इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
Free Download / मुफ्त डाउनलोड

इमाम मुस्लिम (الامام مسلم) - 5362 हदीस

युद्ध के मैदान में पंथ का अनुसरण करने वाले एक व्यक्ति को मारने के प्रयास की कहानी

इमाम मुस्लिम : 141

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ الدَّوْرَقِيُّ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا حُصَيْنٌ حَدَّثَنَا أَبُو ظِبْيَانَ قَالَ سَمِعْتُ أُسَامَةَ بْنَ زَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ يُحَدِّثُ قَالَ بَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى الْحُرَقَةِ مِنْ جُهَيْنَةَ فَصَبَّحْنَا الْقَوْمَ فَهَزَمْنَاهُمْ وَلَحِقْتُ أَنَا وَرَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ رَجُلًا مِنْهُمْ فَلَمَّا غَشِينَاهُ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَكَفَّ عَنْهُ الْأَنْصَارِيَّ وَطَعَنْتُهُ بِرُمْحِي حَتَّى قَتَلْتُهُ قَالَ فَلَمَّا قَدِمْنَا بَلَغَ ذَلِكَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لِي يَا أُسَامَةُ أَقَتَلْتَهُ بَعْدَ مَا قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّمَا كَانَ مُتَعَوِّذًا قَالَ فَقَالَ أَقَتَلْتَهُ بَعْدَ مَا قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ قَالَ فَمَا زَالَ يُكَرِّرُهَا عَلَيَّ حَتَّى تَمَنَّيْتُ أَنِّي لَمْ أَكُنْ أَسْلَمْتُ قَبْلَ ذَلِكَ الْيَوْمِ

हमें बताया है [याकूब विज्ञापन-दौराकी] ने हमें बताया है [हुसयिम] ने हमें बताया है [हुशैन] ने हमें बताया है [अबू डिलीबियान] उन्होंने कहा, मैंने सुना [उसामा बिन ज़ैद बिन हारित्सा] ने कहा, उन्होंने कहा, "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें जुहैना के क्षेत्रों में से एक अल-हुराका में भेजा है। फिर सुबह हमने उन पर हमला किया जब तक कि वे उसे हराने में सक्षम नहीं हो गए, उसके बाद मैं और एक अंसार व्यक्ति उनमें से एक आदमी से मिले। जब हम उसके पास पहुंचे, तो उसने कहा, 'ला इलाहा इल्लल्लाहु (अल्लाह के अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं है)। इसलिए अंसार आदमी उसे मारने से रुक गया, जबकि मैंने उसे अपने भाले से तब तक घोंप दिया, जब तक कि मैंने उसे मार नहीं दिया'। उसामा, क्या आपने उसे तब मार डाला जब उसने कहा, "अल्लाह (ला इलाहा इल्लल्लाहु) के अलावा कोई पूजा के योग्य नहीं है? ' मैंने जवाब दिया, 'अल्लाह के रसूल, उसने यह सिर्फ़ एक ढाल के तौर पर कहा था।' कहानी सुनाने वाले ने कहा, "अल्लाह के रसूल ने कहा: 'क्या तुमने उसे यह बात कहने के बाद मार डाला?' उसामा ने जवाब दिया, 'और वह मुझे यह बात तब तक दोहराता रहा जब तक मैंने चाहा कि काश मैंने उस समय इस्लाम न अपनाया होता।'"

शहादत से पहले एक राजनेता की हत्या की कहानी से सबक

इमाम मुस्लिम : 142

حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ بْنِ خِرَاشٍ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَاصِمٍ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ أَنَّ خَالِدًا الْأَثْبَجَ ابْنَ أَخِي صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ حَدَّثَ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ أَنَّهُ حَدَّثَ أَنَّ جُنْدَبَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْبَجَلِيَّ بَعَثَ إِلَى عَسْعَسِ بْنِ سَلَامَةَ زَمَنَ فِتْنَةِ ابْنِ الزُّبَيْرِ فَقَالَ اجْمَعْ لِي نَفَرًا مِنْ إِخْوَانِكَ حَتَّى أُحَدِّثَهُمْ فَبَعَثَ رَسُولًا إِلَيْهِمْ فَلَمَّا اجْتَمَعُوا جَاءَ جُنْدَبٌ وَعَلَيْهِ بُرْنُسٌ أَصْفَرُ فَقَالَ تَحَدَّثُوا بِمَا كُنْتُمْ تَحَدَّثُونَ بِهِ حَتَّى دَارَ الْحَدِيثُ فَلَمَّا دَارَ الْحَدِيثُ إِلَيْهِ حَسَرَ الْبُرْنُسَ عَنْ رَأْسِهِ فَقَالَ إِنِّي أَتَيْتُكُمْ وَلَا أُرِيدُ أَنْ أُخْبِرَكُمْ عَنْ نَبِيِّكُمْ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَ بَعْثًا مِنْ الْمُسْلِمِينَ إِلَى قَوْمٍ مِنْ الْمُشْرِكِينَ وَإِنَّهُمْ الْتَقَوْا فَكَانَ رَجُلٌ مِنْ الْمُشْرِكِينَ إِذَا شَاءَ أَنْ يَقْصِدَ إِلَى رَجُلٍ مِنْ الْمُسْلِمِينَ قَصَدَ لَهُ فَقَتَلَهُ وَإِنَّ رَجُلًا مِنْ الْمُسْلِمِينَ قَصَدَ غَفْلَتَهُ قَالَ وَكُنَّا نُحَدَّثُ أَنَّهُ أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ فَلَمَّا رَفَعَ عَلَيْهِ السَّيْفَ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَتَلَهُ فَجَاءَ الْبَشِيرُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ فَأَخْبَرَهُ حَتَّى أَخْبَرَهُ خَبَرَ الرَّجُلِ كَيْفَ صَنَعَ فَدَعَاهُ فَسَأَلَهُ فَقَالَ لِمَ قَتَلْتَهُ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَوْجَعَ فِي الْمُسْلِمِينَ وَقَتَلَ فُلَانًا وَفُلَانًا وَسَمَّى لَهُ نَفَرًا وَإِنِّي حَمَلْتُ عَلَيْهِ فَلَمَّا رَأَى السَّيْفَ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقَتَلْتَهُ قَالَ نَعَمْ قَالَ فَكَيْفَ تَصْنَعُ بِلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ إِذَا جَاءَتْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ اسْتَغْفِرْ لِي قَالَ وَكَيْفَ تَصْنَعُ بِلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ إِذَا جَاءَتْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ فَجَعَلَ لَا يَزِيدُهُ عَلَى أَنْ يَقُولَ كَيْفَ تَصْنَعُ بِلَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ إِذَا جَاءَتْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ

हमें बताया है [अहमद बिन अल-हसन बिन खिरसी] ने हमें बताया है [अमरू बिन अशीम] ने हमें बताया है [मुअतमिर] उसने कहा, मैंने [अपने पिता] को यह कहते हुए सुना कि [खालिद अल-अत्सबाज] मेरे भाई, शफवान बिन मुहरिज के बेटे ने [शफान बिन मुहरिज] से कहा है कि उन्होंने बताया है, कि इब्न जुबैर की बदनामी के समय, [जुंदब बिन अब्दुल्ला अल-बजाली] ने एक बार 'अस'स बिन सलमा के पास दूत भेजा, "अपने कुछ भाइयों को इकट्ठा करो ताकि मैं उन्हें कुछ समाचार बता सकूं। इसलिए उनमें से एक को उनके पास भेजा गया, और जब वे एकत्र हुए, जुंदब एक पीले रंग का सिर ढकने वाला कपड़ा पहने हुए आया और कहा, 'उस बारे में बात करो जिसके बारे में तुम हमेशा बात करते रहे हो', जब तक कि उनके बीच बातचीत नहीं हुई। और जब बातचीत उसके पास पहुंची, तो उसने अपना सिर ढकने वाला कपड़ा हटा दिया और कहा, 'मैं तुम्हारे पास आया हूं, तुम्हारे पैगंबर से समाचार देने का इरादा नहीं रखता एक बार मुसलमानों की तरफ़ से एक रसूल ने मुशरिकों के पास भेजा। और वे सच में आमने-सामने थे, इस हद तक कि अगर कोई मुशरिक किसी मुसलमान को मारना चाहता, तो वह उसे ज़रूर मार देता, और इसी तरह एक मुसलमान को, वह उसे तब भी निशाना बना सकता था जब वह होश में न हो। उन्होंने कहा, 'और उस समय हमें उसामा बिन ज़ैद की घटना के बारे में बताया गया, जहाँ जब उसने अपनी तलवार उठाई, तो अचानक मुशरिक ने कहा, 'अल्लाह के अलावा कोई भगवान (पूजा के लायक) नहीं है', लेकिन फिर भी उसने उसे मार डाला। तो बशीर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास शिकायत करने और उनसे इस बारे में पूछने गया। उसने उन्हें बताया कि उस आदमी ने क्या किया था। तो उसने उसामा को बुलाया और उससे पूछा, 'तुमने उसे क्यों मारा?' उसने जवाब दिया, 'अल्लाह के रसूल, उसने मुसलमानों को नुकसान पहुँचाया है, उसने फलाने-फलाने को मारा है, और उसने उसका नाम लिया है, और सच में उससे नाराज़ है, लेकिन जब उसने मेरी तलवार देखी, तो उसने कहा, 'कोई भगवान नहीं है'। (पूजा के लायक) अल्लाह के अलावा’। रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर पूछा: ‘क्या तुम ही हो जिसने उसे मारा?’ उसने जवाब दिया, ‘हाँ।’ उसने फिर पूछा: ‘तो तुम इस बात का क्या करोगे, ‘अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है (जिसकी पूजा की जाए)’, अगर वह कयामत के दिन (हिसाब मांगने) आए?’

मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाना

इमाम मुस्लिम : 143

حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا يَحْيَى وَهُوَ الْقَطَّانُ ح و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ كُلُّهُمْ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَاللَّفْظُ لَهُ قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَمَلَ عَلَيْنَا السِّلَاحَ فَلَيْسَ مِنَّا

हमसे कहा [ज़ुहैर बिन हर्ब] और [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] दोनों ने कहा, हमसे कहा [याह्या यानी अल-क़त्थन]। (एक और रिवायत में कहा गया है) और हमसे कहा [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमसे कहा [अबू उसामा] और [इब्न नुमैर] सब कुछ [उबैदुल्लाह] से [नफ़ी] से [इब्न उमर] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से। (एक और रिवायत में कहा गया है) और हमसे [याह्या बिन यह्या] और लफ़ज़ उन्हीं का होने के बारे में बताकर उन्होंने कहा; मैंने इसे [मलिक] से पहले पढ़ा; [नफ़ी] से [इब्न उमर] से कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई हम पर हमला करने के लिए तलवार लाता है, तो वह हमारे समूह में से नहीं है।"

मुसलमानों पर तलवार चलाना

इमाम मुस्लिम : 144

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَابْنُ نُمَيْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُصْعَبٌ وَهُوَ ابْنُ الْمِقْدَامِ حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ عَنْ إِيَاسِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ سَلَّ عَلَيْنَا السَّيْفَ فَلَيْسَ مِنَّا

हमको [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [इब्न नुमैर] दोनों ने कहा, हमको [मुशाब] - अर्थात इब्न अल-मिक्दम - ने [इकरीमा बिन अम्मार] [इयास बिन सलमा] से [अपने पिता] पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, "जो कोई भी हम पर हमला करने के लिए तलवार खींचता है, तो वह हमारे समूह में से नहीं है।"

मुसलमानों पर तलवार उठाना

इमाम मुस्लिम : 145

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَرَّادٍ الْأَشْعَرِيُّ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ بُرَيْدٍ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَمَلَ عَلَيْنَا السِّلَاحَ فَلَيْسَ مِنَّا

उन्होंने हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [अब्दुल्ला बिन बर्रद अल-अशरी] और [अबू कुरैब] बताया है, उन्होंने हमें [अबू उसामा] [बुरैद] से [अबू बुरदा] से [अबू मूसा] से बताया है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, "जो कोई भी हम पर हमला करने के लिए तलवार का निर्देश देता है, तो वह हमारे समूह में से नहीं है।"

धोखाधड़ी और हथियार रखने पर प्रतिबंध

इमाम मुस्लिम : 146

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْقَارِيُّ ح و حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ مُحَمَّدُ بْنُ حَيَّانَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي حَازِمٍ كِلَاهُمَا عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَمَلَ عَلَيْنَا السِّلَاحَ فَلَيْسَ مِنَّا وَمَنْ غَشَّنَا فَلَيْسَ مِنَّا

हमें बताया है [कुतुबियाह बिन सईद] ने हमें [याकूब] - अर्थात् इब्न अब्दुर्रहमान अल-कारी - बताया है। (एक अन्य रिवायत में इसका उल्लेख है) और हमें बताया गया है [अबू अल-अहवाश मुहम्मद बिन हैयान] ने हमें [इब्न अबू हाज़िम] दोनों [सुहैल बिन अबू सलीह] से [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी हम पर हमला करने के लिए तलवार लाता है, तो वह हमारे समूह में से नहीं है। और जो कोई भी हमें धोखा देता है, तो वह हमारे समूह में से नहीं है।"

खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी पर रोक

इमाम मुस्लिम : 147

و حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ وَقُتَيْبَةُ وَابْنُ حُجْرٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْعَلَاءُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى صُبْرَةِ طَعَامٍ فَأَدْخَلَ يَدَهُ فِيهَا فَنَالَتْ أَصَابِعُهُ بَلَلًا فَقَالَ مَا هَذَا يَا صَاحِبَ الطَّعَامِ قَالَ أَصَابَتْهُ السَّمَاءُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ أَفَلَا جَعَلْتَهُ فَوْقَ الطَّعَامِ كَيْ يَرَاهُ النَّاسُ مَنْ غَشَّ فَلَيْسَ مِنِّي

और यह हम [याह्या बिन अय्यूब] और [कुतैबा] और [इब्न हुज्र] सभी को [इस्माइल बिन जाफर] से बताया गया है, [इब्न अय्यूब] ने कहा, हमें [इस्माइल] ने कहा, उन्होंने मुझे [अल-अला] [उनके पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल खाने के ढेर के पास से गुजरे, फिर उन्होंने अपना हाथ उसमें डाल दिया, फिर उनके हाथ ने किसी गीली चीज़ को छुआ, तो उन्होंने पूछा: "यह क्या है, खाने के मालिक?" मालिक ने जवाब दिया, "खाना बारिश के पानी के संपर्क में था, अल्लाह के रसूल।" उसने कहा: "आप इसे खाने की जगह पर क्यों नहीं रखते ताकि लोग इसे देख सकें। जो कोई भी धोखा करता है वह हमारे समूह में से नहीं है।"

प्रतीक्षा करने और कपड़े फाड़ने पर प्रतिबंध

इमाम मुस्लिम : 148

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ ح و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ ح و حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي جَمِيعًا عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْسَ مِنَّا مَنْ ضَرَبَ الْخُدُودَ أَوْ شَقَّ الْجُيُوبَ أَوْ دَعَا بِدَعْوَى الْجَاهِلِيَّةِ هَذَا حَدِيثُ يَحْيَى وَأَمَّا ابْنُ نُمَيْرٍ وَأَبُو بَكْرٍ فَقَالَا وَشَقَّ وَدَعَا بِغَيْرِ أَلِفٍ و حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ ح و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَلِيُّ بْنُ خَشْرَمٍ قَالَا حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ جَمِيعًا عَنْ الْأَعْمَشِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَا وَشَقَّ وَدَعَا

हमें बताया है [याह्या बिन यह्या] ने हमें बताया है [अबू मुअविया]। (एक और रिवायत में कहा गया है) और हमें बताया गया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [अबू मुअविया] और [वाकी]। (एक और रिवायत में ज़िक्र है) और हमसे [इब्न नुमैर] ने [मेरे पिता] को [अल-अमासी] से [अब्दुल्ला बिन मुर्रा] से [मसरुक] से [अब्दुल्ला] तक सब कुछ बता दिया था, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यह हमारे समूह से नहीं है कि लोग अपने गालों पर थप्पड़ मारें, अपनी जेबें फाड़ें या जाहिलियत के लोगों की नमाज़ों के साथ नमाज़ पढ़ें।" यह हदीस [याह्या]। जहाँ तक [इब्न नुमैर] और [अबू बक्र] का सवाल है, उन दोनों ने उल्लेख किया, "फाड़ना और नमाज़ पढ़ना (बिना अलिफ़ के)।" और हमसे कहा है [उथमन बिन अबू सय्यबा] ने हमें [जरीर] बताया है। यह सनद, और दोनों उल्लेख करते हैं, "और फाड़ना और नमाज़ पढ़ना।"

शव पर शोक मनाने पर प्रतिबंध

इमाम मुस्लिम : 149

حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ مُوسَى الْقَنْطَرِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ بْنِ جَابِرٍ أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُخَيْمِرَةَ حَدَّثَهُ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو بُرْدَةَ بْنُ أَبِي مُوسَى قَالَ وَجِعَ أَبُو مُوسَى وَجَعًا فَغُشِيَ عَلَيْهِ وَرَأْسُهُ فِي حَجْرِ امْرَأَةٍ مِنْ أَهْلِهِ فَصَاحَتْ امْرَأَةٌ مِنْ أَهْلِهِ فَلَمْ يَسْتَطِعْ أَنْ يَرُدَّ عَلَيْهَا شَيْئًا فَلَمَّا أَفَاقَ قَالَ أَنَا بَرِيءٌ مِمَّا بَرِئَ مِنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَرِئَ مِنْ الصَّالِقَةِ وَالْحَالِقَةِ وَالشَّاقَّةِ

हमें [अल-हकम बिन मूसा अल-कंथारी] ने हमें [याह्या बिन हमज़ा] [अब्दुर्रहमान बिन यज़ीद बिन जाबिर] से बताया है कि [अल-कासिम बिन मुख़ैमिरा] ने उन्हें बताया है, उन्होंने कहा; हमें [अबू बुरदा बिन अबू मूसा] ने बताया है कि उन्होंने कहा, "अबू मूसा को तब तक दर्द हुआ जब तक वह बेहोश नहीं हो गए, जबकि उनका सिर उनके परिवार की एक महिला की गोद में था, महिला पागलों की तरह चिल्ला रही थी जबकि वह (अबू मूसा) कुछ नहीं कर सके (क्योंकि वह बेहोश हो गए थे)। जब उन्हें होश आया, तो [अबू मूसा] ने कहा, 'मैं उस काम से बच गया जिससे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) बच गए थे। बेशक, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) उन महिलाओं से दूर रहते हैं जो मुसीबत आने पर चिल्लाती हैं, और जो अपने बाल काट लेती हैं और अपने कपड़े फाड़ लेती हैं।

अपने आप को उन रोने वालों और अपने कपड़े उछालने वालों से दूर करो

इमाम मुस्लिम : 150

حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ وَإِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَا أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا أَبُو عُمَيْسٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا صَخْرَةَ يَذْكُرُ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ وَأَبِي بُرْدَةَ بْنِ أَبِي مُوسَى قَالَا أُغْمِيَ عَلَى أَبِي مُوسَى وَأَقْبَلَتْ امْرَأَتُهُ أُمُّ عَبْدِ اللَّهِ تَصِيحُ بِرَنَّةٍ قَالَا ثُمَّ أَفَاقَ قَالَ أَلَمْ تَعْلَمِي وَكَانَ يُحَدِّثُهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَنَا بَرِيءٌ مِمَّنْ حَلَقَ وَسَلَقَ وَخَرَقَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُطِيعٍ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ حُصَيْنٍ عَنْ عِيَاضٍ الْأَشْعَرِيِّ عَنْ امْرَأَةِ أَبِي مُوسَى عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنِيهِ حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي حَدَّثَنَا دَاوُدُ يَعْنِي ابْنَ أَبِي هِنْدٍ حَدَّثَنَا عَاصِمٌ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنِي الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ عَنْ أَبِي مُوسَى عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا الْحَدِيثِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ عِيَاضٍ الْأَشْعَرِيِّ قَالَ لَيْسَ مِنَّا وَلَمْ يَقُلْ بَرِيءٌ

हमें बताया है [अब्द बिन हुमैद] और [इस्हाक बिन मंशूर] दोनों ने कहा, हमें बताया है [जाफर बिन औन] ने हमें बताया है [अबू उमैस] दोनों ने कहा, मैंने [अबु शखरा] का ज़िक्र [अब्दुर्रहमान बिन यज़ीद] और [अबू बुरदाह बिन अबू मूसा] से सुना, दोनों ने कहा, "[अबू मूसा] बेहोश हो गए, उनकी पत्नी, उम्म अब्दुल्लाह ने उन्हें एक पागल चीख के साथ स्वागत किया।" दोनों ने अपनी बातें जारी रखीं, "जब उन्हें होश आया, तो उन्होंने कहा, 'क्या तुम (रोने का नियम) नहीं जानते,'" फिर उन्होंने उनसे कहा कि अल्लाह के रसूल ने कहा: "मैं उन लोगों से खुद को अलग करता हूँ जो अपने बाल काटते हैं, चिल्लाते हैं और अपने कपड़े फाड़ते हैं।" हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन मुथी] ने हमें बताया है [हुसैम] [हुशैन] से [इयादल अल-अशरी] से [अबू मूसा की पत्नी] से [अबू मूसा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से। (एक अन्य इतिहास में उल्लेख किया गया है)। और हमें बताया है [हज्जाज बिन अश-सयार] ने हमें बताया है [अब्द अश-शमद] ने कहा, हमें बताया है [मेरे पिता] ने हमें बताया है [दाऊद] - अर्थात् इब्न अबू हिंद - ने हमें बताया है [आशिम] [शफवान बिन मुहरिज़] से [अबू मूसा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से। (एक अन्य रिवायत में उल्लेख किया गया है) और हमें बताया है [अल-हसन बिन अली अल-हुलवानी] ने हमें बताया है [अब्द अश-शमद] ने मुझे बताया है [स्यूबा] [अब्दुल मलिक बिन उमैर] से [रिबी बिन हिरसी] से [अबू मूसा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इस हदीस के साथ, केवल इयादल अल-असयारी की हदीस में, उन्होंने उल्लेख किया, "हमारे एक समूह से नहीं।' और उन्होंने यह नहीं कहा, "जाने दो।"

भेड़ समितियाँ स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगी

इमाम मुस्लिम : 151

و حَدَّثَنِي شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَسْمَاءَ الضُّبَعِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا مَهْدِيٌّ وَهُوَ ابْنُ مَيْمُونٍ حَدَّثَنَا وَاصِلٌ الْأَحْدَبُ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ حُذَيْفَةَ أَنَّهُ بَلَغَهُ أَنَّ رَجُلًا يَنُمُّ الْحَدِيثَ فَقَالَ حُذَيْفَةُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ نَمَّامٌ

और हमको [सय्यबान बिन फारुख] और [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन अस्मा' अदल-दलुबाई] दोनों ने कहा, हमको [महदी] - अर्थात् इब्न मैमुन - ने [वसहिल अल-अहदाब] [अबू वईल] से [हुदज़ैफा] तक बताया है कि यह उसके पास आया है, कि एक आदमी बातचीत कर रहा था, फिर हुदज़ैफा ने कहा, "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "जो लोग एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होना पसंद करते हैं वे स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगे।"

विभाजित पॉटिंग का निषेध

इमाम मुस्लिम : 152

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ إِسْحَقُ أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ قَالَ كَانَ رَجُلٌ يَنْقُلُ الْحَدِيثَ إِلَى الْأَمِيرِ فَكُنَّا جُلُوسًا فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ الْقَوْمُ هَذَا مِمَّنْ يَنْقُلُ الْحَدِيثَ إِلَى الْأَمِيرِ قَالَ فَجَاءَ حَتَّى جَلَسَ إِلَيْنَا فَقَالَ حُذَيْفَةُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَتَّاتٌ

हमसे कहा है [अली बिन हुज्र अस-सादी] और [इसहाक बिन इब्राहिम] ने कहा [इसहाक] ने हमसे कहा है [जरीर] [मंसूर] से [इब्राहिम] से [हम्माम बिन अल-हारित्स] ने उन्होंने कहा, "एक आदमी ने एक अमीर को बातचीत सुनाई, जब हम मस्जिद में बैठे थे। तो लोगों ने कहा, "यह वह व्यक्ति है जिसने अमीर को बातचीत सुनाई थी।" कथावाचक ने कहा, "तो वह आया और हमारे सामने बैठ गया, [हुदज़ैफा] ने फिर कहा, 'मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते हुए सुना: "न तो कोई चोर जन्नत में प्रवेश करेगा।"

भेड़ खोजने वालों के लिए सज़ा

इमाम मुस्लिम : 153

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ وَوَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ ح و حَدَّثَنَا مِنْجَابُ بْنُ الْحَارِثِ التَّمِيمِيُّ وَاللَّفْظُ لَهُ أَخْبَرَنَا ابْنُ مُسْهِرٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ هَمَّامِ بْنِ الْحَارِثِ قَالَ كُنَّا جُلُوسًا مَعَ حُذَيْفَةَ فِي الْمَسْجِدِ فَجَاءَ رَجُلٌ حَتَّى جَلَسَ إِلَيْنَا فَقِيلَ لِحُذَيْفَةَ إِنَّ هَذَا يَرْفَعُ إِلَى السُّلْطَانِ أَشْيَاءَ فَقَالَ حُذَيْفَةُ إِرَادَةَ أَنْ يُسْمِعَهُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَتَّاتٌ

हमसे कहा है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमसे कहा है [अबू मुअविया], और [वाकी'] ने [अल-अमासी] से। (एक और रिवायत में इसका उल्लेख है) और हमसे कहा है [मिनजाब बिन अल-हारीत्स अत-तमीमी] और लफ़ज़ उसी का है, हमसे कहा है [इब्न मुशीर] ने [अल-अमासी] से [इब्राहिम] से [हम्माम बिन अल-हारीत्स] ने कहा कि हम मस्जिद में हुदज़ैफा के साथ बैठे थे, फिर एक आदमी आया और हमारे सामने बैठ गया। फिर हुदज़ैफा से कहा गया, 'वास्तव में इस व्यक्ति ने शासक को एक संदेश दिया है।' तो [हुदज़ैफा] ने इस इरादे से कहा कि वह सुनेगा, "मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते हुए सुना: "जो लोग एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होना पसंद करते हैं, वे स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेंगे।"

तीन समूह जिनसे परमेश्‍वर घृणा करता है

इमाम मुस्लिम : 154

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالُوا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَلِيِّ بْنِ مُدْرِكٍ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ خَرَشَةَ بْنِ الْحُرِّ عَنْ أَبِي ذَرٍّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثَةٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ قَالَ فَقَرَأَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَ مِرَارًا قَالَ أَبُو ذَرٍّ خَابُوا وَخَسِرُوا مَنْ هُمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الْمُسْبِلُ وَالْمَنَّانُ وَالْمُنَفِّقُ سِلْعَتَهُ بِالْحَلِفِ الْكَاذِبِ

हमसे कहा है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] और [इब्न बसिस्यार] उन्होंने कहा, हमसे कहा है [मुहम्मद बिन जाफर] से [स्यूबा] से [अली बिन मुद्रिक] से [अबू ज़ुरा] से [खरस्याह बिन अल-हुर] से [अबू धर] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, उन्होंने कहा: "लोगों के तीन समूह हैं कि अल्लाह पुनरुत्थान के दिन उनसे बात नहीं करेगा, उन्हें नहीं देखेगा, उनके पापों को साफ नहीं करेगा और उनके लिए एक दर्दनाक सजा है।" अबू ज़ार ने फिर कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे तीन बार पढ़ा। अबू ज़ार ने कहा, "वे नाकाम हो गए और हार गए, वे कौन हैं, अल्लाह के रसूल?" उन्होंने जवाब दिया, "वे लोग जो इस्बाल (अपने कपड़े लंबे करना) करते हैं, वे लोग जो इसका ज़िक्र करके देना पसंद करते हैं (रिया की वजह से), और वे लोग जो झूठी कसम खाकर सामान बेचते हैं।"

तीन लोग जिनसे परमेश्वर ने बात नहीं की

इमाम मुस्लिम : 155

و حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلَّادٍ الْبَاهِلِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى وَهُوَ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الْأَعْمَشُ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُسْهِرٍ عَنْ خَرَشَةَ بْنِ الْحُرِّ عَنْ أَبِي ذَرٍّ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثَةٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ الْمَنَّانُ الَّذِي لَا يُعْطِي شَيْئًا إِلَّا مَنَّهُ وَالْمُنَفِّقُ سِلْعَتَهُ بِالْحَلِفِ الْفَاجِرِ وَالْمُسْبِلُ إِزَارَهُ و حَدَّثَنِيهِ بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ قَالَ سَمِعْتُ سُلَيْمَانَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَ ثَلَاثَةٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ

और हमसे कहा है [अबू बक्र बिन खल्लाद अल-बाहिली] ने हमसे कहा है [याह्या] -अर्थात् अल-कथथन- ने हमसे कहा है [सुफियान] ने हमसे कहा है [सुलेमान अल-अमासी] ने [सुलेमान बिन मुशीर] से [खरस्याह बिन अल-हुर] से [अबू ज़ार] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, उन्होंने कहा: "तीन लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने प्रलय के दिन बोलने के लिए आमंत्रित नहीं किया: वह व्यक्ति जो देना पसंद करता है, वह देता है लेकिन इसका उल्लेख (रिया के कारण) के साथ, वह व्यक्ति जो झूठी कसम खाकर अपना माल बेचता है, और वह व्यक्ति जो अपने कपड़े इस्बाल (लंबे) करता है।" और हमसे कहा है [बिसिर बिन खालिद] ने हमसे कहा है [मुहम्मद] - अर्थात् इब्न जाफर - [शुबा] से उन्होंने कहा, मैंने [सुलेमान] को इस सनद के साथ सुना, और उन्होंने उल्लेख किया, "तीन लोग थे जिनसे अल्लाह ने बात करने के लिए उन्हें आमंत्रित नहीं किया और न ही उन्हें देखा और न ही उन्हें पवित्र किया। और उन्हें एक दर्दनाक सजा मिली।"

तीन समूह जिन्हें दर्दनाक यातना मिलती है

इमाम मुस्लिम : 156

و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَةٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ قَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ شَيْخٌ زَانٍ وَمَلِكٌ كَذَّابٌ وَعَائِلٌ مُسْتَكْبِرٌ

और हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें [वाकी] और [अबू मुअविया] ने [अल-अमासी] से [अबू हाज़िम] से [अबू हुरैरा] से बताया है उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तीन लोग हैं जिनके साथ अल्लाह ने पुनरुत्थान के दिन बात करने के लिए उन्हें आमंत्रित नहीं किया, और उन्हें पवित्र नहीं किया।" अबू मुअविया ने कहा, "और उनकी ओर न देखो। और उनके लिए एक दर्दनाक सजा है: व्यभिचारी माता-पिता, झूठे नेता, और अभिमानी गरीब लोग।"

तीन लोग जिन्हें अल्लाह से अदज़ब मिला

इमाम मुस्लिम : 157

و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَهَذَا حَدِيثُ أَبِي بَكْرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ رَجُلٌ عَلَى فَضْلِ مَاءٍ بِالْفَلَاةِ يَمْنَعُهُ مِنْ ابْنِ السَّبِيلِ وَرَجُلٌ بَايَعَ رَجُلًا بِسِلْعَةٍ بَعْدَ الْعَصْرِ فَحَلَفَ لَهُ بِاللَّهِ لَأَخَذَهَا بِكَذَا وَكَذَا فَصَدَّقَهُ وَهُوَ عَلَى غَيْرِ ذَلِكَ وَرَجُلٌ بَايَعَ إِمَامًا لَا يُبَايِعُهُ إِلَّا لِدُنْيَا فَإِنْ أَعْطَاهُ مِنْهَا وَفَى وَإِنْ لَمْ يُعْطِهِ مِنْهَا لَمْ يَفِ و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ ح و حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو الْأَشْعَثِيُّ أَخْبَرَنَا عَبْثَرٌ كِلَاهُمَا عَنْ الْأَعْمَشِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ جَرِيرٍ وَرَجُلٌ سَاوَمَ رَجُلًا بِسِلْعَةٍ و حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أُرَاهُ مَرْفُوعًا قَالَ ثَلَاثَةٌ لَا يُكَلِّمُهُمْ اللَّهُ وَلَا يَنْظُرُ إِلَيْهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ رَجُلٌ حَلَفَ عَلَى يَمِينٍ بَعْدَ صَلَاةِ الْعَصْرِ عَلَى مَالِ مُسْلِمٍ فَاقْتَطَعَهُ وَبَاقِي حَدِيثِهِ نَحْوُ حَدِيثِ الْأَعْمَشِ

और हमसे कहा है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [अबू कुरैब] दोनों ने, हमसे कहा है [अबू मुअविया] ने [अल-अमासी] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से और यह अबू बक्र की हदीस है, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तीन समूह हैं जिन्हें अल्लाह बात करने के लिए आमंत्रित नहीं करता है, उन्हें नहीं देखता है, उन्हें शुद्ध नहीं करता है और उनके लिए एक दर्दनाक सजा है: एक आदमी जिसके पास सहारा रेगिस्तान में पानी बचा था, जबकि उसने यात्रियों को इसे लेने से मना कर दिया था, एक आदमी जिसने अस्र के बाद अन्य लोगों को सामान बेचा, और उसने अल्लाह के नाम पर कसम खाई कि उसने जो पूंजी खरीदी थी वह ऐसी थी और ऐसी थी कि खरीदार उस पर विश्वास करता था, भले ही वह नहीं करता था। दूसरी बात, जो आदमी किसी ऐसे लीडर से बैअत करता है जो दुनियावी मामलों के अलावा बैअत नहीं करता, अगर लीडर उसे कुछ देता है तो वह अपनी बैअत पूरी करता है और अगर नहीं देता तो वह उसे पूरा नहीं करता। और हमसे [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने हमसे [जरीर] की बात कही है। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमसे [सईद बिन अमरू अल-अश'अत्सी] ने हमसे [अब्तसार] दोनों को [अल-अमाश] से इसी इस्नाद के साथ सुनाया है, बस हदीस जरीर में कहा गया है, 'एक आदमी ने दूसरे आदमी से सामान का सौदा किया'। और मुझे [अमरू अन-नकीद] ने [सुफ़यान] से [अमरू] से [अबू सालेह] से [अबू हुरैरा] से रिवायत किया है, उसने कहा, मुझे लगता है कि वह मरफू है, उसने कहा, "तीन लोग ऐसे हैं जिनसे अल्लाह बात नहीं करता, न देखता है, और उनके लिए दर्दनाक सज़ा है: एक आदमी जो अस्र की नमाज़ के बाद किसी मुसलमान के माल पर कसम खाता है, फिर वह उसे ज़ब्त कर लेता है।" और बाकी हदीस अल-अमासी की हदीस जैसी है।

विभिन्न तरीकों से खुद को मारने के परिणाम

इमाम मुस्लिम : 158

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو سَعِيدٍ الْأَشَجُّ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَتَلَ نَفْسَهُ بِحَدِيدَةٍ فَحَدِيدَتُهُ فِي يَدِهِ يَتَوَجَّأُ بِهَا فِي بَطْنِهِ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا وَمَنْ شَرِبَ سَمًّا فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَهُوَ يَتَحَسَّاهُ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا وَمَنْ تَرَدَّى مِنْ جَبَلٍ فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَهُوَ يَتَرَدَّى فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ ح و حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَمْرٍو الْأَشْعَثِيُّ حَدَّثَنَا عَبْثَرٌ ح و حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ كُلُّهُمْ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ وَفِي رِوَايَةِ شُعْبَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ ذَكْوَانَ

यह हमें [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [अबू सईद अल-असयाज] दोनों ने बताया है, यह हमें [वाकी] ने [अल-अमासी] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से बताया है उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी लोहे के टुकड़े से खुद को मारता है, तो यह उसके हाथ में रखे लोहे से है कि वह अपने पेट में नरक में छुरा घोंपेगा, उसे लगातार दंडित किया जाएगा और वह हमेशा के लिए नरक में रहेगा। जो कोई भी जहर पीकर खुद को मारता है, वह लगातार नरक में उस जहर का स्वाद चखेगा और वह उस नरक में हमेशा के लिए अमर हो जाएगा। इसी तरह, जो कोई पहाड़ की चोटी से कूदकर खुद को मार डालता है, तो वह खुद को मारने के लिए लगातार जहन्नम के जहन्नम में कूदता रहेगा और वह उस जहन्नम में हमेशा के लिए अमर हो जाएगा।" और हमें बताया है [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने हमें बताया है [जरीर]। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमें बताया है [सईद बिन अमरू अल-अश'त्सी] ने हमें बताया है [अब्तसार]। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमें बताया है [याह्या बिन हबीब अल-हरीत्सी] ने हमें बताया है [खालिद] - यानी इब्न अल-हरीत्स - ने हमें [स्यूबा] इस सनद के साथ सब कुछ बताया है, उदाहरण के लिए। और इतिहास में [स्यूबा] ने [सुलेमान] से कहा, मैंने [दज़कवान] सुना।

इस दुनिया और परलोक में किसी औज़ार से आत्महत्या करने के परिणाम

इमाम मुस्लिम : 159

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ سَلَّامِ بْنِ أَبِي سَلَّامٍ الدِّمَشْقِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ أَنَّ أَبَا قِلَابَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ ثَابِتَ بْنَ الضَّحَّاكِ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ بَايَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ وَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ حَلَفَ عَلَى يَمِينٍ بِمِلَّةٍ غَيْرِ الْإِسْلَامِ كَاذِبًا فَهُوَ كَمَا قَالَ وَمَنْ قَتَلَ نَفْسَهُ بِشَيْءٍ عُذِّبَ بِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَيْسَ عَلَى رَجُلٍ نَذْرٌ فِي شَيْءٍ لَا يَمْلِكُهُ

हमें बताया गया है कि [याह्या बिन याह्या] ने हमें [मुअविया बिन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम] [याह्या बिन अबू कत्सिर] से बताया है कि [अबू क़िलाबा] ने उनसे कहा है, कि [साबित बिन अदल-दलहक] ने उनसे कहा है, कि अल्लाह के रसूल ने एक पेड़ के नीचे उनसे बैअत की, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी इस्लाम धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म की कसम खाता है जो झूठ है, स्थिति वैसी ही है जैसा उन्होंने कहा। जो कोई भी किसी चीज़ (एक उपकरण) से खुद को मारता है, उसे पुनरुत्थान के दिन उसी उपकरण से यातना दी जाएगी। एक आदमी उस चीज़ के साथ प्रतिज्ञा करने के लायक नहीं है जो उसके पास नहीं है।"

किसी आस्तिक को श्राप देना उसे मार डालने के समान है

इमाम मुस्लिम : 160

حَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ حَدَّثَنَا مُعَاذٌ وَهُوَ ابْنُ هِشَامٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو قِلَابَةَ عَنْ ثَابِتِ بْنِ الضَّحَّاكِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَيْسَ عَلَى رَجُلٍ نَذْرٌ فِيمَا لَا يَمْلِكُ وَلَعْنُ الْمُؤْمِنِ كَقَتْلِهِ وَمَنْ قَتَلَ نَفْسَهُ بِشَيْءٍ فِي الدُّنْيَا عُذِّبَ بِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَمَنْ ادَّعَى دَعْوَى كَاذِبَةً لِيَتَكَثَّرَ بِهَا لَمْ يَزِدْهُ اللَّهُ إِلَّا قِلَّةً وَمَنْ حَلَفَ عَلَى يَمِينِ صَبْرٍ فَاجِرَةٍ

यह हमें [अबू ग़ासन अल-मिस्माई] को बताया गया है, हमें [मुअज़] - अर्थात् इब्न हिशाम - ने कहा, उन्होंने हमें [मेरे पिता] [याह्या बिन अबू कत्सिर] से बताया है, उन्होंने कहा, उन्होंने हमें [अबू क़िलाब] [थबीत बिन अदल-दलहक] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उन्होंने कहा: "एक आदमी उस चीज़ की मन्नत मांगने के लायक नहीं है जो उसके पास नहीं है, और एक मोमिन को शाप देना उसे मारने के समान है। जो कोई भी दुनिया में किसी (औजार) से हत्या करता है, उसे पुनरुत्थान के दिन निश्चित रूप से उसी उपकरण से यातना दी जाएगी। जो कोई भी झूठे दावों के साथ इससे (माल की कीमत) बढ़ाने का दावा करता है, निश्चित रूप से अल्लाह इसे बढ़ाएगा नहीं बल्कि केवल कीमत कम करेगा।