इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)
Free Download / Download

Imam Tirmidzi (الإمام الترمذي) - 3891 Hadith

Hadith

Imam Tirmidzi : 121

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ وَالْحَسَنُ بْنُ عَرَفَةَ قَالَا حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَقْرَأْ الْحَائِضُ وَلَا الْجُنُبُ شَيْئًا مِنْ الْقُرْآنِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ إِسْمَعِيلَ بْنِ عَيَّاشٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا تَقْرَأْ الْجُنُبُ وَلَا الْحَائِضُ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ مِثْلِ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالُوا لَا تَقْرَأْ الْحَائِضُ وَلَا الْجُنُبُ مِنْ الْقُرْآنِ شَيْئًا إِلَّا طَرَفَ الْآيَةِ وَالْحَرْفَ وَنَحْوَ ذَلِكَ وَرَخَّصُوا لِلْجُنُبِ وَالْحَائِضِ فِي التَّسْبِيحِ وَالتَّهْلِيلِ قَالَ و سَمِعْت مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَعِيلَ يَقُولُ إِنَّ إِسْمَعِيلَ بْنَ عَيَّاشٍ يَرْوِي عَنْ أَهْلِ الْحِجَازِ وَأَهْلِ الْعِرَاقِ أَحَادِيثَ مَنَاكِيرَ كَأَنَّهُ ضَعَّفَ رِوَايَتَهُ عَنْهُمْ فِيمَا يَنْفَرِدُ بِهِ وَقَالَ إِنَّمَا حَدِيثُ إِسْمَعِيلَ بْنَ عَيَّاشٍ عَنْ أَهْلِ الشَّأْمِ و قَالَ أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ إِسْمَعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ أَصْلَحُ مِنْ بَقِيَّةَ وَلِبَقِيَّةَ أَحَادِيثُ مَنَاكِيرُ عَنْ الثِّقَاتِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ قَال سَمِعْتُ أَحْمَدَ بْنَ حَنْبَلٍ يَقُولُ ذَلِكَ

हमरा सभकेँ [अली बिन हुजर] आ [अल हसन बिन अराफाह] दुनू गोटे कहलनि; हमरा सब के कहने छैथ जे [इस्माइल बिन अय्यासी] स [मूसा बिन उकबाह] स [नफी'] स [इब्न उमर] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स, ओ कहलनि: 'मासिक धर्म आ जुनुब के कुरान स किछु नहि पढ़बाक चाही'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अली सँ एकटा हदीस सेहो अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'हमरा सब के इब्न उमर के हदीस के बारे में पता नै छै, सिवाय इस्माइल बिन अय्यासी के हदीस स, मूसा बिन उकबाह स, नाफी स', इब्न उमर स, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स, ओ कहलनि, 'एक जुनब आ मासिक धर्म के महिला के कुरान नै पढ़बाक चाही'। ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तबीईन आरू हुनका बाद के साथी सब जेना कि सूफियन अतस त्सौरी, बिन अल मुबारक, स्याफीई, अहमद आरू इशाक के साथी म॑ स॑ अधिकांश विद्वानऽ के छै । कहै छै, मासिक धर्म के महिला आरू जुनब के कुरान के कुछ भी पढ़ै के अनुमति नै छै, सिवाय एक आयत के अंत, या एक अक्षर, आरू ऐन्हऽ तरह के। मुदा, ई सब जुनब लोक आ मासिक धर्म के महिला के तसबीह -सुभानल्लाह- आ तहलील -ला इलाहा इल्ललाह-' पढ़य में सुविधा प्रदान करैत अछि | अबू ईसा कहलनि; 'हम मुहम्मद बिन इस्माइल के कहैत सुनने रही; 'सत्ते, इस्माइल बिन अय्यासी द्वारा हिजाज के लोग आरू इराक के लोगऽ स॑ बहुत बुरा हदीस बतैलऽ गेलऽ छै, ऐन्हऽ लगै छै कि हुनी इस्माइल बिन अय्यासी के इतिहास क॑ ओकरा सिनी स॑ कमजोर करी देलकै, अगर वू असगरे बतैलकै' । ओ कहलनि; 'हालांकि इस्माइल बिन अय्यासी के हदीस सीरिया के लोगऽ के छै' । अहमद बिन हम्बल कहलनि; 'इस्माइल बिन अय्यासी बकिया स॑ बेहतर छै, कैन्हेंकि बकिया के पास बुरा हदीस छै जेकरा वू सिक्का वाला लोगऽ स॑ बतैलकै - जेकरा प॑ भरोसा करलऽ जाब॑ सकै छै -' । अबू ईसा कहलनि; 'अहमद बिन अल हसन हमरा एकटा कथा सुनौलनि, ओ कहलनि; 'हम अहमद बिन हम्बल के ई कहैत सुनने रही'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 122

حَدَّثَنَا بُنْدَارٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ مِنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا حِضْتُ يَأْمُرُنِي أَنْ أَتَّزِرَ ثُمَّ يُبَاشِرُنِيقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ وَمَيْمُونَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ

हमरा सभकेँ कहि देने अछि [बुन्दर] कहलक; हमरा सब के [अब्दुररहमान बिन महदी] के [सुफयान] स [मंसूर] स [इब्राहिम] स [अल असवद] स ['ऐस्यह] स कहने छथि ओ कहलनि; 'जखन हम मासिक धर्म मे रही तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा कपड़ा पहिरबाक आदेश देलनि, तखन ओ हमरा दुलार केलनि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे उम्म सलामा आ मैमुना सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; ऐश्याहक हदीस हसन प्रामाणिक अछि। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ ताबीईन के साथी सब में स बहुत रास विद्वान के ई राय अछि | ई राय स्याफी, अहमद आ इशाक' के सेहो छैन्ह ।

Hadith

Imam Tirmidzi : 123

حَدَّثَنَا عَبَّاسٌ الْعَنْبَرِيُّ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ صَالِحٍ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ حَرَامِ بْنِ مُعَاوِيَةَ عَنْ عَمِّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدٍ قَالَسَأَلْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ مُوَاكَلَةِ الْحَائِضِ فَقَالَ وَاكِلْهَاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَأَنَسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ لَمْ يَرَوْا بِمُوَاكَلَةِ الْحَائِضِ بَأْسًا وَاخْتَلَفُوا فِي فَضْلِ وَضُوئِهَا فَرَخَّصَ فِي ذَلِكَ بَعْضُهُمْ وَكَرِهَ بَعْضُهُمْ فَضْلَ طَهُورِهَا

[अब्बास अल अनबरी] आ [मुहम्मद बिन अब्द अल अ'ला] हमरा सभकेँ कहने छथि; [अब्दुररहमान बिन महदी] हमरा सभकेँ कहने छथि; [मुअवियाह बिन सालिह] हमरा सब के [अल अला` बिन अल हरिथ] स [हरम बिन मुअवियाह] स अपन चाचा [अब्दुल्लाह बिन सअद] स कहने छथि ओ कहलनि; 'हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स मासिक धर्म के महिला के संग भोजन करय के बारे में पूछने छलहुं, त ओ कहलनि: 'ओकरा संग भोजन करू'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे 'ऐशा आ अनस' सँ एकटा कथ्य सेहो अछि | अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्लाह बिन स'द द्वारा रिवायित ई हदीस हसन घरीब अछि।' ई बहुसंख्यक विद्वानक विचार छनि, हुनका लोकनिक विचार छनि जे मासिक धर्मक संग भोजन करब ठीक अछि । मुदा, वजूदक शेष जलक विषय मे दुनू मे मतभेद अछि, किछु गोटे रियायत दैत छथि त कियो मकरूह मानैत छथि' |

Hadith

Imam Tirmidzi : 124

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ ثابِتِ بْنِ عُبَيْدٍ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ قَالَقَالَتْ لِي عَائِشَةُ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَاوِلِينِي الْخُمْرَةَ مِنْ الْمَسْجِدِ قَالَتْ قُلْتُ إِنِّي حَائِضٌ قَالَ إِنَّ حَيْضَتَكِ لَيْسَتْ فِي يَدِكِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ لَا نَعْلَمُ بَيْنَهُمْ اخْتِلَافًا فِي ذَلِكَ بِأَنْ لَا بَأْسَ أَنْ تَتَنَاوَلَ الْحَائِضُ شَيْئًا مِنْ الْمَسْجِدِ

हमरा सभकेँ कहि देने अछि [कुतैबा] कहलक; हमरा सब के [उबैदा बिन हुमैद] के [अल अ'मासी] स [थाबीत बिन उबैद] स [अल कासिम बिन मुहम्मद] स कहलक अछि ओ कहलनि; ' ['ऐस्याह] हमरा कहलनि, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर हमरा कहलनि: 'मस्जिद सँ एकटा छोट सन चटाई ल' लिअ', 'ऐसिया कहलनि; 'तखन हम कहलियनि; 'हमरा मासिक धर्म भ' रहल अछि,' ओ कहलनि: 'सत्ते, अहाँक मासिक धर्मक खून अहाँक हाथ मे नहि अछि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे इब्न उमर आ अबू हुरैरा सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; ऐश्याहक हदीस हसन प्रामाणिक अछि। ई बहुसंख्यक वैज्ञानिक के विचार छै, आरू हमरा सब के ई बात के जानकारी नै छै कि ई बात पर हुनकऽ मतभेद छै । अर्थात कि मासिक धर्म में महिला मस्जिद के भीतर से कुछ ले सकै छै'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 125

حَدَّثَنَا بُنْدَارٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ وَبَهْزُ بْنُ أَسَدٍ قَالُوا حَدَّثَنَا حَمَادُ بْنُ سَلَمَةِ عَنْ حَكِيمٍ الْأَثْرَمِ عَنْ أَبِي تَمِيمَةَ الهُجَيْمِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَتَى حَائِضًا أَوْ امْرَأَةً فِي دُبُرِهَا أَوْ كَاهِنًا فَقَدْ كَفَرَ بِمَا أُنْزِلَ عَلَى مُحَمَّدٍ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَقَالَ أَبُو عِيسَى لَا نَعْرِفُ هَذَا الْحَدِيثَ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ حَكِيمٍ الْأَثْرَمِ عَنْ أَبِي تَمِيمَةَ الْهُجَيْمِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَإِنَّمَا مَعْنَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ عَلَى التَّغْلِيظِ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَتَى حَائِضًا فَلْيَتَصَدَّقْ بِدِينَارٍ فَلَوْ كَانَ إِتْيَانُ الْحَائِضِ كُفْرًا لَمْ يُؤْمَرْ فِيهِ بِالْكَفَّارَةِ وَضَعَّفَ مُحَمَّدٌ هَذَا الْحَدِيثَ مِنْ قِبَلِ إِسْنَادِهِ وَأَبُو تَمِيمَةَ الْهُجَيْمِيِّ اسْمُهُ طَرِيفُ بْنُ مُجَالِدٍ

हमरा सभकेँ कहि देने अछि [बुन्दर] कहलक; हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद] आ [अब्दुररहमान बिन महदी] आ [बहज बिन असद]केँ कहने छथि जे ओ सभ कहलनि; हमरा सब के [हम्मद बिन सलामाह] स [हकीम अल अत्सरम] स [अबू तमीमाह अल हुजैमी] स [अबू हुरैराह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहने छथि, ओ कहने छथि: 'जे कियो मासिक धर्म के महिला के संग संभोग करैत अछि, या गुदा स कोनो महिला के संग यौन संबंध रखैत अछि, या कोनो शामन के पास जाइत अछि तखन ओ ओहि बात पर काफर क देने अछि जेकरा पर उतारल गेल छल मुहम्मद शल्लल्लाहु 'अलैहि वसल्लम'। अबू ईसा कहलनि; 'हमरा सब के ई हदीस के जानकारी नै छै सिवाय हकीम अल अत्राम के हदीस स, अबू तमीमाह अल हुजैमी स, अबू हुरैरा स।' आरू वैज्ञानिकऽ के अनुसार ई हदीस केरऽ एकमात्र मतलब बोझ के रूप म॑ छै । नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिवायत अछि, ओ कहलनि जे, जे कियो मासिक धर्म के महिला के पास आबय - ओकरा संग शारीरिक संबंध बनाबय, ओकरा एक दिनार स दान देबाक चाही’। यदि मासिक धर्म के महिला के पास आना अविश्वास के काम छै त ओकरा अपन कफराह के रूप में दक्षिणा देबाक आदेश नै देल जेतै ! मुदा मुहम्मद एहि हदीस के अपन सनाद पक्ष स कमजोर क देलखिन। आ अबू तमिमाह अल हुजैमी के नाम सरीफ बिन मुजालिद छै'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 126

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ عَنْ خُصَيْفٍ عَنْ مِقْسَمٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الرَّجُلِ يَقَعُ عَلَى امْرَأَتِهِ وَهِيَ حَائِضٌ قَالَ يَتَصَدَّقُ بِنِصْفِ دِينَارٍ

हमरा सभकेँ कहने छथि [अली बिन हुजर] कहलनि; हमरा सब [शरीक] के [खुशैम] स [मिकसम] स [इब्न अब्बास] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एकटा एहन आदमी के बारे में रिपोर्ट केने छथि जे हुनकर पत्नी के पास मासिक धर्म के दौरान आयल छल, ओ कहलनि: 'जे कियो अपन पत्नी के पास आबय जे मासिक धर्म में अछि, ओकरा आधा दिनार के संग दान देबाक चाही'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 127

حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ أَخْبَرَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى عَنْ أَبِي حَمْزَةَ السُّكَّرِيِّ عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ عَنْ مِقْسَمٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ دَمًا أَحْمَرَ فَدِينَارٌ وَإِذَا كَانَ دَمًا أَصْفَرَ فَنِصْفُ دِينَارٍقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ الْكَفَّارَةِ فِي إِتْيَانِ الْحَائِضِ قَدْ رُوِيَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ مَوْقُوفًا وَمَرْفُوعًا وَهُوَ قَوْلُ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ قَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ يَسْتَغْفِرُ رَبَّهُ وَلَا كَفَّارَةَ عَلَيْهِ وَقَدْ رُوِيَ نَحْوُ قَوْلِ ابْنِ الْمُبَارَكِ عَنْ بَعْضِ التَّابِعِينَ مِنْهُمْ سَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ وَإِبْرَاهِيمُ النَّخَعِيُّ وَهُوَ قَوْلُ عَامَّةِ عُلَمَاءِ الْأَمْصَارِ

हमरा सब के कहने छथि [अल हुसैन बिन हुरैट्स] कहलनि; हमरा सब [अल फद्दल बिन मूसा] के [अबू हमजाह अस सुक्करी] स [अब्दुल करीम] स [मिकसम] स [इब्न अब्बास] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिपोर्ट केने छथि, ओ कहने छथि: 'जँ खून लाल अछि तखन जुर्माना एक दिनार अछि, आ जँ पीला अछि तखन जुर्माना आधा दिनार अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'मासिक धर्म के महिला के साथ यौन संबंध के जुर्माना के मुद्दा के बात करै वाला हदीस इब्न अब्बास न॑ मौकुफ आरू मरफू के इतिहास के साथ बतैन॑ छै' । ई बात किछु वैज्ञानिक कहैत छथि । आ ई राय अहमद आ इशाक सेहो लेलक। बिन अल मुबारक कहलनि; 'अपन रब्ब सँ माफी माँगय आ कोनो कफराह नहि'। बिन अल मुबारक केरऽ ई तरह के कहावत भी कई ताबीईन विद्वानऽ द्वारा बतैलऽ गेलऽ छेलै, जेना कि सईद बिन जुबैर आरू इब्राहिम अन नखाई । आ ई बात दुनिया के अधिकांश विद्वान कहैत छथि ।

Hadith

Imam Tirmidzi : 128

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍأَنَّ امْرَأَةً سَأَلَتْ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الثَّوْبِ يُصِيبُهُ الدَّمُ مِنْ الْحَيْضَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حُتِّيهِ ثُمَّ اقْرُصِيهِ بِالْمَاءِ ثُمَّ رُشِّيهِ وَصَلِّي فِيهِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَأُمِّ قَيْسِ بْنتِ مِحْصَنٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَسْمَاءَ فِي غَسْلِ الدَّمِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ اخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الدَّمِ يَكُونُ عَلَى الثَّوْبِ فَيُصَلِّي فِيهِ قَبْلَ أَنْ يَغْسِلَهُ قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ إِذَا كَانَ الدَّمُ مِقْدَارَ الدِّرْهَمِ فَلَمْ يَغْسِلْهُ وَصَلَّى فِيهِ أَعَادَ الصَّلَاةَ و قَالَ بَعْضُهُمْ إِذَا كَانَ الدَّمُ أَكْثَرَ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ أَعَادَ الصَّلَاةَ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَلَمْ يُوجِبْ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ وَغَيْرِهِمْ عَلَيْهِ الْإِعَادَةَ وَإِنْ كَانَ أَكْثَرَ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ و قَالَ الشَّافِعِيُّ يَجِبُ عَلَيْهِ الْغَسْلُ وَإِنْ كَانَ أَقَلَّ مِنْ قَدْرِ الدِّرْهَمِ وَشَدَّدَ فِي ذَلِكَ

हमरा सभकेँ कहने छथि [इब्न अबू उमर] कहलनि; हमरा सभकेँ [सुफयान बिन उयैनह] [हिस्याम बिन उर्वाह] सँ [फतिमा बिंत अल मुंडिर] सँ [अस्मा बिंत अबू बकर] सँ कहलक अछि; 'एक महिला नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स मासिक धर्म के खून स दागदार कपड़ा के बारे में पूछलखिन?' तखन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'कपड़ा रगड़ू, फेर ओकरा भीजाउ आ पानि सँ धोउ, तकर बाद ओहि सँ नमाज पढ़ू'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू हुरैरा आ उम्म कैस बिंत मिहशान सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'मासिक धर्म के खून धोबै के बारे में असमा के हदीस हसन प्रामाणिक छै।' कपड़ा पर चढ़ी क॑ धोबै स॑ पहल॑ प्रार्थना लेली पहनै वाला खून के बारे म॑ विद्वानऽ के मतभेद छै । तबी'इन के किछु विद्वान कहलनि; 'जँ खून दिरहमक आकारक हो, आ ओकरा धोबासँ पहिने पहिरि दैत अछि, तखन ओकरा अपन नमाज दोहराबय पड़तैक'। जखन कि किछु गोटे कहलनि; 'जँ खून दिरहम सँ पैघ अछि तखन ओकरा नमाज दोहराबय पड़तैक'। ई राय सुफियन अतस त्सौरी आरू बिन अल मुबारक के पास छेलै । मुदा, ताबीइन आ किछु आओर विद्वान लोकनि कें नमाज दोहराबय के आवश्यकता नहिं छलनि, भले खून एकटा दिरहम सं बेसी - पैघ - हो. ई राय अहमद आ इशाक के छल। स्याफी'ई कहलक; 'एकरा धोना अनिवार्य छै भले ही खून दिरहम के आकार स॑ कम होय' । आ ओ तकर पालन केलनि'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 129

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ حَدَّثَنَا شُجَاعُ بْنُ الْوَلِيدِ أَبُو بَدْرٍ عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ الْأَعْلَى عَنْ أَبِي سَهْلٍ عَنْ مُسَّةَ الْأَزْدِيَّةِ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ قَالَتْكَانَتْ النُّفَسَاءُ تَجْلِسُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْبَعِينَ يَوْمًا فَكُنَّا نَطْلِي وُجُوهَنَا بِالْوَرْسِ مِنْ الْكَلَفِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ أَبِي سَهْلٍ عَنْ مُسَّةَ الْأَزْدِيَّةِ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ وَاسْمُ أَبِي سَهْلٍ كَثِيرُ بْنُ زِيَادٍ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى ثِقَةٌ وَأَبُو سَهْلٍ ثِقَةٌ وَلَمْ يَعْرِفْ مُحَمَّدٌ هَذَا الْحَدِيثَ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ أَبِي سَهْلٍ وَقَدْ أَجْمَعَ أَهْلُ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ عَلَى أَنَّ النُّفَسَاءَ تَدَعُ الصَّلَاةَ أَرْبَعِينَ يَوْمًا إِلَّا أَنْ تَرَى الطُّهْرَ قَبْلَ ذَلِكَ فَإِنَّهَا تَغْتَسِلُ وَتُصَلِّي فَإِذَا رَأَتْ الدَّمَ بَعْدَ الْأَرْبَعِينَ فَإِنَّ أَكْثَرَ أَهْلِ الْعِلْمِ قَالُوا لَا تَدَعُ الصَّلَاةَ بَعْدَ الْأَرْبَعِينَ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ الْفُقَهَاءِ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ وَيُرْوَى عَنْ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ أَنَّهُ قَالَ إِنَّهَا تَدَعُ الصَّلَاةَ خَمْسِينَ يَوْمًا إِذَا لَمْ تَرَ الطُّهْرَ وَيُرْوَى عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ وَالشَّعْبِيِّ سِتِّينَ يَوْمًا

हमरा सब के कहने छथि [नशर बिन अली अल जहदलामी] कहलनि; हमरा सब के [स्यूजा’ बिन अल वलीद अबू बदर] स [अली बिन अब्दुल अ’ला] स [अबू सहल] स [मुसाह अल अज़दिया] स [उम्मू सलामा] स कहलक अछि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में, जे महिला सब एखनहि बच्चा के जन्म देने छलीह, चालीस दिन तक मौन में बैसल छलीह, हम सब अपन चेहरा पर सना - एक प्रकार के पौधा - स रंगलौं, कारण कारी रंग छल'। अबू ईसा कहलनि; 'ई घरीब हदीस छै, हमरा सब के एकरा अबू सहल के हदीस के अलावा नै पता छै, उम्म सलाह स मुसाह अल अज़दिया स'। आ अबू सहल के नाम कथिर बिन जियाद छै। एहि मामला मे मुहम्मद बिन इस्माइल कहलनि; 'अली बिन अब्दुल अ'ला आ अबू सहल भरोसेमंद लोक छैथ'। आ मुहम्मद के ई हदीस के सिवाय अबू सहल के हदीस के अलावा नै छल। विद्वान सब एहि बात पर सहमत छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी, ताबीइन आ हुनका बाद आयल लोक सब एहि बात पर सहमत छथि जे जे महिला बच्चा के जन्म देने होथि ओ चालीस दिन तक नमाज नहि पढ़ि सकैत छथि, जाबत तक ओ ताहि सं पहिने शुद्ध नहि भ गेल होथि, जाहि स्थिति में ओकरा स्नान आ नमाज जरूर करब। जँ चालीस दिनक बाद खून देखैत छथि तखन किछु विद्वान लोकनि कहलनि जे चालीस दिनक बाद हुनका नमाज छोड़बाक अनुमति नहि छनि | ई बात बहुसंख्यक फुकाहा जेना सुफियन अतस थाउरी, बिन अल मुबारक, स्याफीई, अहमद आ इशाक के राय अछि | आरू अल हसन अल बसरी स॑ भी रिवायत छै, हुनी कहलकै, 'सत्ते, जे महिला बच्चा पैदा करी चुकलऽ छै, वू पचास दिन तलक नमाज नै करै छै अगर वू ई नै देखै छै कि वू शुद्ध होय गेलऽ छै ।' आ ई ‘अता बिन अबू रबाह आ ऐश स्या’बी सँ सेहो रिवायत अछि; जे साठि दिन अछि।'

Hadith

Imam Tirmidzi : 130

حَدَّثَنَا بُنْدَارٌ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَطُوفُ عَلَى نِسَائِهِ فِي غُسْلٍ وَاحِدٍقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي رَافِعٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَطُوفُ عَلَى نِسَائِهِ بِغُسْلٍ وَاحِدٍ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْهُمْ الْحَسَنُ الْبَصْرِيُّ أَنْ لَا بَأْسَ أَنْ يَعُودَ قَبْلَ أَنْ يَتَوَضَّأَ وَقَدْ رَوَى مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ هَذَا عَنْ سُفْيَانَ فَقَالَ عَنْ أَبِي عُرْوَةَ عَنْ أَبِي الْخَطَّابِ عَنْ أَنَسٍ وَأَبُو عُرْوَةَ هُوَ مَعْمَرُ بْنُ رَاشِدٍ وَأَبُو الْخَطَّابِ قَتَادَةُ بْنُ دِعَامَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَرَوَاهُ بَعْضُهُمْ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يُوسُفَ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ ابْنِ أَبِي عُرْوَةَ عَنْ أَبِي الْخَطَّابِ وَهُوَ خَطَأٌ وَالصَّحِيحُ عَنْ أَبِي عُرْوَةَ

हमरा सभकेँ कहने छथि [बुन्दर मुहम्मद बिन बस्स्यार] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [अबू अहमद] कहलनि; हमरा सभकेँ [सुफयान] [मा'मार]सँ [कतादह]सँ [अनास]सँ कहलक अछि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर अपन पत्नी के संग बारी-बारी स एक स्नान में बैसल छलाह'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू रफी सँ एकटा रिवायत सेहो अछि''। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह छै, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक स्नान में बारी-बारी स अपन सब पत्नी के संग बारी-बारी स'। ई बात बहुतो विद्वानक विचार छनि, जाहि मे अल हसन अल बशरी सेहो छथि, जे ककरो दोहराबय मे कोनो दिक्कत नहिं - संभोग - भले ओ वजूद नहि केने हो'. [मुहम्मद बिन यूसुफ] न॑ ई हदीस क॑ [सूफयान] स॑ बतैलकै, -अबू उर्वाह न॑ अबू अल खथथब स॑ कहलकै-, [अनास] स॑, अबू उरवाह -ओह मा’मर बिन रशीद छै-, आरू अबू अल खथथब कतदाह बिन दिअमाह स॑ कहलकै । अबू ईसा कहलनि; 'ओहि मे सँ किछु मुहम्मद बिन यूसुफ सँ, सूफियान सँ, इब्न अबू उर्वाह सँ अबू अल खथथब सँ रिवायत केने छथि' |

Hadith

Imam Tirmidzi : 131

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ عَنْ عَاصِمٍ الْأَحْوَلِ عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا أَتَى أَحَدُكُمْ أَهْلَهُ ثُمَّ أَرَادَ أَنْ يَعُودَ فَلْيَتَوَضَّأْ بَيْنَهُمَا وُضُوءًاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عُمَرَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي سَعِيدٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ و قَالَ بِهِ غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ قَالُوا إِذَا جَامَعَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ ثُمَّ أَرَادَ أَنْ يَعُودَ فَلْيَتَوَضَّأْ قَبْلَ أَنْ يَعُودَ وَأَبُو الْمُتَوَكِّلِ اسْمُهُ عَلِيُّ بْنُ دَاوُدَ وَأَبُو سَعِيدٍ الْخُدْرِيُّ اسْمُهُ سَعْدُ بْنُ مَالِكِ بْنِ سِنَانٍ

[हन्नाद] हमरा सभकेँ बतौने छथि; [हफस बिन घियात्स] हमरा सब के [‘अशिम अल अहवाल] स [अबू अल मुतवक्किल] स [अबू सईद अल खुदरी] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिवायत केने छथि, ओ कहने छथि: ‘अगर अहाँ सब में स कियो अपन पत्नी के पास जा क एकरा दोहराबय चाहैत छथि त हुनका सब के बीच वजूद करय दियौन’। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे उमर सँ एकटा रिवायत सेहो अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'अबू सईद द्वारा रिवायित ई हदीस हसन सहीह अछि।' ई उमर बिन अल खथथब के राय छै। आ विद्वान मे सँ किछुए गोटे सेहो ई मत नहि रखैत छथि, कहैत छथि जे जँ कोनो पुरुष अपन पत्नीक संग संभोग करैत छथि आ फेर दोहराबय चाहैत छथि तखन पहिने वजूद करथि’ | अबू अल मुतावक्किल के नाम अली बिन दाऊद छै। जखन कि अबू सईद अल खुदरी के नाम सअद बिन मालिक बिन सिनान' अछि |

Hadith

Imam Tirmidzi : 132

حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ قَالَأُقِيمَتْ الصَّلَاةُ فَأَخَذَ بِيَدِ رَجُلٍ فَقَدَّمَهُ وَكَانَ إِمَامَ قَوْمِهِ وَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا أُقِيمَتْ الصَّلَاةُ وَوَجَدَ أَحَدُكُمْ الْخَلَاءَ فَلْيَبْدَأْ بِالْخَلَاءِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَثَوْبَانَ وَأَبِي أُمَامَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ هَكَذَا رَوَى مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَيَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ وَغَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ الْحُفَّاظِ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ وَرَوَى وُهَيْبٌ وَغَيْرُهُ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ قَالَا لَا يَقُومُ إِلَى الصَّلَاةِ وَهُوَ يَجِدُ شَيْئًا مِنْ الْغَائِطِ وَالْبَوْلِ وَقَالَا إِنْ دَخَلَ فِي الصَّلَاةِ فَوَجَدَ شَيْئًا مِنْ ذَلِكَ فَلَا يَنْصَرِفْ مَا لَمْ يَشْغَلْهُ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ لَا بَأْسَ أَنْ يُصَلِّيَ وَبِهِ غَائِطٌ أَوْ بَوْلٌ مَا لَمْ يَشْغَلْهُ ذَلِكَ عَنْ الصَّلَاةِ

हमरा सभकेँ [हन्नाद बिन अस सारी] कहलनि अछि; हमरा सभकेँ [अबू मुअवियाह] [हिसियाम बिन उर्वाह] सँ [अपन पिता] सँ [अब्दुल्लाह बिन अल अरकाम] सँ कहने छथि ओ कहलनि; 'इकामाह घोषित भ' गेल छल, तखन ओ एकटा आदमीक हाथ पकड़ि ओकरा आगू आबय के आदेश देलक, भले ओ अपन लोकक इमाम हो. तखन ओ कहलनि; 'हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही: 'जँ नमाज कहल गेल अछि, आ अहाँ सभ मे सँ कियो शौचालय जेबाक इच्छा रखैत अछि, तखन ओकरा पहिने शौचालय जाय दियौक'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे 'ऐस्याह, अबू हुरैरा, त्सौबान आ अबू उमामा' सँ सेहो इतिहास अछि | अबू ईसा कहलनि; 'अब्दुल्लाह बिन अल अरकाम के हदीस हसन के प्रामाणिक हदीस छै।' एहि तरहेँ [मलिक बिन अनस] आ [याह्या बिन सईद अल कथथान] आ रटनिहार मे सँ किछुए नहि - हदीस विशेषज्ञ - [हिशाम बिन उरवाह] सँ [हुनकर पिता] सँ [अब्दुल्लाह बिन अल अरकाम] सँ रिवायत केने छथि | [वुहैब] आरू अन्य लोगऽ न॑ भी [हिशाम बिन उर्वाह] स॑ [अपनऽ पिता] स॑ [एक आदमी] स॑ [अब्दुल्लाह बिन अल अर्कम] स॑ बतैलकै । ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू ताबीइन केरऽ एक साथी केरऽ ही नै छै । ई राय अहमद आरू इशाक के भी छेलै, वू कहलकै, 'जदि व्यक्ति क॑ शौच या पेशाब करै के आग्रह महसूस होय छै त॑ नमाज नै करै के चाही ।' ओ सभ इहो कहलक जे जँ ओ नमाज पढ़बा लेल ठाढ़ भ' गेल छथि त' जा धरि प्रार्थना हुनका मे बाधा नहि पहुँचबैत छनि ता धरि हुनका अपन प्रार्थना तोड़य नहि पड़तनि।' किछु विद्वान लोकनि कहलनि जे, 'शौच वा पेशाबक अवस्था मे नमाज करय मे कोनो हर्ज नहि, जाबत धरि ओ नमाज मे बाधा नहि पहुँचबैत अछि।'

Hadith

Imam Tirmidzi : 133

حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أُمِّ وَلَدٍ لِعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ قَالَتْ قُلْتُ لِأُمِّ سَلَمَةَإِنِّي امْرَأَةٌ أُطِيلُ ذَيْلِي وَأَمْشِي فِي الْمَكَانِ الْقَذِرِ فَقَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُطَهِّرُهُ مَا بَعْدَهُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا نَتَوَضَّأُ مِنْ الْمَوْطَإِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ قَالُوا إِذَا وَطِيءَ الرَّجُلُ عَلَى الْمَكَانِ الْقَذِرِ أَنَّهُ لَا يَجِبُ عَلَيْهِ غَسْلُ الْقَدَمِ إِلَّا أَنْ يَكُونَ رَطْبًا فَيَغْسِلَ مَا أَصَابَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى وَرَوَى عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أُمِّ وَلَدٍ لِهُودِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ وَهُوَ وَهَمٌ وَلَيْسَ لِعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ ابْنٌ يُقَالَ لَهُ هُودٌ وَإِنَّمَا هُوَ عَنْ أُمِّ وَلَدٍ لِإِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ وَهَذَا الصَّحِيحُ

हमरा सभकेँ कहने छथि [अबू राजा` कुतैबाह] कहलनि; हमरा सब के [मलिक बिन अनस] के [मुहम्मद बिन उमरह] स [मुहम्मद बिन इब्राहिम] स [अब्दुररहमान बिन औफ के महिला गुलाम] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम एक बेर [उम्म सलामाह] केँ कहने रही, 'सत्ते, हम एकटा एहन महिला छी जिनकर कपड़ा नमहर अछि, आ हम गंदा जगह पर चलैत छी?' तखन ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कहने छलाह जे कपड़ा ओकर बाद माटि के संग शुद्ध होयत'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अब्दुल्ला बिन मसूद सँ सेहो इतिहास अछि, ओ कहलनि; 'हम एक बेर गंदा जगह पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संग छलहुं, आ हम सब वज़ूद नहि केलहुं।' अबू ईसा कहलनि; "वैज्ञानिक न सिर्फ ऐन्हऽ सोचै छै, बल्कि कहै छै कि गंदा जमीन प॑ कदम रखै वाला क॑ पैर के तलवा नै धोबै के जरूरत छै जब॑ तलक कि गंदगी अभी भी भीजलऽ नै होय जाय छै, ई लेली ओकरा निशान हटाबै के सलाह देलऽ जाय छै ।' अबू ईसा कहलनि; इब्राहिम बिन अब्दुररहमान बिन औफ के गुलाम से उम्म सलामा से, और यह सच्चाई है' |

Hadith

Imam Tirmidzi : 134

حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ الْفَلَّاسُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ عَزْرَةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبْزَى عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَهُ بِالتَّيَمُّمِ لِلْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَمَّارٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَمَّارٍ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ عَلِيٌّ وَعَمَّارٌ وَابْنُ عَبَّاسٍ وَغَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ التَّابِعِينَ مِنْهُمْ الشَّعْبِيُّ وَعَطَاءٌ وَمَكْحُولٌ قَالُوا التَّيَمُّمُ ضَرْبَةٌ لِلْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ وَبِهِ يَقُولُ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْهُمْ ابْنُ عُمَرَ وَجَابِرٌ وَإِبْرَاهِيمُ وَالْحَسَنُ قَالُوا التَّيَمُّمُ ضَرْبَةٌ لِلْوَجْهِ وَضَرْبَةٌ لِلْيَدَيْنِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَمَالِكٌ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ عَمَّارٍ فِي التَّيَمُّمِ أَنَّهُ قَالَ لِلْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَمَّارٍ أَنَّهُ قَالَ تَيَمَّمْنَا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْمَنَاكِبِ وَالْآبَاطِ فَضَعَّفَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ حَدِيثَ عَمَّارٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي التَّيَمُّمِ لِلْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ لَمَّا رُوِيَ عَنْهُ حَدِيثُ الْمَنَاكِبِ وَالْآبَاطِ قَالَ إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ مَخْلَدٍ الْحَنْظَلِيُّ حَدِيثُ عَمَّارٍ فِي التَّيَمُّمِ لِلْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ هُوَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَحَدِيثُ عَمَّارٍ تَيَمَّمْنَا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْمَنَاكِبِ وَالْآبَاطِ لَيْسَ هُوَ بِمُخَالِفٍ لِحَدِيثِ الْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ لِأَنَّ عَمَّارًا لَمْ يَذْكُرْ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَهُمْ بِذَلِكَ وَإِنَّمَا قَالَ فَعَلْنَا كَذَا وَكَذَا فَلَمَّا سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَهُ بِالْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ فَانْتَهَى إِلَى مَا عَلَّمَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ وَالدَّلِيلُ عَلَى ذَلِكَ مَا أَفْتَى بِهِ عَمَّارٌ بَعْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي التَّيَمُّمِ أَنَّهُ قَالَ الْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ فَفِي هَذَا دَلَالَةٌ أَنَّهُ انْتَهَى إِلَى مَا عَلَّمَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَعَلَّمَهُ إِلَى الْوَجْهِ وَالْكَفَّيْنِ قَالَ و سَمِعْت أَبَا زُرْعَةَ عُبَيْدَ اللَّهِ بْنَ عَبْدِ الْكَرِيمِ يَقُولُ لَمْ أَرَ بِالْبَصْرَةِ أَحْفَظَ مِنْ هَؤُلَاءِ الثَّلَاثَةِ عَلِيِّ بْنِ الْمَدِينِيِّ وَابْنِ الشَّاذَكُونِيِّ وَعَمْرِو بْنِ عَلِيٍّ الْفَلَّاسِ قَالَ أَبُو زُرْعَةَ وَرَوَى عَفَّانُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ عَمْرِو بْنِ عَلِيٍّ حَدِيثًا

हमरा सभकेँ रिवायत केने छथि [अबू हफश अमरू बिन अली अल फलास] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [यजीद इब्न ज़ुरै'] कहलनि; हमरा सब के [सईद] के [कतादह] स [अजरा] स [सैद बिन अब्दुररहमान बिन अबजा] स [अपन पिता] स [अम्मर बिन यासिर] स कहलक अछि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका चेहरा आ हाथक हथेली पर तयूम करबाक आदेश देलनि'। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे 'ऐस्याह आ इब्न अब्बास' सँ सेहो इतिहास अछि | अबू ईसा कहलनि; 'ई अम्मर हदीस हसन प्रामाणिक अछि।' एकरऽ कथ्य भी अम्मार स॑ भी अनेक मार्गऽ स॑ करलऽ गेलऽ छै । ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एकटा साथी के नै छै। एहि मे अली, अम्मर, इब्न अब्बास आओर ताबीन मंडली जेना ऐश स्या'बी, 'अथा` आ मखुल सं बहुतो लोक छलाह. ओ सभ कहलक, "तायम्म चेहरा आ दुनू हथेली लेल एक स्ट्रोक अछि।" ई राय अहमद आ इशाक केने छलाह । आरू कुछ विद्वान जेना कि इब्न उमर, जाबीर, इब्राहिम आरू अल हसन न॑ कहलकै, "तयम्मूम चेहरा लेली एक स्ट्रोक आरू कोहनी तक के दोनों हथेली लेली एक स्ट्रोक छै." ई राय सुफियन अतस त्सौरी, मलिक, बिन अल मुबारक आरू स्याफी'ई न॑ लेलकै । तयम्मुम के बारे में हदीस, यानी कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छलाह, "चेहरा आ दुनू हथेली के लेल" सेहो अम्मर सं एकटा आओर तरीका सं रिवायत अछि. ई हदीस अम्मर स॑ भी रिवायत छै, कि हुनी कहलकै: "हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ कंधा आरू बगल तक तायम्मम करी रहलऽ छेलियै।" लेकिन कुछ विद्वान नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स अम्मर के हदीस के कमजोर क दैत छैथ, जे चेहरा आ दुनु हथेली के लेल तायम्मुम के बारे में छै, जखन कि हुनका स कान्ह आ बगल तक तायम्म के हदीस सेहो रिवायत छैन्ह। इशाक बिन इब्राहिम बिन मखलाद अल हंझाली कहलनि; चेहरा आरू हाथऽ के हथेली के लेलऽ तायम्मुम के संबंध म॑ अम्मार केरऽ हदीस एगो ऐसनऽ हदीस छै जे हसन प्रामाणिक छै । एम्हर अम्मर केरऽ हदीस जेकरा म॑ कहलऽ गेलऽ छै कि हम्में एक बार नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ कंधा आरू बगल तक तैमम करलकै’, चेहरा आरू हथेली लेली हदीस स॑ टकराव नै करै छै । कारण अम्मर ई नै बतौलनि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सब के एहन करबाक आदेश देने छलाह | मुदा ओ बस एतबे कहलनि जे 'हम सभ ई आ ई करैत छी'। जखन ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलथि त ओ हुनका अपन चेहरा आ हाथ क हथेली पोछबाक आदेश देलथि, ताहि लेल अंत मे ओ ओ काज केलथि जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सिखबैत छलाह, यानी हुनकर चेहरा आ हाथ क हथेली पोछब। एकरऽ सबूत ई छै कि अम्मार न॑ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ तयमुम के संबंध म॑ फतवा देलकै, कि हुनी कहलकै: ‘-पोंछना- हाथऽ के चेहरा आरू हथेली’ । त एहि मामला मे सबूत इ अछि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जे सिखबैत छलाह, ओ चेहरा आ दुनू हथेली पोछब सिखबैत छलाह'। ओ कहलनि, 'हम अबू ज़ुराह बिन अब्दुल करीम के कहैत सुनलहुं; 'हमरा बसराह शहर में रटै में तीन आदमी: अली बिन अल मदीनी, इब्न असी स्यादजाकुनी आरू 'अमर बिन अली अल फल्लास' स॑ अच्छा ककरो नै देखलऽ गेलऽ छै । अबू ज़ुराह कहलनि; 'अफ्फान बिन मुस्लिम 'अमर बिन अली' सँ एक हदीस बतौलनि अछि |

Hadith

Imam Tirmidzi : 135

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ خَالِدٍ الْقُرَشِيِّ عَنْ دَاودَ بْنِ حُصَيْنٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّهُ سُئِلَ عَنْ التَّيَمُّمِ فَقَالَ إِنَّ اللَّهَ قَالَ فِي كِتَابِهِ حِينَ ذَكَرَ الْوُضُوءَ{ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ }وَقَالَ فِي التَّيَمُّمِ{ فَامْسَحُوا بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُمْ }وَقَالَ{ وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا }فَكَانَتْ السُّنَّةُ فِي الْقَطْعِ الْكَفَّيْنِ إِنَّمَا هُوَ الْوَجْهُ وَالْكَفَّانِ يَعْنِي التَّيَمُّمَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَذِيٌّ صَحِيحٌ

हमरा सभकेँ कहने अछि [याह्या बिन मूसा] कहलनि; हमरा सभकेँ कहने छथि [सैद बिन सुलेमान] कहलनि; हमरा सब [हुसैम] स [मुहम्मद बिन खालिद अल कुरसी] स [दाउद बिन हुशैन] स [इक्रिमाह] स [इब्न अब्बास] स कहलथि अछि जे एक बेर हुनका स तयम्मूम क बारे मे पूछल गेल छल, तखन ओ जवाब देलथि, 'सत्ते, अल्लाह अपन किताब मे वज़ूद क जिक्र करबा काल कहने छथि: '-त अपन चेहरा आ हाथ कोहनी तक धोउ-,' आ अल्लाह तयम्मूम क बारे मे सेहो कहलनि: '-तखन मुँह आ हाथ झाड़ू-'। तखन कहलनि: '-चोर करय बला पुरुष आ चोरी करय बला स्त्री, दुनूक हाथ काटि दियौक-'। अतः सुन्नत के अनुसार हाथ काटला पर हाथ के हथेली छै, आरू तायम्मुम में जे धोलऽ जाय छै, वू चेहरा आरू हथेली छै ।' अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस प्रामाणिक घरीब अछि'।

Hadith

Imam Tirmidzi : 136

حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ عَبْدُ اللَّهِ بْنِ سَعِيدٍ الْأَشَجُّ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ وَعُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ قَالَا حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ وَابْنُ أَبِي لَيْلَى عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلِمَةَ عَنْ عَلِيٍّ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُقْرِئُنَا الْقُرْآنَ عَلَى كُلِّ حَالٍ مَا لَمْ يَكُنْ جُنُبًاقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَلِيٍّ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَبِهِ قَالَ غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ قَالُوا يَقْرَأُ الرَّجُلُ الْقُرْآنَ عَلَى غَيْرِ وُضُوءٍ وَلَا يَقْرَأُ فِي الْمُصْحَفِ إِلَّا وَهُوَ طَاهِرٌ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ

हमरा सब के कहने छथि [अबू सईद अब्दुल्लाह बिन सईद अल अस्याज] कहलनि; हमरा सभ केँ [हफश बिन घियात] आ [उकबाह बिन खालिद] केँ कहने छथि जे ओ सभ कहलनि; हमरा सभ केँ [अल अ'मासी] आ [इब्न अबू लैला] केँ [अमरू बिन मुर्राह] सँ [अब्दुल्लाह बिन सलामाह] सँ [अली] सँ कहलनि अछि ओ कहलनि; 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर मौका पर कुरान पढ़ैत छलाह, जाबत धरि ओ जुनब नहि छलाह'। अबू ईसा कहलनि; 'अली केरऽ ई हदीस एक प्रामाणिक हदीस छै ।' ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ ताबीइन के साथी सब में स बहुत रास वैज्ञानिक विशेषज्ञ सब लैत छथि | ओ सभ कहलक; 'पुरुष बिना वजूद के कुरान पढ़ि सकैत अछि, मुदा जा धरि शुद्ध नहि होयत ता धरि नहि पढ़ि सकैत अछि।' ई राय सुफियन अतस त्सौरी, स्याफी'ई, अहमद आ इशाक' द्वारा लेल गेल छल |

Hadith

Imam Tirmidzi : 137

حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ وَسَعِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمَخْزُومِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَدَخَلَ أَعْرَابِيٌّ الْمَسْجِدَ وَالنَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَالِسٌ فَصَلَّى فَلَمَّا فَرَغَ قَالَ اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي وَمُحَمَّدًا وَلَا تَرْحَمْ مَعَنَا أَحَدًا فَالْتَفَتَ إِلَيْهِ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَقَدْ تَحَجَّرْتَ وَاسِعًا فَلَمْ يَلْبَثْ أَنْ بَالَ فِي الْمَسْجِدِ فَأَسْرَعَ إِلَيْهِ النَّاسُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْرِيقُوا عَلَيْهِ سَجْلًا مِنْ مَاءٍ أَوْ دَلْوًا مِنْ مَاءٍ ثُمَّ قَالَ إِنَّمَا بُعِثْتُمْ مُيَسِّرِينَ وَلَمْ تُبْعَثُوا مُعَسِّرِينَقَالَ سَعِيدٌ قَالَ سُفْيَانُ وَحَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ نَحْوَ هَذَا قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَوَاثِلَةَ بْنِ الْأَسْقَعِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَقَدْ رَوَى يُونُسُ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ

हमरा सब के [इब्न अबू उमर] आ [सैद बिन अब्दुररहमान अल मखज़ूमी] के कहने छथि जे ओ सब कहलनि; हमरा सब के [सुफयान बिन उयैनह] [अज ज़ुहरी] स [सैद बिन अल मुसैयब] स [अबू हुरैरा] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'एकटा गामक अरब मस्जिद मे प्रवेश केलक जखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज पढ़ैत छलाह, गामक अरब तखन नमाज पढ़ैत छल | नमाज पढ़लाक बाद ओ दुआ केलनि जे हे अल्लाह हमरा आ मुहम्मद पर दया करू, आ हमरा सभक संग ककरो सँ प्रेम नहि करू'। तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका दिस घुमि क’ कहलनि: ‘सत्ते अहाँ किछु व्यापक चीज केँ संकुचित क’ देलहुँ अछि’। एकरऽ बाद मस्जिद म॑ पेशाब करलकै जेकरा स॑ लोग तुरंत ओकरा पास पहुँची गेलै, लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ कहलकै कि एकरा एक लोटा पानी स॑ डौस करी दियौ, या हुनी कहलकै: ‘एक लोटा पानी स॑’ । तकर बाद ओ फेर कहलनि: 'सत्ते, अहाँ केँ सहजता देबय लेल पठाओल गेल छल आ कठिनाई देबय लेल नहि पठाओल गेल छल'। [सईद] कहलक; ' [सुफयान] कहलनि; 'हमरा [याह्या बिन सईद] के [अनस बिन मलिक] स एहि तरहे कहने अछि'। ओ कहलनि; "ई अध्याय म॑ अब्दुल्ला बिन मसूद, इब्नू अब्बास आरू वत्सिला बिन अल अस्का केरऽ इतिहास भी छै ।" अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि, आ किछु वैज्ञानिक एहि हदीस के आधार पर नीक काज केने छथि |' अहमद आ इशाक के ई विचार अछि। [यूनुस] न॑ भी ई हदीस [अज ज़ुहरी] स॑ [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] स॑ [अबू हुरैरा] स॑ बतैन॑ छै’ ।

Hadith

Imam Tirmidzi : 138

حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ عَيَّاشِ بْنِ أَبِي رَبِيعَةَ عَنْ حَكِيمِ بْنِ حَكِيمٍ وَهُوَ ابْنُ عَبَّادِ بْنِ حُنَيْفٍ أَخْبَرَنِي نَافِعُ بْنُ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَمَّنِي جِبْرِيلُ عَلَيْهِ السَّلَام عِنْدَ الْبَيْتِ مَرَّتَيْنِ فَصَلَّى الظُّهْرَ فِي الْأُولَى مِنْهُمَا حِينَ كَانَ الْفَيْءُ مِثْلَ الشِّرَاكِ ثُمَّ صَلَّى الْعَصْرَ حِينَ كَانَ كُلُّ شَيْءٍ مِثْلَ ظِلِّهِ ثُمَّ صَلَّى الْمَغْرِبَ حِينَ وَجَبَتْ الشَّمْسُ وَأَفْطَرَ الصَّائِمُ ثُمَّ صَلَّى الْعِشَاءَ حِينَ غَابَ الشَّفَقُ ثُمَّ صَلَّى الْفَجْرَ حِينَ بَرَقَ الْفَجْرُ وَحَرُمَ الطَّعَامُ عَلَى الصَّائِمِ وَصَلَّى الْمَرَّةَ الثَّانِيَةَ الظُّهْرَ حِينَ كَانَ ظِلُّ كُلِّ شَيْءٍ مِثْلَهُ لِوَقْتِ الْعَصْرِ بِالْأَمْسِ ثُمَّ صَلَّى الْعَصْرَ حِينَ كَانَ ظِلُّ كُلِّ شَيْءٍ مِثْلَيْهِ ثُمَّ صَلَّى الْمَغْرِبَ لِوَقْتِهِ الْأَوَّلِ ثُمَّ صَلَّى الْعِشَاءَ الْآخِرَةَ حِينَ ذَهَبَ ثُلُثُ اللَّيْلِ ثُمَّ صَلَّى الصُّبْحَ حِينَ أَسْفَرَتْ الْأَرْضُ ثُمَّ الْتَفَتَ إِلَيَّ جِبْرِيلُ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ هَذَا وَقْتُ الْأَنْبِيَاءِ مِنْ قَبْلِكَ وَالْوَقْتُ فِيمَا بَيْنَ هَذَيْنِ الْوَقْتَيْنِقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَبُرَيْدَةَ وَأَبِي مُوسَى وَأَبِي مَسْعُودٍ الْأَنْصَارِيِّ وَأَبِي سَعِيدٍ وَجَابِرٍ وَعَمْرِو بْنِ حَزْمٍ وَالْبَرَاءِ وَأَنَسٍ أَخْبَرَنِي أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ مُوسَى أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ أَخْبَرَنَا حُسَيْنُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنٍ أَخْبَرَنِي وَهْبُ بْنُ كَيْسَانَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَمَّنِي جِبْرِيلُ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ عَبَّاسٍ بِمَعْنَاهُ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ لِوَقْتِ الْعَصْرِ بِالْأَمْسِ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ وَحَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ و قَالَ مُحَمَّدٌ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي الْمَوَاقِيتِ حَدِيثُ جَابِرٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَحَدِيثُ جَابِرٍ فِي الْمَوَاقِيتِ قَدْ رَوَاهُ عَطَاءُ بْنُ أَبِي رَبَاحٍ وَعَمْرُو بْنُ دِينَارٍ وَأَبُو الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَ حَدِيثِ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ جَابِرٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

[हन्नाद बिन अस साड़ी] हमरा सभकेँ रिवायत केने छथि; [अब्दुररहमान बिन अबू अज़ जिनाद] से [अब्दुररहमान बिन अल हरिथ बिन अय्यासी बिन अबू रबीअह] से [हकीम बिन हकीम] से - यानी इब्न अब्बद बिन हुनैफ - ने हमरा [नफी’ बिन जुबैर बिन मुथइम] से रिवायत कर चुके हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: ‘गब्रिएल 'अलैहिस सलाम एक बेर हमरा दू बेर काबाक बगल मे ल' गेल छल। पहिल बेर धुहरक नमाज तखन केलनि जखन छाया चप्पलक पट्टा जकाँ छल | तखन असर नमाज तखन केलनि जखन वस्तुक छाया असली वस्तु जकाँ छल | तखन सूर्यास्त भेला पर मगरीबक नमाज केलनि आ व्रत रखनिहार लोकनि अपन व्रत तोड़ि देलनि | तखन ओ ईशाक नमाज केलनि जखन आकाश मे लाल रंग गायब भ गेल। तकर बाद ओ सुबुहक नमाज तखन केलनि जखन भोर भेल आ व्रतधारी लेल भोजन वर्जित भ गेल | दोसर बेर ओ मध्याह्नक नमाज पढ़लनि, जे कोनो वस्तुक प्रतिबिंब छल जेना यथार्थ मे छल, ठीक काल्हि दुपहरक नमाजक समयक लेल। तखन ओ दुपहरक नमाज तखन केलनि जखन प्रत्येक वस्तुक छवि मूल वस्तुक प्रतिरूप सँ दुगुना होइत छल | तखन ओ पहिने जकाँ मगरीबक नमाज केलनि, फेर अंतिम ईशाक नमाज जखन रातिक एक तिहाई बीति गेल छल | तखन भोरका नमाज करू जखन धरती पर सूर्य चमकत। तकर बाद जिब्रिल हमरा दिस घुमि क’ कहलक; 'हे मुहम्मद, ई तोरा सँ पहिने के नबी के समय छै, आ नमाज के समय ई दूनू समय के बीच छै'। अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू हुरैरा, बुरैदा, अबू मूसा, अबू मसूद अल अंसारी, अबू सईद, जाबीर, 'अमरू बिन हजम, अल बारा आ अनस' सँ सेहो रिवायत अछि | हमरा [अहमद बिन मूसा] के रिपोर्ट भेल अछि जे कहलनि; हमरा सब के सूचित केलक अछि [अब्दुल्लाह बिन अल मुबारक] कहलनि; हमरा सब के रिपोर्ट केने अछि [हुसैन बिन अली बिन हुसैन] कहलनि; हमरा [वहब बिन कैसन] के [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] स रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिपोर्ट केने छथि, ओ कहलनि: 'जिब्रिल हमरा नेतृत्व केलनि...... तखन ओ इब्न अब्बास के हदीस के समान अर्थ के संग उल्लेख केलनि। आ हदीस मे ‘काल्हि जकाँ अस्र समयक लेल’ केर जिक्र नहि केने छलाह | अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह घरीब अछि।' आ इब्न अब्बास के हदीस हसन सहीह हदीस छै। मुहम्मद कहलनि; 'नमाज के समय के संबंध में सबसे प्रामाणिक इतिहास नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जबीर हदीस है' | ओ कहलनि; 'नमाज के समय के संबंध में जाबीर हदीस [अथा बिन अबू रबाह] आरू [अमरू बिन दिनार] आरू [अबू अज़ जुबैर] द्वारा [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] द्वारा पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ रिवायत करलऽ गेलऽ छै, जेना कि वहब बिन कैसन, जबीर स॑, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ हदीस छै ।

Hadith

Imam Tirmidzi : 139

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِلصَّلَاةِ أَوَّلًا وَآخِرًا وَإِنَّ أَوَّلَ وَقْتِ صَلَاةِ الظُّهْرِ حِينَ تَزُولُ الشَّمْسُ وَآخِرَ وَقْتِهَا حِينَ يَدْخُلُ وَقْتُ الْعَصْرِ وَإِنَّ أَوَّلَ وَقْتِ صَلَاةِ الْعَصْرِ حِينَ يَدْخُلُ وَقْتُهَا وَإِنَّ آخِرَ وَقْتِهَا حِينَ تَصْفَرُّ الشَّمْسُ وَإِنَّ أَوَّلَ وَقْتِ الْمَغْرِبِ حِينَ تَغْرُبُ الشَّمْسُ وَإِنَّ آخِرَ وَقْتِهَا حِينَ يَغِيبُ الْأُفُقُ وَإِنَّ أَوَّلَ وَقْتِ الْعِشَاءِ الْآخِرَةِ حِينَ يَغِيبُ الْأُفُقُ وَإِنَّ آخِرَ وَقْتِهَا حِينَ يَنْتَصِفُ اللَّيْلُ وَإِنَّ أَوَّلَ وَقْتِ الْفَجْرِ حِينَ يَطْلُعُ الْفَجْرُ وَإِنَّ آخِرَ وَقْتِهَا حِينَ تَطْلُعُ الشَّمْسُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ أَبُو عِيسَى و سَمِعْت مُحَمَّدًا يَقُولُ حَدِيثُ الْأَعْمَشِ عَنْ مُجَاهِدٍ فِي الْمَوَاقِيتِ أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ فُضَيْلٍ عَنْ الْأَعْمَشِ وَحَدِيثُ مُحَمَّدِ بْنِ فُضَيْلٍ خَطَأٌ أَخْطَأَ فِيهِ مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ الْفَزَارِيِّ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ مُجَاهِدٍ قَالَ كَانَ يُقَالُ إِنَّ لِلصَّلَاةِ أَوَّلًا وَآخِرًا فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ فُضَيْلٍ عَنْ الْأَعْمَشِ نَحْوَهُ بِمَعْنَاهُ

[हन्नाद] हमरा सभसँ संबंधित; [मुहम्मद इब्न फुदलैल] हमरा सब के [अल अ'माश] स [अबू सालिह] स [अबू हुरैरा] स संबंधित कहलनि ओ कहलनि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहलनि: 'सत्ते नमाज के शुरुआत आ अंत होइत छैक।' धुहर नमाज के समय के शुरुआत तखन होइत अछि जखन सूर्य डूबि जाइत अछि आ ओकर अंत तखन होइत अछि जखन अस्र नमाज के समय शुरू होइत अछि | अस्र नमाज के समय के शुरुआत तखन होइत अछि जखन ओकर समय शुरू होइत अछि आ ओकर अंत तखन होइत अछि जखन सूर्य पीयर भ जाइत अछि | मगरिब नमाज के समय के शुरुआत तखन होइत अछि जखन सूर्य डूबैत अछि आ ओकर अंत तखन होइत अछि जखन लाल रंग गायब भ गेल अछि | ईशा नमाज के समय के शुरुआत तखन होइत अछि जखन लाल रंग गायब भ गेल अछि आ ओकर अंत आधा राति भ जाइत अछि | आ सुबुह नमाज के शुरुआत तखन होइत छैक जखन भोर होइत छैक, आ ओकर अंत तखन होइत छैक जखन सूर्य उगैत छैक |' ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अब्दुल्ला बिन अम्र सँ सेहो एकटा रिवायत अछि ।' अबू ईसा कहलनि; 'आ हम मुहम्मद केँ कहैत सुनलहुँ; 'नमाज के समय के संबंध में मुजाहिद स अल अ'माश के हदीस अल अ'माश स मुहम्मद बिन फुदलैल के हदीस स बेसी प्रामाणिक अछि, जखन कि मुहम्मद बिन फुदलैल के हदीस में मुहम्मद बिन फुदलैल द्वारा कयल गेल गलती अछि | हमरा सब के [अबू उसामाह] के [अबू इशाक अल फजारी] स [अल अ'माश] स [मुजाहिद] स बता देलक अछि '। ओ कहलनि; 'कखनो काल कहल जाइत छैक; सचमुच नमाज के शुरुआत आ अंत होइत छैक, तखन ओ अल अ'माश स मुहम्मद बिन फुदलैल के हदीस के तरह ओकर अर्थ के संग ओहिना उल्लेख केलनि।

Hadith

Imam Tirmidzi : 140

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ وَالْحَسَنُ بْنُ الصَّبَّاحِ الْبَزَّارُ وَأَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ مُوسَى الْمَعْنَى وَاحِدٌ قَالُوا حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ يُوسُفَ الْأَزْرَقُ عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلٌ فَسَأَلَهُ عَنْ مَوَاقِيتِ الصَّلَاةِ فَقَالَ أَقِمْ مَعَنَا إِنْ شَاءَ اللَّهُ فَأَمَرَ بِلَالًا فَأَقَامَ حِينَ طَلَعَ الْفَجْرُ ثُمَّ أَمَرَهُ فَأَقَامَ حِينَ زَالَتْ الشَّمْسُ فَصَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ أَمَرَهُ فَأَقَامَ فَصَلَّى الْعَصْرَ وَالشَّمْسُ بَيْضَاءُ مُرْتَفِعَةٌ ثُمَّ أَمَرَهُ بِالْمَغْرِبِ حِينَ وَقَعَ حَاجِبُ الشَّمْسِ ثُمَّ أَمَرَهُ بِالْعِشَاءِ فَأَقَامَ حِينَ غَابَ الشَّفَقُ ثُمَّ أَمَرَهُ مِنْ الْغَدِ فَنَوَّرَ بِالْفَجْرِ ثُمَّ أَمَرَهُ بِالظُّهْرِ فَأَبْرَدَ وَأَنْعَمَ أَنْ يُبْرِدَ ثُمَّ أَمَرَهُ بِالْعَصْرِ فَأَقَامَ وَالشَّمْسُ آخِرَ وَقْتِهَا فَوْقَ مَا كَانَتْ ثُمَّ أَمَرَهُ فَأَخَّرَ الْمَغْرِبَ إِلَى قُبَيْلِ أَنْ يَغِيبَ الشَّفَقُ ثُمَّ أَمَرَهُ بِالْعِشَاءِ فَأَقَامَ حِينَ ذَهَبَ ثُلُثُ اللَّيْلِ ثُمَّ قَالَ أَيْنَ السَّائِلُ عَنْ مَوَاقِيتِ الصَّلَاةِ فَقَالَ الرَّجُلُ أَنَا فَقَالَ مَوَاقِيتُ الصَّلَاةِ كَمَا بَيْنَ هَذَيْنِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ قَالَ وَقَدْ رَوَاهُ شُعْبَةُ عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ أَيْضًا

हमरा सब के [अहमद बिन मनी'] आ [अल हसन बिन अश शब्बाह अल बज्जर] आ [अहमद बिन मुहम्मद बिन मूसा] के एक अर्थ के संग बतेने छथि | ओ सभ कहलक; 'हमरा सभ केँ [इशक बिन यूसुफ अल अज़रक] केँ [सुफयान अतस त्सौरी] सँ [अलकामाह बिन मार्तसाद] सँ [सुलेमान बिन बुराइदाह] सँ [अपन पिता] सँ कहलक अछि; 'एक आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आबि नमाज के समय के बारे में पूछलखिन, त ओ कहलनि: 'आउ आ हमरा सब के संग नमाज पढ़ू -भगवान चाहथि-'। तखन ओ बिलाल केँ इकमाह लेबाक आदेश देलनि। तेँ भोर भेला पर इकमाह केलनि। तखन ओ इकमाह के आदेश देलखिन, बिलाल सेहो इकमाह जखन सूर्य झुकल छल, ताहि लेल ओ मध्याह्न के नमाज के नमाज पढ़ौलनि। तखन इकामा के आदेश देलखिन, बिलाल इकमाह केलखिन आ ओ दुपहर के नमाज तखन केलनि जखन सूर्य उज्जर छल आ एखनो ऊँच छल | तखन सूर्यक किरण डूबला पर मगरीब नमाजक आदेश देलनि | तखन ओ साँझक नमाज इकमाहक आदेश देलनि जखन आकाश मे लाल रंग गायब भ गेल छल | आ दोसर दिन सुबह नमाज इकमाह के आदेश देलखिन जखन रौद चमकैत छल | तखन ओ दुपहरक नमाजक आदेश देलनि, आ ओ ताबत धरि प्रतीक्षा करैत रहलाह जा धरि हवा शीतल आ सुखद नहि लागय। तखन दुपहरक नमाजक आदेश देलनि, आ जखन किछु समय बचल छल तखन ओ नमाज पूरा केलनि। तखन फेर इकमाह मंगौलनि, मुदा मगरिब ताबत धरि समाप्त क' देलनि जाबत धरि आकाश मे लाल रंग लगभग गायब नहि भ' गेल छल. तखन ईशा नमाज के आदेश देलखिन, आ राति के एक तिहाई भेला पर पूरा केलनि। तकर बाद ओ कहलनि: 'जे व्यक्ति नमाज के समय के बारे में पूछने छल, ओ कतय अछि?' ओ आदमी उत्तर देलक, ‘हम छी’। तखन कहलनि: 'नमाजक समय एहि दुनू समयक बीच अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन घरीब प्रामाणिक अछि।' ओ कहलनि; '[स्यू'बाह] सेहो एकरा [अलकामाह बिन मार्तसाद] सँ रिवायत केने छथि' |