इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Tata cara shalat khauf

Imam Bukhari : 890

حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ سَأَلْتُهُ هَلْ صَلَّى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْنِي صَلَاةَ الْخَوْفِ قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمٌ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَغَزَوْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِبَلَ نَجْدٍ فَوَازَيْنَا الْعَدُوَّ فَصَافَفْنَا لَهُمْ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي لَنَا فَقَامَتْ طَائِفَةٌ مَعَهُ تُصَلِّي وَأَقْبَلَتْ طَائِفَةٌ عَلَى الْعَدُوِّ وَرَكَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِمَنْ مَعَهُ وَسَجَدَ سَجْدَتَيْنِ ثُمَّ انْصَرَفُوا مَكَانَ الطَّائِفَةِ الَّتِي لَمْ تُصَلِّ فَجَاءُوا فَرَكَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِهِمْ رَكْعَةً وَسَجَدَ سَجْدَتَيْنِ ثُمَّ سَلَّمَ فَقَامَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمْ فَرَكَعَ لِنَفْسِهِ رَكْعَةً وَسَجَدَ سَجْدَتَيْنِ

हमसे कहिन है [अबू अल यमन] कहिन, हमसे कहिन है [स्युएब] से [अज जुहरी] कहिन, हम उनसे पूछेन, 'का पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खौफ नमाज पढ़िन?' उ कहिन; [सलीम] ने मोका सूचित किहिन है कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] रदलियाहु अन्हुमा कहिन, 'मैं एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे नाजेद के दिशा मा एक लड़ाई मा भाग लिहे रहेन, हम दुश्मनन का सामना किहिन अऊर ओनके लिए एक लाइन बनाइन। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब हमका नेतृत्व करै के लिए खड़ा भए। उनके साथ लोगन के एक समूह प्रार्थना करत रहा जबकि दूसर समूह दुश्मन का सामना करत रहा। पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब अपने साथ समूह के साथे दुइ बार प्रणाम किहिन अऊर सजदा किहिन, फिर उ - समूह जे नमाज पढ़े रहे - उ समूह के स्थिति पर कब्जा करै के लिए शिफ्ट होइ गए जे नमाज नाहीं पढ़े रहे। फिर उ समूह जे अबहीं तक नमाज नाहीं पढ़े रहे, आवा अऊर पंक्ति मा घुस गवा, रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम फिर नये समूह के साथे प्रणाम किहिन अऊर दुइ बार सजदा किहिन, फिर उ ओनका नमस्कार किहिन। तौ हमरे हर समूह ने अपनी-अपनी नमाज दुइ बार प्रणाम अऊर सजदा कइके खतम किहिन'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 3192, 3380, 5884, 6066, 6143, 13664, 13914, 14488, 14657, 19593, 20610, 22055, 22181, 22336
Imam Bukhari : 890, 891, 892, 3818, 3819, 3820, 3822
Imam Muslim : 1385, 1386, 1387, 1388, 1389, 1392
Imam Abu Dawud : 1048, 1053, 1054
Imam Tirmidzi : 517
Imam Nasa'i : 827, 1512, 1515, 1518, 1520, 1523, 1524, 1527, 1537