Imam Tirmidzi : 61
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلَّالُ وَغَيْرُ وَاحِدٍ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ كَثِيرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَقِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ بِئْرِ بُضَاعَةَ وَهِيَ بِئْرٌ يُلْقَى فِيهَا الْحِيَضُ وَلُحُومُ الْكِلَابِ وَالنَّتْنُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْمَاءَ طَهُورٌ لَا يُنَجِّسُهُ شَيْءٌقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَقَدْ جَوَّدَ أَبُو أُسَامَةَ هَذَا الْحَدِيثَ فَلَمْ يَرْوِ أَحَدٌ حَدِيثَ أَبِي سَعِيدٍ فِي بِئْرِ بُضَاعَةَ أَحْسَنَ مِمَّا رَوَى أَبُو أُسَامَةَ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ وَفِي الْبَاب عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَعَائِشَةَ
[हन्नाद] आ [अल हसन बिन अली अल खल्लाल] आ अन्य लोकनि हमरा सभकेँ रिवायत केने छथि, ओ सभ कहलनि; [अबू उसामाह] हमरा सब के [अल वलीद बिन कथिर] स [मुहम्मद बिन काअब] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन रफी’ बिन खदीज] स [अबू सईद अल खुदरी] स रिवायत केने छथि ओ कहलनि; कियो पुछलकै; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, की हमरा सब के लेल बुदला के पानी स वज़ूद करना जायज अछि जे ओहि में मासिक धर्म के पैड, कुकुर के मांस आ शव के प्रयोग स फेंकल गेल अछि?' अल्लाह के रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'सत्ते पानि शुद्ध अछि, कोनो एहन चीज नहि अछि जे ओकरा अशुद्ध बनाबय'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन छै, अबू उसामाह न॑ बतैन॑ छै कि ई एगो अच्छा हदीस छै, आरू अबू सईद स॑ बुदला के कुआँ के बारे म॑ कोय भी हदीस नै बतैलकै जे अबू उसामा न॑ जे कुछ बतैन॑ छै ओकरा स॑ बेहतर छै । ई हदीस क॑ कई तरह स॑ रिवायत करलऽ गेलऽ छै, अबू सईद स॑ । एहि अध्याय मे इब्न अब्बास आ आइशाक हदीस सेहो अछि |
Imam Tirmidzi : 62
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يُسْأَلُ عَنْ الْمَاءِ يَكُونُ فِي الْفَلَاةِ مِنْ الْأَرْضِ وَمَا يَنُوبُهُ مِنْ السِّبَاعِ وَالدَّوَابِّ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ لَمْ يَحْمِلْ الْخَبَثَقَالَ عَبْدَةُ قَالَ مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ الْقُلَّةُ هِيَ الْجِرَارُ وَالْقُلَّةُ الَّتِي يُسْتَقَى فِيهَا قَالَ أَبُو عِيسَى وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالُوا إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ لَمْ يُنَجِّسْهُ شَيْءٌ مَا لَمْ يَتَغَيَّرْ رِيحُهُ أَوْ طَعْمُهُ وَقَالُوا يَكُونُ نَحْوًا مِنْ خَمْسِ قِرَبٍ
हमरा सब के कहलक अछि [हन्नाद] कहलक अछि, हमरा सब के [अब्दाह] के [मुहम्मद बिन इशक] स [मुहम्मद बिन जा'फर बिन अज़ जुबैर] स [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] स [इब्नु उमर] स कहलक अछि ओ कहलनि; इब्न उमर कहलनि जे, 'हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सं तखन सुनने रही जखन हुनका सं ओहि पानि के बारे में पूछल गेल छल जे खेत में होइत अछि आ जाहि में प्रायः जंगली जानवर आ अन्य जानवर अबैत अछि;' अतः रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'जँ पानि दू कुल्लाह धरि पहुँचि जायत तखन ओहि मे अशुद्धि - नजीस - नहि होयत। अब्दाह बाजल; मुहम्मद बिन इशाक कहलनि; 'अल कुल्लाह कतेको पैघ जार अछि, आ कुल्लाह पानि अछि जे प्रायः पीबाक लेल प्रयोग कयल जाइत अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'आ इमाम शाफीई, अहमद आ इशाक के विचार सेहो इएह अछि।' ओ सभ कहलक; 'जँ पानि दू कुल्लाह धरि पहुँचि जाइत अछि तखन ओकरा अशुद्ध करबाक कोनो बात नहि, अर्थात जा धरि ओकर गंध वा स्वाद मे कोनो परिवर्तन नहि होइत छैक, आ कहैत छैक; 'लगभग पाँच किरबाह -मटकी-'क पानि अछि ।'
Imam Tirmidzi : 63
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ مِنْهُقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ
हमरा सभकेँ [महमुद बिन घैलन] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [अब्दुर्राजाक] [मा'मर]सँ [हम्मम बिन मुनाब्बीह]सँ [अबू हुरैरा]सँ [अबू हुरैरा]सँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमसँ कहलक अछि, ओ कहलनि: 'अहाँ सभमेसँ कियो कहियो स्थिर पानिमे पेशाब नहि करबाक चाही - बहैत नहि - आ तखन ओहिसँ वजूद नहि करबाक चाही'। अबू ईसा कहलनि; 'ई एकटा प्रामाणिक हदीस अछि, आ एहि अध्याय मे जाबीर सँ एकटा रिवायत सेहो अछि' |
Imam Tirmidzi : 64
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ عَنْ مَالِكٍ ح و حَدَّثَنَا الْأَنْصَارِيُّ إِسْحَقُ بْنُ مُوسَى حَدَّثَنَا مَعْنٌ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ سَلَمَةَ مِنْ آلِ ابْنِ الْأَزْرَقِ أَنَّ الْمُغِيرَةَ بْنَ أَبِي بُرْدَةَ وَهُوَ مِنْ بَنِي عَبْدِ الدَّارِ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُسَأَلَ رَجُلٌ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنْ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أَفَنَتَوَضَّأُ مِنْ مَاءِ الْبَحْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرٍ وَالْفِرَاسِيِّ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ الْفُقَهَاءِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَابْنُ عَبَّاسٍ لَمْ يَرَوْا بَأْسًا بِمَاءِ الْبَحْرِ وَقَدْ كَرِهَ بَعْضُ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْوُضُوءَ بِمَاءِ الْبَحْرِ مِنْهُمْ ابْنُ عُمَرَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو وَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو هُوَ نَارٌ
[मलिक] स हमरा सब कए [कुतैबाह] कहि देने छथि। आ दोसर रस्तासँ; हमरा सब के कहलक अछि [अल अंसारी इशाक बिन मूसा] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [मा'न] कहलक अछि, हमरा सब के [मलिक] के [शफवान बिन सुलैम] स [सैद बिन सलामा] इब्न अल अजराक के परिवार स कहलक अछि, जे [अल मुघीरा बिन अबूरदाह] बनी अब्दु अद दार, ओकरा रिपोर्ट केलक, जे ओ सुनने छल [अबू हुरैराह] कहैत अछि; कि कियो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलक; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हम सब समुद्र में जहाज स चललौं आ हम सब मात्र कनि पानि अनने रही, जौं ओहि पानि के वज़ूद के लेल उपयोग करब तखन हमरा सब के प्यास लागि जायत। तखन की समुद्रक पानि मे वजूद क' सकैत छी?' तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलनि जे समुद्र पानि मे शुद्ध आ लाश मे हलाल अछि। एहि अध्याय मे जाबिर आ अल फिरासी सँ सेहो इतिहास अछि | अबू ईसा कहलनि; ई हदीस हसन सहीह छै, आरू ई नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथी सब में अधिकांश न्यायविद के राय छै। एहि मे अबू बकर, उमर, आ इब्न अब्बास शामिल छथि । हुनका लोकनिक मत छलनि जे समुद्रक पानि सँ अपना केँ शुद्ध करब जायज अछि | मुदा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के किछु सहाबा एकरा मकरूह मानैत छलाह, जाहि मे इब्न उमर आ अब्दुल्लाह बिन अम्र शामिल छलाह | अब्दुल्ला बिन अम्र कहलनि, "ई आगि अछि।"
Imam Tirmidzi : 65
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ وَقُتَيْبَةُ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالُوا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ قَال سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يُحَدِّثُ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى قَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا يُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا هَذَا فَكَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنْ بَوْلِهِ وَأَمَّا هَذَا فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِقَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي مُوسَى وَعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَسَنَةَ وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَأَبِي بَكْرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَرَوَى مَنْصُورٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ عَنْ طَاوُسٍ وَرِوَايَةُ الْأَعْمَشِ أَصَحُّ قَالَ و سَمِعْت أَبَا بَكْرٍ مُحَمَّدَ بْنَ أَبَانَ الْبَلْخِيَّ مُسْتَمْلِي وَكِيعٍ يَقُولُ سَمِعْتُ وَكِيعًا يَقُولُ الْأَعْمَشُ أَحْفَظُ لِإِسْنَادِ إِبْرَاهِيمَ مِنْ مَنْصُورٍ
हमरा सभ केँ [हन्नाद] आ [कुतैबा] आ [अबू कुरैब] केँ कहने छथि जे ओ सभ कहलनि; हमरा सभ केँ [वाकी'] केँ [अल अ'मासी] सँ कहने छथि ओ कहलनि; हम [मुजाहिद] केँ [इब्न अब्बास] सँ [थाउस] केँ कहैत सुनलहुँ जे; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दू कब्र स गुजरल छलाह, तखन ओ कहलनि जे, दुनू गोटे के यातना देल जा रहल अछि, आ पैघ पाप के कारण यातना नहि देल जा रहल अछि। ई एकटा एहि लेल यातना देल गेल जे ओ पेशाब करबा काल अपना केँ नहि झाँपि लैत छल, आ दोसर केँ एहि लेल जे ओ एक दोसराक विरुद्ध अपना केँ खड़ा करैत छल'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि।' आरू [मंसूर] न॑ ई हदीस [मुजाहिद] स॑, [इब्नु अब्बास] स॑ बतैलकै, लेकिन थावस स॑ एकरऽ जिक्र नै करलकै । एम्हर अल अ'मासी द्वारा रिवायत हदीस बेसी प्रामाणिक अछि । ओ कहलनि; 'हम सुनलहुँ जे अबू बकर बिन अबन अल बल्खी - ओ व्यक्ति जे वाकी केँ पढ़य लेल कहलनि' - कहैत छथि; 'अल अ'मासी मंसूर स बेसी इब्राहिम के सनाद स बेसी परिचित छैथ'।
Imam Tirmidzi : 66
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَأَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ عَنْ أُمِّ قَيْسٍ بِنْتِ مِحْصَنٍ قَالَتْدَخَلْتُ بِابْنٍ لِي عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمْ يَأْكُلْ الطَّعَامَ فَبَالَ عَلَيْهِ فَدَعَا بِمَاءٍ فَرَشَّهُ عَلَيْهِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَعَائِشَةَ وَزَيْنَبَ وَلُبَابَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ وَهِيَ أُمُّ الْفَضْلِ بْنِ عَبَّاسِ بْنِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَأَبِي السَّمْحِ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَأَبِي لَيْلَى وَابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ مِثْلِ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ قَالُوا يُنْضَحُ بَوْلُ الْغُلَامِ وَيُغْسَلُ بَوْلُ الْجَارِيَةِ وَهَذَا مَا لَمْ يَطْعَمَا فَإِذَا طَعِمَا غُسِلَا جَمِيعًا
हमरा सभ केँ [कुतैबा] आ [अहमद बिन मुनी'] केँ कहने छथि ओ सभ कहलनि; हमरा सब के [सुफयान बिन उयैनह] के [अज ज़ुहरी] स [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह] स [उम्मू कैस बिंत मिहशान] स कहलक अछि ओ कहलनि; 'हम अपन बच्चा के संग नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स भेंट केलहुं जे भोजन नहि केने छल - ओ एखनो बच्चा छल -, तखन ओ ओकरा पर पेशाब केलक। तेँ नबी पानि मँगलनि, तखन ओ पानि पेशाब पर ढारि देलनि।' ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अली, ऐश्याह, जैनब, लुबाबाह बिंत अल हरिथ सँ सेहो रिवायत अछि, अर्थात उम्म अल फद्दल बिन अब्बास बिन अब्दुल मुथल्लब, अबू अस सम्ह, अब्दुल्लाह बिन अमरू, अबू लैला आ इब्नू अब्बास।' ई राय नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ताबीइन आरू ओकरऽ बाद के साथी जेना कि अहमद आरू इशाक के साथी म॑ स॑ बहुत वैज्ञानिक विशेषज्ञऽ के छै । ओ सभ कहलक; 'लड़काक पेशाब छींटा - छींटा - जखन कि लड़कीक पेशाब धोल जाइत अछि, ई जँ दुनू गोटे नहि खयने होथि, जँ दुनू गोटे खा गेल होथि तखन ओकरा धोबय पड़त'।
Imam Tirmidzi : 67
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ الزَّعْفَرَانِيُّ حَدَّثَنَا عَفَّانُ بْنُ مُسْلِمٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ حَدَّثَنَا حُمَيْدٌ وَقَتَادَةُ وَثَابِتٌ عَنْ أَنَسٍأَنَّ نَاسًا مِنْ عُرَيْنَةَ قَدِمُوا الْمَدِينَةَ فَاجْتَوَوْهَا فَبَعَثَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي إِبِلِ الصَّدَقَةِ وَقَالَ اشْرَبُوا مِنْ أَلْبَانِهَا وَأَبْوَالِهَا فَقَتَلُوا رَاعِيَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتَاقُوا الْإِبِلَ وَارْتَدُّوا عَنْ الْإِسْلَامِ فَأُتِيَ بِهِمْ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَطَعَ أَيْدِيَهُمْ وَأَرْجُلَهُمْ مِنْ خِلَافٍ وَسَمَرَ أَعْيُنَهُمْ وَأَلْقَاهُمْ بِالْحَرَّةِقَالَ أَنَسٌ فَكُنْتُ أَرَى أَحَدَهُمْ يَكُدُّ الْأَرْضَ بِفِيهِ حَتَّى مَاتُوا وَرُبَّمَا قَالَ حَمَّادٌ يَكْدُمُ الْأَرْضَ بِفِيهِ حَتَّى مَاتُوا قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ أَنَسٍ وَهُوَ قَوْلُ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ قَالُوا لَا بَأْسَ بِبَوْلِ مَا يُؤْكَلُ لَحْمُهُ
हमरा सब के कहलक अछि [अल हसन बिन मुहम्मद अज ज'फरानी] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि ['अफ्फान बिन मुस्लिम] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [हम्मद बिन सलामाह] कहलनि, हमरा सब के [हुमैद] आ [कोतादाह] आ [अनास] के [त्साबीत] कहलक अछि; ' उरैना स किछु लोक मदीना आयल छलाह, मुदा ओ मदीना के जलवायु के अनुकूल नहि छलाह, ताहि लेल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सब के जकात के ऊंट के -जकात- पर पठा देलखिन। ओ कहलनि: 'अपन दूध आ पेशाब पीबू'। मुदा, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चरबाह के मारि क ऊँट के भगा देलक, जकर बाद ओ सब धर्मत्याग क देलक। तखन हुनका सभ केँ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समक्ष प्रस्तुत कयल गेलनि, तखन ओ हुनका लोकनिक हाथ-पैर क्रॉस क' क' काटि देलनि, हुनकर आँखि केँ बाहर निकालि देल गेलनि आ फेर हर्राह -गर्म रेगिस्तान-' मे फेकि देल गेलनि | अनस बाजल; 'हम देखलहुँ जे एकटा केँ ताबत धरि खसि पड़ल जा धरि ओकर मुँह मे बालु नहि घुसि गेल, तखन ओ सभ मरि गेल'। आ शायद हम्मद कहने हेताह; 'ओ मुँहसँ जमीन काटि लेलक जा धरि ओ सभ मरि नहि गेल' । अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह छै, आरू ई हदीस भी अनस स॑ दोसरऽ चैनल के माध्यम स॑ बतैलऽ गेलऽ छै । ई बहुसंख्यक विद्वानक मत अछि, ओ लोकनि कहैत छथि : 'जकर मांस खाएब जायज अछि ओकर मूत्र मे कोनो हर्ज नहि' |
Imam Tirmidzi : 68
حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ سَهْلٍ الْأَعْرَجُ الْبَغْدَادِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ غَيْلَانَ قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الْتَّيْمِيُّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَإِنَّمَا سَمَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْيُنَهُمْ لِأَنَّهُمْ سَمَلُوا أَعْيُنَ الرُّعَاةِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لَا نَعْلَمُ أَحَدًا ذَكَرَهُ غَيْرَ هَذَا الشَّيْخِ عَنْ يَزِيدَ بْنِ زُرَيْعٍ وَهُوَ مَعْنَى قَوْلِهِ{ وَالْجُرُوحَ قِصَاصٌ }وَقَدْ رُوِيَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ قَالَ إِنَّمَا فَعَلَ بِهِمْ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا قَبْلَ أَنْ تَنْزِلَ الْحُدُودُ
हमरा सभकेँ कहलक अछि [अल फद्दल बिन सहल अल अ'राज अल बगदादी] कहलनि, हमरा सभकेँ [याह्या बिन घैलन] कहलनि; हमरा सभकेँ [यजीद बिन ज़ुरै'] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [सुलेमान अत तैमी] [अनास बिन मलिक]सँ कहलक अछि ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका लोकनिक आँखि बाहर क' देलनि, कारण ओ सभ चरबाहक आँखि बाहर क' देलनि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस घरीब स्तर के अछि, हमरा सभ के एहन कियो नहिं पता अछि जे एहि शेख के अलावा एहि हदीस के जिक्र करय, यजीद बिन ज़ुरै सं', आ ई हुनकर वचन के अनुरूप अछि: -आ घाव -एतय तक कि- किशास- होइत अछि. ई हदीस मुहम्मद बिन सिरीन सेहो बतौलनि अछि, ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका सब के संग ओहि आयत के प्रकटीकरण स पहिने एहन केने छलाह जे हुदुद मामला के बात करैत छल'।
Imam Tirmidzi : 69
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَهَنَّادٌ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا وُضُوءَ إِلَّا مِنْ صَوْتٍ أَوْ رِيحٍقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
हमरा सभ केँ [कुतैबा] आ [हन्नाद] केँ कहने छथि जे ओ सभ कहलनि; हमरा सभकेँ [वाकी’] [स्यूबाह] सँ [सुहैल बिन अबू सालिह] सँ [अपन पिता] सँ [अबू हुरैरा] सँ कहलक अछि; 'वास्तव में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहने छथि : 'ध्वनि या गंध के अलावा कोनो वज़ूद नै होइत अछि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक अछि।'
Imam Tirmidzi : 70
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ أَحَدُكُمْ فِي الْمَسْجِدِ فَوَجَدَ رِيحًا بَيْنَ أَلْيَتَيْهِ فَلَا يَخْرُجْ حَتَّى يَسْمَعَ صَوْتًا أَوْ يَجِدَ رِيحًاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ وَعَلِيِّ بْنِ طَلْقٍ وَعَائِشَةَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَابْنِ مَسْعُودٍ وَأَبِي سَعِيدٍ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ قَوْلُ الْعُلَمَاءِ أَنْ لَا يَجِبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ إِلَّا مِنْ حَدَثٍ يَسْمَعُ صَوْتًا أَوْ يَجِدُ رِيحًا و قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ إِذَا شَكَّ فِي الْحَدَثِ فَإِنَّهُ لَا يَجِبُ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ حَتَّى يَسْتَيْقِنَ اسْتِيقَانًا يَقْدِرُ أَنْ يَحْلِفَ عَلَيْهِ وَقَالَ إِذَا خَرَجَ مِنْ قُبُلِ الْمَرْأَةِ الرِّيحُ وَجَبَ عَلَيْهَا الْوُضُوءُ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَإِسْحَقَ
हमरा सभकेँ [कुतैबा] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [अब्दुल अजीज बिन मुहम्मद] [सुहैल बिन अबू सालिह]सँ [अपन पिता]सँ [अबू हुरैरा]सँ कहलक अछि; "अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह (स.अ.व.) न॑ कहलकै कि अगर तोरा सिनी म॑ स॑ कोय मस्जिद म॑ छै आरू ओकरा नितंबऽ के बीच हवा लगै छै, त॑ जब॑ तलक ओकरा आवाज नै सुनलऽ जाय या गंध नै आबै छै, तब॑ तलक बाहर नै निकलै आ अबू सईद' कहलखिन, 'ई हदीस हसन सहीह अछि, ई उलमा के राय अछि, जे जा धरि कोनो आवाज नहि सुनैत अछि वा ओकर गंध नहि लैत अछि, त' अब्दुल्लाह इब्नुल मुबारक कहलनि जे, 'जँ ककरो हदास अछि वा नहि, तखन धरि ओकरा शपथ नहि करबाक चाही' पुनः बजलाह - जँ स्त्रीक निजी अंग सँ आवाज अबैत अछि तखन ओकरा वजूद अवश्य करबाक चाही |' इमाम शाफी आ अहमद के ई राय छै।
Imam Tirmidzi : 71
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ اللَّهَ لَا يَقْبَلُ صَلَاةَ أَحَدِكُمْ إِذَا أَحْدَثَ حَتَّى يَتَوَضَّأَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ
हमरा सब के कहलक अछि [महमुद बिन घैलन] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुर्राजाक] कहलक अछि, हमरा सब के [माममार] के [हम्मम बिन मुनाब्बीह] स [अबू हुरैराह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलक: 'वास्तव में, अल्लाह अहाँ सब में स कोनो के नमाज के नमाज स्वीकार नै करताह अगर ओ हदत नै करत जाबे तक ओ वज़ूद नै करत'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस पद पर हसन प्रामाणिक अछि'।
Imam Tirmidzi : 72
حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ مُوسَى كُوفِيٌّ وَهَنَّادٌ وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْمُحَارِبِيُّ الْمَعْنَى وَاحِدٌ قَالُوا حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ حَرْبٍ الْمُلَائِيُّ عَنْ أَبِي خَالِدٍ الدَّالَانِيِّ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَامَ وَهُوَ سَاجِدٌ حَتَّى غَطَّ أَوْ نَفَخَ ثُمَّ قَامَ يُصَلِّي فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّكَ قَدْ نِمْتَ قَالَ إِنَّ الْوُضُوءَ لَا يَجِبُ إِلَّا عَلَى مَنْ نَامَ مُضْطَجِعًا فَإِنَّهُ إِذَا اضْطَجَعَ اسْتَرْخَتْ مَفَاصِلُهُقَالَ أَبُو عِيسَى وَأَبُو خَالِدٍ اسْمُهُ يَزِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَائِشَةَ وَابْنِ مَسْعُودٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ
हमरा सब के [इस्माइल बिन मूसा] कुफा के निवासी के बता देने छैथ, आ [हन्नाद] आ [मुहम्मद बिन उबैद अल मुहरीबी] के एकटा अर्थ के संग, ओ सब कहलनि; हमरा सब के [अब्दुस्सलम बिन हरब अल मुला`ई] स [अबू खालिद अद दलानी] स [कोतादह] स [अबुल अलियाह] स [इब्न अब्बास] स कहलथि अछि जे ओ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सजदा के हालत में सुतल देखलनि जाबत तक ओ खर्राटा नै लेलनि, जकर बाद ओ नमाज पढ़य लेल उठलाह | तखन हम कहलियनि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अहाँ नींद आबि गेल छी!' ओ कहलनि: 'सत्ते वज़ूद अनिवार्य नहि अछि सिवाय ओहि लोकक जे लेट क' सुतैत छथि।' कारण जे लोक लेट क' सुतैत छथि, हुनकर सभ जोड़ नरम -खिंचय योग्य-' भ' जेतनि । अबू ईसा कहलनि; 'अबू खालिद के नाम यजीद बिन अब्दुररहमान छै'। ओ फेर कहलनि, 'एहि अध्याय मे ऐसिया, इब्न मसूद आ अबू हुरैरा सँ सेहो इतिहास अछि'।
Imam Tirmidzi : 73
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنَامُونَ ثُمَّ يَقُومُونَ فَيُصَلُّونَ وَلَا يَتَوَضَّئُونَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ و سَمِعْت صَالِحَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُ سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْمُبَارَكِ عَمَّنْ نَامَ قَاعِدًا مُعْتَمِدًا فَقَالَ لَا وُضُوءَ عَلَيْهِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَوَى حَدِيثَ ابْنِ عَبَّاسٍ سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَوْلَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ أَبَا الْعَالِيَةِ وَلَمْ يَرْفَعْهُ وَاخْتَلَفَ الْعُلَمَاءُ فِي الْوُضُوءِ مِنْ النَّوْمِ فَرَأَى أَكْثَرُهُمْ أَنْ لَا يَجِبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ إِذَا نَامَ قَاعِدًا أَوْ قَائِمًا حَتَّى يَنَامَ مُضْطَجِعًا وَبِهِ يَقُولُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَأَحْمَدُ قَالَ بَعْضُهُمْ إِذَا نَامَ حَتَّى غُلِبَ عَلَى عَقْلِهِ وَجَبَ عَلَيْهِ الْوُضُوءُ وَبِهِ يَقُولُ إِسْحَقُ و قَالَ الشَّافِعِيُّ مَنْ نَامَ قَاعِدًا فَرَأَى رُؤْيَا أَوْ زَالَتْ مَقْعَدَتُهُ لِوَسَنِ النَّوْمِ فَعَلَيْهِ الْوُضُوءُ
[मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सब स रिवायत केने छथि, [याह्या बिन सईद] हमरा सब स [स्यूबाह] स [कतदाह] स [अनस बिन मलिक] स रिवायत केने छथि ओ कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी सुति गेलाह, फेर जागि गेलाह आ फेर सं वजूद केने बिना नमाज केलनि'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह अछि'। ओ कहलनि; 'हम सालिह बिन अब्दुल्ला के कहैत सुनने रही; 'हम अब्दुल्ला इब्न अल मुबारक सं पूछलियैन जे जानबूझि क' बैसल सुतय वाला व्यक्ति पर फैसला के बारे मे, ओ जवाब देलखिन्ह, 'ओकरा वज़ूद नहिं करय पड़ैत छैक'. अबू ईसा कहलनि; सईद बिन अरूबा इब्न अब्बास स इब्न अब्बास क हदीस कतादा स रिवायत केलथि। ओ एहि मे अबुल अलियाक नाम नहि लेलनि आ ने एकरा मरफू' केलनि । नींद के कारण वज़ूद के संबंध में विद्वान के अलग-अलग मत छै, कुछ विद्वान के मत छै कि अगर नींद बैठलो या खड़ा होय जाय छै त वज़ूद अनिवार्य नै छै, जब तक कि ओ लेट क सुतैत छैथ। ई राय अतस त्सौरी, इब्नुल मुबारक आ अहमद केने छलाह | मुदा, किछु गोटे कहलनि: "जँ कियो ता धरि सुतैत अछि जाबत धरि ओकर मोन काज नहि क' रहल अछि, तखन ओकरा वजूद करब बाध्य अछि." ई राय इशाक केने छलाह। इमाम असी स्याफी कहलनि: "जँ कियो सपना देखबा धरि सुतैत अछि, वा नींदक कारणेँ ओकर सीट शिफ्ट नहि भ' जाइत अछि, तखन ओकरा वजूद करब बाध्य अछि."
Imam Tirmidzi : 74
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْوُضُوءُ مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ وَلَوْ مِنْ ثَوْرِ أَقِطٍقَالَ فَقَالَ لَهُ ابْنُ عَبَّاسٍ يَا أَبَا هُرَيْرَةَ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ الدُّهْنِ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ الْحَمِيمِ قَالَ فَقَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ يَا ابْنَ أَخِي إِذَا سَمِعْتَ حَدِيثًا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَا تَضْرِبْ لَهُ مَثَلًا قَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ وأُمِّ سَلَمَةَ وَزَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ وَأَبِي طَلْحَةَ وَأَبِي أَيُّوبَ وَأَبِي مُوسَى قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَأَى بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الْوُضُوءَ مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُ وَأَكْثَرُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ عَلَى تَرْكِ الْوُضُوءِ مِمَّا غَيَّرَتْ النَّارُ
हमरा सभकेँ कहने छथि [इब्न अबू उमर] कहलनि; हमरा सभ केँ [सुफयान बिन उयैनह] [मुहम्मद बिन अमरू] सँ [अबू सलामाह] सँ [अबू हुरैराह] सँ कहलनि अछि ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, अहाँ केँ आगि सँ स्पर्श कयल गेल वस्तु पर वज़ूद करबाक चाही, भले ओ सुखायल दूध -पनीर-'। अबू सलामाह कहलनि; इब्न अब्बास हुनका सँ पुछलखिन, 'हे अबू हुरैरा, घी खाइत छी ताहि लेल वजूद करय पड़ैत अछि? आ की हमरा सभकेँ गरम पानि पीबाक कारणेँ वज़ूद सेहो करए पड़ैत अछि?' अबू सलामाह कहलनि; अबू हुरैरा तखन जवाब देलखिन, 'हे हमर भाई के बेटा, अगर अहां अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स हदीस सुनब त उदाहरण नहि बनाउ - समकक्ष -'। अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे उम्म हबीबाह, उम्म सलामाह, जैद बिन थाबीत, अबू सलामाह, अबू अय्यूब आ अबू मूसा सँ सेहो रिवायत अछि' | अबू ईसा फेर कहलनि, 'किछु विद्वान लोकनिक विचार छनि जे आगि सँ बदलल गेल वस्तुक लेल वज़ूज अनिवार्य अछि - कच्चा सँ पकाओल गेल -, मुदा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तबी'इन आ हुनक बादक लोकक सहाब मे सँ अधिकांश विद्वान कोनो एहन वस्तुक लेल वजूद नहि करैत छथि जे आगि सँ बदलल जाइत अछि'।
Imam Tirmidzi : 75
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ سَمِعَ جَابِرًا قَالَ سُفْيَانُ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَخَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَا مَعَهُ فَدَخَلَ عَلَى امْرَأَةٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فَذَبَحَتْ لَهُ شَاةً فَأَكَلَ وَأَتَتْهُ بِقِنَاعٍ مِنْ رُطَبٍ فَأَكَلَ مِنْهُ ثُمَّ تَوَضَّأَ لِلظُّهْرِ وَصَلَّى ثُمَّ انْصَرَفَ فَأَتَتْهُ بِعُلَالَةٍ مِنْ عُلَالَةِ الشَّاةِ فَأَكَلَ ثُمَّ صَلَّى الْعَصْرَ وَلَمْ يَتَوَضَّأْقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَأَبِي هُرَيرَةَ وَابْنِ مَسْعُودٍ وَأَبِي رَافِعٍ وَأُمِّ الْحَكَمِ وَعَمْرِو بْنِ أُمَيَّةَ وَأُمِّ عَامِرٍ وَسُوَيْدِ بْنِ النُّعْمَانِ وَأُمِّ سَلَمَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَلَا يَصِحُّ حَدِيثُ أَبِي بَكْرٍ فِي هَذَا الْبَابِ مِنْ قِبَلِ إِسْنَادِهِ إِنَّمَا رَوَاهُ حُسَامُ بْنُ مِصَكٍّ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالصَّحِيحُ إِنَّمَا هُوَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَكَذَا رَوَاهُ الْحُفَّاظُ وَرُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَوَاهُ عَطَاءُ بْنُ يَسَارٍ وَعِكْرِمَةُ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ وَعَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ وَغَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَمْ يَذْكُرُوا فِيهِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَهَذَا أَصَحُّ قَالَ أَبُو عِيسَى وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَمَنْ بَعْدَهُمْ مِثْلِ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ رَأَوْا تَرْكَ الْوُضُوءِ مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ وَهَذَا آخِرُ الْأَمْرَيْنِ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكَأَنَّ هَذَا الْحَدِيثَ نَاسِخٌ لِلْحَدِيثِ الْأَوَّلِ حَدِيثِ الْوُضُوءِ مِمَّا مَسَّتْ النَّارُ
हमरा सभकेँ कहने छथि [इब्न अबू उमर] कहलनि, हमरा सभकेँ [सुफयान बिन उयैनह] कहलनि; हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद बिन अकील] के कहने छथि जे ओ [जाबिर] के सुनने छलाह | [सुफयान] कहलनि; आ [जाबीर] सँ हमरा सभ [मुहम्मद इब्नुल मुनकदीर] केँ कहि क’ ओ कहलनि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा संग बाहर आबि गेलाह। ओ एकटा अंसार महिला लग गेलाह, तखन ओ महिला ओकरा लेल बकरी मारि देलक आ ओ खा लेलक, तखन ओ महिला ओकरा लेल एकटा टोकरी सेहो अनलक जाहि मे ताजा खजूर छल, आ ओहो खा लेलक। तकर बाद झुहुरक लेल वजूद केलनि, नमाज पढ़लनि आ चलि गेलाह | तखन ओ महिला हुनका लेल शेष बकरी अनलनि, ओ खा लेलनि, फेर पहिने बिना वजूद केने दुपहरक नमाज केलनि। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू बकर, इब्न अब्बास, अबू हुरैरा, इब्नू मसूद, अबू रफी', उम्म अल हकम, 'अमरू बिन उमय्याह, उम्म 'अमीर, सुवैद बिन अन नु'मान आ उम्म सलामाह' सँ सेहो रिवायत अछि | अबू ईसा कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू बकर केर हदीस सनद पक्ष सँ मान्य नहि अछि' | आ जे एकर रिवायत केने छलाह ओ छलाह हुसान बिन मिशक, इब्न सिरिन सँ, इब्न अब्बास सँ, अबू बकर सँ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ। लेकिन प्रामाणिक हदीस इब्न अब्बास केरऽ रिपोर्ट छै, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ रिपोर्ट छै, हाफीज - हदीस विशेषज्ञ - एकरा ई तरह स॑ बतैलकै । एकर कथ्य दोसर मार्गसँ सेहो कयल गेल अछि; इब्न सिरिन, इब्न अब्बास से, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से | ई हदीस अथो` इब्न यासर, इकरीमा, मुहम्मद बिन अम्र बिन अथा, अली बिन अब्दुल्लाह बिन अब्बास, आरू इब्न अब्बास स॑, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) स॑ भी बहुत सारा अन्य न॑ भी बतैन॑ छै, जेकरा म॑ अबू बकर अस-सिद्दीक केरऽ जिक्र नै करलऽ गेलऽ छै । आ ई सबसँ प्रामाणिक अछि। नबी के साथी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), हुनकऽ अनुयायी (तबीईन), आरू हुनकऽ बाद आबै वाला लोगऽ म॑ स॑ अधिकांश विद्वान ई हदीस के पालन करलकै । हुनका लोकनिक तर्क छलनि जे आगि सँ छुटल वस्तु खयला पर वजूद करब जरूरी नहि अछि । ई नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केरऽ दू बातऽ के अंत छै, जेना कि ई पहिलऽ हदीस क॑ बेकार करी रहलऽ होय, यानी कि आगि स॑ छूलऽ चीज केरऽ वज़ूद के बारे म॑ हदीस ।
Imam Tirmidzi : 76
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّازِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْوُضُوءِ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ فَقَالَ تَوَضَّئُوا مِنْهَا وَسُئِلَ عَنْ الْوُضُوءِ مِنْ لُحُومِ الْغَنَمِ فَقَالَ لَا تَتَوَضَّئُوا مِنْهَاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ وَأُسَيْدِ بْنِ حُضَيْرٍ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَوَى الْحَجَّاجُ بْنُ أَرْطَاةَ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ أُسَيْدِ بْنِ حُضَيْرٍ وَالصَّحِيحُ حَدِيثُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَرَوَى عُبَيْدَةُ الضَّبِّيُّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّازِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ ذِي الْغُرَّةِ الْجُهَنِيِّ وَرَوَى حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ الْحَجَّاجِ بْنِ أَرْطَاةَ فَأَخْطَأَ فِيهِ وَقَالَ فِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ أَبِيهِ عَنْ أُسَيْدِ بْنِ حُضَيْرٍ وَالصَّحِيحُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّازِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَ إِسْحَقُ صَحَّ فِي هَذَا الْبَابِ حَدِيثَانِ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثُ الْبَرَاءِ وَحَدِيثُ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ وَهُوَ قَوْلُ أَحْمَدَ وَإِسْحَقَ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ التَّابِعِينَ وَغَيْرِهِمْ أَنَّهُمْ لَمْ يَرَوْا الْوُضُوءَ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَأَهْلِ الْكُوفَةِ
हमरा सब के [हन्नाद] कहलक अछि, हमरा सब के [अबू मुअवियाह] के [अल अ'मासी] स [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अर रजी] स [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स [अल बरो` बिन अजीब] स कहलक अछि ओ कहलनि; एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स ऊंट के मांस के वज़ूद के फैसला के बारे में पूछल गेल छल, ओ जवाब देलखिन: 'एकरा लेल वज़ूद बनाउ'। तखन हुनकासँ बकरीक मांस खएबाक वजहक फैसलाक विषयमे पूछल गेलनि तँ ओ उत्तर देलनि : 'एहि कारणेँ अहाँकेँ वज़ूज नहि करबाक चाही' । ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे जाबिर बिन समुरा आ उसैद बिन हुदलैर सँ सेहो इतिहास अछि' | अबू ईसा कहलनि; अल हज्जाज बिन अर्थ`आह न॑ ई हदीस अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह स॑, अब्दुररहमान बिन अबू लैला स॑, उसैद बिन हुदलैर स॑ बतैन॑ छै । लेकिन जे बात सही छै वू अल बारा` बिन अजीब स॑ अब्दुररहमान बिन अबू लैला केरऽ हदीस छै । अहमद आ इशाक के ई विचार अछि। आरू [उबैदा अदल द्लाब्बी] न॑ [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अर रजी] स॑, [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] स॑, [जुल घुर्राह अल जुहानी] स॑ बतैलकै । एम्हर हम्मद बिन सलामाह अल हज्जाज बिन अर्थ`आह सँ ई हदीस बतौलनि, मुदा ओ अपन रिवायत मे गलती केलनि। ओ कहलनि; अब्दुल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन अबू लैला, अपने पिता से, उसैद बिन हुदलैर से | आरू प्रामाणिक छै, अब्दुल्ला बिन अब्दुल्लाह अर राजी स॑, अब्दुररहमान बिन अबू लैला स॑, अल बारा` बिन अजीब स॑ । इशाक कहलकै; 'एहि अध्याय मे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सँ दू टा सच्चे हदीस अछि; अर्थात बर्रा` की हदीस और जाबिर बिन समुराह की हदीस | ई अहमद आ इशाक के विचार अछि। आरू तबीईन आरू दोसरऽ के बीच स॑ कुछ विद्वानऽ स॑ ई बात के रिवायत होय गेलऽ छै कि हुनकऽ मत छै कि ऊंट के मांस खाय लेली वज़ूद जरूरी नै छै । सुफियन अतस थाउरी आ कुफाक लोकक ई विचार अछि ।
Imam Tirmidzi : 77
حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ بُسْرَةَ بِنْتِ صَفْوَانَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَلَا يُصَلِّ حَتَّى يَتَوَضَّأَقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ وَأَبِي أَيُّوبَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وأَرْوَى ابْنَةِ أُنَيْسٍ وَعَائِشَةَ وَجَابِرٍ وَزَيْدِ بْنِ خَالِدٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَالَ هَكَذَا رَوَاهُ غَيْرُ وَاحِدٍ مِثْلَ هَذَا عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ بُسْرَةَ وَرَوَى أَبُو أُسَامَةَ وَغَيْرُ وَاحِدٍ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَرْوَانَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ بِهَذَا وَرَوَى هَذَا الْحَدِيثَ أَبُو الزِّنَادِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ بُسْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ الْأَوْزَاعِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ قَالَ مُحَمَّدٌ وَأَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ حَدِيثُ بُسْرَةَ و قَالَ أَبُو زُرْعَةَ حَدِيثُ أُمِّ حَبِيبَةَ فِي هَذَا الْبَابِ صَحِيحٌ وَهُوَ حَدِيثُ الْعَلَاءِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ و قَالَ مُحَمَّدٌ لَمْ يَسْمَعْ مَكْحُولٌ مِنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ وَرَوَى مَكْحُولٌ عَنْ رَجُلٍ عَنْ عَنْبَسَةَ غَيْرَ هَذَا الْحَدِيثِ وَكَأَنَّهُ لَمْ يَرَ هَذَا الْحَدِيثَ صَحِيحًا
हमरा सभकेँ कहने छथि [इशक बिन मंसूर] कहलनि; हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद अल कथथान] [हिस्याम बिन उर्वाह]सँ कहि देने छथि; हमरा [हमर पिता] के [बुसरा बिंत शफवान] स सूचित केने छथि जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ओ कहलनि जे, जे कियो अपन जननांग के स्पर्श करत, ता धरि नमाज नहि करबाक चाही जा धरि ओ वजूद नहि क लेत’। ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे उम्म हबीबाह, अबू अय्यूब, अबू हुरैरा, अरवा बिंत उनैस, ऐसिया, जाबीर, जैद बिन खालिद आ अब्दुल्लाह बिन अमरू सँ सेहो रिवायत अछि |' अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस हसन सहीह द्वारा रिवायत कयल गेल अछि'। ओ कहलनि; 'एहि तरहेँ ई हदीस मात्र एक व्यक्ति नहि बतौलनि, हिसियाम बिन उर्वाह सँ, अपन पिता सँ, बुसरा सँ।' आरू [अबू उसामाह] केरऽ इतिहास भी एकमात्र ऐन्हऽ नै छै जे ई हदीस केरऽ रिवायत करलकै, [हिसियाम बिन उर्वाह] स॑, [अपनऽ पिता] स॑, [मरवान] स॑, [बुसराह] स॑, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ । आ इशाक बिन मंसूर सेहो इएह बात कहलनि, ओ कहलनि; 'अबू उसामाह हमरा सभकेँ एना कहलनि'। आरू ई हदीस अबू अज़ जिनाद द्वारा भी रिवायत करलऽ गेलऽ छै, उरवाह स॑, बुसरा स॑, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ । [अली बिन हुजर] हमरा सब के सेहो इएह रिवायत केने छलाह | ओ कहलनि; 'हमरा सब के [अब्दुररहमान बिन अबू अज़ जिनाद], [हुनकर पिता] स, [उरवाह] स, [बुसरा] स, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स एहि तरहे कहल गेल अछि। आरू ई खाली एक व्यक्ति केरऽ ही नै छै, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू तबीईन केरऽ साथी स॑ । एकरा अल औजाई, स्याफी, अहमद आ इशाक' सेहो लेलक। मुहम्मद कहलनि; 'एहि अध्याय मे सबसँ प्रामाणिक हदीस बुसरा के हदीस अछि' | आ अबू ज़ुराह कहलथिन; 'एहि अध्याय मे उम्म हबीबा के हदीस सेहो प्रामाणिक अछि, अर्थात अल 'अला` इब्नुल हरिथ के हदीस, मखुल सँ, 'अनबसाह बिन अबू सुफियन सँ, उम्म हबीबा सँ' | मुहम्मद कहलनि; 'मखुल 'अनबसाह बिन अबू सुफियन' सँ कहियो नहि सुनने छथि । जखन कि 'अनबसाह कोनो आदमी सँ, 'एहि हदीस सँ अलग अनबसाह सँ, जेना ओकरा लागय जे ई हदीस प्रामाणिक अछि'।
Imam Tirmidzi : 78
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ حَدَّثَنَا مُلَازِمُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَدْرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقِ بْنِ عَلِيٍّ هُوَ الْحَنَفِيُّ عَنْ أَبِيهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَهَلْ هُوَ إِلَّا مُضْغَةٌ مِنْهُ أَوْ بَضْعَةٌ مِنْهُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي أُمَامَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رُوِيَ عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَبَعْضِ التَّابِعِينَ أَنَّهُمْ لَمْ يَرَوْا الْوُضُوءَ مِنْ مَسِّ الذَّكَرِ وَهُوَ قَوْلُ أَهْلِ الْكُوفَةِ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَهَذَا الْحَدِيثُ أَحَسَنُ شَيْءٍ رُوِيَ فِي هَذَا الْبَابِ وَقَدْ رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ أَيُّوبُ بْنُ عُتْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ جَابِرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقٍ عَنْ أَبِيهِ وَقَدْ تَكَلَّمَ بَعْضُ أَهْلِ الْحَدِيثِ فِي مُحَمَّدِ بْنِ جَابِرٍ وَأَيُّوبَ بْنِ عُتْبَةَ وَحَدِيثُ مُلَازِمِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَدْرٍ أَصَحُّ وَأَحْسَنُ
[हन्नाद] कहलकै, [मुलाज़िम बिन अमर] न॑ हमरा सब स॑ [अब्दुल्लाह बिन बदर] स॑ [कायस बिन थलक बिन अली अल हनाफी] स॑, [अपनऽ पिता] स॑ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ बतैलकै, हुनी कहलकै: ‘निजी अंग खाली एगो गांठ या एक व्यक्ति स॑ मांस के टुकड़ा होय छै’ । ओ कहलनि; 'एहि अध्याय मे अबू उमामा सँ एकटा रिवायत सेहो अछि' | अबू ईसा कहलनि; 'ई नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम केरऽ एक साथी आरू कुछ ताबीइनऽ स॑ ही नै, हुनकऽ मत छै कि निजी अंगऽ क॑ छुला के कारण वज़ूद नै होय छै । ई कुफा आरू इब्न अल मुबारक के लोगऽ के विचार छै' । आ ई हदीस एहि अध्याय मे रिवायत सबसँ नीक हदीस अछि | ई हदीस [अय्यूब बिन उत्बाह] आरू [मुहम्मद बिन जाबिर] न॑ [कैस बिन थलक] स॑, [हुनकरऽ पिता] स॑ बतैन॑ छै । मुदा, किछु विद्वान एखनो मुहम्मद बिन जाबिर आ अय्यूब बिन उत्बाह के रिवायत पर बहस करैत छथि | अब्दुल्लाह बिन बदर सँ मुलाज़िम बिन अम्र केर हदीस बेसी प्रामाणिक आ नीक अछि |
Imam Tirmidzi : 79
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَهَنَّادٌ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَأَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ وَأَبُو عَمَّارٍ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ قَالُوا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَ بَعْضَ نِسَائِهِ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّلَاةِ وَلَمْ يَتَوَضَّأْقَالَ قُلْتُ مَنْ هِيَ إِلَّا أَنْتِ قَالَ فَضَحِكَتْ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رُوِيَ نَحْوُ هَذَا عَنْ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَأَهْلِ الْكُوفَةِ قَالُوا لَيْسَ فِي الْقُبْلَةِ وُضُوءٌ و قَالَ مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ وَالْأَوْزَاعِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ فِي الْقُبْلَةِ وُضُوءٌ وَهُوَ قَوْلُ غَيْرِ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالتَّابِعِينَ وَإِنَّمَا تَرَكَ أَصْحَابُنَا حَدِيثَ عَائِشَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا لِأَنَّهُ لَا يَصِحُّ عِنْدَهُمْ لِحَالِ الْإِسْنَادِ قَالَ و سَمِعْت أَبَا بَكْرٍ الْعَطَّارَ الْبَصْرِيَّ يَذْكُرُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ الْمَدِينِيِّ قَالَ ضَعَّفَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ هَذَا الْحَدِيثَ جِدًّا وَقَالَ هُوَ شِبْهُ لَا شَيْءَ قَالَ و سَمِعْت مُحَمَّدَ بْنَ إِسْمَعِيلَ يُضَعِّفُ هَذَا الْحَدِيثَ و قَالَ حَبِيبُ بْنُ أَبِي ثَابِتٍ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عُرْوَةَ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَهَا وَلَمْ يَتَوَضَّأْ وَهَذَا لَا يَصِحُّ أَيْضًا وَلَا نَعْرِفُ لِإِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ سَمَاعًا مِنْ عَائِشَةَ وَلَيْسَ يَصِحُّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي هَذَا الْبَابِ شَيْءٌ
हमरा सभकेँ [कुतैबा] आ [हन्नाद] आ [अबू कुरैब] आ [अहमद बिन मुनी’] आ [महमूद बिन घैलन] आ [अबू अम्मर अल हुसैन बिन हुरैत] केँ कहलक अछि; [वाकी'] हमरा सब के [अल अ'मासी] स [हबीब बिन अबू थाबीत] स [उरवाह] स [ऐस्याह] स कहलक कहलक; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन किछु पत्नी के चुम्मा लेलनि, तकर बाद ओ नमाज पढ़य लेल निकललाह आ फेर वज़ूद नहि केलनि'। उरवाह बाजल; ‘अहाँ स्वयं होयब,’ उर्वाह बाजल; 'तखन ओ हँसल'। अबू ईसा कहलनि; 'ई हदीस केरऽ रिवायत करै वाला व्यक्ति खाली नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू तबीईन केरऽ साथी म॑ स॑ एक ही नै छेलै । ई राय सुफियन अत्स त्सौरी आरू कुफा के निवासी न॑ लेलकै । ओ सभ कहलक; 'चुम्बन के कारण वज़ूद के कोनो बाध्यता नै छै'। एम्हर मालिक बिन अनस, अल औजाई, स्याफी, अहमद, आ इशहाक के विचार छलनि जे चुम्मा लेबय लेल वजूद चाही. ई मत नबी के साथी (स.अ.व.) आरू हुनकऽ अनुयायी के एक विद्वानऽ म॑ स॑ ही नै लेलऽ गेलऽ छेलै । मुदा, हमरा लोकनिक साथी लोकनि आइशा सँ हदीस केँ त्यागि देलनि, कारण ओ लोकनि एकरा संचरणक श्रृंखलाक दृष्टि सँ कमजोर बुझैत छलाह | अबू ईसा कहलनि: 'हम अबू बकर अल अथथर अल बशरी के अली इब्न अल मदीनी सं रिवायत करैत सुनलहुं, ओ कहलनि: 'याह्या बिन सैद अल कथथान एहि हदीस के कमजोर क देलखिन्ह. आ कहलनि, 'ई त' ओहिना अछि जेना किछु नहि।' ओ इहो कहलनि जे, हम मुहम्मद बिन इस्माइल केँ एहि हदीस केँ कमजोर करैत सुनलहुँ, आ हबीब बिन अबू थाबीत उरवाह सँ कहियो नहि सुनलनि।' [इब्राहिम अत तैमी] स, [आइशा] स रिवायत अछि जे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हुनका चुम्मा लेलनि आ ओ फेर वज़ूद नहि केलनि। ओना ई हदीस सेहो अमान्य अछि। हमरा सब के ई जानकारी नै अछि जे इब्राहिम अत-तैमी कहियो ऐशा स ई बात सुनने हेताह। एहि विषय पर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) केर तरफ सँ कोनो प्रामाणिक हदीस नहि अछि।
Imam Tirmidzi : 80
حَدَّثَنَا أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ أَبِي السَّفَرِ وَهُوَ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْهَمْدَانِيُّ الْكُوفِيُّ وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ أَبُو عُبَيْدَةَ حَدَّثَنَا وَقَالَ إِسْحَقُ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَمْرٍو الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَعِيشَ بْنِ الْوَلِيدِ الْمَخْزُومِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَاءَ فَأَفْطَرَ فَتَوَضَّأَفَلَقِيتُ ثَوْبَانَ فِي مَسْجِدِ دِمَشْقَ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ صَدَقَ أَنَا صَبَبْتُ لَهُ وَضُوءَهُ قَالَ أَبُو عِيسَى و قَالَ إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ مَعْدَانُ بْنُ طَلْحَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَابْنُ أَبِي طَلْحَةَ أَصَحُّ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رَأَى غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ مِنْ التَّابِعِينَ الْوُضُوءَ مِنْ الْقَيْءِ وَالرُّعَافِ وَهُوَ قَوْلُ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ وَابْنِ الْمُبَارَكِ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ لَيْسَ فِي الْقَيْءِ وَالرُّعَافِ وُضُوءٌ وَهُوَ قَوْلُ مَالِكٍ وَالشَّافِعِيِّ وَقَدْ جَوَّدَ حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ هَذَا الْحَدِيثَ وَحَدِيثُ حُسَيْنٍ أَصَحُّ شَيْءٍ فِي هَذَا الْبَابِ وَرَوَى مَعْمَرٌ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ فَأَخْطَأَ فِيهِ فَقَالَ عَنْ يَعِيشَ بْنِ الْوَلِيدِ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ الْأَوْزَاعِيَّ وَقَالَ عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ وَإِنَّمَا هُوَ مَعْدَانُ بْنُ أَبِي طَلْحَةَ
हमरा सभकेँ [अबू उबैदा बिन अबू अस सफर -अर्थात- अहमद बिन अब्दुल्लाह अल हमदानी अल कुफी] कहि देने छथि । आ [इशाक बिन मंसूर] कहलनि; हमरा सभ [अबू उबैदा] केँ कहि देने छथि, इशाक कहलनि; हमरा सब के कहलक अछि [अब्दु अशशामद बिन अब्दुल वारिट्स] कहलनि, हमरा [हमर पिता] के [हुसैन अल मुअल्लीम] स [याह्या बिन अबू कत्सिर] स कहलक अछि; हमरा [अब्दुररहमान बिन अमरू अल औजाई] स [याईसी इब्नुल वलीद अल मखज़ूमी] स [अपन पिता] स [म'दान बिन अबू तलहह] स [अबू दरदा`] स कहने छथि जे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम उल्टी केलथि, फेर ओ अपन रोजा तोड़ि वजह केलक। अबू दरदा' कहलनि; 'तखन दमिश्कक मस्जिद मे [त्सौबन] सँ भेंट भेल, हम हुनका एहि बातक सूचना देलियनि, आ ओ कहलनि, 'हँ, असल मे हमहीं छलहुँ जे हुनका पर वज़ूदक लेल पानि ढारि देने छलहुँ।' अबू ईसा कहलनि; इशाक बिन मंसूर कहलनि; 'म'दान बिन तलहह।' अबू ईसा कहलनि; 'जखन कि इब्न अबू तल्हाह बेसी प्रामाणिक छथि।' अबू ईसा कहलनि; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ तबीईन के साथी में से एक विद्वान के मत छै कि उल्टी या खून - नाक से खून बहला के कारण वज़ूद करना जरूरी छै।' ई राय सुफियन अतस थाउरी, इब्नुल मुबारक, अहमद आ इशाक केने छलाह।' जखन कि किछु विद्वानक मत छनि जे उल्टी वा नाकसँ खून बहबाक कारणेँ व्यक्तिकेँ वजूद नहि करय पड़ैत छैक | ई विचार मालिक आ स्याफी' केने छलाह | हुसैन अल मुअल्लीम एहि हदीस के नीक मानैत छलाह. आ हुसैन के हदीस एहि अध्याय में सबसँ नीक हदीस अछि | मा'मार ई हदीस याह्या बिन अबू कत्सिर सँ बतौलनि, मुदा ओ एहि मे गलत छलाह | ओ कहलनि; 'या`इसी इब्नुल वालिद सँ, खालिद बिन म'दान सँ, अबू दरदा सँ`, आ ओ एहि मे अल औजाई नामक जिक्र नहि केने छलाह | ओ कहलनि जे ई खालिद बिन म'दान के अछि, भले ओ म'दान बिन अबू तलहा' होथि।