इमाम बुखारी : 1
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ اللَّيْثِيَّ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الْمِنْبَرِقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى دُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ إِلَى امْرَأَةٍ يَنْكِحُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ
हमें बताया है [अल हुमैदी अब्दुल्लाह बिन अज़ ज़ुबैर] उन्होंने कहा, हमें बताया है [सुफ़यान] जिन्होंने कहा, कि हमें बताया है [याह्या बिन सईद अल अंसारी] ने कहा, हमें बताया है [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी], कि उन्होंने [अलक़माह बिन वकाश अल लैतसी] को कहते सुना है; मैंने एक बार [उमर बिन अल ख़तथब] को मिम्बर पर कहते सुना; मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कहते सुना: "सभी काम इरादे पर निर्भर करते हैं, और हर व्यक्ति के लिए (इनाम) इस बात पर निर्भर करता है कि) क्या इरादा था; जो कोई भी उस दुनिया के कारण हिजरत करना चाहता है जहाँ वह पहुँचना चाहता है या किसी ऐसी महिला के कारण जिससे वह शादी करना चाहता है, तो उसका हिजरत उसी ओर है जिसके लिए उसने इरादा किया था।"
इमाम बुखारी : 2
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ الْحَارِثَ بْنَ هِشَامٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ يَأْتِيكَ الْوَحْيُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحْيَانًا يَأْتِينِي مِثْلَ صَلْصَلَةِ الْجَرَسِ وَهُوَ أَشَدُّهُ عَلَيَّ فَيُفْصَمُ عَنِّي وَقَدْ وَعَيْتُ عَنْهُ مَا قَالَ وَأَحْيَانًا يَتَمَثَّلُ لِي الْمَلَكُ رَجُلًا فَيُكَلِّمُنِي فَأَعِي مَا يَقُولُ قَالَتْ عَائِشَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ يَنْزِلُ عَلَيْهِ الْوَحْيُ فِي الْيَوْمِ الشَّدِيدِ الْبَرْدِ فَيَفْصِمُ عَنْهُ وَإِنَّ جَبِينَهُ لَيَتَفَصَّدُ عَرَقًا
हमसे कहा गया है कि [अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने कहा, [मलिक] ने हमें [हिशाम बिन उरवाह] से [अपने पिता] से [आयशा] जो मोमिनों की माँ थीं, से बताया कि अल हारिस बिन हिशाम ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूछा: "ऐ अल्लाह के रसूल, आप तक इल्हाम कैसे उतरता है?" अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जवाब दिया: "कभी-कभी यह मुझ तक घंटी बजने की आवाज़ की तरह आता है, और यह मेरे लिए सबसे मुश्किल तरीका है, फिर यह रुक जाता है ताकि मैं समझ सकूँ कि क्या बताया जा रहा है। और कभी-कभी एक फ़रिश्ता आदमी के रूप में आता है और मुझसे बात करता है, तो मैं उसकी बात मानता हूँ।" आयशा ने कहा: "वास्तव में, मैंने एक बार बहुत ठंडे दिन में उन पर इल्हाम उतरते देखा, फिर यह रुक गया, और मैंने उनके माथे से पसीना बहते देखा।"
इमाम बुखारी : 3
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْأَوَّلُ مَا بُدِئَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ الْوَحْيِ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ فِي النَّوْمِ فَكَانَ لَا يَرَى رُؤْيَا إِلَّا جَاءَتْ مِثْلَ فَلَقِ الصُّبْحِ ثُمَّ حُبِّبَ إِلَيْهِ الْخَلَاءُ وَكَانَ يَخْلُو بِغَارِ حِرَاءٍ فَيَتَحَنَّثُ فِيهِ وَهُوَ التَّعَبُّدُ اللَّيَالِيَ ذَوَاتِ الْعَدَدِ قَبْلَ أَنْ يَنْزِعَ إِلَى أَهْلِهِ وَيَتَزَوَّدُ لِذَلِكَ ثُمَّ يَرْجِعُ إِلَى خَدِيجَةَ فَيَتَزَوَّدُ لِمِثْلِهَا حَتَّى جَاءَهُ الْحَقُّ وَهُوَ فِي غَارِ حِرَاءٍ فَجَاءَهُ الْمَلَكُ فَقَالَ اقْرَأْ قَالَ مَا أَنَا بِقَارِئٍ قَالَ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي حَتَّى بَلَغَ مِنِّي الْجَهْدَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ اقْرَأْ قُلْتُ مَا أَنَا بِقَارِئٍ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي الثَّانِيَةَ حَتَّى بَلَغَ مِنِّي الْجَهْدَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ اقْرَأْ فَقُلْتُ مَا أَنَا بِقَارِئٍ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي الثَّالِثَةَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ{ اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ عَلَقٍ اقْرَأْ وَرَبُّكَ الْأَكْرَمُ }فَرَجَعَ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرْجُفُ فُؤَادُهُ فَدَخَلَ عَلَى خَدِيجَةَ بِنْتِ خُوَيْلِدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا فَقَالَ زَمِّلُونِي زَمِّلُونِي فَزَمَّلُوهُ حَتَّى ذَهَبَ عَنْهُ الرَّوْعُ فَقَالَ لِخَدِيجَةَ وَأَخْبَرَهَا الْخَبَرَ لَقَدْ خَشِيتُ عَلَى نَفْسِي فَقَالَتْ خَدِيجَةُ كَلَّا وَاللَّهِ مَا يُخْزِيكَ اللَّهُ أَبَدًا إِنَّكَ لَتَصِلُ الرَّحِمَ وَتَحْمِلُ الْكَلَّ وَتَكْسِبُ الْمَعْدُومَ وَتَقْرِي الضَّيْفَ وَتُعِينُ عَلَى نَوَائِبِ الْحَقِّ فَانْطَلَقَتْ بِهِ خَدِيجَةُ حَتَّى أَتَتْ بِهِ وَرَقَةَ بْنَ نَوْفَلِ بْنِ أَسَدِ بْنِ عَبْدِ الْعُزَّى ابْنَ عَمِّ خَدِيجَةَ وَكَانَ امْرَأً قَدْ تَنَصَّرَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَكَانَ يَكْتُبُ الْكِتَابَ الْعِبْرَانِيَّ فَيَكْتُبُ مِنْ الْإِنْجِيلِ بِالْعِبْرَانِيَّةِ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَكْتُبَ وَكَانَ شَيْخًا كَبِيرًا قَدْ عَمِيَ فَقَالَتْ لَهُ خَدِيجَةُ يَا ابْنَ عَمِّ اسْمَعْ مِنْ ابْنِ أَخِيكَ فَقَالَ لَهُ وَرَقَةُ يَا ابْنَ أَخِي مَاذَا تَرَى فَأَخْبَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَبَرَ مَا رَأَى فَقَالَ لَهُ وَرَقَةُ هَذَا النَّامُوسُ الَّذِي نَزَّلَ اللَّهُ عَلَى مُوسَى يَا لَيْتَنِي فِيهَا جَذَعًا لَيْتَنِي أَكُونُ حَيًّا إِذْ يُخْرِجُكَ قَوْمُكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوَمُخْرِجِيَّ هُمْ قَالَ نَعَمْ لَمْ يَأْتِ رَجُلٌ قَطُّ بِمِثْلِ مَا جِئْتَ بِهِ إِلَّا عُودِيَ وَإِنْ يُدْرِكْنِي يَوْمُكَ أَنْصُرْكَ نَصْرًا مُؤَزَّرًا ثُمَّ لَمْ يَنْشَبْ وَرَقَةُ أَنْ تُوُفِّيَ وَفَتَرَ الْوَحْيُقَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَأَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيَّ قَالَ وَهُوَ يُحَدِّثُ عَنْ فَتْرَةِ الْوَحْيِ فَقَالَ فِي حَدِيثِهِ بَيْنَا أَنَا أَمْشِي إِذْ سَمِعْتُ صَوْتًا مِنْ السَّمَاءِ فَرَفَعْتُ بَصَرِي فَإِذَا الْمَلَكُ الَّذِي جَاءَنِي بِحِرَاءٍ جَالِسٌ عَلَى كُرْسِيٍّ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ فَرُعِبْتُ مِنْهُ فَرَجَعْتُ فَقُلْتُ زَمِّلُونِي زَمِّلُونِي فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ قُمْ فَأَنْذِرْ إِلَى قَوْلِهِ وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ }فَحَمِيَ الْوَحْيُ وَتَتَابَعَ تَابَعَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ وَأَبُو صَالِحٍ وَتَابَعَهُ هِلَالُ بْنُ رَدَّادٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ وَقَالَ يُونُسُ وَمَعْمَرٌ بَوَادِرُهُ
हमें बताया गया है [याह्या बिन बुकैर] ने कहा, हमें [अल लैट्स] से [उकैल] से [इब्न शिहाब] से [उरवाह बिन अज़ ज़ुबैर] से [ऐस्या] - मोमिनीन की माँ - से बताया गया है कि उन्होंने कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर जो वह्य आया, उसकी शुरुआत नींद में एक सच्चे सपने से हुई। और वह तब तक सपना नहीं देखते थे जब तक कि वह सुबह की रोशनी की तरह न दिखे। फिर उन्हें अकेले रहने का शौक हुआ, फिर उन्होंने हिरो की गुफा को चुना और इसे सहा, यानी रात में लंबे समय तक इबादत की और फिर अपने परिवार के पास लौट आए ताकि फिर से सहने के लिए सामान तैयार कर सकें। फिर वह सामान तैयार करने के लिए खदीजा से मिले। आखिरकार अल हक आए और मुझे बहुत कसकर गले लगाया और फिर मुझे छोड़ दिया और फिर कहा: "पढ़ो!" उन्होंने जवाब दिया: "मैं पढ़ नहीं सकता।" तो फरिश्ते ने मुझे पकड़ लिया और मुझे बहुत ज़ोर से गले लगाया फिर मुझे छोड़ दिया और फिर कहा: "पढ़ो!"। उन्होंने जवाब दिया: "मैं पढ़ नहीं सकता।" फ़रिश्ते ने मुझे फिर से पकड़ा और तीसरी बार बहुत ज़ोर से गले लगाया, फिर मुझे छोड़ दिया, और फिर कहा: (अपने बनाने वाले रब का नाम लेकर पढ़ो, उसने इंसान को खून के थक्के से बनाया है। पढ़ो, और तुम्हारा रब सबसे रहम करने वाला है)।" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बेचैनी में अपने परिवार के पास वापस आए। वह खदीजा बिन्त खवाइलिद से मिले और कहा: "मुझे ढक दो, मुझे ढक दो!" जब तक उनका डर गायब नहीं हो गया। फिर उन्होंने खदीजा को बताया कि क्या हुआ था: "मैं अपने बारे में परेशान था।" तो खदीजा ने कहा: "अल्लाह की कसम, अल्लाह तुम्हें हमेशा के लिए नुकसान नहीं पहुँचाएगा, क्योंकि तुम दोस्ती जोड़ने वाले इंसान हो।" फिर खदीजा ने उन्हें खदीजा के चाचा के बेटे वरुकोह बिन नौफ़ल बिन असद बिन अब्दुल उज़्ज़ा से मिलने के लिए बुलाया, जो जाहिलियत के ज़माने में ईसाई थे। उन्होंने हिब्रू में किताबें भी लिखीं, और अल्लाह की इजाज़त से हिब्रू में बाइबिल भी लिखी। उस समय वारुकोह बूढ़ा था और उसकी आँखें अंधी थीं। ख़दीजा ने कहा: "ऐ मेरे चाचा के बेटे, सुनो कि तुम्हारे भाई का बेटा क्या कहता है।" वारुकोह ने कहा: "ऐ मेरे भाई के बेटे, तुमने क्या अनुभव किया है?" तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया कि उसके साथ क्या हुआ था। वारुकोह ने कहा: "यह नामुस है, जैसा कि अल्लाह ने एक बार मूसा को बताया था। ओह, काश मैं अभी भी जवान होता और मैं तब भी जीवित होता जब तुम्हें तुम्हारे लोगों ने निकाल दिया था।" रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: "क्या वे मुझे भगा देंगे?" वारुकोह ने उत्तर दिया: "हाँ। क्योंकि कोई भी आपके साथ नहीं आता है सिवाय इसके कि वे चोट पहुँचाएँ (शत्रुतापूर्ण हों)। यदि मैं उस समय मौजूद होता, तो मैं निश्चित रूप से अपनी क्षमता से आपकी मदद करता।" वारुकोह ने उस घटना का अनुभव नहीं किया जिस पर वह विश्वास करता था मुझे [अबू सलमा बिन अब्दुर्रहमान] ने बताया कि [जाबिर बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] ने वह्य के खालीपन के बारे में बात की थी, जैसा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बयान किया: “जब मैं चल रहा था तो मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी, मैंने उसकी तरफ़ देखा और देखा कि जो फ़रिश्ता मेरे पास हिरो की गुफा में आया था, वह आसमान और ज़मीन के बीच एक कुर्सी पर बैठा था। मैं डर गया और घर चला गया, और कहा: "मुझे ढक दो। मुझे ढक दो।" फिर अल्लाह तआला ने वह्य नाज़िल किया: (ऐ तुम जो ढके हुए हो) अल्लाह के कलाम तक (और मूर्तियों को छोड़ दो)। तब से वह्य लगातार उतरती रही है।” यह हदीस [अब्दुल्ला बिन यूसुफ़] और [अबू सलीह] ने भी सुनाई है और [हिलाल बिन रद्दाद] ने भी [अज़ ज़ुहरी] से। और [यूनुस] ने कहा; और [ममार] ने माना कि उन्होंने इसे अज़ ज़ुहरी से लिया है।
इमाम बुखारी : 4
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ أَبِي عَائِشَةَ قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍفِي قَوْلِهِ تَعَالَى{ لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ }قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَالِجُ مِنْ التَّنْزِيلِ شِدَّةً وَكَانَ مِمَّا يُحَرِّكُ شَفَتَيْهِ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ فَأَنَا أُحَرِّكُهُمَا لَكُمْ كَمَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحَرِّكُهُمَا وَقَالَ سَعِيدٌ أَنَا أُحَرِّكُهُمَا كَمَا رَأَيْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يُحَرِّكُهُمَا فَحَرَّكَ شَفَتَيْهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ }قَالَ جَمْعُهُ لَكَ فِي صَدْرِكَ وَتَقْرَأَهُ{ فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ }قَالَ فَاسْتَمِعْ لَهُ وَأَنْصِتْ{ ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ }ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا أَنْ تَقْرَأَهُ فَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ذَلِكَ إِذَا أَتَاهُ جِبْرِيلُ اسْتَمَعَ فَإِذَا انْطَلَقَ جِبْرِيلُ قَرَأَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا قَرَأَهُ
"हमें [मूसा बिन इस्माइल] ने बताया है, उन्होंने कहा, हमें बताया है [अबू अवाना] ने कहा, कि हमें बताया है [मूसा बिन अबू आइज़िया] ने कहा, हमें [सईद बिन जुबैर] ने [इब्न अब्बास] से अल्लाह तआला के शब्दों के बारे में बताया है: (कुरान (पढ़ने) के लिए अपनी जीभ न हिलाओ क्योंकि आप जल्दी से (इसमें महारत हासिल करना) चाहेंगे।" इब्न अब्बास ने कहा: "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को जो कुछ भी (कुरान) उतारा गया था उसे याद करने की बहुत तीव्र इच्छा थी और उन्होंने अपने होंठ हिलाए।" इब्न अब्बास ने कहा: "मैं अपने होंठों को (इसे सुनाने के लिए) तुम्हारे लिए चलाऊंगा जैसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरे लिए किया था।" सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दोनों होंठ हिलाएँ, फिर अल्लाह तआला का शब्द उतरा: कुरान (पढ़ने) के लिए अपनी जीभ न हिलाओ क्योंकि आप इसे जल्दी से (महारत हासिल करना) चाहेंगे। वास्तव में, यह इसका मतलब यह है कि अल्लाह इसे तुम्हारे सीने में जमा करता है (याद करने के लिए) और फिर तुम इसे पढ़ते हो: "जब हम इसे पढ़ना खत्म कर लें, तो फिर पढ़ना शुरू करो।" इसका मतलब है: "सुनो और चुप रहो"। फिर अल्लाह तआला ने कहा: "तो, यह सच में हमारे खर्चे पर है कि व्याख्या की जाती है। इसका मतलब है: "और इसे पढ़ना हमारा फ़र्ज़ है" और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उस समय से जब जिब्रील अलैहि वसल्लम उनके पास आए, तो उन्होंने उनकी बात सुनी। और जब जिब्रील अलैहि वसल्लम चले गए, तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे (अपने साथियों को) पढ़ा जैसे जिब्रील अलैहि वसल्लम ने उन्हें पढ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
इमाम बुखारी : 5
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ قَالَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنْ الزُّهْرِيِّ ح و حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ قَالَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ وَمَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ نَحْوَهُ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْوَدَ النَّاسِ وَكَانَ أَجْوَدُ مَا يَكُونُ فِي رَمَضَانَ حِينَ يَلْقَاهُ جِبْرِيلُ وَكَانَ يَلْقَاهُ فِي كُلِّ لَيْلَةٍ مِنْ رَمَضَانَ فَيُدَارِسُهُ الْقُرْآنَ فَلَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْوَدُ بِالْخَيْرِ مِنْ الرِّيحِ الْمُرْسَلَةِ
हमें बताया है [अब्दान] उन्होंने कहा, हमें बताया है [अब्दुल्ला] ने हमें बताया है [यूनुस] ने [अज़ ज़ुहरी] से और उसी रिवायत के साथ, हमें यह भी बताया है [बिसयर बिन मुहम्मद] ने कहा, हमें बताया है [अब्दुल्ला] ने कहा, हमें [यूनुस] और [मा'मार] ने [अज़ ज़ुहरी] से बताया है जैसा कि दूसरों ने कहा, हमें बताया है [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] ने [इब्न अब्बास] से कहा, कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे विनम्र इंसान थे, खासकर रमज़ान के महीने में जब फ़रिश्ता जिब्रील अलैहि वसल्लम उनसे मिले, और यह जिब्रील अलैहि वसल्लम ही थे जो रमज़ान के महीने में हर रात उनके पास आते थे, जहाँ जिब्रील अलैहि वसल्लम ने कुरान पढ़ाया। वास्तव में, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बहती हवा से भी अधिक विनम्र थे।
इमाम बुखारी : 6
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا سُفْيَانَ بْنَ حَرْبٍ أَخْبَرَهُأَنَّ هِرَقْلَ أَرْسَلَ إِلَيْهِ فِي رَكْبٍ مِنْ قُرَيْشٍ وَكَانُوا تِجَارًا بِالشَّأْمِ فِي الْمُدَّةِ الَّتِي كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَادَّ فِيهَا أَبَا سُفْيَانَ وَكُفَّارَ قُرَيْشٍ فَأَتَوْهُ وَهُمْ بِإِيلِيَاءَ فَدَعَاهُمْ فِي مَجْلِسِهِ وَحَوْلَهُ عُظَمَاءُ الرُّومِ ثُمَّ دَعَاهُمْ وَدَعَا بِتَرْجُمَانِهِ فَقَالَ أَيُّكُمْ أَقْرَبُ نَسَبًا بِهَذَا الرَّجُلِ الَّذِي يَزْعُمُ أَنَّهُ نَبِيٌّ فَقَالَ أَبُو سُفْيَانَ فَقُلْتُ أَنَا أَقْرَبُهُمْ نَسَبًا فَقَالَ أَدْنُوهُ مِنِّي وَقَرِّبُوا أَصْحَابَهُ فَاجْعَلُوهُمْ عِنْدَ ظَهْرِهِ ثُمَّ قَالَ لِتَرْجُمَانِهِ قُلْ لَهُمْ إِنِّي سَائِلٌ هَذَا عَنْ هَذَا الرَّجُلِ فَإِنْ كَذَبَنِي فَكَذِّبُوهُ فَوَاللَّهِ لَوْلَا الْحَيَاءُ مِنْ أَنْ يَأْثِرُوا عَلَيَّ كَذِبًا لَكَذَبْتُ عَنْهُ ثُمَّ كَانَ أَوَّلَ مَا سَأَلَنِي عَنْهُ أَنْ قَالَ كَيْفَ نَسَبُهُ فِيكُمْ قُلْتُ هُوَ فِينَا ذُو نَسَبٍ قَالَ فَهَلْ قَالَ هَذَا الْقَوْلَ مِنْكُمْ أَحَدٌ قَطُّ قَبْلَهُ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ قُلْتُ لَا قَالَ فَأَشْرَافُ النَّاسِ يَتَّبِعُونَهُ أَمْ ضُعَفَاؤُهُمْ فَقُلْتُ بَلْ ضُعَفَاؤُهُمْ قَالَ أَيَزِيدُونَ أَمْ يَنْقُصُونَ قُلْتُ بَلْ يَزِيدُونَ قَالَ فَهَلْ يَرْتَدُّ أَحَدٌ مِنْهُمْ سَخْطَةً لِدِينِهِ بَعْدَ أَنْ يَدْخُلَ فِيهِ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ كُنْتُمْ تَتَّهِمُونَهُ بِالْكَذِبِ قَبْلَ أَنْ يَقُولَ مَا قَالَ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ يَغْدِرُ قُلْتُ لَا وَنَحْنُ مِنْهُ فِي مُدَّةٍ لَا نَدْرِي مَا هُوَ فَاعِلٌ فِيهَا قَالَ وَلَمْ تُمْكِنِّي كَلِمَةٌ أُدْخِلُ فِيهَا شَيْئًا غَيْرُ هَذِهِ الْكَلِمَةِ قَالَ فَهَلْ قَاتَلْتُمُوهُ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ فَكَيْفَ كَانَ قِتَالُكُمْ إِيَّاهُ قُلْتُ الْحَرْبُ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُ سِجَالٌ يَنَالُ مِنَّا وَنَنَالُ مِنْهُ قَالَ مَاذَا يَأْمُرُكُمْ قُلْتُ يَقُولُ اعْبُدُوا اللَّهَ وَحْدَهُ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَاتْرُكُوا مَا يَقُولُ آبَاؤُكُمْ وَيَأْمُرُنَا بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَالصِّدْقِ وَالْعَفَافِ وَالصِّلَةِ فَقَالَ لِلتَّرْجُمَانِ قُلْ لَهُ سَأَلْتُكَ عَنْ نَسَبِهِ فَذَكَرْتَ أَنَّهُ فِيكُمْ ذُو نَسَبٍ فَكَذَلِكَ الرُّسُلُ تُبْعَثُ فِي نَسَبِ قَوْمِهَا وَسَأَلْتُكَ هَلْ قَالَ أَحَدٌ مِنْكُمْ هَذَا الْقَوْلَ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا فَقُلْتُ لَوْ كَانَ أَحَدٌ قَالَ هَذَا الْقَوْلَ قَبْلَهُ لَقُلْتُ رَجُلٌ يَأْتَسِي بِقَوْلٍ قِيلَ قَبْلَهُ وَسَأَلْتُكَ هَلْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا قُلْتُ فَلَوْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ قُلْتُ رَجُلٌ يَطْلُبُ مُلْكَ أَبِيهِ وَسَأَلْتُكَ هَلْ كُنْتُمْ تَتَّهِمُونَهُ بِالْكَذِبِ قَبْلَ أَنْ يَقُولَ مَا قَالَ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا فَقَدْ أَعْرِفُ أَنَّهُ لَمْ يَكُنْ لِيَذَرَ الْكَذِبَ عَلَى النَّاسِ وَيَكْذِبَ عَلَى اللَّهِ وَسَأَلْتُكَ أَشْرَافُ النَّاسِ اتَّبَعُوهُ أَمْ ضُعَفَاؤُهُمْ فَذَكَرْتَ أَنَّ ضُعَفَاءَهُمْ اتَّبَعُوهُ وَهُمْ أَتْبَاعُ الرُّسُلِ وَسَأَلْتُكَ أَيَزِيدُونَ أَمْ يَنْقُصُونَ فَذَكَرْتَ أَنَّهُمْ يَزِيدُونَ وَكَذَلِكَ أَمْرُ الْإِيمَانِ حَتَّى يَتِمَّ وَسَأَلْتُكَ أَيَرْتَدُّ أَحَدٌ سَخْطَةً لِدِينِهِ بَعْدَ أَنْ يَدْخُلَ فِيهِ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا وَكَذَلِكَ الْإِيمَانُ حِينَ تُخَالِطُ بَشَاشَتُهُ الْقُلُوبَ وَسَأَلْتُكَ هَلْ يَغْدِرُ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا وَكَذَلِكَ الرُّسُلُ لَا تَغْدِرُ وَسَأَلْتُكَ بِمَا يَأْمُرُكُمْ فَذَكَرْتَ أَنَّهُ يَأْمُرُكُمْ أَنْ تَعْبُدُوا اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَيَنْهَاكُمْ عَنْ عِبَادَةِ الْأَوْثَانِ وَيَأْمُرُكُمْ بِالصَّلَاةِ وَالصِّدْقِ وَالْعَفَافِ فَإِنْ كَانَ مَا تَقُولُ حَقًّا فَسَيَمْلِكُ مَوْضِعَ قَدَمَيَّ هَاتَيْنِ وَقَدْ كُنْتُ أَعْلَمُ أَنَّهُ خَارِجٌ لَمْ أَكُنْ أَظُنُّ أَنَّهُ مِنْكُمْ فَلَوْ أَنِّي أَعْلَمُ أَنِّي أَخْلُصُ إِلَيْهِ لَتَجَشَّمْتُ لِقَاءَهُ وَلَوْ كُنْتُ عِنْدَهُ لَغَسَلْتُ عَنْ قَدَمِهِ ثُمَّ دَعَا بِكِتَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي بَعَثَ بِهِ دِحْيَةُ إِلَى عَظِيمِ بُصْرَى فَدَفَعَهُ إِلَى هِرَقْلَ فَقَرَأَهُ فَإِذَا فِيهِ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ مِنْ مُحَمَّدٍ عَبْدِ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى هِرَقْلَ عَظِيمِ الرُّومِ سَلَامٌ عَلَى مَنْ اتَّبَعَ الْهُدَى أَمَّا بَعْدُ فَإِنِّي أَدْعُوكَ بِدِعَايَةِ الْإِسْلَامِ أَسْلِمْ تَسْلَمْ يُؤْتِكَ اللَّهُ أَجْرَكَ مَرَّتَيْنِ فَإِنْ تَوَلَّيْتَ فَإِنَّ عَلَيْكَ إِثْمَ الْأَرِيسِيِّينَ وَ{ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَى كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَنْ لَا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِنْ دُونِ اللَّهِ فَإِنْ تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ }قَالَ أَبُو سُفْيَانَ فَلَمَّا قَالَ مَا قَالَ وَفَرَغَ مِنْ قِرَاءَةِ الْكِتَابِ كَثُرَ عِنْدَهُ الصَّخَبُ وَارْتَفَعَتْ الْأَصْوَاتُ وَأُخْرِجْنَا فَقُلْتُ لِأَصْحَابِي حِينَ أُخْرِجْنَا لَقَدْ أَمِرَ أَمْرُ ابْنِ أَبِي كَبْشَةَ إِنَّهُ يَخَافُهُ مَلِكُ بَنِي الْأَصْفَرِ فَمَا زِلْتُ مُوقِنًا أَنَّهُ سَيَظْهَرُ حَتَّى أَدْخَلَ اللَّهُ عَلَيَّ الْإِسْلَامَ وَكَانَ ابْنُ النَّاظُورِ صَاحِبُ إِيلِيَاءَ وَهِرَقْلَ سُقُفًّا عَلَى نَصَارَى الشَّأْمِ يُحَدِّثُ أَنَّ هِرَقْلَ حِينَ قَدِمَ إِيلِيَاءَ أَصْبَحَ يَوْمًا خَبِيثَ النَّفْسِ فَقَالَ بَعْضُ بَطَارِقَتِهِ قَدْ اسْتَنْكَرْنَا هَيْئَتَكَ قَالَ ابْنُ النَّاظُورِ وَكَانَ هِرَقْلُ حَزَّاءً يَنْظُرُ فِي النُّجُومِ فَقَالَ لَهُمْ حِينَ سَأَلُوهُ إِنِّي رَأَيْتُ اللَّيْلَةَ حِينَ نَظَرْتُ فِي النُّجُومِ مَلِكَ الْخِتَانِ قَدْ ظَهَرَ فَمَنْ يَخْتَتِنُ مِنْ هَذِهِ الْأُمَّةِ قَالُوا لَيْسَ يَخْتَتِنُ إِلَّا الْيَهُودُ فَلَا يُهِمَّنَّكَ شَأْنُهُمْ وَاكْتُبْ إِلَى مَدَايِنِ مُلْكِكَ فَيَقْتُلُوا مَنْ فِيهِمْ مِنْ الْيَهُودِ فَبَيْنَمَا هُمْ عَلَى أَمْرِهِمْ أُتِيَ هِرَقْلُ بِرَجُلٍ أَرْسَلَ بِهِ مَلِكُ غَسَّانَ يُخْبِرُ عَنْ خَبَرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا اسْتَخْبَرَهُ هِرَقْلُ قَالَ اذْهَبُوا فَانْظُرُوا أَمُخْتَتِنٌ هُوَ أَمْ لَا فَنَظَرُوا إِلَيْهِ فَحَدَّثُوهُ أَنَّهُ مُخْتَتِنٌ وَسَأَلَهُ عَنْ الْعَرَبِ فَقَالَ هُمْ يَخْتَتِنُونَ فَقَالَ هِرَقْلُ هَذَا مُلْكُ هَذِهِ الْأُمَّةِ قَدْ ظَهَرَ ثُمَّ كَتَبَ هِرَقْلُ إِلَى صَاحِبٍ لَهُ بِرُومِيَةَ وَكَانَ نَظِيرَهُ فِي الْعِلْمِ وَسَارَ هِرَقْلُ إِلَى حِمْصَ فَلَمْ يَرِمْ حِمْصَ حَتَّى أَتَاهُ كِتَابٌ مِنْ صَاحِبِهِ يُوَافِقُ رَأْيَ هِرَقْلَ عَلَى خُرُوجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَّهُ نَبِيٌّ فَأَذِنَ هِرَقْلُ لِعُظَمَاءِ الرُّومِ فِي دَسْكَرَةٍ لَهُ بِحِمْصَ ثُمَّ أَمَرَ بِأَبْوَابِهَا فَغُلِّقَتْ ثُمَّ اطَّلَعَ فَقَالَ يَا مَعْشَرَ الرُّومِ هَلْ لَكُمْ فِي الْفَلَاحِ وَالرُّشْدِ وَأَنْ يَثْبُتَ مُلْكُكُمْ فَتُبَايِعُوا هَذَا النَّبِيَّ فَحَاصُوا حَيْصَةَ حُمُرِ الْوَحْشِ إِلَى الْأَبْوَابِ فَوَجَدُوهَا قَدْ غُلِّقَتْ فَلَمَّا رَأَى هِرَقْلُ نَفْرَتَهُمْ وَأَيِسَ مِنْ الْإِيمَانِ قَالَ رُدُّوهُمْ عَلَيَّ وَقَالَ إِنِّي قُلْتُ مَقَالَتِي آنِفًا أَخْتَبِرُ بِهَا شِدَّتَكُمْ عَلَى دِينِكُمْ فَقَدْ رَأَيْتُ فَسَجَدُوا لَهُ وَرَضُوا عَنْهُ فَكَانَ ذَلِكَ آخِرَ شَأْنِ هِرَقْلَرَوَاهُ صَالِحُ بْنُ كَيْسَانَ وَيُونُسُ وَمَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ
हमें बताया है [अबू अल यमन अल हकम बिन नफी] उन्होंने कहा, हमें बताया है [स्यू'ऐब] [अज़ ज़ुहरी] से मुझे बताया है [उबैदुल्ला बिन अब्दुल्ला बिन 'उतबाह बिन मसूद] कि [अब्दुल्ला बिन 'अब्बास] ने उन्हें बताया है कि [अबू सुफ़यान बिन हर्ब] ने उन्हें बताया है; कि हेराक्लियस को एक कुरैश व्यापारी समूह मिला था, जो उस समय सीरिया की धरती पर एक व्यापारिक अभियान पर था जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और अबू सुफ़यान और कुरैश काफिरों के बीच समझौता लागू हुआ था। जब वे इलिया में रुके तो वे हेराक्लियस के निमंत्रण पर उसकी सभा में बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने पर हेराक्लियस से मिले, उस समय हेराक्लियस रोमन गणमान्य लोगों के साथ था। हेराक्लियस ने उनसे दुभाषिए के माध्यम से बात की। हेराक्लियस ने कहा; "तुममें से किसका उस व्यक्ति के साथ सबसे करीबी पारिवारिक रिश्ता है जो पैगंबर होने का दावा करता है?" अबू सुफ़यान ने कहा; तो मैंने जवाब दिया; "मैं ही उसके साथ सबसे करीबी पारिवारिक रिश्ता रखता हूँ।" हेराक्लियस ने कहा; "उसे मेरे और उसके दोस्तों के करीब लाओ।" तो उन्होंने कुरैश को अबू सुफ़यान के पीछे लगा दिया। फिर हेराक्लियस ने अपने इंटरप्रेटर से कहा: "उसे बताओ कि मैंने उससे उस आदमी के बारे में पूछा था जो पैगंबर होने का दावा करता था। अगर उसने मुझसे झूठ बोला है तो तुम भी उससे झूठ बोलो। "अल्लाह की कसम, अगर मुझ पर झूठा होने के इल्ज़ामों से शर्मिंदगी न होती तो मैं उससे झूठ बोलता।" अबू सुफ़यान ने कहा; तो उसने मुझसे उसके (पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बारे में सबसे पहले पूछा: "तुम्हारे बीच उसके खानदान की क्या जगह है?" मैंने जवाब दिया: "वह अच्छे (कुलीन) खानदान का है।" उसने फिर पूछा: "क्या उससे पहले किसी और ने कभी ऐसा कहा है?" उसने फिर पूछा: "क्या उसके पिता राजा थे?" मैंने जवाब दिया: "जो लोग उसे मानते हैं वे भी मामूली लोग हैं।" उसने फिर पूछा: "क्या मानने वाले बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं?" मैंने जवाब दिया: "बढ़ रहे हैं"। उसने फिर पूछा: "क्या कोई ऐसा है जिसने अपने धर्म से नाराज़ होकर धर्म छोड़ दिया हो?" मैंने जवाब दिया: "कुछ नहीं"। उसने फिर पूछा: "क्या तुमने उसे झूठ बोलते हुए पाया इससे पहले कि वह कहे उसने क्या कहा?" मैंने जवाब दिया: "कभी नहीं"। उसने फिर पूछा: "क्या उसने कभी धोखा दिया है?" मैंने जवाब दिया: "कभी नहीं। जब हम उसके साथ घूमते थे, तो उसने ऐसा कभी नहीं किया।" अबू सुफ़यान ने कहा: "मैं इस तरह के शब्दों के अलावा कुछ और बता नहीं सकता।" उसने फिर पूछा: "क्या तुम लोग लड़ रहे हो?" मैंने जवाब दिया: "हाँ"। उसने फिर पूछा: "जंग कैसे खत्म हुई?" मैंने जवाब दिया: "हमारे और उसके बीच बहुत ज़्यादा जंग है। कभी वह हमें हराता है, कभी हम उसे हराते हैं।" उसने फिर पूछा: "उसने तुम्हें क्या करने का हुक्म दिया?" मैंने जवाब दिया: "उसने हमें हुक्म दिया; 'अल्लाह की इबादत करो बिना किसी को उसके साथ शरीक किए, और जो तुम्हारे पुरखों ने कहा है उसे पीछे छोड़ दो।' फिर हेराक्लियस ने अपने ट्रांसलेटर से कहा: "उसे बताओ, मैंने तुमसे इस आदमी के खानदान के बारे में पूछा था, तुमने कहा कि वह अमीर खानदान का था। इसी तरह, यह आदमी अपने लोगों के खानदान में पला-बढ़ा था। और मैंने तुमसे पूछा कि क्या उससे पहले किसी ने यह कहा था जो उसने कहा, तुमने कहा नहीं। अगर यह कहा जाता कि उससे पहले किसी ने यह कहा था, तो मैं इस आदमी को उससे पहले किसी ऐसे इंसान की नकल करने वाला मानता जिसने यही बात कही थी। मैंने तुमसे यह भी पूछा कि क्या उसके पिता शाही खानदान के थे, तुमने कहा नहीं। मैंने कहा कि अगर उसके पिता शाही खानदान के होते, तो यह आदमी अपने पिता का राज मांग रहा होता। और मैंने तुमसे यह भी पूछा कि क्या तुमने उसे कभी झूठ बोलते हुए पाया, इससे पहले कि उसने यह कहा, तुमने कहा नहीं। सच में, मैं समझता हूँ कि अगर वह लोगों से भी झूठ बोलने की हिम्मत नहीं करता, तो अल्लाह से तो दूर की बात है। और मैंने तुमसे यह भी पूछा, जो लोग उसे फॉलो करते हैं वे इज्ज़तदार लोग हैं या नीच लोग?" तुमने कहा कि नीच लोग उसे फॉलो करते हैं। सच में, वे मैसेंजर के फॉलोवर हैं। मैंने तुमसे यह भी पूछा कि उसके फॉलोवर बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं, तुमने कहा कि वे बढ़ रहे हैं। और ईमान के साथ भी ऐसा ही होता है जब तक वह परफ़ेक्ट न हो जाए। मैंने आपसे यह भी पूछा है कि क्या किसी ने इसलिए धर्म छोड़ा है क्योंकि वह अपने धर्म से नाराज़ था। आपने जवाब दिया नहीं। और ईमान ऐसा ही होता है जब वह दिल में बढ़ता और बढ़ता है। मैंने आपसे यह भी पूछा कि क्या उसने कभी धोखा दिया है, आपने जवाब दिया कभी नहीं। और इसी तरह रसूल धोखा नहीं दे सकते थे। और मैंने आपसे यह भी पूछा है कि उसने आपको क्या करने का हुक्म दिया, आपने जवाब दिया कि उसने आपको अल्लाह की इबादत करने का हुक्म दिया, उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न करने का, और मूर्तियों की पूजा करने से मना किया, उसने आपको नमाज़ कायम रखने, ज़कात देने, सच बोलने, एक-दूसरे को माफ़ करने और दोस्ती बनाए रखने का भी हुक्म दिया। अगर आपकी हर बात सच है, तो वह ज़रूर मेरे पैरों के नीचे राज करेगा। मुझे सच में शक था कि वह अभी आपके बीच नहीं है, अगर मुझे उस तक पहुँचने का रास्ता पता होता, तो बेशक मैं उसे ढूँढ़ने की इतनी कोशिश करता कि जब मैं उसके पास होता तो ज़रूर उसके पैर धोता। फिर हेराक्लियस ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक चिट्ठी मांगी जो दीहिया बसरा के शासकों के लिए लाई थी। तो उसने चिट्ठी हेराक्लियस को दी, तो उसने उसे पढ़ा और उसमें लिखा था: "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम। मुहम्मद, अल्लाह के बंदे और उनके रसूल की तरफ से हेराक्लियस के लिए। रोमन शासक, जो लोग निर्देशों का पालन करते हैं, उनके लिए सुरक्षा। फिर, मैं तुम्हें इस्लाम के बुलावे के साथ बुलाता हूँ; इस्लाम में आओ, फिर तुम सुरक्षित रहोगे, अल्लाह तुम्हें दोगुना इनाम देगा। लेकिन अगर तुम मुँह मोड़ते हो, तो तुम अपने लोगों के गुनाहों का बोझ उठाओगे, और: ऐ किताब वालों, इस फैसले पर आओ (पालन करो) कि हमारे और तुम्हारे बीच कोई झगड़ा नहीं है, कि हम अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं करते और हम उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराते और न ही हममें से कोई अल्लाह के अलावा किसी को रब बनाता है।" अगर वे मुँह मोड़ते हैं, तो उनसे कहो: "देखो, हम वे लोग हैं जिन्होंने (अल्लाह के) आगे समर्पण किया है।" अबू सुफ़यान ने कहा: "हेराक्लियस ने जो कहा और चिट्ठी पढ़ी, उसके बाद हंगामा और ज़ोरदार आवाज़ें हुईं, इसलिए हमें बाहर निकाल दिया गया। हमें बाहर निकाले जाने के बाद मैंने अपने दोस्तों से कहा: "सच में उसे अबू कबस्याह के बेटे के मामले में बुलाया गया है। हेराक्लियस रोमन साम्राज्य को लेकर परेशान था।" उस समय मुझे भी चिंता थी कि मुहम्मद जीत जाएगा, जब तक कि आखिरकार (वह एहसास गायब नहीं हो गया) अल्लाह ने मुझे इस्लाम कबूल करवा दिया। और इलिया के एक अमीर आदमी इब्न अन नज़ूर थे और हेराक्लियस एक ईसाई बिशप थे, उन्होंने कहा कि एक दिन जब हेराक्लियस इलिया से मिलने गए तो वह बहुत परेशान थे, उनके कुछ युद्ध कमांडरों ने कहा: "सच में हम तुम्हारी हालत से इनकार करते हैं।" इसके अलावा, इब्न नज़हुर ने कहा, "हेराक्लियस एक ज्योतिषी था जो हमेशा सितारों की चाल पर ध्यान देता था। उसने एक बार पुजारियों के एक सवाल का जवाब दिया जिन्होंने उससे पूछा था; "एक रात जब मैं सितारों की चाल देख रहा था, तो मैंने देखा कि खितान राजा का जन्म हुआ था, इन लोगों में से किसका खतना हुआ था?" पुजारियों ने जवाब दिया; "सिर्फ़ यहूदियों का खतना हुआ था, यहूदियों की वजह से चिंता मत करो। बस अपने राज्य के सभी देशों को आदेश दो, ताकि उस देश के यहूदियों को मार दिया जाए।" उस समय, बनी ग़स्सान के राजा का एक दूत हेराक्लियस के पास अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बारे में बताने के लिए आया था। जब उस आदमी ने कहानी सुना दी, तो हेराक्लियस ने उसे यह देखने के लिए जाँच करने का आदेश दिया कि उसका खतना हुआ है या नहीं। जाँच के बाद, पता चला कि वह सच में काला था। तब लोगों ने हेराक्लियस को बताया। हेराक्लियस ने उस व्यक्ति से दूसरे अरबों के बारे में पूछा, क्या उनका खतना हुआ है या नहीं?" उसने जवाब दिया; "सभी अरबों का खतना हो चुका है।" हेराक्लियस ने कहा; "यह उम्माह का राजा है, सच में यही पैदा हुआ है।" फिर हेराक्लियस ने रोम में अपने एक दोस्त को चिट्ठी भेजी, जिसकी जानकारी हेराक्लियस के बराबर थी (पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म के बारे में बताने के लिए)। इस बीच, वह हिम्शा देश की ओर अपना सफ़र जारी रखता रहा, लेकिन हिम्शा पहुँचने से पहले ही उसके दोस्त के खत का जवाब आ गया था। उसका दोस्त हेराक्लियस की इस राय से सहमत था कि मुहम्मद का जन्म हो चुका है और वह सच में एक पैगंबर थे। फिर हेराक्लियस ने रोमन अधिकारियों को हिम्शा में अपने घर आने के लिए बुलाया, मीटिंग में सबके आने के बाद, हेराक्लियस ने सभी दरवाज़े बंद करने का आदेश दिया। फिर उसने कहा; 'ऐ रम के लोगों, क्या तुम सब शानदार जीत और तरक्की हासिल करोगे, जबकि राज हमारे हाथ में रहेगा?' ये बातें सुनकर, वे जंगली गधों की तरह भाग गए, भले ही सभी दरवाज़े बंद थे। ऐसी हालत देखकर, हेराक्लियस ने उम्मीद छोड़ दी कि वे (मुहम्मद की नबी होने पर) यकीन करेंगे। फिर उसने सबको अपनी-अपनी जगह पर लौटने का हुक्म दिया और कहा; "असल में, मैंने जो पहले कहा था, वह सिर्फ़ तुम सबकी मज़बूती को परखने के लिए था। अब मैंने वह मज़बूती देख ली है।" फिर वे हेराक्लियस के सामने झुके और वे उससे खुश हुए। इस तरह हेराक्लियस की कहानी खत्म होती है। इसे [सालिह बिन कैसन] और [यूनुस] और [मा'मार] ने [अज़ ज़ुहरी] से सुनाया है।
इमाम बुखारी : 7
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى قَالَ أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَالْحَجِّ وَصَوْمِ رَمَضَانَ
हमें [अब्दुल्ला बिन मूसा] ने बताया है, हमें [हंजलाह बिन अबू सुफ़यान] ने [इकरीमा बिन खालिद] से बताया है [इब्न उमर] ने कहा: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "इस्लाम पाँच (नींव) पर बना है; इस बात की गवाही कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं है और बेशक मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ कायम करते हैं, ज़कात देते हैं, हज करते हैं और रमज़ान में रोज़े रखते हैं।"
इमाम बुखारी : 8
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْجُعْفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ بِلَالٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْإِيمَانُ بِضْعٌ وَسِتُّونَ شُعْبَةً وَالْحَيَاءُ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِ
हमें बताया है [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद अल जुफी] उन्होंने कहा, हमें बताया है [अबू अमीर अल अकादी] जिन्होंने कहा, कि हमें बताया है [सुलेमान बिन बिलाल] [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अबू सलेह] से [अबू हुरैरा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: "विश्वास की साठ से अधिक शाखाएं हैं, और शर्म विश्वास का हिस्सा है।"
इमाम बुखारी : 9
حَدَّثَنَا آدَمُ بْنُ أَبِي إِيَاسٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي السَّفَرِ وَإِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُسْلِمُ مَنْ سَلِمَ الْمُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ وَالْمُهَاجِرُ مَنْ هَجَرَ مَا نَهَى اللَّهُ عَنْهُقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ وَقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ هُوَ ابْنُ أَبِي هِنْدٍ عَنْ عَامِرٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ دَاوُدَ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें बताया गया है [आदम बिन अबू इयास] ने कहा, हमें [स्यूबा] को [अब्दुल्ला बिन अबू अस सफर] और [इस्माईल बिन अबू खालिद] को [असी स्याबी] से [अब्दुल्ला बिन अमरू] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया गया है, उन्होंने कहा: "एक मुसलमान वह व्यक्ति है जिसके शब्द और हाथ मुसलमानों के लिए सुरक्षित हैं, और एक मुहाजिर वह व्यक्ति है जो अल्लाह ने जो मना किया है उसे छोड़ देता है। अबू अब्दुल्ला ने कहा; और [अबू मुअविया] ने हमें बताया है [दाऊद] वह ['अमीर] का बेटा है, ने कहा; मैंने [अब्दुल्ला], जिसका मतलब इब्न 'अमरू है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना और कहा [अब्दुल अ'ला] ने ['दाऊद] से ['अमीर] से [अब्दुल्ला] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वसल्लम
इमाम बुखारी : 10
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقُرَشِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بُرْدَةَ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُّ الْإِسْلَامِ أَفْضَلُ قَالَ مَنْ سَلِمَ الْمُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ
उन्होंने हमें बताया [सईद बिन यह्या बिन सईद अल कुरैसी] उन्होंने कहा, "उन्होंने हमें बताया [मेरे पिता] ने कहा, कि उन्होंने हमें [अबू बुरदा बिन अब्दुल्ला बिन अबू बुरदा] ने [अबू बुरदा] से [अबू मूसा] से कहा: 'अल्लाह के रसूल, कौन सा इस्लाम सबसे अच्छा है?'
इमाम बुखारी : 11
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَزِيدَ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّ الْإِسْلَامِ خَيْرٌ قَالَ تُطْعِمُ الطَّعَامَ وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ
हमें बताया है ['अमरू बिन खालिद] ने कहा, हमें [अल लैट्स] ने [यज़ीद] से [अबू अल खैर] से [अब्दुल्ला बिन 'अमरू] से बताया है; किसी ने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछा; "कौन सा इस्लाम सबसे अच्छा है?" पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: "तुम खाना दो, उन लोगों को सलाम करो जिन्हें तुम जानते हो और जिन्हें तुम नहीं जानते।"
इमाम बुखारी : 12
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ شُعْبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَنَسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ
हमसे वर्णित है [मुसद्दद] ने कहा, हमसे वर्णित है [यहिया] ने [स्यूबा] से [कोतदा] से [अनस] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से और [हुसैन अल मुअल्लिम] ने कहा, हमसे वर्णित है [कोतदा] [अनस] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: "तुम में से कोई भी तब तक विश्वास नहीं करता जब तक वह अपने भाई से वैसा ही प्रेम न करे जैसा वह अपने लिए करता है।"
इमाम बुखारी : 13
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ
हमें बताया गया है [अबू अल यमन] ने कहा, हमें बताया गया है [स्यू'एब] ने कहा, हमें [अबू अज़ ज़नद] को [अल अ'राज] से [अबू हुरैरा] से बताया गया है, कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने कहा: "अतः उस अल्लाह की कसम जिसके हाथ में मेरी जान है, तुममें से कोई तब तक ईमान नहीं लाएगा जब तक कि मुझे उसके माता-पिता और उसकी संतानों से अधिक प्यार न किया जाए।"
इमाम बुखारी : 14
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنَا آدَمُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
यह हमारे लिए वर्णित है [याकूब बिन इब्राहीम] ने कहा, यह हमारे लिए [इब्न उलय्या] ने [अब्दुल अज़ीज़ बिन शुहैब] से [अनस] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से वर्णित किया गया है और यह भी हमारे लिए वर्णित है [आदम] ने कहा, यह हमारे लिए [स्यूबा] ने [कोतदा] से [अनस] से वर्णित किया है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "तुममें से कोई भी तब तक विश्वास नहीं करेगा जब तक कि वह अपने माता-पिता, अपने बच्चों और सभी मानव जाति से अधिक प्यार न करे।"
इमाम बुखारी : 15
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ وَجَدَ حَلَاوَةَ الْإِيمَانِ أَنْ يَكُونَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِمَّا سِوَاهُمَا وَأَنْ يُحِبَّ الْمَرْءَ لَا يُحِبُّهُ إِلَّا لِلَّهِ وَأَنْ يَكْرَهَ أَنْ يَعُودَ فِي الْكُفْرِ كَمَا يَكْرَهُ أَنْ يُقْذَفَ فِي النَّارِ
हमें बताया गया है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] ने कहा, हमें बताया गया है [अब्दुल वहाब अत्स त्सकाफी] ने कहा, हमें बताया गया है [अय्यूब] [अबू क़िलबा] से [अनस बिन मलिक] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उन्होंने कहा: "तीन चीजें हैं जो यदि किसी व्यक्ति में हैं, तो वह विश्वास की मिठास प्राप्त करेगा: उसने अल्लाह और उसके रसूल को इन दोनों के अलावा अन्य से अधिक प्रिय बनाया है। यदि वह किसी से प्रेम करता है, तो वह उससे अल्लाह के लिए ही प्रेम करता है। और वह अविश्वास में लौटने से उतना ही घृणा करता है जितना कि वह नरक में डाले जाने से घृणा करता है।"
इमाम बुखारी : 16
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَبْرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسًاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ آيَةُ الْإِيمَانِ حُبُّ الْأَنْصَارِ وَآيَةُ النِّفَاقِ بُغْضُ الْأَنْصَارِ
हमें बताया है [अबू अल वालिद] ने कहा, हमें बताया है [स्यूबा] ने मुझे बताया है [अब्दुल्ला बिन अब्दुल्ला बिन जबार] ने कहा; मैंने [अनस] को पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, उन्होंने कहा: "ईमान की निशानी अंसार से प्यार करना है और निफ़ाक की निशानी अंसार से नफ़रत करना है"।
इमाम बुखारी : 17
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو إِدْرِيسَ عَائِذُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عُبَادَةَ بْنَ الصَّامِتِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُوَكَانَ شَهِدَ بَدْرًا وَهُوَ أَحَدُ النُّقَبَاءِ لَيْلَةَ الْعَقَبَةِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَحَوْلَهُ عِصَابَةٌ مِنْ أَصْحَابِهِ بَايِعُونِي عَلَى أَنْ لَا تُشْرِكُوا بِاللَّهِ شَيْئًا وَلَا تَسْرِقُوا وَلَا تَزْنُوا وَلَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُمْ وَلَا تَأْتُوا بِبُهْتَانٍ تَفْتَرُونَهُ بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَأَرْجُلِكُمْ وَلَا تَعْصُوا فِي مَعْرُوفٍ فَمَنْ وَفَى مِنْكُمْ فَأَجْرُهُ عَلَى اللَّهِ وَمَنْ أَصَابَ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا فَعُوقِبَ فِي الدُّنْيَا فَهُوَ كَفَّارَةٌ لَهُ وَمَنْ أَصَابَ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا ثُمَّ سَتَرَهُ اللَّهُ فَهُوَ إِلَى اللَّهِ إِنْ شَاءَ عَفَا عَنْهُ وَإِنْ شَاءَ عَاقَبَهُ فَبَايَعْنَاهُ عَلَى ذَلِك
हमें बताया है [अबू अल यमन] ने कहा, हमें बताया है [स्यूऐब] से [अज़ ज़ुहरी] ने कहा, हमें बताया है [अबू इदरीस 'एदज़ुल्लाह बिन अब्दुल्लाह], कि ['उबादा बिन अश शमित] एक दोस्त था जिसने बद्र की लड़ाई में भाग लिया था और वह भी उन लोगों में से एक था जिन्होंने अकोबा की रात को शपथ ली थी, उन्होंने कहा; कि पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा जब वह अपने कुछ साथियों के साथ थे: "मेरे प्रति वफ़ादारी की कसम खाओ कि किसी चीज़ में अल्लाह का साझीदार न बनाओ, चोरी न करो, ज़िना न करो, अपने बच्चों को न मारो, अपने हाथों और पैरों के बीच झूठ न गढ़ो, किसी भी सही चीज़ की नाफ़रमानी न करो। तुम में से जो कोई भी इसे पूरा करता है, उसका इनाम अल्लाह के पास है और जो कोई इसे तोड़ता है तो अल्लाह उसे दुनिया में सज़ा देता है तो यह उसके लिए कफ़रात है, और जो कोई इन चीज़ों को तोड़ता है और फिर अल्लाह उन्हें ढक देता है (उसे दुनिया में सज़ा नहीं देता) तो उसके मामले अल्लाह के पास वापस आ जाते हैं, अगर वह चाहे तो उसे माफ़ कर देगा या उसे सज़ा दी जाएगी।" तो हमने इन चीज़ों के लिए उनसे वफ़ादारी की।
इमाम बुखारी : 18
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوشِكُ أَنْ يَكُونَ خَيْرَ مَالِ الْمُسْلِمِ غَنَمٌ يَتْبَعُ بِهَا شَعَفَ الْجِبَالِ وَمَوَاقِعَ الْقَطْرِ يَفِرُّ بِدِينِهِ مِنْ الْفِتَنِ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] ने [मलिक] से [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुर्रहमान बिन अबू शा'शाह] से [उनके पिता] से [अबू सईद अल खुदरी] से बताया है कि उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "यह लगभग हुआ (एक समय) कि एक मुसलमान का सबसे अच्छा खजाना वह बकरा था जिसे वह पहाड़ की चोटी पर और दूरदराज के स्थानों पर चराता था, वह इसे लेकर चला गया। उसका धर्म क्योंकि वह बदनामी से डरता था।
इमाम बुखारी : 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَمَرَهُمْ أَمَرَهُمْ مِنْ الْأَعْمَالِ بِمَا يُطِيقُونَ قَالُوا إِنَّا لَسْنَا كَهَيْئَتِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ قَدْ غَفَرَ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ فَيَغْضَبُ حَتَّى يُعْرَفَ الْغَضَبُ فِي وَجْهِهِ ثُمَّ يَقُولُ إِنَّ أَتْقَاكُمْ وَأَعْلَمَكُمْ بِاللَّهِ أَنَا
मुहम्मद बिन सलाम ने हमसे कहा, अब्दुल्लाह ने हिशाम से अपने पिता से आयशा से कहा: "जब रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों को आदेश दिया, तो उन्होंने उन्हें ऐसे काम करने का आदेश दिया जो वे करने में सक्षम थे, तो साथियों ने कहा: "हम आपके जैसे नहीं हैं, ऐ रसूलल्लाह, क्योंकि आपके पिछले और भविष्य के पाप क्षमा कर दिए गए हैं।" तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को गुस्सा आया जो उनके चेहरे से देखा जा सकता था, फिर कहा: "वास्तव में, तुममें से सबसे अधिक पवित्र और अल्लाह को सबसे अधिक समझने वाला मैं हूं।"
इमाम बुखारी : 20
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ وَجَدَ حَلَاوَةَ الْإِيمَانِ مَنْ كَانَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِمَّا سِوَاهُمَا وَمَنْ أَحَبَّ عَبْدًا لَا يُحِبُّهُ إِلَّا لِلَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَمَنْ يَكْرَهُ أَنْ يَعُودَ فِي الْكُفْرِ بَعْدَ إِذْ أَنْقَذَهُ اللَّهُ مِنْهُ كَمَا يَكْرَهُ أَنْ يُلْقَى فِي النَّارِ
यह हमें [सुलेमान बिन हर्ब] ने बताया है, यह हमें [स्यूबा] [कोतदा] से [अनस बिन मलिक] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया गया है, उन्होंने कहा: "तीन (चीजें) जो यदि किसी व्यक्ति के पास हैं, तो उसे विश्वास की मिठास मिलेगी: अल्लाह और उसका रसूल उन दोनों के अलावा अन्य के लिए उसके लिए अधिक प्रिय हैं। और जो कोई किसी से प्रेम करता है, वह उस व्यक्ति से अल्लाह 'अज़्ज़ा वजल्ला के कारण ही प्रेम करता है। और जो कोई इससे घृणा करता है वह अविश्वास में लौटता है जैसे वह नरक में फेंके जाने से घृणा करता है।