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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Hujan turun karunia dan rahmat-nya, iman kepada-ku dan kafir ke bintang

Imam Bukhari : 980

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ الْجُهَنِيِّ أَنَّهُ قَالَصَلَّى لَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةَ الصُّبْحِ بِالْحُدَيْبِيَةِ عَلَى إِثْرِ سَمَاءٍ كَانَتْ مِنْ اللَّيْلَةِ فَلَمَّا انْصَرَفَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْبَلَ عَلَى النَّاسِ فَقَالَ هَلْ تَدْرُونَ مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ أَصْبَحَ مِنْ عِبَادِي مُؤْمِنٌ بِي وَكَافِرٌ فَأَمَّا مَنْ قَالَ مُطِرْنَا بِفَضْلِ اللَّهِ وَرَحْمَتِهِ فَذَلِكَ مُؤْمِنٌ بِي كَافِرٌ بِالْكَوْكَبِ وَأَمَّا مَنْ قَالَ بِنَوْءِ كَذَا وَكَذَا فَذَلِكَ كَافِرٌ بِي مُؤْمِنٌ بِالْكَوْكَبِ

हमका बतावा गा है [इस्माइल] ने हमका [मलिक] से [सालीह बिन कैसान] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [जैद बिन खालिद अल जुहैनी] से कहा है कि उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम हमका एक रात हुदैयह मा फजर नमाज मा ले गइन। प्रार्थना के बाद उ आपन मुँह भीड़ के ओर घुमाइस अऊर कहिस: 'का तुम जानत हौ कि तोहार रब्ब का कहिन है?' लोग जवाब दिहिन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। तब उन्होंने कहा: 'अल्लाह ने कहा: 'आज सुबह मेरे सेवक हैं जो मुझ पर विश्वास कर रहे हैं और कुछ लोग भी हैं जो काफिर हैं। जे मनई कहत है कि 'अल्लाह के कृपा अऊर ओकरे रहम से हमरे ऊपर बरसात होत है', तौ ऊ मोरे ऊपर आस्तिक अऊर तारा के काफिर है। रही बात उन लोगन के, जे कहत हैं कि 'फलाने तारा के कारण बरसात होत है', तौ उ मोरे ऊपर अविश्वास किहिन हैं अऊर तारान पर विश्वास किहिन हैं''।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 8384, 8455, 9085, 16434, 16444
Imam Bukhari : 800, 801, 980, 3832, 6949
Imam Muslim : 104, 105, 106, 107
Imam Abu Dawud : 3407
Imam Nasa'i : 1507, 1508
Imam Malik : 405