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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)
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इमाम मुस्लिम (الامام مسلم) - 5362 हदीस

विश्वास की मधुरता का अनुभव करने के संकेत

इमाम मुस्लिम : 61

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ وَجَدَ طَعْمَ الْإِيمَانِ مَنْ كَانَ يُحِبُّ الْمَرْءَ لَا يُحِبُّهُ إِلَّا لِلَّهِ وَمَنْ كَانَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِمَّا سِوَاهُمَا وَمَنْ كَانَ أَنْ يُلْقَى فِي النَّارِ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ أَنْ يَرْجِعَ فِي الْكُفْرِ بَعْدَ أَنْ أَنْقَذَهُ اللَّهُ مِنْهُ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ أَنْبَأَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ أَنْبَأَنَا حَمَّادٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ مِنْ أَنْ يَرْجِعَ يَهُودِيًّا أَوْ نَصْرَانِيًّا

हमें [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] और [इब्न बशियार] दोनों ने बताया है, हमें [मुहम्मद बिन जाफर] ने बताया है [स्यूबा] ने कहा, मैंने [क़तादा] को [अनस] से एक हदीस सुनाते हुए सुना, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "तीन चीजें यदि वे किसी व्यक्ति में हैं तो वह विश्वास की मिठास का स्वाद चखेगा; जो किसी से प्रेम करता है, वह अल्लाह के सिवा किसी और से प्रेम नहीं करता, वह जिससे अल्लाह और उसके रसूल दोनों के सिवा किसी और से अधिक प्रेम करते हैं, और वह व्यक्ति जो कुफ़्र में लौटने के बजाय आग में फेंका जाना अधिक पसन्द करेगा, जबकि अल्लाह ने उसे कुफ़्र से बचा लिया है।" हमसे कहा है [इस्हाक बिन मंशूर] ने हमसे कहा है [अन-नदलार बिन स्यूमैल] ने हमसे कहा है [हम्माद] ने [साबित] से [अनस] से कहा है, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनकी हदीस के अनुसार कहा, केवल उन्होंने कहा, 'उसके यहूदी या ईसाई के रूप में लौटने के बजाय'।"

दूसरों से ज़्यादा पैग़म्बर से प्यार करने का दायित्व

इमाम मुस्लिम : 62

و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ ح و حَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ كِلَاهُمَا عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ أَنَسٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ عَبْدٌ وَفِي حَدِيثِ عَبْدِ الْوَارِثِ الرَّجُلُ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ أَهْلِهِ وَمَالِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ

और मुझसे कहा है [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने हमसे कहा है [इस्माइल बिन उलय्या] ने। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमसे कहा है [सय्यबान बिन अबू सय्यबा] ने हमसे कहा है [अब्दुल वारित्स] ने [अब्दुल अज़ीज़] से [अनस] ने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई बंदा ईमान नहीं लाता (और अब्दुल वारित्स की हदीस में 'एक आदमी') जब तक वह मुझसे अपने परिवार, दौलत और सभी इंसानों से ज़्यादा प्यार न करे।"

नबी से प्रेम करने से विश्वास की सिद्धता

इमाम मुस्लिम : 63

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَلَدِهِ وَوَالِدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ

हमसे कहा है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] और [इब्न बसिस्यार] दोनों ने कहा, हमसे कहा है [मुहम्मद बिन जाफर] ने हमसे कहा है [स्यूबा] ने कहा, मैंने [क़तादा] को [अनस बिन मलिक] से एक हदीस सुनाते हुए सुना, उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तुममें से कोई भी तब तक विश्वास नहीं करेगा जब तक कि मुझे उसके बच्चों, उसके माता-पिता और मनुष्यों से अधिक प्यार न किया जाए।"

अपने भाई से वैसा ही प्रेम करो जैसा तुम अपने आप से करते हो

इमाम मुस्लिम : 64

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ سَمِعْتُ قَتَادَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ أَوْ قَالَ لِجَارِهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ

हमसे कहा है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] और [इब्न बसिस्यार] दोनों ने कहा, हमसे कहा है [मुहम्मद बिन जाफर] ने हमसे कहा है [स्यूबा] ने कहा, मैंने [क़तदा] को [अनस बिन मलिक] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वर्णित सुना, उन्होंने कहा: "तुम में से कोई भी तब तक विश्वास नहीं करता जब तक वह अपने भाई से प्रेम न करे, या वह यह न कहे, 'अपने पड़ोसी से वैसा ही प्रेम करता है जैसा वह अपने आप से करता है।

पड़ोसियों के प्रति प्रेम विश्वास की आवश्यकता है

इमाम मुस्लिम : 65

و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا يُؤْمِنُ عَبْدٌ حَتَّى يُحِبَّ لِجَارِهِ أَوْ قَالَ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ

हमें [ज़ुहैर बिन हर्ब] ने हमें [याह्या बिन सईद] ने [हुसैन अल-मुअलिम] से [क़तादा] से [अनस] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया है, उन्होंने कहा: "उसके हाथ में मेरी आत्मा है, कोई भी नौकर तब तक विश्वास नहीं करता जब तक कि वह अपने पड़ोसी से प्रेम न करे, या वह कहे, 'अपने भाई के लिए जैसा वह अपने लिए प्रेम करता है।"

पड़ोसियों को परेशान करने वालों के लिए खतरा

इमाम मुस्लिम : 66

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْعَلَاءُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَدْخُلُ الْجَنَّةَ مَنْ لَا يَأْمَنُ جَارُهُ بَوَائِقَهُ

हमें [याह्या बिन अय्यूब] और [कुतैबा बिन सईद] और [अली बिन हुज्र] उन सभी ने [इस्माईल बिन जाफर] से बताया है, [इब्न अय्यूब] ने कहा, हमें [इस्माइल] ने कहा, हमें [अल-अला] ने [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वह स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेगा, जिसके पड़ोसी नुकसान से सुरक्षित नहीं हैं।"

आस्था के प्रतीक के रूप में मेहमानों और पड़ोसियों का सम्मान करना

इमाम मुस्लिम : 67

حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَنْبَأَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيَقُلْ خَيْرًا أَوْ لِيَصْمُتْ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ جَارَهُ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ ضَيْفَهُ

हमें बताया है [हरमला बिन याह्या] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] उन्होंने कहा, मुझे [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] से [अबू हुरैरा] से बताया है अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, उन्होंने कहा: "जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, तो उसे अच्छी बातें कहनी चाहिए या चुप रहना चाहिए। और जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने पड़ोसी का सम्मान करना चाहिए। और जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने मेहमान का सम्मान करना चाहिए।"

इस्लाम में पड़ोसी और मेहमाननवाज़ी का शिष्टाचार

इमाम मुस्लिम : 68

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي حُصَيْنٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلَا يُؤْذِي جَارَهُ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ ضَيْفَهُ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيَقُلْ خَيْرًا أَوْ لِيَسْكُتْ و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ حَدِيثِ أَبِي حَصِينٍ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ فَلْيُحْسِنْ إِلَى جَارِهِ

हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [अबू अल-अहवाश] ने [अबू हुशैन] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, "जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने पड़ोसी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। और जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने मेहमानों का सम्मान करना चाहिए। और जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, तो उसे अच्छी बातें बोलनी चाहिए या चुप रहना चाहिए।" और हमें बताया गया है [इस्हाक बिन इब्राहीम] ने हमें [ईसा बिन यूनुस] ने [अल-अमासी] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से बताया है उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अबू हुसैन की हदीस के अनुसार कहा, केवल उन्होंने कहा, 'और उसे अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा करना चाहिए'।"

पड़ोसियों के प्रति दयालु और मेहमानों के प्रति गौरवशाली बनें

इमाम मुस्लिम : 69

حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ جَمِيعًا عَنْ ابْنِ عُيَيْنَةَ قَالَ ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ عَمْرٍو أَنَّهُ سَمِعَ نَافِعَ بْنَ جُبَيْرٍ يُخْبِرُ عَنْ أَبِي شُرَيْحٍ الْخُزَاعِيِّ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُحْسِنْ إِلَى جَارِهِ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيُكْرِمْ ضَيْفَهُ وَمَنْ كَانَ يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَلْيَقُلْ خَيْرًا أَوْ لِيَسْكُتْ

हमको [ज़ुहैर बिन हर्ब] और [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] बताया है, उन सबने [इब्न उयैनाह] से कहा कि [नुमैर] ने हमको [सुफ़यान] ने [अमरू] से बताया कि उसने [नफ़ी बिन जुबैर] को [अबू स्यूरैह अल-ख़ुज़ाई] से रिपोर्ट करते सुना कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा करना चाहिए। जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अपने मेहमान का सम्मान करना चाहिए। और जो कोई अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास करता है, उसे अच्छी बातें बोलनी चाहिए या चुप रहना चाहिए।"

अपनी पूरी क्षमता से संभावनाओं को रोकने का दायित्व

इमाम मुस्लिम : 70

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ كِلَاهُمَا عَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ وَهَذَا حَدِيثُ أَبِي بَكْرٍ قَالَ أَوَّلُ مَنْ بَدَأَ بِالْخُطْبَةِ يَوْمَ الْعِيدِ قَبْلَ الصَّلَاةِ مَرْوَانُ فَقَامَ إِلَيْهِ رَجُلٌ فَقَالَ الصَّلَاةُ قَبْلَ الْخُطْبَةِ فَقَالَ قَدْ تُرِكَ مَا هُنَالِكَ فَقَالَ أَبُو سَعِيدٍ أَمَّا هَذَا فَقَدْ قَضَى مَا عَلَيْهِ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ رَأَى مِنْكُمْ مُنْكَرًا فَلْيُغَيِّرْهُ بِيَدِهِ فَإِنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَبِلِسَانِهِ فَإِنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَبِقَلْبِهِ وَذَلِكَ أَضْعَفُ الْإِيمَانِ حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ رَجَاءٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ وَعَنْ قَيْسِ بْنِ مُسْلِمٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ فِي قِصَّةِ مَرْوَانَ وَحَدِيثِ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ حَدِيثِ شُعْبَةَ وَسُفْيَانَ

हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू साइबा] ने हमें [सुफ़यान] से [वाकी] बताया है। (एक और रिवायत में है) और हमसे कहा है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] ने हमसे कहा है [मुहम्मद बिन जाफ़र] ने हमसे [स्यूबा] ने हमसे कहा है [क़ैस बिन मुस्लिम] से [तहरीक बिन शिहाब] और यह अबू बक्र की हदीस है, "हरि राया की नमाज़ शुरू होने से पहले हरि राया पर उपदेश देने वाला पहला व्यक्ति मरवान था। फिर एक आदमी खड़ा हुआ और उससे कहा, "हरि राया की नमाज़ खुत्बा पढ़ने से पहले अदा करनी चाहिए।" मरवान ने जवाब दिया, "वास्तव में, उपदेश में जो कुछ है उसका बहुत कुछ छोड़ दिया गया है।" फिर [अबू सईद] ने कहा, "वास्तव में, इस व्यक्ति ने (करने का) फैसला किया है जैसा मैंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को कहते सुना था: "तुम में से जो कोई बुराई देखे, वह उसे अपने हाथ से रोके। अगर वह असमर्थ है, तो वह उसे बोलकर रोके; अगर वह असमर्थ है, तो वह उसे अपने दिल से रोके। यह विश्वास की तरह कमज़ोर है।" हमें बताया है [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल-अला] ने हमें बताया है [अबू मुआविया] ने हमें बताया है [अल-अमासी] [इस्माइल बिन राजा] से [उसके पिता] से [अबू सईद अल-खुदरी] से [क़ैस बिन मुस्लिम] से [तहरीक बिन शिहाब] से [अबू सईद अल-खुदरी] से मरवान की कहानी में, और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से अबू सईद की हदीस, जैसे कि स्यूबा और सुफ़यान हदीस।

हर नबी का एक रक्षक होता है, लेकिन कुछ लोग उसका अनुसरण करते हैं और कुछ उससे भटक जाते हैं

इमाम मुस्लिम : 71

حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ وَأَبُو بَكْرِ بْنُ النَّضْرِ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ وَاللَّفْظُ لِعَبْدٍ قَالُوا حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ الْحَارِثِ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمِسْوَرِ عَنْ أَبِي رَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا مِنْ نَبِيٍّ بَعَثَهُ اللَّهُ فِي أُمَّةٍ قَبْلِي إِلَّا كَانَ لَهُ مِنْ أُمَّتِهِ حَوَارِيُّونَ وَأَصْحَابٌ يَأْخُذُونَ بِسُنَّتِهِ وَيَقْتَدُونَ بِأَمْرِهِ ثُمَّ إِنَّهَا تَخْلُفُ مِنْ بَعْدِهِمْ خُلُوفٌ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ وَيَفْعَلُونَ مَا لَا يُؤْمَرُونَ فَمَنْ جَاهَدَهُمْ بِيَدِهِ فَهُوَ مُؤْمِنٌ وَمَنْ جَاهَدَهُمْ بِلِسَانِهِ فَهُوَ مُؤْمِنٌ وَمَنْ جَاهَدَهُمْ بِقَلْبِهِ فَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَيْسَ وَرَاءَ ذَلِكَ مِنْ الْإِيمَانِ حَبَّةُ خَرْدَلٍ قَالَ أَبُو رَافِعٍ فَحَدَّثْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَأَنْكَرَهُ عَلَيَّ فَقَدِمَ ابْنُ مَسْعُودٍ فَنَزَلَ بِقَنَاةَ فَاسْتَتْبَعَنِي إِلَيْهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ يَعُودُهُ فَانْطَلَقْتُ مَعَهُ فَلَمَّا جَلَسْنَا سَأَلْتُ ابْنَ مَسْعُودٍ عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَحَدَّثَنِيهِ كَمَا حَدَّثْتُهُ ابْنَ عُمَرَ قَالَ صَالِحٌ وَقَدْ تُحُدِّثَ بِنَحْوِ ذَلِكَ عَنْ أَبِي رَافِعٍ و حَدَّثَنِيهِ أَبُو بَكْرِ بْنُ إِسْحَقَ بْنِ مُحَمَّدٍ أَخْبَرَنَا ابْنُ أَبِي مَرْيَمَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَارِثُ بْنُ الْفُضَيْلِ الْخَطْمِيُّ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ عَنْ أَبِي رَافِعٍ مَوْلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَا كَانَ مِنْ نَبِيٍّ إِلَّا وَقَدْ كَانَ لَهُ حَوَارِيُّونَ يَهْتَدُونَ بِهَدْيِهِ وَيَسْتَنُّونَ بِسُنَّتِهِ مِثْلَ حَدِيثِ صَالِحٍ وَلَمْ يَذْكُرْ قُدُومَ ابْنِ مَسْعُودٍ وَاجْتِمَاعِ ابْنِ عُمَرَ مَعَهُ

इसे हमें [अमरु अन-नकीद] और [अबू बक्र बिन अन-नदल्र] और [अब्द बिन हुमैद] ने बताया है और लफ़ज़ अब्द का है। उन्होंने कहा, हमें [जकूब बिन इब्राहीम बिन साद] ने बताया था, उन्होंने कहा, हमें [मेरे पिता] [सालिह बिन कैसन] से [अल-हारीत्स] से [जाफर बिन अब्दुल्ला बिन अल-हकम] से [अब्दुर्रहमान बिन अल-मिस्वर] से [अबू रफी] से [अब्दुल्ला बिन मसऊद] ने बताया था कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई भी पैगंबर नहीं है जिसे अल्लाह ने पहले किसी लोगों के पास भेजा हो, लेकिन उसके पास रक्षक और साथी थे जो सुन्नत का पालन करते थे और उसकी आज्ञाओं का पालन करते थे, फिर उनके बाद एक ऐसे लोग आए जिन्होंने कुछ ऐसा कहा जो उन्होंने नहीं किया, और कुछ ऐसा किया जो उनके खिलाफ आदेश नहीं दिया गया था। जो कोई भी अपने हाथों से जिहाद लड़ता था वह एक मोमिन था, जो कोई भी उनके खिलाफ मौखिक जिहाद लड़ता था वह एक मोमिन था, जो कोई भी उनके खिलाफ अपने दिल से लड़ता था वह एक मोमिन था, और उसके बाद राई के दाने के बराबर भी कोई विश्वास नहीं है।" अबू रफी ने कहा, "फिर मैंने अब्दुल्लाह बिन उमर को बताया, लेकिन उसने मुझे मना कर दिया। जब इब्न मसूद आया और काना में रुका, तो अब्दुल्लाह बिन उमर मेरे पीछे आया और मुझे इब्न मसूद के पीछे चलने के लिए बुलाया, तो जब हम बैठे, तो मैंने इब्न मसूद से इस हदीस के बारे में पूछा, तो उसने मुझे वही बताया जो मैंने इब्न उमर को बताया था।" सालेह ने कहा, "सच में अबू रफी से ऐसी ही रिवायत की गई है।" और हमें [अबू बक्र बिन इसहाक बिन मुहम्मद] ने हमें [इब्न अबू मरियम] ने हमें [अब्दुल अज़ीज़ बिन मुहम्मद] बताया है उन्होंने कहा, मुझे [अल-हारिथ बिन अल-फुदलैल अल-हथमी] ने [जाफर बिन अब्दुल्लाह बिन अल-हकम] से [अब्दुर्रहमान बिन मिस्वर बिन मखराम] से [अबू रफी'] से पैगंबर के पूर्व दास, [अब्दुल्ला बिन मसऊद] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई पैगंबर नहीं है, उसके पास एक समर्थक होता है जो अपने मार्गदर्शन से मार्गदर्शन चाहता है, और अपनी सुन्नत के साथ सुन्नत लेता है," जैसा कि सलेह की हदीस है, लेकिन इसमें इब्न मसऊद के आगमन और उनके साथ इब्न उमर की सभा का उल्लेख नहीं है।

आस्था यमन में है और हिंसा ऊंट चराने वालों के साथ है

इमाम मुस्लिम : 72

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ ح و حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي ح و حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا ابْنُ إِدْرِيسَ كُلُّهُمْ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ ح و حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ عَنْ إِسْمَعِيلَ قَالَ سَمِعْتُ قَيْسًا يَرْوِي عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ قَالَ أَشَارَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِيَدِهِ نَحْوَ الْيَمَنِ فَقَالَ أَلَا إِنَّ الْإِيمَانَ هَهُنَا وَإِنَّ الْقَسْوَةَ وَغِلَظَ الْقُلُوبِ فِي الْفَدَّادِينَ عِنْدَ أُصُولِ أَذْنَابِ الْإِبِلِ حَيْثُ يَطْلُعُ قَرْنَا الشَّيْطَانِ فِي رَبِيعَةَ وَمُضَرَ

हमें बताया है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] ने हमें बताया है [अबू उसामा]। (एक और रिवायत में यह कहा गया है) और उसने हमें बताया है [इब्न नुमैर] ने हमें बताया है [मेरे पिता]। (एक और रिवायत में यह कहा गया है) और उसने हमें बताया है [अबू कुरैब] ने हमें [इब्न इदरीस] [इस्माइल बिन अबू खालिद] से सब कुछ बताया है। (एक अन्य रिवायत में उल्लेख किया गया है) और हमसे [याह्या बिन हबीब अल-हरित्सी] ने बताया है और लफ़ज़ उसी का है, हमसे [मुअतमिर] ने [इस्माइल] से बताया है कि उसने कहा, मैंने [क़ैस] को [अबू मसऊद] से वर्णित सुना, उसने कहा, "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने हाथ से यमन की ओर इशारा करते हुए कहा: "याद रखो, वास्तव में विश्वास यहाँ (यमन) है, जबकि हिंसा और कठोरता" दिल उस चरवाहे के साथ है जिसने ऊंट की पूंछ के आधार के पास जोर से शोर मचाया जब बनी रबीअत और बनी मुदलर पर शैतान के सींगों की एक जोड़ी दिखाई दी।

कोमल हृदय वाली यमनी जनता की निजता

इमाम मुस्लिम : 73

حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ أَنْبَأَنَا حَمَّادٌ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَاءَ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَرَقُّ أَفْئِدَةً الْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْفِقْهُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ ح و حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ يُوسُفَ الْأَزْرَقُ كِلَاهُمَا عَنْ ابْنِ عَوْنٍ عَنْ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِهِ

हमें बताया है [अबू अर-रबी' अज़-ज़हरानी] ने हमें बताया है [हम्माद] ने हमें बताया है [अय्यूब] ने हमें बताया है [मुहम्मद] [अबू हुरैरा] से उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "यमन के लोग आए हैं, वे सबसे नरम दिल वाले लोग हैं। ईमान यमनी लोगों में है। यमनी लोगों में फ़िक़्ह भी मौजूद है। यमनी लोगों में भी अक्ल है।" हमें [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] ने बताया है, हमें [इब्न अबू अदी] ने बताया है। (एक और रिवायत में इसका ज़िक्र है) और हमें [अमरू अन-नकीद] ने बताया है, हमें [इस्हाक बिन यूसुफ अल-अज़राक] ने बताया है, दोनों [इब्न औन] से [मुहम्मद] से [अबू हुरैरा] ने कहा, "रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस हदीस को इस तरह कहा है।"

यमन की जनता के लिए फ़िक़ीह और बुद्धिमत्ता की प्रधानता

इमाम मुस्लिम : 74

و حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ وَحَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ قَالَا حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ صَالِحٍ عَنْ الْأَعْرَجِ قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَاكُمْ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَضْعَفُ قُلُوبًا وَأَرَقُّ أَفْئِدَةً الْفِقْهُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ

और हमसे कहा है [अमरू अन-नकीद] और [हसन अल-हुलवानी] दोनों ने कहा, हमसे कहा है [याकूब] - यानी इब्न इब्राहिम बिन साद - हमसे कहा है [मेरे पिता] से [सालिह] से [अल-अराज] ने कहा, [अबू हुरैरा] ने कहा; "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यमन के लोग आए हैं, वे ऐसे लोग हैं जो दिल से सबसे नरम हैं। यमनी लोगों में फ़िक़्ह है। यमनी लोगों में समझदारी भी है।"

पूर्व और पश्चिम के बीच चरित्र अंतर

इमाम मुस्लिम : 75

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَأْسُ الْكُفْرِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ وَالْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي أَهْلِ الْخَيْلِ وَالْإِبِلِ الْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْوَبَرِ وَالسَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْغَنَمِ

हमसे [याह्या बिन याह्या] रिवायत है कि उसने कहा, मैंने इसे [मलिक] के सामने पढ़ा; [अबू अज़-ज़िनाद] से [अल-अराज] से [अबू हुरैरा] से कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, "कुफ़्र की हद पूरब (मगियों का इलाका) में है, और घमंड और अकड़ घोड़ों और ऊँटों के मालिकों में है जो उन्हें चराते हैं, यानी बद्दू, जबकि शांति बकरियों के चरवाहों में है (मतलब यमन के लोग)।"

विभिन्न समूहों में आस्था और अहंकार

इमाम मुस्लिम : 76

و حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ وَقُتَيْبَةُ وَابْنُ حُجْرٍ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ قَالَ ابْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْعَلَاءُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْكُفْرُ قِبَلَ الْمَشْرِقِ وَالسَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْغَنَمِ وَالْفَخْرُ وَالرِّيَاءُ فِي الْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْخَيْلِ وَالْوَبَرِ

हमें [याह्या बिन अय्यूब] और [कुतैबा] और [इब्न हुज्र] ने [इस्माइल बिन जाफर] से बताया है कि [इब्नु अय्यूब] ने हमें [इस्माइल] बताया है उन्होंने कहा, मुझे [अल-अला] ने [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "ईमान यमन में है, अविश्वास पूर्व में है (जिसका अर्थ है मैगी), शांति बकरी चराने वालों (जिसका अर्थ है यमनी लोग), और अहंकार और रिया उन लोगों में है जो घोड़े और ऊँट चलाते हैं (बदुइन)।

बाडुई लोगों में गर्व और चरवाहों में शांति

इमाम मुस्लिम : 77

و حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي الْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْوَبَرِ وَالسَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْغَنَمِ و حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الدَّارِمِيُّ أَخْبَرَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ وَزَادَ الْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ

हमें बताया है [हरमला बिन यह्या] ने हमें बताया है [इब्न वहाब] ने कहा, मुझे [यूनुस] ने [इब्न शिहाब] से बताया है, उसने कहा, मुझे [अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान] ने बताया है कि [अबू हुरैरा] ने कहा, "मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते सुना: "घमंड और अहंकार चरवाहों, यानी बद्दूओं में है, जबकि शांति बकरी चराने वालों (अर्थात यमन के लोगों) में है।" और हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन अब्दुर्रहमान अद-दारीमी] ने हमें बताया है [अबू अल-यमन] ने हमें [स्यू'एब] ने [अज़-ज़ुहरी] से इस सनद के साथ उदाहरण के लिए बताया है, और उन्होंने कहा, "ईमान यमनी लोगों के साथ है, और ज्ञान यमनी लोगों के साथ है।"

यमनी लोगों की कोमलता और बेडौइनों का अहंकार

इमाम मुस्लिम : 78

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَخْبَرَنَا أَبُو الْيَمَانِ عَنْ شُعَيْبٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ جَاءَ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَرَقُّ أَفْئِدَةً وَأَضْعَفُ قُلُوبًا الْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ السَّكِينَةُ فِي أَهْلِ الْيَمَنِ وَالْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي الْفَدَّادِينَ أَهْلِ الْوَبَرِ قِبَلَ مَطْلِعِ الشَّمْسِ

हमें बताया गया है कि [अब्दुल्ला बिन अब्दुर्रहमान] ने हमें [अबू अल-यमन] से [स्यू'ऐब] से [अज़-ज़ुहरी] ने हमें बताया है [सईद बिन अल-मुसैय्यब] ने हमें बताया है कि [अबू हुरैरा] ने कहा, "मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह कहते हुए सुना: "यमन के लोग आए हैं, वे लोगों में सबसे विनम्र और दिलों में सबसे कमजोर हैं। विश्वास यमनी लोगों में है, ज्ञान यमनी लोगों में है और शांति यमनी लोगों में है। इस बीच, गर्व और अहंकार चरवाहों, बद्दूओं में है, अर्थात् जिस दिशा में सूरज उगता है।"

यमन की जनता में आस्था और बुद्धि

इमाम मुस्लिम : 79

حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَاكُمْ أَهْلُ الْيَمَنِ هُمْ أَلْيَنُ قُلُوبًا وَأَرَقُّ أَفْئِدَةً الْإِيمَانُ يَمَانٍ وَالْحِكْمَةُ يَمَانِيَةٌ رَأْسُ الْكُفْرِ قِبَلَ الْمَشْرِقِ و حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ رَأْسُ الْكُفْرِ قِبَلَ الْمَشْرِقِ و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ ح و حَدَّثَنِي بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ جَعْفَرٍ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ الْأَعْمَشِ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَ حَدِيثِ جَرِيرٍ وَزَادَ وَالْفَخْرُ وَالْخُيَلَاءُ فِي أَصْحَابِ الْإِبِلِ وَالسَّكِينَةُ وَالْوَقَارُ فِي أَصْحَابِ الشَّاءِ

हमसे कहा है [अबू बक्र बिन अबू सय्यबा] और [अबू कुरैब] दोनों ने कहा, हमसे कहा है [अबू मुअविया] ने [अल-अमासी] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यमन के लोग आपके पास आए हैं, वे लोगों में सबसे विनम्र हैं, और दिल से सबसे विनम्र हैं। विश्वास यमनी लोगों के साथ है और ज्ञान यमनी लोगों के साथ है, जबकि अविश्वास का बिंदु पूर्व (मगी) में है।" और उन्होंने हमसे कहा है [कुतैबा बिन सईद] और [ज़ुहैर बिन हर्ब] दोनों ने कहा, हमसे कहा है [जरीर] ने [अल-अमासी] से इस सनद के साथ, और उसने उल्लेख नहीं किया, 'अविश्वास का बिंदु पूर्व में है।' और हमें बताया है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] ने हमें बताया है [इब्न अबू अदी] ने। (एक और रिवायत में कहा गया है) और हमें बताया है [बिसिर बिन खालिद] ने हमें बताया है [मुहम्मद] -यानी इब्न जाफर- दोनों ने कहा, हमें [स्यूबा] ने [अल-अमासी] से इस सनद के साथ बताया है जैसे जरीर की हदीस, और उन्होंने आगे कहा, 'घमंड और घमंड ऊंट चराने वालों में होता है, जबकि शांति बकरी चराने वालों में होती है।'"

पूर्वी लोगों के कठोर हृदय और हिजाज़ में आस्था

इमाम मुस्लिम : 80

و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْحَارِثِ الْمَخْزُومِيُّ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ يَقُولُا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غِلَظُ الْقُلُوبِ وَالْجَفَاءُ فِي الْمَشْرِقِ وَالْإِيمَانُ فِي أَهْلِ الْحِجَازِ

और हमसे कहा है [इस्हाक बिन इब्राहीम] ने हमसे कहा है [अब्दुल्ला बिन अल-हारीत्स अल-मखज़ुमी] ने [इब्न जुरैज] से कहा है, हमसे कहा है [अबू अज़-ज़ुबैर] कि उन्होंने [जाबिर बिन अब्दुल्लाह] को कहते सुना, "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "कठोर और सूखे दिल पूर्व के लोगों के साथ हैं, जबकि ईमान हिजाज़ के लोगों के साथ है।"