Nabi berkhutbah di Mina setelah Idul Adha, menasihati umat agar berpegang pada Al-Qur’an dan sunnah
Imam Bukhari : 65
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرٌ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عَوْنٍ عَنْ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ عَنْ أَبِيهِذَكَرَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَعَدَ عَلَى بَعِيرِهِ وَأَمْسَكَ إِنْسَانٌ بِخِطَامِهِ أَوْ بِزِمَامِهِ قَالَ أَيُّ يَوْمٍ هَذَا فَسَكَتْنَا حَتَّى ظَنَنَّا أَنَّهُ سَيُسَمِّيهِ سِوَى اسْمِهِ قَالَ أَلَيْسَ يَوْمَ النَّحْرِ قُلْنَا بَلَى قَالَ فَأَيُّ شَهْرٍ هَذَا فَسَكَتْنَا حَتَّى ظَنَنَّا أَنَّهُ سَيُسَمِّيهِ بِغَيْرِ اسْمِهِ فَقَالَ أَلَيْسَ بِذِي الْحِجَّةِ قُلْنَا بَلَى قَالَ فَإِنَّ دِمَاءَكُمْ وَأَمْوَالَكُمْ وَأَعْرَاضَكُمْ بَيْنَكُمْ حَرَامٌ كَحُرْمَةِ يَوْمِكُمْ هَذَا فِي شَهْرِكُمْ هَذَا فِي بَلَدِكُمْ هَذَا لِيُبَلِّغ الشَّاهِدُ الْغَائِبَ فَإِنَّ الشَّاهِدَ عَسَى أَنْ يُبَلِّغَ مَنْ هُوَ أَوْعَى لَهُ مِنْهُ
हमसे कहिस है [मुसद्दाद] कहिस, हमसे कहिस है [बिसीर] कहिस, हमसे कहिस है [इब्न 'औन] से [इब्न सिरिन] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू बकरा] से [अपने पिता] से, उ कहिस, कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अपने ऊँट पर बैठे रहे जबकि लोग ऊंट के बागडोर पकड़े रहे। हे शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कौन सा दिन है? '. हम सब चुप रहेन अऊर सोचेन कि उ दिन के नाम के अलावा कुछ अउर नाम रखिहैं जवन पहिले से ज्ञात रहा। हे सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'क्या आज नाहर दिन नहीं है?' हम जवाब दिहेन: 'ठीक है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर पूछा : 'यह कौन सा महीना है ? '. हम सब चुप रहेन अऊर सोचेन कि उ महीना के नाम के अलावा कुछ अउर नाम रखिहैं जवन पहिले से ज्ञात रहा। हे शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'क्या यह धूल हिज्जा का महीना नहीं है?' हम जवाब दिहेन: 'ठीक है'। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में, तोहार खून, तोहार धन अऊर तोहार पड़ोसियन के इज्जत हराम - शुद्ध - जइसे कि तोहार दिन, तोहार महीना अऊर तोहार धरती पवित्र है। -तो- जे उपस्थित हैं, उ लोग ओन लोगन तक पहुँचावैं जे उपस्थित नाहीं हैं, काहे से कि जे लोग मौजूद हैं, उ उम्मीद है कि ओनसे अच्छा समझै वाले लोगन तक पहुँचावै में सक्षम होइहैं'।