Imam Muslim : 21
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا عَاصِمٌ وَهُوَ ابْنُ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَحَجِّ الْبَيْتِ وَصَوْمِ رَمَضَانَ
हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह बिन मुअज] हमनी के बतवले बाड़े [हमार पिता] हमनी के [अशिम] - यानी इब्नु मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्लाह बिन उमर - [उनकर पिता] से बतवले बाड़े उ कहले; [अब्दुल्लाह] कहले कि, 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'इस्लाम पांच नींव प बनल बा: अर्थात इ गवाही कि कवनो देवता नईखन -जेकरा के इबादत करे के अधिकार बा- लेकिन अल्लाह, कि मुहम्मद उनुकर सेवक अवुरी रसूलुल्लाह हवे, नमाज स्थापित करेले, जकात देवेले, बैतुल्लाह के तीर्थ करेले, अवुरी रमजान के दौरान रोजा रखले बाड़े'।
Imam Muslim : 22
و حَدَّثَنِي ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا حَنْظَلَةُ قَالَ سَمِعْتُ عِكْرِمَةَ بْنَ خَالِدٍ يُحَدِّثُ طَاوُسًا أَنَّ رَجُلًا قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَلَا تَغْزُو فَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ الْإِسْلَامَ بُنِيَ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَصِيَامِ رَمَضَانَ وَحَجِّ الْبَيْتِ
आ हमरा के बता के [इब्न नुमैर] हमनी के बतवले रहले [हमार पिता] हमनी के [हंझाला] बतवले रहले उ कहले कि, 'हम सुनले बानी कि [इकरीमा बिन खालिद] थावस के हदीस बतावत रहले कि एगो आदमी [अब्दुल्लाह बिन उमर] से कहले रहे कि, 'तू काहें नईखी लड़त? ' उ जवाब देले, 'वास्तव में हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि 'वास्तव में इस्लाम के आधार पांच सिद्धांत प बनल रहे: गवाही कि अल्लाह के अलावे इबादत के लायक कवनो देवता नईखन, नमाज स्थापित करे, जकात देवे, रमजान के दौरान रोजा करे, अवुरी अल्लाह के घर के तीर्थ यात्रा करे।''।
Imam Muslim : 23
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ ح و حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَاللَّفْظُ لَهُ أَخْبَرَنَا عَبَّادُ بْنُ عَبَّادٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَدِمَ وَفْدُ عَبْدِ الْقَيْسِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا هَذَا الْحَيَّ مِنْ رَبِيعَةَ وَقَدْ حَالَتْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ كُفَّارُ مُضَرَ فَلَا نَخْلُصُ إِلَيْكَ إِلَّا فِي شَهْرِ الْحَرَامِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ نَعْمَلُ بِهِ وَنَدْعُو إِلَيْهِ مَنْ وَرَاءَنَا قَالَ آمُرُكُمْ بِأَرْبَعٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ الْإِيمَانِ بِاللَّهِ ثُمَّ فَسَّرَهَا لَهُمْ فَقَالَ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَأَنْ تُؤَدُّوا خُمُسَ مَا غَنِمْتُمْ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالنَّقِيرِ وَالْمُقَيَّرِ زَادَ خَلَفٌ فِي رِوَايَتِهِ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَعَقَدَ وَاحِدَةً
हमनी के बतवले बाड़े [खलाफ बिन हिशाम] हमनी के [हमद बिन जैद] [अबू जमराह] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े, हम सुनले बानी [इब्न अब्बास]। -एक अउरी रिवायत में कहल गइल बा- आ हमनी के [याह्या बिन याह्या] के बतवले बा आ ई लफाज उनकर ह, हमनी के [अब्बद बिन अब्बाद] के [अबू जमराह] से [इब्न अब्बास] से रिपोर्ट कइले बा ऊ कहले बाड़न कि अब्दुल कैस के रसूलुल्लाह रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे गइलन आ ऊ लोग कहल कि हे रसुलुल्लाह, असल में ई गाँव के हिस्सा ह रबियाह कबीला, आ साँचहू मुडलर काफिर हमनी आ रउरा बीच खड़ा हो गइल बाड़े, एहसे हम हरम महीना के छोड़ के रउरा से सुरक्षित ना हो सकीं, एहसे हमनी के एगो आज्ञा के अंजाम देबे के आदेश दीं आ हमनी का पीछे के लोग के एकर उपदेश देब जा’. उ कहले कि, 'हम तोहनी के चार चीज़ से आज्ञा देतानी अवुरी चार चीज़ से मना करतानी: यानी अल्लाह प इमान', फिर उ ओ लोग खाती एकर व्याख्या कईले अवुरी कहले कि, 'गवाही दीं कि अल्लाह के अलावे कवनो देवता - इबादत के लायक - नईखन अवुरी मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह हवे, नमाज स्थापित करेले, जकात देवेले अवुरी युद्ध के लूट के पांचवा हिस्सा देवेले। आ हम रउरा से मना करत बानी कि अद-दुबा`, अल-हंतम, एगो नकीर आ अल-मुकयार में दबावल शराब ना बनाईं. खलाफ अपना इतिहास में इहो जोड़ले बाड़न कि ‘गवाही कि अल्लाह के छोड़ के कवनो देवता - इबादत के लायक - नइखन. आ एक बेर बान्ह लीं'.
Imam Muslim : 24
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَأَلْفَاظُهُمْ مُتَقَارِبَةٌ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ و قَالَ الْآخَرَانِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قَالَ كُنْتُ أُتَرْجِمُ بَيْنَ يَدَيْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَبَيْنَ النَّاسِ فَأَتَتْهُ امْرَأَةٌ تَسْأَلُهُ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ فَقَالَ إِنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ أَتَوْا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ الْوَفْدُ أَوْ مَنْ الْقَوْمُ قَالُوا رَبِيعَةُ قَالَ مَرْحَبًا بِالْقَوْمِ أَوْ بِالْوَفْدِ غَيْرَ خَزَايَا وَلَا النَّدَامَى قَالَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَأْتِيكَ مِنْ شُقَّةٍ بَعِيدَةٍ وَإِنَّ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ هَذَا الْحَيَّ مِنْ كُفَّارِ مُضَرَ وَإِنَّا لَا نَسْتَطِيعُ أَنْ نَأْتِيَكَ إِلَّا فِي شَهْرِ الْحَرَامِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ فَصْلٍ نُخْبِرْ بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا نَدْخُلُ بِهِ الْجَنَّةَ قَالَ فَأَمَرَهُمْ بِأَرْبَعٍ وَنَهَاهُمْ عَنْ أَرْبَعٍ قَالَ أَمَرَهُمْ بِالْإِيمَانِ بِاللَّهِ وَحْدَهُ وَقَالَ هَلْ تَدْرُونَ مَا الْإِيمَانُ بِاللَّهِ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَأَنْ تُؤَدُّوا خُمُسًا مِنْ الْمَغْنَمِ وَنَهَاهُمْ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ قَالَ شُعْبَةُ وَرُبَّمَا قَالَ النَّقِيرِ قَالَ شُعْبَةُ وَرُبَّمَا قَالَ الْمُقَيَّرِ وَقَالَ احْفَظُوهُ وَأَخْبِرُوا بِهِ مِنْ وَرَائِكُمْ و قَالَ أَبُو بَكْرٍ فِي رِوَايَتِهِ مَنْ وَرَاءَكُمْ وَلَيْسَ فِي رِوَايَتِهِ الْمُقَيَّرِ و حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي ح و حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي قَالَا جَمِيعًا حَدَّثَنَا قُرَّةُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا الْحَدِيثِ نَحْوَ حَدِيثِ شُعْبَةَ وَقَالَ أَنْهَاكُمْ عَمَّا يُنْبَذُ فِي الدُّبَّاءِ وَالنَّقِيرِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ وَزَادَ ابْنُ مُعَاذٍ فِي حَدِيثِهِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلْأَشَجِّ أَشَجِّ عَبْدِ الْقَيْسِ إِنَّ فِيكَ خَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمُ وَالْأَنَاةُ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] अवुरी [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] अवुरी [मुहम्मद बिन बस्स्यार] अवुरी उनुकर लफाज एक दूसरा के करीब बाड़े, [अबू बकर] कहले, हमनी के [गुंदर] के [शुबाह] से बतवले बाड़े जबकि बाकी दुनो लोग कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर] हमनी के [शुबाह] से बतवले बाड़े [अबू जमराह] उ कहले, 'हम [इब्नु अब्बास] अवुरी लोग के बीच अनुवादक रहनी, तब एगो महिला आईल अवुरी नबिज के रस के बारे में पूछलस - एक प्रकार के शराब - जवन कि मिट्टी के बर्तन में राखल जात रहे, त उ जवाब देली, 'वास्तव में अब्द अल कायस के रसूलुल्लाह अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल, फिर अल्लाह के रसूलुल्लाह कहले: 'उ दूत के ह - भा ऊ लोग के ह? - उ लोग जवाब देले कि 'रबीअह'। उ कहले कि, 'जनता - चाहे दूत के - बिना कवनो संकोच चाहे पछतावा के जरूरत के स्वागत करीं'। रवीर कहले, 'उ लोग कहल कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, साँचहू हमनी के दूर-दूर से तोहरा लगे आइल बानी जा। हमनी आ रउरा बीच मुडलर काफिर बाड़े जेहसे कि हम हरम महीना के छोड़ के रउरा लगे ना आ सकीं, एहसे हमनी के कुछ अइसन तय करे के आदेश दीं जवना के हमनी का ओह लोग के बता सकीले जवना के हमनी का नेतृत्व करत बानी जा जवना से हमनी का स्वर्ग में प्रवेश कर सकीले.' कथावाचक कहले कि, 'त अल्लाह के रसूलुल्लाह चार चीज़ के आदेश देले अवुरी चार चीज़ के मना कईले'। कथावाचक फेरु कहलन कि अल्लाह के रसूलुल्लाह ओह लोग के अकेले अल्लाह पर विश्वास करे के आदेश दिहलन आ कहलन कि का रउरा मालूम बा कि अल्लाह पर ईमान का होला? ' उ लोग जवाब देले कि, 'अल्लाह अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह एकरा से जादे जानत बाड़े'। उ कहले कि, 'गवाही दीं कि अल्लाह के अलावे अवुरी कवनो देवता नईखन, अवुरी मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह हवे, नमाज स्थापित करीं, जकात दीं, रमदलान के रोजा करीं, अवुरी घनीमा के पांचवा हिस्सा के भुगतान करीं अवुरी आपके अद-दुबा`, अल-हंतम अवुरी अल-मुजफ्त से मना करीं'। स्यूबाह कहले कि, 'शायद उ 'अन-नकीर' कहले रहले अवुरी हो सकता कि इ 'अल-मुकयार' होखे, उ कहले कि, 'उनुका प नजर राखीं अवुरी अपना लोग के सूचित करीं'। अबू बकर अपना रिवायत में 'अल-मुकयार'' के जिक्र कइले बिना 'जवना आदमी के रउरा पीछे ले जाइब' के जिक्र कइले बाड़न. आ हमरा के बतावल गइल बा [उबैदुल्लाह बिन मुअदज] हमनी के [हमार बाबूजी] के बतवले बाड़न. -एक अउर रिवायत में कहल गइल बा- आ उ हमनी के बतवले बाड़े [नशर बिन अली अल-जहदलामी] उ कहले बाड़े, हमरा के बतवले बाड़े [हमार पिता] दुनो लोग कहले बाड़े, हमनी के [कुर्रह बिन खालिद] से [अबू जमराह] से [इब्न अब्बास] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एह हदीस के संगे बतवले बाड़े जवन कि हदीस [स्यूबाह] से मिलत जुलत बा, जबकि कहले बाड़े: 'हम अद-दुबा`, अन-नकीर, अल-हंतम आ अल-मुजफ़त' में कहल गइल कवनो बात से रउरा के मना कर दीं. आ [इब्न मुअदज] [अपना पिता] से मिलल हदीस में जोड़ले बाड़न कि, ‘आ रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम अल-अस्याज अस्याज अब्द अल कायस से कहले बाड़न कि ‘वास्तव में रउरा में दू गो चरित्र बा जवना पर अल्लाह के एहसान बा, ऊ ह धीरज आ सावधानी’।
Imam Muslim : 25
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مَنْ لَقِيَ الْوَفْدَ الَّذِينَ قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ عَبْدِ الْقَيْسِ قَالَ سَعِيدٌ وَذَكَرَ قَتَادَةُ أَبَا نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ فِي حَدِيثِهِ هَذَا أَنَّ أُنَاسًا مِنْ عَبْدِ الْقَيْسِ قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ إِنَّا حَيٌّ مِنْ رَبِيعَةَ وَبَيْنَنَا وَبَيْنَكَ كُفَّارُ مُضَرَ وَلَا نَقْدِرُ عَلَيْكَ إِلَّا فِي أَشْهُرِ الْحُرُمِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ نَأْمُرُ بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا وَنَدْخُلُ بِهِ الْجَنَّةَ إِذَا نَحْنُ أَخَذْنَا بِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ آمُرُكُمْ بِأَرْبَعٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ اعْبُدُوا اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَصُومُوا رَمَضَانَ وَأَعْطُوا الْخُمُسَ مِنْ الْغَنَائِمِ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ وَالنَّقِيرِ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ مَا عِلْمُكَ بِالنَّقِيرِ قَالَ بَلَى جِذْعٌ تَنْقُرُونَهُ فَتَقْذِفُونَ فِيهِ مِنْ الْقُطَيْعَاءِ قَالَ سَعِيدٌ أَوْ قَالَ مِنْ التَّمْرِ ثُمَّ تَصُبُّونَ فِيهِ مِنْ الْمَاءِ حَتَّى إِذَا سَكَنَ غَلَيَانُهُ شَرِبْتُمُوهُ حَتَّى إِنَّ أَحَدَكُمْ أَوْ إِنَّ أَحَدَهُمْ لَيَضْرِبُ ابْنَ عَمِّهِ بِالسَّيْفِ قَالَ وَفِي الْقَوْمِ رَجُلٌ أَصَابَتْهُ جِرَاحَةٌ كَذَلِكَ قَالَ وَكُنْتُ أَخْبَؤُهَا حَيَاءً مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ فَفِيمَ نَشْرَبُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فِي أَسْقِيَةِ الْأَدَمِ الَّتِي يُلَاثُ عَلَى أَفْوَاهِهَا قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَرْضَنَا كَثِيرَةُ الْجِرْذَانِ وَلَا تَبْقَى بِهَا أَسْقِيَةُ الْأَدَمِ فَقَالَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ قَالَ وَقَالَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِأَشَجِّ عَبْدِ الْقَيْسِ إِنَّ فِيكَ لَخَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمُ وَالْأَنَاةُ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ حَدَّثَنِي غَيْرُ وَاحِدٍ لَقِيَ ذَاكَ الْوَفْدَ وَذَكَرَ أَبَا نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ غَيْرَ أَنَّ فِيهِ وَتَذِيفُونَ فِيهِ مِنْ الْقُطَيْعَاءِ أَوْ التَّمْرِ وَالْمَاءِ وَلَمْ يَقُلْ قَالَ سَعِيدٌ أَوْ قَالَ مِنْ التَّمْرِ
हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन अय्यूब] हमनी के बतवले बाड़े [इब्न उलय्याह] हमनी के [सईद बिन अबू अरूबा] [कताद] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े कि, 'अब्दुल कैस के चक्कर से रसूलुल्लाह से मिले वाला आदमी जवन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सोझा आईल रहे, उ हमनी के बतवले, [सईद] कहले कि, [कतदाह] [अबू दलामा] के जिक्र कईले। से [अबू सईद अल-खुदरी] से एह हदीस में, कि अब्दुल कैस में से लोग रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे पहुंचले अवुरी कहले कि, 'हे अल्लाह के नबी, सचमुच हमनी के रबियाह के कबीला के गांव के लोग हई, अवुरी सचमुच मुडलर -काफिर हमनी अवुरी आपके बीच खड़ा हो गईल बाड़े, ताकि हमनी के हरम महीना के छोड़ के -सुरक्षित तरीका से- आपके नजदीक नईखी आ सकत, एहसे हमनी के आदेश देवे के चाही एगो आज्ञा के अंजाम देवे के ताकि हमनी के पीछे के लोग के एकर प्रचार कर सकीले ताकि ओकरा संगे हमनी के जन्नत में प्रवेश कर सकीले, जदी हमनी के ओकरा प अडिग रहीं जा'। उ कहले कि, 'हम रउआ के चार चीज़ से मना करतानी अवुरी चार चीज़ से मना करतानी: यानी कि अल्लाह के इबादत करीं अवुरी उनुका से कवनो चीज़ से शिर्क मत करीं, नमाज करीं, जकात करीं, रमजान में रोजा मत करीं, अवुरी घनीमा के कीमत के पांचवां हिस्सा दीं, अवुरी हम आपके अद-दुबा`, अल-हंतम, अल-मुजफ्त अवुरी अन-नकीर में शराब के प्रेस बनावे से मना करतानी। उ लोग पूछले कि हे अल्लाह के नबी, अन-नकीर के बारे में आपके का ज्ञान बा? ' ऊ कहले : 'पेड़ के तने उकेरल जाला - खोखला हो जाला - तब रउआ ओकरा में खजूर डाल देनी'। सईद कहले, 'या उ कहले कि: 'खजूर के पेड़ से।' फेर रउरा ओकरा में तबले पानी डालत बानी जबले जब उबलत पानी शांत ना हो जाव, फेर तबले पी लेत बानी जबले रउरा में से केहू - भा ओहमें से केहू - असल में अपना चाचा के तलवार से ना मार दी’, ऊ कहले, ‘आ ओह समूह में एगो आदमी बा जे घायल भी बा’. उ फेर कहले कि हम एकरा के एहसे छिपा देले रहनी कि हमरा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से शर्म आवेला, फेर पूछनी कि ए रसूलुल्लाह, हमनी के कवना बर्तन में पी सकतानी? ' ऊ जवाब दिहले, 'एक तन चमड़ा के बर्तन में जवना के मुँह बंद रहे'। उ लोग पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, सचमुच हमनी के जमीन चूहा से भरल बा, ताकि चमड़ा के चमड़ा के बर्तन में कवनो पेय पदार्थ ना बचल, त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'आ भले ही चूहा खाए, अवुरी चूहा खाए, अवुरी चूहा भी खाए'। रवीर कहले, 'आ अल्लाह के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अस्याज अब्दुल कैस से कहले: 'वास्तव में रउआ में दू गो गुण बा जवन अल्लाह के पसंद बा, उ ह; धैर्य आ सावधान रहीं''। हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] अवुरी [इब्न बस्स्यार] दुनो कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [इब्न अबू आदि] [सईद] से [कतादा] से उ कहले बाड़े, बता देले बाड़े कि सिर्फ एक रवीर से ना मिलल। आ [अबू नदलाह] [अबू सईद अल-खुदरी] से उल्लेख कइले बाड़न, कि रसूलुल्लाह अब्दुल कैस जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामना [इब्न उलय्याह] जइसन हदीस से करत रहले, त खाली ओहमें लिखल रहे कि, ‘आ ओहमें रउरा खजूर, भा खजूर आ पानी से मिलावेनी’ आ ऊ ई ना कहले कि, ‘[सैद] कहले बाड़न,’ भा कहले बाड़न कि, ‘विद तारीख के बा''।
Imam Muslim : 26
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَكَّارٍ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو قَزَعَةَ أَنَّ أَبَا نَضْرَةَ أَخْبَرَهُ وَحَسَنًا أَخْبَرَهُمَا أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا أَتَوْا نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ جَعَلَنَا اللَّهُ فِدَاءَكَ مَاذَا يَصْلُحُ لَنَا مِنْ الْأَشْرِبَةِ فَقَالَ لَا تَشْرَبُوا فِي النَّقِيرِ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ جَعَلَنَا اللَّهُ فِدَاءَكَ أَوَ تَدْرِي مَا النَّقِيرُ قَالَ نَعَمْ الْجِذْعُ يُنْقَرُ وَسَطُهُ وَلَا فِي الدُّبَّاءِ وَلَا فِي الْحَنْتَمَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالْمُوكَى
हमरा के बतवले बा [मुहम्मद बिन बक्कर अल-बसरी] [इब्न जुरैज] से हमनी के [अबू आशिम] के बतवले बाड़े। -एक अउरी रिवायत में कहल गइल बा-, आ ऊ हमरा [मुहम्मद बिन रफी'] के बतवले आ लफाज उनकर ह। हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुरज्जाक] हमनी के बतवले बाड़े [इब्न जुरैज] उ कहले बाड़े, हमनी के [अबू कजाआह] के बतवले बाड़े कि [अबू नदलाह] एकर रिपोर्ट कईले बाड़े, अवुरी अल-हसन दुनो के रिपोर्ट कईले बाड़े, कि [अबू सईद अल-खुदरी] उनुका के रिपोर्ट कईले बाड़े, कि रसूलुल्लाह अब्दुल कैस जब उ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आईल रहले त कहले कि, 'ओ अल्लाह के नबी, अल्लाह हमनी के आपन फिरौती बनावस, कवन पेय हमनी खातिर बढ़िया बा?' उ जवाब देले: 'अन-नकीर में मत पिए'। उ लोग पूछले कि हे अल्लाह के नबी, अल्लाह हमनी के आपन फिरौती बनावस, का रउवा मालूम बा कि अन-नकीर का होखेला? ऊ जवाब दिहले: 'हँ, पेड़ के तने के बीच में उकेरल बा, आ रउरा अद-दुबा` भा अल-हंतम में ना पीये के चाहीं, आ रउरा -सिर ढंक के बर्तन में संग्रहीत पेय पीये के चाहीं'.
Imam Muslim : 27
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ جَمِيعًا عَنْ وَكِيعٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ زَكَرِيَّاءَ بْنِ إِسْحَقَ قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رُبَّمَا قَالَ وَكِيعٌ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ مُعَاذًا قَالَ بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّكَ تَأْتِي قَوْمًا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ فَادْعُهُمْ إِلَى شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَأَعْلِمْهُمْ أَنَّ اللَّهَ افْتَرَضَ عَلَيْهِمْ خَمْسَ صَلَوَاتٍ فِي كُلِّ يَوْمٍ وَلَيْلَةٍ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَأَعْلِمْهُمْ أَنَّ اللَّهَ افْتَرَضَ عَلَيْهِمْ صَدَقَةً تُؤْخَذُ مِنْ أَغْنِيَائِهِمْ فَتُرَدُّ فِي فُقَرَائِهِمْ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَإِيَّاكَ وَكَرَائِمَ أَمْوَالِهِمْ وَاتَّقِ دَعْوَةَ الْمَظْلُومِ فَإِنَّهُ لَيْسَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ اللَّهِ حِجَابٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَقَ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ زَكَرِيَّاءَ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ فَقَالَ إِنَّكَ سَتَأْتِي قَوْمًا بِمِثْلِ حَدِيثِ وَكِيعٍ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] अवुरी [अबू कुरैब], अवुरी [इशाक बिन इब्राहिम] सभ [वाकी'] से, [अबू बकर] कहले बाड़े, हमनी के [वाकी'] [जकारिया बिन इशाक] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े, हमरा के [याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन शैफी] से [अबू म'बाद] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े [मुअदज बिन जबल], अबू बकर कहले कि, 'शायद,' वाकी' इब्न अब्बास से कहले कि मुअदज कहले कि, 'रसूलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा के भेजले बाड़े। उ कहले कि, 'वास्तव में, आप किताब के लोग के कवनो लोग के लगे आईब, एहसे उनुका के गवाही देवे खाती आमंत्रित करीं कि अल्लाह के अलावे कवनो देवता - इबादत के लायक - नईखन, अवुरी हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हई।' अगर उ लोग ए मामला में आपके बात मानतारे त बताई कि अल्लाह उनुका खाती रोज-रात पांच बेर नमाज पढ़े के अनिवार्य क देले बाड़े। अगर उ लोग ए मामला में आपके बात मानतारे त बताई कि अल्लाह उनुका प अमीर लोग से लिहल दक्षिणा के फर्ज क देले बाड़े अवुरी ओ लोग के बीच गरीब के बांटल बाड़े। अगर ऊ लोग एह तरह से राउर बात मानत बा त रउरा ओह लोग के कुलीन खजाना से दूर रहब. अन्याय करे वाला लोग के नमाज से डेराईं, काहे कि ओकरा अवुरी अल्लाह के बीच कवनो बाधा नईखे''। हमनी के बतवले बाड़े [इब्न अबू उमर] हमनी के बतवले बाड़े [बिसीर बिन अस-सारी] हमनी के बतवले बाड़े [जकारिया बिन इशाक]। -एक दूसर रिवायत में कहल गइल बा- आ हमनी के बतावल गइल बा [अब्द बिन हुमैद] हमनी के [अबू आशीम] से [जकारिया’ बिन इशक] से [याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन शैफी] से [अबू मा’बाद] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़न, कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुअदज के यमन भेजले बाड़न, एहसे ऊ कहले बाड़न कि ‘हम रउआ करब एगो जनता में आ जाइए'। जइसे कि वाकी के हदीस में बा'।
Imam Muslim : 28
حَدَّثَنَا أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ الْعَيْشِيُّ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا رَوْحٌ وَهُوَ ابْنُ الْقَاسِمِ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ قَالَ إِنَّكَ تَقْدَمُ عَلَى قَوْمٍ أَهْلِ كِتَابٍ فَلْيَكُنْ أَوَّلَ مَا تَدْعُوهُمْ إِلَيْهِ عِبَادَةُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَإِذَا عَرَفُوا اللَّهَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنَّ اللَّهَ فَرَضَ عَلَيْهِمْ خَمْسَ صَلَوَاتٍ فِي يَوْمِهِمْ وَلَيْلَتِهِمْ فَإِذَا فَعَلُوا فَأَخْبِرْهُمْ أَنَّ اللَّهَ قَدْ فَرَضَ عَلَيْهِمْ زَكَاةً تُؤْخَذُ مِنْ أَغْنِيَائِهِمْ فَتُرَدُّ عَلَى فُقَرَائِهِمْ فَإِذَا أَطَاعُوا بِهَا فَخُذْ مِنْهُمْ وَتَوَقَّ كَرَائِمَ أَمْوَالِهِمْ
हमनी के बतवले बाड़े [उमय्याह बिन बिस्ताम अल-ऐसी] हमनी के बतवले बाड़े [यजीद बिन ज़ुराई`] हमनी के [रौह] - यानी इब्न अल-कासिम - [इस्माइल बिन उमय्याह] से [याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन शैफी] से [अबू म'बाद] से [इब्न अब्बास] से बतवले बाड़े कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहुअलैहि अल्लाम रहे जब मुअदज के यमन भेजत रहले त उ कहले कि, 'वास्तव में आपके सामना किताब के लोग के एगो लोग से होखता, त पहिला इच्छा कि आप ओ लोग के उपदेश दीं, उ ह अल्लाह अज्जा व जल्ला के इबादत, जदी उ लोग अल्लाह के जानत बाड़े त उ लोग के बताई कि अल्लाह उनुका खाती दिन-रात में पांच बेर नमाज पढ़ल अनिवार्य क देले बाड़े।' अगर उ लोग आपके बात ए तरीका से मानतारे त ओ लोग से जकात ले लीं अवुरी उनुका उदात्त धन से डेराईहे'।
Imam Muslim : 29
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتُخْلِفَ أَبُو بَكْرٍ بَعْدَهُ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِأَبِي بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَدْ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَاللَّهِ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ فَإِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عِقَالًا كَانُوا يُؤَدُّونَهُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ لِلْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ
हमनी के बतवले बाड़े [कुतैबा बिन सईद] हमनी के [लैत्स बिन सअद] के [उकाइल] से [अज-जुहरी] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] [अबू हुरैरा] से उ कहले बाड़े कि जब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत हो गईल, अवुरी अबू बकर के नियुक्ति भईल खलीफा के बाद, आ अरबन में से काफिर लोग काफिर कइल, तब [उमर बिन अल-खथथब] अबू बकर से कहले, 'तू इंसान से कइसे लड़ सकेलऽ, जब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले बाड़न कि 'हमरा के इंसान से लड़े के आदेश दिहल गइल जब तक कि ऊ लोग ना कहे कि 'कवनो देवता नइखे - इबादत के लायक - लेकिन अल्लाह', त जे कहे कि, 'उहाँ बा' कवनो देवता - इबादत के लायक - लेकिन अल्लाह', त सचमुच उ अपना संपत्ति अवुरी आत्मा के - हमरा हमला से - बचाव कईले बाड़े - सिवाय अधिकार के। इस्लाम, आ ओकर हिसाब अल्लाह के सौंप दिहल जाला'। त [अबू बकर] कहले कि, 'अल्लाह के कसम, हम सही मायने में ओ लोग से लड़ब, जवन कि नमाज अवुरी जकात में अंतर करेले, काहेंकी जकात -एक दावा- संपत्ति के अधिकार ह।' अल्लाह के कसम, अगर उ लोग अपना अनिच्छा के चलते हमरा में बाधा पहुंचावेले, भले ही उ लोग अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के भुगतान क देले बाड़े, तबो हम ओ लोग के अनिच्छा के चलते ओ लोग से लड़ब।' त [उमर बिन अल-खथथब] कहले कि, 'अल्लाह के कसम इ उनुकर ना ह लेकिन कि हम देखनी कि अल्लाह अबू बकर के छाती खोल देले बाड़े - उ लोग से - तबे हमरा पता चल गईल कि उ सच्चाई हवे''।
Imam Muslim : 30
و حَدَّثَنَا أَبُو الطَّاهِرِ وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى قَالَ أَحْمَدُ حَدَّثَنَا و قَالَ الْآخَرَانِ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ
आ ई हमरा [अबू अथ-ताहिर] आ [हरमाला बिन याह्या] आ [अहमद बिन ईसा] के बता दिहले बा, [अहमद] कहले बा कि ‘ई हमनी के बता दिहले बा’। जबकि दू गो अउरी लोग कहले, 'उ हमनी से कहले [इब्न वहब] उ कहले, उ हमरा [इब्न शिहाब] से [युनुस] बतवले उ कहले, उ हमरा से [सैद बिन अल-मुसैयब] बतवले कि [अबू हुरैरा] उनुका से कहले कि अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, 'हमरा के तब तक लोग से लड़े के आदेश ना दिहल गईल जब तक कि उ लोग ना कहे कि, 'कवनो रास्ता नईखे - इबादत के लायक - लेकिन अल्लाह', फिर जे कहे कि, 'कवनो देवता नईखन - इबादत के लायक - लेकिन अल्लाह', त सचमुच उ अपना संपत्ति अवुरी जान के रक्षा - हमरा हमला से कईले बाड़े - सिवाय इस्लाम के अधिकार के, अवुरी ओकर हिसाब अल्लाह प छोड़ दिहल बा'।
Imam Muslim : 31
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي الدَّرَاوَرْدِيَّ عَنْ الْعَلَاءِ ح و حَدَّثَنَا أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا رَوْحٌ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَيُؤْمِنُوا بِي وَبِمَا جِئْتُ بِهِ فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ
हमनी के बतवले बाड़े [अहमद बिन अब्दाह अदल-दलाब्बी] हमनी के [अब्दुल अजीज] -अर्थात अद-दरावदी- [अल-आला'] से बतवले बाड़े। -एक अउर रिवायत में एकर जिक्र बा- आ हमनी के [उमय्याह बिन बिस्तम] के बतवले बा आ लफाज उनकर ह, हमनी के बतवले बा [यजीद बिन ज़ुराई] हमनी के [रौह] [अल-अला’ से बिन अब्दुररहमान बिन या’कुब] से [उनकर पिता] से [अबू हुरैरा] से रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़न, उ कहले बाड़न: 'हमरा के तब तक इंसान से लड़े के आदेश दिहल गईल रहे जब तक कि उ लोग गवाही ना देस कि कवनो देवता नईखन - ओकरा के इबादत करे के अधिकार बा - लेकिन अल्लाह अवुरी हमरा प अवुरी हम जवन कुरान ले आईल बानी, ओकरा प विश्वास करीं, त जदी उ लोग अयीसन कहतारे, त सचमुच उ लोग अपना संपत्ति अवुरी आत्मा के रक्षा कईले बाड़े - हमरा हमला से - जब तक कि इ इस्लाम के अधिकार के चलते ना होखे।' आ ओह लोग के हिसाब अल्लाह पर छोड़ दिहल गइल बा'.
Imam Muslim : 32
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ وَعَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ح و حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ يَعْنِي ابْنَ مَهْدِيٍّ قَالَا جَمِيعًا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَإِذَا قَالُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ ثُمَّ قَرَأَ { إِنَّمَا أَنْتَ مُذَكِّرٌ لَسْتَ عَلَيْهِمْ بِمُسَيْطِرٍ }
आ हमनी के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [हफश बिन गियात] से [अल-अमासी] से [अबू सुफियन] से [जबीर] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े, दुनो लोग कहले कि, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'हमरा के इबान के हदीस के मुताबिक लोग से लड़ाई करे के आदेश दिहल गईल रहे।' अबू हुरैरा से अल-मुसैयब के नाम से जानल जाला। -एक अउर रिवायत में कहल गइल बा- आ हमरा के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [वाकी’] बतवले बाड़न। -एक अउर रिवाज में एकर जिक्र बा- आ हमरा के बतावल गइल बा [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] हमनी के बतवले बाड़न [अब्दुररहमान] -अर्थात बिन महदी- दुनो लोग कहले बा, हमनी के [सुफयान] [अबू अज़-जुबैर] से [जाबीर] से बतवले बाड़े उ कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह कहले कि, 'हमरा के तब तक लोग से लड़े के आदेश दिहल गईल जब तक कि उ लोग ना कहे कि, 'कवनो रवाना नईखे -वहो।' के इबादत होखे के अधिकार बा- लेकिन अल्लाह', एहसे उ लोग कहल कि, 'कवनो देवता नईखन -जेकर इबादत करे के अधिकार बा- लेकिन अल्लाह', त सचमुच उ लोग अपना संपत्ति अवुरी आत्मा के -हमरा हमला से- बचा लेले बाड़े- सिवाय इस्लाम के अधिकार के। आ ओह लोग के हिसाब अल्लाह पर छोड़ दिहल गइल बा. तब ऊ पढ़ले: '-वास्तव में तू -केवल- एगो चेतावनी देवे वाला हउअ। ओह लोग पर रउरा बिल्कुल कवनो अधिकार नइखे- ' -Qs. अल घास्यह : 21-22- के बा।
Imam Muslim : 33
حَدَّثَنَا أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِىُّ مَالِكُ بْنُ عَبْدِ الْوَاحِدِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ فَإِذَا فَعَلُوا عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू गसन अल-मिस्माई मालिक बिन अब्दुल वाहिद] हमनी के [अब्दुल मलिक बिन ऐश-शब्बह] से [स्यूबाह] से [वकिद बिन मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्लाह बिन उमर] से [अपना पिता] से [अब्दुल्लाह बिन उमर] से कहले बाड़े कि, 'हमरा के तब तक लोग से लड़ाई करे के आदेश दिहल गईल जब तक कि उ लोग गवाही ना देस कि कवनो भगवान नईखे - इबादत के लायक - लेकिन अल्लाह अवुरी कि मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह हवे, उ लोग नमाज के स्थापना कईले, अवुरी जकात देवेले। त अगर उ लोग अयीसन करीहे त सचमुच उ लोग अपना संपत्ति अवुरी आत्मा के -हमार हमला- से बचा लेले बाड़े, सिवाय इस्लामी अधिकार के। आ ओह लोग के हिसाब अल्लाह पर छोड़ दिहल गइल बा'.
Imam Muslim : 34
و حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ يَعْنِيَانِ الْفَزَارِيَّ عَنْ أَبِي مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَكَفَرَ بِمَا يُعْبَدُ مِنْ دُونِ اللَّهِ حَرُمَ مَالُهُ وَدَمُهُ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ ح وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ كِلَاهُمَا عَنْ أَبِي مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ وَحَّدَ اللَّهَ ثُمَّ ذَكَرَ بِمِثْلِهِ
आ हमनी के बतावल गइल बा [सुवैद बिन सईद] आ [इब्न अबू उमर] दुनु कहले बाड़न, हमनी के बतवले बाड़न [मरवान] दुनु के मतलब मरवान अल-फजारी से रहे, [अबू मलिक] से [उनकर पिता] से ऊ कहले बाड़न कि, 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि: 'जे कहत बा कि कवनो भगवान नइखे -जेकर इबादत होखे के अधिकार बा- बाकिर अल्लाह, आ अल्लाह के अलावा कवनो चीज के बदनाम कर देला, तब ओकर धन आ खून हरम होला, आ ओकर इनाम अल्लाह के लगे होला'। आ हमनी के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [अबू खालिद अल अहमर] बतवले बाड़न. -एक अउरी रिवायत में कहल गइल बा- आ ऊ हमरा के एकरा बारे में बतवले बाड़न [जुहैर बिन हरब] हमनी के [यजीद बिन हारून] [अबू मलिक] आ [उनकर पिता] दुनु के बतवले बाड़न कि ऊ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बाड़न कि: 'जे केहू अल्लाह पर भरोसा करी,' तब कुछ अइसने जिक्र कइले बाड़न'।
Imam Muslim : 35
و حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى التُّجِيبِيُّ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ لَمَّا حَضَرَتْ أَبَا طَالِبٍ الْوَفَاةُ جَاءَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَوَجَدَ عِنْدَهُ أَبَا جَهْلٍ وَعَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أُمَيَّةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عَمِّ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ كَلِمَةً أَشْهَدُ لَكَ بِهَا عِنْدَ اللَّهِ فَقَالَ أَبُو جَهْلٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أُمَيَّةَ يَا أَبَا طَالِبٍ أَتَرْغَبُ عَنْ مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَلَمْ يَزَلْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْرِضُهَا عَلَيْهِ وَيُعِيدُ لَهُ تِلْكَ الْمَقَالَةَ حَتَّى قَالَ أَبُو طَالِبٍ آخِرَ مَا كَلَّمَهُمْ هُوَ عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَأَبَى أَنْ يَقُولَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا وَاللَّهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ مَا لَمْ أُنْهَ عَنْكَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَى مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ } وَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى فِي أَبِي طَالِبٍ فَقَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ } و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَا أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ ح و حَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَا حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ صَالِحٍ كِلَاهُمَا عَنْ الزُّهْرِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ صَالِحٍ انْتَهَى عِنْدَ قَوْلِهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فِيهِ وَلَمْ يَذْكُرْ الْآيَتَيْنِ وَقَالَ فِي حَدِيثِهِ وَيَعُودَانِ فِي تِلْكَ الْمَقَالَةِ وَفِي حَدِيثِ مَعْمَرٍ مَكَانَ هَذِهِ الْكَلِمَةِ فَلَمْ يَزَالَا بِهِ
आ उ हमरा के बतवले [हरमला बिन याह्या अत-तुजीबी] हमरा से बतवले [अब्दुल्लाह बिन वहब] उ कहले, उ हमरा [यूनुस] के [इब्न शिहाब] से बतवले उ कहले, उ हमरा के [सैद बिन अल-मुसैयब] के [अपना पिता] से बतवले उ कहले कि, 'रसुलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम ओ समय अबू तालिब के घरे गईल रहले जब उनुका मौत के सामना करे के पड़त रहे।' उनुका अबू जहल अवुरी अब्दुल्ला बिन अबू उमैय्याह बिन अल मुगिराह भी उहाँ मिलल। रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि चाचा! मत के दू गो वाक्य कहऽ, हम अल्लाह के सामने राउर गवाह बनब'। तब अबू जहल आ अब्दुल्ला बिन अबू उमय्याह कहले कि हे अबू तालिब का तू अब्दुल मुथतालिब के धर्म छोड़े में सक्षम बाड़ू? ' रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हार ना मनले आ एकरा बदले उनुका के दू गो कालिमा पंथ के पाठ करे के सिखावत रहले आ कई बेर दोहरावत रहले. त अबू तालिब ओह लोग के आपन आखिरी शब्द के रूप में जवाब दिहलन कि ऊ अब्दुल मुतालिब के धर्म का साथे रहले, आ कालिमा शहादत के उच्चारण करे से परहेज करत बाड़न. रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इहो कहले बाड़न कि ‘अल्लाह के कसम हम तोहरा खातिर अल्लाह से माफी माँगब’ एहसे अल्लाह ई आयत जारी कइले बाड़न कि ‘-नबी आ विश्वास करे वाला लोग खातिर ई जायज नइखे कि ऊ लोग शिर्क करे वाला लोग खातिर माफी माँग, भले ऊ लोग अपना रिश्तेदार होखे, ओकरा बाद ई साफ हो गइल होखे कि शिर्क लोग नरक में माहिर बा-’ -Qs. तौबाह में : 113- के बा। तब अल्लाह अबू तालिब के घटना के बारे में आपन बात भेजले: 'वास्तव में, हे मुहम्मद, आपके लगे इ ताकत नईखे कि आप जेकरा से प्यार करेनी ओकरा के मार्गदर्शन देवे के ताकि उ इस्लाम के स्वीकार कर सके, लेकिन अल्लाह उहे बाड़े जेकरा लगे उ लोग के मार्गदर्शन देवे के ताकत बा, जेकरा के उ चाहत बाड़े, अवुरी उहे सबसे जादे जानत बाड़े कि उ लोग बाड़े जवन कि इस्लाम के अपनावे खाती मार्गदर्शन पावे के -इच्छुक बाड़े-'। -प्रश्न के बा। अल कशाश : 56- के बा। आ हमनी के बतवले बा [इशहाक बिन इब्राहिम] आ [अब्द बिन हुमैद] दुनु कहले बाड़न, बता दिहले बाड़न [अब्दुर्रज्जाक] हमनी के [मा’मर] बतवले बाड़न. -एक अउरी रिवायत में कहल गइल बा- आ हमनी के बतवले बा [हसन अल-हुलवानी] आ [अब्द बिन हुमैद] दुनु कहले बाड़न, बता दिहले बाड़न [या’कुब] -अर्थात इब्न इब्राहिम बिन स’अद- ऊ कहले बाड़न, हमनी के [हमार पिता] से [सालिह] से दुनु [अज-जुहरी] से एह सनाद के साथे बतवले बाड़न उदाहरण खातिर। हालांकि सालिह के हदीस के अंत में इ शब्द बा कि, "तब अल्लाह उनुका बारे में आपन वचन प्रकट कईले" अवुरी उ ए दुनो आयत के जिक्र नईखन कईले। उ अपना हदीस में मा'मार के हदीस में भी जिक्र कईले बाड़े कि "आ दुनो लोग एकही शब्द के दोहरावत रहले" जवन कि ए वाक्य के विकल्प ह। आ दुनु जने एकर पालन कइले."
Imam Muslim : 36
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَمِّهِ عِنْدَ الْمَوْتِ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَشْهَدُ لَكَ بِهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَبَى فَأَنْزَلَ اللَّهُ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ } الْآيَةَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्बाद] अवुरी [इब्न अबू उमर] दुनो कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [मरवान] [यजीद] से -यानी इब्न कैसन- से [अबू हाजिम] से [अबू हुरैरा] से उ कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना चाचा से कहले रहले, जब उ मरे वाला रहले: 'कह, 'कवनो भगवान नईखे - अल्लाह के अलावा इबादत के लायक' हम कयामत के दिन रउआ खातिर एह शब्दन से गवाही जरूर देब'। लेकिन उ मना क देले, फिर अल्लाह बयान देले: '-वास्तव में आप जेकरा से प्यार करेनी ओकरा के मार्गदर्शन ना कर पईब-' -Qs. अल कशाश : 56- के बा।
Imam Muslim : 37
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ مَيْمُونٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ الْأَشْجَعِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَمِّهِ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَشْهَدُ لَكَ بِهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ لَوْلَا أَنْ تُعَيِّرَنِي قُرَيْشٌ يَقُولُونَ إِنَّمَا حَمَلَهُ عَلَى ذَلِكَ الْجَزَعُ لَأَقْرَرْتُ بِهَا عَيْنَكَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ }
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन हातिम बिन मैमुन] हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन सईद] हमनी के बतवले बाड़े [यजीद बिन कैसन] [अबू हाजिम अल-असीजाई] से [अबू हुरैरा] से उ कहले रहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपना चाचा से कहले रहले, जब उ मरे वाला रहले: 'कह, 'कवनो भगवान नईखे - अल्लाह के अलावा इबादत के लायक' हम कयामत के दिन रउआ खातिर एह शब्दन से गवाही जरूर देब'। उ जवाब देले कि, 'जदी कुरैश लोग हमरा के इ बात से ना निंदा ना रहित कि 'उ बेचैन होखला के चलते अयीसन कईले' त हम आपके आंख से ओ वाक्य से सहमत हो गईल रहती'। तब अल्लाह से नियत कइलन: '-वास्तव में रउआ जेकरा से प्यार करेनी ओकरा के मार्गदर्शन ना कर पइब, लेकिन हम ओह लोग के मार्गदर्शन करब जेकरा के उ चाहत बाड़े-' -Qs. अल कशाश : 56- के बा।
Imam Muslim : 38
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ كِلَاهُمَا عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ حُمْرَانَ عَنْ عُثْمَانَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ مَاتَ وَهُوَ يَعْلَمُ أَنَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ دَخَلَ الْجَنَّةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ الْوَلِيدِ أَبِي بِشْرٍ قَالَ سَمِعْتُ حُمْرَانَ يَقُولُ سَمِعْتُ عُثْمَانَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مِثْلَهُ سَوَاءً
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] अवुरी [जुहैर बिन हर्ब] दुनो [इस्माइल बिन इब्राहिम] से, [अबू बकर] कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [इब्न उलय्याह] [खालिद] से उ कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [अल-वालिद बिन मुस्लिम] [हुमरान] से [उस्मान] से उ कहले बाड़े कि, 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि अल्लाह कहले रहले: 'जे केहू मर जाई जबकि ओकरा मालूम बा कि अल्लाह के छोड़ के कवनो देवता - इबादत के लायक - नईखन, उ स्वर्ग में जरूर प्रवेश करी'। हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अबू बकर अल मुकद्दामी] हमनी के बतवले बाड़े [बिसीर बिन अल-मुफद्दलाल] हमनी के [खालिद अल-हदजजा’] [अल-वालिद अबू बिसीर] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े, हम [हुमरान] के कहत सुनले बानी, हम [उस्मान] के कहत सुनले बानी, हम रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इहे कहत सुनले बानी चीज'।
Imam Muslim : 39
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ النَّضْرِ بْنِ أَبِي النَّضْرِ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو النَّضْرِ هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ الْأَشْجَعِيُّ عَنْ مَالِكِ بْنِ مِغْوَلٍ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ مُصَرِّفٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَسِيرٍ قَالَ فَنَفِدَتْ أَزْوَادُ الْقَوْمِ قَالَ حَتَّى هَمَّ بِنَحْرِ بَعْضِ حَمَائِلِهِمْ قَالَ فَقَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ جَمَعْتَ مَا بَقِيَ مِنْ أَزْوَادِ الْقَوْمِ فَدَعَوْتَ اللَّهَ عَلَيْهَا قَالَ فَفَعَلَ قَالَ فَجَاءَ ذُو الْبُرِّ بِبُرِّهِ وَذُو التَّمْرِ بِتَمْرِهِ قَالَ وَقَالَ مُجَاهِدٌ وَذُو النَّوَاةِ بِنَوَاهُ قُلْتُ وَمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ بِالنَّوَى قَالَ كَانُوا يَمُصُّونَهُ وَيَشْرَبُونَ عَلَيْهِ الْمَاءَ قَالَ فَدَعَا عَلَيْهَا حَتَّى مَلَأَ الْقَوْمُ أَزْوِدَتَهُمْ قَالَ فَقَالَ عِنْدَ ذَلِكَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ لَا يَلْقَى اللَّهَ بِهِمَا عَبْدٌ غَيْرَ شَاكٍّ فِيهِمَا إِلَّا دَخَلَ الْجَنَّةَ
हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अन-नदलर बिन अबू अन-नदलर] उ कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [अबू अन-नदलर हाशिम बिन अल-कासिम] हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह अल-अशजाई] से [मलिक बिन मिघवाल] से [थल्हाह बिन मुशर्रिफ] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से उ कहले कि, 'हमनी के संगे रहनी।' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक सफर पर'। फेर कहलन कि ‘तब जनता के रियायत खतम हो गइल’. फेर कहलन कि जबले ऊ लोग अपना कुछ जानवरन के वध ना कइल चाहत रहे’. रवीर कहले, 'तब उमर कहले, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अगर तू लोग के कुछ रिज़न इकट्ठा क के ओकरा प अल्लाह से दुआ कईले रहती - त बढ़िया रहित -'। कथाकार कहले, 'तब ऊ कइले'। कथावाचक कहले, 'तब गेहूं के मालिक आपन गेहूं लेके आईल, खजूर के मालिक आपन खजूर लेके आईल'। कथावाचक कहले, 'आ मुजाहिद कहले, "आ अनाज के मालिक लोग अपना अनाज के संगे।" हम कहनी, "अनाज से का कइल लोग?" उ जवाब देले कि, "उ लोग एकरा से पानी चूस के पियले।" उ कहले कि, "तब अल्लाह के रसूलुल्लाह तब तक ओ लोग के बोलवले, जब तक कि उ लोग आपन रजत भर ना पवले।" रसूलुल्लाह कहले कि, "त ओह घरी अल्लाह के रसूलुल्लाह नमाज पढ़ले कि, 'हम गवाही देत बानी कि अल्लाह के छोड़ के कवनो देवता - इबादत के लायक - नईखन अवुरी हम अल्लाह के रसूलुल्लाह हई, कवनो नौकर अल्लाह से मिलेला, उनुका के मजबूती से पकड़ के बिना कवनो शक के जन्नत में प्रवेश करी।"
Imam Muslim : 40
حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ وَأَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ جَمِيعًا عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ قَالَ أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَوْ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ شَكَّ الْأَعْمَشُ قَالَ لَمَّا كَانَ غَزْوَةُ تَبُوكَ أَصَابَ النَّاسَ مَجَاعَةٌ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ أَذِنْتَ لَنَا فَنَحَرْنَا نَوَاضِحَنَا فَأَكَلْنَا وَادَّهَنَّا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ افْعَلُوا قَالَ فَجَاءَ عُمَرُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ فَعَلْتَ قَلَّ الظَّهْرُ وَلَكِنْ ادْعُهُمْ بِفَضْلِ أَزْوَادِهِمْ ثُمَّ ادْعُ اللَّهَ لَهُمْ عَلَيْهَا بِالْبَرَكَةِ لَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يَجْعَلَ فِي ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ قَالَ فَدَعَا بِنِطَعٍ فَبَسَطَهُ ثُمَّ دَعَا بِفَضْلِ أَزْوَادِهِمْ قَالَ فَجَعَلَ الرَّجُلُ يَجِيءُ بِكَفِّ ذُرَةٍ قَالَ وَيَجِيءُ الْآخَرُ بِكَفِّ تَمْرٍ قَالَ وَيَجِيءُ الْآخَرُ بِكَسْرَةٍ حَتَّى اجْتَمَعَ عَلَى النِّطَعِ مِنْ ذَلِكَ شَيْءٌ يَسِيرٌ قَالَ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْهِ بِالْبَرَكَةِ ثُمَّ قَالَ خُذُوا فِي أَوْعِيَتِكُمْ قَالَ فَأَخَذُوا فِي أَوْعِيَتِهِمْ حَتَّى مَا تَرَكُوا فِي الْعَسْكَرِ وِعَاءً إِلَّا مَلَئُوهُ قَالَ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا وَفَضَلَتْ فَضْلَةٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ لَا يَلْقَى اللَّهَ بِهِمَا عَبْدٌ غَيْرَ شَاكٍّ فَيُحْجَبَ عَنْ الْجَنَّةِ
हमनी के [सहल बिन उस्मान] अवुरी [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल-अला'] के [अबू मुअवियाह] से हर बात बतवले बाड़े। मुसलमानन के बहुत भूख लागल, उ लोग कहल कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, का रउआ हमनी के अपना ऊंट के वध करे के अनुमति देब, ताकि हमनी के ओकर मांस खा सकीले अवुरी ओकर चर्बी के तेल के रूप में इस्तेमाल क सकीले - त्वचा के ढके खाती, ओकरा के तपत गर्मी से बचावे खाती-? ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले: 'करऽ'। अबू हुरैरा कहले, 'तब उमर आके कहले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, अईसन करब त ऊंट के पीठ खतम हो जाई - वाहन -! लेकिन बेहतर होई कि रउआ ओह लोग के बाकी खाना मांगीं आ ओकरा बाद नमाज करीं, अल्लाह उनुका के बरकत देस।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहले: 'ठीक बा'। तब उ एगो पसरल - चमड़ा से बनल - मंगले, ओकरा के पसारला के बाद उ ओ लोग के बचे वाला खाना के अवशेष मंगले।' अबू हुरैरा आगे कहले, 'तब एगो आदमी रहे जवन मुट्ठी भर मकई लेके आईल रहे, दूसरा मुट्ठी भर खजूर लेके आईल रहे, अवुरी कुछ लोग रहे जवन कि खाना के टुकड़-टुकड़ लेके आईल रहे, जईसे कि रोटी, जवना से अबू हुरैरा कहले कि, 'तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खाना प बरकत के दुआ कईले, जवना के बाद उ कहले कि: 'ताके अवुरी।' आपन खाना के बर्तन भरीं' अबू हुरैरा आगे कहले, 'तब उ लोग आपन खाना के जगह भर दिहल, ताकि एको सिपाही ना बल्कि उ लोग के खाना के जगह भर गईल', 'तब उ लोग तब तक खाना खईले, अवुरी अभी भी कुछ खाना बाचल रहे' अल्लाह के रसूलुल्लाह, कवनो नौकर अल्लाह से ना मिलेला, ओकरा ए वाक्य प शक ना होखेला अवुरी ओकरा बाद ओकरा के स्वर्ग में जाए से रोक दिहल जाला'।