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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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Imam Abu Dawud (الامام ابو داود) - 4590 हदीस

हदीस

Imam Abu Dawud : 61

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ أَبِي شُعَيْبٍ وَعَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ يَحْيَى الْحَرَّانِيَّانِ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ سَلِيطِ بْنِ أَيُّوبَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ رَافِعٍ الْأَنْصَارِيِّ ثُمَّ الْعَدَوِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يُقَالُ لَهُ إِنَّهُ يُسْتَقَى لَكَ مِنْ بِئْرِ بُضَاعَةَ وَهِيَ بِئْرٌ يُلْقَى فِيهَا لُحُومُ الْكِلَابِ وَالْمَحَايِضُ وَعَذِرُ النَّاسِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْمَاءَ طَهُورٌ لَا يُنَجِّسُهُ شَيْءٌقَالَ أَبُو دَاوُد و سَمِعْت قُتَيْبَةَ بْنَ سَعِيدٍ قَالَ سَأَلْتُ قَيِّمَ بِئْرِ بُضَاعَةَ عَنْ عُمْقِهَا قَالَ أَكْثَرُ مَا يَكُونُ فِيهَا الْمَاءُ إِلَى الْعَانَةِ قُلْتُ فَإِذَا نَقَصَ قَالَ دُونَ الْعَوْرَةِ قَالَ أَبُو دَاوُد وَقَدَّرْتُ أَنَا بِئْرَ بُضَاعَةَ بِرِدَائِي مَدَدْتُهُ عَلَيْهَا ثُمَّ ذَرَعْتُهُ فَإِذَا عَرْضُهَا سِتَّةُ أَذْرُعٍ وَسَأَلْتُ الَّذِي فَتَحَ لِي بَابَ الْبُسْتَانِ فَأَدْخَلَنِي إِلَيْهِ هَلْ غُيِّرَ بِنَاؤُهَا عَمَّا كَانَتْ عَلَيْهِ قَالَ لَا وَرَأَيْتُ فِيهَا مَاءً مُتَغَيِّرَ اللَّوْنِ

हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन अबू स्यूअइब अल हररानी] अवुरी [अब्दुल अजीज बिन याह्या अल हररानी] उ दुनो लोग कहले रहले; हमनी के [मुहम्मद बिन सलामाह] से [मुहम्मद बिन इशाक] से [सालिथ बिन अय्यूब] से [उबैदिल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन रफी’ अल अंसारी से फिर अल ‘अदावी] से [अबू सईद अल खुदरी] से बतवले बाड़े उ कहले कि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुनले रहनी जब उनुका से कहल गइल रहे; कि रउरा के बिदलाह इनार से पानी दिहल गइल बा, जवन एगो कुआँ ह जहाँ कुकुरन के लाश, मासिक धर्म के कचरा आ इंसान के कचरा के निपटान होला, तब ऊ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में ऊ पानी पवित्र बा, ओकरा के कुछुओ अशुद्ध ना कर सके'। अबू दाऊद कहले कि; आ हम कुतैबा बिन सईद के कहत सुनले बानी; हम एक बेर इनार के रखवाला से ओकर गहराई के बारे में पूछनी, उ जवाब देले; 'अधिकतम स्थिति में पानी ओ जगह तक पहुंच सकता जहां जघन बाल बढ़ेला'। हम पूछनी कि; 'अगर घट गइल त?' उ जवाब दिहले; 'औरत के नीचे'। अबू दाऊद कहले कि; आ हम खुद एक बेर बिदला के कुआँ के अपना शाल से नापनी, ओकरा के कुआँ में बढ़ा देनी फेर ओकरा के पीछे खींच लेहनी, छह हाथ ऊँच निकलल। तब हम ओह आदमी से पूछनी जे हमरा खातिर बगइचा के दरवाजा खोल के हमरा के अपना लगे ले गइल; 'का एह कुआँ के भवन के मूल भवन से बदल दिहल गइल बा?' उ जवाब दिहले; 'ना'। आ हम इनार में देखनी, उहाँ पानी रहे जवना के रंग बदल गईल रहे।

हदीस

Imam Abu Dawud : 62

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ حَدَّثَنَا سِمَاكٌ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَاغْتَسَلَ بَعْضُ أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي جَفْنَةٍ فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَتَوَضَّأَ مِنْهَا أَوْ يَغْتَسِلَ فَقَالَتْ لَهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنِّي كُنْتُ جُنُبًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ الْمَاءَ لَا يُجْنِبُ

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [अबू अल अहवाश] हमनी के बतवले बाड़े [सुन] [इक्रीमा] से [इब्न अब्बास] से उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एगो मेहरारू एक बेर बड़हन बाल्टी में नहात रहली, फेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोटा से वजूद करे भा नहाए आइल रहले, एहसे उनुका से कहले; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हम जुनब रहनी'। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में पानी जुनुब ना ह।

हदीस

Imam Abu Dawud : 63

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ فِي حَدِيثِ هِشَامٍ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ ثُمَّ يَغْتَسِلُ مِنْهُ

हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन यूनुस] हमनी के [ज`इदा] हदीस [हिशाम] में [मुहम्मद] से [अबू हुरैरा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े कि, 'रउआ में से केहु ठहरल पानी में पेशाब ना करे अवुरी ओकरा बाद ओकरा से नहाए'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 64

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَجْلَانَ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَبُولَنَّ أَحَدُكُمْ فِي الْمَاءِ الدَّائِمِ وَلَا يَغْتَسِلُ فِيهِ مِنْ الْجَنَابَةِ

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के [याह्या] [मुहम्मद बिन अजलान] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम [हमार पिता] के [अबू हुरैरा] से एगो हदीस सुनावत सुनले बानी, उ कहले; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'तू में से केहु रुकल पानी में पेशाब मत करे अवुरी ओकरा के ओ जगह नहाए ना देवे'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 65

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ فِي حَدِيثِ هِشَامٍ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ طُهُورُ إِنَاءِ أَحَدِكُمْ إِذَا وَلَغَ فِيهِ الْكَلْبُ أَنْ يُغْسَلَ سَبْعَ مِرَارٍ أُولَاهُنَّ بِتُرَابٍقَالَ أَبُو دَاوُد وَكَذَلِكَ قَالَ أَيُّوبُ وَحَبِيبُ بْنُ الشَّهِيدِ عَنْ مُحَمَّدٍ ح حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ يَعْنِي ابْنَ سُلَيْمَانَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ جَمِيعًا عَنْ أَيُّوبَ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ بِمَعْنَاهُ وَلَمْ يَرْفَعَاهُ وَزَادَ وَإِذَا وَلَغَ الْهِرُّ غُسِلَ مَرَّةً

हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन यूनुस] हमनी के [ज`इदा] हदीस [हिस्याम] में [मुहम्मद] से [अबू हुरैरा] से [अबू हुरैरा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े: '-रउरा में से कवनो एक के बर्तन के शुद्ध करे के तरीका बा अगर कुकुर चाट गईल होखे त ओकरा के सात बेर धोवे के बा, पहिला धरती से'। अबू दाऊद कहले कि; ठीक ओसही [अय्यूब] आ [हबीब बिन असी स्याहिद] द्वारा [मुहम्मद] से कहल गइल बा, आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के [अल मुअतमीर, यानी इब्न सुलेमान] बतवले बाड़े, अवुरी एगो अवुरी लाइन के मुताबिक; हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन उबैद] हमनी के [हम्मद बिन जैद], [अय्यूब] से [मुहम्मद] से [अबू हुरैरा] से सब कुछ एकर मतलब के संगे बतवले बाड़े, लेकिन दुनो में से केहु एकरा के ना समझ पवले। आ ऊ जोड़लन कि; आ बिलार अगर कवनो -पात्र- चाट लेव त एक बेर धोवल जाला।

हदीस

Imam Abu Dawud : 66

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا أَبَانُ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ سِيرِينَ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا وَلَغَ الْكَلْبُ فِي الْإِنَاءِ فَاغْسِلُوهُ سَبْعَ مَرَّاتٍ السَّابِعَةُ بِالتُّرَابِقَالَ أَبُو دَاوُد وَأَمَّا أَبُو صَالِحٍ وَأَبُو رَزِينٍ وَالْأَعْرَجُ وَثَابِتٌ الْأَحْنَفُ وَهَمَّامُ بْنُ مُنَبِّهٍ وَأَبُو السُّدِّيِّ عَبْدُ الرَّحْمَنِ رَوَوْهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَلَمْ يَذْكُرُوا التُّرَابَ

हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [अबन] हमनी के [कतादह] बतवले बाड़े कि [मुहम्मद बिन सिरीन] उनुका से कहले बाड़े, [अबू हुरैरा] से, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले रहले कि, 'जब कुकुर कवनो बर्तन चाटेला, त ओकरा के सात बेर धो लीं, सातवां के धरती से'। अबू दाऊद कहले कि; रहल बात [अबू शालिह], [अबू रज़िन], [अल अ'राज], [थाबीत अल अहनाफ], [हम्मम बिन मुनाब्बीह] अवुरी [अबू अस सुद्दी अब्दुररहमान] के त उ सभ एकरा के [अबू हुरैरा] से बतवले अवुरी जमीन के जिक्र ना कईले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 67

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو التَّيَّاحِ عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ ابْنِ مُغَفَّلٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَرَ بِقَتْلِ الْكِلَابِ ثُمَّ قَالَ مَا لَهُمْ وَلَهَا فَرَخَّصَ فِي كَلْبِ الصَّيْدِ وَفِي كَلْبِ الْغَنَمِ وَقَالَ إِذَا وَلَغَ الْكَلْبُ فِي الْإِنَاءِ فَاغْسِلُوهُ سَبْعَ مِرَارٍ وَالثَّامِنَةُ عَفِّرُوهُ بِالتُّرَابِقَالَ أَبُو دَاوُد وَهَكَذَا قَالَ ابْنُ مُغَفَّلٍ

हमनी के बतावल गईल बा [अहमद बिन मुहम्मद बिन हनबल] हमनी के बतवले बाड़े [यह्या बिन सईद] से [स्यूबाह] हमनी के [अबू अत तयह] से [मुथरीफ] से [इब्न मुगफ्ल] से बतवले बाड़े, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कुकुरन के मारे के आदेश देले रहले, फिर उ कहले रहले कि: 'उनका का हक बा -कुकुर के मारे के- अवुरी उनुकर का बा पाप -उनका के मारे खातिर-'। त ऊ राहत दिहलन -पालल- खेल कुकुरन आ कुकुरन के भेड़ के देखरेख करे खातिर, आ ऊ कहले: 'कुकुर कवनो बर्तन चाटत बा त सात बेर धोईं, आ आठवीं बेर ओकरा के माटी से रगड़ दीं'. अबू दाऊद कहले कि; आ एही तरे इब्न मुगफ़ल कहले.

हदीस

Imam Abu Dawud : 68

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ الْقَعْنَبِيُّ عَنْ مَالِكٍ عَنْ إِسْحَقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ عَنْ حُمَيْدَةَ بِنْتِ عُبَيْدِ بْنِ رِفَاعَةَ عَنْ كَبْشَةَ بِنْتِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ وَكَانَتْ تَحْتَ ابْنِ أَبِي قَتَادَةَأَنَّ أَبَا قَتَادَةَ دَخَلَ فَسَكَبَتْ لَهُ وَضُوءًا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ فَشَرِبَتْ مِنْهُ فَأَصْغَى لَهَا الْإِنَاءَ حَتَّى شَرِبَتْ قَالَتْ كَبْشَةُ فَرَآنِي أَنْظُرُ إِلَيْهِ فَقَالَ أَتَعْجَبِينَ يَا ابْنَةَ أَخِي فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّهَا لَيْسَتْ بِنَجَسٍ إِنَّهَا مِنْ الطَّوَّافِينَ عَلَيْكُمْ وَالطَّوَّافَاتِ

हमनी के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह अल कआनबी] के [मालिक] से [इशह बिन अब्दुल्लाह बिन अबू ठल्हाह] से [हुमैदा बिंत उबैद बिन रिफाअह] से [कबस्याह बिंत कब बिन मलिक] से बतावल गईल बा अवुरी ओ समय उनुकर बियाह इब्न अबी कतादा से भईल रहे, कि [अबू कतदाह] अंदर आईल रहले, ओकरा बाद उ पानी डाल देले - तैयार कईले- ओकरा खातिर वजूद के पानी, तब एगो बिलार आके ओकरा से पी लिहलस, त उ बिलार खातिर बर्तन के तब तक झुका दिहलस जब तक कि उ पिय के खतम ना हो गईल। कबस्याह कहलस; उ हमरा के देखलस -जब उनका लागल कि- हम उनका के देखत रहनी, त उ कहले; 'अचरज हो गइल बाड़ू भाई के लइका?' हम जवाब देनी; 'हॅंं'। ऊ कहत बाड़न कि; दरअसल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में बिलार अशुद्ध ना होखेला, उ नर अवुरी मादा जानवर में से होखेला जवन कि हमेशा आपके घेरले रहेला'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 69

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ عَنْ دَاوُدَ بْنِ صَالِحِ بْنِ دِينَارٍ التَّمَّارِ عَنْ أُمِّهِأَنَّ مَوْلَاتَهَا أَرْسَلَتْهَا بِهَرِيسَةٍ إِلَى عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا فَوَجَدَتْهَا تُصَلِّي فَأَشَارَتْ إِلَيَّ أَنْ ضَعِيهَا فَجَاءَتْ هِرَّةٌ فَأَكَلَتْ مِنْهَا فَلَمَّا انْصَرَفَتْ أَكَلَتْ مِنْ حَيْثُ أَكَلَتْ الْهِرَّةُ فَقَالَتْ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّهَا لَيْسَتْ بِنَجَسٍ إِنَّمَا هِيَ مِنْ الطَّوَّافِينَ عَلَيْكُمْ وَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَوَضَّأُ بِفَضْلِهَا

हमनी के बतावल गईल बा [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] हमनी के [अब्दुल अजीज] [दाऊद बिन सालिह बिन दिनार एट तम्मार] से [उनकर महतारी] से बतवले बाड़े, कि उनुकर मालिक उनुका के एगो केक - गेहूं के आटा से बनल - ऐसिया के ले आवे के आदेश देले रहले, अल्लाह उनुका से खुश होखस, लेकिन उनुका ऐश्याह के नमाज पढ़त मिलल, एहसे ऐश्याह उनुका के एगो संकेत देले कि उनुका लगे जवन रहे ओकरा के नीचे राखे ले आवल गयिल। तबे एगो बिलार आके तुरंत ओकरा से कुछ खा गईल। [ऐश्याह] के नमाज खतम भइला के बाद ऊ बिलार के खाइल हिस्सा से खाली, ई कहत; दरअसल, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'वास्तव में बिलार अशुद्ध ना होखेला, उ ओ जानवर में से होखेला जवन कि हमेशा आपके घेरले रहेला'। आ हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बिल्ली के चाट से बचे वाला पानी से वजूद करत देखले रहनी।

हदीस

Imam Abu Dawud : 70

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ حَدَّثَنِي مَنْصُورٌ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْأَسْوَدِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكُنْتُ أَغْتَسِلُ أَنَا وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ وَنَحْنُ جُنُبَانِ

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [याह्या] से [सुफयान] हमरा के [मंसूर] से [इब्राहिम] से [अल असवद] से [ऐस्याह] से बतवले बाड़े उ कहले; 'हम एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक बर्तन से नहाले रहनी अवुरी हमनी के जुनब के हालत में रहनी जा'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 71

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ النُّفَيْلِيُّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ عَنْ ابْنِ خَرَّبُوذَ عَنْ أُمِّ صُبَيَّةَ الْجُهَنِيَّةِ قَالَتْاخْتَلَفَتْ يَدِي وَيَدُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْوُضُوءِ مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ

हमनी के बतवले बा [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अन नुफैली] हमनी के [वाकी'] से [उसामा बिन जैद] से [इब्नु खर्राबुज] से [उम्मू शुबय्याह अल जुहानियाह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; 'एक बर्तन से वज़ूद लेवे के समय हमार हाथ अवुरी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथ बारी-बारी से होखेला'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 72

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ نَافِعٍ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَكَانَ الرِّجَالُ وَالنِّسَاءُ يَتَوَضَّئُونَ فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مُسَدَّدٌ مِنْ الْإِنَاءِ الْوَاحِدِ جَمِيعًا

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के [हमद] के [अय्यूब] से [नाफी'] से बतवले बाड़े, अवुरी एगो अवुरी लाइन के मुताबिक; हमनी के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] के [मलिक] से [नाफी'] से [इब्न उमर] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'पहिले नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय मरद मेहरारू वजूद करत रहले, -मुसद्दद कहले; - एक बर्तन से, एक साथ'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 73

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَكُنَّا نَتَوَضَّأُ نَحْنُ وَالنِّسَاءُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ إِنَاءٍ وَاحِدٍ نُدْلِي فِيهِ أَيْدِيَنَا

हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह] से [याह्या] हमरा के [नाफी'] [अब्दुल्लाह बिन उमर] से बतवले बाड़े, उ कहले; 'पहिले नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय में हमनी के अपना पत्नी के संगे एक बर्तन से वज़ूद करत रहनी जा, हमनी के बर्तन में हाथ डाल देनी जा'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 74

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ ح و حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ دَاوُدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ حُمَيْدٍ الْحِمْيَرِيِّ قَالَلَقِيتُ رَجُلًا صَحِبَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَرْبَعَ سِنِينَ كَمَا صَحِبَهُ أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تَغْتَسِلَ الْمَرْأَةُ بِفَضْلِ الرَّجُلِ أَوْ يَغْتَسِلَ الرَّجُلُ بِفَضْلِ الْمَرْأَةِ زَادَ مُسَدَّدٌ وَلْيَغْتَرِفَا جَمِيعًا

हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन यूनुस] हमनी के [जुहैर] [दाऊद बिन अब्दुल्लाह] से बतवले बाड़े, अवुरी एगो अवुरी लाइन के मुताबिक; हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] हमनी के [अबू अवानाह] से [दाऊद बिन अब्दुल्लाह] से [हुमैद अल हिम्यारी] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; एक बेर हमार मुलाकात [एक आदमी] से भइल जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से चार साल से दोस्ती करत रहे काहे कि अबू हुरैरा उनुका से दोस्ती करत रहले, उ कहले; नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम महिला के पुरुष के छोड़ल पानी में नहाए से मना कईले अवुरी पुरुष के महिला से बचे वाला पानी में नहाए से मना कईले। -मुसद्दद जोड़ले, - आ दुनु जाना के पानी स्कूप करे के चाहीं - नहात घरी -।

हदीस

Imam Abu Dawud : 75

حَدَّثَنَا ابْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ يَعْنِي الطَّيَالِسِيَّ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي حَاجِبٍ عَنْ الْحَكَمِ بْنِ عَمْرٍو وَهُوَ الْأَقْرَعُأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى أَنْ يَتَوَضَّأَ الرَّجُلُ بِفَضْلِ طَهُورِ الْمَرْأَةِ

हमनी के [इब्न बस्स्यार] से रिवायत बा कि [अबू दाऊद यानी अथ थयालिसी] हमनी के [स्यूबाह] से [अशिम] से [अबू हजीब] से [अल हकम बिन अमरू, यानी अल अकरा’] से बतवले कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कवनो आदमी के ओह पानी से वज़ूद करे से मना कईले बाड़े, जवना के इस्तेमाल कवनो महिला शुद्ध करे खाती करेले खुदे के बा.

हदीस

Imam Abu Dawud : 76

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ سُلَيْمٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ سَلَمَةَ مِنْ آلِ ابْنِ الْأَزْرَقِ أَنَّ الْمُغِيرَةَ بْنَ أَبِي بُرْدَةَ وَهُوَ مِنْ بَنِي عَبْدِ الدَّارِ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُسَأَلَ رَجُلٌ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَرْكَبُ الْبَحْرَ وَنَحْمِلُ مَعَنَا الْقَلِيلَ مِنْ الْمَاءِ فَإِنْ تَوَضَّأْنَا بِهِ عَطِشْنَا أَفَنَتَوَضَّأُ بِمَاءِ الْبَحْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هُوَ الطَّهُورُ مَاؤُهُ الْحِلُّ مَيْتَتُهُ

हमनी के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] से [मलिक] से [शफवान बिन सुलैम] से [इब्न अल अज़रक के परिवार से सईद बिन सलामाह] से बतवले बाड़े कि [अल मुगीरा बिन अबी बुरदाह] - अवुरी उ बानी अब्द अद दार के हवे, - उनुका के सूचित कईले कि उ [अबू हुरैरा] के कहत सुनले बाड़े; एगो आदमी रहे जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछले रहे कि; 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमनी के एगो जहाज प चढ़नी अवुरी सिर्फ तनी पानी ले आईल रहनी, जदी हमनी के ओकरा से वज़ूद करब त हमनी के प्यास लागी, का हमनी के समुद्र के पानी से वज़ूद कईल जायज बा?' त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले: 'ई - समुंदर - पानी में शुद्ध बा अवुरी अपना लाश में हलाल बा'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 77

حَدَّثَنَا هَنَّادٌ وَسُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْعَتَكِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ أَبِي فَزَارَةَ عَنْ أَبِي زَيْدٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهُ لَيْلَةَ الْجِنِّ مَا فِي إِدَاوَتِكَ قَالَ نَبِيذٌ قَالَ تَمْرَةٌ طَيِّبَةٌ وَمَاءٌ طَهُورٌقَالَ أَبُو دَاوُد و قَالَ سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ عَنْ أَبِي زَيْدٍ أَوْ زَيْدٍ كَذَا قَالَ شَرِيكٌ وَلَمْ يَذْكُرْ هَنَّادٌ لَيْلَةَ الْجِنِّ

हमनी के [हन्नाद] अवुरी [सुलेमान बिन दाऊद अल अताकी] के बतवले बाड़े कि उ दुनो लोग कहले रहले; हमनी के [शरीक] के [अबू फजाराह] से [अबू जैद] से [अब्दुल्लाह बिन मसूद] से रिवायत कईले बाड़े, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका से जिन्न के रात कहले रहले - यानी कि ओ रात जब जिन्न अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल रहे अवुरी उनुका के इस्लाम सिखावे खाती अपना लोग के लगे जाए के नेवता देले रहले -: 'वह।' तोहरा पानी के थैली में बा?' उ जवाब दिहले; 'रस'। उ कहले कि, 'अच्छा खजूर अवुरी पवित्र पानी'। अबू दाऊद कहले कि; आ [सुलेमान बिन दाऊद] कहले कि; [अबू जैद] भा जैद से; त [शरीक] के कहनाम रहे, अवुरी [हन्नाद] जिन्न के रात के जिक्र ना कईले।

हदीस

Imam Abu Dawud : 78

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ عَنْ دَاوُدَ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَلْقَمَةَ قَالَ قُلْتُ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍمَنْ كَانَ مِنْكُمْ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةَ الْجِنِّ فَقَالَ مَا كَانَ مَعَهُ مِنَّا أَحَدٌ

हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के [वहैब] के [दाऊद] से [अमीर] से [अलकामा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; हम [अब्दुल्ला बिन मसूद] से पूछनी; 'रउरा में से कवन जिन्न के रात में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे रहे?' त ऊ जवाब दिहलन; 'हमनी में से केहू उनुका संगे ना रहे'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 79

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مَنْصُورٍ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ عَطَاءٍأَنَّهُ كَرِهَ الْوُضُوءَ بِاللَّبَنِ وَالنَّبِيذِ وَقَالَ إِنَّ التَّيَمُّمَ أَعْجَبُ إِلَيَّ مِنْهُ

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुररहमान] हमनी के [बिसीर बिन मंशूर] [इब्न जुरैज] से [अथा`] से बतवले बाड़े कि उनुका दूध चाहे फल के रस से वज़ूद कईल पसंद नईखे, अवुरी उ कहले कि; 'साँचहूँ तयाम्मुम हम ओकरा से पसंद करीले'।

हदीस

Imam Abu Dawud : 80

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا أَبُو خَلْدَةَ قَالَ سَأَلْتُ أَبَا الْعَالِيَةِعَنْ رَجُلٍ أَصَابَتْهُ جَنَابَةٌ وَلَيْسَ عِنْدَهُ مَاءٌ وَعِنْدَهُ نَبِيذٌ أَيَغْتَسِلُ بِهِ قَالَ لَا

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बश्यार] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुररहमान] हमनी के बतवले बाड़े [अबू खलदाह] उ कहले बाड़े; हम एक बेर [अबू अल अलियाह] से पूछनी कि ओकरा बारे में एगो अयीसन आदमी के बारे में पूछले रहनी, जेकरा जुनब के अनुभव भईल बा अवुरी ओकरा जूस होखला के दौरान पानी ना मिलल, का उ रस से जनाबा नहा सकतारे?' उ जवाब दिहले; 'ना!'