूरा क सकैत अछि, आ जा धरि अहाँ हमरा नहि देखब ता धरि ठाढ़ नहि होउ'। हमरा सब के कहने अछि [अब्द बिन हुमैद] कहलनि; हमरा सब के [यूनुस बिन मुहम्मद] के [अब्दुल मुनइम] स एकटा सार्थक हदीस के संग बतेने छथि'। अबू ईसा कहलनि; 'हमरा लोकनि केँ एहि मार्ग सँ छोड़ि जाबीरक एहि हदीस केँ नहि बुझल अछि, अर्थात अब्दुल मुनीम केर हदीस सँ जिनकर सनाद मझुल - अज्ञात - अछि।' आ अब्दुल मुनीम बसरा के शेख छलाह।'