Imam Abu Dawud : 41
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ وَهَذَا لَفْظُهُ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ يَعْنِي الْمُخَرَّمِيَّ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شَرِيكٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ جَرِيرٍ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَتَى الْخَلَاءَ أَتَيْتُهُ بِمَاءٍ فِي تَوْرٍ أَوْ رَكْوَةٍ فَاسْتَنْجَى قَالَ أَبُو دَاوُد فِي حَدِيثِ وَكِيعٍ ثُمَّ مَسَحَ يَدَهُ عَلَى الْأَرْضِ ثُمَّ أَتَيْتُهُ بِإِنَاءٍ آخَرَ فَتَوَضَّأَقَالَ أَبُو دَاوُد وَحَدِيثُ الْأَسْوَدِ بْنِ عَامِرٍ أَتَمُّ
हमनी के बतवले बाड़े [इब्राहिम बिन खालिद] हमनी के बतवले बाड़े [असवद बिन अमीर] हमनी के [शरीक] बतवले बाड़े अवुरी इहे लफाझन्या ह। आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह, यानी अल मुखरमी] हमनी के [वाकी'] से [शरीक] से [इब्राहिम बिन जरीर] से [अबू ज़ुराह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शौचालय जाए के चाहत रहले त हम उनुका खातिर एगो बर्तन में पानी ले अइनी, ओकरा बाद उ ओकरा संगे नमाज पढ़ले। अबू दाऊद के जिक्र हदीस वाकी' में बा; 'तब उ जमीन प हाथ रगड़ले, फेर हम ओकरा खाती एगो अवुरी बर्तन लेके अईनी, अवुरी ओकरा से वज़ूद कईले'। अबू दाऊद कहले कि; अल असवद बिन अमीर के हदीस ज्यादा परफेक्ट बा।
Imam Abu Dawud : 42
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَيَرْفَعُهُ قَالَ لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ لَأَمَرْتُهُمْ بِتَأْخِيرِ الْعِشَاءِ وَبِالسِّوَاكِ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍ
इ हमनी के [कुतैबा बिन सईद] [सुफयान] से [अबू अज़ जन्नद] से [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े अवुरी उ एकरा के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'अगर हम मुसलमान प बोझ ना डालले रहती त हम उनुका के इशा के नमाज खतम करे अवुरी हर नमाज में सिवाक लेवे के आदेश देले रहती'।
Imam Abu Dawud : 43
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ قَالَسَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي لَأَمَرْتُهُمْ بِالسِّوَاكِ عِنْدَ كُلِّ صَلَاةٍقَالَ أَبُو سَلَمَةَ فَرَأَيْتُ زَيْدًا يَجْلِسُ فِي الْمَسْجِدِ وَإِنَّ السِّوَاكَ مِنْ أُذُنِهِ مَوْضِعَ الْقَلَمِ مِنْ أُذُنِ الْكَاتِبِ فَكُلَّمَا قَامَ إِلَى الصَّلَاةِ اسْتَاكَ
हमनी के बतवले बाड़े [इब्राहिम बिन मूसा] हमनी के बतवले बाड़े [ईसा बिन यूनुस] हमनी के [मुहम्मद बिन इशाक] से [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] से [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] से [जैद बिन खालिद अल जुहानी] से बतवले बाड़े उ कहले; हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुननी कि अगर हम अपना लोग पर बोझ ना डालले रहतीं त सचमुच हर नमाज में सिवाक करे के आदेश देले रहतीं’। अबू सलामाह कहले: हम देखनी कि जैद मस्जिद में बईठल रहले जबकि सिवाक उनुका कान के तलहटी में रहे जईसे कवनो लेखक के कान में कलम लगावल जाला, हर बेर जब उ नमाज पढ़े खाती खड़ा होखत रहले त उ सिवाक बनावत रहले।
Imam Abu Dawud : 44
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَوْفٍ الطَّائِيُّ حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ قُلْتُ أَرَأَيْتَ تَوَضُّؤَ ابْنِ عُمَرَ لِكُلِّ صَلَاةٍ طَاهِرًا وَغَيْرَ طَاهِرٍ عَمَّ ذَاكَ فَقَالَ حَدَّثَتْنِيهِ أَسْمَاءُ بِنْتُ زَيْدِ بْنِ الْخَطَّابِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ حَنْظَلَةَ بْنِ أَبِي عَامِرٍ حَدَّثَهَاأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرَ بِالْوُضُوءِ لِكُلِّ صَلَاةٍ طَاهِرًا وَغَيْرَ طَاهِرٍ فَلَمَّا شَقَّ ذَلِكَ عَلَيْهِ أُمِرَ بِالسِّوَاكِ لِكُلِّ صَلَاةٍفَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يَرَى أَنَّ بِهِ قُوَّةً فَكَانَ لَا يَدَعُ الْوُضُوءَ لِكُلِّ صَلَاةٍ قَالَ أَبُو دَاوُد إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ رَوَاهُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ قَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन औफ अथ था`ई] हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन खालिद] हमनी के [मुहम्मद बिन इशाक] [मुहम्मद बिन याह्या बिन हिब्बन] से [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से बतवले बाड़े, मुहम्मद बिन याह्या कहले; हम अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ला बिन उमर से पूछनी कि; 'रउरा हर नमाज में इब्न उमर के वज़ूद कईसे देखत बानी, चाहे ऊ पवित्र अवस्था में होखे भा ना, ऊ कवना कारण से बा?' त ऊ जवाब दिहलन; हमरा के [अस्मा` बिंत जैद बिन अल खथथब] से कहले बा कि [अब्दुल्लाह बिन हंझाला बिन अबी अमीर] उनुका के बतवले बाड़े; कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हर नमाज खातिर वजूद करे के आदेश दिहल गइल रहे, चाहे ऊ शुद्ध अवस्था में होखे भा ना। जब उनका ई काम मुश्किल लागल त हर बेर नमाज पढ़ला पर सिवाक करे के आदेश दिहल गइल. हालांकि इब्न उमर के लागल कि उ एतना मजबूत बाड़े कि उ अयीसन क सकतारे, एहसे उ हर नमाज खाती आपन वजूद ना छोड़त रहले। अबू दाऊद कहले कि; [इब्राहिम बिन साआद] [मुहम्मद बिन इशाक] से इ हदीस बतवले बाड़े उ कहले कि; [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] -अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्ला ना-।
Imam Abu Dawud : 45
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ وَسُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْعَتَكِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ غَيْلَانَ بْنِ جَرِيرٍ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ مُسَدَّدٌ قَالَأَتَيْنَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَسْتَحْمِلُهُ فَرَأَيْتُهُ يَسْتَاكُ عَلَى لِسَانِهِ قَالَ أَبُو دَاوُد وَقَالَ سُلَيْمَانُ قَالَ دَخَلْتُ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَسْتَاكُ وَقَدْ وَضَعَ السِّوَاكَ عَلَى طَرَفِ لِسَانِهِ وَهُوَ يَقُولُ إِهْ إِهْ يَعْنِي يَتَهَوَّعُقَالَ أَبُو دَاوُد قَالَ مُسَدَّدٌ فَكَانَ حَدِيثًا طَوِيلًا وَلَكِنِّي اخْتَصَرْتُهُ
हमनी के [मुसद्दद] अवुरी [सुलेमान बिन दाऊद अल अताकी] के बतवले बाड़े कि उ दुनो लोग कहले रहले; हमनी के [हमद बिन जैद] से [गैलन बिन जरीर] से [अबू बुरदाह] से [उनकर पिता, अबू मूसा] से बतवले बाड़े। मुसद्दद के अनुसार अबू मूसा कहले कि; हम एक बेर रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे गईल रहनी कि उ हमनी के ले जाए के कहस, फेर देखनी कि उनुका होंठ प सिवाक हो गईल। अबू दाऊद कहले कि; आ सुलेमान के मुताबिक अबू मूसा कहले कि; एक बेर नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुलाकात भइल जब ऊ सिवाक रहले, ऊ सिवाक के मुँह के नोक पर रख के कहले रहले: ‘इही इह’। अर्थात केहू के उल्टी जइसन आवाज निकालल। अबू दाऊद कहले कि; मुसद्दद कहले कि; ई हदीस मूल रूप से लमहर रहे, बाकिर हम एकरा के छोट कर देले बानी।
Imam Abu Dawud : 46
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا عَنْبَسَةُ بْنُ عَبْدِ الْوَاحِدِ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَنُّ وَعِنْدَهُ رَجُلَانِ أَحَدُهُمَا أَكْبَرُ مِنْ الْآخَرِ فَأَوْحَى اللَّهُ إِلَيْهِ فِي فَضْلِ السِّوَاكِ أَنْ كَبِّرْ أَعْطِ السِّوَاكَ أَكْبَرَهُمَاقَالَ أَحْمَدُ هُوَ ابْنُ حَزْمٍ قَالَ لَنَا أَبُو سَعِيدٍ هُوَ ابْنُ الْأَعْرَابِيِّ هَذَا مِمَّا تَفَرَّدَ بِهِ أَهْلُ الْمَدِينَةِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन ईसा] हमनी के ['अनबसाह बिन अब्दुल वाहिद] से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [उनकर पिता] से [ऐसिया] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सिवाक पहिनले रहले जबकि उनुका बगल में दु आदमी रहले, एगो दूसरा से बड़ रहले, एहसे अल्लाह उनुका प सिवाक के गुण उतार देले, जवन कि दुनो से बड़ आदमी के सिवाक देवे के चाही। अहमद, यानी इब्न हज़म, बतवले कि; अबू सैद अर्थात अल अ'रबी हमनी से कहले; ई ओह हदीसन में से एगो ह जवन खाली मदीना के विशेषज्ञ लोग बतवले रहे।
Imam Abu Dawud : 47
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى الرَّازِيُّ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ عَنْ مِسْعَرٍ عَنْ الْمِقْدَامِ بْنِ شُرَيْحٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَقُلْتُ لِعَائِشَةَ بِأَيِّ شَيْءٍ كَانَ يَبْدَأُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا دَخَلَ بَيْتَهُ قَالَتْ بِالسِّوَاكِ
हमनी के बतवले बाड़े [इब्राहिम बिन मूसा अर राजी] हमनी के [ईसा बिन यूनुस] के [मिस'अर] से [अल मिकदाम बिन स्यूरैह] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े, उ कहले; हम [आयशा] से पूछनी; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब घर में घुसले त का शुरुआत कईले रहले?' उ जवाब दिहले; 'सिवाक के साथे'।
Imam Abu Dawud : 48
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا عَنْبَسَةُ بْنُ سَعِيدٍ الْكُوفِيُّ الْحَاسِبُ حَدَّثَنِي كَثِيرٌ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْكَانَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْتَاكُ فَيُعْطِينِي السِّوَاكَ لِأَغْسِلَهُ فَأَبْدَأُ بِهِ فَأَسْتَاكُ ثُمَّ أَغْسِلُهُ وَأَدْفَعُهُ إِلَيْهِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] हमनी के बतवले बाड़े ['अनबसाह बिन सईद अल कुफी अल हसीब] हमरा के बतवले बाड़े [कत्सिर], [ऐस्याह] से, उ कहले; 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे एगो सिवाक रहे, ओकरा बाद उ हमरा के धोवे खाती देले, एहसे हम पहिले सिवाक खाती एकर इस्तेमाल कईनी, ओकरा बाद धो देनी अवुरी उनुका के वापस क देनी'।
Imam Abu Dawud : 49
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ عَنْ مُصْعَبِ بْنِ شَيْبَةَ عَنْ طَلْقِ بْنِ حَبِيبٍ عَنْ ابْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَشْرٌ مِنْ الْفِطْرَةِ قَصُّ الشَّارِبِ وَإِعْفَاءُ اللِّحْيَةِ وَالسِّوَاكُ وَالِاسْتِنْشَاقُ بِالْمَاءِ وَقَصُّ الْأَظْفَارِ وَغَسْلُ الْبَرَاجِمِ وَنَتْفُ الْإِبِطِ وَحَلْقُ الْعَانَةِ وَانْتِقَاصُ الْمَاءِ يَعْنِي الِاسْتِنْجَاءَ بِالْمَاءِقَالَ زَكَرِيَّا قَالَ مُصْعَبٌ وَنَسِيتُ الْعَاشِرَةَ إِلَّا أَنْ تَكُونَ الْمَضْمَضَةَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ وَدَاوُدُ بْنُ شَبِيبٍ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍ قَالَ مُوسَى عَنْ أَبِيهِ و قَالَ دَاوُدُ عَنْ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ مِنْ الْفِطْرَةِ الْمَضْمَضَةَ وَالِاسْتِنْشَاقَ فَذَكَرَ نَحْوَهُ وَلَمْ يَذْكُرْ إِعْفَاءَ اللِّحْيَةِ وَزَادَ وَالْخِتَانَ قَالَ وَالِانْتِضَاحَ وَلَمْ يَذْكُرْ انْتِقَاصَ الْمَاءِ يَعْنِي الِاسْتِنْجَاءَ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرُوِيَ نَحْوُهُ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَقَالَ خَمْسٌ كُلُّهَا فِي الرَّأْسِ وَذَكَرَ فِيهَا الْفَرْقَ وَلَمْ يَذْكُرْ إِعْفَاءَ اللِّحْيَةِ قَالَ أَبُو دَاوُد وَرُوِيَ نَحْوُ حَدِيثِ حَمَّادٍ عَنْ طَلْقِ بْنِ حَبِيبٍ وَمُجَاهِدٍ وَعَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُزَنِيِّ قَوْلُهُمْ وَلَمْ يَذْكُرُوا إِعْفَاءَ اللِّحْيَةِ وَفِي حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهِ وَإِعْفَاءُ اللِّحْيَةِ وَعَنْ إِبْرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ نَحْوُهُ وَذَكَرَ إِعْفَاءَ اللِّحْيَةِ وَالْخِتَانَ
हमनी के बतवले बा [याह्या बिन माईन] हमनी के [वकी'] से [जकारिया बिन अबू ज`इदा] से [मुशअब बिन स्याइबा] से [थलक बिन हबीब] से [इब्न अज़ जुबैर] से [ऐसिया] से बतवले बाड़े उ कहले कि; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, दस चीज़ जवन कि फितरह के हिस्सा ह: मूंछ काट के, दाढ़ी बढ़ावल - ओकरा के बढ़े दिहल -, बेरसिवाक, पानी से इस्टिनस्याक कईल, नाखून काट के, अँगुरी के बीच में धोवल, बगल के बाल तोड़ल, जघन बाल मुंडवावल, अवुरी पानी से इस्टिनशक कईल'। जकरयाह कहले कि; मुश'अब समझवले; 'दसवां त भुला जानी लेकिन सबसे जादा संभावना बा कि गार्गल रहे'। हमनी के [मूसा बिन इस्माइल] आ [दाऊद बिन स्याबीब] के बतवले बा कि ऊ दुनु कहले रहले; [हम्मद] [अली बिन जैद] से [सलाम बिन मुहम्मद बिन अम्मर बिन यासिर] से हमनी के बतवले, [मूसा] [अपना पिता] से कहले। आ [दाऊद] कहले कि; [अम्मर बिन यासिर] से, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि: 'वास्तव में, प्राकृतिक चीज़ में मुंह कुल्ला अवुरी इस्तीनशक कईल बा,' तब उ अयीसने एगो हदीस के जिक्र कईले, लेकिन उ दाढ़ी उगावे के जिक्र ना कईले बालुक इहो जोड़ले; आ खतना के काम कइल जाला. उ वावास हटावे खातिर जननांग प पानी छिड़के के जिक्र कईले अवुरी पानी के संगे इस्टिंजा` करे के बात ना कईले। अबू दाऊद कहले कि; आ अइसने एगो हदीस इब्न अब्बास से रिवायत भइल बा आ ऊ जिक्र कइले बाड़न; पांच गो प्राकृतिक चीज सब माथा पर, तब उ बाल के अलग करे के बात कईले - आधा दाहिना ओर आधा बाईं ओर - अवुरी दाढ़ी उगावे के बात ना कईले। अबू दाऊद कहले कि; आ उदाहरण खातिर हम्मद के हदीस, थलक बिन हबीब आ मुजाहिद से आ बकर बिन अब्दुल्लाह अल मुजानी से, ओह लोग के कहावत बतावल गइल बा आ ऊ लोग दाढ़ी बढ़ावे के मामिला के जिक्र ना कइल. आ [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अबू मरियम] के हदीस में [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] से [अबू हुरैरा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, ओहमें दाढ़ी बढ़ावे के जिक्र बा। आ इब्राहिम अन नखाई से, ओही तरह से, आ उ दाढ़ी उगावे आ खतना के बात के जिक्र कइले।
Imam Abu Dawud : 50
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مَنْصُورٍ وَحُصَيْنٍ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ حُذَيْفَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ يَشُوصُ فَاهُ بِالسِّوَاكِ
हमनी के बतावल गईल बा कि [मुहम्मद बिन कत्सिर] हमनी के [सुफयान] [मंसूर] से अवुरी [हुसैन] [अबू वइल] से [हुदजाइफा] से बतवले बाड़े कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले रहले कि जब उ रात में जागत रहले त उ अपना मुंह के दांत के सिवाक से रगड़त रहले।
Imam Abu Dawud : 51
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا بَهْزُ بْنُ حَكِيمٍ عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامٍ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُوضَعُ لَهُ وَضُوءُهُ وَسِوَاكُهُ فَإِذَا قَامَ مِنْ اللَّيْلِ تَخَلَّى ثُمَّ اسْتَاكَ
हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [हम्मद] हमनी के [बहज बिन हकीम] से [ज़ुराह बिन औफा] से [सअद बिन हिशाम] से [ऐसिया] से बतवले बाड़े कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ूद के पानी अवुरी सिवाक के -उनुका बिस्तर के नजदीक- राखल गईल रहे। त रात में जब नींद खुलल त ऊ शौच कइलन आ फेर बेरसिवक.
Imam Abu Dawud : 52
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ عَنْ أُمِّ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ لَا يَرْقُدُ مِنْ لَيْلٍ وَلَا نَهَارٍ فَيَسْتَيْقِظُ إِلَّا تَسَوَّكَ قَبْلَ أَنْ يَتَوَضَّأَ
हमनी के बतावल गइल बा [मुहम्मद बिन कथिर] हमनी के [हम्मम] से [अली बिन जैद] से [उम्मू मुहम्मद] से [ऐसिया] से बतवले बाड़न कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ना त रात भा दिन नींद से ना उठले, जबले कि ऊ वजूद करे से पहिले सिवाक ना कइले रहले.
Imam Abu Dawud : 53
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا حُصَيْنٌ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ قَالَبِتُّ لَيْلَةً عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا اسْتَيْقَظَ مِنْ مَنَامِهِ أَتَى طَهُورَهُ فَأَخَذَ سِوَاكَهُ فَاسْتَاكَ ثُمَّ تَلَا هَذِهِ الْآيَاتِ{ إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ لَآيَاتٍ لِأُولِي الْأَلْبَابِ }حَتَّى قَارَبَ أَنْ يَخْتِمَ السُّورَةَ أَوْ خَتَمَهَا ثُمَّ تَوَضَّأَ فَأَتَى مُصَلَّاهُ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى فِرَاشِهِ فَنَامَ مَا شَاءَ اللَّهُ ثُمَّ اسْتَيْقَظَ فَفَعَلَ مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى فِرَاشِهِ فَنَامَ ثُمَّ اسْتَيْقَظَ فَفَعَلَ مِثْلَ ذَلِكَ ثُمَّ رَجَعَ إِلَى فِرَاشِهِ فَنَامَ ثُمَّ اسْتَيْقَظَ فَفَعَلَ مِثْل ذَلِكَ كُلُّ ذَلِكَ يَسْتَاكُ وَيُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ أَوْتَرَقَالَ أَبُو دَاوُد رَوَاهُ ابْنُ فُضَيْلٍ عَنْ حُصَيْنٍ قَالَ فَتَسَوَّكَ وَتَوَضَّأَ وَهُوَ يَقُولُ{ إِنَّ فِي خَلْقِ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ }حَتَّى خَتَمَ السُّورَةَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन ईसा] हमनी के बतवले बाड़े [हुसैम] हमनी के [हुशैन] से [हबीब बिन अबी थाबीत] से [मुहम्मद बिन अली बिन अब्दुल्ला बिन अब्बास] से [उनकर पिता] से [उनकर दादा, अब्दुल्ला बिन अब्बास] से बतवले बाड़े उ कहले; 'एक रात हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल में रात बितवनी, जब उ नींद से जागल त अपना के शुद्ध करे खातिर पानी लेले, फिर सिवाक अवुरी सिवाक लेले, फिर उ इ आयत पढ़ले, -जवना के मतलब बा-: 'वास्तव में, आकाश अवुरी धरती के सृष्टि में, अवुरी रात-दिन के बारी-बारी से समझ के लोग खाती संकेत बा,' -अली इमरान: 190-, ऊ तब तक पढ़त रहले जब तक कि ऊ लगभग चिट्ठी के कुचल ना दिहले, भा ऊ ऊ ओकरा के कुचल दिहले, फेर वजूद कइले, फेर अपना नमाज स्थल पर जाके दू रकाअत कइले. फेर ऊ अपना बिछौना पर लवट के अल्लाह के मर्जी से तबले सुत गइलन. फेर उठ के फेर से करीं, फेर फेर से बिछौना पर सुत जाईं. फेर उठ के फेरु से अईसने करऽ। फेर अपना बिछौना पर लवट के फेरु से नींद आ गइल. फेर उठ के फेरु से अयीसन कईले, हर बेर उठला प सिवाक कईले अवुरी दु रकाअत कईले, फेर वितर के नमाज कईले'। अबू दाऊद कहले कि; [इब्न फुदलैल] द्वारा [हुशैन] से रिवायत बा, उ -इब्न अब्बास- कहले बाड़न; 'उ सिवाक लेके वजूद कईले फिर श्लोक पढ़ले -जवना के मतलब होला-: 'वास्तव में आकाश आ धरती के सृष्टि में', जब तक कि उ अक्षर के कुचल ना देले'।
Imam Abu Dawud : 54
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ عَنْ أَبِيهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ صَدَقَةً مِنْ غُلُولٍ وَلَا صَلَاةً بِغَيْرِ طُهُورٍ
हमनी के बतवले बाड़े [मुस्लिम बिन इब्राहिम] हमनी के [स्यूबाह] से [कतदाह] से [अबू अल मलिह] से [अपना पिता] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े कि: 'अल्लाह अज्जा व जल्ला गुल खजाना से दक्षिणा ना लेवेले - चोरी के युद्ध के लूट से - अवुरी इहो बिना खुद के शुद्ध कईले नमाज ना स्वीकार करेले'।
Imam Abu Dawud : 55
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ صَلَاةَ أَحَدِكُمْ إِذَا أَحْدَثَ حَتَّى يَتَوَضَّأَ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन हंबल] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुरज्जाक] हमनी के [मा'मर] से [हम्मम बिन मुनाब्बीह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अल्लाह रउआ में से कवनो एक के नमाज तब तक कबूल ना करीहे, जब तक उ हदात ना करी, जब तक कि उ पहिले वज़ूद ना करी'।
Imam Abu Dawud : 56
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ ابْنِ عَقِيلٍ عَنْ مُحَمَّدِ ابْنِ الْحَنَفِيَّةِ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِفْتَاحُ الصَّلَاةِ الطُّهُورُ وَتَحْرِيمُهَا التَّكْبِيرُ وَتَحْلِيلُهَا التَّسْلِيمُ
हमनी के बतवले बा [उस्मान बिन अबी स्याइबा] हमनी के [वाकी’] से [सुफयान] से [इब्न अकील] से [मुहम्मद बिन अल हनाफिय्याह] से [अली रदलियाल्लाहु अनहु] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'नमाज के कुंजी शुद्धि ह, जवन चीज़ एकरा के मना करेला - नमाज से बाहर के सभ शब्द अवुरी हरकत - उ ह तकबीर, अवुरी जवन चीज़ एकरा के दोबारा हलाम बनावेला, उ ह सलामी'।
Imam Abu Dawud : 57
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ فَارِسٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ ح و حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ زِيَادٍ قَالَ أَبُو دَاوُد وَأَنَا لِحَدِيثِ ابْنِ يَحْيَى أَتْقَنُ عَنْ غُطَيْفٍ وَقَالَ مُحَمَّدٌ عَنْ أَبِي غُطَيْفٍ الْهُذَلِيِّ قَالَكُنْتُ عِنْدَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ فَلَمَّا نُودِيَ بِالظُّهْرِ تَوَضَّأَ فَصَلَّى فَلَمَّا نُودِيَ بِالْعَصْرِ تَوَضَّأَ فَقُلْتُ لَهُ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ تَوَضَّأَ عَلَى طُهْرٍ كَتَبَ اللَّهُ لَهُ عَشْرَ حَسَنَاتٍقَالَ أَبُو دَاوُد وَهَذَا حَدِيثُ مُسَدَّدٍ وَهُوَ أَتَمُّ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन याह्या बिन फारिस] हमनी के [अब्दुल्लाह बिन यजीद अल मुकरी`] बतवले बाड़े। आ एगो अउरी लाइन के अनुसार; हमनी के [मुसद्दद] के बतवले बाड़े अवुरी बता देले बाड़े [ईसा बिन यूनुस] उ दुनो लोग कहले रहले; हमनी के [अब्दुररहमान बिन जियाद] के बतवले बाड़े, अबू दाऊद कहले; हम इब्न याह्या के हदीस [गुथाइफ] से बेहतर रटत बानी, आ मुहम्मद कहले; अबू घुथाइफ अल हुदजाली से मिलल; हम एक बेर [अब्दुल्लाह बिन उमर] के संगे रहनी, जब दुपहरिया के नमाज बोलावल गईल त उ वजूद कईले अवुरी ओकरा बाद नमाज पढ़ले। जब अस्र के नमाज कहल गइल त ऊ फेर से वजूद कइलन, फेर हम उनुका से -ओह बारे में- पूछनी, फेर ऊ जवाब दिहलन कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि: 'जे शुद्ध अवस्था में वज़ूद करेला -अभी भी वज़ूद-, तब अल्लाह ओकरा खातिर दस कबइकन लिखले बाड़न'। अबू दाऊद कहले कि; इ मुसद्दद के हदीस ह, अवुरी इ जादे परफेक्ट बा।
Imam Abu Dawud : 58
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ وَغَيْرُهُمْ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ كَثِيرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرِ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَسُئِلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْمَاءِ وَمَا يَنُوبُهُ مِنْ الدَّوَابِّ وَالسِّبَاعِ فَقَالَ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ لَمْ يَحْمِلْ الْخَبَثَقَالَ أَبُو دَاوُد وَهَذَا لَفْظُ ابْنُ الْعَلَاءِ و قَالَ عُثْمَانُ وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ قَالَ أَبُو دَاوُد وَهُوَ الصَّوَابُ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ ح و حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جَعْفَرٍ قَالَ أَبُو كَامِلٍ ابْنُ الزُّبَيْرِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ الْمَاءِ يَكُونُ فِي الْفَلَاةِ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ
हमनी के [मुहम्मद बिन अल अला] आ [उस्मान बिन अबी स्याइबा] आ [अल हसन बिन अली] आ अउरी लोग के बतावल गइल बा, उ लोग कहल कि; हमनी के [अबू उसामाह] से [अल वलीद बिन कत्सिर] से [मुहम्मद बिन जाफर बिन अज़ जुबैर] से [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से [उनकर पिता] से बतवले बाड़े, उ कहले कि; रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पानी आ -स्थान- पानी के बारे में पूछल गइल जवना में हमेशा सरीसृप आ जंगली जानवर आवेलें, तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि अगर पानी दू कुदला बा त ऊ अशुद्ध नइखे’। अबू दाऊद कहले कि; इ इब्न अल आला के लफाज ह - यानी कि उनकर सनाद में मुहम्मद बिन जाफर बिन अज जुबैर नाम के एगो कथाकार बाड़े -। एही बीच [उस्मान] अवुरी [अल हसन बिन अली] [मुहम्मद बिन अब्बाद बिन जाफर] -मुहम्मद बिन जाफर बिन अज़ जुबैर के जगह- के जिक्र कईले। अबू दाऊद कहले कि; इहे बात साँच बा। हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के [हम्मद] के बतवले बाड़े, अवुरी एगो अवुरी लाइन के मुताबिक; हमनी के बतवले बाड़े [अबू कामिल] हमनी के [यजीद, यानी इब्न ज़ुरै'] के [मुहम्मद बिन इशाक] से [मुहम्मद बिन जा'फर] से बतवले बाड़े। अबू कामिल इब्न अज जुबैर कहले कि; [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से [उनकर पिता] से कि रसुलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम से खेत में पानी के बारे में पूछल गईल, फिर उ एगो हदीस के जिक्र कईले जवन कि पहिला हदीस से मिलत जुलत रहे।
Imam Abu Dawud : 59
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا عَاصِمُ بْنُ الْمُنْذِرِ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِيأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا كَانَ الْمَاءُ قُلَّتَيْنِ فَإِنَّهُ لَا يَنْجُسُقَالَ أَبُو دَاوُد حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ وَقَفَهُ عَنْ عَاصِمٍ
हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन इस्माइल] हमनी के बतवले बाड़े [हम्मद] हमनी के बतवले बाड़े [‘अशिम बिन अल मुंडिर] [उबैदिल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से, उ कहले; हमरा [हमार पिता] के बतावल गईल बा, कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अगर पानी दु कुलाह तक पहुंच गईल त उ अशुद्ध नईखे'। अबू दाऊद कहले कि; हम्मद बिन जैद अशिम से कहले रहले।
Imam Abu Dawud : 60
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ وَمُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَنْبَارِيُّ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ الْوَلِيدِ بْنِ كَثِيرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ كَعْبٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّأَنَّهُ قِيلَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَتَوَضَّأُ مِنْ بِئْرِ بُضَاعَةَ وَهِيَ بِئْرٌ يُطْرَحُ فِيهَا الْحِيَضُ وَلَحْمُ الْكِلَابِ وَالنَّتْنُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَاءُ طَهُورٌ لَا يُنَجِّسُهُ شَيْءٌقَالَ أَبُو دَاوُد وَقَالَ بَعْضُهُمْ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ رَافِعٍ
[मुहम्मद बिन अल अला] आ [अल हसन बिन अली] आ [मुहम्मद बिन सुलेमान अल अनबरी] हमनी के बतवले बाड़न कि [अबू उसामा] हमनी के [अल वलीद बिन कथिर] से [मुहम्मद बिन क’ब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन रफी’ बिन खदीज] से [अबू सईद अल खुदरी] से बतवले बाड़न कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (अ.म.) आ... अल्लाह के बरकत उनुका पर होखे) से पूछल गइल कि का हमनी के बिदला के कुआँ से वजूद कइल जायज बा? ई एगो अइसन कुआँ ह जवना में मासिक धर्म के कचरा, मरल कुकुर आ बदबूदार चीज फेंकल जाला.' अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जवाब देले कि पानी शुद्ध होखेला, ओकरा के कवनो चीज़ गंदा नईखे क सकत। अबू दाऊद कहले कि: ओहमें से कुछ लोग अब्दुर्रहमान बिन रफी' -अब्दुल्लाह बिन रफी' के जगह लेत- के जिक्र कइले बा।