Doa sujud - 2: SUBHAANAKA ALLAHUMMA RABBANAA WA BIHAMDIKA ALLAHUMMAGHFIRLII
Imam Bukhari : 775
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنِي مَنْصُورُ بْنُ الْمُعْتَمِرِ عَنْ مُسْلِمٍ هُوَ ابْنُ صُبَيْحٍ أَبِي الضُّحَى عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّهَا قَالَتْكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُكْثِرُ أَنْ يَقُولَ فِي رُكُوعِهِ وَسُجُودِهِ سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا وَبِحَمْدِكَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي يَتَأَوَّلُ الْقُرْآنَ
हमसे कहिन [मुसद्दाद] कहिन, हमसे कहिन [यह्या] से [सुफयान] कहिन, हमसे कहिन [मंसूर बिन अल मुतमीर] से [मुस्लिम] - अर्थात् इब्न शुबैह अबू अदल दुल्हा- से [मसरूक] से [ऐस्याह] कहिन, 'जब नबी सल्लाह का प्रणाम अऊर सजदा करत हैं तौ वल्लाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाह के पुनरुत्थान बढ़ जात है। प्रार्थना: 'सुभानाकल्लाहुम्मा रब्बाना वा बिहमदीका अल्लाहुम्मघफिरली - महिमा तोहरे बरे, हे हमरे प्रभु, तोहार स्तुति हो, हे अल्लाह, मोका माफ करौ-', कुरान के आज्ञा के कार्यान्वयन के रूप मा'।