Rasulullah apabila bertakbir maka beliau mengangkat tangannya sejajar dengan pundaknya
Imam Bukhari : 785
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ خَالِدٍ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَلْحَلَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ وَحَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ وَيَزِيدَ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَلْحَلَةَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عَطَاءٍ أَنَّهُ كَانَ جَالِسًا مَعَ نَفَرٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرْنَا صَلَاةَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَبُو حُمَيْدٍ السَّاعِدِيُّأَنَا كُنْتُ أَحْفَظَكُمْ لِصَلَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَيْتُهُ إِذَا كَبَّرَ جَعَلَ يَدَيْهِ حِذَاءَ مَنْكِبَيْهِ وَإِذَا رَكَعَ أَمْكَنَ يَدَيْهِ مِنْ رُكْبَتَيْهِ ثُمَّ هَصَرَ ظَهْرَهُ فَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ اسْتَوَى حَتَّى يَعُودَ كُلُّ فَقَارٍ مَكَانَهُ فَإِذَا سَجَدَ وَضَعَ يَدَيْهِ غَيْرَ مُفْتَرِشٍ وَلَا قَابِضِهِمَا وَاسْتَقْبَلَ بِأَطْرَافِ أَصَابِعِ رِجْلَيْهِ الْقِبْلَةَ فَإِذَا جَلَسَ فِي الرَّكْعَتَيْنِ جَلَسَ عَلَى رِجْلِهِ الْيُسْرَى وَنَصَبَ الْيُمْنَى وَإِذَا جَلَسَ فِي الرَّكْعَةِ الْآخِرَةِ قَدَّمَ رِجْلَهُ الْيُسْرَى وَنَصَبَ الْأُخْرَى وَقَعَدَ عَلَى مَقْعَدَتِهِوَسَمِعَ اللَّيْثُ يَزِيدَ بْنَ أَبِي حَبِيبٍ وَيَزِيدُ مِنْ مُحَمَّدِ بْنِ حَلْحَلَةَ وَابْنُ حَلْحَلَةَ مِنْ ابْنِ عَطَاءٍ قَالَ أَبُو صَالِحٍ عَنْ اللَّيْثِ كُلُّ فَقَارٍ وَقَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَيُّوبَ قَالَ حَدَّثَنِي يَزِيدُ بْنُ أَبِي حَبِيبٍ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ عَمْرٍو حَدَّثَهُ كُلُّ فَقَارٍ
हमसे [यह्या बिन बुकैर] कहिन, हमका [अल लैट्स] से [खालिद] से [सैद] से [मुहम्मद बिन अमरू बिन हल्हल्ला] से [मुहम्मद बिन अमरू बिन अथा] से कहिन हैं, अऊर हमका [अल लैट्स] [यजीद बिन अबू हबीब] से अऊर [यजीद बिन मुहम्मद] [अमहम बिन बिन हल्लाह] से [मुहम्मद बिन हल्लाह] से कहिन हैं। अमरू बिन अथा], कि उ पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कईयो दोस्तन का एक साथ बैठा, उइ पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रार्थना के बारे मा कहानी सुनाइन। त [अबू हामिद अस सैदी] कहिन, 'मैं उ व्यक्ति हउँ जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नमाज का सबसे अच्छा जानत हउँ, जब मैं नमाज पढ़त हउँ तौ मैं ओनके कंधा के समानांतर हाथ उठा के तकबीर करत देखत हउँ, जब उ झुकत हउँ तौ उ आपन हाथ आपन घुटनन पर रखत हउँ अऊर आपन पीठ सीधा करत हउँ। अगर ऊ आपन माथा उठावत है, तौ ऊ तब तक सीधा खड़ा रहत है जब तक कि ओकर पूरा रीढ़ अपनी मूल स्थिति मा वापस न आ जाय। अऊर जब उ सजदा करत है, तौ उ आपन हाथन का बिना आपन बांह का जमीन या आपन शरीर से छुए रखत है, अऊर सजदा के स्थिति मा उ आपन पैर के उंगली किबला के ओर इंगित करत है। दूसर रकात मा बैठत समय बाईं गोड़ पर बैठत है अऊर आपन दाहिना गोड़ सीधा करत है। अऊर अगर उ आखिरी रकात मा बैठत है, तौ उ आपन बायाँ गोड़ आपन दाहिना गोड़ के नीचे टकावत है अऊर आपन दाहिना गोड़ सीधा करत है अऊर आपन सीट पर बैठ जात है। अऊर [अल लैट्स] ने [यजीद बिन अबू हबीब] से सुना रहा, अऊर यजीद [मुहम्मद बिन हल्लाह] से, अऊर इब्न हल्लाह [इब्न अथा] से। [अबू शालिह] [अल लैट्स] से कहिन, 'पूरी रीढ़'। [इब्न अल मुबारक] ने कहा कि [यह्या बिन अय्यूब] से उ कहिन, उ मोसे [यजीद बिन अबू हबीब] से कहिन कि [मुहम्मद बिन अमरू] ने उनसे कहिन, 'पूरी रीढ़'।