Imam Abu Dawud : 1
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ الْقَعْنَبِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي ابْنَ مُحَمَّدٍ عَنْ مُحَمَّدٍ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا ذَهَبَ الْمَذْهَبَ أَبْعَدَ
हमनी के बतावल गइल बा [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह बिन कअनब अल कानबी] हमनी के [अब्दुल अजीज यानी बिन मुहम्मद] से [मुहम्मद यानी बिन अमरू] से [अबू सलामा] से [अल मुगिराह बिन स्यूबाह] से बतवले बाड़े कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के राहत देवे खातिर जाए के चाहत रहले त उ दूर रहले।
Imam Abu Dawud : 2
حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ أَخْبَرَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ الْبَرَازَ انْطَلَقَ حَتَّى لَا يَرَاهُ أَحَدٌ
[मुसद्दाद बिन मुसरहद] हमनी के बतवले बाड़े [ईसा बिन यूनुस] हमनी के [इस्माइल बिन अब्दुल मलिक] [अबू अज़ जुबैर] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना के राहत देवे के चाहत रहले त उ तब तक चल गईले जब तक कि केहु उनुका के ना देखले।
Imam Abu Dawud : 3
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا أَبُو التَّيَّاحِ قَالَ حَدَّثَنِي شَيْخٌ قَالَلَمَّا قَدِمَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ الْبَصْرَةَ فَكَانَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي مُوسَى فَكَتَبَ عَبْدُ اللَّهِ إِلَى أَبِي مُوسَى يَسْأَلُهُ عَنْ أَشْيَاءَ فَكَتَبَ إِلَيْهِ أَبُو مُوسَى إِنِّي كُنْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَأَرَادَ أَنْ يَبُولَ فَأَتَى دَمِثًا فِي أَصْلِ جِدَارٍ فَبَالَ ثُمَّ قَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَرَادَ أَحَدُكُمْ أَنْ يَبُولَ فَلْيَرْتَدْ لِبَوْلِهِ مَوْضِعًا
हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [हम्मद] हमनी के बतवले बाड़े [अबू अत तयह] उ कहले बाड़े; हमनी के [एक शेख] के बता के उ कहले; जब अब्दुल्ला बिन अब्बास बसरा अइले, जब उ [अबू मूसा] से हदीस बतवले त अब्दुल्ला अबू मूसा के कई गो बात पूछे के चक्कर में चिट्ठी लिखले। त अबू मूसा उनका के एगो चिट्ठी लिखले -जवाब में-, असल में हम एक दिन रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे रहनी, अवुरी उ पेशाब करे के चाहत रहले, एहसे उ देवाल के नीचे मुलायम जमीन वाला जगह प गईले, फेर उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अगर रउआ में से केहु पेशाब करे के चाहत बा त ओकरा के पेशाब करे खाती मुलायम जमीन वाला जगह खोजे के चाही'।
Imam Abu Dawud : 4
حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ وَعَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ قَالَ عَنْ حَمَّادٍ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ عَنْ عَبْدِ الْوَارِثِ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ مَرَّةً أَعُوذُ بِاللَّهِ و قَالَ وُهَيْبٌ فَلْيَتَعَوَّذْ بِاللَّهِ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَمْرٍو يَعْنِي السَّدُوسِيَّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ هُوَ ابْنُ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسٍ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ وَقَالَ شُعْبَةُ وَقَالَ مَرَّةً أَعُوذُ بِاللَّهِ
हमनी के बतवले बा [मुसद्दद बिन मुसरहद] हमनी के [हमद बिन जैद] अवुरी [अब्दुल वारित्स] से [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] से [अनस] से बतवले बाड़े उ कहले कि; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, जब उ शौचालय में घुसे के चाहत रहले - उ - मुसद्दद - हम्मद से रिवायत कईले - उ कहले कि, 'हे अल्लाह, हम सचमुच आपके शरण लेतानी' - जबकि उ जवन अब्दुल हरित से रिवायत कईले - उ कहले कि, 'हम नर शैतान अवुरी महिला शैतान से अल्लाह से शरण लेतानी'। अबू दाऊद कहले कि; स्यू'बाह अब्दुल अजीज से रिवायत बा -लाफाझ के साथ-; 'हे अल्लाह, वाकई हम तोहरा शरण लेत बानी', एगो अउरी मौका पर ऊ -लाफज- के साथ बतवले; 'हम अल्लाह के शरण लेत बानी', आ वुहैब कहले; 'उ अल्लाह के शरण लेवे'। हमनी के बतवले बाड़े [अल हसन बिन अमरू, अर्थात अस सदुसी] हमनी के [वाकी'] से [स्यूबाह] से [अब्दुल अजीज, यानी इब्न शुहैब] से [अनास] से एह हदीस के शब्दावली के संगे बतवले बाड़े, उ -स्यूबाह- -अब्दुल अजीज से शब्दावली के संगे-; 'हे अल्लाह, साँचहू हम तोहरा शरण लेत बानी'। स्यू'बाह कहले कि; अब्दुल अजीज एगो अउरी मौका पर -शब्द के साथ- बतवले; 'हम अल्लाह के शरण लेत बानी'।
Imam Abu Dawud : 5
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ مَرْزُوقٍ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ النَّضِرِ بْنِ أَنَسٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْقَمَعَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ هَذِهِ الْحُشُوشَ مُحْتَضَرَةٌ فَإِذَا أَتَى أَحَدُكُمْ الْخَلَاءَ فَلْيَقُلْ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنْ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ
हमनी के बतवले बाड़े [अमरू बिन मर्जुक] हमनी के [स्यूबाह] से [कतादह] से [अन नद्र बिन अनस] से [जैद बिन अरकाम] से रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'वास्तव में, जवना जगह प आप शौच करेनी, उ जगह शैतान के हाजिर होखेला, एहसे जब आपके में से केहु शौचालय में जाला त उ कहे; उ कहले कि, हम नर शैतान अवुरी महिला शैतान से अल्लाह के शरण लेवेनी।
Imam Abu Dawud : 6
حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ سَلْمَانَ قَالَقِيلَ لَهُ لَقَدْ عَلَّمَكُمْ نَبِيُّكُمْ كُلَّ شَيْءٍ حَتَّى الْخِرَاءَةَ قَالَ أَجَلْ لَقَدْ نَهَانَا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ بِغَائِطٍ أَوْ بَوْلٍ وَأَنْ لَا نَسْتَنْجِيَ بِالْيَمِينِ وَأَنْ لَا يَسْتَنْجِيَ أَحَدُنَا بِأَقَلَّ مِنْ ثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ أَوْ نَسْتَنْجِيَ بِرَجِيعٍ أَوْ عَظْمٍ
[मुसद्दद बिन मुसरहद] हमनी के [अबू मुअवियाह] से [अल अ'माश] से [इब्राहिम] से [अब्दुररहमान बिन यजीद] से [सलमान] से बतवले उ कहले; ओकरा से कहल गइल कि, 'वास्तव में तोहार नबी तोहरा के सब कुछ सिखवले बाड़े, इहाँ तक कि शौच के बात भी?' सलमान जवाब दिहले: 'हँ, उ (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हमनी के शौच भा पेशाब करत घरी किबला के सामना करे से मना कईले रहले, दाहिना हाथ से एस्तिया करे से, हमनी में से केहु के तीन पत्थर से कम से कम एस्तिया ना करे से, चाहे जानवर के गोबर चाहे हड्डी से मना कईले रहले।'
Imam Abu Dawud : 7
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ النُّفَيْلِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلَانَ عَنْ الْقَعْقَاعِ بْنِ حَكِيمٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّمَا أَنَا لَكُمْ بِمَنْزِلَةِ الْوَالِدِ أُعَلِّمُكُمْ فَإِذَا أَتَى أَحَدُكُمْ الْغَائِطَ فَلَا يَسْتَقْبِلْ الْقِبْلَةَ وَلَا يَسْتَدْبِرْهَا وَلَا يَسْتَطِبْ بِيَمِينِهِ وَكَانَ يَأْمُرُ بِثَلَاثَةِ أَحْجَارٍ وَيَنْهَى عَنْ الرَّوْثِ وَالرِّمَّةِ
हमनी के बतवले बा [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद एन नुफैली] हमनी के [इब्नुल मुबारक] से [मुहम्मद बिन अजलान] से [अल का'का' बिन हकीम] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले कि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में, हम रउआ खातिर खाली एगो माता-पिता के स्थिति निहन बानी, हम रउआ के सिखावत बानी; जब रउरा में से केहू पेशाब करे के चाहत होखे त किबला के ओर ना मुँह करीं, ना ओकरा ओर पीठ करीं, ना ओकरा दाहिना हाथ से संस्कार करीं।' आ तीन गो पत्थर से प्रार्थना करे के भी आदेश दिहलन आ जानवरन के गोबर आ भींजल हड्डी से प्रार्थना करे से मना कर दिहलन.
Imam Abu Dawud : 8
حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ رِوَايَةًقَالَ إِذَا أَتَيْتُمْ الْغَائِطَ فَلَا تَسْتَقْبِلُوا الْقِبْلَةَ بِغَائِطٍ وَلَا بَوْلٍ وَلَكِنْ شَرِّقُوا أَوْ غَرِّبُوافَقَدِمْنَا الشَّامَ فَوَجَدْنَا مَرَاحِيضَ قَدْ بُنِيَتْ قِبَلَ الْقِبْلَةِ فَكُنَّا نَنْحَرِفُ عَنْهَا وَنَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद बिन मुसरहद] हमनी के [सुफयान] [अज ज़ुहरी] से [अथा` बिन यजीद अल लैत्सी] से [अबू अय्यूब] से बतवले बाड़े जवना के उ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायत कईले बाड़े, उ कहले कि, 'जब आप कवनो जगह प शौच करे जाईब, त शौच अवुरी पेशाब करत समय किबला के ओर मत करीं, बालुक पूरब के ओर मुँह करीं।' या पश्चिम के ओर से'। फेर हम सीरिया अइनी, त पाता चलल कि शौच के जगह किबला के ओर मुँह क के बनल बा, एहसे हमनी के ओह लोग से मुँह मोड़ के अल्लाह से माफी मंगले रहनी जा।
Imam Abu Dawud : 9
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ يَحْيَى عَنْ أَبِي زَيْدٍ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ أَبِي مَعْقِلٍ الْأَسَدِيِّ قَالَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَتَيْنِ بِبَوْلٍ أَوْ غَائِطٍقَالَ أَبُو دَاوُد وَأَبُو زَيْدٍ هُوَ مَوْلَى بَنِي ثَعْلَبَةَ
हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [वुहैब] हमनी के बतवले बाड़े ['अमरू बिन याह्या] [अबू जैद] से [अबू म'किल अल असदी] से उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के शौच भा पेशाब करत घरी दुनो किबला - मक्का अवुरी बैतुल मकदीस - के सामना करे से मना कईले रहले। अबू दाऊद कहले कि; अबू जैद बनू त्सा'लाबा के पूर्व सहया हवें।
Imam Abu Dawud : 10
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ فَارِسٍ حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى عَنْ الْحَسَنِ بْنِ ذَكْوَانَ عَنْ مَرْوَانَ الْأَصْفَرِ قَالَرَأَيْتُ ابْنَ عُمَرَ أَنَاخَ رَاحِلَتَهُ مُسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةِ ثُمَّ جَلَسَ يَبُولُ إِلَيْهَا فَقُلْتُ يَا أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَلَيْسَ قَدْ نُهِيَ عَنْ هَذَا قَالَ بَلَى إِنَّمَا نُهِيَ عَنْ ذَلِكَ فِي الْفَضَاءِ فَإِذَا كَانَ بَيْنَكَ وَبَيْنَ الْقِبْلَةِ شَيْءٌ يَسْتُرُكَ فَلَا بَأْسَ
हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन याह्या बिन फारिस] हमनी के [शफवान बिन ईसा] से [अल हसन बिन ज़ाकवान] से [मरवान अल अशफर] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम एक बेर [इब्न उमर] के उनकर ऊंट किबला के ओर मुँह कइले देखले रहनी, फेर ऊ बइठ के ओकरा के ओर मुँह करत पेशाब कइले, फेर हम पूछनी; 'हे अबू अब्दुररहमान, का ई मना नइखे?' उ जवाब दिहले; 'ठीक बा, लेकिन अगर रउआ खुला जगह प करीं, अगर रउआ आ किबला के बीच कुछ ढंकले बा त मना बा, त ठीक बा'।
Imam Abu Dawud : 11
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَمِّهِ وَاسِعِ بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَلَقَدْ ارْتَقَيْتُ عَلَى ظَهْرِ الْبَيْتِ فَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى لَبِنَتَيْنِ مُسْتَقْبِلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ لِحَاجَتِهِ
[अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] से [मालिक] से [याह्या बिन सईद] से [मुहम्मद बिन याह्या बिन हब्बन] से [उनकर चाचा, वसी’ बिन हब्बन] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बता के उ कहले; 'साँचहूँ हम एक बेर एगो घर के छत पर चढ़ल रहनी, फेर शौच के हालत में दू ईंट पर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बैतुल मकदीस के ओर मुँह कइले देखनी।'
Imam Abu Dawud : 12
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ سَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ إِسْحَقَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبَانَ بْنِ صَالِحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَنَهَى نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَسْتَقْبِلَ الْقِبْلَةَ بِبَوْلٍ فَرَأَيْتُهُ قَبْلَ أَنْ يُقْبَضَ بِعَامٍ يَسْتَقْبِلُهَا
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमनी के बतवले बाड़े [वहब बिन जरीर] हमनी के बतवले बाड़े [हमार बाबूजी] उ कहले बाड़े; हम एक बेर [मुहम्मद बिन इशाक] के [अबन बिन सालिह] से [मुजाहिद] से [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] से एगो हदीस बतावत सुनले रहनी उ कहले रहले; नबीयूल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमनी के पेशाब करत घरी किबला के सामना करे से मना कर दिहले रहले, फेर हम उनुका के मरला से एक साल पहिले देखनी, किबला के ओर मुँह क के पेशाब करत रहले।
Imam Abu Dawud : 13
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ رَجُلٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَرَادَ حَاجَةً لَا يَرْفَعُ ثَوْبَهُ حَتَّى يَدْنُوَ مِنْ الْأَرْضِقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ حَرْبٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ وَهُوَ ضَعِيفٌ قَالَ أَبُو عِيسَى الرَّمْلِيُّ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بِهِ
हमनी के बतावल गइल बा [जुहैर बिन हर्ब] [अल अमासी] से [इब्न उमर] से [एक आदमी] से [वाकी’] से बतवले बाड़न कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब अपना के राहत देवे के चाहत रहले त जब तक उ जमीन के नजदीक ना रहले तब तक कपड़ा ना उठवले। अबू दाऊद कहले कि; [अब्दुस्सलम बिन हर्ब] द्वारा [अल अ'मासी] से [अनस बिन मलिक] से रिवायत बा, लेकिन उ -अल अ'मासी- ध'इफ। अबू ईसा अर रामली कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े अहमद बिन अल वालिद हमनी के बतवले बाड़े कि अमरू बिन आऊन हमनी के अब्दुस्सलम के एह हदीस से बतवले बाड़े।
Imam Abu Dawud : 14
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ مَيْسَرَةَ حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ هِلَالِ بْنِ عِيَاضٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَخْرُجْ الرَّجُلَانِ يَضْرِبَانِ الْغَائِطَ كَاشِفَيْنِ عَنْ عَوْرَتِهِمَا يَتَحَدَّثَانِ فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَمْقُتُ عَلَى ذَلِكَقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا لَمْ يُسْنِدْهُ إِلَّا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ
हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह बिन उमर बिन मैसाराह] हमनी के बतवले बाड़े [इब्नु महदी] हमनी के [इक्रीमा बिन अम्मर] [याह्या बिन अबू कथिर] से [हिलाल बिन इयाद] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हमरा [अबू सईद] के बता के उ कहले; एक बेर हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले रहनी कि, 'दु आदमी के कवनो जगह प शौच करे ना जाए दीं जबकि दुनो के निजी अंग उजागर होखे, फेर बात करीं, काहेंकी सचमुच अल्लाह 'अज्जा वजल्ला एकरा से नफरत करेले'। अबू दाऊद कहले कि; इ वाक्य इकरीमा बिन अम्मर के छोड़ के ना उठल।
Imam Abu Dawud : 15
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ وَأَبُو بَكْرِ ابْنَا أَبِي شَيْبَةَ قَالَا حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ الضَّحَّاكِ بْنِ عُثْمَانَ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَمَرَّ رَجُلٌ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَبُولُ فَسَلَّمَ عَلَيْهِ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيْهِقَالَ أَبُو دَاوُد وَرُوِيَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ وَغَيْرِهِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَيَمَّمَ ثُمَّ رَدَّ عَلَى الرَّجُلِ السَّلَامَ
हमनी के बतावल गइल बा कि [उस्मान] आ [अबू बकर], दुनु अबू सियाबा के बेटा, उ लोग कहले कि; हमनी के [उमर बिन सअद] के [सुफयान] से [अध धहक बिन उस्मान] से [नफी'] से [इब्न उमर] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; एक बेर एगो आदमी रहे जवन पेशाब करत घरी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे से गुजरल रहे, ओकरा बाद उ आदमी उनुका के नमस्कार कईलस, लेकिन उ आपन सलामी के जवाब ना देले। अबू दाऊद कहले कि; इब्न उमर आ अउरी लोग से रिवायत बा, कि जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तायम्मम कइले त ओह आदमी के सलामी के जवाब दिहले।
Imam Abu Dawud : 16
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الْأَعْلَى حَدَّثَنَا سَعِيدٌ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ حُضَيْنِ بْنِ الْمُنْذِرِ أَبِي سَاسَانَ عَنْ الْمُهَاجِرِ بْنِ قُنْفُذٍ أَنَّهُأَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَبُولُ فَسَلَّمَ عَلَيْهِ فَلَمْ يَرُدَّ عَلَيْهِ حَتَّى تَوَضَّأَ ثُمَّ اعْتَذَرَ إِلَيْهِ فَقَالَ إِنِّي كَرِهْتُ أَنْ أَذْكُرَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ إِلَّا عَلَى طُهْرٍ أَوْ قَالَ عَلَى طَهَارَةٍ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल अ'ला] हमनी के [सईद] से [कतादह] से [अल हसन] से [हुदैन बिन अल मुंडिर अबी सासान] से [अल मुहाजिर बिन कुनफुज] से बतवले बाड़े कि उ एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुलाकात कईले रहले, जब उ पेशाब करत रहले, फिर उ नबी से नमस्कार कहले रहले, लेकिन जब तक वजूद ना कईलस तब तक उ आपन नमस्कार के जवाब ना देले, फिर माफी मंगले अवुरी कहले कि, 'वास्तव में हमरा अल्लाह त'आला के नाम तब तक लेवल पसंद नईखे जब तक उ शुद्ध ना होखे'।
Imam Abu Dawud : 17
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ خَالِدِ بْنِ سَلَمَةَ يَعْنِي الْفَأْفَاءَ عَنْ الْبَهِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ عَلَى كُلِّ أَحْيَانِهِ
हमनी के बतवले बा [मुहम्मद बिन अल अला] हमनी के [इब्न अबी ज़ा`इदा] से [अपना पिता] से [खालिद बिन सलामाह] से बतवले बाड़े, यानी अल फ`फा] से [अल बही] से [उर्वाह] से [ऐस्याह] से उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा अल्लाह अज्जा वजल्ला के ज़िकर हर हालत में जवना में उ रहले।
Imam Abu Dawud : 18
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ أَبِي عَلِيٍّ الْحَنَفِيِّ عَنْ هَمَّامٍ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَنَسٍ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ الْخَلَاءَ وَضَعَ خَاتَمَهُقَالَ أَبُو دَاوُد هَذَا حَدِيثٌ مُنْكَرٌ وَإِنَّمَا يُعْرَفُ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اتَّخَذَ خَاتَمًا مِنْ وَرِقٍ ثُمَّ أَلْقَاهُ وَالْوَهْمُ فِيهِ مِنْ هَمَّامٍ وَلَمْ يَرْوِهِ إِلَّا هَمَّامٌ
हमनी के [नशर बिन अली] से [अबू अली अल हनाफी] से [हम्मम] से [इब्न जुरैज] से [अज जुहरी] से [अनस] से बतवले बाड़े उ कहले कि; जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शौचालय में घुसे के चाहत रहले त उ आपन अंगूठी उतार देले। अबू दाऊद कहले कि; इ एगो बुरा हदीस ह, जबकि [इब्न जुरैज] से [जियाद बिन सअद] से [अज ज़ुहरी] से [अनस] से जवन जानकारी बा उ इ कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चांदी के अंगूठी के इस्तेमाल कईले रहले अवुरी ओकरा बाद ओकरा के फेंक देले रहले। इहाँ के गलती हम्माम से बा, अवुरी इ हदीस हम्माम से छोड़ के ना बतवावल गईल।
Imam Abu Dawud : 19
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَهَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يُحَدِّثُ عَنْ طَاوُسٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَمَرَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى قَبْرَيْنِ فَقَالَ إِنَّهُمَا يُعَذَّبَانِ وَمَا يُعَذَّبَانِ فِي كَبِيرٍ أَمَّا هَذَا فَكَانَ لَا يَسْتَنْزِهُ مِنْ الْبَوْلِ وَأَمَّا هَذَا فَكَانَ يَمْشِي بِالنَّمِيمَةِ ثُمَّ دَعَا بِعَسِيبٍ رَطْبٍ فَشَقَّهُ بِاثْنَيْنِ ثُمَّ غَرَسَ عَلَى هَذَا وَاحِدًا وَعَلَى هَذَا وَاحِدًا وَقَالَ لَعَلَّهُ يُخَفَّفُ عَنْهُمَا مَا لَمْ يَيْبَسَا قَالَ هَنَّادٌ يَسْتَتِرُ مَكَانَ يَسْتَنْزِهُحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَعْنَاهُ قَالَ كَانَ لَا يَسْتَتِرُ مِنْ بَوْلِهِ وَقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ يَسْتَنْزِهُ
हमनी के [जुहैर बिन हरब] आ [हन्नाद बिन अस साड़ी] के बतवले बा कि ऊ दुनु कहले रहले; हमनी के बतवले बाड़े [वाकी'] बता देले बाड़े [अल अ'मासी] उ कहले बाड़े; हम [मुजाहिद] के [थवस] से [इब्न अब्बास] से बतावत सुनले बानी कि उ कहले रहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर दू गो कब्र से गुजरले रहले आ कहले रहले कि ‘वास्तव में दुनु के सजा मिल रहल बा, आ दुनु के बड़हन पाप के सजा नइखे मिलत. रहल बात एह एक के त एकर कारण रहे कि उ पेशाब से खुद के शुद्ध ना कईले, जबकि इ के त नमीमाह के संगे चलत रहे'। फेर केहू के आदेश दिहलन कि खजूर के भींजल डाढ़ ले लीं, फेर आधा में काट दिहलन, फेर एह कब्र में लगा के दोसरा कब्र में लगा दिहलन आ कहलन कि ‘उम्मीद बा कि जबले सूखल ना होखे तबले दुनु के हल्का कर सकेलें’. हन्नाद लफाझ यस्तातिर के साथ बखान कइले जगह यस्तांजिह पर। हमनी के बतवले बा [उस्मान बिन अबू स्याइबा] हमनी के [जरीर] के [मंसूर] से [मुजाहिद] से [इब्न अब्बास] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, जवना के मतलब बा ऊपर के शब्दावली, उ कहले; 'ऊ पेशाब से ढंकल ना', जबकि मुअविया कहले; 'उ शुद्ध नइखे'।
Imam Abu Dawud : 20
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ زَيْدِ بْنِ وَهْبٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ حَسَنَةَ قَالَانْطَلَقْتُ أَنَا وَعَمْرُو بْنُ الْعَاصِ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَرَجَ وَمَعَهُ دَرَقَةٌ ثُمَّ اسْتَتَرَ بِهَا ثُمَّ بَالَ فَقُلْنَا انْظُرُوا إِلَيْهِ يَبُولُ كَمَا تَبُولُ الْمَرْأَةُ فَسَمِعَ ذَلِكَ فَقَالَ أَلَمْ تَعْلَمُوا مَا لَقِيَ صَاحِبُ بَنِي إِسْرَائِيلَ كَانُوا إِذَا أَصَابَهُمْ الْبَوْلُ قَطَعُوا مَا أَصَابَهُ الْبَوْلُ مِنْهُمْ فَنَهَاهُمْ فَعُذِّبَ فِي قَبْرِهِقَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ مَنْصُورٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى فِي هَذَا الْحَدِيثِ قَالَ جِلْدِ أَحَدِهِمْ و قَالَ عَاصِمٌ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ جَسَدِ أَحَدِهِمْ
हमनी के बतवले बा [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुलवाहिद बिन जियाद] हमनी के [अल अ'मासी] से [जैद बिन वहब] से [अब्दुररहमान बिन हसनह] से बतवले बाड़े उ कहले; हम एक बेर अमरू बिन अल ऐश के साथे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले गईल रहनी, फिर उ ढाल लेके निकलले, फिर ओकरा से ढंक के पेशाब कईले। त हम कहत बानी; 'देखऽ, ऊ ओइसहीं पेशाब करेला जइसे मेहरारू पेशाब करेले'. नबी इ बात सुनले, त उ कहले कि, 'का रउआ नईखी जानत कि इस्राएल के संतान में से एगो के का मिलल? पहिले जब इस्राएल के संतान पेशाब के संपर्क में जात रहले त उ लोग जवन हिस्सा पेशाब से दागदार रहे ओकरा के काट देत रहले, फेर उ आदमी उनुका के अयीसन करे से मना क देत रहे, एहसे उनुका कब्र में सजा दिहल जात रहे'। अबू दाऊद कहले कि; [मंसूर] [अबू व`इल] से [अबू मूसा] से एह हदीस के बारे में कहले, उ जिक्र कईले; -माने कि अगर उ ओहमें से कवनो एक के त्वचा के छूवे। एही बीच [‘अशिम] [अबू व`इल] से [अबू मूसा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहले कि, उ कहले कि, 'ओकनी में से एक के लाश'।