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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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Imam Abu Dawud (الامام ابو داود) - 4590 हदीस

हदीस

Imam Abu Dawud : 141

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ مَرْوَانَ وَمَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ الدِّمَشْقِيُّ الْمَعْنَى قَالَا حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ قَالَ مَحْمُودٌ أَخْبَرَنَا ثَوْرُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ رَجَاءِ بْنِ حَيْوَةَ عَنْ كَاتِبِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَوَضَّأْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي غَزْوَةِ تَبُوكَ فَمَسَحَ أَعْلَى الْخُفَّيْنِ وَأَسْفَلَهُمَاقَالَ أَبُو دَاوُد وَبَلَغَنِي أَنَّهُ لَمْ يَسْمَعْ ثَوْرُ هَذَا الْحَدِيثَ مِنْ رَجَاءٍ

हमनी के [मूसा बिन मरवान] आ [महमूद बिन खालिद अद-दिमासिकी] के अर्थ में बतवले बा, हमनी के बतवले बा [अल-वालिद] कहले बाड़न कि महमूद हमनी के [त्सौर बिन यजीद] के [राजा` बिन हैवाह] से [सेक्रेतातिस अल-मुगिराह बिन स्यूबाह] से [मुघीरा बिन स्यूबाह] से बतवले बाड़न उ कहले बाड़न; हम एक बेर तबुक के लड़ाई के दौरान नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद से पानी डालले रहनी, उ अपना दु खुफ के ऊपर अवुरी नीचे पोंछ देले रहले। अबू दाऊद कहले कि; हमरा मन में आइल बा कि त्साउर राजा` से ई हदीस ना सुनले रहले.

हदीस

Imam Abu Dawud : 142

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ هُوَ الثَّوْرِيُّ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ الْحَكَمِ الثَّقَفِيِّ أَوْ الْحَكَمِ بْنِ سُفْيَانَ الثَّقَفِيِّ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا بَالَ يَتَوَضَّأُ وَيَنْتَضِحُقَالَ أَبُو دَاوُد وَافَقَ سُفْيَانَ جَمَاعَةٌ عَلَى هَذَا الْإِسْنَادِ و قَالَ بَعْضُهُمْ الْحَكَمُ أَوْ ابْنُ الْحَكَمِ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन कत्सिर] हमनी के [सुफियन अतस-त्सौरी] से [मंसूर] से [मुजाहिद] से [सुफियन बिन अल हकम अतस-त्साफी] से या अल हकम बिन सूफियन अतस-त्साफी से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पेशाब कइलन त ओकरा बाद वजूद कइलन आ अपना जननांग के पानी से भी धोवत रहले. अबू दाऊद कहले कि; मंडली एह सनाद में सुफियान के बयान से सहमत भइल आ ओहमें से कुछ लोग कहल कि; अल हकम भा इब्न अल हकम के नाम से जानल जाला.

हदीस

Imam Abu Dawud : 143

حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ هُوَ ابْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ رَجُلٍ مِنْ ثَقِيفٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَالَ ثُمَّ نَضَحَ فَرْجَهُ

हमनी के बतवले बा [इशाक बिन इस्माइल] हमनी के [सुफयान बिन उयैनह] से [इब्न अबी नजीह] से [मुजाहिद] से [त्साकीफ के एगो आदमी] से [उनकर पिता] से बतवले बाड़े उ कहले कि; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर पेशाब कईले रहले अवुरी ओकरा बाद उनुका जननांग प पानी छिड़कले रहले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 144

حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ الْمُهَاجِرِ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا زَائِدَةُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ الْحَكَمِ أَوْ ابْنِ الْحَكَمِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَالَ ثُمَّ تَوَضَّأَ وَنَضَحَ فَرْجَهُ

हमनी के बतावल गईल बा [नशर बिन अल-मुहाजिर] हमनी के बतवले बाड़े [मुअवियाह बिन अमरू] हमनी के [ज`इदा] से [मंसूर] से [मुजाहिद] से [अल हकम] से या इब्न अल हकम [उनकर पिता] से बतवले बाड़े कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पेशाब कईले, ओकरा बाद उ वजूद कईले अवुरी उनुका जननांग प पानी छिड़कले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 145

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ يَعْنِي ابْنَ صَالِحٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ قَالَكُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُدَّامَ أَنْفُسِنَا نَتَنَاوَبُ الرِّعَايَةَ رِعَايَةَ إِبِلِنَا فَكَانَتْ عَلَيَّ رِعَايَةُ الْإِبِلِ فَرَوَّحْتُهَا بِالْعَشِيِّ فَأَدْرَكْتُ رَسُولَ اللَّهِ يَخْطُبُ النَّاسَ فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الْوُضُوءَ ثُمَّ يَقُومُ فَيَرْكَعُ رَكْعَتَيْنِ يُقْبِلُ عَلَيْهِمَا بِقَلْبِهِ وَوَجْهِهِ إِلَّا قَدْ أَوْجَبَفَقُلْتُ بَخٍ بَخٍ مَا أَجْوَدَ هَذِهِ فَقَالَ رَجُلٌ مِنْ بَيْنِ يَدَيَّ الَّتِي قَبْلَهَا يَا عُقْبَةُ أَجْوَدُ مِنْهَا فَنَظَرْتُ فَإِذَا هُوَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَقُلْتُ مَا هِيَ يَا أَبَا حَفْصٍ قَالَ إِنَّهُ قَالَ آنِفًا قَبْلَ أَنْ تَجِيءَ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ الْوُضُوءَ ثُمَّ يَقُولُ حِينَ يَفْرُغُ مِنْ وُضُوئِهِ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ إِلَّا فُتِحَتْ لَهُ أَبْوَابُ الْجَنَّةِ الثَّمَانِيَةُ يَدْخُلُ مِنْ أَيِّهَا شَاءَ قَالَ مُعَاوِيَةُ وَحَدَّثَنِي رَبِيعَةُ بْنُ يَزِيدَ عَنْ أَبِي إِدْرِيسَ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ عَنْ حَيْوَةَ وَهُوَ ابْنُ شُرَيْحٍ عَنْ أَبِي عَقِيلٍ عَنْ ابْنِ عَمِّهِ عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ الْجُهَنِيِّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ أَمْرَ الرِّعَايَةِ قَالَ عِنْدَ قَوْلِهِ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ رَفَعَ بَصَرَهُ إِلَى السَّمَاءِ فَقَالَ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ مُعَاوِيَةَ

हमनी के बतवले बा [अहमद बिन सईद अल हमदानी] हमनी के बतवले बाड़े [इब्नु वहब] हम सुनले बानी कि [मुअवीयह बिन सालिह] [अबू उस्मान] से [जुबैर बिन नुफैर] से [उकबाह बिन अमीर] से एगो हदीस बतावत रहले उ कहले; हमनी के आ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के नौकर हईं जा, माने कि हमनी के बारी-बारी से अपना ऊंट के देखभाल करेनी जा। जब हमार बारी आइल ऊंट के चरवाहा करे के त दुपहरिया में हम ओह लोग के कलम में डाल दिहनी, फेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भीड़ के सामने प्रवचन देत पावलीं। त हम उनुका के कहत सुननी कि - 'रउरा में से केहु अयीसन नईखे जवन वज़ूद क के ठीक से वज़ूद करी, फेर दु रकाअत करे खाती खड़ा होके आपन दिल अवुरी मुँह घुमा देवे, लेकिन उ जरूर स्वर्ग में प्रवेश करी'। त हम कहनी कि बढ़िया! नीमन! ई अभिव्यक्ति केतना अद्भुत बा! तब हमरा सामने एगो आदमी कहलस, "पिछला भाव त अउरी बढ़िया रहे ए उकबाह।" त हम ओह आदमी के देखनी, त पता चलल कि उ [उमर बिन अल-खत्ताब] रडिलल्लाहु अनहु ह। हम पूछनी कि ऊ भाव का ह हे अबू हफसाह? उ जवाब देले, सचमुच, उ आपके आवे से पहिले कहले रहले कि, 'रउआ में से केहु वज़ूद ना करेला अवुरी अपना वज़ूद के सुंदर बनावेला, फिर वज़ूद कईला के बाद उ नमाज कहेले कि अशहदु अन ला इलाहा इल्लाहु वहदाहु ला शरीका लाहु, वा अन्ना मुहम्मदन 'अब्दुहु वा रसुलुहु - हम गवाही देतानी कि अकेले अल्लाह के छोड़ के, बिना कवनो साथी के कवनो देवता नईखन जवन कि इबादत के लायक नईखन आ कि मुहम्मद उनकर सेवक आ दूत हवें - ', बाकिर जन्नत के आठ गो फाटक उनका खातिर खुलल बा, ऊ जवना फाटक से चाहत होखे ओकरा से प्रवेश कर सकेला.' [मुअवियाह] कहले कि; [रबीअह बिन यजीद] हमनी के बतवले बाड़े, [अबू इदरीश] से [उकबाह बिन अमीर] से हमनी के बतवले बाड़े [अल हुसैन बिन ईसा] हमनी के [अब्दुल्लाह बिन यजीद अल-मुकरी] [हैवा बिन स्यूरईह] से [अबू अकील] से [उनकर चाचा के बेटा] से ['उकबाह बिन अमीर अल-जुहानी] से नबी से बतवले बाड़े सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, चरवाहा के मुद्दा के जिक्र कईले बिना अयीसन बयान के संगे। आ ऊ अपना बात के बाद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जिक्र कइलन: ‘... आ आपन वजूद पूरा कइलन, फेर आपन आँख आसमान के ओर उठवले, फेर कहलन...’ आ ऊ एगो हदीस के भी जिक्र कइले जवन मुअविया के हदीस के समान रहे।

हदीस

Imam Abu Dawud : 146

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ عَمْرِو بْنِ عَامِرٍ الْبَجَلِيِّ قَالَ مُحَمَّدٌ هُوَ أَبُو أَسَدِ بْنُ عَمْرٍو قَالَسَأَلْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ عَنْ الْوُضُوءِ فَقَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ وَكُنَّا نُصَلِّي الصَّلَوَاتِ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ

हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन ईसा] हमनी के [शरिक] से [अमरू बिन अमीर अल-बजाली] कहले बाड़े मुहम्मद, यानी अबू असद बिन अमरू उ कहले; हम एक बेर [अनस बिन मलिक] से पूछले रहनी कि वजूद कईसे कईल जाला। त ऊ जवाब दिहलन; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर नमाज के समय वज़ूद करत रहले। आ हमनी के एक वजूद से कई गो नमाज भी कईनी जा।

हदीस

Imam Abu Dawud : 147

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ أَخْبَرَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ حَدَّثَنِي عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ الْفَتْحِ خَمْسَ صَلَوَاتٍ بِوُضُوءٍ وَاحِدٍ وَمَسَحَ عَلَى خُفَّيْهِ فَقَالَ لَهُ عُمَرُ إِنِّي رَأَيْتُكَ صَنَعْتَ الْيَوْمَ شَيْئًا لَمْ تَكُنْ تَصْنَعُهُ قَالَ عَمْدًا صَنَعْتُهُ

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [याह्या] से [सुफयान] हमरा के [अलकामा बिन मर्तसाद] से [सुलेमान बिन बुराइदा] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर फथू मक्का के मौका प पांच नमाज एक वज़ूद से कईले रहले, अवुरी दुनो खुफ के ऊपरी हिस्सा पोंछले रहले। तब उमर उनका से कहले, "साँचहू हम आज तोहरा के अइसन काम करत देखले बानी जवन तू पहिले कबो ना कइले रहलू." उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देले कि हम जानबूझ के कईले बानी।

हदीस

Imam Abu Dawud : 148

حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ مَعْرُوفٍ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ أَنَّهُ سَمِعَ قَتَادَةَ بْنَ دِعَامَةَ حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍأَنَّ رَجُلًا جَاءَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ تَوَضَّأَ وَتَرَكَ عَلَى قَدَمِهِ مِثْلَ مَوْضِعِ الظُّفْرِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا الْحَدِيثُ لَيْسَ بِمَعْرُوفٍ عَنْ جَرِيرِ بْنِ حَازِمٍ وَلَمْ يَرْوِهِ إِلَّا ابْنُ وَهْبٍ وَحْدَهُ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ الْجَزَرِيِّ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ عَنْ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَحْوَهُ قَالَ ارْجِعْ فَأَحْسِنْ وُضُوءَكَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا يُونُسُ وَحُمَيْدٌ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَعْنَى قَتَادَةَ

हमनी के बतवले बाड़े [हारून बिन मा'रूफ] हमनी के [इब्नु वहब] [जरीर बिन हाजिम] से बतवले बाड़े कि उ सुनले बाड़े कि [कतादा बिन दिअमाह] हमनी के [अनस बिन मलिक] बतवले बाड़े कि एगो आदमी रहले जवन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल रहले, जबकि उ वजूद कईले रहले, लेकिन उ अपना गोड़ प नाखून निहन कुछ हिस्सा छोड़ देले रहले - जवन कि अभी तक भींजल रहे -, तब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनका से कहले कि, 'वापिस जाके आपन वज़ूद पूरा करऽ'। अबू दाऊद कहले कि; जरीर बिन हाजिम से एह हदीस के जानकारी नइखे, आ ई अकेले इब्न वहब के ना बतवावल गइल बा। ई हदीस [म’किल बिन उबैदुल्लाह अल-जजरी] से [अबू अज़-जुबैर] से [जाबीर] से [उमर] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायत कइल गइल बा, उदाहरण खातिर, उ कहले बाड़न कि: ‘वापिस जा के आपन वजूद सुधारीं’। हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [हम्मद] हमनी के [यूनुस] अवुरी [हुमैद] के [अल हसन] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, कतदाह हदीस के मतलब के संगे -अनस से-।

हदीस

Imam Abu Dawud : 149

حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ عَنْ بُجَيْرٍ هُوَ ابْنُ سَعْدٍ عَنْ خَالِدٍ عَنْ بَعْضِ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى رَجُلًا يُصَلِّ وَفِي ظَهْرِ قَدَمِهِ لُمْعَةٌ قَدْرُ الدِّرْهَمِ لَمْ يُصِبْهَا الْمَاءُ فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُعِيدَ الْوُضُوءَ وَالصَّلَاةَ

[हैवा बिन स्यूरैह] हमनी के [बकीयाह] से [बुजैर बिन सआद] से [खालिद] से [कुछ साथी] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर एगो आदमी के नमाज पढ़त देखले रहले, जबकि उनुका गोड़ के पीठ प दिरहम के आकार के एगो हिस्सा रहे जवना के पानी ना छूवल रहे। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका के वज़ूद अवुरी नमाज दोहरावे के आदेश देले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 150

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ أُبَيِّ بْنِ خَلَفٍ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ وَعَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ عَنْ عَمِّهِ قَالَشُكِيَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الرَّجُلُ يَجِدُ الشَّيْءَ فِي الصَّلَاةِ حَتَّى يُخَيَّلَ إِلَيْهِ فَقَالَ لَا يَنْفَتِلْ حَتَّى يَسْمَعَ صَوْتًا أَوْ يَجِدَ رِيحًا

हमनी के [कुतैबा बिन सईद] अवुरी [मुहम्मद बिन अहमद बिन उबै बिन खलाफ] से कहले बानी कि उ दुनो लोग कहले कि; [अज-जुहरी] से [सईद बिन अल-मुसैयब] से [सुफयान] आ [अपना चाचा] से [अब्बद बिन तमीम] के बता के उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एह बारे में बतावल गइल कि केहू के नमाज में कुछ अइसन मिलल जवना से ऊ संकोच कर दिहले, एहसे ऊ कहले कि ऊ अपना नमाज से बाहर ना निकले जेहसे कि ओकरा कवनो आवाज सुनाई पड़े भा ओकरा गंध आवे’.

हदीस

Imam Abu Dawud : 151

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ أَحَدُكُمْ فِي الصَّلَاةِ فَوَجَدَ حَرَكَةً فِي دُبُرِهِ أَحْدَثَ أَوْ لَمْ يُحْدِثْ فَأَشْكَلَ عَلَيْهِ فَلَا يَنْصَرِفْ حَتَّى يَسْمَعَ صَوْتًا أَوْ يَجِدَ رِيحًا

हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [हम्मद] हमनी के [सुहैल बिन अबू सालिह] [अपना पिता] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अगर रउआ में से केहु नमाज पढ़ रहल बा, त ओकरा गुदा में कुछ हिलत महसूस होखता, त ओकरा शक बा कि ओकरा हदात होखता कि ना, त ओकरा छोड़े के ना चाही।' -उनकर प्रार्थना- ताकि ऊ अपना -गोदना- के आवाज सुन लेव भा ओकरा के सूंघ लेव।

हदीस

Imam Abu Dawud : 152

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي رَوْقٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَهَا وَلَمْ يَتَوَضَّأْقَالَ أَبُو دَاوُد كَذَا رَوَاهُ الْفِرْيَابِيُّ قَالَ أَبُو دَاوُد وَهُوَ مُرْسَلٌ إِبْرَاهِيمُ التَّيْمِيُّ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ عَائِشَةَ قَالَ أَبُو دَاوُد مَاتَ إِبْرَاهِيمُ التَّيْمِيُّ وَلَمْ يَبْلُغْ أَرْبَعِينَ سَنَةً وَكَانَ يُكْنَى أَبَا أَسْمَاءَ

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमनी के [याह्या] अवुरी [अब्दुररहमान] के बतवले बाड़े उ दुनो लोग कहले कि; हमनी के [सुफयान] के [अबू रौक] से [इब्राहिम अत-तैमी] से [ऐसिया] से बतावल गईल बा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर उनुका के चुम्मा लेले रहले लेकिन उ वज़ूद ना कईले रहले। अबू दाऊद कहले कि; [अल-फिर्याबी] द्वारा एकरा के अईसने बखान कइल गइल बा। अबू दाऊद कहले कि; ऊ मुरसल हउवें. इब्राहिम अत-तैमी कबो ऐसिया से हदीस ना सुनले। अबू दाऊद कहले कि; इब्राहिम अत-तैमी के मौत चालीस साल के होखे से पहिले हो गईल रहे। उनकर कुनिया अबू असमा` ह।

हदीस

Imam Abu Dawud : 153

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ حَبِيبٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَبَّلَ امْرَأَةً مِنْ نِسَائِهِ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّلَاةِ وَلَمْ يَتَوَضَّأْقَالَ عُرْوَةُ مَنْ هِيَ إِلَّا أَنْتِ فَضَحِكَتْ قَالَ أَبُو دَاوُد هَكَذَا رَوَاهُ زَائِدَةُ وَعَبْدُ الْحَمِيدِ الْحِمَّانِيُّ عَنْ سُلَيْمَانَ الْأَعْمَشِ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مَخْلَدٍ الطَّالْقَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ يَعْنِي ابْنَ مَغْرَاءَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ أَخْبَرَنَا أَصْحَابٌ لَنَا عَنْ عُرْوَةَ الْمُزَنِيِّ عَنْ عَائِشَةَ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ لِرَجُلٍ احْكِ عَنِّي أَنَّ هَذَيْنِ يَعْنِي حَدِيثَ الْأَعْمَشِ هَذَا عَنْ حَبِيبٍ وَحَدِيثَهُ بِهَذَا الْإِسْنَادِ فِي الْمُسْتَحَاضَةِ أَنَّهَا تَتَوَضَّأُ لِكُلِّ صَلَاةٍ قَالَ يَحْيَى احْكِ عَنِّي أَنَّهُمَا شِبْهُ لَا شَيْءَ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرُوِيَ عَنْ الثَّوْرِيِّ قَالَ مَا حَدَّثَنَا حَبِيبٌ إِلَّا عَنْ عُرْوَةَ الْمُزَنِيِّ يَعْنِي لَمْ يُحَدِّثْهُمْ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ بِشَيْءٍ قَالَ أَبُو دَاوُد وَقَدْ رَوَى حَمْزَةُ الزَّيَّاتُ عَنْ حَبِيبٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ حَدِيثًا صَحِيحًا

हमनी के बतावल गईल बा [उस्मान बिन अबू सियाबा] हमनी के बतवले बाड़े [वाकी'] हमनी के [अल अमासी] से [हबीब] से [उर्वाह] से [ऐसिया] से बतवले बाड़े कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर अपना एगो पत्नी के चुम्मा लेले रहले, फिर उ नमाज करे निकलले रहले, जबकि उ अब वजूद ना कईले रहली। उरवाह कहलस; ऊ के हऽ अगर रउरा ना त? त ऊ -ऐस्याह- हँसली। अबू दाऊद कहले कि; एह तरह से ई [जैदाह] द्वारा रिवायत कइल गइल बा आ [सुलेमान अल अ'मासी] से [अब्दुल हामिद अल हिम्मानी] हमनी के बतवले बाड़न [इब्राहिम बिन मखलाद अल ठलकानी] हमनी के बतवले बाड़न [अब्दुररहमान बिन मघरा`] हमनी के बतवले बाड़न [अल अमासी] हमनी के [उर्वाह अल मुजानी] से [उर्वाह अल मुजानी] से [हमनी के साथी] एह हदीस के साथ बतवले बाड़न। अबू दाऊद कहले कि; याह्या बिन सईद अल-कथथान एगो आदमी से कहले; बताईं कि ई दू गो हदीस - यानी हबीब से अल अ'माश के ई हदीस आ मुस्तहादह औरत के बारे में एह सनाद के साथे उनकर हदीस, कि ऊ हर नमाज में वजूद करेले - याह्या कहले; बताईं कि ई दुनु हदीस कुछुओ ना ह -धाइफ-। अबू दाऊद कहले कि; अत्स-त्सौरी के बखान में ऊ कहले बाड़न; हबीब हमनी के ना बतवले सिवाय उर्वाह अल-मुजानी से अर्थात; उ उरवाह बिन अज-जुबैर से उ लोग के कुछूओ ना बतवले। अबू दाऊद कहले कि; [हमजाह अज़-ज़ायत] [हबीब] से [उरवाह बिन अज़-जुबैर] से [आइशा] से एगो सहीह हदीस बतवले बाड़े।

हदीस

Imam Abu Dawud : 154

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ أَنَّهُ سَمِعَ عُرْوَةَيَقُولُ دَخَلْتُ عَلَى مَرْوَانَ بْنِ الْحَكَمِ فَذَكَرْنَا مَا يَكُونُ مِنْهُ الْوُضُوءُ فَقَالَ مَرْوَانُ وَمِنْ مَسِّ الذَّكَرِ فَقَالَ عُرْوَةُ مَا عَلِمْتُ ذَلِكَ فَقَالَ مَرْوَانُ أَخْبَرَتْنِي بُسْرَةُ بِنْتُ صَفْوَانَ أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ مَسَّ ذَكَرَهُ فَلْيَتَوَضَّأْ

[अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] से [मलिक] से [अब्दुल्लाह बिन अबू बकर] से बतवले बाड़े कि उ एक बेर [उरवाह] के कहत सुनले रहले; एक बेर हम [मरवान बिन अल हकम] के सामना कईले रहनी, फेर हम कुछ अयीसन बात कईनी, जवना में वजूद के जरूरत रहे। तब मरवान कहले; आ जननांग के छूवे खातिर भी। त उर्वाह कहलस; हमरा त ओह बारे में पता ना रहे। ओकरा बाद मरवान कहले; [बुसरा बिंत शफवान] हमरा के सूचित कइले बाड़ी कि ऊ एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले रहली कि जे केहू ओकरा जननांग के छूवेला, ऊ वजूद कर देव’.

हदीस

Imam Abu Dawud : 155

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا مُلَازِمُ بْنُ عَمْرٍو الْحَنَفِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَدْرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقَدِمْنَا عَلَى نَبِيِّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَجَاءَ رَجُلٌ كَأَنَّهُ بَدَوِيٌّ فَقَالَ يَا نَبِيَّ اللَّهِ مَا تَرَى فِي مَسِّ الرَّجُلِ ذَكَرَهُ بَعْدَ مَا يَتَوَضَّأُ فَقَالَ هَلْ هُوَ إِلَّا مُضْغَةٌ مِنْهُ أَوْ قَالَ بَضْعَةٌ مِنْهُقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ هِشَامُ بْنُ حَسَّانَ وَسُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَشُعْبَةُ وَابْنُ عُيَيْنَةَ وَجَرِيرٌ الرَّازِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَابِرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقٍ حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَابِرٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ طَلْقٍ عَنْ أَبِيهِ بِإِسْنَادِهِ وَمَعْنَاهُ وَقَالَ فِي الصَّلَاةِ

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [मुलाज़िम बिन अमरू अल हनाफी] हमनी के [अब्दुल्लाह बिन बदर] से [कैस बिन थलक] से [उनकर पिता] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के देखे आइल रहनी, तब एगो आदमी आइल जवन अंदरूनी हिस्सा के लागत रहे, तब उ कहले; 'हे अल्लाह के नबी, वजूद कईला के बाद ओकर निजी अंग के छूवे वाला के बारे में आपके का विचार बा? त उ कहले कि, 'का उनुकर जननांग सिर्फ ओ आदमी के मांस के टुकड़ा नईखे?' अबू दाऊद कहले कि; [हिस्याम बिन हसन] आ [सुफयान अतस-त्सौरी] आ [स्यूबाह] आ [इब्न उयनाह] आ [जरीर अर-राजी] [मुहम्मद बिन जाबिर] से [कायस बिन थलक] से रिवायत बा। हमनी के रिवायत कइले बाड़न [मुसद्दद] हमनी के [मुहम्मद बिन जाबिर] के [कैस बिन थलक] से [अपना पिता] से एकर सनाद आ ओकर अर्थ के साथे रिवायत कइले बाड़न, आ उ जिक्र कइले बाड़न; -जननांग के छूवल- प्रार्थना में।

हदीस

Imam Abu Dawud : 156

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الرَّازِيِّ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ قَالَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْوُضُوءِ مِنْ لُحُومِ الْإِبِلِ فَقَالَ تَوَضَّئُوا مِنْهَا وَسُئِلَ عَنْ لُحُومِ الْغَنَمِ فَقَالَ لَا تَوَضَّئُوا مِنْهَا وَسُئِلَ عَنْ الصَّلَاةِ فِي مَبَارِكِ الْإِبِلِ فَقَالَ لَا تُصَلُّوا فِي مَبَارِكِ الْإِبِلِ فَإِنَّهَا مِنْ الشَّيَاطِينِ وَسُئِلَ عَنْ الصَّلَاةِ فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ فَقَالَ صَلُّوا فِيهَا فَإِنَّهَا بَرَكَةٌ

हमनी के बतवले बा [उस्मान बिन अबू स्याइबा] हमनी के बतवले बाड़े [अबू मुअवियाह] हमनी के [अल अ'मासी] [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अर-राजी] से [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] से [अल-बारा` बिन अजीब] से बतवले बाड़े उ कहले; एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ऊंट के मांस खाए खातिर वजूद करे के बारे में पूछल गइल रहे। त उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि एकरा खातिर वज़ूद बनाईं! आ उनुका से बकरी के मांस खाए खातिर वज़ूद करे के बारे में भी पूछल गईल। त उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, एकरा चलते वज़ूद मत करीं! आ ऊंट के बंधन वाला जगह पर नमाज पढ़े के बारे में भी पूछल गइल, त ऊ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि ओह जगह पर नमाज मत करीं, काहे कि वाकई में ई शैतान में से एगो ह’। आ उनुका से ओह जगह पर नमाज पढ़े के बारे में भी पूछल गइल जहाँ बकरी के बान्हल बा, त ऊ कहले कि, 'ओह में प्रार्थना करीं, काहे कि ओह जगह पर निश्चय ही आशीर्वाद बा।'

हदीस

Imam Abu Dawud : 157

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ وَأَيُّوبُ بْنُ مُحَمَّدٍ الرَّقِّيُّ وَعَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ الْحِمْصِيُّ الْمَعْنَى قَالُوا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ أَخْبَرَنَا هِلَالُ بْنُ مَيْمُونٍ الْجُهَنِيُّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ قَالَ هِلَالٌ لَا أَعْلَمُهُ إِلَّا عَنْ أَبِي سَعِيدٍ وَقَالَ أَيُّوبُ وَعَمْرٌو أُرَاهُ عَنْ أَبِي سَعِيدٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ بِغُلَامٍ وَهُوَ يَسْلُخُ شَاةً فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَنَحَّ حَتَّى أُرِيَكَ فَأَدْخَلَ يَدَهُ بَيْنَ الْجِلْدِ وَاللَّحْمِ فَدَحَسَ بِهَا حَتَّى تَوَارَتْ إِلَى الْإِبِطِ ثُمَّ مَضَى فَصَلَّى لِلنَّاسِ وَلَمْ يَتَوَضَّأْقَالَ أَبُو دَاوُد زَادَ عَمْرٌو فِي حَدِيثِهِ يَعْنِي لَمْ يَمَسَّ مَاءً وَقَالَ عَنْ هِلَالِ بْنِ مَيْمُونٍ الرَّمْلِيِّ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرَوَاهُ عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ هِلَالٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْسَلًا لَمْ يَذْكُرْ أَبَا سَعِيدٍ

[मुहम्मद बिन अल-अला`] आ [अय्यूब बिन मुहम्मद अर रक्की] आ [अमर बिन उस्मान अल हिमशी] हमनी से अर्थ में रिलेट कइले बाड़न, उ लोग कहले बा; [मरवान बिन मुअवियाह] हमनी के [हिलाल बिन मैमुन अल-जुहानी] से ['अथा` बिन यजीद अल-लैत्सी] कहले बाड़न [हिलाल]; हमरा एकरा के [अबू सईद] के छोड़ के नईखे मालूम। [अय्यूब] आ [अमर] कहले कि; हमरा लागता कि इ हदीस [अबू सईद] से ह कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर एगो बच्चा के पास से गुजरले रहले जवन भेड़ के चमड़ा निकालत रहे, फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका से कहले रहले कि, 'एक तरफ बढ़, हम रउआ के सिखा देब कि भेड़ के चमड़ा कईसे बनावल जाला-'। फेर ऊ आपन हाथ चमड़ा आ मांस के बीच में डाल दिहलन, फेर ओकरा के तबले मजबूती से दबा दिहलन जबले ऊ ओकरा के चमड़ा ना लेत रहले जबले कि उनकर हाथ भेड़ के बगल के नीचे ना लुकाइल, फेर जा के लोग से प्रार्थना कइलन आ वजूद ना कइलन. अबू दाऊद कहले कि; अमरू अपना हदीस इतिहास में जोड़ले बाड़न; उ पानी के हाथ ना लगवले। आ ऊ हिलाल बिन मैमुन अर-रामली से कहले. अबू दाउद कहले कि; आ ई [अब्दुल वाहिद बिन जियाद] से आ [अबू मुअवियाह] से [हिलाल] से [अथा`] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बिना अबू सईद के जिक्र कइले मुर्सल तरीका से रिवायत कइल गइल बा।

हदीस

Imam Abu Dawud : 158

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ يَعْنِي ابْنَ بِلَالٍ عَنْ جَعْفَرٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَابِرٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ بِالسُّوقِ دَاخِلًا مِنْ بَعْضِ الْعَالِيَةِ وَالنَّاسُ كَنَفَتَيْهِ فَمَرَّ بِجَدْيٍ أَسَكَّ مَيِّتٍ فَتَنَاوَلَهُ فَأَخَذَ بِأُذُنِهِ ثُمَّ قَالَ أَيُّكُمْ يُحِبُّ أَنَّ هَذَا لَهُ وَسَاقَ الْحَدِيثَ

[अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] हमनी के [सुलेमान बिन बिलाल] [जफर] से [उनकर पिता] से [जाबिर] से बतवले बाड़े कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर ऊपरी सड़क के कुछ हिस्सा से होके एगो बाजार में घुसल रहले, जबकि बहुत लोग उनुका दुनो ओर से चलत रहले। फेर छोट-छोट कान वाला बकरी के बकरी के लाश से गुजरत रहले, फेर बकरी के कान पकड़ के ले गईले, फेर कहले: 'रउरा में से कवन पसंद बा कि इ उनुकर ह'। ओकरा बाद उ हदीस के आगे बढ़वले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 159

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَكَلَ كَتِفَ شَاةٍ ثُمَّ صَلَّى وَلَمْ يَتَوَضَّأْ

हमनी के बतावल गईल बा [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] हमनी के [मलिक] से [जैद बिन असलम] से ['अथा` बिन यासर] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) एक बेर बकरी के जांघ के मांस खईले रहले, ओकरा बाद उ नमाज कईले रहले अवुरी फेर वज़ूद ना कईले रहले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 160

حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَنْبَارِيُّ الْمَعْنَى قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ مِسْعَرٍ عَنْ أَبِي صَخْرَةَ جَامِعِ بْنِ شَدَّادٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَضِفْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ لَيْلَةٍ فَأَمَرَ بِجَنْبٍ فَشُوِيَ وَأَخَذَ الشَّفْرَةَ فَجَعَلَ يَحُزُّ لِي بِهَا مِنْهُ قَالَ فَجَاءَ بِلَالٌ فَآذَنَهُ بِالصَّلَاةِ قَالَ فَأَلْقَى الشَّفْرَةَ وَقَالَ مَا لَهُ تَرِبَتْ يَدَاهُ وَقَامَ يُصَلِّزَادَ الْأَنْبَارِيُّ وَكَانَ شَارِبِي وَفَى فَقَصَّهُ لِي عَلَى سِوَاكٍ أَوْ قَالَ أَقُصُّهُ لَكَ عَلَى سِوَاكٍ

हमनी के [उस्मान बिन अबू स्याइबा] अवुरी [मुहम्मद बिन सुलेमान अल अनबरी] के मतलब बता के उ कहले कि; [मिस'र] से [अबू शखराह जामी' बिन स्याद्दद] से [अल-मुगीरा बिन अब्दुल्लाह] से [अल-मुगीरा बिन शु'बाह] से हमनी के [वाकी'] के बता के उ कहले; एक रात हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गईनी, फिर उ हमरा के बकरी के मांस के एगो बड़ टुकड़ा लेवे के आदेश देले, ओकरा के कटहर कईला के बाद उ एगो चाकू लेले, फिर उ हमरा खातिर ओह चाकू से ओकरा के टुकड़ा-टुकड़ा क देले। शु'बाह कहले कि; तब बिलाल नमाज खातिर नमाज के आह्वान करत अइले, फेर चाकू फेंक के कहले कि: 'उ केतना भाग्यशाली बा, गंभीरता से!' -काहे कि उ लोग के नमाज पढ़े खातिर बोलवले रहले-- फेर उ नमाज पढ़े खातिर खड़ा हो गईले। अल अनबारी आगे कहले कि; ओह घरी हमार मूंछ लमहर रहे, एहसे ऊ ओकरा के मिसवाक के साइज में काट दिहले. भा ऊ कहले कि: 'हम तोहरा खातिर एकरा के सिवाक के साइज में काट देब'।