Imam Bukhari : 787
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا بَكْرٌ عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَالِكٍ ابْنِ بُحَيْنَةَ قَالَصَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الظُّهْرَ فَقَامَ وَعَلَيْهِ جُلُوسٌ فَلَمَّا كَانَ فِي آخِرِ صَلَاتِهِ سَجَدَ سَجْدَتَيْنِ وَهُوَ جَالِسٌ
हमका बतावा गा है [कुतैबा बिन सैद] कहिन, हमका बतावा गा है [बकर] से [जाफर बिन रबिया] से [अल अरज] से [अब्दुल्लाह बिन मलिक इब्नू बुहैना] कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार हमरे साथ ज़ुहर नमाज पढ़िन, फिर जब उनका बैठै का चाही तब खड़ा होइ गें। फिर अपनी प्रार्थना के अंत मा, उ बैठे के स्थिति मा दुइ बार सजदा किहिन।