Imam Muslim : 21
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا عَاصِمٌ وَهُوَ ابْنُ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَحَجِّ الْبَيْتِ وَصَوْمِ رَمَضَانَ
हमसे कहिन [उबैदुल्लाह बिन मुआज़] हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] हमसे कहिन हैं [अशिम] - अर्थात् इब्नू मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्ला बिन उमर - [अपने पिता] से उ कहिन; [अब्दुल्लाह] ने कहा, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'इस्लाम पांच नींवों पर बना है: अर्थात् ई गवाही है कि कौनो भगवान नाहीं है -जेका पूजा करै का अधिकार है- लेकिन अल्लाह, कि मुहम्मद ओकर सेवक अऊर दूत है, नमाज स्थापित करत है, जकात देत है, बउल्लाह के उपवास के दौरान तीर्थयात्रा करत है, अऊर रमजान'।
Imam Muslim : 22
و حَدَّثَنِي ابْنُ نُمَيْرٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا حَنْظَلَةُ قَالَ سَمِعْتُ عِكْرِمَةَ بْنَ خَالِدٍ يُحَدِّثُ طَاوُسًا أَنَّ رَجُلًا قَالَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَلَا تَغْزُو فَقَالَ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ الْإِسْلَامَ بُنِيَ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَصِيَامِ رَمَضَانَ وَحَجِّ الْبَيْتِ
अऊर हमसे कहिके [इब्न नुमीर] हमसे कहिन रहैं [मेरे पिता] हमसे कहिन रहैं [हंजलाह] उ कहिन, 'मैंने [इकरीमा बिन खालिद] का थावस से हदीस बतावत सुना है कि एक आदमी [अब्दुल्लाह बिन उमर] से कहिस, 'तुम काहे नाहीं लड़त हौ? ' उ जवाब दिहिन, 'वास्तव मा, हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा, इस्लाम के स्थापना पाँच नींव पर कीन गै रही: गवाही कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, नमाज स्थापित करब, जकात देब, रमजान के दौरान रोजा रखब अऊर बैतउल्लाह के तीर्थयात्रा करब'।
Imam Muslim : 23
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ ح و حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى وَاللَّفْظُ لَهُ أَخْبَرَنَا عَبَّادُ بْنُ عَبَّادٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ قَدِمَ وَفْدُ عَبْدِ الْقَيْسِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا هَذَا الْحَيَّ مِنْ رَبِيعَةَ وَقَدْ حَالَتْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ كُفَّارُ مُضَرَ فَلَا نَخْلُصُ إِلَيْكَ إِلَّا فِي شَهْرِ الْحَرَامِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ نَعْمَلُ بِهِ وَنَدْعُو إِلَيْهِ مَنْ وَرَاءَنَا قَالَ آمُرُكُمْ بِأَرْبَعٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ الْإِيمَانِ بِاللَّهِ ثُمَّ فَسَّرَهَا لَهُمْ فَقَالَ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَأَنْ تُؤَدُّوا خُمُسَ مَا غَنِمْتُمْ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالنَّقِيرِ وَالْمُقَيَّرِ زَادَ خَلَفٌ فِي رِوَايَتِهِ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَعَقَدَ وَاحِدَةً
हमसे कहिन है [खलफ बिन हिशम] हमसे [हम्मद बिन जैद] [अबू जमराह] से कहिन है, उ कहिन, हम [इब्न अब्बास] सुनेन। -एक अउर रिवायत मा बतावा गा है- अऊर हमका [यह्या बिन यह्या] बताइस है अऊर ई लफाज़ ओकर है, हमका [अब्बाद बिन अब्बाद] [अबू जमरा] से [इब्न अब्बास] से बताइस है, उ कहिन, 'अब्दुल कैस' दूत रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के पास गें अऊर उइ कहिन, रसूलुल्लाह, रसूलुल्लाह, ई गाँव के हिस्सा मा है रबीअह जनजाति, अऊर वास्तव मा मुदलर काफिर हमरे अऊर तोहरे बीच खड़ा अहैं, जेहिसे हम हराम महीना के अलावा तोहसे सुरक्षित नाहीं रह सकित, एहसे हमका एक हुकुम का पालन करै का आदेश देई अऊर हम अपने पीछे वालेन का प्रचार करब'। उ कहिन: 'मैं तोहका चार चीजन से आज्ञा देत हउँ अऊर चार चीजन से तोहका मना करत हउँ: अर्थात् अल्लाह मा विश्वास,' फिर उइ ओनके लिए एकर व्याख्या किहिन, कहिन: 'गवाही दइ द्या कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा के लायक - नाहीं है अऊर मुहम्मद अल्लाह के दूत हैं, नमाज स्थापित करत हैं, जकात देत हैं अऊर युद्ध के लूट के एक-फिफ्ट देत हैं। अऊर मैं तोहका मना करत हउँ कि अद-दुबा, अल-हंतम, एक नकीर अऊर अल-मुकय्यार मा दबाया शराब न बनावा। खलफ ने अपने इतिहास मा जोड़ा, 'गवाही कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा के लायक - नाहीं है। अऊर एक बार बाँधौ'।
Imam Muslim : 24
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَأَلْفَاظُهُمْ مُتَقَارِبَةٌ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ و قَالَ الْآخَرَانِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قَالَ كُنْتُ أُتَرْجِمُ بَيْنَ يَدَيْ ابْنِ عَبَّاسٍ وَبَيْنَ النَّاسِ فَأَتَتْهُ امْرَأَةٌ تَسْأَلُهُ عَنْ نَبِيذِ الْجَرِّ فَقَالَ إِنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ أَتَوْا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ الْوَفْدُ أَوْ مَنْ الْقَوْمُ قَالُوا رَبِيعَةُ قَالَ مَرْحَبًا بِالْقَوْمِ أَوْ بِالْوَفْدِ غَيْرَ خَزَايَا وَلَا النَّدَامَى قَالَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا نَأْتِيكَ مِنْ شُقَّةٍ بَعِيدَةٍ وَإِنَّ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ هَذَا الْحَيَّ مِنْ كُفَّارِ مُضَرَ وَإِنَّا لَا نَسْتَطِيعُ أَنْ نَأْتِيَكَ إِلَّا فِي شَهْرِ الْحَرَامِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ فَصْلٍ نُخْبِرْ بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا نَدْخُلُ بِهِ الْجَنَّةَ قَالَ فَأَمَرَهُمْ بِأَرْبَعٍ وَنَهَاهُمْ عَنْ أَرْبَعٍ قَالَ أَمَرَهُمْ بِالْإِيمَانِ بِاللَّهِ وَحْدَهُ وَقَالَ هَلْ تَدْرُونَ مَا الْإِيمَانُ بِاللَّهِ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَأَنْ تُؤَدُّوا خُمُسًا مِنْ الْمَغْنَمِ وَنَهَاهُمْ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ قَالَ شُعْبَةُ وَرُبَّمَا قَالَ النَّقِيرِ قَالَ شُعْبَةُ وَرُبَّمَا قَالَ الْمُقَيَّرِ وَقَالَ احْفَظُوهُ وَأَخْبِرُوا بِهِ مِنْ وَرَائِكُمْ و قَالَ أَبُو بَكْرٍ فِي رِوَايَتِهِ مَنْ وَرَاءَكُمْ وَلَيْسَ فِي رِوَايَتِهِ الْمُقَيَّرِ و حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي ح و حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي قَالَا جَمِيعًا حَدَّثَنَا قُرَّةُ بْنُ خَالِدٍ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهَذَا الْحَدِيثِ نَحْوَ حَدِيثِ شُعْبَةَ وَقَالَ أَنْهَاكُمْ عَمَّا يُنْبَذُ فِي الدُّبَّاءِ وَالنَّقِيرِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ وَزَادَ ابْنُ مُعَاذٍ فِي حَدِيثِهِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلْأَشَجِّ أَشَجِّ عَبْدِ الْقَيْسِ إِنَّ فِيكَ خَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمُ وَالْأَنَاةُ
हमसे [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [मुहम्मद बिन अल-मुत्सना] अऊर [मुहम्मद बिन बसिसियार] अऊर ओनके लफाज़ एक दूसरे के करीब हैं, [अबू बकर] ने कहा, हमसे [घुंदर] [शुबा] से बतावा है जबकि बाकी दुइ लोग कहिन, हमसे [मुहम्मद बिन जाबह] हमसे [अहुबाह] बताइन है। जमराह] उ कहिन, 'मैं [इब्नू अब्बास] अऊर लोगन के बीच अनुवादक रहेन, तब एक औरत आई अऊर नबिज़ के रस के बारे मा पूछिस - एक तरह के शराब - जवन एक माटी के बर्तन मा संग्रहीत कीन जात रहा, तौ उ जवाब दिहिन, 'वास्तव मा, अब्द अल-कैस के दूत रसूलुल्लाह सल्लाह अलैह अलैह के पास आए, तब राहुल्लाह वल्लाह ने कहा: का ऊ दूत है - या ऊ लोग कौन हैं? - उइ जवाब दिहिन, 'रबिया'। उ कहिन: 'लोगन का - या दूत का - बिना कौनो संकोच या पछतावा के स्वागत करा'। रावी ने कहा कि उन्होंने कहा कि हे अल्लाह के रसूल बेशक हम बहुत दूर से आपके पास आए हैं। हमरे अऊर तोहरे बीच मुदलर काफिर हैं ताकि हम हराम महीनों के अलावा तोहरे पास नाहीं आ सकित, एहसे हमका कुछ अइसन फैसला करै का आदेश देई कि हम अपने नेतृत्व वाले लोगन का बता सकित है जेहिसे हम स्वर्ग मा प्रवेश कर सकित है'। रावी कहिन, 'त अल्लाह के रसूल ओनका चार चीजन का हुकुम दिहिन अऊर चार चीजन का मना किहिन'। रावी ने फिर कहा कि 'अल्लाह के रसूल ने उन्हें अकेले अल्लाह पर इमान रखने का आदेश दिया, 'क्या आप जानते हैं कि अल्लाह पर इमान रखना क्या है? ' उइ जवाब दिहिन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'गवाही दइ द्या कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है, अऊर मुहम्मद अल्लाह के दूत हैं, नमाज स्थापित करौ, जकात दौ, रमदलान का रोजा रखौ, अऊर घनिमा का पांचवां हिस्सा दौ, अऊर तोहका अद-दुबा`, अल-हंतम अऊर अल-मुजफत से मना करौ'। स्यूबाह ने कहा, 'शायद उ 'अन-नकीर' कहिन अऊर ई 'अल-मुकैयर' होइ सकत है, उ कहिन: 'उनके ऊपर नजर रखौ अऊर अपने लोगन का सूचित करौ'। अबू बकर ने अपने रिवायत में 'अल-मुकैयार' का जिक्र किए बिना 'जौन व्यक्ति का आप अपने पीछे ले जात हैं' का जिक्र किहिन। अऊर ई मोका बतावा गा है [उबैदुल्लाह बिन मुआद्ज] हमका [मेरे पिताजी] बताइस है। -एक अउर रिवायत मा बतावा गा है- अऊर उ हमसे कहिन है [नशर बिन अली अल-जहदलामी] उ कहिन, हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] दुइनौ जने कहिन, हमका [कुर्राह बिन खालिद] से [अबू जमराह] से [इब्न अब्बास] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हदीस के साथ इ हदीस के साथ कहिन हैं, जबकि हदीस: 'मैं तोहका अद-दुबा`, अन-नकीर, अल-हंतम अऊर अल-मुजफत मा बताई गई हर चीज से मना करत हउँ'। अऊर [इब्न मुआज़] ने [अपने पिता] से अपनी हदीस मा जोड़ा, उ कहिन, 'अऊर रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल-अस्याज अस्यज्ज अब्द अल-कैस से कहा: 'वास्तव मा तोहरे मा दुई चरित्र हैं जेका अल्लाह पसंद करत हैं, अर्थात् धैर्य अऊर सावधानी''।
Imam Muslim : 25
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مَنْ لَقِيَ الْوَفْدَ الَّذِينَ قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ عَبْدِ الْقَيْسِ قَالَ سَعِيدٌ وَذَكَرَ قَتَادَةُ أَبَا نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ فِي حَدِيثِهِ هَذَا أَنَّ أُنَاسًا مِنْ عَبْدِ الْقَيْسِ قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ إِنَّا حَيٌّ مِنْ رَبِيعَةَ وَبَيْنَنَا وَبَيْنَكَ كُفَّارُ مُضَرَ وَلَا نَقْدِرُ عَلَيْكَ إِلَّا فِي أَشْهُرِ الْحُرُمِ فَمُرْنَا بِأَمْرٍ نَأْمُرُ بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا وَنَدْخُلُ بِهِ الْجَنَّةَ إِذَا نَحْنُ أَخَذْنَا بِهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ آمُرُكُمْ بِأَرْبَعٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ اعْبُدُوا اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَصُومُوا رَمَضَانَ وَأَعْطُوا الْخُمُسَ مِنْ الْغَنَائِمِ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ عَنْ الدُّبَّاءِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ وَالنَّقِيرِ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ مَا عِلْمُكَ بِالنَّقِيرِ قَالَ بَلَى جِذْعٌ تَنْقُرُونَهُ فَتَقْذِفُونَ فِيهِ مِنْ الْقُطَيْعَاءِ قَالَ سَعِيدٌ أَوْ قَالَ مِنْ التَّمْرِ ثُمَّ تَصُبُّونَ فِيهِ مِنْ الْمَاءِ حَتَّى إِذَا سَكَنَ غَلَيَانُهُ شَرِبْتُمُوهُ حَتَّى إِنَّ أَحَدَكُمْ أَوْ إِنَّ أَحَدَهُمْ لَيَضْرِبُ ابْنَ عَمِّهِ بِالسَّيْفِ قَالَ وَفِي الْقَوْمِ رَجُلٌ أَصَابَتْهُ جِرَاحَةٌ كَذَلِكَ قَالَ وَكُنْتُ أَخْبَؤُهَا حَيَاءً مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ فَفِيمَ نَشْرَبُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فِي أَسْقِيَةِ الْأَدَمِ الَّتِي يُلَاثُ عَلَى أَفْوَاهِهَا قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أَرْضَنَا كَثِيرَةُ الْجِرْذَانِ وَلَا تَبْقَى بِهَا أَسْقِيَةُ الْأَدَمِ فَقَالَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ وَإِنْ أَكَلَتْهَا الْجِرْذَانُ قَالَ وَقَالَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِأَشَجِّ عَبْدِ الْقَيْسِ إِنَّ فِيكَ لَخَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمُ وَالْأَنَاةُ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَابْنُ بَشَّارٍ قَالَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ قَالَ حَدَّثَنِي غَيْرُ وَاحِدٍ لَقِيَ ذَاكَ الْوَفْدَ وَذَكَرَ أَبَا نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا قَدِمُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ غَيْرَ أَنَّ فِيهِ وَتَذِيفُونَ فِيهِ مِنْ الْقُطَيْعَاءِ أَوْ التَّمْرِ وَالْمَاءِ وَلَمْ يَقُلْ قَالَ سَعِيدٌ أَوْ قَالَ مِنْ التَّمْرِ
हमसे कहिन है [यह्या बिन अय्यूब] हमसे कहिन है [इब्न उलेय्याह] हमसे कहिन है [सैद बिन अबू अरुबाह] से [कतादाह] उ कहिन, 'उ व्यक्ति जे अब्दुल कैस के घेरे से दूत से मिला रहा जे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने आवा रहा, हमसे कहिस, [सैदह दलाम] [अबू सईद अल-खुदरी] से ई हदीस मा, कि अब्दुल कैस के बीच से लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का सामना किहिन अऊर कहिन, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, वास्तव मा हम रबिया जनजाति के गाँव वाले हैं, अऊर वास्तव मा मुदलर -काफिर हमरे अऊर आपके बीच खड़े हैं, ताकि हम हराम के आदेश के अलावा आपके पास - सुरक्षित रूप से नाहीं जा सकित हैं। एक आदेश का पालन करा ताकि हम अपने पीछे के लोगन का ओका प्रचार कर सकित है ताकि अगर हम ओसे चिपक जइब तौ हम ओके साथ स्वर्ग मा प्रवेश कर सकित है'। उ कहिन: 'मैं तोहका चार चीजन से हुकुम देत हउँ अऊर चार चीजन से मना करत हउँ: अर्थात्, अल्लाह के पूजा करौ, अऊर ओसे कुछौ से शर्क न करौ, नमाज पढ़ौ, जकात दौ, रमजान मा रोजा रखौ, अऊर घनिमा के कीमत का पांचवां हिस्सा दौ, अऊर मैं तोहका अद-दुबा`, अल-हंतम, अल-नजफ्त अऊर अन-नफ्फत मा शराब के प्रेस बनावै से मना करत हउँ। उन्होंने पूछा कि हे अल्लाह के पैगम्बर आपका अन-नकीर का ज्ञान क्या है? ' उ कहिन: 'एक पेड़ के तना उकेरा जात है - खोखला - फिर तुम ओमा खजूर डालत हौ'। कहिन कहिन, 'या उ कहिन: 'एक खजूर के पेड़ से। फिर तुम वहिमा पानी डारत हौ जब तक कि जब उबलत पानी शांत न होइ जाय, फिर तुम ओका तब तक पियत हौ जब तक कि तुममें से एक - या ओनमा से एक - वास्तव मा अपने चाचा का तलवार से न मार दे', उ कहिन, 'अऊर वहि समूह मा एक आदमी है जउन घायल भी है'। उन्होंने फिर कहा, 'मैंने इसे छुपाया था क्योकि मुझे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से शर्म आई, फिर मैंने पूछा, 'तो हम किस पात्र में पी सकत हैं, हे रसूल अल्लाह? ' उ जवाब दिहिन, 'एक टैन्ड चमड़ा के बर्तन मा जेकर मुँह बंद रहा'। उन्होंने पूछा कि 'हे रसूल अल्लाह, बेशक हमारी धरती चूहों से भरी हुई है, इसलिये तन किये गये चमड़े के बर्तनों में पेय नहीं बचा है,' तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'और भले ही चूहा खा जाय, और भले ही चूहा खा जाय, और भले ही चूहा खा जाय।' रावी ने कहा, 'अऊर अल्लाह के पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अस्यज्ज अब्दुल कैस से कहा: 'वास्तव में तुममें दुई गुण हैं जेका अल्लाह पसंद करत हैं, अर्थात्; धैर्य रखौ अऊर सावधान रहौ''। हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अल-मुत्सना] अऊर [इब्न बश्यार] दुइनौ कहिन, हमसे [इब्न अबू आदी] [सैद] से [कतदाह] से कहिन, हमसे कहिन कि न केवल एक कथावाचक दूत से मिला। अऊर [अबू नदलराह] [अबू सैद अल-खुदरी] से उल्लेख किहिन, कि दूत अब्दुल कैस जब [इब्न उलेया] जइसन हदीस के साथ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का सामना किहिन, त केवल वहिमा ई कहा गा रहा, 'अऊर वहिमा आप खजूर, या खजूर अऊर पानी के साथ मिलावा,' अऊर उ नाहीं कहिन, 'सैद के साथ कहिन,' तारीख''।
Imam Muslim : 26
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَكَّارٍ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو قَزَعَةَ أَنَّ أَبَا نَضْرَةَ أَخْبَرَهُ وَحَسَنًا أَخْبَرَهُمَا أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّ وَفْدَ عَبْدِ الْقَيْسِ لَمَّا أَتَوْا نَبِيَّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ جَعَلَنَا اللَّهُ فِدَاءَكَ مَاذَا يَصْلُحُ لَنَا مِنْ الْأَشْرِبَةِ فَقَالَ لَا تَشْرَبُوا فِي النَّقِيرِ قَالُوا يَا نَبِيَّ اللَّهِ جَعَلَنَا اللَّهُ فِدَاءَكَ أَوَ تَدْرِي مَا النَّقِيرُ قَالَ نَعَمْ الْجِذْعُ يُنْقَرُ وَسَطُهُ وَلَا فِي الدُّبَّاءِ وَلَا فِي الْحَنْتَمَةِ وَعَلَيْكُمْ بِالْمُوكَى
हमका बतावा है [मुहम्मद बिन बक्कर अल-बसरी] हमका [अबू अशिम] [इब्न जुरैज] से बताइस है। -एक अउर कथन मा कहा गा है-, अऊर उ मोहि [मुहम्मद बिन रफी'] बताइन अऊर लफाज़ उनकर रहा। हमसे कहिन है [अब्दुर्राज्जाक] हमसे कहिन है [इब्न जुरैज] उ कहिन, हमसे कहिन है [अबू कजाआह] कि [अबू नदलराह] ने ई रिपोर्ट किहिन, अऊर अल-हसन ने ओन दुइनौ से रिपोर्ट किहिन, कि [अबू सईद अल-खुदरी] ने ओनसे रिपोर्ट किहिन, कि दूत अब्दुल कैस जब उ अल्लाह वल्लाह वल्लाह के पैगम्बर के पास आए तौ कहिन, 'हे अल्लाह के पैगम्बर, अल्लाह हमका आपन फिरौती बनाय, का पेय हमरे लिए अच्छा है?' उ जवाब दिहिन: 'अन-नकीर मा न पिया'। उन्होंने पूछा कि हे अल्लाह के पैगम्बर अल्लाह हमको तुम्हारा फिरौती बना दे, आपको पता है कि अन-नकीर क्या है? उ जवाब दिहिन: 'हाँ, पेड़ के तना के बीच उकेरा जात है, अऊर तुमका अद-दुबा या अल-हंतम मा नाहीं पीना चाही, अऊर तुमका सिर ढँक के बर्तन मा संग्रहीत पेय पदार्थ पीना चाही'।
Imam Muslim : 27
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَإِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ جَمِيعًا عَنْ وَكِيعٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ زَكَرِيَّاءَ بْنِ إِسْحَقَ قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ قَالَ أَبُو بَكْرٍ رُبَّمَا قَالَ وَكِيعٌ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ مُعَاذًا قَالَ بَعَثَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّكَ تَأْتِي قَوْمًا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ فَادْعُهُمْ إِلَى شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَأَعْلِمْهُمْ أَنَّ اللَّهَ افْتَرَضَ عَلَيْهِمْ خَمْسَ صَلَوَاتٍ فِي كُلِّ يَوْمٍ وَلَيْلَةٍ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَأَعْلِمْهُمْ أَنَّ اللَّهَ افْتَرَضَ عَلَيْهِمْ صَدَقَةً تُؤْخَذُ مِنْ أَغْنِيَائِهِمْ فَتُرَدُّ فِي فُقَرَائِهِمْ فَإِنْ هُمْ أَطَاعُوا لِذَلِكَ فَإِيَّاكَ وَكَرَائِمَ أَمْوَالِهِمْ وَاتَّقِ دَعْوَةَ الْمَظْلُومِ فَإِنَّهُ لَيْسَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ اللَّهِ حِجَابٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ السَّرِيِّ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ بْنُ إِسْحَقَ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ عَنْ زَكَرِيَّاءَ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ فَقَالَ إِنَّكَ سَتَأْتِي قَوْمًا بِمِثْلِ حَدِيثِ وَكِيعٍ
हमका [अबू बकर बिन अबू सैबा] अऊर [अबू कुरैब] अऊर [इशाक बिन इब्राहिम] सब [वाकी'] से बताइस है, [अबू बकर] कहिन, हमका [वाकी'] से [जकरिया बिन इशाक] से कहिन है, उ कहिन, हमका [यह्या बिन अब्दुल्ला बिन शैफी] [यह्या बिन अब्दुल्लाह बिन शैफी] [अबूस] से अब्बास [इशाक] से कहिन है। [मुआज़ बिन जबल], अबू बकर ने कहा, 'शायद,' वाकी ने कहा, इब्न अब्बास से, कि मुआज़ ने कहा, 'रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे भेजा है। उ कहिन: 'वास्तव मा, तुम किताब के लोगन के पास आबै, तौ ओनका गवाही देय का आमंत्रित करा कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा के लायक - नाहीं है, अऊर मैं अल्लाह का दूत हौं। अगर ई बात मा तुम्हार बात मानत हैं तो बताओ कि अल्लाह ने इनके लिए हर दिन रात पांच बार नमाज पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। अगर उई ई मामला मा तोहार बात मानत हैं, तौ ओनका बतावा कि अल्लाह ओनके ऊपर अमीरन से लीन दान अऊर ओनके बीच गरीबन मा बांटि दिहिस है। अगर उइ इ तरह से तोहार बात मानत हैं, तौ तू ओनके कुलीन खजाना से दूर रहब। जेनके साथ अन्याय होत है ओनके दुआ से डरौ, काहे से कि ओनके अऊर अल्लाह के बीच मा कौनो बाधा नाहीं है''। हमसे कहिस है [इब्न अबू उमर] हमसे कहिस है [बिसिर बिन अस-सारी] हमसे कहिस है [जकरिया बिन इशाक]। -एक अउर रिवायत मा बतावा गा है- अऊर हमका बतावा गा है कि [अब्द बिन हुमैद] हमसे [अबू अशिम] से [जकरिया बिन इशाक] से [यह्या बिन अब्दुल्ला बिन शैफी] से [अबू माबाद] से [इब्नू अब्बास] से कहिन है, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसलम मुलाद ने येदुइन ने कहा: तुम एक लोगन के पास आब्या'। जइसे कि वाकी के हदीस मा है'।
Imam Muslim : 28
حَدَّثَنَا أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ الْعَيْشِيُّ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا رَوْحٌ وَهُوَ ابْنُ الْقَاسِمِ عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ صَيْفِيٍّ عَنْ أَبِي مَعْبَدٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَمَّا بَعَثَ مُعَاذًا إِلَى الْيَمَنِ قَالَ إِنَّكَ تَقْدَمُ عَلَى قَوْمٍ أَهْلِ كِتَابٍ فَلْيَكُنْ أَوَّلَ مَا تَدْعُوهُمْ إِلَيْهِ عِبَادَةُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَإِذَا عَرَفُوا اللَّهَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنَّ اللَّهَ فَرَضَ عَلَيْهِمْ خَمْسَ صَلَوَاتٍ فِي يَوْمِهِمْ وَلَيْلَتِهِمْ فَإِذَا فَعَلُوا فَأَخْبِرْهُمْ أَنَّ اللَّهَ قَدْ فَرَضَ عَلَيْهِمْ زَكَاةً تُؤْخَذُ مِنْ أَغْنِيَائِهِمْ فَتُرَدُّ عَلَى فُقَرَائِهِمْ فَإِذَا أَطَاعُوا بِهَا فَخُذْ مِنْهُمْ وَتَوَقَّ كَرَائِمَ أَمْوَالِهِمْ
हमसे कहिन है [उमय्याह बिन बिस्तम अल-ऐसी] हमसे कहिन हैं [यजीद बिन जुराई`] हमसे कहिन हैं [रौह] - अर्थात् इब्न अल-कासिम - [इस्माइल बिन उमय्याह] से [यह्या बिन अब्दुल्लाह बिन शैफी] से [अबू माबाद] से [इब्न अब्बास रसूलुल्लाह अलैहुलाहुलाहुलाह] जब मुअद्ज यमन से, उ कहिन: 'वास्तव मा आप लोगन के सामना करत हई, तौ आप ओनके सामने पहली इच्छा अल्लाह अज्जा वा जल्ला के उपदेश देब, अगर उ अल्लाह का जानत हैं, तौ ओनसे कहौ कि अल्लाह ओनके लिए दिन अऊर रात मा पांच बार नमाज पढ़ब अनिवार्य कइ दिहिस है। अगर उइ इ तरह से तोहार बात मानत हैं, तौ ओनसे जकात लेइ अऊर ओनके कुलीन धन से डरौ'।
Imam Muslim : 29
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ لَمَّا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتُخْلِفَ أَبُو بَكْرٍ بَعْدَهُ وَكَفَرَ مَنْ كَفَرَ مِنْ الْعَرَبِ قَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ لِأَبِي بَكْرٍ كَيْفَ تُقَاتِلُ النَّاسَ وَقَدْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَدْ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَاللَّهِ لَأُقَاتِلَنَّ مَنْ فَرَّقَ بَيْنَ الصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ فَإِنَّ الزَّكَاةَ حَقُّ الْمَالِ وَاللَّهِ لَوْ مَنَعُونِي عِقَالًا كَانُوا يُؤَدُّونَهُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَقَاتَلْتُهُمْ عَلَى مَنْعِهِ فَقَالَ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَوَاللَّهِ مَا هُوَ إِلَّا أَنْ رَأَيْتُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ قَدْ شَرَحَ صَدْرَ أَبِي بَكْرٍ لِلْقِتَالِ فَعَرَفْتُ أَنَّهُ الْحَقُّ
हमसे कहिस है [कुतैबा बिन सईद] हमसे कहिस है [लैट्स बिन साद] से [उकैल] से [अज़-जुहरी] उ कहिन, हमसे [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उत्बाह बिन मसूद] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन, 'जब रसूलल्लाह सल्लाहु अलैहि वसलम का नियुक्त कीन गा रहा, अऊर ओनके बाद कैलिप बासलम का नियुक्त कीन गा रहा, अऊर अरबों के बीच से काफिरों ने कफिर किया, फिर [उमर बिन अल-खथब] ने अबू बकर से कहा, 'यह कैसे संभव है कि तुम मनुष्यन से लड़ो, जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'मुझे आदेश मिला कि मैं मनुष्यन से तब तक लड़ौ जब तक कि उ लोग न कहें, 'अल्लाह के पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है,' का कौनो भगवान नाहीं है - पूजा के लायक - लेकिन अल्लाह', तौ वास्तव मा उ आपन संपत्ति अऊर आत्मा का - मोर द्वारा हमला से - अधिकार के अलावा रखे अहै। इस्लाम, अऊर ओकर हिसाब अल्लाह पर छोड़ दीन गा है'। त [अबू बकर] कहिन, 'अल्लाह के कसम, मैं सचमुच उन लोगन से लड़ब जे नमाज अऊर जकात के बीच अंतर करत हैं, काहे से कि जकात - एक दावा - संपत्ति का अधिकार है। अल्लाह के कसम, अगर उइ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का भुगतान करै के बावजूद अपनी अनिच्छा के कारण मोका बाधा डालत हैं, तौ मैं ओनके अनिच्छा के कारण ओनसे लड़ब'। त [उमर बिन अल-खथब] कहिन, 'अल्लाह के कसम ई उ नाहीं है बल्कि कि हम देखेन कि अल्लाह ने अबू बकर के छाती खोल दिहिस रहा - ओनसे - तब हम जानेन कि उ सच रहा''।
Imam Muslim : 30
و حَدَّثَنَا أَبُو الطَّاهِرِ وَحَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى وَأَحْمَدُ بْنُ عِيسَى قَالَ أَحْمَدُ حَدَّثَنَا و قَالَ الْآخَرَانِ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَمَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمَ مِنِّي مَالَهُ وَنَفْسَهُ إِلَّا بِحَقِّهِ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ
अऊर ई मोका [अबू अथ-ताहिर] अऊर [हर्मलह बिन यह्या] अऊर [अहमद बिन ईसा] से कहिस है, [अहमद] कहिन, 'इ हमका बताइस है'। इ बीच, दुइ अउर लोग कहिन, 'उ हमसे [इब्न वाहब] कहिन हैं, उ कहिन, उ हमसे [यूनुस] [इब्न शिहाब] से कहिन हैं, उ कहिन, उ हमसे [सैद बिन अल-मुसैयब] बताइन हैं कि [अबू हुरैरा] ने उनका सूचित किहिन, कि अल्लाह के रसूल सल्लाह अलैहि वसलम ने कहा कि जब तक उ मनुष्य से उड़ान भरै का आदेश नाहीं दिहिन: 'कोई भगवान नाहीं है - पूजा के लायक - लेकिन अल्लाह', फिर जे कहे, 'कोई भगवान नाहीं है - पूजा के लायक - लेकिन अल्लाह', तब वाकई उ इस्लाम के अधिकार के अलावा - मोर हमला से आपन संपत्ति अऊर जीवन के रक्षा किहिस है, अऊर ओकर हिसाब अल्लाह पर छोड़ दीन गा है'।
Imam Muslim : 31
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ يَعْنِي الدَّرَاوَرْدِيَّ عَنْ الْعَلَاءِ ح و حَدَّثَنَا أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامَ وَاللَّفْظُ لَهُ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا رَوْحٌ عَنْ الْعَلَاءِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَعْقُوبَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَيُؤْمِنُوا بِي وَبِمَا جِئْتُ بِهِ فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ
हमसे कहिन है [अहमद बिन अब्दाह अदल-दलब्बी] हमसे [अब्दुल अजीज] -अर्थात अद-दरावर्दी- [अल-अला'] से कहिन हैं। -एक अउर रिवायत मा ई बतावा गा है- अऊर हमका [उमय्याह बिन बिस्तम] अऊर लफाज़ ओकरे बारे मा बतावा है, हमसे कहिस है [यजीद बिन जुराई] हमका [रौह] से [अल-अला' बिन अब्दुर्रहमान बिन याकूब] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से रसूलुल्लाह सल्लाह वल्लम से कहिस है, इका आदेश मिला रहा: मनुष्यन से तब तक लड़ै के लिए जब तक कि उ गवाही न दें कि कौनो भगवान का पूजा करै का अधिकार नाहीं है - लेकिन अल्लाह अऊर मुझ पर अऊर कुरान मा विश्वास करौ जवन हम लाये रहेन, तब अगर उ इ कहत हैं, तौ वास्तव मा उ इस्लाम के अधिकारन के अलावा - मोर हमलन से आपन संपत्ति अऊर आत्मा के रक्षा किहिन हैं। अऊर ओनके हिसाब अल्लाह पर छोड़ दीन जात है'।
Imam Muslim : 32
و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ وَعَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ بِمِثْلِ حَدِيثِ ابْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ح و حَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ ح و حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ يَعْنِي ابْنَ مَهْدِيٍّ قَالَا جَمِيعًا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَإِذَا قَالُوا لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ ثُمَّ قَرَأَ { إِنَّمَا أَنْتَ مُذَكِّرٌ لَسْتَ عَلَيْهِمْ بِمُسَيْطِرٍ }
अऊर हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [हफ्श बिन घियात्स] से [अल-अमासी] से [अबू सुफियान] से [जाबिर] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] दुइनौ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मानव हल्दी के अनुसार उड़ान भरै का आदेश मिला' अबू हुरैरा से इब्न अल-मुसैयाब। -एक अउर रिवायत मा कहा गा है- अऊर ई मोका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबाह] हमका [वाकी'] बताइस है। -एक अउर रिवायत मा ई बतावा गा है- अऊर ई मोका बतावा गा है [मुहम्मद बिन अल-मुत्सन्ना] हमसे [अब्दुर्रहमान] -अर्थात बिन महदी- दुइनौ कहिन, हमका [सुफयान] से [अबू अज-जुबैर] से [जाबिर] से कहिन, उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल कहिन: 'मुझे तब तक लड़ै का आदेश मिला जब तक कि लोग नाहीं कहत हैं,' -जिसका पूजा करै का अधिकार है- लेकिन अल्लाह', तौ उइ कहिन, 'अल्लाह के अलावा -जेका पूजा करै का अधिकार है- कौनो भगवान नाहीं है', तौ वाकई उइ इस्लाम के अधिकारन के अलावा -मेरे हमलन से- आपन संपत्ति अऊर आत्मा के रक्षा किहिन हैं। अऊर ओनके हिसाब अल्लाह पर छोड़ दीन जात है। फिर उ पढ़िन: '-वास्तव मा तुम -केवल- एक चेतावनी देवे वाला हौ। आपके पास ओनके ऊपर बिल्कुल भी कौनो शक्ति नाहीं है- ' -प्रश्न। अल घासिया: 21-22-।
Imam Muslim : 33
حَدَّثَنَا أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِىُّ مَالِكُ بْنُ عَبْدِ الْوَاحِدِ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ الصَّبَّاحِ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ فَإِذَا فَعَلُوا عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ
हमसे कहिन है [अबू घसान अल-मिसमाई मलिक बिन अब्दुल वाहिद] हमसे कहिन है [अब्दुल मलिक बिन अश-शब्बाह] से [स्यू'बाह] से [वाकिद बिन मुहम्मद बिन जैद बिन अब्दुल्ला बिन उमर] से [उनके पिता] से [अब्दुल्ला बिन उमर] उ कहिन: 'मुझे तब तक लोगन से लड़ै का आदेश दिहा गा रहा जब तक कि उ लोग परीक्षा न दे - पूजा के लायक - लेकिन अल्लाह अऊर ई कि मुहम्मद अल्लाह के दूत हैं, उइ नमाज पढ़त हैं, अऊर जकात देत हैं। त अगर उई अइसन करत हैं, तौ वास्तव मा उई इस्लामी अधिकारन के अलावा -मेरे हमला- से आपन संपत्ति अऊर आत्मा के रक्षा किहिन हैं। अऊर ओनके हिसाब अल्लाह पर छोड़ दीन जात है'।
Imam Muslim : 34
و حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ يَعْنِيَانِ الْفَزَارِيَّ عَنْ أَبِي مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ قَالَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَكَفَرَ بِمَا يُعْبَدُ مِنْ دُونِ اللَّهِ حَرُمَ مَالُهُ وَدَمُهُ وَحِسَابُهُ عَلَى اللَّهِ و حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الْأَحْمَرُ ح وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ كِلَاهُمَا عَنْ أَبِي مَالِكٍ عَنْ أَبِيهِ أَنَّهُ سَمِعَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ وَحَّدَ اللَّهَ ثُمَّ ذَكَرَ بِمِثْلِهِ
अऊर ई हमसे [सुवैद बिन सईद] अऊर [इब्न अबू उमर] दुइनौ से कहा गा है, हमसे [मरवान] दुइनौ का मतलब मरवान अल-फजारी रहा, [अबू मलिक] से [अपने पिता] से उ कहिन, 'मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'जेके पास भगवान कहै का अधिकार नाहीं है - पूजा- लेकिन अल्लाह, अऊर अल्लाह के अलावा कुछौ भी बदनाम करत है, तौ ओकर धन अऊर खून हराम होइ जात है, अऊर ओनकर इनाम अल्लाह के पास है'। अऊर ई हमका बतावा गा है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमका [अबू खालिद अल-अहमर] बतावा है। -एक अउर रिवायत मा कहा गा है- अऊर उ हमका यहिके बारे मा बताइन हैं [जुहैर बिन हरब] हमका [यजीद बिन हारून] से [अबू मलिक] से [अपने पिता] से कहिन हैं कि उ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का कहत सुने हैं: 'जे अल्लाह पर भरोसा करत है,' फिर कुछ अइसने उल्लेख करत है'।
Imam Muslim : 35
و حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى التُّجِيبِيُّ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِيهِ قَالَ لَمَّا حَضَرَتْ أَبَا طَالِبٍ الْوَفَاةُ جَاءَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَوَجَدَ عِنْدَهُ أَبَا جَهْلٍ وَعَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أُمَيَّةَ بْنِ الْمُغِيرَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا عَمِّ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ كَلِمَةً أَشْهَدُ لَكَ بِهَا عِنْدَ اللَّهِ فَقَالَ أَبُو جَهْلٍ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي أُمَيَّةَ يَا أَبَا طَالِبٍ أَتَرْغَبُ عَنْ مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ فَلَمْ يَزَلْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْرِضُهَا عَلَيْهِ وَيُعِيدُ لَهُ تِلْكَ الْمَقَالَةَ حَتَّى قَالَ أَبُو طَالِبٍ آخِرَ مَا كَلَّمَهُمْ هُوَ عَلَى مِلَّةِ عَبْدِ الْمُطَّلِبِ وَأَبَى أَنْ يَقُولَ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا وَاللَّهِ لَأَسْتَغْفِرَنَّ لَكَ مَا لَمْ أُنْهَ عَنْكَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ { مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُوا أَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَى مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِ } وَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى فِي أَبِي طَالِبٍ فَقَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ } و حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَا أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ ح و حَدَّثَنَا حَسَنٌ الْحُلْوَانِيُّ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَا حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ وَهُوَ ابْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ صَالِحٍ كِلَاهُمَا عَنْ الزُّهْرِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّ حَدِيثَ صَالِحٍ انْتَهَى عِنْدَ قَوْلِهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ فِيهِ وَلَمْ يَذْكُرْ الْآيَتَيْنِ وَقَالَ فِي حَدِيثِهِ وَيَعُودَانِ فِي تِلْكَ الْمَقَالَةِ وَفِي حَدِيثِ مَعْمَرٍ مَكَانَ هَذِهِ الْكَلِمَةِ فَلَمْ يَزَالَا بِهِ
अऊर ई मोका बतावा गा है [हर्मलह बिन याह्या अत-तुजीबी] मोका बतावा है [अब्दुल्ला बिन वहब] उ कहिन, मोका बतावा है [यूनुस] से [इब्न शिहाब] उ कहिन, मोका बतावा है [सैद बिन अल-मुसैयब] से [उनके पिता] उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल शल्लाहुअलाहुअलाह वल्लाब तलाब के पास आए रहे जब उ मौत का सामना करत अहै। उ अबू जहल अऊर अब्दुल्ला बिन अबू उमैया बिन अल-मुघिराह का भी वहिजा पावा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'काका! पंथ के दो वाक्य बोलो, अल्लाह के सामने तुम्हारा गवाह बनूँगा'। तब अबू जहल और अब्दुल्ला बिन अबू उमय्याह ने कहा कि हे अबू तालिब, क्या तुम अब्दुल मुथलिब का धर्म त्याग कर पा रहे हो? ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हार नाहीं मानिन अऊर बदले मा ओनका दुई कलिमा पंथ पढ़ै का सिखावत रहे अऊर कई बार दोहरावत रहे। त अबू तालिब ने ओनसे अपने अंतिम शब्दन के रूप मा जवाब दिहिन, कि उ अब्दुल मुतालिब के धर्म के साथ रहे, अऊर कलीमा शहादत का उच्चारण करै से हिचकिचात रहे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी कहा: 'अल्लाह के कसम, मैं आपके लिए अल्लाह से माफी मांगब,' त अल्लाह ने ई आयत उतारिन: '-पैगम्बर अऊर उन लोगन के लिए ई जायज नाहीं है कि उ शर्क करै वालेन के लिए माफी माँगै भले ही उ ओनके खुद के रिश्तेदार हों, जब उनके लिए ई स्पष्ट होइ गवा है कि उ शर्क करै वाले नरक के माहिर हैं। तौबाह मा: 113-। फिर अल्लाह ने अबू तालिब के घटना के बारे में अपने वचन भेजे: 'वास्तव में, हे मुहम्मद, आपके पास ई शक्ति नाहीं है कि आप अपने प्यारे व्यक्ति का मार्गदर्शन दे सकत हैं ताकि उ इस्लाम का स्वीकार कर ले, लेकिन अल्लाह उ है जेकरे पास उ लोगन का मार्गदर्शन देय के शक्ति है जेका उ चाहत है, अऊर उ उहै है जे सबसे अच्छा जानत है कि इस्लाम का गले लगावै के - मार्गदर्शन प्राप्त करै के इच्छुक लोग कौन हैं।' -प्रश्न अल कशाश: 56-। अऊर हमसे कहिस है [इशाक बिन इब्राहिम] अऊर [अब्द बिन हुमैद] दुइनौ कहिन, हमसे कहिन है [अब्दुर्राज़ाक] हमसे [ममर] कहिन है। -एक अउर कथन मा ई कहा गा है- अऊर हमका [हसन अल-हुलवानी] अऊर [अब्द बिन हुमैद] दुइनौ कहिन, हमसे [याकूब] -अर्थात इब्न इब्राहिम बिन साद- उ कहिन, हमका [मेरे पिता] से [सालिह] दुइनौ से [अज़-जुहरी] से कहिन हैं, उदाहरण के लिए ई सनाद के साथ। बस ई बात है कि सालीह हदीस इ शब्दन से खतम होत है, 'तब अल्लाह ने उनके बारे मा आपन वचन उतरा,' अऊर उ इन दुइनौ आयतन का जिक्र नाहीं करत हैं। अऊर उ आपन हदीस मा उल्लेख किहिन, 'अऊर दुइनौ जने ई शब्दन का दोहराइन,' हदीस मा मामर ई वाक्य का विकल्प अहै। अऊर उ दुइनौ यहिसे निर्देशित रहत हैं'।
Imam Muslim : 36
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ قَالَا حَدَّثَنَا مَرْوَانُ عَنْ يَزِيدَ وَهُوَ ابْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَمِّهِ عِنْدَ الْمَوْتِ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَشْهَدُ لَكَ بِهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَبَى فَأَنْزَلَ اللَّهُ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ } الْآيَةَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अब्बाद] अऊर [इब्न अबू उमर] दुइनौ कहिन, हमसे कहिन है [मरवान] से [यजीद] -अर्थात इब्न कैसान- [अबू हाजिम] से [अबू हुरैराह] से उ कहिन, 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के शांति अऊर बरकत) जब उ अपने चाचा से कहिन, कि 'अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा करै लायक नाहीं है' मैं निश्चित रूप से क़ामत के दिन इन शब्दन से आपके लिए गवाही देब'। लेकिन उ मना करिन, फिर अल्लाह ने प्रकट किहिन: '-वास्तव मा तुम ओनका मार्गदर्शन नाहीं कर पाएब जेसे तुम प्यार करत हौ-' -प्रश्न। अल कशाश: 56-।
Imam Muslim : 37
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمِ بْنِ مَيْمُونٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ الْأَشْجَعِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِعَمِّهِ قُلْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَشْهَدُ لَكَ بِهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ قَالَ لَوْلَا أَنْ تُعَيِّرَنِي قُرَيْشٌ يَقُولُونَ إِنَّمَا حَمَلَهُ عَلَى ذَلِكَ الْجَزَعُ لَأَقْرَرْتُ بِهَا عَيْنَكَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ { إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ }
हमसे कहा है [मुहम्मद बिन हातिम बिन मैमून] ने हमसे कहा है [यह्या बिन सैद] ने हमसे कहा है [यजीद बिन कैसान] से [अबू हाजिम अल-असीजाई] से [अबू हुरैरा] उ कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने चाचा से कहा जब उ मरय वाला रहा: अल्लाह के अलावा 'निश्चित रूप से मैं क़ामत के दिन इन शब्दन से तोहरे लिए गवाही देब'। उ जवाब दिहिन, 'अगर ई कुरैश लोगन के ई बात से डांटत न होत कि 'उ चिंतित रहे काहे से कि उ अइसन किहिन', तौ मैं आपकी आँखिन से उ वाक्य से सहमत होइ जात'। तब अल्लाह ने प्रकट किया: '-वास्तव में आप उनको मार्गदर्शन नहीं कर पाएंगे जिनसे आप प्यार करत हैं, लेकिन मैं उनको मार्गदर्शन करूँगा जिनका उ चाहत है-' -प्रश्न. अल कशाश: 56-।
Imam Muslim : 38
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ كِلَاهُمَا عَنْ إِسْمَعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنْ حُمْرَانَ عَنْ عُثْمَانَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ مَاتَ وَهُوَ يَعْلَمُ أَنَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ دَخَلَ الْجَنَّةَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ الْمُقَدَّمِيُّ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ عَنْ الْوَلِيدِ أَبِي بِشْرٍ قَالَ سَمِعْتُ حُمْرَانَ يَقُولُ سَمِعْتُ عُثْمَانَ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مِثْلَهُ سَوَاءً
हमका [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [जुहैर बिन हरब] दुइनौ का [इस्माइल बिन इब्राहिम] से बतावा है, [अबू बकर] कहिन, हमका [इब्न उलेयाह] का [खालिद] से बताइन है, उ कहिन, हमका [अल-वलिद बिन मुस्लिम] [हमरान] से [उथमान] से बताइन है, उ कहिन; 'पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'जो कोई भी मर जात है जब तक कि उ जानत है कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा के लायक - नाहीं है, उ निश्चित रूप से स्वर्ग मा प्रवेश करिहै'। हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अबू बकर अल-मुकद्दामी] हमसे कहिन हैं [बिसिर बिन अल-मुफद्दलाल] हमसे कहिन हैं [खालिद अल-हदज़्ज़ा'] [अल-वलिद अबू बिसिर] से उ कहिन, हम [हमरान] का कहत सुने रहेन, हम [उथमान] का कहत सुने रहेन; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यही बात कहते सुना है'।
Imam Muslim : 39
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ النَّضْرِ بْنِ أَبِي النَّضْرِ قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو النَّضْرِ هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ الْأَشْجَعِيُّ عَنْ مَالِكِ بْنِ مِغْوَلٍ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ مُصَرِّفٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ كُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي مَسِيرٍ قَالَ فَنَفِدَتْ أَزْوَادُ الْقَوْمِ قَالَ حَتَّى هَمَّ بِنَحْرِ بَعْضِ حَمَائِلِهِمْ قَالَ فَقَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ جَمَعْتَ مَا بَقِيَ مِنْ أَزْوَادِ الْقَوْمِ فَدَعَوْتَ اللَّهَ عَلَيْهَا قَالَ فَفَعَلَ قَالَ فَجَاءَ ذُو الْبُرِّ بِبُرِّهِ وَذُو التَّمْرِ بِتَمْرِهِ قَالَ وَقَالَ مُجَاهِدٌ وَذُو النَّوَاةِ بِنَوَاهُ قُلْتُ وَمَا كَانُوا يَصْنَعُونَ بِالنَّوَى قَالَ كَانُوا يَمُصُّونَهُ وَيَشْرَبُونَ عَلَيْهِ الْمَاءَ قَالَ فَدَعَا عَلَيْهَا حَتَّى مَلَأَ الْقَوْمُ أَزْوِدَتَهُمْ قَالَ فَقَالَ عِنْدَ ذَلِكَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ لَا يَلْقَى اللَّهَ بِهِمَا عَبْدٌ غَيْرَ شَاكٍّ فِيهِمَا إِلَّا دَخَلَ الْجَنَّةَ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अन-नदलर बिन अबू अन-नदलर] उ कहिन, हमसे कहिन [अबू अन-नदलर हसीम बिन अल-कासिम] हमसे कहिन [उबैदुल्लाह अल-असीजाई] से [मलिक बिन मिघवाल] से [थल्हाह बिन मुशर्रीफ] से [अबू सलीह] से [अबू हुराई] से [अबू हुरै] पैगम्बर के साथ कहिन, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक यात्रा पर'। फिर बोले- 'फिर ऊ जनता कै प्रावधान खतम होइगा'। अगला उ कहिन, 'जब तक उ आपन कुछ जानवरन का वध करै चाहत हैं'। रावी ने कहा, 'तब उमर ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, अगर आप लोगन के कुछ प्रावधान इकट्ठा करौ अऊर फिर ओकरे बारे मा अल्लाह से दुआ करौ - निश्चित रूप से ई अच्छा होई -'। कथावाचक कहिस, 'फिर ऊ करिस'। कथावाचक ने कहा- 'फिर गेहूँ के मालिक अपने गेहूँ लैके आए, खजूर के मालिक अपने गेहूँ लैके आये'। कथावाचक ने कहा- 'और मुजाहिद ने कहा-'और अनाज मालिक अपने अनाज के साथ'। मैं कहेंव कि अनाज का करत हैं? ऊ जवाब दिहिस, 'उनके ऊपर पानी चूस के पी लिहिन'। उ कहिन, 'तब अल्लाह के रसूल ओनका तब तक बोलाइन जब तक कि उ आपन रसोई के बर्तन भर न पाए'। रावी ने कहा, 'त अल्लाह के रसूल ने उस समय प्रार्थना की: 'मैं गवाही देत हउँ कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान - पूजा के लायक - नाहीं है अऊर मैं अल्लाह के रसूल हउँ, कौनो भी सेवक अल्लाह से बिना कौनो संदेह के मजबूती से पकड़ के नाहीं मिलत है, उ निश्चित रूप से जन्नत मा प्रवेश करिहैं''।
Imam Muslim : 40
حَدَّثَنَا سَهْلُ بْنُ عُثْمَانَ وَأَبُو كُرَيْبٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلَاءِ جَمِيعًا عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ قَالَ أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَوْ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ شَكَّ الْأَعْمَشُ قَالَ لَمَّا كَانَ غَزْوَةُ تَبُوكَ أَصَابَ النَّاسَ مَجَاعَةٌ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ لَوْ أَذِنْتَ لَنَا فَنَحَرْنَا نَوَاضِحَنَا فَأَكَلْنَا وَادَّهَنَّا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ افْعَلُوا قَالَ فَجَاءَ عُمَرُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنْ فَعَلْتَ قَلَّ الظَّهْرُ وَلَكِنْ ادْعُهُمْ بِفَضْلِ أَزْوَادِهِمْ ثُمَّ ادْعُ اللَّهَ لَهُمْ عَلَيْهَا بِالْبَرَكَةِ لَعَلَّ اللَّهَ أَنْ يَجْعَلَ فِي ذَلِكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَعَمْ قَالَ فَدَعَا بِنِطَعٍ فَبَسَطَهُ ثُمَّ دَعَا بِفَضْلِ أَزْوَادِهِمْ قَالَ فَجَعَلَ الرَّجُلُ يَجِيءُ بِكَفِّ ذُرَةٍ قَالَ وَيَجِيءُ الْآخَرُ بِكَفِّ تَمْرٍ قَالَ وَيَجِيءُ الْآخَرُ بِكَسْرَةٍ حَتَّى اجْتَمَعَ عَلَى النِّطَعِ مِنْ ذَلِكَ شَيْءٌ يَسِيرٌ قَالَ فَدَعَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْهِ بِالْبَرَكَةِ ثُمَّ قَالَ خُذُوا فِي أَوْعِيَتِكُمْ قَالَ فَأَخَذُوا فِي أَوْعِيَتِهِمْ حَتَّى مَا تَرَكُوا فِي الْعَسْكَرِ وِعَاءً إِلَّا مَلَئُوهُ قَالَ فَأَكَلُوا حَتَّى شَبِعُوا وَفَضَلَتْ فَضْلَةٌ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ لَا يَلْقَى اللَّهَ بِهِمَا عَبْدٌ غَيْرَ شَاكٍّ فَيُحْجَبَ عَنْ الْجَنَّةِ
हमका [सहल बिन उथमान] अऊर [अबू कुरैब मुहम्मद बिन अल-अला'] [अबू मुआविया] से सब कुछ बताइस है। बहुत भूख महसूस करत हुए, उइ कहिन, 'हे अल्लाह के रसूल, का तुम हमका आपन ऊँट का वध करै के अनुमति देब, ताकि हम ओकर मांस खा सकित अऊर ओकर चर्बी का तेल के रूप मा उपयोग कर सकित - त्वचा का ढँक सकित, ओका तपती गर्मी से बचा सकित -? ' रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'करो'। अबू हुरैराह ने कहा तब उमर आए और कहा कि हे रसूल अल्लाह ऐसा करोगे तो ऊंट का पीठ खतम हो जायेगा- वाहन-! लेकिन ई अच्छा होई कि आप ओनके बाकी खाना माँगौ अऊर फिर दुआ करौ, अल्लाह ओनका बरकत दे।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'ठीक है'। फिर उ एक फैलाव माँगिन - चमड़ा से बना -, ओका फैलावै के बाद, उ ओनके बचे हुए खाना के अवशेष माँगिन।' अबू हुरैरा आगे कहिन, 'फिर एक मनई रहा जउन मुट्ठी मकई लइके आवा रहा, दूसर मुट्ठी भर खजूर लइके आवा रहा, अउर कुछ अउर लोग रहे जे खाना के टुकड़ा लइके आवा रहा, जइसे कि रोटी, जेहिसे कि खोल पर थोर बहुत खाना जमा होइ जात रहा। अबू हुरैरा ने कहा, 'तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भोजन पर आशीर्वाद के लिए प्रार्थना की, जेकरे बाद उ कहिन: 'अपने भोजन के बर्तन ले अऊर भरौ'। अबू हुरैरा जारी रखिन, 'उनका तब आपन खाना भरवावा गा रहा, जेहिसे एकौ सैनिक नाहीं बल्कि ओनके खाना भरा रहा'। अबू हुरैराह जारी रखिन, 'उनका तब तक खाना खाना रहा जब तक कि उ पेट न आ गए, अऊर अबहियों कुछ खाना बचा रहा'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'मैं गवाह हौं कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है अऊर मैं अल्लाह का दूत हौं, कौनो सेवक अल्लाह से नाहीं मिलत है, ऊ ई वाक्य मा शक नाहीं करत है अऊर फिर स्वर्ग मा प्रवेश करै से रोका जात है'।