Imam Muslim : 1
وَهُوَ الْأَثَرُ الْمَشْهُورُ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ حَدَّثَ عَنِّي بِحَدِيثٍ يُرَى أَنَّهُ كَذِبٌ فَهُوَ أَحَدُ الْكَاذِبِينَ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ الْحَكَمِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ ح و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ أَيْضًا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ شُعْبَةَ وَسُفْيَانَ عَنْ حَبِيبٍ عَنْ مَيْمُونِ بْنِ أَبِي شَبِيبٍ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ قَالَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَلِكَ
आ ऊ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मशहूर अतसर रहले, 'जे हमरा से कवनो हदीस सुनावेला, जवना के झूठ बतावल जाला, त ऊ - रवीकार - ओह झूठा लोग में से एगो ह'। हमनी के बतवले बा [अबू बकर बिन अबू सियाइबा] हमनी के [वाकी'] से [स्यूबाह] से [अल हकम] से [अब्दुररहमान बिन अबू लैला] से [समुरा बिन जुंदाब] से बतवले बाड़े। -एक अउरी रिवायत में एकर जिक्र बा- आ हमनी के इहो बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबाह] हमनी के [वाकी’] [स्यूबाह] से आ [सुफयान] [हबीब] से [मैमुन बिन अबू स्याबीब] से [अल-मुघीरा बिन स्यूबाह] से दुनो लोग कहले कि, 'रसूलुल्लाह सल्लाहु 'अलैहि वसल्लम एह बारे में कहले बाड़े'।
Imam Muslim : 2
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ أَنَّهُ سَمِعَ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَخْطُبُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَكْذِبُوا عَلَيَّ فَإِنَّهُ مَنْ يَكْذِبْ عَلَيَّ يَلِجْ النَّارَ
आ हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [घुंदर] के [स्यूबाह] से बतवले बाड़े -एक अउरी रिवाज में एकर जिक्र बा- आ हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] आ [इब्न बस्स्यार] दुनो कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन जा'फर बिन] हमनी के [श्यूबाह] के [मंसूर] से [रिब'ई से बतवले बाड़े हिरासी] कि उ [अली] के उपदेश सुनले, उ कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, 'हमरा नाम प झूठ मत बोल, काहेंकी जे हमरा नाम प झूठ बोली, उ जरूर नरक में जाई'।
Imam Muslim : 3
و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ يَعْنِي ابْنَ عُلَيَّةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّهُ قَالَ إِنَّهُ لَيَمْنَعُنِي أَنْ أُحَدِّثَكُمْ حَدِيثًا كَثِيرًا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ تَعَمَّدَ عَلَيَّ كَذِبًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
[जुहैर बिन हर्ब] हमनी के [इस्माइल] - यानी इब्न उलय्याह - [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] से [अनस बिन मलिक] से बतवले कि उ कहले कि, 'वास्तव में, एगो चीज़ जवन हमरा के रउआ से बहुत हदीस बतावे से रोकत बा, उ इ कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जे जानबूझ के हमरा बारे में झूठ बतावे, ओकरा के अपना जगह लेवे के चाही।' आग के।'
Imam Muslim : 4
و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ أَبِي حَصِينٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन उबैद अल-घुबरी] हमनी के [अबू अवानाह] से [अबू हाशिन] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'जे हमरा नाम प झूठ बोलता, उ नरक से आपन सीट प कब्जा क लेवे'।
Imam Muslim : 5
و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عُبَيْدٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ رَبِيعَةَ قَالَ أَتَيْتُ الْمَسْجِدَ وَالْمُغِيرَةُ أَمِيرُ الْكُوفَةِ قَالَ فَقَالَ الْمُغِيرَةُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ كَذِبًا عَلَيَّ لَيْسَ كَكَذِبٍ عَلَى أَحَدٍ فَمَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ و حَدَّثَنِي عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قَيْسٍ الْأَسْدِيُّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ رَبِيعَةَ الْأَسَدِيِّ عَنْ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِهِ وَلَمْ يَذْكُرْ إِنَّ كَذِبًا عَلَيَّ لَيْسَ كَكَذِبٍ عَلَى أَحَدٍ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] हमनी के बतवले बाड़े [हमार पिता] हमनी के बतवले बाड़े [सैद बिन उबैद] हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन रबियाह] उ कहले कि, 'हम मस्जिद गईल रहनी जबकि अल मुघीरा, कुफा के गवर्नर रहले।' उ कहले कि, 'तब [अल-मुगिरा] कहले कि, 'हम अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहत सुनले बानी कि 'वास्तव में हमरा नाम प झूठ बोलल अवुरी केहु अवुरी के नाम प झूठ बोलल एकही नईखे, जे जानबूझ के हमरा नाम प झूठ बोलता, उ नरक से आपन सीट प कब्जा क लेवे'। आ ई हमरा के बतावल गइल बा [अली बिन हुजर जइसे कि स’दी] हमनी के बतवले बाड़न [अली बिन मुशीर] हमनी के [मुहम्मद बिन कैस अल असदी] से [अली बिन रबिअह अल असदी] से [अल-मुघीरा बिन स्यूबाह] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्लाम से अइसन हदीस से बतवले बाड़न, खाली ऊ ना कहले बाड़न कि, ‘साचहूँ, हमरा नाम में झूठ बोलल बा केहू के नाम पर झूठ बोलल जइसन ना'।
Imam Muslim : 6
و حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي ح و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ قَالَا حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَفَى بِالْمَرْءِ كَذِبًا أَنْ يُحَدِّثَ بِكُلِّ مَا سَمِعَ و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حَفْصٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ خُبَيْبِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ حَفْصِ بْنِ عَاصِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ ذَلِكَ
आ हमनी के बतवले बाड़े [उबैदुल्लाह बिन मुअदज अल अनबरी] हमनी के [हमार पिता] के बतवले बाड़े -एक अवुरी रिवाज में एकर जिक्र बा-, अवुरी हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुररहमान बिन महदी] दुनो लोग कहले, हमनी के बता देले बाड़े [श्यूबाह] से [खुबैब बिन अब्दुररहमान] से [हफश बिन अशिम] से उ कहले कि, 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'अगर आदमी के झूठ मानल जाए त काफी बा, जदी उ आपन सुनल हर बात बतावे'। हमनी के बतवले बाड़े [अबू बकर बिन अबू सियाबा] हमनी के बतवले बाड़े [अली बिन हफश] हमनी के [स्यूबाह] से [खुबैब बिन अब्दुररहमान] से [हफश बिन अशिम] से [अबू हुरैरा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उहे हदीस के संगे बतवले बाड़े।
Imam Muslim : 7
و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو هَانِئٍ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ مُسْلِمِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ قَالَ سَيَكُونُ فِي آخِرِ أُمَّتِي أُنَاسٌ يُحَدِّثُونَكُمْ مَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ وَلَا آبَاؤُكُمْ فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ
आ हमनी के बतवले बाड़न [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] आ [जुहैर बिन हर्ब] दुनु कहले बाड़न, बतवले बाड़न [अब्दुल्लाह बिन यजीद] ऊ कहले बाड़न, हमरा के बतवले बाड़न [सैद बिन अबू अय्यूब] ऊ कहले बाड़न, हमरा के [अबू हानी’] [अबू उस्मान मुस्लिम बिन यासर] से [अबू हुरैरा] से रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि से बतवले बाड़न वसाल्लम, कि उ कहले रहले कि, 'ई होई कि हमरा उम्मा के अंत में लोग होईहे जवन कि आपके एगो हदीस सुनावत होईहे, जवन कि आप कबो ना सुनले बानी अवुरी ना आपके बाप-दादा के सुनले बाड़े।' त तू दूर रहऽ आ ऊ लोग दूर रहेला'.
Imam Muslim : 8
و حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ حَرْمَلَةَ بْنِ عِمْرَانَ التُّجِيبِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو شُرَيْحٍ أَنَّهُ سَمِعَ شَرَاحِيلَ بْنَ يَزِيدَ يَقُولُ أَخْبَرَنِي مُسْلِمُ بْنُ يَسَارٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَكُونُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ دَجَّالُونَ كَذَّابُونَ يَأْتُونَكُمْ مِنْ الْأَحَادِيثِ بِمَا لَمْ تَسْمَعُوا أَنْتُمْ وَلَا آبَاؤُكُمْ فَإِيَّاكُمْ وَإِيَّاهُمْ لَا يُضِلُّونَكُمْ وَلَا يَفْتِنُونَكُمْ
हमरा के बतवले बाड़े [हरमला बिन याह्या बिन अब्दुल्लाह बिन हरमलाह बिन इमरान अत-तुजीबी] उ कहले बाड़े, हमनी के बतवले बाड़े [इब्न वहब] उ कहले बाड़े, हमनी के [अबू स्यूरैह] के बतवले बाड़े कि उ [सियारहिल बिन यजीद] के कहत सुनले बाड़े, हमरा के [मुस्लिम बिन यासर] से कहले बाड़े कि उ [अबू हुरैराह] के कहत सुनले बाड़े कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) अवुरी... अल्लाह के बरकत उनुका पर होखे) कहले: 'हो जाई समय के अंत में दज्जाल झूठा लोग आपके लगे अयीसन हदीस ले आई जवन कि आप कबो ना सुनले होखब अवुरी आपके बाप-बाप भी कबो ना सुनले होखस।' त ओह लोग से दूर रहीं आ ओह लोग से दूर रहीं. उ लोग आपके गुमराह नईखे क सकत अवुरी ना आपके निंदा नईखे क सकत'।
Imam Muslim : 9
حَدَّثَنِي أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ كَهْمَسٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ ح و حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ وَهَذَا حَدِيثُهُ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ قَالَ كَانَ أَوَّلَ مَنْ قَالَ فِي الْقَدَرِ بِالْبَصْرَةِ مَعْبَدٌ الْجُهَنِيُّ فَانْطَلَقْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَاجَّيْنِ أَوْ مُعْتَمِرَيْنِ فَقُلْنَا لَوْ لَقِينَا أَحَدًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلْنَاهُ عَمَّا يَقُولُ هَؤُلَاءِ فِي الْقَدَرِ فَوُفِّقَ لَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ دَاخِلًا الْمَسْجِدَ فَاكْتَنَفْتُهُ أَنَا وَصَاحِبِي أَحَدُنَا عَنْ يَمِينِهِ وَالْآخَرُ عَنْ شِمَالِهِ فَظَنَنْتُ أَنَّ صَاحِبِي سَيَكِلُ الْكَلَامَ إِلَيَّ فَقُلْتُ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّهُ قَدْ ظَهَرَ قِبَلَنَا نَاسٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ وَيَتَقَفَّرُونَ الْعِلْمَ وَذَكَرَ مِنْ شَأْنِهِمْ وَأَنَّهُمْ يَزْعُمُونَ أَنْ لَا قَدَرَ وَأَنَّ الْأَمْرَ أُنُفٌ قَالَ فَإِذَا لَقِيتَ أُولَئِكَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنِّي بَرِيءٌ مِنْهُمْ وَأَنَّهُمْ بُرَآءُ مِنِّي وَالَّذِي يَحْلِفُ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ لَوْ أَنَّ لِأَحَدِهِمْ مِثْلَ أُحُدٍ ذَهَبًا فَأَنْفَقَهُ مَا قَبِلَ اللَّهُ مِنْهُ حَتَّى يُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَ بَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ إِذْ طَلَعَ عَلَيْنَا رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ الشَّعَرِ لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ السَّفَرِ وَلَا يَعْرِفُهُ مِنَّا أَحَدٌ حَتَّى جَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَيْهِ إِلَى رُكْبَتَيْهِ وَوَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ وَقَالَ يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِسْلَامِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ وَتَحُجَّ الْبَيْتَ إِنْ اسْتَطَعْتَ إِلَيْهِ سَبِيلًا قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَعَجِبْنَا لَهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِيمَانِ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِحْسَانِ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ السَّاعَةِ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ أَمَارَتِهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ قَالَ ثُمَّ انْطَلَقَ فَلَبِثْتُ مَلِيًّا ثُمَّ قَالَ لِي يَا عُمَرُ أَتَدْرِي مَنْ السَّائِلُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّهُ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْغُبَرِيُّ وَأَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ وَأَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ قَالُوا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ مَطَرٍ الْوَرَّاقِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ قَالَ لَمَّا تَكَلَّمَ مَعْبَدٌ بِمَا تَكَلَّمَ بِهِ فِي شَأْنِ الْقَدَرِ أَنْكَرْنَا ذَلِكَ قَالَ فَحَجَجْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَجَّةً وَسَاقُوا الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ كَهْمَسٍ وَإِسْنَادِهِ وَفِيهِ بَعْضُ زِيَادَةٍ وَنُقْصَانُ أَحْرُفٍ و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ غِيَاثٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ وَحُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَا لَقِينَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَذَكَرْنَا الْقَدَرَ وَمَا يَقُولُونَ فِيهِ فَاقْتَصَّ الْحَدِيثَ كَنَحْوِ حَدِيثِهِمْ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَفِيهِ شَيْءٌ مِنْ زِيَادَةٍ وَقَدْ نَقَصَ مِنْهُ شَيْئًا و حَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ
हमरा के बतवले बा [अबू खतसामाह जुहैर बिन हर्ब] हमनी के [वाकी'] से [कहमस] से [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] से [याह्या बिन या'मर] से बतवले बाड़े। -एक अउर रिवायत में कहल गइल बा- आ हमनी के बतवले बा [उबैदुल्लाह बिन मुअदज अल-अनबरी] आ ई हदीस ह, बता दिहले बाड़न [हमार पिता] हमनी के [कहमस] से [इब्न बुराइदा] से [याह्या बिन या’मर] से बतवले बाड़न कि ऊ कहले बाड़न कि, ‘बसराह में सबसे पहिले किस्मत के चर्चा करे वाला व्यक्ति मा’बाद अल-जुहानी रहले, एहसे हम आ हुमैद बिन अब्दुररहमान अल-हिम्यारी हज भा उमरा पर चल गइलन, तब हम कहनी कि अगर हमनी के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कवनो साथी से भेंट होखे के बा त हमनी के उनुका से कुछ अइसन बात पूछब जा जवन ऊ लोग कहत रहे जवन कि किस्मत से जुड़ल रहे’. त [अब्दुल्लाह बिन उमर] के हमनी खातिर तौफीक -अल्लाह- दिहल गईल, जबकि उ मस्जिद में घुसत रहले। तब हम आ हमार दोस्त उनकर सामना कइनी जा, हमनी में से एगो उनका दाहिना ओर आ दोसरका बाईं ओर। तब हम सोचनी कि हमार दोस्त हमरा खातिर बात करी, त हम कहनी, 'हे अबू अब्दुररहमान, साँचहू हमनी के देखले बानी जा कि एगो लोग कुरान पढ़त बा आ ज्ञान के तलाश करत बा, आ फेर दावा करत बा कि कवनो किस्मत नइखे, आ ओह लोग के बात नया बा - जवना से पहिले किस्मत भा अल्लाह के ज्ञान नइखे -' त [अब्दुल्लाह बिन उमर] जवाब दिहलन, 'जब रउआ एह लोग से मिलब त ओह लोग के सूचित करीं कि हम ओह लोग से मुक्त बानी, आ कि ऊ लोग हमरा से मुक्त बा. आ जवना के नाम से अल्लाह के सेवक कसम खात बाड़े कि अगर रउरा में से केहू उहुद पहाड़ निहन सोना खर्च करी त ओकर दान तब तक स्वीकार ना होईत जब तक उ नियति में विश्वास ना करीत, नीमन अवुरी बाउर दुनो।' उ कहले कि, 'तब उ हदीस के बखान करे लगले अवुरी कहले कि, [उमर बिन अल-खत्ताब] कहले कि, हमनी के एक बेर रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के संगे रहनी, अवुरी हमनी के लगे एगो आदमी आईल, जेकर कपड़ा बहुत सफेद रहे, बाल बहुत करिया रहे अवुरी उनुका प कवनो यात्रा के निशान ना लउकत रहे।' हमनी में से केहू उनका के ना चिन्ह पवलस, जब तक कि उ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लगे ना पहुंचले अवुरी घुटना से घुटना टेक के कहले, 'हे मुहम्मद, हमरा के इस्लाम के बारे में जानकारी दिही?' अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) जवाब दिहले: 'गवाही कि अल्लाह के अलावे अवुरी कवनो देवता नईखे अवुरी मुहम्मद उनुकर सेवक अवुरी रसूलुल्लाह हवे, नमाज के स्थापना करेले, जकात देवेले, अवुरी रमजान के रोजा रखेले, अवुरी मकान के तीर्थ यात्रा करेले, जदी आप ओकरा के यात्रा करे में सक्षम बानी।' ऊ कहले, 'तू सही कहत बाड़ू।' उमर कहले कि, 'त हमनी के उनुका प हैरान रहनी, काहेंकी उ एकरा बारे में पूछले अवुरी एकर पुष्टि कईले।' ऊ फेरु पूछले कि एह आस्था के बारे में बताईं? ' उ जवाब दिहले: 'तू लोग अल्लाह, उनकर फरिश्ता, उनकर किताब, उनकर रसूलुल्लाह, अंतिम दिन, आ अच्छा आ बुरा भाग्य पर विश्वास करेनी'। ऊ कहले, 'तू सही कहत बाड़ू'। पूछले कि इहसान के बारे में बताईं? ' उ जवाब देले: 'तू अल्लाह के अईसन इबादत करेनी जईसे कि आप उनुका के देखतानी, त जदी आप उनुका के ना देखब त सचमुच उ आपके देखतारे'। ऊ फेरु पूछले कि आखिरी दिन कब होई? ' उ जवाब दिहले: 'जे पूछल जाला, उ पूछे वाला से बढ़िया ना जानेला।' पूछले-तब संकेत के बारे में बताईं? ' उ जवाब दिहले: 'अगर कवनो गुलाम अपना मालिक के बच्चा के जन्म देवे, अवुरी आप अयीसन आदमी के देखब जवन कि नंगे पांव, नंगा, गरीब, बकरी चरावे वाला होखे, लेकिन इमारत बनावे में घमंड करेले'। फेरु उ चल गईले। त हम तबो हैरान रहनी तब उ कहले; 'हे उमर, रउरा मालूम बा कि सवाल करे वाला के ह?' हम जवाब देनी कि 'अल्लाह अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह एकरा से जादे जानत बाड़े'। उ कहले कि, 'उ त जिब्राईल हवे, उ आपके धार्मिक ज्ञान के बारे में सिखावे खाती आपके लगे आईल रहले''। इ हमनी के बतावल गईल बा [मुहम्मद बिन उबैद अल-घुबारी] अवुरी [अबू कामिल अल-जहदरी] अवुरी [अहमद बिन अब्दाह] के उ लोग कहले बाड़े, हमनी के [हम्मद बिन यजीद] [मथर अल वाराक] से [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] से [याह्या बिन या'मर] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े कि, 'जब मा'बाद कुछ कहले रहले कि उ मामला के बारे में कहले रहले किस्मत, तब हम एकरा से इनकार कईनी'। उ फेर कहले कि, 'तब हम हुमैद बिन अब्दुररहमान अल-हिम्यारी के संगे हज कईनी'। ओकरा बाद उ लोग कहमास हदीस के मतलब के संगे हदीस के जिक्र कईले। एहमें कुछ अतिरिक्त आ गायब अक्षर बा. आ हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन हातिम] हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन सईद अल कथथान] हमनी के बतवले बाड़े [उस्मान बिन घियात] हमनी के [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] [याह्या बिन या'मर] से बतवले बाड़े अवुरी [हुमैद बिन अब्दुररहमान] दुनो लोग कहले कि, 'हमनी के मुलाकात [अब्दुल्लाह बिन उमर] से भईल, फिर हमनी के किस्मत के बारे में अवुरी एकरा बारे में उनुकर राय के जिक्र कईनी।' ऊ हदीस के ओइसहीं बतवले जइसे कि ऊ लोग [उमर] रदीअल्लाहु अन्हुमा से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले रहुवे आ एहमें जोड़ घटाव बा’. आ हमनी के बतवले बाड़े [हज्जाज बिन अश-स्याइर] हमनी के बतवले बाड़े [यूनुस बिन मुहम्मद] हमनी के [अल-मुअतामीर] [अपना पिता] से [याह्या बिन या'मर] से [इब्न उमर] से [उमर] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उनुका हदीस के उदाहरण के संगे बतवले बाड़े'।
Imam Muslim : 10
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ جَمِيعًا عَنْ ابْنِ عُلَيَّةَ قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ أَبِي حَيَّانَ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمًا بَارِزًا لِلنَّاسِ فَأَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكِتَابِهِ وَلِقَائِهِ وَرُسُلِهِ وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ الْآخِرِ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ وَلَا تُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ وَتُؤَدِّيَ الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَتَى السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ وَلَكِنْ سَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا إِذَا وَلَدَتْ الْأَمَةُ رَبَّهَا فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا كَانَتْ الْعُرَاةُ الْحُفَاةُ رُءُوسَ النَّاسِ فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا تَطَاوَلَ رِعَاءُ الْبَهْمِ فِي الْبُنْيَانِ فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ثُمَّ تَلَا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ } قَالَ ثُمَّ أَدْبَرَ الرَّجُلُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رُدُّوا عَلَيَّ الرَّجُلَ فَأَخَذُوا لِيَرُدُّوهُ فَلَمْ يَرَوْا شَيْئًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا جِبْرِيلُ جَاءَ لِيُعَلِّمَ النَّاسَ دِينَهُمْ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ حَدَّثَنَا أَبُو حَيَّانَ التَّيْمِيُّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ فِي رِوَايَتِهِ إِذَا وَلَدَتْ الْأَمَةُ بَعْلَهَا يَعْنِي السَّرَارِيَّ
आ हमनी के [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [जुहैर बिन हरब] के [इब्न उलायह] से सब कुछ बतवले बाड़न, [जुहैर] कहले बाड़न, हमनी के [इस्माइल बिन इब्राहिम] [अबू हयान] से [अबू ज़ुराह बिन अम्रू बिन जरीर] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़न कि ऊ कहले बाड़न कि ‘अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि अल्लाह एक रहले दिन लोग के मौजूदगी में तब एगो आदमी उनुका लगे आके कहत रहे कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इमान का ह? ' उ जवाब देले, 'तू अल्लाह, उनुका फरिश्ता, उनुका किताब प विश्वास करतानी, उनुका से मिले के घटना प विश्वास करतानी, उनुका रसूलन प विश्वास करतानी, अवुरी कयामत के अंतिम दिन प विश्वास करतानी'। पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह इस्लाम का ह? ' उ जवाब देले कि, 'इस्लाम इ ह कि आप अल्लाह के इबादत करीं अवुरी उनुका से कुछूओ शरीब मत करीं, फर्ज नमाज करीं, जकात के फर्ज करीं अवुरी रमजान में रोजा ना करीं।' उ फेर पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इहसान का ह? ' उ जवाब देले, 'तू अल्लाह के अईसन इबादत करेनी जईसे कि आप उनुका के देखतानी, त अगर आप उनुका के ना देखब त सचमुच उ आपके देखतारे'। उ फेर पुछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, कयाम के दिन कब होई? ' उ जवाब देले, 'जेकरा से एकरा बारे में पूछल जाला, ओकरा से पूछे वाला से जादे जवाब केहु नईखे जानत, लेकिन हम संकेत के बारे में बताईब; माने कि जब कवनो नौकरानी अपना मालिक के जनम देले। इहे एगो संकेत बा। -दूसरा- अगर कवनो नंगा, नंगे पांव इंसानियत के नेता बन जाव। इहे एगो संकेत बा। -तीसरा- अगर बकरी चरवाहा -बिल्डिंग- भवन में एक दूसरा से प्रतिस्पर्धा करे। उ पांच निशान में से एगो निशानी ह, एकरा के अल्लाह के अलावे केहु नईखे जानत,' फिर उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पढ़ले: '-वास्तव में अल्लाह, सिर्फ उनुका संगे क़यामत के दिन के ज्ञान बा; आ उहे बरखा करे वाला हवें, आ जानत बाड़न कि गर्भ में का बा। आ केहू ना जान सके - निश्चित रूप से - काल्हु ऊ का करीहें. आ केहू के पता नइखे चलत कि ऊ धरती पर कहाँ मर जइहें. दरअसल, अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वज्ञ-' -Qs. लुकमान : 34- के बा। तब ऊ आदमी फेरु से चल गइल. त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'ओह आदमी के वापस हमरा लगे बोलावल'। त फेर से फोन करे लगले, लेकिन कुछ ना देखाई देलस। त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि इ जिब्रिल ह, उ लोग के अपना धर्म के बारे में सिखावे आईल रहले''। हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन बिसीर] हमनी के [अबू हय्यान अत-तैमी] के एह सनाद से अयीसन हदीस बतवले बाड़े, सिर्फ रिवायत में इ वाक्य बा कि 'जब महिला नौकर अपना पति के जन्म देवेली, यानी उपपत्नी'।
Imam Muslim : 11
حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ عُمَارَةَ وَهُوَ ابْنُ الْقَعْقَاعِ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَلُونِي فَهَابُوهُ أَنْ يَسْأَلُوهُ فَجَاءَ رَجُلٌ فَجَلَسَ عِنْدَ رُكْبَتَيْهِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِسْلَامُ قَالَ لَا تُشْرِكُ بِاللَّهِ شَيْئًا وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِي الزَّكَاةَ وَتَصُومُ رَمَضَانَ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِيمَانُ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكِتَابِهِ وَلِقَائِهِ وَرُسُلِهِ وَتُؤْمِنَ بِالْبَعْثِ وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ كُلِّهِ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا الْإِحْسَانُ قَالَ أَنْ تَخْشَى اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنَّكَ إِنْ لَا تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَتَى تَقُومُ السَّاعَةُ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ وَسَأُحَدِّثُكَ عَنْ أَشْرَاطِهَا إِذَا رَأَيْتَ الْمَرْأَةَ تَلِدُ رَبَّهَا فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا رَأَيْتَ الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الصُّمَّ الْبُكْمَ مُلُوكَ الْأَرْضِ فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا وَإِذَا رَأَيْتَ رِعَاءَ الْبَهْمِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ فَذَاكَ مِنْ أَشْرَاطِهَا فِي خَمْسٍ مِنْ الْغَيْبِ لَا يَعْلَمُهُنَّ إِلَّا اللَّهُ ثُمَّ قَرَأَ { إِنَّ اللَّهَ عِنْدَهُ عِلْمُ السَّاعَةِ وَيُنَزِّلُ الْغَيْثَ وَيَعْلَمُ مَا فِي الْأَرْحَامِ وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ مَاذَا تَكْسِبُ غَدًا وَمَا تَدْرِي نَفْسٌ بِأَيِّ أَرْضٍ تَمُوتُ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ خَبِيرٌ } قَالَ ثُمَّ قَامَ الرَّجُلُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رُدُّوهُ عَلَيَّ فَالْتُمِسَ فَلَمْ يَجِدُوهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذَا جِبْرِيلُ أَرَادَ أَنْ تَعَلَّمُوا إِذْ لَمْ تَسْأَلُوا
हमनी के बतवले बाड़े [जुहैर बिन हर्ब] हमनी के [जरीर] [उमराह] से बतवले बाड़े - यानी इब्न अल-का'का' - [अबू ज़ुराह] से [अबू हुरैरा] से उ कहले बाड़े कि, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: 'तू हमरा से पूछऽ'। लेकिन उ लोग डेरा गईले अवुरी उनुका से पूछे से हिचकिचात रहले। त एगो आदमी आके घुटना के सोझा बईठ गईल, उ आदमी पूछलस कि हे रसूलुल्लाह इस्लाम का ह? ' उ जवाब देले कि, 'इस्लाम इ ह कि आप अल्लाह के संगे कवनो चीज़ से साझीदार ना करेनी, नमाज ना करेनी, जकात ना करेनी, अवुरी रमजान में रोजा ना राखेनी।' ऊ कहले, 'तू सही कहत बाड़ू'। फिर उ फेर पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इमान का ह? ' उ जवाब देले, 'तू अल्लाह, उनुकर फरिश्ता, उनुका किताब प विश्वास करतानी, उनुका से मिले के घटना प विश्वास करतानी, उनुका रसूलुल्लाह प विश्वास करतानी, अवुरी तू कयामत के दिन प विश्वास करतानी अवुरी सभके किस्मत प विश्वास करतानी'। ऊ कहले, 'तू सही कहत बाड़ू'। फेर उ फेर पूछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, इहसान का ह? ' उ जवाब दिहले, 'तू -खस्याह- अल्लाह से डेरात बाड़ू जइसे कि रउआ उनुका के देखत बानी, त अगर रउआ उनुका के ना देखब त सचमुच उ रउआ के देखत बाड़े'। ऊ कहले, 'तू सही कहत बाड़ू'। फेर पुछले कि हे अल्लाह के रसूलुल्लाह क़यामत के दिन कब होई? ' उ जवाब देले, 'जेकरा से एकरा बारे में पूछल जाला, ओकरा से पूछे वाला से जादे जवाब केहु नईखे जानत, लेकिन हम संकेत के बारे में बताईब; माने जब रउरा कवनो दासी के अपना मालिक के जन्म देत देखब. इहे एगो संकेत बा। -दूसरा- अगर रउआ कवनो नंगे पांव, बहिर, गूंगा आदमी के धरती पर -इंसान- के नेता बनत देखब। इहे एगो संकेत बा। -तीसरा- अगर रउआ बकरी चरवाहा के -बिल्डिंग- बिल्डिंग में एक दूसरा से ऊंचाई तक प्रतिस्पर्धा करत देखब। उहे गूढ़ता के पांच निशान में से एगो निशानी ह, एकरा के अल्लाह के अलावे केहु नईखे जानत,' तब उ पढ़ले: '-वास्तव में अल्लाह, क़यामत के दिन के ज्ञान सिर्फ उनुका संगे बा; आ उहे बरखा करे वाला हवें, आ जानत बाड़न कि गर्भ में का बा। आ केहू ना जान सके - निश्चित रूप से - काल्हु ऊ का करीहें. आ केहू के पता नइखे चलत कि ऊ धरती पर कहाँ मर जइहें. दरअसल, अल्लाह सर्वज्ञ, सर्वज्ञ-' -Qs. लुकमान : 34- के बा। तब ऊ आदमी उठल - पीछे हट गइल -, तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले: 'उनका के हमरा लगे बोलाईं! ' त ओकरा के खोजल गइल, बाकिर ऊ लोग ओकरा के ना मिलल. तब अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, इ आदमी जिब्राईल ह जवन चाहतारे कि आप धर्म सीख लीं, काहेंकी आप नईखी पूछत।
Imam Muslim : 12
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ جَمِيلِ بْنِ طَرِيفِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الثَّقَفِيُّ عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ فِيمَا قُرِئَ عَلَيْهِ عَنْ أَبِي سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ طَلْحَةَ بْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ يَقُولُا جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ أَهْلِ نَجْدٍ ثَائِرُ الرَّأْسِ نَسْمَعُ دَوِيَّ صَوْتِهِ وَلَا نَفْقَهُ مَا يَقُولُ حَتَّى دَنَا مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَإِذَا هُوَ يَسْأَلُ عَنْ الْإِسْلَامِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَمْسُ صَلَوَاتٍ فِي الْيَوْمِ وَاللَّيْلَةِ فَقَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهُنَّ قَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ وَصِيَامُ شَهْرِ رَمَضَانَ فَقَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهُ فَقَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ وَذَكَرَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الزَّكَاةَ فَقَالَ هَلْ عَلَيَّ غَيْرُهَا قَالَ لَا إِلَّا أَنْ تَطَّوَّعَ قَالَ فَأَدْبَرَ الرَّجُلُ وَهُوَ يَقُولُ وَاللَّهِ لَا أَزِيدُ عَلَى هَذَا وَلَا أَنْقُصُ مِنْهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْلَحَ إِنْ صَدَقَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ جَمِيعًا عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ جَعْفَرٍ عَنْ أَبِي سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا الْحَدِيثِ نَحْوَ حَدِيثِ مَالِكٍ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْلَحَ وَأَبِيهِ إِنْ صَدَقَ أَوْ دَخَلَ الْجَنَّةَ وَأَبِيهِ إِنْ صَدَقَ
हमनी के [कुतैबा बिन सईद बिन जमील बिन सरीफ बिन अब्दुल्लाह अत्स-त्साफी] से [मलिक बिन अनस] से जवन रिवाज उनुका ऊपर पढ़ल गईल रहे, [अबू सुहैल] से [उनकर पिता] से कहल गईल बा कि उ [थल्हाह बिन उबैदुल्लाह] के कहत सुनले रहले कि, 'नेजद के लोग में से एगो आदमी जेकर बाल अंत से खड़ा रहे, रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु के लगे आईल 'अलैहि वसल्लम, हम उनका आवाज के गुनगुनाहट सुननी, लेकिन उहाँ के कुछुओ ना समझ पवनी। जब तक उ रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के करीब ना हो गईले, पता चलल कि उ इस्लाम के बारे में पूछत रहले। त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले कि इस्लाम दिन रात में पांच बेर नमाज पढ़ रहल बा। ऊ फेरु पूछले कि का हमरा उनुका से अलगा अबहियों दायित्व बा? ' उ जवाब दिहले: 'ना, जब तक रमजान में सुन्नत के नमाज अवुरी रोजा ना करब'। उ पूछले कि का उनुका से अलगा हमार अबहियों दायित्व बा? ' उ जवाब दिहले: 'ना, जब तक कि आप सुन्नत के रोजा ना रखब, अवुरी अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनुका प जकात के फर्ज के जिक्र ना करीहे'। ऊ फेरु पूछले कि का हमरा उनुका से अलगा अबहियों दायित्व बा? ' उ जवाब दिहले: 'ना, जब तक कि सुन्नत भिक्षा ना करब'। कथावाचक कहले कि तब ऊ आदमी आपन छुट्टी वापस ले लिहलसि जबकि ऊ कहलसि कि अल्लाह के कसम हम एह से अधिका ना जोड़ब ना ओकरा से घटाईब’. त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'उ खुश होईहे, अगर उ सचमुच -करत-''। हमनी के [याह्या बिन अय्यूब] आ [कुतैबा बिन सईद] से [इस्माइल बिन जाफर] से [अबू सुहैल] से [उनकर पिता] से [तल्हाह बिन उबैदुल्लाह] से लेके नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से लेके नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मलिक के हदीस निहन ए हदीस के संगे सबकुछ बतवले बाड़े, सिर्फ उ कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम।' कहलस: 'उ खुश होई, -अपना बाप खातिर- अगर उ सही बा', या उ स्वर्ग में जाई, -अपना बाप खातिर- अगर उ सही बा''।
Imam Muslim : 13
حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ بُكَيْرٍ النَّاقِدُ حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ نُهِينَا أَنْ نَسْأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ شَيْءٍ فَكَانَ يُعْجِبُنَا أَنْ يَجِيءَ الرَّجُلُ مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ الْعَاقِلُ فَيَسْأَلَهُ وَنَحْنُ نَسْمَعُ فَجَاءَ رَجُلٌ مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ أَتَانَا رَسُولُكَ فَزَعَمَ لَنَا أَنَّكَ تَزْعُمُ أَنَّ اللَّهَ أَرْسَلَكَ قَالَ صَدَقَ قَالَ فَمَنْ خَلَقَ السَّمَاءَ قَالَ اللَّهُ قَالَ فَمَنْ خَلَقَ الْأَرْضَ قَالَ اللَّهُ قَالَ فَمَنْ نَصَبَ هَذِهِ الْجِبَالَ وَجَعَلَ فِيهَا مَا جَعَلَ قَالَ اللَّهُ قَالَ فَبِالَّذِي خَلَقَ السَّمَاءَ وَخَلَقَ الْأَرْضَ وَنَصَبَ هَذِهِ الْجِبَالَ آللَّهُ أَرْسَلَكَ قَالَ نَعَمْ قَالَ وَزَعَمَ رَسُولُكَ أَنَّ عَلَيْنَا خَمْسَ صَلَوَاتٍ فِي يَوْمِنَا وَلَيْلَتِنَا قَالَ صَدَقَ قَالَ فَبِالَّذِي أَرْسَلَكَ آللَّهُ أَمَرَكَ بِهَذَا قَالَ نَعَمْ قَالَ وَزَعَمَ رَسُولُكَ أَنَّ عَلَيْنَا زَكَاةً فِي أَمْوَالِنَا قَالَ صَدَقَ قَالَ فَبِالَّذِي أَرْسَلَكَ آللَّهُ أَمَرَكَ بِهَذَا قَالَ نَعَمْ قَالَ وَزَعَمَ رَسُولُكَ أَنَّ عَلَيْنَا صَوْمَ شَهْرِ رَمَضَانَ فِي سَنَتِنَا قَالَ صَدَقَ قَالَ فَبِالَّذِي أَرْسَلَكَ آللَّهُ أَمَرَكَ بِهَذَا قَالَ نَعَمْ قَالَ وَزَعَمَ رَسُولُكَ أَنَّ عَلَيْنَا حَجَّ الْبَيْتِ مَنْ اسْتَطَاعَ إِلَيْهِ سَبِيلًا قَالَ صَدَقَ قَالَ ثُمَّ وَلَّى قَالَ وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ لَا أَزِيدُ عَلَيْهِنَّ وَلَا أَنْقُصُ مِنْهُنَّ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَئِنْ صَدَقَ لَيَدْخُلَنَّ الْجَنَّةَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ هَاشِمٍ الْعَبْدِيُّ حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ عَنْ ثَابِتٍ قَالَ قَالَ أَنَسٌ كُنَّا نُهِينَا فِي الْقُرْآنِ أَنْ نَسْأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ شَيْءٍ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِهِ
हमनी के बतवले बाड़े [अमरू बिन मुहम्मद बिन बुकैर अन-नकिद] हमनी के बतवले बाड़े [हसीम बिन अल-कासिम अबू अन-नदलर] हमनी के [सुलेमान बिन अल-मुगिराह] से [तसाबीत] से [अनास बिन मलिक] से बतवले बाड़े उ कहले बाड़े कि, 'हमनी के अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कवनो बात के बारे में पूछे से रोकल गईल, यानी कि हमनी के आगमन के प्रशंसा।' रेगिस्तान के निवासी लोग के एगो आदमी के जे बुद्धिमान -बुद्धिमान- रहे, तब उ पूछलस, जब हमनी के सुननी जा, तब रेगिस्तान के लोग से एगो आदमी आके कहलस कि, 'हे मुहम्मद, राउर दूत हमनी के लगे आईल, फिर हमनी खातिर दावा कईले कि तू दावा कईले बाड़ू कि अल्लाह तोहरा के भेजले बाड़े'। रसुलुल्लाह जवाब दिहले: 'ठीक बा'। पूछले कि आकाश के रचले बा? ' रसुलुल्लाह जवाब दिहले : 'अल्लाह'। पूछले कि धरती के रचले बा? ' रसुलुल्लाह जवाब दिहले : 'अल्लाह'। ऊ पूछले कि एह पहाड़न के के स्थापित कइले बा आ ओहमें ऊ सब कुछ बनवले बा जवन ऊ बनवले बाड़न? ' उ जवाब देले : 'अल्लाह'। उ पूछले कि, 'त जे आकाश के रचना कईले, धरती के रचले अवुरी ए पहाड़ के स्थापित कईले, ओकर नाम से का अल्लाह आपके भेजले बाड़े? ' ऊ जवाब दिहले: 'हँ'। उ पूछले, 'रउरा दूत के दावा बा कि हमनी के दिन-रात में पांच बेर नमाज पढ़े के बाध्यता बा, -का इ बात सही बा-? ' उ जवाब दिहले: 'ठीक बा'। पूछले कि जे तोहरा के भेजले बा ओकर कसम, का अल्लाह तोहरा के अयीसन करे के आदेश देले रहले? ' ऊ जवाब दिहले: 'हँ'। पूछले, 'रउरा दूत के दावा बा कि किताब में हर साल रमजान के रोजा रखल फर्ज बा, - का ई साँच बा -? ' ऊ जवाब दिहले: 'हँ'। पूछले कि जे तोहरा के भेजले बा ओकर कसम, का अल्लाह तोहरा के अयीसन करे के आदेश देले रहले? ' ऊ जवाब दिहले: 'हँ'। उ पूछले कि, 'रउरा दूत के दावा बा कि हमनी के हज करे के बाध्यता बा, जवन कि उनुका राह प चले में सक्षम बा, -का इ बात सही बा-? ' ऊ जवाब दिहले, 'हँ, ठीके कहत बा'। फेर मुड़ के कहले कि, 'जे तोहरा के सच्चाई के संगे भेजले बा, ओकरा के हम ए फर्ज में ना जोड़ब अवुरी ना एकरा से घटाव'। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, "अगर उ जवन कहतारे उ सही बा त उ सचमुच स्वर्ग में प्रवेश करीहे।" हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुल्लाह बिन हसीम अल-अब्दी] हमनी के बतवले बाड़े [बहज] हमनी के [सुलेमान बिन अल-मुगिराह] [थाबीत] से बतवले बाड़े उ कहले कि, [अनास] कहले कि, 'हमनी के कुरान से अल्लाह के रसूलुल्लाह से कवनो बात पूछे से रोकल गईल'। ओकरा बाद उ एगो उदाहरण के संगे एगो हदीस लेके अईले।
Imam Muslim : 14
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ طَلْحَةَ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ أَنَّ أَعْرَابِيًّا عَرَضَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي سَفَرٍ فَأَخَذَ بِخِطَامِ نَاقَتِهِ أَوْ بِزِمَامِهَا ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَوْ يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي بِمَا يُقَرِّبُنِي مِنْ الْجَنَّةِ وَمَا يُبَاعِدُنِي مِنْ النَّارِ قَالَ فَكَفَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ نَظَرَ فِي أَصْحَابِهِ ثُمَّ قَالَ لَقَدْ وُفِّقَ أَوْ لَقَدْ هُدِيَ قَالَ كَيْفَ قُلْتَ قَالَ فَأَعَادَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَعْبُدُ اللَّهَ لَا تُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِي الزَّكَاةَ وَتَصِلُ الرَّحِمَ دَعْ النَّاقَةَ و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ قَالَا حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَوْهَبٍ وَأَبُوهُ عُثْمَانُ أَنَّهُمَا سَمِعَا مُوسَى بْنَ طَلْحَةَ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ هَذَا الْحَدِيثِ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर] हमनी के बतवले बाड़े [हमार पिता] हमनी के बतवले बाड़े [अमरू बिन उस्मान] हमनी के बतवले बाड़े [मूसा बिन तलहा] उ कहले बाड़े, हमरा के बतवले बाड़े [अबू अय्यूब], कि एगो बेदुइन अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के यात्रा में बाधा पहुंचवले रहले, ओकरा बाद उ अपना ऊंट के बागडोर ले लेले रहले ओकर बागडोर, तब ऊ कहले, 'हे रसुलुल्लाह, भा हे मुहम्मद, हमरा के कवनो अइसन बात बताईं जवन हमरा के स्वर्ग के नजदीक ले आवे आ कुछ अइसन जवन हमरा के नरक से दूर राखे? ' रवीर कहले, 'तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रुक गईले फिर अपना साथी लोग के देखले, फिर कहले: 'उनका तौफीक दिहल गईल बा या मार्गदर्शन दिहल गईल बा'। पूछले कि का कहनी? ' कथाकार कहले, 'तब ऊ दोहरवले'। त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, 'तू अल्लाह के इबादत करीं, उनुका के कवनो चीज़ से नाराज मत करीं, नमाज करीं, जकात करीं, अवुरी दोस्ती के संबंध जोड़ीं, फेर ऊंट के छोड़ दीं''। हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन हातिम] अवुरी [अब्दुररहमान बिन बिसीर] दुनो कहले बाड़े, बता देले बाड़े [बहज] हमनी के बतवले बाड़े [स्यूबाह] हमनी के [मुहम्मद बिन उस्मान बिन अब्दुल्लाह बिन मौहाब] अवुरी उनुका पिता [उस्मान] के बतवले बाड़े कि दुनो लोग [मूसा बिन तल्हाह] से [अबू अय्यूब] से नबी सल्लल्लाहु से बतावत सुनले बाड़े 'अलैहि वसल्लम के साथ कुछ अइसन हदीस'।
Imam Muslim : 15
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى التَّمِيمِيُّ أَخْبَرَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ ح و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ مُوسَى بْنِ طَلْحَةَ عَنْ أَبِي أَيُّوبَ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ دُلَّنِي عَلَى عَمَلٍ أَعْمَلُهُ يُدْنِينِي مِنْ الْجَنَّةِ وَيُبَاعِدُنِي مِنْ النَّارِ قَالَ تَعْبُدُ اللَّهَ لَا تُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِي الزَّكَاةَ وَتَصِلُ ذَا رَحِمِكَ فَلَمَّا أَدْبَرَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنْ تَمَسَّكَ بِمَا أُمِرَ بِهِ دَخَلَ الْجَنَّةَ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ أَبِي شَيْبَةَ إِنْ تَمَسَّكَ بِهِ
हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन याह्या अत-तमीमी] हमनी के [अबू अल-अहवाश] बतवले बाड़े। -एक अउर रिवायत में कहल गइल बा- आ हमनी के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] हमनी के [अबू अल-अहवाश] से [अबू इशाक] से [मूसा बिन तलहह] से [अबू अय्यूब] से बतवले बाड़न कि ऊ कहले बाड़न कि ‘एक आदमी नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लगे आइल, आ पूछले कि, ‘हमरा के एगो अइसन प्रथा देखाईं जवन हमरा के स्वर्ग के करीब ले आवे आ हमरा के नरक से दूर राखेला? ' उ जवाब दिहले: 'तू अल्लाह के इबादत करीं, उनुका से कवनो चीज़ से शिर्क मत करीं, नमाज मत करीं, जकात करीं, अपना परिवार से संबंध बनाईं'। जब उ अलविदा कहले त रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले कि, "जदी उ जवन काम करे के आदेश दिहल गईल बा, ओकरा प अडिग रही त उ जरूर स्वर्ग में प्रवेश करी।" आ [इब्न अबू स्याइबा] के एगो इतिहास में ‘अगर ऊ एकरा से चिपकल रहसु’.
Imam Muslim : 16
و حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ إِسْحَقَ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي زُرْعَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ أَعْرَابِيًّا جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ دُلَّنِي عَلَى عَمَلٍ إِذَا عَمِلْتُهُ دَخَلْتُ الْجَنَّةَ قَالَ تَعْبُدُ اللَّهَ لَا تُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا وَتُقِيمُ الصَّلَاةَ الْمَكْتُوبَةَ وَتُؤَدِّي الزَّكَاةَ الْمَفْرُوضَةَ وَتَصُومُ رَمَضَانَ قَالَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا أَزِيدُ عَلَى هَذَا شَيْئًا أَبَدًا وَلَا أَنْقُصُ مِنْهُ فَلَمَّا وَلَّى قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى رَجُلٍ مِنْ أَهْلِ الْجَنَّةِ فَلْيَنْظُرْ إِلَى هَذَا
आ हमरा के बतवले बाड़न [अबू बकर बिन इशाक] हमनी के बतवले बाड़न [अफ्फान] हमनी के बतवले बाड़न [वहैब] हमनी के [याह्या बिन सईद] के [अबू ज़ुराह] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़न कि एगो बेदुइन अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रसूलुल्लाह के लगे आके कहले बाड़न कि हे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, हमरा के कवन देखाईं करम अगर हम ओकर अमल करीं। का हम स्वर्ग में चलब? ' उ जवाब दिहले: 'तू अल्लाह के इबादत करीं, उनुका से कवनो चीज़ से शिर्क मत करीं, फर्ज नमाज करीं, फर्ज जकात करीं, अवुरी रमजान में रोजा राखी।' ऊ कहले कि, 'जेकर हाथ में हमार आत्मा बा, ओकरा से हम हमेशा खातिर एह में एक बिट ना जोड़ब ना ओकरा से घटाव'। जब उ अलविदा कहले त अल्लाह के रसूलुल्लाह कहले कि, "जेकरा स्वर्ग के लोग से कवनो आदमी के देखे के बा, उ ओकरा के देखे।"
Imam Muslim : 17
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَاللَّفْظُ لِأَبِي كُرَيْبٍ قَالَا حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَ أَتَى النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ النُّعْمَانُ بْنُ قَوْقَلٍ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ إِذَا صَلَّيْتُ الْمَكْتُوبَةَ وَحَرَّمْتُ الْحَرَامَ وَأَحْلَلْتُ الْحَلَالَ أَأَدْخُلُ الْجَنَّةَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ و حَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ وَالْقَاسِمُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ قَالَا حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى عَنْ شَيْبَانَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ وَأَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ قَالَ قَالَ النُّعْمَانُ بْنُ قَوْقَلٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ بِمِثْلِهِ وَزَادَا فِيهِ وَلَمْ أَزِدْ عَلَى ذَلِكَ شَيْئًا
हमनी के बतवले बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] आ [अबू कुरैब] आ अबू कुरैब के लफाझन्या, दुनो लोग कहले बा, हमनी के [अबू मुअवियाह] से [अल-अमासी] से [अबू सुफियान] से [जाबीर] से बतवले बा उ कहले कि, 'अन-नुमान बिन कौकल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आके पूछले, 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, जब हम फर्ज नमाज पढ़त बानी, हरम होखे वाला चीज के मना करीं आ हलाल होखे के अनुमति देत बानी त का सोचत बानी कि हम स्वर्ग जइब? ' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले: 'हाँ'। आ हमरा के बतवले बा [हज्जाज बिन अश-स्याइर] आ [अल-कासिम बिन जकरिया’] दुनु जने कहले बाड़न, हमनी के [उबैदुल्लाह बिन मूसा] से [स्याइबान] से [अल-अमासी] से [अबू सालिह] से आ [अबू सुफयान] [जबीर] से बतवले बाड़न कि ऊ कहले बाड़न कि अननुमान बिन कौकल कहले बाड़न, ‘हे अल्लाह के रसूलुल्लाह’, अइसनका के साथे रिपोर्ट, खाली ऊ जोड़त बाड़न कि 'आ हम ओहमें एक आयोटा ना जोड़ब'.
Imam Muslim : 18
و حَدَّثَنِي سَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَعْيَنَ حَدَّثَنَا مَعْقِلٌ وَهُوَ ابْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَرَأَيْتَ إِذَا صَلَّيْتُ الصَّلَوَاتِ الْمَكْتُوبَاتِ وَصُمْتُ رَمَضَانَ وَأَحْلَلْتُ الْحَلَالَ وَحَرَّمْتُ الْحَرَامَ وَلَمْ أَزِدْ عَلَى ذَلِكَ شَيْئًا أَأَدْخُلُ الْجَنَّةَ قَالَ نَعَمْ قَالَ وَاللَّهِ لَا أَزِيدُ عَلَى ذَلِكَ شَيْئًا
हमरा [सलमाह बिन स्याबीब] से रिवायत बा कि [अल-हसन बिन अ’यान] हमनी के [मा’किल] - यानी इब्न उबैदुल्लाह - से [अबू अज़-जुबैर] से [जाबीर] से रिवायत कईले कि एगो आदमी अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) से पूछले कि, 'अगर हम फर्ज नमाज, रोजा रमजान, बनाईं त आपके का लागत बा।' जवन जायज बा ओकरा के जरुरी बा, आ जवन मना बा ओकरा के मना कर दीं, बाकिर हम ओहमें कुछ ना जोड़ब, का हम जन्नत में प्रवेश करब?' अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जवाब दिहले: 'हाँ'। कहलन कि अल्लाह के कसम हम ओहमें कुछ ना जोड़ब.
Imam Muslim : 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ يَعْنِي سُلَيْمَانَ بْنَ حَيَّانَ الْأَحْمَرَ عَنْ أَبِي مَالِكٍ الْأَشْجَعِيِّ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسَةٍ عَلَى أَنْ يُوَحَّدَ اللَّهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَصِيَامِ رَمَضَانَ وَالْحَجِّ فَقَالَ رَجُلٌ الْحَجُّ وَصِيَامُ رَمَضَانَ قَالَ لَا صِيَامُ رَمَضَانَ وَالْحَجُّ هَكَذَا سَمِعْتُهُ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन नुमैर अल हमदानी] हमनी के [अबू खालिद] - यानी सुलेमान बिन हयान अल अहमर - से [अबू मलिक अल-असीजाई] से [सअद बिन उबैदा] से [इब्न उमर] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि अल्लाम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े कि: 'इस्लाम पांच प बनल बा।' नींव : यानी कि अल्लाह एकजुट होखस, नमाज स्थापित करस, जकात, रमजान के रोजा, आ हज पूरा करस। एगो आदमी पूछलस कि हज आ -फिर- रमजान के रोजा का होला’। उ जवाब दिहले: 'ना, रमजान के रोजा अवुरी -फिर- हज'। एह तरह से हम एकरा के अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुननी।
Imam Muslim : 20
و حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ الْعَسْكَرِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّاءَ حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ طَارِقٍ قَالَ حَدَّثَنِي سَعْدُ بْنُ عُبَيْدَةَ السُّلَمِيُّ عَنْ ابْنِ عُمَرَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسٍ عَلَى أَنْ يُعْبَدَ اللَّهُ وَيُكْفَرَ بِمَا دُونَهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَحَجِّ الْبَيْتِ وَصَوْمِ رَمَضَانَ
हमनी के बतवले बाड़े [सहल बिन उस्मान अल-अस्करी] हमनी के बतवले बाड़े [याह्या बिन जकरिया] हमनी के बतवले बाड़े [सअद बिन तारिक] उ कहले बाड़े, हमरा के [सअद बिन उबैदा अस-सुलामी] से [इब्न उमर] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले बाड़े: 'इस्लाम के नींव पांच नींव प भईल रहे: अर्थात कि अल्लाह हो पूजा कइल जाला आ कि दोसरा चीजन के बदनाम कइल जाव, नमाज स्थापित कइल जाव, जकात पूरा कइल जाव, बैतुल्लाह के तीर्थयात्रा कइल जाव, आ रमजान में रोजा राखल जाव.