इमाम बुखारी : 21
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ عَمْرِو بْنِ يَحْيَى الْمَازِنِيِّ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ يَدْخُلُ أَهْلُ الْجَنَّةِ الْجَنَّةَ وَأَهْلُ النَّارِ النَّارَ ثُمَّ يَقُولُ اللَّهُ تَعَالَى أَخْرِجُوا مِنْ النَّارِ مَنْ كَانَ فِي قَلْبِهِ مِثْقَالُ حَبَّةٍ مِنْ خَرْدَلٍ مِنْ إِيمَانٍ فَيُخْرَجُونَ مِنْهَا قَدْ اسْوَدُّوا فَيُلْقَوْنَ فِي نَهَرِ الْحَيَا أَوْ الْحَيَاةِ شَكَّ مَالِكٌ فَيَنْبُتُونَ كَمَا تَنْبُتُ الْحِبَّةُ فِي جَانِبِ السَّيْلِ أَلَمْ تَرَ أَنَّهَا تَخْرُجُ صَفْرَاءَ مُلْتَوِيَةًقَالَ وُهَيْبٌ حَدَّثَنَا عَمْرٌو الْحَيَاةِ وَقَالَ خَرْدَلٍ مِنْ خَيْرٍ
यह हमें बताया गया है [इस्माईल] ने कहा, यह हमें [मलिक] ['अमरू बिन यह्या अल मज़ानी] से [उनके पिता] से [अबू सईद अल खुदरी] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया गया है, उन्होंने कहा: "स्वर्ग के अहलू स्वर्ग में प्रवेश कर चुके हैं और नरक के अहलू नरक में प्रवेश कर चुके हैं। तब अल्लाह तआला ने कहा: "उन लोगों को नरक से निकालो जिनके दिलों में सरसों के दाने के बराबर विश्वास है।" तो वे नरक से बाहर आ गए। नरक एक काली हालत में फिर जीवन या जीवन की नदी में डाल दिया गया। -मलिक ने संदेह किया - फिर वे नदी के किनारे उगने वाले बीजों की तरह बढ़े। "ने कहा [वुहैब] ने हमें ['अमरू] बताया है: "जीवन"। और कहा: "थोड़ी सी दयालुता"।
इमाम बुखारी : 22
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ صَالِحٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَا أَنَا نَائِمٌ رَأَيْتُ النَّاسَ يُعْرَضُونَ عَلَيَّ وَعَلَيْهِمْ قُمُصٌ مِنْهَا مَا يَبْلُغُ الثُّدِيَّ وَمِنْهَا مَا دُونَ ذَلِكَ وَعُرِضَ عَلَيَّ عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ وَعَلَيْهِ قَمِيصٌ يَجُرُّهُ قَالُوا فَمَا أَوَّلْتَ ذَلِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الدِّينَ
हमें [मुहम्मद बिन उबैदिल्लाह] ने बताया है, हमें [इब्राहिम बिन साद] ने [सालेह] से [इब्न शिहाब] से [अबू उमामह बिन सहल बिन हुनैफ] से बताया है कि उन्होंने [अबू सईद अल खुदरी] को कहते सुना, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब मैं सो रहा था, तो मैंने लोगों को मेरे सामने देखते हुए सपना देखा। उन्होंने कपड़े पहने हुए थे, जिनमें से कुछ सीने तक पहुंच रहे थे और कुछ उससे कम था। और उमर बिन अल खत्थब को मेरे पास लाया गया और उसने अपने कपड़े पहनाए और उसे घसीटा। साथियों ने पूछा: "आपको क्या लगता है कि इसका क्या मतलब है, अल्लाह के रसूल, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम?"
इमाम बुखारी : 23
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى رَجُلٍ مِنْ الْأَنْصَارِ وَهُوَ يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَعْهُ فَإِنَّ الْحَيَاءَ مِنْ الْإِيمَانِ
हमें [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने बताया है, हमें [मलिक बिन अनस] को [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से [उनके पिता] से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक अंसार दोस्त के पास से गुज़रे जो उस समय अपने भाई को शर्म के बारे में सिखा रहा था। तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "उसे छोड़ दो, क्योंकि शर्म तो ईमान का हिस्सा है।"
इमाम बुखारी : 24
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمُسْنَدِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو رَوْحٍ الْحَرَمِيُّ بْنُ عُمَارَةَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ عَنْ ابْنِ عُمَرَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَشْهَدُوا أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ فَإِذَا فَعَلُوا ذَلِكَ عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّ الْإِسْلَامِ وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ
हमें [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद अल मुसनदी] ने बताया है, हमें [अबू रौह अल हरामी बिन उमराह] ने बताया है, हमें [स्यूबा] ने [वाकिद बिन मुहम्मद] ने बताया है; मैंने [अपने पिता] को [इब्न उमर] से कहते सुना, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा था: "मुझे लोगों से तब तक लड़ने का आदेश दिया गया जब तक वे गवाही न दें; अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है और वास्तव में मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ की इजाज़त देते हैं, ज़कात देते हैं। अगर वे ऐसा करते हैं तो उन्होंने इस्लामी कानून के अलावा अपना खून और माल मुझसे छिपाया है और उनका हिसाब अल्लाह के पास है।"
इमाम बुखारी : 25
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ وَمُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَا حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ أَيُّ الْعَمَلِ أَفْضَلُ فَقَالَ إِيمَانٌ بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ قِيلَ ثُمَّ مَاذَا قَالَ الْجِهَادُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ قِيلَ ثُمَّ مَاذَا قَالَ حَجٌّ مَبْرُورٌ
हमें [अहमद बिन यूनुस] और [मूसा बिन इस्माइल] दोनों ने बताया है, हमें [इब्राहिम बिन साद] ने बताया है, हमें [इब्न शिहाब] को [सईद बिन अल मुसय्यब] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इस्लाम के बारे में पूछा गया कि सबसे ज़रूरी क्या है? तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान।" फिर दोबारा पूछा: "फिर क्या?" उन्होंने जवाब दिया: "अल जिहाद फी सबिलिल्लाह (अल्लाह के रास्ते में लड़ना)। फिर उनसे दोबारा पूछा गया: "फिर और क्या?" उन्होंने जवाब दिया सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम: "हज्ज मबरुर"।
इमाम बुखारी : 26
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عَامِرُ بْنُ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ عَنْ سَعْدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْطَى رَهْطًا وَسَعْدٌ جَالِسٌ فَتَرَكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا هُوَ أَعْجَبُهُمْ إِلَيَّ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا لَكَ عَنْ فُلَانٍ فَوَاللَّهِ إِنِّي لَأَرَاهُ مُؤْمِنًا فَقَالَ أَوْ مُسْلِمًا فَسَكَتُّ قَلِيلًا ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَعْلَمُ مِنْهُ فَعُدْتُ لِمَقَالَتِي فَقُلْتُ مَا لَكَ عَنْ فُلَانٍ فَوَاللَّهِ إِنِّي لَأَرَاهُ مُؤْمِنًا فَقَالَ أَوْ مُسْلِمًا ثُمَّ غَلَبَنِي مَا أَعْلَمُ مِنْهُ فَعُدْتُ لِمَقَالَتِي وَعَادَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا سَعْدُ إِنِّي لَأُعْطِي الرَّجُلَ وَغَيْرُهُ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنْهُ خَشْيَةَ أَنْ يَكُبَّهُ اللَّهُ فِي النَّارِوَرَوَاهُ يُونُسُ وَصَالِحٌ وَمَعْمَرٌ وَابْنُ أَخِي الزُّهْرِيِّ عَنْ الزُّهْرِيِّ
हमें बताया है [अबू अल यमन] ने कहा, हमें बताया है [स्यू'एब] ने [अज़ ज़ुहरी] ने कहा, मुझे ['अमीर बिन साद बिन अबू वकाश] ने [साद] से बताया है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कई लोगों को खाना दिया और उस समय साद बैठे थे। लेकिन उन्होंने यह खाना एक आदमी को नहीं दिया, भले ही वह व्यक्ति उपस्थित लोगों में मेरे लिए सबसे प्रभावशाली था, इसलिए मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा: "अल्लाह के रसूल, फलां के बारे में क्या? मैं वास्तव में उसे एक आस्तिक के रूप में देखता हूं।" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उत्तर दिया: "या वह मुसलमान है?" फिर मैं एक पल के लिए चुप रहा, और मैं उनके कहने का मतलब और अधिक निश्चित करने के लिए मजबूर हो गया, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, इसलिए मैंने अपने शब्दों को दोहराया: "अल्लाह के रसूल, फलां के बारे में क्या? मैं वास्तव में उसे एक आस्तिक के रूप में देखता हूं।" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "या वह मुसलमान है?" फिर मुझसे फिर पूछा गया कि उनका क्या मतलब है, जब तक कि मैंने अपना सवाल दोबारा नहीं दोहराया। फिर पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "ऐ साद, मैं भी उस आदमी को ज़रूर दूँगा। लेकिन मैं उसे देने के बजाय दूसरों को देना ज़्यादा पसंद करूँगा, क्योंकि मुझे डर है कि अल्लाह उसे जहन्नम में डाल देगा।" [यूनुस], [सालिह], [ममार] और [अज़ ज़ुहरी के भतीजे] ने [अज़ ज़ुहरी] से रिवायत किया है।
इमाम बुखारी : 27
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّ الْإِسْلَامِ خَيْرٌ قَالَ تُطْعِمُ الطَّعَامَ وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ
हमें [कुतैबा] ने बताया है, हमें [अल लैट्स] ने [यज़ीद बिन अबू हबीब] से [अबू अल खैर] से [अब्दुल्ला बिन 'अमरू] से बताया है कि किसी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; "कौन सा इस्लाम सबसे अच्छा है?" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उत्तर दिया: "आप उन लोगों को खाना खिलाते हैं और उनका स्वागत करते हैं जिन्हें आप जानते हैं और जिन्हें आप नहीं जानते हैं।"
इमाम बुखारी : 28
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُرِيتُ النَّارَ فَإِذَا أَكْثَرُ أَهْلِهَا النِّسَاءُ يَكْفُرْنَ قِيلَ أَيَكْفُرْنَ بِاللَّهِ قَالَ يَكْفُرْنَ الْعَشِيرَ وَيَكْفُرْنَ الْإِحْسَانَ لَوْ أَحْسَنْتَ إِلَى إِحْدَاهُنَّ الدَّهْرَ ثُمَّ رَأَتْ مِنْكَ شَيْئًا قَالَتْ مَا رَأَيْتُ مِنْكَ خَيْرًا قَطُّ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने [मलिक] से [ज़ैद बिन असलम] से [अथो बिन यासर] से [इब्न अब्बास] से बताया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मुझे जहन्नम दिखाया गया, पता चला कि उसमें ज़्यादातर औरतें हैं। क्योंकि वे अक्सर इससे इनकार करती हैं।" पूछा गया: "क्या उन्होंने अल्लाह को मना किया?" उन्होंने कहा: "वे अपने पति के तोहफ़ों को मना करती हैं, अच्छाई को मना करती हैं। अगर तुमने उनमें से किसी के साथ हमेशा अच्छा किया है, फिर वह तुममें एक भी बुराई देखता है, तो वह कहेगा: 'मैंने तुममें ज़रा भी अच्छाई नहीं देखी।'"
इमाम बुखारी : 29
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ وَاصِلٍ الْأَحْدَبِ عَنْ الْمَعْرُورِ بْنِ سُوَيْدٍ قَالَ لَقِيتُ أَبَا ذَرٍّبِالرَّبَذَةِ وَعَلَيْهِ حُلَّةٌ وَعَلَى غُلَامِهِ حُلَّةٌ فَسَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَقَالَ إِنِّي سَابَبْتُ رَجُلًا فَعَيَّرْتُهُ بِأُمِّهِ فَقَالَ لِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَا أَبَا ذَرٍّ أَعَيَّرْتَهُ بِأُمِّهِ إِنَّكَ امْرُؤٌ فِيكَ جَاهِلِيَّةٌ إِخْوَانُكُمْ خَوَلُكُمْ جَعَلَهُمْ اللَّهُ تَحْتَ أَيْدِيكُمْ فَمَنْ كَانَ أَخُوهُ تَحْتَ يَدِهِ فَلْيُطْعِمْهُ مِمَّا يَأْكُلُ وَلْيُلْبِسْهُ مِمَّا يَلْبَسُ وَلَا تُكَلِّفُوهُمْ مَا يَغْلِبُهُمْ فَإِنْ كَلَّفْتُمُوهُمْ فَأَعِينُوهُمْ
यह हमें बताया गया है [सुलेमान बिन हर्ब] ने कहा, यह हमें [स्यूबा] [वशील अल अहदाब] से बताया गया है [अल मारूर बिन सुवैद] ने कहा: मैं रबदज़ा में [अबू दज़ार] से मिला, जो उस समय कपड़ों की दो परतें पहने हुए थे, जैसा कि उनके बेटे ने किया था, इसलिए मैंने उनसे इसके बारे में पूछा, तो उन्होंने उत्तर दिया: मैंने किसी की माँ का अपमान करके उसका अपमान किया था, इसलिए पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुझे फटकारा: "ऐ अबू ज़र्र क्या तुमने उसकी माँ का अपमान किया है? वास्तव में, आप में अभी भी जाहिलियत (की प्रकृति) है। आपके भाई आपके आश्रित हैं, अल्लाह ने उन्हें आपके हाथों में बनाया है, इसलिए यदि वह खाता है, तो उसे खाने के साथ-साथ भोजन दें, यदि वह कपड़े पहनता है, तो उसे वह दें जो वह पहनता है। उनकी क्षमता से अधिक किसी चीज़ का उन पर बोझ न डालें।
इमाम बुखारी : 30
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْمُبَارَكِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ وَيُونُسُ عَنْ الْحَسَنِ عَنْ الْأَحْنَفِ بْنِ قَيْسٍ قَالَذَهَبْتُ لِأَنْصُرَ هَذَا الرَّجُلَ فَلَقِيَنِي أَبُو بَكْرَةَ فَقَالَ أَيْنَ تُرِيدُ قُلْتُ أَنْصُرُ هَذَا الرَّجُلَ قَالَ ارْجِعْ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِذَا الْتَقَى الْمُسْلِمَانِ بِسَيْفَيْهِمَا فَالْقَاتِلُ وَالْمَقْتُولُ فِي النَّارِ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا الْقَاتِلُ فَمَا بَالُ الْمَقْتُولِ قَالَ إِنَّهُ كَانَ حَرِيصًا عَلَى قَتْلِ صَاحِبِهِ
हमें बताया है [अब्दुर्रहमान बिन अल मुबारक] हमें बताया है [हम्माद बिन ज़ैद] हमें बताया है [अय्यूब] और [यूनुस] [अल हसन] से [अल अहनाफ बिन कैस] ने कहा; मैं किसी की मदद करने आया था और फिर मैं [अबू बकर] से मिला, तो उसने पूछा: "तुम कहाँ जा रहे हो?" मैंने उत्तर दिया: "मैं किसी की मदद करना चाहता हूं" उसने कहा: "वापस जाओ, क्योंकि मैंने एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को यह कहते सुना था: "यदि दो मुसलमान अपनी-अपनी तलवारें खींचकर एक-दूसरे से (लड़ने के लिए) मिलते हैं, तो जो मारा जाएगा और मारा जाएगा वह नरक में जाएगा।" मैंने यह भी पूछा: "अल्लाह के रसूल, यह मारने वाले के लिए है, लेकिन जो मारा गया उसके बारे में क्या?" तो पैगंबर (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने उत्तर दिया: "वह पहले भी वास्तव में अपने दोस्त को मारना चाहता था।"
इमाम बुखारी : 31
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ ح قَالَ و حَدَّثَنِي بِشْرُ بْنُ خَالِدٍ أَبُو مُحَمَّدٍ الْعَسْكَرِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ سُلَيْمَانَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَلَمَّا نَزَلَتْ{ الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُمْ بِظُلْمٍ }قَالَ أَصْحَابُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّنَا لَمْ يَظْلِمْ فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ{ إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ }
हमसे [अबू अल वालिद] ने कहा है, हमसे [स्यूबा] ने भी सुनाया है और इसी तरह की एक हदीस भी सुनाई है। "उनके ईमान में नाइंसाफ़ी है" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियों ने पूछा: "हममें से कौन नाइंसाफ़ी नहीं करता? तो अल्लाह अज़्ज़ा वज़ल्ला ने (अपना वचन भेजा): "बेशक, शिर्क बहुत बड़ा नाइंसाफ़ी है।"
इमाम बुखारी : 32
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ أَبُو الرَّبِيعِ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ قَالَ حَدَّثَنَا نَافِعُ بْنُ مَالِكِ بْنِ أَبِي عَامِرٍ أَبُو سُهَيْلٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ آيَةُ الْمُنَافِقِ ثَلَاثٌ إِذَا حَدَّثَ كَذَبَ وَإِذَا وَعَدَ أَخْلَفَ وَإِذَا اؤْتُمِنَ خَانَ
हमसे कहा है [सुलेमान अबू अर रबी] ने कहा, हमसे कहा है [इस्माईल बिन जाफर] ने कहा, हमसे कहा है [नफी' बिन मलिक बिन अबू 'अमीर अबू सुहैल] ने [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: "एक पाखंडी के लक्षण तीन हैं; यदि वह झूठ बोलता है, यदि वह वादा करता है तो वह इसे तोड़ देता है और यदि उसे आदेश दिया जाता है तो वह विश्वासघात करता है।"
इमाम बुखारी : 33
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ بْنُ عُقْبَةَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍوأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَرْبَعٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ كَانَ مُنَافِقًا خَالِصًا وَمَنْ كَانَتْ فِيهِ خَصْلَةٌ مِنْهُنَّ كَانَتْ فِيهِ خَصْلَةٌ مِنْ النِّفَاقِ حَتَّى يَدَعَهَا إِذَا اؤْتُمِنَ خَانَ وَإِذَا حَدَّثَ كَذَبَ وَإِذَا عَاهَدَ غَدَرَ وَإِذَا خَاصَمَ فَجَرَتَابَعَهُ شُعْبَةُ عَنْ الْأَعْمَشِ
हमसे कहा गया है [क़बीशाह बिन उकबा] ने कहा, हमसे कहा गया है [सुफ़यान] [अल अमासी] से [अब्दुल्ला बिन मुर्रा] से [मसरुक] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] से कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि किसी व्यक्ति में चार चीजें हैं तो वह एक वास्तविक मुनाफ़िक है, और जो कोई भी इन चार चीजों में से एक गुण रखता है तो उसमें एक गुणवत्ता निफ़ाक है जब तक कि वह उसे छोड़ न दे। अर्थात, यदि उसे कोई आदेश दिया जाता है तो वह उसे धोखा देता है, यदि वह झूठ बोलता है, यदि वह वादा करता है तो वह उसे तोड़ देता है और यदि वह लड़ता है तो वह धोखा देता है।" यह हदीस [स्यूबा] ने [अल अमासी] से भी वर्णित की है।
इमाम बुखारी : 34
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَقُمْ لَيْلَةَ الْقَدْرِ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ
हमसे कहा है [अबू अल यमन] ने कहा, हमसे कहा है [स्यूऐब] ने कहा, हमसे कहा है [अबू अल ज़नद] ने [अल अराज] से [अबू हुरैरा] ने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी विश्वास और पुरस्कार की उम्मीद के कारण लैलातुल क़द्र को बनाए रखता है, उसके पिछले पाप क्षमा कर दिए जाते हैं।"
इमाम बुखारी : 35
حَدَّثَنَا حَرَمِيُّ بْنُ حَفْصٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَارَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو زُرْعَةَ بْنُ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ انْتَدَبَ اللَّهُ لِمَنْ خَرَجَ فِي سَبِيلِهِ لَا يُخْرِجُهُ إِلَّا إِيمَانٌ بِي وَتَصْدِيقٌ بِرُسُلِي أَنْ أُرْجِعَهُ بِمَا نَالَ مِنْ أَجْرٍ أَوْ غَنِيمَةٍ أَوْ أُدْخِلَهُ الْجَنَّةَ وَلَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمَّتِي مَا قَعَدْتُ خَلْفَ سَرِيَّةٍ وَلَوَدِدْتُ أَنِّي أُقْتَلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ ثُمَّ أُحْيَا ثُمَّ أُقْتَلُ
हमें बताया है [हरामी बिन हफ़्श] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुल वाहिद] ने कहा, हमें बताया है [उमरा] ने कहा, हमें बताया है [अबू ज़ुराह बिन अमरू बिन जरीर] ने कहा: मैंने [अबू हुरैरा] को पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, उन्होंने कहा: "अल्लाह उन लोगों की गारंटी देता है जो उसके मार्ग में निकलते हैं (लड़ते हैं), कोई भी उसे मुझ पर विश्वास के अलावा बाहर नहीं निकालता है और उन लोगों को सही ठहराता है जो मेरे दूत को इनाम या ग़नीमा प्राप्त करके या स्वर्ग भेजकर इसका बदला देने के लिए कहते हैं। यदि यह मेरे लोगों पर बोझ नहीं होता, तो निश्चित रूप से मैं सरीह (विशेष बलों) के पीछे चुपचाप नहीं बैठता और निश्चित रूप से मुझे यह पसंद आएगा यदि मैं अल्लाह के मार्ग में मारा गया और फिर मुझे वापस जीवित किया गया, फिर मुझे फिर से मारा गया, फिर मुझे वापस जीवित किया गया, फिर मुझे फिर से मारा गया।
इमाम बुखारी : 36
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ قَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ
हमें [इस्माईल] ने कहा, मुझे [मलिक] [इब्न शिहाब] से [हुमैद बिन अब्दुर्रहमान] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी विश्वास और पुरस्कार की उम्मीद के कारण रमजान को पूरा करता है, उसके पिछले पाप क्षमा कर दिए जाएंगे।"
इमाम बुखारी : 37
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ صَامَ رَمَضَانَ إِيمَانًا وَاحْتِسَابًا غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ
हमसे कहा है [मुहम्मद बिन सलाम] ने कहा, हमसे कहा है [मुहम्मद बिन फुदलैल] ने कहा, हमसे कहा है [याह्या बिन सईद] ने [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "जो कोई भी विश्वास और इनाम की उम्मीद के कारण उपवास करता है, उसके पिछले पाप क्षमा कर दिए जाएंगे।"
इमाम बुखारी : 38
حَدَّثَنَا عَبْدُ السَّلَامِ بْنُ مُطَهَّرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيٍّ عَنْ مَعْنِ بْنِ مُحَمَّدٍ الْغِفَارِيِّ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنَّ الدِّينَ يُسْرٌ وَلَنْ يُشَادَّ الدِّينَ أَحَدٌ إِلَّا غَلَبَهُ فَسَدِّدُوا وَقَارِبُوا وَأَبْشِرُوا وَاسْتَعِينُوا بِالْغَدْوَةِ وَالرَّوْحَةِ وَشَيْءٍ مِنْ الدُّلْجَةِ
हमें [अब्दुस सलाम बिन मुथहहर] ने वर्णित किया है, हमें [उमर बिन अली] ने [मान बिन मुहम्मद अल गिफारी] से [सईद बिन अबू सईद अल मकबूरी] से [अबू हुरैरा] से वर्णित किया है कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "वास्तव में धर्म आसान है, और कोई भी व्यक्ति धर्म को कठिन नहीं बनाता है सिवाय इसके कि वह पराजित हो जाए (अधिक कठिन और कठिन)। इसलिए ईमानदारी से काम करो, (सत्य की ओर) निकट आओ और अच्छी खबर दो और अल ग़दवा (सुबह जल्दी निकलना) और अर-रूहा (ज़ुहर के बाद निकलना) और अद-दुलजा ((रात को निकलना)) से मदद मांगो।"
इमाम बुखारी : 39
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ أَوَّلَ مَا قَدِمَ الْمَدِينَةَ نَزَلَ عَلَى أَجْدَادِهِ أَوْ قَالَ أَخْوَالِهِ مِنْ الْأَنْصَارِ وَأَنَّهُ صَلَّى قِبَلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ عَشَرَ شَهْرًا أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا وَكَانَ يُعْجِبُهُ أَنْ تَكُونَ قِبْلَتُهُ قِبَلَ الْبَيْتِ وَأَنَّهُ صَلَّى أَوَّلَ صَلَاةٍ صَلَّاهَا صَلَاةَ الْعَصْرِ وَصَلَّى مَعَهُ قَوْمٌ فَخَرَجَ رَجُلٌ مِمَّنْ صَلَّى مَعَهُ فَمَرَّ عَلَى أَهْلِ مَسْجِدٍ وَهُمْ رَاكِعُونَ فَقَالَ أَشْهَدُ بِاللَّهِ لَقَدْ صَلَّيْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِبَلَ مَكَّةَ فَدَارُوا كَمَا هُمْ قِبَلَ الْبَيْتِ وَكَانَتْ الْيَهُودُ قَدْ أَعْجَبَهُمْ إِذْ كَانَ يُصَلِّي قِبَلَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ وَأَهْلُ الْكِتَابِ فَلَمَّا وَلَّى وَجْهَهُ قِبَلَ الْبَيْتِ أَنْكَرُوا ذَلِكَقَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ فِي حَدِيثِهِ هَذَا أَنَّهُ مَاتَ عَلَى الْقِبْلَةِ قَبْلَ أَنْ تُحَوَّلَ رِجَالٌ وَقُتِلُوا فَلَمْ نَدْرِ مَا نَقُولُ فِيهِمْ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ }
हमसे रिवायत है कि ['अम्र बिन खालिद] ने कहा, हमसे रिवायत है कि [ज़ुहैर] ने कहा, हमसे [अबू इसहाक] ने [अल बर्रो` बिन 'अज़ीब] से रिवायत किया है कि जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहली बार मदीना आए, तो अपने दादा ('अज़ीब) या अंसार से अपने चाचाओं के पास रुके, और उस समय आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सोलह या सत्रह महीने तक बैतुल मक़दिस की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी, और आप बैतुल्लाह (काबा) की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ने के बहुत शौकीन थे। पहली नमाज़ जो आपने (काबा की ओर मुँह करके) पढ़ी वह अस्र की नमाज़ थी और लोगों ने भी आपके साथ नमाज़ पढ़ी। एक दिन एक साथी जो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ नमाज़ पढ़ रहा था, दूसरी मस्जिद में लोगों के पास से गुज़रा जब वे रुकू कर रहे थे, और उसने कहा: "मैं अल्लाह की गवाही देता हूँ कि मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ मक्का की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ रहा था, तो जो लोग रुकू कर रहे थे वे अल्लाह के घर की तरफ़ मुड़ गए और यहूदी और किताब वाले हैरान रह गए, क्योंकि पहले पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के घर की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ते थे। जब उन्होंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह के घर की तरफ़ मुँह करते देखा, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। ज़ुहैर ने कहा: अबू इसहाक ने हमें अल बरो से बताया, अपनी हदीस में यह बताता है कि एक ऐसे व्यक्ति की मौत (हुक्म) उस समय होती है जब क़िबला की दिशा नहीं बदली गई हो और उस समय बहुत से लोग मारे गए हों?, हमें नहीं पता था कि उनके बारे में क्या करें जब तक कि आखिरकार अल्लाह तआला ने अपने शब्द ज़ाहिर नहीं किए: "और अल्लाह तुम्हारा ईमान बर्बाद नहीं करेगा।" (QS. अल) Baqoroh: 143)
इमाम बुखारी : 40
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ هَمَّامِ بْنِ مُنَبِّهٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَحْسَنَ أَحَدُكُمْ إِسْلَامَهُ فَكُلُّ حَسَنَةٍ يَعْمَلُهَا تُكْتَبُ لَهُ بِعَشْرِ أَمْثَالِهَا إِلَى سَبْعِ مِائَةِ ضِعْفٍ وَكُلُّ سَيِّئَةٍ يَعْمَلُهَا تُكْتَبُ لَهُ بِمِثْلِهَا
हमें बताया गया है [इस्हाक बिन मंशूर] ने कहा, हमें बताया गया है [अब्दुर्रज्जाक] ने कहा, हमें [मा'मार] को [हमाम बिन मुनब्बिह] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यदि तुम में से कोई अपने इस्लाम में सुधार करता है तो प्रत्येक अच्छे काम के लिए उसके लिए सात सौ स्तर तक दस समान (अच्छाई) लिखी जाएगी, और प्रत्येक बुरे काम के लिए उसके द्वारा की गई हर एक बुरी बात के समान केवल एक ही बुराई लिखी जाएगी।"